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छत्तीसगढ़ में अगले 2 दिन तक बारिश का सिलसिला रहेगा जारी, मौसम विभाग ने जताई संभावना

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विदाई से पहले छत्तीसगढ़ में मानसून की गतिविधि जारी है. ऐसे में लोगों को बारिश का सामना करना पड़ रहा है. राजधानी में भी आज फिर बादल बरस सकते हैं. मौसम विभाग ने बताया कि अगले दो दिन तक पूरे प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. इसके बाद 9 अक्टूबर को फिर से मिजाज बदलेगा.

मैं दरभंगा-मधुबनी कहीं से भी लड़ सकती हूं चुनाव, मैथिली ठाकुर का बड़ा ऐलान

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बिहार ही नहीं देश की जानी-मानी लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने न्यूज़18 के साथ बातचीत में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. मैथिली ठाकुर ने न्यूज़ 18 के साथ खास बातचीत में कहा कि वह दरभंगा या मधुबनी कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हैं. मैथिली ने कहा कि वह चुनाव के लिए बिलकुल तैयार हैं. वह अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहती हैं. मैथिली ठाकुर ने कहा कि चुनाव के साथ-साथ संगीत भी साथ चलेगा. प्रभु सेवा और जनसेवा साथ-साथ होगी. उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने के कारण संगीत बिलकुल भी नहीं छूटेगा. वह अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना चाहती हूं.

मैथिली ठाकुर किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगी? इस सवाल के जवाब को लेकर मैथिली ने बीजेपी की ओर इशारा करते हुए कहा कि एक पार्टी के साथ उनकी विचारधार मिलती है, आपने तस्वीरें देखी होंगी. आपने मेरे गीतों को सुना होगा. सनातन से मेरा लगाव है. ऐसे में आप समझ सकते हैं. बस दो दिन में सारी घोषणा हो जाएगी. किस सीट से चुनाव लड़ूँगी यह सब क्लियर हो जाएगा. बस थोड़ा इंतजार कर लीजिये. वहीं मैथिली ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी प्रभावित रही हैं. उनको देखकर ही राजनीति में आने का मन बनाया है.

बता दें, मैथिली ठाकुर बीजेपी के टिकट पर अलीनगर सीट से चुनाव लड़ सकती है. हालांकि वह किस सीट से चुनाव लड़ेंगी इसको लेकर अभी तक कुछ आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन, मैथिली ठाकुर दरभंगा या मधुबनी के किसी विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगी. दरअसल देश की जानी-मानी लोकगायिका और बिहार की बेटी मैथिली ठाकुर ने बीजेपी के चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी. इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसके बाद मैथिली के बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोर पकड़ रही थी. विशेषज्ञों का मानना है कि मैथिली का राजनीतिक सफर मिथिलांचल क्षेत्र में एनडीए के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.

गोल्ड में क्यों दिख रही 2008 के दौर वाली तेजी? रुपये की गिरावट से क्या कनेक्शन

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जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, सोने की कीमतें ऊपर जाती हैं, फिर चाहे 2008 की आर्थिक मंदी रही हो या 2020 की महामारी का दौर. इस बार भी ऐसा ही हो रहा है. भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और मौद्रिक नीतियों में बदलाव ने इस बार की तेजी को बल दिया है. ऐसे में सोना एक बार फिर चमक रहा है और 2025 में नए ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने अपने सोने के भंडार लगभग दोगुने कर लिए हैं. यह दिखाता है कि दुनिया भर के देश अब भी सोने को एक भरोसेमंद वैश्विक संपत्ति मानते हैं. भारत ने भी पिछले कुछ वर्षों में लगातार अपने गोल्ड रिज़र्व बढ़ाए हैं, खासकर तब जब वैश्विक बाजार अस्थिरता से गुजर रहा था.

इस साल 60% उछला सोना

मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि इस साल सोने की कीमतों में अब तक 60% से ज्यादा का उछाल आया है. अगर पुराने दौर की बात करें, तो जनवरी 2008 से अगस्त 2011 तक सोने की कीमतें लगभग 100% बढ़ी थीं, और जनवरी से अगस्त 2020 के बीच लगभग 53% की बढ़त दर्ज की गई थी. इस बार भी सोना लगभग $4,000 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. अमेरिकी सरकार के शटडाउन और फ्रांस में राजनीतिक संकट ने बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर भागे. सोमवार को सोने की कीमतों में 1.9% की बढ़त के बाद यह $3,977.44 प्रति औंस तक पहुंच गया.

