Home Blog Page 411

भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ी, अब 55 देशों में वीजा के बिना एंट्री

0

इसके बाद जापान और साउथ कोरिया (188 देशों के साथ) दूसरे नंबर पर हैं. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पांचवें स्थान पर पहुंचकर इस साल खास चर्चा में रहा.

भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार

भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है. भारत अब पांच पायदान चढ़कर 80वें स्थान पर पहुंच गया है और इस रैंक पर अल्जीरिया के साथ बराबरी पर है. अब भारतीय नागरिक 55 देशों में बिना पहले से वीजा लिए यात्रा कर सकते हैं. इनमें वीजा-फ्री, वीजा ऑन अराइवल और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) की सुविधा शामिल है. पिछले साल भारत की रैंकिंग 85वीं थी.

भारतीय यात्रियों को कहां मिलेगा फायदा

इस बढ़ी हुई सुविधा का फायदा भारतीय यात्रियों को एशिया, अफ्रीका, ओशिनिया, कैरेबियन और मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में मिलेगा. वीजा-फ्री जाने वाले लोकप्रिय देश थाईलैंड, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल, बारबाडोस, फिजी, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस आदि. वीजा ऑन अराइवल या ETA वाले देश इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका, केन्या, जॉर्डन, फिलीपींस समेत कई देश.

2026 में दुनिया के टॉप 10 ताकतवर पासपोर्ट

सिंगापुर 192 देश

जापान 188 देश

साउथ कोरिया 188 देश

डेनमार्क, लक्ज़मबर्ग, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड 186 देश

ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे 185 देश

हंगरी, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, यूएई 184 देश

कुल मिलाकर, इस रिपोर्ट से साफ है कि भारत के पासपोर्ट की ताकत धीरे-धीरे बढ़ रही है और आने वाले समय में भारतीयों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा और आसान हो सकती है.

राहुल गांधी के राम मंदिर जाने के दावे पर गिरिराज सिंह का तीखा पलटवार

0

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के अयोध्या स्थित राम मंदिर जाने को लेकर चल रही चर्चाओं पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने इस मुद्दे पर राहुल गांधी के इरादों और बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए कड़ी टिप्पणी की.

गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर राहुल गांधी राम मंदिर जा रहे हैं, तो इसमें वह भगवान राम पर कौन सा एहसान करने जा रहे हैं. उन्हें यह समझ होनी चाहिए कि मंदिर जाकर भगवान राम से आशीर्वाद लिया जाता है, न कि राजनीतिक संदेश दिया जाता है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर जाना आस्था का विषय है और इसे राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए.

विदेश जाकर राहुल गांधी को देश के खिलाफ नहीं देना चाहिए बयान

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि जो भी व्यक्ति भारत को भारत माता मानता है, उसे विदेश जाकर देश के खिलाफ बयान नहीं देना चाहिए. उनका कहना था कि अगर राहुल गांधी सच में राम मंदिर जाते हैं, तो यह उनके लिए सद्बुद्धि का संकेत होगा और उन्हें भगवान राम से देश और समाज के लिए सही रास्ता मांगना चाहिए.

भारत के सपूत थे गोडसे- गिरिराज सिंह

यूनियन मिनिस्टर गिरिराज सिंह कि अगर गोडसे गांधी के हत्यारें हैं, तो गोडसे भारत के सपूत भी हैं. साथ ही वह भारत में जन्मे व्यक्ति भी थे और उन्हें बाबर या औरंगजेब जैसे आक्रांता नहीं कहा जा सकता. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग बाबर की औलाद कहलाने में गर्व महसूस करते हैं, वे भारत माता के सच्चे सपूत नहीं हो सकते.

गिरिराज सिंह के इस बयान से राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. राहुल गांधी के राम मंदिर जाने की संभावित यात्रा को लेकर जहां एक ओर चर्चाएं हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता इसे आस्था, राष्ट्रवाद और राजनीति से जोड़कर हमलावर नजर आ रहे हैं. यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है.

