Home Blog Page 400

CG: एग्री स्टेक पोर्टल में किसानों को पंजीयन में आ रही समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल…

0

प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने एग्री स्टेक पोर्टल में किसानों को पंजीयन में आ रही समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

छत्तीसगढ़ के रायपुर से बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने एग्री स्टेक पोर्टल में किसानों को पंजीयन में आ रही समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पोर्टल में आधे-अधूरे रिकॉर्ड और तकनीकी खामियों के चलते किसानों को पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करने में मुश्किल हो रही है।

सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि पंजीयन की अनिवार्यता के कारण महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य में धान बेचने की सुविधा से किसान वंचित हो रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक सरकार पोर्टल की खामियों को पूरी तरह दूर नहीं करती, तब तक पुराने मैन्युअल पंजीयन की व्यवस्था को जारी रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि भुइया-ऐप में त्रुटिपूर्ण एंट्री, बटांकन, सीमांकन और नामांतरण के लंबित मामलों के कारण लगभग आधे किसान पोर्टल में पंजीयन नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही, सरकार के कृषि, सहकारिता और राजस्व विभागों के बीच समन्वय की कमी भी इस समस्या को और बढ़ा रही है।

कांग्रेस का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश के किसान सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

CG: ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश, नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाना चाहिए…

0

छत्तीसगढ़ के रायुपर/बिलासपुर जिले में डीजे और साउंड बॉक्स से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें और सभी आवश्यक कार्रवाई करें। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

सोमवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य शासन के अधिवक्ता के उस सुझाव का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि त्योहारों और मूर्तियों के विसर्जन से संबंधित जुलूसों के दौरान विशिष्ट तिथियों पर सीसीटीवी फुटेज का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वे पूर्व में शासन द्वारा प्रस्तुत शपथ-पत्र का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें और आवश्यक कार्रवाई करें। शासन ने बताया है कि कोलाहल एक्ट के प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किया जा रहा है।

29 मई को आयोजित बैठक के दौरान विधि विभाग ने समिति के समक्ष अपनी राय प्रस्तुत की। बैठक के दौरान समिति ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड (सीसीबी) को कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में आवश्यक संशोधनों का मसौदा प्रस्तावित करने का निर्देश दिया।

इसके अनुसरण में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में प्रस्तावित संशोधनों का एक मसौदा तैयार किया और इसे सचिव, आवास एवं पर्यावरण को 13 अगस्त 2025 को भेजा। 14 अगस्त को आयोजित बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने सीईसीबी द्वारा प्रस्तुत कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में प्रस्तावित संशोधनों के मसौदे की समीक्षा की।

विभिन्न सदस्य प्रतिनिधियों ने बैठक में उपस्थित विभागों से अनुरोध किया गया कि वे अपने-अपने सचिवों से अंतिम अनुमोदन व टिप्पणियां प्राप्त करें और उसे अगली बैठक 15 सितंबर में प्रस्तुत करें, ताकि प्रस्तावित संशोधनों के दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा सके। 15 सितंबर को आयोजित बैठक के निष्कर्ष के अनुसार गृह विभाग के प्रतिनिधि ने बताया कि प्रस्तावित संशोधनों को अंतिम रूप देने अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

कार्रवाई करेगा। इस अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा यह जानकारी भी आई कि रायपुर जिले में त्योहारों के दौरान कुल 783 कैमरे लगाए गए हैं। यह तर्क दिया गया कि कोलाहल अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण विनियमन एवं नियंत्रण नियम, 2000 के तहत ध्वनि प्रदूषण उल्लंघनों की प्रभावी निगरानी की जा सकती है। कोर्ट ने इससे सहमति जताते हुए फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर की सुनवाई के दौरान बिलासपुर एसपी द्वारा एक शपथपत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के तहत ध्वनि प्रदूषण के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का उल्लेख था। 19 दिसंबर की सुनवाई के दौरान कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं ने कोर्ट से ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 में संशोधन के लिए निर्देश मांगे।

कोर्ट के आदेशानुसार, राज्य सरकार ने 27 जनवरी को गृह विभाग, विधि विभाग और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रतिनिधियों की 5 सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के सदस्य सचिव थे। समिति का कार्य कोलाहल अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 का तुलनात्मक विश्लेषण करना और कोलाहल अधिनियम, 1985 को बनाने उसमें उपयुक्त संशोधन सुझाना था।

 

CG: मुख्यमंत्री धमतरी जिले को 245 करोड़ 80 लाख की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण….

