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“Dhanteras 2025: धनतेरस पर सोना खरीदना रहेगा फायदमेंद, जारी रहेगी तेजी! एक्सपर्ट को बड़ी उम्मीद”

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Dhanteras 2025: सोना इस समय सातवें आसमान पर है। धनतेरस से एक दिन 17 अक्टूबर, दिन शुक्रवार को 24 कैरेट गोल्ड 13277 रुपये प्रति ग्राम के लेवल पर था। वहीं, 22 कैरेट गोल्ड 12170 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। 18 कैरेट गोल्ड 9958 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। आसमान छू रहीं गोल्ड की कीमतों में इस समय क्या दांव लगाना सही रहेगा? क्या इस धनतेरस पर सोना खरीदना फायदा देगा? आइए जानते हैं.

158% चढ़ा सोने का भाव

पिछली दिवाली से अबतक सोने की कीमतों में तूफानी तेजी देखने को मिली है। अकेले इस साल सोने का भाव 39 बार अपने आल-टाइम हाई पर पहुंचने में सफल रहा है। 1 नवंबर 2022 को गोल्ड का दाम 50,441 रुपये प्रति 10 ग्राम था। जोकि 17 अक्टूबर 2025 को 1,30,233 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यानी इस दौरान सोने का भाव 158 प्रतिशत बढ़ा है।

क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार मार्केट से जुड़े एक्सपर्ट आलोक जैन कहते हैं कि शुक्रवार को गोल्ड 4380 रुपये प्रति आउंस था। जबकि एक हफ्ते पहले यह 4000 डॉलर के नीचे ट्रेड कर रहा था। जिस तेजी के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है वो अच्छा तो है लेकिन चिंताजनक भी है। कोई भी एसेट जब इस तेजी के साथ आगे बढ़ता है को वह वित्तीय व्यवस्था में काफी गहरे दलदल के भी संकेत देता है।

तेजी की उम्मीद बरकरार

भले ही हाल के समय गोल्ड की कीमतों में बड़ी तेजी आई है। लेकिन फेस्टिव सीजन के बाद शादियों के सीजन के शुरू होने की वजह से घरेलू बाजार में गोल्ड डिमांड में रहेगा। वहीं, सेंट्रल बैंक भी गोल्ड पर जमकर दांव लगा रहे हैं। ऐसे में सोने का भाव आगे भी बढ़ता दिखाई दे सकता है।

बीते दो महीने में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी

महज दो महीने में ही सोने का भाव 1 लाख रुपये से बढ़कर 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भा 110 रुपये से 180 रुपये प्रति ग्राम हो गया है।

“आज धनतेरस पर सोना-चांदी, वाहन व अन्य सामान किस समय खरीदना शुभ? जानें क्या है पूजन का मुहूर्त”

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18 October 2025 Today: धनतेरस या धनत्रयोदशी का त्योहार आज 18 अक्टूबर 2025, शनिवार को है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।

धनतेरस का त्योहार आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि, धन की देवी मां लक्ष्मी और धन देवता भगवान कुबेर को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई चीजों को खरीदना शुभ होता है, मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि व खुशहाली आती है। यूं तो धनतेरस के पूरे दिन खरीदारी की जा सकती है, लेकिन कहा जाता है कि शुभ मुहूर्त में की जाने वाली खरीदारी का अक्षय फल मिलता है। जानें आज धनतेरस के शुभ मुहूर्त।

धनतेरस पूजा का मुहूर्त 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर 2025, को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होगी और 19 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 16 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि 01 घंटा 04 मिनट की है।

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का शुभ मुहूर्त 2025: धनतेरस पर खरीदारी के लिए प्रदोष काल व वृषभ काल का समय अति उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस समय सोना-चांदी की खरीदारी करने से धन-संपदा में वृद्धि होती है। धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 05:48 बजे से रात 08:20 बजे तक रहेगा, जबकि वृषभ काल शाम 07:16 बजे से रात 09:11 बजे तक रहेगा।

धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त 2025: धनतेरस पर अभिजित मुहूर्त के साथ अमृत काल व विजय मुहूर्त भी मिल रहे हैं। आप इन मुहूर्त में सोना-चांदी, वाहन समेत अन्य चीजों की खरीदारी भी कर सकते हैं।