CG: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बालोद के जामाड़ी पाठ आश्रम में मां कौशल्या मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों के धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेंगे…

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बालोद के जामाड़ी पाठ आश्रम में दोपहर 3 बजे पहुंचकर मां कौशल्या मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों के धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेंगे। विशेष रूप से महात्यागी संत रामकृष्ण दास की श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर वे आस्था के इस केंद्र को और समृद्ध करेंगे।

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जिले के जामाड़ी पाठ आश्रम का दौरा करेंगे। दोपहर तीन बजे मुख्यमंत्री यहां पहुंचकर मां कौशल्या मंदिर में दर्शन करेंगे। संतों के साथ आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेंगे।

विशेष रूप से वे महात्यागी संत रामकृष्ण दास की श्रद्धांजलि सभा में भी उपस्थित रहेंगे। जामाड़ी पाठ धाम का संचालन महात्यागी बाबा बालक दास द्वारा किया जाता है, जहां लगातार भव्य मंदिरों का निर्माण कार्य जारी है।

श्रद्धालु एवं संत समाज इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं। प्रशासन ने सुरक्षा व व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री के दौरे के मद्देनजर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को भी बढ़ाया गया है। स्थानीय नागरिकों और संत समुदाय के लिए यह आयोजन विशेष महत्व रखता है।

आंख के इलाज में किडनी फेल, दवा देते ही मरीज बेहोश… 1986 की वो रात, जब अस्पताल में नाची थी मौत

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मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से 15 मासूम बच्चों की जान जा जुकी है. बीती रात दो साल की एक और बच्ची की नागपुर में मौत हो गई. छिंदवाड़ा के गांवों में बच्चों के ताबूत उठते देख डॉक्टर ईश्वर गिलाड़ा की आंखों के सामने लगभग 40 साल पुरानी वो भयानक रातें ताजा हो गईं. जनवरी 1986 की ठंडी शाम थी, जब मुंबई के जेजे हॉस्पिटल की इमरजेंसी में अचानक फोन बज उठा. उधर से आवाज आई, ‘ऑपथैल्मोलॉजी वार्ड में मरीज बेहोश हो गया है.’ कुछ ही देर में न्यूरोलॉजी वार्ड से भी वैसी ही खबर आई. पता चला कि इन मरीजों का किडनी फेल हो गया है.

डॉक्टरों को समझ नहीं आया कि आंख के मरीजों का किडनी फेलियर कैसे हो रहा है. दो हफ्तों के भीतर 14 मरीज किडनी फेल होने से मर गए. बाद में जांच में सामने आया कि अस्पताल के न्यूरोसर्जरी और आंखों के वार्ड में जिस ग्लिसरॉल सिरप का इस्तेमाल किया जा रहा था, वह इंसानी इस्तेमाल के लिए नहीं था. उसमें 90% डाई-एथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नाम का जहरीला पदार्थ मिला हुआ था. यह औद्योगिक ग्रेड का (Industrial Pure) ग्लिसरॉल था, जिसे दवा बनाने वाले इंडियन फार्माकोपिया ग्रेड के नाम पर सप्लाई किया गया था.

‘लापरवाही का स्मारक’

इन मौतों को लेकर तब खूब हल्ला मचा था. सरकार ने तत्कालीन जस्टिस बीएस लेंतिन की अध्यक्षता एक जांच आयोग गठित कर दी. इस आयोग ने हादसे को ‘लापरवाही का स्मारक’ कहा था. आयोग ने पाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, दवा नियंत्रण विभाग (FDA) की नाकामी और एक छोटे से री-पैकेजिंग यूनिट के भ्रष्टाचार ने 14 जिंदगियां छीन लीं. आयोग ने सुझाव दिया था कि जेजे हॉस्पिटल जैसे बड़े संस्थान में प्रशासन और चिकित्सा के लिए अलग-अलग डीन होने चाहिए, लेकिन 2022 तक भी प्रशासनिक डीन की कुर्सी खाली रही.

पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस में बम धमाका, क्वेटा में पटरी से उतरी ट्रेन, कई घायल

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पाकिस्तान में एक बार फिर क्वेटा जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमला किया गया है. यह हादसा सुल्तान कोट के पास उस वक्त हुआ, जब पटरी पर लगाया गया विस्फोटक उपकरण (IED) जोरदार धमाके से फट गया. धमाका इतना तेज था कि ट्रेन के पांच डिब्बे पटरी से उतर गए और आसपास अफरा-तफरी मच गई. कई यात्रियों के घायल होने की खबर है, वहीं चश्मदीदों के अनुसार धमाके के बाद फायरिंग की आवाजें भी सुनी गईं.

हमले के बाद राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे. घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. रेल सेवा फिलहाल उस रूट पर अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है. सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और जांच शुरू कर दी है कि विस्फोटक कहां और कैसे लगाया गया. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला पहले से प्लांट किए गए बम से किया गया था.

कल PM मोदी करेंगे उद्घाटन, पर क्‍या आपकी फ्लाइट होगी टेकऑफ? यहां है पूरी ऑपरेशन इंफॉर्मेशन

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मुंबईकरो का करीब दो दशक पुराना सपना कल यानी 8 अक्‍टूबर 2025 को साकार होने वाला है. जी हां, कल दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इंडिया वन एयरक्राफ्ट से नवी मुबई इंटरनेशनल एयरपोट पर लैंड होंगे और दोपहर करीब ढाई बजे इस नए नवेले एयरपोर्ट का उद्घाटन कर देश को भविष्‍य की उड़ान के लिए समर्पित कर देंगे. लेकिन, सवाल इसके आगे का है. क्‍या उद्घाटन के बाद आपकी फ्लाइट नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ या लैंड होगी? तो इस सवाल का जवाब है- ना. उद्घाटन होने के बावजूद फिलहाल नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कामर्शियल फ्लाइट ऑपरेशन शुरू नहीं होंगे.

दरअसल, 8 अक्टूबर 2025 को उद्घाटन के बाद इस एयरपोर्ट को ‘ऑपरेशन रेडिनेस एण्‍ड एयरपोर्ट ट्रांसफर’ (Operational Readiness and Airport Transfer) के फेज से गुजरना होगा. इस फेज को एविएशन की सामान्‍य और संक्षिप्‍त भाषा में ओरैट (ORAT) भी कहा जाता है. अब सवाल यह है कि ओरैट क्‍या है और इसका फ्लाइट ऑपरेशन से क्‍या संबंध है? तो इसका जवाब यह है कि ओरैट एक तरह का रियल-वर्ल्ड सिमुलेशन है, जिसमें चेक-इन काउंटर्स, बैगेज सिस्टम्स और एयर-ट्रैफिक मैनेजमेंट को टेस्ट किया जाएगा. इसका मकसद ये सुनिश्चित करना है कि पहले दिन से ही ऑपरेशंस स्मूद, सेफ और सिक्योर हों.

इस फेज में कई तरह के ट्रायल्स होंते हैं. इन र्टायल्‍स में बैगेज हैंडलिंग, सिक्योरिटी चेक्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की टेस्टिंग भी शामिल है. साथ ही, एयरपोर्ट स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वो हर सिचुएशन को हैंडल करने के लिए तैयार रहें इसके अलावा, ओरैट के दौरान क्‍या-क्‍या होगा, चलिए आपको विस्‍तार से बताते हैं.

NTA का नया नियम: JEE, NEET, CUET परीक्षा में नहीं चुन सकेंगे अपनी पसंद का शहर

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने JEE, NEET UG और CUET UG जैसे बड़े एंट्रेंस एग्जाम्स में बड़ा बदलाव किया है. अब परीक्षा सेंटर उम्‍मीदवारों के मन के मुताबिक नहीं, बल्कि आधार कार्ड में लिखे पते के हिसाब से मिलेगा. मतलब अपनी मर्जी से कोई शहर या राज्य चुनने का ऑप्शन खत्म. ये नियम शैक्षणिक सेशन 2026-27 से लागू होगा और NTA ने नोटिस जारी करके सबको अलर्ट कर दिया है. अगर आधार में कुछ गड़बड़ है तो अभी ठीक कर लें, वरना एग्जाम का मौका हाथ से निकल सकता है.आइए जानते हैं ये क्या है और क्या करना है?