0

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय 23 सितम्बर को धमतरी जिले के ग्राम करेलीबड़ी में आयोजित राज्य स्तरीय महतारी सदन लोकार्पण कार्यक्रम में 51 महतारी सदनों को मातृशक्ति को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धमतरी जिले को 245 करोड़ 80 लाख की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे।

करेलीबड़ी धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र का गांव है। धमतरी जिले में महतारी सदन निर्माण योजना के अंतर्गत 4 महतारी सदनों का निर्माण क्रमशः ग्राम पंचायत भेंड्री, मेधा, खरेंगा और करेलीबड़ी में कराया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने और आपसी समरसता स्थापित करने, सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों में महतारी सदन का निर्माण कराया जा रहा है।

महतारी सदन निर्माण की इस योजना के तहत प्रथम चरण में वर्ष 2024-25 अंतर्गत कुल 202 महतारी सदन के लिए कुल 50 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। लगभग 2500 वर्गफीट में निर्मित होने वाले प्रत्येक महतारी सदन की लागत 24.70 लाख रूपए है, जिससे प्रत्येक महतारी सदन में एक हॉल, कमरा, किचन, स्टोर, दुकान, बाउड्रीवाल, प्रसाधन एवं बोरवेल का निर्माण कराया गया है।

दो लाख सदस्य महिलाएं वर्चुअली होंगी शामिल
महतारी सदन के लोकार्पण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य की महिला स्व-सहायता समूह की 2 लाख सदस्य महिलाएं वर्चुअल रूप से शामिल होंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत अभियान महिलाओं की क्षमता को देश के विकास के साथ जोड़ने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य में ग्राम पंचायतों महतारी सदन का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। इस योजना के तहत राज्य में द्वितीय चरण में वर्ष 2025-26 अंतर्गत कुल 166 महतारी सदन के लिए छत्तीसगढ़ शासन की ओर से 50 करोड़ रूपए की मंजूरी दी गई है। द्वितीय चरण में निर्मित होने वाले प्रत्येक महतारी सदन की लागत 30 लाख रुपए है।

“‘मुझे Before और After का बोर्ड देखकर अच्छा लगा’, GST 2.0 लागू होने पर PM मोदी का देश के नाम पत्र”

0

केंद्र सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) के ढांचे में किया गया व्यापक बदलाव, जिसे ‘जीएसटी 2.0’ कहा जा रहा है, सोमवार को नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही लागू हो गया.

जीएसटी की नई व्यवस्था में एक आसान टैक्स स्ट्रक्चर लागू किया गया है, जिसमें रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं को 5%, लग्जरी (विलासिता की वस्तुएं) और सिन गुड्स (स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने वाली वस्तुएं) को क्रमश: 18% और 40% के टैक्स स्लैब में रखा गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक संदेश में इस रोलआउट को ‘जीएसटी बचत महोत्सव’ की शुरुआत बताया और इसे आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम बताया. पीएम मोदी ने कहा, ‘यह नवरात्रि विशेष है. जीएसटी बचत महोत्सव के साथ, स्वदेशी (मेड इन इंडिया) के मंत्र को और भी बल मिलेगा. आइए, हम सब मिलकर एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रयास करें.’

उन्होंने लिखा, ‘मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार. आपको और आपके परिवार को शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. मेरी प्रार्थना है, ये त्योहार आप सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए. इस वर्ष त्योहारों में हमें एक और उपहार मिल रहा है. आज से नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स लागू होने के साथ ही पूरे देश में GST बचत उत्सव की शुरुआत हो गई है. इन रिफॉर्म्स से किसान, महिला, युवा, गरीब, मध्यम वर्ग, व्यापारी, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, सभी को फायदा होगा.’

हेल्थ इंश्योरेंस पर GST शून्य कर दिया गया पीएम मोदी ने लिखा, ‘नए GST रिफॉर्म्स की विशेषता है कि अब मुख्य रूप से सिर्फ दो ही स्लैब रहेंगे. रोजमर्रा की जरूरी चीजें जैसे खाना, दवाइयां, साबुन, टूथपेस्ट और कई अन्य सामान अब या तो टैक्स-फ्री होंगे या 5% की सबसे कम स्लैब में आएंगे. घर बनाने, गाड़ी खरीदने, बाहर खाने या परिवार के साथ छुट्टियां मनाने जैसे सपनों को पूरा करना अब आसान होगा. हेल्थ इंश्योरेंस पर भी अब GST को शून्य कर दिया गया है. मुझे ये देखकर अच्छा लगा कि कई दुकानदार और व्यापारी पहले और अब (Before and After) के बोर्ड लगाकर, लोगों को बता रहे हैं कि कोई सामान कितना सस्ता हो गया है.’

हमारी सरकार का मंत्र है नागरिक देवो भव: प्रधानमंत्री ने देशवासियों के नाम अपने संदेश में कहा, ‘हमारी GST यात्रा 2017 में शुरू हुई थी. तब देश को अनेक तरह के टैक्स और टोल के जंजाल से मुक्ति मिली थी. इससे ग्राहकों और व्यापारियों, कारोबारियों को बहुत राहत मिली थी. अब ये नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म हमें और आगे ले जा रहे हैं. इसमें सिस्टम को और सरल बनाया गया है. इससे हमारे दुकानदार साथियों, लघु उद्योगों की सहूलियत और बढ़ेगी. नागरिक देवो भव हमारा मंत्र है. पिछले 11 वर्षों में हमारे प्रयासों से 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं.’

हमने ₹12 लाख तक की आय टैक्स फ्री की उन्होंने कहा कि देश में एक नियो मिडिल क्लास तैयार हुआ है. अब इसे और सशक्त बनाया जा रहा है. पीएम मोदी ने कहा, ‘हमने मध्यम वर्ग को भी मजबूत किया है. 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लिया जा रहा है. अगर इनकम टैक्स में छूट और नए GST ​रिफॉर्म्स को मिलाकर देखें, तो देशवासियों के सालाना लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए बचेंगे. देश ने 2047 तक विकसित भारत का संकल्प लिया है और इसे सिद्ध करने के लिए आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलना जरूरी है. नए GST रिफॉर्म्स से आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी तेज गति मिलेगी.’

आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी अपनाएं: PM प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक है कि हम स्वदेशी को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं. चाहे ब्रांड कोई भी हो, कंपनी कोई भी हो, अगर उसमें भारतीय श्रमिक और कारीगर की मेहनत लगी है, तो वो स्वदेशी है. जब भी आप अपने देश के कारीगरों, श्रमिकों और इंडस्ट्री के बनाए सामान को खरीदते हैं, तो आप कई परिवारों की रोजी-रोटी में मदद करते हैं और देश के युवाओं के लिए रोजगार पैदा करते हैं. मैं अपने दुकानदारों और व्यापारियों से भी अपील करता हूं कि वो स्वदेशी सामान ही बेचें. आइए गर्व से कहें, ये स्वदेशी है. आपके घर की बचत बढ़े, आपके सपने पूरे हों, आप अपने पसंद की चीजों के साथ त्योहारों की चमक बढ़ाएं… मेरी यही कामना है.’

“अमेरिका ने महंगा किया H-1B वीजा, भारतीय IT कंपनियों की कमाई पर खतरा, IT प्रोफेशनल पर भी पड़ेगा असर”

0

अमेरिका ने दावा किया है कि H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम जानबूझकर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन और कम स्किल वाले विदेशी कर्मचारियों को काम पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया है बजाय इसके कि अमेरिकी कर्मचारियों की सहायता के लिए हो.

इसके चलते अमेरिका ने H-1B वीजा की फीस $1,00,000 तक बढ़ा दी है. भारत की IT कंपनियां जिनके अमेरिका में ऑफिस हैं (जैसे HCL America, Tech Mahindra Americas, TCS आदि), जो अमेरिका में काम करती हैं लेकिन कम लागत पर टैलेंट पाने के लिए बाहर से कर्मचारियों को लाती हैं, अब इस फैसले का सीधा असर महसूस करेंगी.

वीजा फीस बढ़ोतरी के असर का असर भारत के IT शेयरों पर भी दिखा. सोमवार को Nifty IT Index लगभग तीन प्रतिशत गिर गया. अमेरिका में Infosys, TCS, HCL, LTIMindtree, Wipro, Tech Mahindra और L&T Technology Services जैसी कंपनियों की H-1B वीजा में अग्रणी स्थिति है. FY24 में Infosys ने 8,137 जबकि TCS ने 7,566 H-1B वीजा हासिल किए.

एमके ग्लोबल की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा के अनुसार फाइनेंश‍ियल इयर (FY) 25 में भारत के IT/सॉफ्टवेयर नेट एक्सपोर्ट्स $160 बिलियन थे और हमने FY26 में नेट IT सर्विसेज एक्सपोर्ट्स में पांच प्रतिशत की वृद्धि मान ली थी, अगले पांच सालों के लिए सात प्रतिशत कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट अनुमानित थी. अगर H-1B वीजा से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं, GCC का विकास अलग रहता है और IT कंपनियां नए ग्रोथ मॉडल अपनाती हैं तो ये वृद्धि चार प्रतिशत से कम हो सकती है.

सिर्फ नुकसान नहीं है… कंपनियां अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को इसलिए काम पर रखती हैं क्योंकि उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक फायदा होता है. H-1B वीजा की इतनी अधिक कीमत सिर्फ कर्मचारियों को ही नुकसान नहीं पहुंचाएगी, बल्कि नियोक्ताओं को भी और अंततः उनकी प्रॉफिट और उन प्रॉफिट पर अमेरिका को मिलने वाले टैक्स पर भी असर होगा.

एमके ग्लोबल के अनुसार भारत और चीन सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की सबसे बड़ी और सस्ती टैलेंट पूल प्रदान करते हैं. जबकि चीन में लगभग 32.5 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियर उपलब्ध हैं, भारत में 30 लाख हैं. इसके मुकाबले अमेरिका में लगभग आधे, यानी 15 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. ब्राजील, कनाडा, यूके और जापान इस लिस्ट में इसके बाद आते हैं.

भारत सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को देखेगी और किसी समझौते तक पहुंचेगी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्किल्ड टैलेंट की मोबिलिटी और एक्सचेंज ने अमेरिका और भारत में तकनीकी विकास, इनोवेशन, आर्थिक विकास, प्रतिस्पर्धा और धन सृजन में बहुत योगदान दिया है. इसलिए नीति निर्धारक हाल के कदमों का आकलन करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच स्ट्रांग प‍ीपल टू पीपल संबंध भी शामिल हैं.

“जीएसटी से स्वदेशी तक… अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर दिलाया हर भारतवासी को संकल्प”

0

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मोदी सरकार ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर देश की सभी माताओं-बहनों को NEXT-Gen GST रिफॉर्म का उपहार दिया है.प्रधानमंत्री ने देशवासियों से GST रिफॉर्म का जो वादा किया था, वह आज से पूरे देश में लागू हो गया है.