यहां धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त-अमृत काल- 08:50 ए एम से 10:33 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:43 ए एम से 12:29 पी एम विजय मुहूर्त- 02:00 पी एम से 02:46 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 05:48 पी एम से 06:14 पी एम सायाह्न सन्ध्या 05:48 पी एम से 07:04 पी एम

धनतेरस पर सिटीवाइज देखें खरीदारी के मुहूर्त 2025:

07:46 पी एम से 08:38 पी एम – पुणे

07:16 पी एम से 08:20 पी एम – नई दिल्ली

07:28 पी एम से 08:15 पी एम – चेन्नई

07:24 पी एम से 08:26 पी एम – जयपुर

07:29 पी एम से 08:20 पी एम – हैदराबाद

07:17 पी एम से 08:20 पी एम – गुरुग्राम

07:14 पी एम से 08:20 पी एम – चंडीगढ़

06:41 पी एम से 07:38 पी एम – कोलकाता

07:49 पी एम से 08:41 पी एम – मुंबई

07:39 पी एम से 08:25 पी एम – बेंगलूरु

07:44 पी एम से 08:41 पी एम – अहमदाबाद

07:15 पी एम से 08:19 पी एम – नोएडा

Quad पर डोनाल्‍ड ट्रंप को भारत का जवाब, समंदर में नहीं चलेगी चीन की मनमानी, ऑस्‍ट्रेलिया के साथ 3 डिफेंस डील

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों ऑस्‍ट्रेलिया के दौरे पर हैं, जहां तीन बड़े रक्षा समझौते किए गए हैं. भारत ने क्‍वाड (Quad) पर कैनबरा से अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को करारा जवाब दिया है. ट्रंप ने क्‍वाड में अमेरिकी भागीदारी पर उदासीनता को कई बार स्‍पष्‍ट रूप से जताया है. वहीं, भारत क्‍वाड के अन्‍य सदस्‍य देशों (ऑस्‍ट्रेलिया और जापान) के साथ ही इस जोन के अन्‍य महत्‍वपूर्ण देशों (जैसे दक्षिण कोरिया) के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई दे रहा है. बता दें कि हिन्‍द-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामक गत‍िविधियों पर लगाम लगाने के लिए Quad का गठन किया गया था. इसमें भारत के साथ ही अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया और जापान शामिल हैं. ट्रंड की नीतियों के चलते इसपर ग्रहण सा लगता दिख रहा था, जिसे भारत अब कूटनीतिक ईंधन देकर उसे एक सशक्‍त फोरम बनाने में जुटा है.
अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन की Indo-Pacific नीति और Quad के प्रति घटती रुचि के बीच भारत और ऑस्‍ट्रेलिया ने गुरुवार को अपने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में तीन महत्‍वपूर्ण समझौते किए. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके ऑस्‍ट्रेलियाई समकक्ष रिचर्ड मार्ल्‍स के बीच कैनबरा में हुई प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान, पनडुब्‍बी खोज एवं बचाव सहयोग, और ज्‍वाइंट स्‍टाफ डायलॉग मेकेनिज्‍म की स्‍थापना से जुड़े तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा दोनों देशों ने एक संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप तैयार करने और दीर्घकालिक रक्षा एवं सुरक्षा ढांचा समझौता पर भी जल्‍द हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई. यह नया ढांचा वर्ष 2009 में हुए साझा सुरक्षा घोषणा पत्र की जगह लेगा.UYJHMN