“सीकर में कोहरे का कहर, खाटू श्याम दर्शन को जा रहे दो श्रद्धालुओं की सड”

0

सीकर जिले में बुधवार (14 जनवरी) सुबह घने कोहरे ने एक बार फिर जान ले ली. रींगस-खाटूश्यामजी रोड पर हुए भीषण सड़क हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

सभी लोग खाटू श्याम मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे. घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

यह दर्दनाक हादसा सुबह करीब साढ़े 5 बजे होटल माखन मटकी के सामने हुआ. मथुरा से आ रही एक वेगनआर कार अचानक अनियंत्रित हो गई. घना कोहरा होने के कारण चालक को सड़क साफ नजर नहीं आई और कार पलटते हुए सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई.

दो श्रद्धालुओं की मौके पर हुई मौत

हादसे में मथुरा निवासी रिंकू सैनी और अमित की मौके पर ही मौत हो गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. आसपास के लोगों ने जब पलटी हुई कार देखी तो तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी.

कार चला रहे दुर्गेश सैनी समेत अजय यादव, केवल सैनी और विनोद हादसे में घायल हो गए. सभी घायलों को तुरंत रींगस के उप जिला अस्पताल ले जाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद तीन गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए सीकर रेफर कर दिया गया.

कोहरे को माना जा रहा हादसे की वजह

मौके पर पहुंचे एएसआई सांवताराम गुर्जर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घने कोहरे के कारण वाहन का संतुलन बिगड़ गया था. इसी वजह से कार सड़क से उतरकर पेड़ से टकरा गई.

पुलिस ने संभाला मोर्चा

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. शवों को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवाया गया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है. यह हादसा एक बार फिर सावधानी से वाहन चलाने और कोहरे में खास सतर्कता बरतने की जरूरत को याद दिलाता है.

कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सस्पेंस, डीके शिवकुमार और सिद्धार,.’राहुल गांधी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा ,’..

0

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल फिर तेज हो गई है. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच हाल ही में हुई राहुल गांधी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है.

वीडियो और पोस्ट सामने आने के बाद राज्य में पावर टसल पर बहस फिर शुरू हो गई है.

राहुल गांधी से बुधवार को हुई संक्षिप्त और एकांत बातचीत के बाद डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कोशिश असफल हो सकती है, लेकिन प्रार्थना कभी असफल नहीं होती.’ यह पोस्ट मैसूरु एयरपोर्ट पर दोनों नेताओं की मुलाकात के तुरंत बाद साझा की गई. इस मुलाकात के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगातार नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर रहे थे. डीके और राहुल की यह बातचीत कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के कयासों को और तेज कर गई.

मैसूरु एयरपोर्ट पर हुई मुलाकात

मंगलवार को राहुल गांधी तमिलनाडु के गुडलूर के लिए रवाना होने से पहले मैसूरु के मंडकल्लि एयरपोर्ट पहुंचे, जहां उनका स्वागत सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने किया. कुछ ही मिनट में राहुल हेलिकॉप्टर से रवाना हो गए. बाद में दिल्ली लौटते समय राहुल के मैसूरु लौटने पर डीके पहले ही एयरपोर्ट पहुंचे और रनवे पर दोनों के बीच करीब तीन मिनट तक आमने सामने बातचीत हुई. इसके कुछ समय बाद सिद्धारमैया भी वहां पहुंचे.

सियासी चर्चाओं को और मिली हवा

इस खास बातचीत के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं. डीके ने मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं, लेकिन दोनों नेताओं ने मीडिया से दूरी बनाए रखी. वहीं सिद्धारमैया ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भ्रम नहीं है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान लेगा. इस बीच कांग्रेस और पुलिस ने एयरपोर्ट पर किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन से बचने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं की एंट्री पर रोक लगा दी, ताकि हाल ही में मंगलुरु एयरपोर्ट पर देखे गए नारेबाजी जैसे हालात दोबारा न बनें.

सूत्रों के अनुसार, इस बार सिद्धारमैया भ्रम के मूड में बिल्कुल नहीं हैं. राहुल से बातचीत में उन्होंने कहा कि हर रोज नया भ्रम नहीं पैदा होना चाहिए और जल्द ही इसका स्थायी समाधान निकाला जाए. उधर, मुख्यमंत्री पद का इंतजार कर रहे डीके शिवकुमार ने भी संकेत दिए हैं कि उनकी कोशिश जारी रहेगी. कर्नाटक में कुर्सी की लड़ाई अब फिर से तेज होती दिख रही है और राजनीतिक गलियारों में सभी की निगाहें पार्टी हाईकमान की ओर टिकी हैं, जो मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला करेगा.