इसमें 390 से अधिक वस्तुओं पर GST में ऐतिहासिक कमी की गई है. आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में NEXT-Gen GST रिफॉर्म की बड़ी भूमिका होगी. NEXT-Gen GST रिफॉर्म गरीबों, युवाओं, किसानों व महिलाओं की सेवा के दृढ़ संकल्प का प्रमाण है.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट्स में कहा कि मोदी सरकार का नवरात्रि के शुभ अवसर पर देश की सभी माताओं-बहनों को NEXT-Gen GST रिफॉर्म्स का उपहार! मोदी जी ने देशवासियों से GST रिफॉर्म का जो वादा किया था, वह आज से पूरे देश में लागू हो गया है. इस GST में 390 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स में ऐतिहासिक कमी की गई है. खाद्य एवं घरेलू सामान, होम बिल्डिंग व मैटेरियल्स, ऑटोमोबाइल, कृषि, सेवाएं, खिलौने, स्पोर्ट्स व हैंडीक्राफ्ट्स, शिक्षा, चिकित्सा व स्वास्थ्य, बीमा जैसे क्षेत्रों में GST में अभूतपूर्व राहत से देशवासियों के जीवन में खुशियां आएंगी और उनकी बचत भी बढ़ेगी.

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प अमित शाह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में NEXT Gen GST रिफॉर्म की बड़ी भूमिका होने वाली है. पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में स्वदेशी अपनाने का आह्वान करते हुए बताया कि कैसे NEXT Gen GST से आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी. कृषि, स्वास्थ्य, टेक्सटाइल्स, मैन-मेड फाइबर जैसे क्षेत्रों में GST घटाकर मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की पहल की गई है. आप भी अपने दैनिक उपयोग की वस्तुओं में स्वदेशी को अपनाकर हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाएं और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार NEXT-Gen GST रिफॉर्म्स के माध्यम से निरंतर मध्यम वर्ग की बचत में वृद्धि सुनिश्चित करते हुए उसकी आय बढ़ाने के लिए कई अवसर उपलब्ध करा रही है. उन्होंने कहा कि रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं, हेल्थकेयर उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और शैक्षिक वस्तुओं की GST दरों में भारी कमी से उनकी खर्च करने योग्य आय में वृद्धि होगी और वे और अधिक बचत करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

जीएसटी 2.0 के फायदे गिनाए अमित शाह ने कहा कि NEXT-Gen GST रिफॉर्म्स, गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं की सेवा के प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ संकल्प का प्रमाण हैं. उन्होंने कहा कि नए सुधार विभिन्न प्रकार की वस्तुओं पर GST दरों में भारी कटौती के साथ मध्य वर्ग के खर्चों को और कम करेंगे और भारत के विकास के पहिये को दुनिया का सबसे समृद्ध देश बनने की राह पर और भी तेज़ी से आगे बढ़ाएंगे.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अनेक डेयरी प्रोडक्ट्स पर GST शून्य करना हो, या साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट, हेयर ऑयल, शैम्पू जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं पर अभूतपूर्व कमी, NEXT-Gen GST रिफॉर्म हर वर्ग के घर में खुशियों की सौगात लेकर आया है. जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, सीनियर सिटिजन पॉलिसी, 33 लाइफ-सेविंग ड्रग्स और डायग्नोस्टिक किट्स पर जीरो GST से लेकर ऑक्सीजन, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स, मेडिकल, डेंटल व वेटनरी डिवाइसेज पर न्यूनतम GST तक, GST रिफॉर्म देशवासियों की सेविंग्स में ऐतिहासिक वृद्धि करेगा. कृषि उपकरणों और फर्टिलाइजर सेक्टर में GST कमी से किसान उत्साहित हैं और अब वाहन खरीददारी के लिए भी देशवासियों को ज़्यादा सोचना नहीं पड़ेगा. इस GST रिफॉर्म से आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा. आप भी दैनिक उपयोग की वस्तुओं में स्वदेशी को अपनाएं.

“भारत के किस राज्य के लोग` देते हैं सबसे ज्यादा गाली? टॉप-10 राज्यों की लिस्ट देखकर चौंक जाएंगे आप”

0

भारत जैसे विविध भाषाओं और संस्कृतियों वाले देश में भाषा का व्यवहार एक गहरे सामाजिक संकेतक के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस राज्य के लोग बातचीत में सबसे ज्यादा गालियां देते हैं?

“गाली बंद घर अभियान” (Gaali Band Ghar Abhiyan) नामक एक सर्वे ने इस सवाल का जवाब खोजा है। यह अभियान 2014 से 2025 तक डॉ. सुनील जागलान द्वारा ‘सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन’ और महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के तहत चलाया गया था। इसमें शहरी और ग्रामीण भारत से 70,000 लोगों से बातचीत कर डेटा इकट्ठा किया गया-जिसमें शिक्षक, छात्र, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, ऑटो चालक और युवाओं को शामिल किया गया।

टॉप पर है दिल्ली सर्वे के मुताबिक दिल्ली पहले स्थान पर है, जहां 80% लोगों ने स्वीकार किया कि वे रोज़मर्रा की बातचीत में गालियों का इस्तेमाल करते हैं। खास बात यह है कि महिलाओं को लेकर की जाने वाली गालियां भी आम हैं। ट्रैफिक, भीड़, प्रतिस्पर्धा और तेज़ रफ्तार ज़िंदगी दिल्लीवासियों को चिड़चिड़ा बनाती है।