अब सेंटर आधार तय करेगा, पसंद का कोई सवाल नहीं

पहले फॉर्म भरते समय स्टूडेंट्स 3-4 शहर चुन लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा. NTA के नए नियमों मुताबिक अब परीक्षा केंद्र आधार के एड्रेस पर ही अलॉट होगा. अगर आधार में गांव या छोटा शहर लिखा है, तो सेंटर भी उसी इलाके में मिलेगा. ये चीटिंग रोकने और फेयरनेस बढ़ाने के लिए है, लेकिन कई स्टूडेंट्स को ट्रैवल की दिक्कत हो सकती है. NTA का साफ कहना है कि ऑनलाइन अप्लाई से पहले अपना आधार चेक कर लें क्‍यों‍कि बाद में चेंज नहीं होगा.यह नियम JEE Main 2026 के जनवरी सेशन से लागू हो जाएगा.

आधार और 10वीं सर्टिफिकेट मैच करें, वरना फॉर्म रद्द!

NTA ने चेतावनी दी है कि आधार कार्ड और 10वीं की मार्कशीट में नाम,जन्मतिथि और बाकी डिटेल्स एकदम मैच करनी चाहिए. थोड़ा सा भी मिसमैच हुआ तो पूरा फॉर्म कैंसल हो जाएगा.कई स्टूडेंट्स के आधार में स्पेलिंग या DOB गलत होती है, तो UIDAI सेंटर जाकर अभी अपडेट करवा लें.पता भी चेक करें, क्योंकि सेंटर उसी पर निर्भर करेगा.ये नियम एप्लीकेशन को स्मूद बनाने के लिए है, लेकिन देर की तो पछतावा होगा.

सबरीमाला मंदिर में द्वारपालक मूर्तियों का सोना गायब, डगमगाया भक्तों का भरोसा, SIT खोलेगी घोटाले का राज!

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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला श्री धरमा शास्ता मंदिर, जो भगवान अयप्पा के भक्तों का प्रमुख तीर्थस्थल है, वह फिर से एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गया है. दरअसल, मंदिर के गर्भगृह के दोनों ओर लगी द्वारपालक (द्वार रक्षक) मूर्तियों पर लगी सोने की चढ़ाई (गोल्ड क्लैडिंग) में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं. सोमवार को केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में गहन जांच के आदेश दिए हैं. अदालत ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है, जो इस घोटाले की परतें खोलेगी. यह मामला मंदिर की पवित्र संपत्ति और भक्तों के विश्वास से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील है और कोर्ट ने इसे ‘गंभीर अनियमितता’ करार दिया है.