West Bengal: बंगाल में डरा रहा निपाह वायरस! बारसात से मिले 2 नए संदिग्

0

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में निपाह वायरस को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. बारसात क्षेत्र से दो और संदिग्ध मरीजों को बेलेघाटा आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

डॉक्टरों का कहना है कि दोनों मरीज हाल ही में निपाह वायरस से संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे, जिसके कारण उन्हें यह संक्रमण होने की आशंका है. अस्पताल में इन मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है.

स्वास्थ्य कर्मियों की रिपोर्ट नेगेटिव

इस बीच राहत की बात यह सामने आई है कि संक्रमितों के संपर्क में आए 5 स्वास्थ्य कर्मियों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. नदिया जिले के CMOH ने अब तक कुल 45 सैंपल एम्स कल्याणी भेजे हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है.

नदिया जिले की दो नर्सें संक्रमित पाई गई थीं और उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है. एक नर्स गहरे कोमा में है. दूसरी नर्स को वेंटिलेशन सपोर्ट पर रखा गया है. डॉक्टरों का संदेह है कि वे नदिया के कालीगंज में एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के बाद संक्रमित हुईं. इसके अलावा, दूसरी नर्स संभवतः पहली संक्रमित नर्स के साथ बारसात अस्पताल में दो दिनों तक नाइट ड्यूटी करने के दौरान संक्रमित हुई.

निपाह वायरस का खतरा क्यों गंभीर है?

स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम आज कालीगंज में जांच के लिए पहुंच रही है ताकि संक्रमण के स्रोत और वायरस के फैलाव को समझा जा सके. सबसे बड़ी चिंता यह है कि निपाह वायरस का अभी तक कोई टीका या पक्का इलाज मौजूद नहीं है. डॉक्टर जयदेव राय बताते हैं, ‘कुछ दवाओं का परीक्षण हुआ है, पर कोई भी विशेष रूप से कारगर नहीं मिली. फिलहाल उपचार केवल लक्षणों के आधार पर किया जाता है. गंभीर मरीजों को तुरंत ICU में भर्ती करना जरूरी होता है.’

उनके अनुसार, निपाह वायरस तेजी से मस्तिष्क पर असर करता है. मरीज बेहोश हो सकता है, उसे दौरे पड़ सकते हैं, दिल की धड़कन रुक सकती है और सांस लेने में गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक है.

निपाह कैसे फैलता है?

डॉक्टरों का कहना है कि निपाह वायरस का प्रमुख स्रोत चमगादड़ हैं. उनके लार या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है. डॉ. राय बताते हैं, ‘हमेशा जरूरी नहीं है कि संक्रमण चमगादड़ से ही फैले. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी वायरस दूसरे व्यक्ति में जा सकता है.’

डॉक्टर जयदेव राय कहते हैं, ‘निपाह वायरस के लक्षण अन्य वायरस की तरह शुरू होते हैं, लेकिन यह बहुत तेजी से फैलता है. यह बहुत तेजी से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है. मरीज बेहोश हो जाता है, दौरे पड़ते हैं, दिल रोग हो सकता है. सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. यदि इस प्रकार की समस्याएं और लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और मरीज को आईसीयू देखभाल देनी चाहिए. क्योंकि इस बीमारी की मृत्यु दर बहुत अधिक है.

“Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति में खिचड़ी पर ग्रहण! 14 एकादशी और “

0

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व खिचड़ी के बगैर अधूरा माना जाता है. इसलिए मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहते हैं. इस दिन खिचड़ी पकाने और खाने के साथ ही दान करने का भी विधान है.

लेकिन इस वर्ष कुछ ऐसी स्थिति बनी है जिससे न केवल मकर संक्रांति की तिथि बल्कि खिचड़ी को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं.

बता दें कि इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी और 15 जनवरी दोनों ही दिन मनाई जा रही है. लेकिन दोनों ही तिथियां खिचड़ी पकाने, खाने और दान के लिए उचित नहीं है. दरअसल 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है और 15 जनवरी को गुरुवार है. एकादशी तिथि पर चावल खाना वर्जित है तो वहीं गुरुवार को खिचड़ी बनाना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में क्या करें जानें.