भारत के टॉप 10 राज्य जहां दी जाती हैं सबसे ज्यादा गालियां:

स्थान राज्य प्रतिशत (%)

1 दिल्ली 80% 2 पंजाब 78% 3 उत्तरप्रदेश 74% 4 बिहार 74% 5 राजस्थान 68% 6 हरियाणा 62% 7 महाराष्ट्र 58% 8 गुजरात 55% 9 मध्य प्रदेश 48% 10 उत्तराखंड45%  11 कश्मीर सबसे कम – सिर्फ 15%

क्यों देते हैं लोग गालियां? पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में गाली-गलौज कभी-कभी दोस्ती का मजाकिया हिस्सा होती है।

”यूपी और बिहार में राजनीतिक, पारिवारिक और सड़क झगड़ों में गालियां आम हैं।”

”राजस्थान में गांवों में गुस्से और मज़ाक में हल्की-फुल्की गालियां बोलना साधारण माना जाता है।”

”महाराष्ट्र और गुजरात में शहरी तनाव और यंग जनरेशन का स्लैंग कल्चर कारण है।”

”कश्मीर में धार्मिक, पारिवारिक और भावनात्मक शांति संस्कृति के कारण गालियों का इस्तेमाल न्यूनतम है।”

महिलाओं में भी मानी गालियों की आदत सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 30% महिला प्रतिभागियों ने भी गाली देने की बात मानी। यह इस बात को दर्शाता है कि गाली देना अब केवल मर्दाना व्यवहार नहीं रहा, बल्कि यह एक सामाजिक आदत बनती जा रही है।

इस अभियान का उद्देश्य सभ्य भाषा को बढ़ावा देना घर में बातचीत को ट्रैक करना बच्चों और युवाओं को शालीनता सिखाना “गाली देना” अब केवल झगड़े या गुस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में संवाद का हिस्सा बन चुका है। लेकिन ऐसे अभियान, जैसे “गाली बंद घर”, समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या यह भाषा आदत बन चुकी है या इसे बदला जा सकता है?

आप किस राज्य से हैं और क्या आपको भी अपने आसपास गालियों का बढ़ता चलन दिखता है? 11 साल में 70 हजार लोगों पर सर्वे सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के फाउंडर और महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉक्टर सुनील जागलान ने गाली बंद घर अभियान चलाया और उसी के तहत एक सर्वे किया. इस सर्वे में 11 साल में करीब 70 हजार लोगों को शामिल किया. इन लोगों में युवा, माता-पिता, टीचर, डॉक्टर, ऑटो ड्राइवर, स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट, पुलिसकर्मी, वकील, बिजनेसमैन, सफाईकर्मी, प्रोफेसर, पंचायत सदस्य शामिल थे.

2014 में शुरु किया था गाली बंद घर अभियान डॉक्टर सुनील जागलान कहते हैं कि गाली देना कोई संस्कार नहीं, बल्कि एक बीमारी है. जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है और वह फोन पर या आसपास गाली सुनता है तो वह उसके दिमाग में बैठ जाती है. फिर वही उसकी आदत में शुमार हो जाती है. उन्होंने गाली बंद घर अभियान की शुरुआत साल 2014 में की थी. इस अभियान के तहत पूरे देश की 60 हजार से ज्यादा जगहों पर गाली बंद घर के चार्ट भी लगाए जा चुके हैं. आज उनका ये अभियान विश्व स्तर पर चर्चित हो गया है.

“खड़ी गाड़ी में गाने चलाने पर` चालान कट सकता है या नहीं? जान ले नए ट्रैफिक नियम”

0

Traffic rules : ट्रैफिक पुलिस दिन प्रतिदिन अपने नियमों को सख्त करती जा रही है। अगर आप भी एक वाहन चालक है तो आपको हर नए ट्रैफिक नियमों का पता होना चाहिए। कई लोगों का मानना है की खड़ी गाड़ी में गाने चलाने पर ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है।

चलिए खबर में जानते हैं इससे जुड़े ट्रैफिक नियम के बारे में विस्तार से।

(new traffic rules 2025) बदलते जमाने के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों में भी हर रोज बदलाव होते रहते है। नई तकनीकी के इस दौर में अक्सर खुद की कार खरीदना हर किसी का सपना बन गया है। आप लोग जानते ही हैं कि गाड़ी चलाने को लेकर ट्रैफिक पुलिस द्वारा कई सारे रूल्स बनाए गए हैं। ड्राइविंग करने से पहले हमें हर नए ट्रैफिक नियम के बारे में जान लेना चाहिए। आइए आज आपको बताते हैं कि क्या खड़ी गाड़ी में म्यूजिक चलने पर भी कर सकता है चालान…

ड्राइविंग करते समय तेज आवाज में गाने सुनना भी है ट्रैफिक नियमों के खिलाफ….