राजनाथ सिंह की यह यात्रा 2014 में NDA सरकार के सत्ता में आने के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली ऑस्‍ट्रेलिया यात्रा है. यह ऐसे समय में हुई है, जब भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और नीति असंतुलन के बीच जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे क्षेत्रीय साझेदारों के साथ अपने रक्षा संबंधों को सशक्‍त कर रहा है. मार्ल्‍स ने पहले कहा था कि चीन भारत और ऑस्‍ट्रेलिया दोनों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा है. बैठक में दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि Indo-Pacific क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले, स्थिर और समृद्ध माहौल को बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना जरूरी है. दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही, उड़ान और निर्बाध व्यापार के महत्व को भी दोहराया.
भारत-जापान के हालिया सुरक्षा सहयोग समझौते के बाद यह बैठक Quad देशों (भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, अमेरिका और जापान) के बीच बढ़ते रक्षा तालमेल की दिशा में एक और अहम कदम मानी जा रही है. आने वाले महीने में होने वाले मालाबार नौसैनिक अभ्यास से पहले दोनों देशों ने समुद्री निगरानी और डोमेन अवेयरनेस पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई. राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हमने भारत-ऑस्‍ट्रेलिया के रक्षा उद्योग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की. हमने अपने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की महत्ता को दोहराया.’ उन्‍होंने आतंकवाद पर भारत की सख्‍त नीति दोहराते हुए कहा, ‘आतंक और वार्ता साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्‍यापार साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते.’ राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की.

विदेश में काम करना आसान होगा, फंसने का चांस होगा खत्‍म, मोदी सरकार बदलने जा रही 1983 का कानून

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विदेश में काम करने वाले भारतीयों के लिए खुशखबरी है. मोदी सरकार 1983 के इमिग्रेशन एक्ट को बदलने की तैयारी कर रही है और जल्द ही संसद में ओवरसीज मोबिलिटी (सुविधा और कल्याण) बिल, 2025 पेश किया जाएगा. यह बिल पुराने कानून की जगह लेगा और भारतीय प्रवासियों के लिए काम करने और विदेश में रहने के नियमों को आसान, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाएगा. विदेश मंत्रालय ने इसका पूरा ड्राफ्ट तैयार कर ल‍िया है, संसद के अगले सत्र में इसे पेश करने की तैयारी है.
देश-विदेश में कई बार यह देखा गया है कि कुछ लोग भारतीयों को गलत तरीके से विदेश ले जाते हैं या धोखा देकर नौकरी दिलाने का झांसा देते हैं. कई देशों में ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जहां लोग फंसे, परेशान हुए या उनके साथ अन्याय हुआ. यही वजह है कि नया बिल पूरी तरह भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण पर केंद्रित होगा. अब विदेश में काम करने के दौरान फंसने का डर खत्म हो जाएगा और भारतीय नागरिकों के हित सुरक्षित रहेंगे.
बिल की खासियतें

1. ओवरसीज मोबिलिटी एंड वेलफेयर काउंसिल
बिल के तहत एक ओवरसीज मोबिलिटी एंड वेलफेयर काउंसिल (Overseas Mobility and Welfare Council) बनाई जाएगी. इसका काम होगा विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय करना. यानी विदेश में काम करने वाले भारतीयों के हितों और कल्याण की योजनाएं एक साथ मिलकर बनाई जाएंगी. काउंसिल यह भी सुनिश्चित करेगी कि किसी प्रवासी के साथ धोखा या शोषण न हो.