प्लेटों को दोबारा लगाने पर 4.541 किलोग्राम कम हुआ वजन

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद 9 सितंबर को तब उजागर हुआ जब सबरीमाला के विशेष आयुक्त ने हाईकोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में कहा गया कि द्वारपालक मूर्तियों की सोने की चढ़ाई वाली तांबे की प्लेटों को बिना अदालती अनुमति के हटाया गया और चेन्नई की एक सुविधा पर ले जाया गया. 2019 में ‘सोने की चढ़ाई’ के नाम पर इन प्लेटों को वापस लगाने के बाद इनका वजन लगभग 4.541 किलोग्राम कम हो गया था. कोर्ट ने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह असली सोने की प्लेटों को बदलने या बेचने की साजिश का संकेत देता है.
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस वी राजा विजयराघवन और जस्टिस के वी जयकुमार की बेंच ने सबरीमाला के मुख्य सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी (सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) से सीधे बातचीत की. अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे. उन्होंने एक सीलबंद लिफाफे में प्रारंभिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट की समीक्षा के बाद बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि गर्भगृह के दोनों ओर स्थित द्वारपालक मूर्तियों की सोने की चढ़ाई वाली तांबे की प्लेटों में गंभीर आरोपों की विस्तृत जांच जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि यह मामला मंदिर की पवित्रता और भक्तों के विश्वास को धोखा देने वाला है.
मामले की जांच SIT को सौंपी गई
इस मामले की जांच के लिए अदालत ने SIT का गठन किया है, जिसका नेतृत्व लॉ एंड ऑर्डर के एडीजीपी एच वेंकटेश करेंगे. जांच का संचालन थ्रिसूर के केरल पुलिस अकादमी के असिस्टेंट डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) एस शशिधरन (आईपीएस) करेंगे. SIT को जांच जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया गया है और किसी भी हाल में 6 हफ्ते के अंदर रिपोर्ट सौंपनी होगी. कोर्ट ने कहा कि जांच गोपनीय रखी जाए और रिपोर्ट सीधे अदालत को दी जाए. इसके अलावा, राज्य सरकार को तीन पुलिस अधिकारियों – इंस्पेक्टर अनीश (वकथानम पुलिस स्टेशन, कोट्टायम), इंस्पेक्टर बिजू राधाकृष्णन (कैप्पमंगालम पुलिस स्टेशन, थ्रिसूर रूरल) और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सुनील कुमार (साइबर पुलिस स्टेशन, थ्यकॉड, तिरुवनंतपुरम) की सेवाएं SIT को उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है.
SIT पर होगी कई अहम जिम्मेदारियां
SIT को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. सबसे पहले, 2019 में सोने की चढ़ाई प्रायोजित करने वाले पुजारी से व्यापारी बने उन्निकृष्णन पोट्टी की भूमिका की जांच करनी होगी. पोट्टी ने यह काम मैकडॉवेल एंड कंपनी लिमिटेड (यूनाइटेड ब्रूवरीज ग्रुप) के फाइनेंस मैनेजर के माध्यम से प्रायोजित किया था. दूसरा, ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (टीडीबी) के अधिकारियों की संलिप्तता का पता लगाना होगा. कोर्ट ने कहा कि कुछ देवास्वोम अधिकारी पोट्टी के साथ मिलकर काम करते दिखे, जो मंदिर संपत्ति की पवित्रता और भक्तों के विश्वास का अपमान है.
नहीं हो सकती सिर्फ तांबे की प्लेटें
मुख्य सतर्कता अधिकारी ने टीडीबी के सचिव को संबोधित मैकडॉवेल कंपनी के फाइनेंस मैनेजर का एक पत्र पेश किया. पत्र में सबरीमाला मंदिर में सोने की चढ़ाई के काम की डिटेल दी गई है. इसमें बताया गया कि दो द्वारपालक मूर्तियों के लिए कुल 1,564.190 ग्राम (1.564 किलोग्राम) सोना इस्तेमाल किया गया. पूरे सोने की चढ़ाई प्रोजेक्ट के लिए पारंपरिक तरीके से 30,291 ग्राम (30.291 किलोग्राम) सोना लगाया गया. कोर्ट ने इस दस्तावेज को ‘निर्णायक’ बताया. इससे साबित होता है कि देवास्वोम बोर्ड द्वारा पोट्टी को सौंपी गई द्वारपालक प्लेटें पहले से ही 1.564 किलोग्राम सोने से चढ़ी हुई थीं, और वे सिर्फ तांबे की प्लेटें नहीं हो सकतीं.
क्या बेच दी गईं असली सोने की मूर्तियां?
कोर्ट ने वजन में कमी पर गंभीर चिंता जताई है. 2019 में ‘सोने की चढ़ाई’ के बाद प्लेटों का वजन लगभग 4.5 किलोग्राम कम दर्ज किया गया. अदालत ने कहा कि यह कमी ‘अत्यंत गंभीर’ है. पहले संदेह था कि सन्निधानम (मंदिर परिसर) में लगाई गई प्लेटें दूसरी सेट की तांबे की प्लेटें हैं, लेकिन वो अब पूरी तरह उचित लगता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि असली सोने की चढ़ी द्वारपालक मूर्तियों को भारी आर्थिक लाभ के लिए बेच दिया गया हो, यह एक अलग और गंभीर संभावना है.
क्या शादी में इस्तेमाल हुआ बचा हुआ सोना?
इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. साल 2019 में सोने की चढ़ाई दोबारा लगाने के बाद पोट्टी ने टीडीबी अध्यक्ष को एक ईमेल भेजा था. ईमेल में उन्होंने मांग की थी कि मंदिर के काम के बाद उनके पास बचा हुआ सोना एक लड़की की शादी के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए. कोर्ट ने इसे काफी विचलित करने वाला बताया. अदालत ने कहा कि यह अनियमितता की सीमा को उजागर करता है और स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कुछ देवास्वोम अधिकारी पोट्टी के साथ सांठ-गांठ से काम कर रहे थे. इससे मंदिर की संपत्ति की पवित्रता का अपमान हुआ और भक्तों का विश्वास टूटा है.
कोर्ट ने स्ट्रॉन्ग रूम खोलने की दी अनुमति
इससे पहले, कोर्ट ने 1999 के रिकॉर्ड्स का हवाला दिया, जब द्वारपालक मूर्तियों पर सोने की चढ़ाई की अनुमति दी गई थी. पारंपरिक तरीके से बड़े पैमाने पर सोना लगाया गया था. 2019 में जब प्लेटें हटाई गईं, तो सतर्कता अधिकारी मौजूद नहीं थे. कोर्ट ने स्ट्रॉन्ग रूम खोलने की भी अनुमति दी ताकि 2019 की तस्वीरों से तुलना की जा सके और सभी विसंगतियां जांच सकें.
विपक्ष ने की देवास्वोम मंत्री से इस्तीफा देने की मांग
मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की गई है. मुख्य सतर्कता अधिकारी ने बताया कि सतर्कता जांच की अंतिम रिपोर्ट तब तक दाखिल कर दी जाएगी. इस फैसले का स्वागत देवास्वोम मंत्री वी एन वासवान ने किया है. उन्होंने कहा कि सरकार 1998 (जब विजय माल्या ने सोना दान किया था) से अब तक सभी मामलों की उच्च स्तरीय जांच का समर्थन करती है. विपक्षी यूडीएफ ने विधानसभा में विरोध प्रदर्शन किया और देवास्वोम मंत्री के इस्तीफे की मांग की.
यह जांच न केवल सबरीमाला मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करेगी. इस मामले के बाद भक्तों के बीच चिंता बढ़ गई है और सभी उम्मीद कर रहे हैं कि SIT सच्चाई सामने लाएगी.