ट्रैफिक पुलिस हर रोज अपने नियम सख्त करती जा रही है। मैं आपको बता दे की गाड़ी चलाते वक्त तेज आवाज में गाने बजाने पर भी एक गंभीर मामला हो सकता है और ट्रैफिक पुलिस ऐसे में आपका चालान भी काट सकती है।

आपको जानकर शायद हैरानी हो लेकिन गाड़ी चलाते समय तेज आवाज में गाने सुनना ट्रैफिक नियमों (traffic rules) के खिलाफ माना जा सकता है। हालांकि, सीधे तौर पर तेज आवाज में म्यूजिक बजाने को लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस इसे यातायात नियमों के उल्लंघन (violation of traffic rules) के तहत आने वाला अपराध मान सकती हैं। इसलिए गाड़ी चलाते समय धीमी आवाज में गाना सुनें।

इन कारणों से कट सकता है चालान तेज आवाज में गाना बजाने से आपका ध्यान सड़क से हट सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।<br>तेज आवाज में गाना बजाना आसपास के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियम बता दें कि हर रोज सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसलिए सरकार ने लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर गाड़ियों को चलाने को लेकर कई सारे नियम (new traffic rules 2025) बनाए हैं। जो मोटर व्हीकल एक्ट (motor vehicle act) के अंतर्गत आते हैं।

इतना ही नहीं गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना या हैंड्स फ्री डिवाइस का इस्तेमाल करना भी नियमों के खिलाफ है। लेकिन आप ड्राइव करते समय नेविगेशन के लिए अपना मोबाइल फोन यूज कर सकते हैं।

कट जाएं चालान तो इतने दिनों के अंदर भरना होता है चालान अगर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन (traffic rules violation) करने पर आपका चालान कट गया है तो तय समय सीमा के अंदर आपको चालान की रकम भरनी होती है। आपको बता दें कि चालान की रकम 90 दिनों के अंदर जमा करानी होती है। वरना आपकी समस्या बढ़ सकती है।

अगर आप अपने चालान की रकम 90 दिनों के अंदर नहीं भरते तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है। आपकी गाड़ी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

इतना ही नहीं चालान न भरने पर यह मामला कोर्ट में जा सकता है। और आपको यह बताने की जरूरत नहीं है कि कोर्ट में मामला जाने पर (traffic rules 2025) आपकी मुश्किलें और कितनी बढ़ सकती है। इसलिए सिर्फ जुर्माने से बचने के लिए ही नहीं अपनी और दूसरों की सेफ्टी के लिए गाड़ी चलाते वक्त सभी नियमों का पालन (follow traffic rules) करें।

“पतंजलि रिसर्च का बड़ा दावा -` आयुर्वेद के इन उपायों से हो सकता है गंजेपन का इलाज

0

Ayurvedic Hair Loss Treatment” पतंजलि रिसर्च का बड़ा दावा -` आयुर्वेद के इन उपायों से हो सकता है गंजेपन का इलाज Ayurvedic Hair Loss Treatment

अगर बाल झड़ना बंद नहीं हो रहा या सिर पर गंजापन दिखने लगा है, तो अब राहत की खबर है! पतंजलि की रिसर्च में खुल पतंजलि रिसर्च का बड़ा दावा – आयुर्वेद के इन उपायों से हो सकता है गंजेपन का इलाज Ayurvedic Hair Loss Treatment

बदली जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण आजकल गंजेपन (Baldness) की समस्या आम होती जा रही है।

युवा हो या अधेड़, हर कोई बालों के झड़ने की परेशानी से जूझ रहा है। इसी चुनौती को देखते हुए पतंजलि (Patanjali) ने आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर एक विशेष शोध किया है, जिसके परिणाम चौंकाने वाले बताए जा रहे हैं। इस रिसर्च में न केवल बाल झड़ने की समस्या पर काबू पाया गया, बल्कि यह भी देखा गया कि नए बाल उगने लगे।

पतंजलि की टीम ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के तहत 6 सप्ताह तक कई मरीजों का उपचार किया। खास बात यह है कि इन मरीजों ने पहले कई तरह की आधुनिक चिकित्सा विधियों से उपचार कराया था लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिली थी। पतंजलि की इस रिसर्च के अनुसार, अगर सही तरीके से शोधन और चिकित्सा की जाए, तो गंजेपन का स्थायी इलाज संभव है.

पतंजलि रिसर्च में सामने आया समाधान पतंजलि के आयुर्वेदिक डॉक्टरों  की टीम ने इस शोध में उन मरीजों को शामिल किया जिनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों से बाल झड़ रहे थे। इनमें से कुछ एलोपेसिया एरीटा (Alopecia Areata) जैसी गंभीर स्थिति से पीड़ित थे। मरीजों को 6 सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती कर पंचकर्म और अन्य आयुर्वेदिक पद्धतियों से उपचार किया गया।

शोध के दौरान पाया गया कि बाल झड़ने का मूल कारण शरीर में वात और पित्त दोषों का असंतुलन है। इन्हें नियंत्रित करने के लिए शोधन (डिटॉक्सिफिकेशन), शमन (लक्षण नियंत्रण) और विशेष आयुर्वेदिक औषधियों से चिकित्सा की गई।