2. अवसर और सुरक्षा का संतुलन
विदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ कमजोर वर्गों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा. अब कोई भी भारतीय जोखिम में नहीं रहेगा. रोजगार के अवसर मिलेंगे, लेकिन सुरक्षा और कल्याण को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. यह बिल इसलिए खास है क्योंकि यह सुरक्षा और अवसर के बीच संतुलन बनाने वाला पहला कानून है.
3. अंतरराष्ट्रीय समझौतों की निगरानी
बिल में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन और निगरानी का प्रावधान भी है. इसका मतलब है कि प्रवासन और गतिशीलता से जुड़े नियमों और समझौतों के अनुरूप भारत का संचालन सुनिश्चित होगा. विदेशों में काम करने वाले भारतीयों के हितों की रक्षा अब सिर्फ देश के अंदर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होगी.
4. डेटा आधारित नीति निर्माण
अब नीतियां अनुमान या अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि डेटा और श्रम अध्ययन के आधार पर बनाई जाएंगी. विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय के जरिए नीति निर्माण होगा, ताकि विदेश में काम करने वाले भारतीयों के लिए हर निर्णय मजबूत और व्यावहारिक हो.
क्या बदल जाएगा
बिल लागू होने के बाद भारतीय प्रवासियों के लिए विदेश में काम करना आसान और सुरक्षित हो जाएगा. अब नौकरी के लिए विदेश जाने वाले नागरिकों को फंसने या धोखे में पड़ने का डर नहीं रहेगा. बिल में यह भी प्रावधान है कि कमजोर वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े प्रवासी भी सुरक्षित रहेंगे और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बिल के आने से भारतीय नागरिकों के लिए कंप्रहेंस‍िव इमीग्रेशन मैनेजमेंट सिस्‍टम स्थापित होगा. इसके जरिए विदेश में रोजगार अवसर बढ़ेंगे, लेकिन किसी भी प्रकार के शोषण या धोखे की गुंजाइश नहीं रहेगी. यह कदम उन भारतीयों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो पहली बार विदेश जा रहे हैं और जिन्हें पूरी जानकारी और सुरक्षा की आवश्यकता है.
जनता से मांगी राय
विदेश मंत्रालय ने बिल का मसौदा अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है और जनता से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं. 7 नवंबर 2025 तक सभी भारतीय अपने विचार साझा कर सकते हैं. इसका मकसद यह है कि बिल को और अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और प्रवासियों के लिए सहायक बनाया जा सके. मंत्रालय का कहना है कि यह कदम भारत के नागरिकों के लिए सुरक्षा, अवसर और कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक अहम प्रयास है. विदेश में नौकरी तलाशना अब सिर्फ अवसर नहीं रहेगा, बल्कि एक सुरक्षित और संरक्षित प्रक्रिया होगी.

टाटा संस के डायरेक्‍टर का खुलासा! ग्रुप में पहली बार दिख रही ऐसी गुटबाजी, ध्‍वस्‍त हो गए रतन टाटा के बनाए नियम

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टाटा समूह का विवाद पिछले कुछ समय से खुलकर सामने आ गया है. अब टाटा संस के नामांकित निदेशक और टाटा ट्रस्‍ट के ट्रस्‍टी व उपाध्‍यक्ष और रतन टाटा के करीबी रहे विजय सिंह ने अंदरखाने चल रहे विरोध को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्‍होंने कहा है कि समूह के भीतर पहली बार ऐसी गुटबाजी दिख रही है और लोगों ने दिवंगत रतन टाटा के बनाए नियमों को पूरी तरह ध्‍वस्‍त कर दिया है. हालात यहां तक बिगड़ गए थे कि 157 साल के इतिहास में पहली बार केंद्र सरकार को भी इसमें दखल करना पड़ा.
विजय सिंह ने कहा कि टाटा संस में उनकी पुनर्नियुक्ति के खिलाफ हुआ मतदान वेटरन कारोबारी रतन टाटा के नियमों के खिलाफ था. र‍तन टाटा हमेशा से फैसलों को सर्वसम्‍मति और एकमतता पर लागू करने पर जोर देते थे. लेकिन, विजय सिंह की नियुक्ति पर वोटिंग की गई. इससे टाटा समूह के शीर्ष अधिकारियों के बीच 2 धड़े बन गए. इस तरह की गुटबाजी पहली बार देखी जा रही है, जो दिवंगत रतन टाटा के बनाए नियमों को ध्‍वस्‍त कर रहा है. उन्‍होंने कहा कि इस मामले में रतन टाटा बिलकुल अडिग थे और हमेशा से एकमत होकर फैसलों पर निर्भर करते थे, लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब हम अलग ही युग में रह रहे हैं.

किसने बनाए बदतर हालात
विजय सिंह ने कहा कि टाटा समूह के भीतर हाल में हुए मतदान की वजह से 180 अरब डॉलर के टाटा समहू में दो गुट बन गए. टाटा ट्रस्‍ट के 4 ट्रस्टियों ने साथ मिलकर विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया था. इस विरोध की अगुवाई एसपी समहू के मेहली मिस्‍त्री ने की थी और उनके साथ 3 और शीर्ष अधिकारी थे. टाटा ट्रस्‍ट के पास टाटा संस की 66 फीसदी हिस्‍सेदारी है. जाहिर है कि इसमें शामिल होने वाले ट्रस्टियों के पास कंपनी की असली ताकत होती है.