पाकिस्‍तान की खुशी पर फिर गया पानी! IMF को मिली 11 अरब डॉलर की घपलेबाजी, अब लीपापोती में जुटा पड़ोसी

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भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्‍तान ने अपनी अर्थव्‍यवस्‍था सुधारने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मदद का इंतजार कर रहा है. इस बीच आईएमएफ ने पैसे देने से पहले पाकिस्‍तान से क्‍लीयरटी मांग ली है और कहा है कि मदद चाहिए तो पहले फाइनेंशियल डाटा में आई गड़बड़ी को ठीक करना होगा. यह विसंगति पाकिस्‍तान की दो एजेंसियों की ओर से उपलब्‍ध कराए गए डाटा में दिखी है. आईएमएफ ने कहा है कि पहले इस विसंगति को ठीक कीजिए, फिर आर्थिक मदद दी जाएगी. इस फाइनेंशियल डाटा में करीब 11 अरब डॉलर की विसंगति दिख रही है.

आईएमएफ भी पाकिस्‍तान के व्‍यापार आंकड़ों की जांच कर रहा है. इस बीच आईएमएफ को पाकिस्‍तान की दो एजेंसियों की ओर से उपलब्‍ध कराए गए आंकड़ों में 11 अरब डॉलर का अंतर दिख रहा है. आईएमएफ ने कहा है कि आंकड़ों में यह विसंगति 2023 से 2025 के बीच की है. इससे पाकिस्‍तान की विश्‍वसनीयता पर सवाल भी उठने लगे हैं और आईएमएफ से मिलने वाली फंडिंग पर भी इसका असर दिख सकता है.
किन आंकड़ों में दिख रहा अंतर
पाकिस्‍तान अखबार द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून के अनुसार, पाकिस्‍तान के रेवेन्‍यू ऑटोमेशन लिमिटेड (PRAL) और पाकिस्‍तान सिंगल विंडो (PSW) ने वित्‍तवर्ष 2023-24 के लिए जो डाटा दिया है, उसमें 5.1 अरब डॉलर का अंतर दिख रहा है. रेवेन्‍यू एजेंसी ने व्‍यापार के आंकड़ों को 5.1 अरब डॉलर कम बताया है. इसके एक साल बाद आयात के आंकड़े बढ़कर 5.7 अरब डॉलर पहुंच गए हैं. पाकिस्‍तान सिंगल विंडो का डाटा स्‍टेट बैंक ऑफ पाकिस्‍तान के आंकड़ों से भी ज्‍यादा था. इस डाटा का इस्‍तेमाल पाकिस्‍तान के चालू खाते के घाटे की गणना में किया गया था.