पंचकर्म और अन्य आयुर्वेदिक विधियों से उपचार मरीजों को रोजाना  पंचकर्म थेरेपी  दी गई जिसमें विशेष रूप से शिरोधारा, अभ्यंग (तेल मालिश), और बस्ती (एनिमा) जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं। इसके अलावा मुंह और नाक के माध्यम से भी आयुर्वेदिक दवाएं दी गईं। नियमित सिर की मालिश के माध्यम से स्कैल्प में रक्त संचार को बढ़ाया गया, जिससे रोमछिद्र पुनः सक्रिय होने लगे।

रिसर्च में शामिल मरीजों ने बताया कि पहले जहां बालों का झड़ना नहीं रुक रहा था, वहीं इस उपचार के तीसरे सप्ताह के बाद ही गिरते बालों की संख्या में भारी कमी आई। छठे सप्ताह तक कुछ मरीजों के सिर पर नए बाल उगने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।

एलोपैथिक इलाज से निराश मरीजों को मिली राहत रिसर्च में यह भी बताया गया कि जिन मरीजों ने पहले विग, हेयर ट्रांसप्लांट और एलोपैथिक ट्रीटमेंट लिए थे, उन्हें स्थायी राहत नहीं मिली। कुछ समय के लिए बालों की ग्रोथ हुई, लेकिन बाद में फिर वही समस्या लौट आई। पतंजलि के आयुर्वेदिक उपचार से पहली बार उन्हें स्थायी समाधान मिला।

पतंजलि की रिसर्च में यह स्पष्ट किया गया कि केवल बाहरी उपचार नहीं, बल्कि शरीर के अंदर से दोषों को संतुलित करने की आवश्यकता होती है। जब शरीर का वात और पित्त संतुलन में आता है, तो बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और  Hair Regrowth की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से शुरू हो जाती है।

शोध को प्रकाशित किया गया नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पतंजलि की इस रिसर्च को नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine) में भी प्रकाशित किया गया है। यह दावा किया गया है कि यह आयुर्वेदिक पद्धति सिर्फ बालों के झड़ने को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि गंजेपन को जड़ से समाप्त करने में भी सक्षम है। रिसर्च में यह भी कहा गया है कि इस पद्धति को और अधिक वैज्ञानिक अध्ययन और ट्रायल्स के माध्यम से वैश्विक मान्यता दिलाई जा सकती है।

युवाओं में बढ़ती समस्या और इलाज की बढ़ती मांग आज के समय में जहां युवा पीढ़ी कॉस्मेटिक हेयर सॉल्यूशंस पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं पतंजलि की यह रिसर्च उन्हें एक सुरक्षित और स्थायी समाधान देने का वादा करती है। एलोपैथिक तकनीकें जैसे हेयर ट्रांसप्लांट और लेजर ट्रीटमेंट अक्सर अस्थायी राहत देती हैं, वहीं आयुर्वेद दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है, वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के।

पतंजलि की ओर से यह भी कहा गया है कि वे इस शोध पर आगे और विस्तार से काम करेंगे और जल्द ही इसके आधार पर एक व्यापक उपचार पद्धति आम जनता के लिए उपलब्ध कराएंगे।

“राहुल गांधी की बातों में कितना विरोधाभास- नरेंद्र मोदी ‘तानाशाह’ या ‘कमजोर पीएम’?”

0

H-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी (1,700-4,500 डॉलर) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘कमजोर’ प्रधानमंत्री की संज्ञा दी है.

राहुल ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने 5 जुलाई 2017 की एक पोस्ट जिसमें लिखा है कि मोदी जी ट्रंप से डर गए, को रिट्वीट किया है.

राहुल गांधी ने 20 सितंबर को इसे रिट्वीट करते हुए लिखा है कि मैं दोहराता हूं कि भारत का एक कमजोर पीएम है. H-1B वीजा शुल्क 1 लाख डॉलर (88 लाख रुपये) होने को राहुल ने फिर ‘कमजोर नेतृत्व’ से जोड़ा. मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे ‘ट्रंप का जन्मदिन गिफ्ट’ बताया. दरअसल राहुल का तर्क है कि मोदी वैश्विक मंच पर भारत के हितों (आईटी सेक्टर, 71% H-1B भारतीयों के पास) की रक्षा नहीं कर पाए. चाबहार पोर्ट पर सैंक्शन हटाने और 50% टैरिफ जैसे ट्रंप के फैसलों पर चुप्पी को ‘कमजोरी’ बताया.

1-राहुल गांधी के बयानों में भ्रम की स्थिति राहुल गांधी अपने बयानों में नरेंद्र मोदी को कभी तानाशाह बोलते रहे हैं तो कभी ‘कमजोर पीएम’ कह कर मजाक बनाते हैं. दरअसल वास्तव में कोई भी शख्स एक साथ किसी देश का तानाशाह और कमजोर पीएम दोनों ही नहीं सकता है. जाहिर है राहुल के यह दोनों बयान मिलकर उनके बारे में यह सोचने को मजबूर करते हैं कि नरेंद्र मोदी को लेकर उनके विचार या तो विरोधाभासी हैं या वो खुद प्रधानमंत्री की शख्सियत को समझ नहीं पा रहे हैं.