मतदान से गैरहाजिर रहे विजय सिंह
विजय सिंह ने बताया कि जिस दिन उनकी पुनर्नियुक्ति पर मतदान हुआ, वह नहीं थे. लिहाजा किसी के पक्ष या विपक्ष में मतदान का सवाल ही नहीं है. हालांकि, इस दौरान चार ट्रस्टियों ने टाटा संस बोर्ड में मेरी नियुक्ति का खुलकर विरोध किया था. हालांकि, विरोध करने वालों ने इसका कारण नहीं बताया है. गौरतलब है कि साल 1970 बैच के आईएएस और पूर्व रक्षा सचिव सिंह ने 2018 में रतन टाटा के निमंत्रण पर टाटा ट्रस्‍ट को ज्‍वाइन किया था. बाद में उन्‍हें टाटा संस में भी शामिल कर लिया गया. कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी भी उन्हें निदेशक के रूप में दर्ज किया गया है, जबकि उन्‍होंने मेहली मिस्‍त्री के विरोध के बाद पद से इस्‍तीफा दे दिया था.

क्‍यों हो रहा विजय का विरोध
रतन टाटा ने विजय सिंह को पहली बार साल 2013 में टाटा संस के बोर्ड में नियुक्‍त किया था, लेकिन 70 साल की उम्र पूरी होने के बाद साल 2018 में उन्‍हें सेवानिवृत कर दिया गया. रतन टाटा ने बाद में नियमों में बदलाव कर साल 2022 में उन्‍हें दोबारा बोर्ड में शामिल कर लिया. बस इसी बात का विरोध मेहली मिस्‍त्री एंड कंपनी कर रही है. उनके साथ सिटी बैंक के पूर्व सीईओ प्रमित झावेरी, जहांगीर अस्‍पताल के अध्‍यक्ष जहांगिर एचसी जहांगिर और सीनियर वकील डेरियस खंबाटा भी शामिल हैं. दूसरी ओर, नोएटा टाटा, टीवीएस समूह के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने विजय सिंह की नियुक्ति का समर्थन किया है. इतना ही नहीं टाटा संस के बोर्ड में खाली पड़े तीन और पदों पर भी नोएल टाटा के सुझाए नामों का मेहली सहित अन्य लोग विरोध कर रहे हैं.

कश्‍मीर ही नहीं पंजाब भी निशाने पर, पाकिस्‍तान ने बदला आतंक वाला पार्टनर, क्या है नया प्लान? BSF का बड़ा खुलासा

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पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की आग को भड़काने के लिए पाकिस्तान ने अपना एक नया टेररिस्ट पार्टनर खोज लिया है. पंजाब में खालिस्‍तानी आतंकियों के मंसूबों को आगे बढ़ाने और जम्मू-कश्मीर में दहशतगर्दी फैलाने के लिए पाकिस्तान का नया टेररिस्ट पार्टनर अब खुलकर हथियारों की सप्‍लाई भी करने लगा है. बॉर्डर सिक्‍योरिटी फोर्स (Border Security Force) ने हाल ही में एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसके बाद तुर्की और पाकिस्तान की मिलीभगत खुलकर सामने आ गई है.
जी हां, पाकिस्‍तान का यह नया टेरेरिस्‍ट पार्टनर, कोई और नहीं, बल्कि तुर्की ही है. आप को याद होगा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तुर्की ने पाकिस्‍तान का खुलकर समर्थन करते हुए हथियारों की सप्‍लाई की थी. हाल का मामला भारत-पाकिस्‍तान इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे पंजाब के अमृतसर और तरनतारन बॉर्डर से जुड़ा हुआ है, जहां बीएसएफ की सतर्कता ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर पानी फिर गया है. बीएसएफ ने तुर्की में बने हथियारों की एक खेप को पकड़ा है, जिसे ड्रोन के जरिए पाकिस्‍तान की तरफ से अमृतसर और तरनतारन बार्डर पर गिराया गया था.
बीएसएफ के सीनियर ऑफिसर ने बताया कि अमृतसर के पास नेस्ता गांव में संदिग्ध ड्रोन मूवमेंट की खबर मिलने के बाद बीएसएफ की क्विक एक्‍शन टीम और पेट्रोलिंग पार्टी एक्शन में आ गई थीं. तलाशी के दौरान मौके से दो पिस्टल, चार मैगजीन और एक बाइक बरामद की गई. इसके अलावा, तरनतारन के नौशेरा धल्ला गांव के पास एक प्लास्टिक की बोतल में छिपाकर रखे गए पिस्टल के पार्ट्स भी बरामद किए गए. इतना ही नहीं, तरनतारन के राजोके गांव के पास बीएसएफ ने 75 राउंड 9mm कैलिबर की गोलियां बरामद की है.