राहुल एक तरफ बार-बार दावा करते रहे हैं कि मोदी ने अपनी तानाशाही वाले रवैये के चलते संवैधानिक संस्थाओं (जैसे CBI, ED, चुनाव आयोग) को कमजोर किया. दूसरी तरफ 2017 और फिर 20 सितंबर 2025 को H-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी पर मोदी को ‘कमजोर पीएम’ कहा. यह विरोधाभास सतही लगता है, लेकिन गहराई से देखें तो यह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है. क्यों कि एक तानाशाह कभी कमजोर नहीं हो सकता है. और उससे भी बड़ी बात क्या एक कमजोर प्रधानमंत्री 2017-2025 के बीच देश में बड़े संवैधानिक बदलाव ला सकता है? क्या एक कमजोर प्रधानमंत्री लगातार तीन बार चुनावी जीत कर आ सकता है, क्या एक कमजोर पीएम नोटबंदी और जीएसटी में कमी आदि के फैसले ले सकता है?

2-विरोधाभास या रणनीति? राहुल गांधी की मोदी को लेकर यह बयानबाजी उनकी रणनीति है न कि यह विरोधाभास है. संभव है कि राहुल ‘मजबूत नेता’ की मोदी की छवि को दोहरे प्रहार से तोड़ना चाहते हैं. विपक्ष, विशेषकर युवा और शहरी वोटरों को यह संदेश कि मोदी लोकतंत्र को खत्म कर रहे. इसी तरह शिक्षित, NRI और पेशेवर वर्ग को यह दिखाना चाहते हैं कि मोदी वैश्विक मंच पर भारत को मजबूत नहीं बना पाए.

सतही तौर पर ‘तानाशाह’ और ‘कमजोर’ विरोधाभासी लगते हैं, लेकिन राहुल के बयान दो अलग-अलग आयामों को लक्षित करते हैं. राहुल गांधी मोदी की छवि को ‘तानाशाह’ साबित करने के लिए संस्थाओं का कथित दुरुपयोग, विपक्ष का दमन आदि का उदाहरण देते हैं. राहुल का दावा है कि मोदी ने सत्ता को RSS और अपने ‘मित्र पूंजीपतियों’ (अडानी-अंबानी) के फायदे के लिए साधन बना दिया. दूसरी तरफ मोदी को कमजोर साबित करने के लिए राहुल गांधी कहते हैं कि विदेश नीति पर अमेरिका, चीन जैसे देशों के सामने ‘नरम रुख’ अख्तियार कर लिया. 2023 में राहुल ने LAC पर चीन की घुसपैठ को ‘मोदी की कमजोरी’ कहा. 2025 में H-1B पर चुप्पी को उनकी कमजोरी बताया.

3- क्या कमजोर पीएम ये सब कर सकता है? मोदी की उपलब्धियां चुनावी जीत, बड़े कानून, आर्थिक सुधार और वैश्विक कद राहुल गांधी की बातों को खारिज करती हैं. मोदी ने 2014 (282 सीटें), 2019 (303 सीटें) और 2024 (240 सीटें, NDA 293) में BJP को ऐतिहासिक जीत दिलाई. महाराष्ट्र में तीसरी बार, हरियाणा में तीसरी बार, दिल्ली विधानसभा की जीत बताती है कि 2024 में कुछ कमजोर होने के बाद भी नरेंद्र मोदी का जलवा बरकरार है.

एक्स पर एक यूजर लिखता है कि मोदी ने गठबंधन एकजुट रखा है,कोई भी कमजोर नेता ऐसा नहीं कर सकता. राहुल गांधी के ‘संविधान खतरे में’ नरेटिव को मोदी ने ‘विकास vs भ्रष्टाचार’ से करीब करीब खत्म कर दिया है. मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 (2019) खत्म करके, GST (2017) को लागू करके, CAA-NRC (2019-20) को लागू करके दिखा दिया है कि वो कभी कमजोर नेता नहीं थे.

4- कमजोर पीएम का नरेटिव राहुल गांधी को महंगा पड़ सकता है राहुल गांधी का ‘तानाशाह’ और ‘कमजोर’ का दोहरा नैरेटिव जनता के बीच भ्रम पैदा करता है. एक्स पर एक यूजर लिखता है कि राहुल तय करें, तानाशाह या कमजोर? BJP इसे ‘नकारात्मक राजनीति’ कहकर पलटवार करती है. एक साल पहले The Hindu ने लिखा था कि राहुल का इस तरह का नैरेटिव विश्वसनीयता खो सकता है.

राहुल का ‘कमजोर पीएम’ बयान अल्पकालिक फायदेमंद तो हो सकता है . जैसे इस तरह के बयान से राहुल बीजेपी से नाराज युवकों और विपक्षी समर्थकों को लामबंद कर सकते हैं. पर दीर्घकाल में यह जोखिम भरा साबित हो सकता है. क्योंकि मोदी की उपलब्धियां और BJP की संगठन शक्ति इसे बेअसर करती.

बिहार विधानसभा चुनावों में यह विवाद कुछ वोट शेयर बढ़ा सकता, लेकिन NDA को हराने के लिए ये अपर्याप्त है. क्योंकि जब मोदी विरोधी एक जुट होंगे तो जाहिर है कि क्रिया पर प्रतिक्रिया होगी जो हाल ही में मोदी सरकार से नाराज लोग एक बार फिर वापस हो सकते हैं. जिनका वोट शेयर कांग्रेस के बढ़े वोट शेयर से बहुत ज्यादा होगा.