बॉर्डर से बरामद हुआ हथियारों का बड़ा जखीरा
उन्‍होंने बताया कि अमृतसर के नेस्ता गांव से बरामद की गईं स्‍टल और मैगजीन तुर्की में बने हुए हथियार हैं, जबकि तरनतारन के राजोके गांव के पास से बरामद की गई 75 राउंड 9mm कैलिबर की गोलियों पर पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की मुहर लगी हुई थी. आपको बता दें कि पाकिस्तान अब अपनी आतंकी साजिशों को अंजाम देने के लिए चीनी हथियारों की जगह टर्की के हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है. पहले जहां AK-47 और दूसरे चीनी हथियार पंजाब और जम्मू-कश्मीर में तस्करी के जरिए पहुंच रहे थे, अब तुर्की में बने ड्रोन और हथियारों का इस्तेमाल बढ़ गया है.

तुर्की, पाक और खालिस्तानी आतंकियों का गठजोड़
कश्‍मीर में एंटी टेररिस्‍ट ऑपरेशन से जुड़ी एजेंसीज का यह भी कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद टर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ देना शुरू कर दिया है. तुर्की अब पाकिस्‍तान को न सिर्फ हथियारों की सप्लाई कर रहा है, बल्कि खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकियों को ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी दे रहा है. वहीं, पाकिस्तान की आईएसआई लंबे समय से खालिस्तानी आतंकियों को सपोर्ट कर रही है. पंजाब में खालिस्तानी मूवमेंट को हवा देने के लिए ड्रोन के जरिए हथियार, ड्रग्स और पैसे की सप्लाई हो रही है.

पीरियड में काम का स्ट्रेस खत्म! सरकार ने दिया महिलाओं को तोहफा, साल में मिलेंगी 12 Paid Period Leave

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महिलाओं के लिए बेहद राहत की खबर सामने आई है. कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह पॉलिसी मंज़ूर की गई कि अब राज्य की सभी महिला कर्मचारियों को हर महीने एक दिन की पेड पीरियड लीव मिलेगी. यानी महिलाएं सालभर में कुल 12 दिन की पेड पीरियड लीव ले सकेंगी.
किसे मिलेगा इस पॉलिसी का फायदा?

इस नई पॉलिसी का फायदा सरकारी दफ्तरों, प्राइवेट कंपनियों, आईटी फर्म्स, मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs), गारमेंट फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल यूनिट्स में काम करने वाली सभी महिलाओं को मिलेगा. सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 50 लाख महिलाओं को सीधा लाभ होगा.

सरकार का उद्देश्य
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यह फैसला एक मानवीय, समझदार और समावेशी कार्यस्थल (Inclusive Workplace) बनाने की दिशा में अहम कदम है. कर्नाटक अब बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां महिलाओं को पीरियड लीव की सुविधा दी जाती है. बता दें बिहार में सिर्फ सरकारी महिला कर्मचारियों को दो दिन की छुट्टी प्रति माह दी जाती है. वहीं, ओडिशा में यह सुविधा सभी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए साल में 12 छुट्टियों के रूप में उपलब्ध है.

क्या कहता है नया बिल?
कर्नाटक लॉ कमीशन ने ‘कर्नाटक मेंस्ट्रुअल लीव एंड हाइजीन बिल, 2025’ का मसौदा तैयार किया था. इसमें सुझाव दिया गया कि कामकाजी महिलाओं को हर साल 12 छुट्टियां दी जाएं. महिला छात्रों को भी हर महीने दो दिन की छुट्टी मिले. कमीशन को इस प्रस्ताव पर 75 प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिनमें से 56 ने इसका समर्थन किया. इसके अलावा, अगर कोई नियोक्ता (Employer) पीरियड लीव देने से मना करता है या भेदभाव करता है, तो उस पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
कर्नाटक में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक में महिलाओं की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट यानी कामकाजी महिलाओं की भागीदारी 31.5% है, जो देश में सबसे ज्यादा है. राजधानी बेंगलुरु में 1.4 करोड़ से ज़्यादा लोग रहते हैं और यहां गूगल, वॉलमार्ट, इंफोसिस, विप्रो जैसी बड़ी कंपनियों के साथ हजारों स्टार्टअप्स भी हैं.
श्रम मंत्री का बयान
राज्य के श्रम मंत्री संतोष लाड ने बताया कि इस पॉलिसी पर पिछले एक साल से काम चल रहा था. उन्होंने कहा, “महिलाएं घर और काम दोनों संभालती हैं. पीरियड के दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है. समिति ने पहले साल में 6 दिन की छुट्टी का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाकर 12 दिन कर दिया है.”/

समाज की उन्नति और प्रगति के लिए शिक्षा ही एकमात्र मार्ग : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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समाज की उन्नति और प्रगति के लिए शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है। हमारी सरकार स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को कलेक्टर, एसपी, डॉक्टर और इंजीनियर बनते देखना ही हमारी मंशा है। मुख्यमंत्री श्री साय आज कोरबा जिले के कटघोरा में आयोजित सातगढ़ कंवर समाज के सामाजिक सम्मेलन एवं वीर शहीद सीताराम कंवर की पुण्यतिथि समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीर शहीद सीताराम कंवर समाज का गौरव हैं। इस अवसर पर उन्होंने रामपुर चौक में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद सीताराम कंवर की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री साय का तीर-धनुष भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में घोषणा की कि सातगढ़ कंवर समाज के सामाजिक भवन निर्माण के लिए ₹1 करोड़ की राशि प्रदान की जाएगी तथा इस भवन में बाउंड्रीवाल का निर्माण भी कराया जाएगा। उन्होंने रामपुर चौक में शहीद सीताराम कंवर की नई प्रतिमा स्थापना के लिए ₹10 लाख, कसनिया मोड़ में भगवान सहस्त्रबाहु की प्रतिमा स्थापना एवं प्रवेश द्वार निर्माण के लिए ₹25 लाख, तथा कटघोरा में हाईटेक बस स्टैंड के निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कसनिया मोड़ में भगवान सहस्त्रबाहु चौक नामकरण, मूर्ति स्थापना, कल्चुरी स्वागत द्वार सह उद्यान निर्माण हेतु भूमिपूजन और शिलान्यास भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कंवर समाज के सम्मेलन में उपस्थित लोगों से समाज के विकास और उत्थान के लिए अपने बच्चों को शिक्षित करने, युवाओं को नशे से दूर रहने तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा के लिए उत्कृष्ट संस्थान स्थापित किए गए हैं — मेडिकल कॉलेज, एम्स, आईआईआईटी, विश्वविद्यालय और लॉ कॉलेज संचालित हो रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती महोत्सव के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ की जनता से की गई गारंटियों को पूरा करने का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। सरकार गठन के साथ ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए। किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख महिलाओं को प्रति माह ₹1000 की आर्थिक सहायता उनके खातों में जमा की जा रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों से ₹5500 प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी की जा रही है। चरण पादुका योजना पुनः प्रारंभ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि श्री रामलला दर्शन योजना के तहत राज्य से प्रत्येक माह हजारों श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा सरकारी खर्च पर कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के मात्र 20 माह के भीतर ही 10 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय नौकरी दी गई है। शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों और 700 से अधिक सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति को रोजगारमुखी बनाकर युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोले जा रहे हैं।

कार्यक्रम में विधायक श्री प्रेमचंद पटेल और श्री तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, कंवर समाज के केंद्रीय अध्यक्ष श्री छत्रपाल सिंह कंवर, सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण और कंवर समाज के सामाजिक बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के चहुंमुखी विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बेमेतरा जिले के लिए कुल ₹140.96 करोड़ के 47 विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 27 कार्यों का भूमिपूजन और 20 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनता के विश्वास पर खरा उतरते हुए, राज्य सरकार चहुंमुखी और समावेशी विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन का लक्ष्य प्रदेश में विकास कार्यों को तेजी और पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संकल्पबद्धता के साथ प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और नगरीय सुविधाओं के क्षेत्र में तीव्र गति से कार्य किए जा रहे हैं, जिनसे जनता को सीधा लाभ मिल रहा है। इस अवसर पर उन्होंने ग्राम अमोरा में शिवनाथ नदी पर बैराज निर्माण, सिंघोरा में 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र की स्थापना, तथा ग्राम बसनी में मिडिल स्कूल प्रारंभ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अधिकांश गारंटियों को अल्प समय में ही पूरा कर दिखाया है।” मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है और 18 लाख आवासहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रति माह ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों से ₹5500 प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी की जा रही है।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार गांव, गरीब, किसान और महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर कार्य कर रही है। खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का संचालन कर रही है, जिससे कोई भी परिवार भूखा न रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

सांसद श्री विजय बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता से किए गए वादों को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि बेमेतरा जैसे ग्रामीण जिलों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं, जिनसे आमजन को राहत और बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। कार्यक्रम को विधायक श्री दीपेश साहू ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, सांस्कृतिक मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब,श्री प्रहलाद रजक, विधायक श्री ईश्वर साहू और श्रीमती भावना बोहरा, अवधेश चंदेल, श्री लाभचंद बाफना, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

जनभागीदारी से जल संचयन कर सुरक्षित होगा हमारा भविष्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘सुजलाम भारत’ के अंतर्गत राजधानी रायपुर स्थित ओमाया गार्डन में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने जल कलश पर जल अर्पित कर जल संचयन का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक अवसरों पर जल संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। जल संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लोग अपने-अपने ढंग से जल संचयन के लिए प्रयास कर रहे हैं, और ऐसे मंचों के माध्यम से सभी अपने अनुभव साझा कर पाएंगे, जो अंततः नीति निर्माण में भी निर्णायक सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने राजनांदगांव प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि एक महिला सरपंच ने स्वप्रेरणा से सूख चुके हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना केंद्र सरकार द्वारा भी की गई और इस पुनीत पहल को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण हमें प्रेरित करते हैं। हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से प्राप्त होने वाले सुझाव और इनपुट आगामी कार्ययोजनाओं के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने केलो नदी का जल अर्पित कर धरती को सिंचित करने का दिया संदेश

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पृथ्वी के प्रतीक स्वरूप स्थापित कलश में केलो नदी का पवित्र जल अर्पित किया और जल संरक्षण एवं संचयन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और हमारी पावन नदियाँ धरती को सींचकर जीवनदायिनी बनाती हैं। इन्हीं नदियों से हमारी संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व की पहचान जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियाँ — महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, केलो और अन्य — प्रदेश की जीवनरेखाएँ हैं। ये नदियाँ न केवल धरती को उर्वर बनाती हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जीवन के हर क्षेत्र को संजीवनी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी रूपी कलश में केलो नदी का जल अर्पण इस बात का प्रतीक है कि हमें जल की हर बूंद का सम्मान करना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सहेजकर रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण के इस संकल्प को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव हरियाली और समृद्धि से लहलहाती रहे।

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की संकल्पना की गई है। विभिन्न विभागों को एक-एक थीम पर संगोष्ठी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचयन विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज लगभग 300 से अधिक लोगों ने, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं, अपना पंजीयन कराया है। जल संरक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। पिछले एक वर्ष में जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों ने जल संचयन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब तक साढ़े तीन लाख संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

कार्यक्रम में पद्मश्री श्रीमती फूलबासन बाई यादव, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।i]k,