14 जनवरी- एकादशी के कारण बदला नियम

14 जनवरी को इस साल मकर संक्रांति के साथ ही षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बना है. लेकिन एकादशी पड़ने के कारण व्रती और धार्मिक नियमों का पालन करने वाले लोग इस दिन अन्न (चावल) का सेवन नहीं करते. शास्त्रों के अनुसार एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित माना गया है. ऐसे में मकर संक्रांति पर बनने वाली खिचड़ी, जिसमें चावल प्रमुख होता है, उसे खाने से परहेज किया जा रहा है. इसी वजह से कहा जा रहा है कि इस बार मकर संक्रांति की खिचड़ी पर ग्रहण लग गया है. हालांकि आप साबूदाना, दलिया या समा चावल की खिचड़ी बनाकर नियम पूरा कर सकते हैं.

जनवरी- गुरुवार को खिचड़ी वर्जित

काशी के विद्वानों के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को भी मकर संक्रांति मनाई जाएगी. लेकिन गुरुवार होने के कारण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन भी खिचड़ी नहीं बनाई जाती है. दरअसल गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और गुरु ग्रह को समर्पित है. इस दिन पीली दान, हल्दी और चावल से बनी खिचड़ी खाने से गुरु ग्रह कमजोर हो सकता है, जिससे धन हानि या दरिद्रता आ सकती है.

इसलिए इस दिन चावल और केले जैसी पीली वस्तुओं से परहेज करने की सलाह दी जाती है. लेकिन गुरुवार को यदि मकर संक्रांति पड़ जाए तो आप खिचड़ी पकाकर खा सकते हैं. इसमें कोई दोष नहीं है. मकर संक्रांति पर बनी खिचड़ी प्रसाद के समान है और शास्त्रों में कहा गया है कि, प्रसाद सभी स्थिति में ग्रहण करने योग्य होता है. आप स्थानीय परंपरा और अपनी श्रद्धा के अनुसार निर्णय ले सकते हैं.

Thailand Accident: थाईलैंड में बड़ा रेल हादसा! चलती ट्रेन पर गिरी क्रेन

0

पूर्वोत्तर थाईलैंड में बुधवार ( सुबह एक भीषण रेल हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. एक यात्री ट्रेन उस समय पटरी से उतर गई, जब एक निर्माणाधीन हाई-स्पीड रेल परियोजना की क्रेन ट्रेन की तीन बोगियों पर गिर पड़ी.

इस दर्दनाक दुर्घटना में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 80 यात्री घायल बताए जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आशंका है कि मलबे में अब भी कुछ शव फंसे हो सकते हैं, जिन्हें बाहर निकालने का प्रयास जारी है.

यह हादसा नाखोन राचासीमा प्रांत के सिखियो जिले में हुआ, जो राजधानी बैंकॉक से लगभग 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है. दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन बैंकॉक से उबोन राचाथानी प्रांत की ओर जा रही थी. चश्मदीदों और पुलिस के मुताबिक, जब ट्रेन मौके से गुजर रही थी, तभी ऊपर बन रही हाई-स्पीड रेल लाइन की एक भारी क्रेन अचानक ढह गई और सीधे ट्रेन की तीन बोगियों पर जा गिरी. टक्कर के बाद ट्रेन पटरी से उतर गई और कुछ समय के लिए आग भी लग गई.

मलबे में अब भी फंसे शव, बचाव कार्य जोखिम भरा

स्थानीय पुलिस अधिकारी कर्नल थाचापोन चिननावोंग ने बताया कि अब तक 19 शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन कुछ शव अब भी ट्रेन की बोगियों के अंदर फंसे हुए हैं. क्रेन के हिलने की आशंका के चलते बचाव दल को फिलहाल पीछे हटना पड़ा है, क्योंकि स्थिति बेहद खतरनाक है. रेस्क्यू टीमें भारी मशीनरी की मदद से मलबा हटाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से काम बेहद सावधानी से किया जा रहा है.

195 यात्री थे सवार, दो बोगियों में सबसे ज्यादा नुकसान

थाईलैंड के परिवहन मंत्री फिफात राचकिटप्रकार्न ने एक बयान में कहा कि ट्रेन में कुल 195 यात्री सवार थे. उन्होंने बताया कि जिन यात्रियों की मौत हुई, वे उन दो बोगियों में थे, जिन पर क्रेन सीधे गिरी थी. मंत्री ने इस घटना की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

निर्माणाधीन हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर सवाल

जिस क्रेन के गिरने से यह हादसा हुआ, वह एक एलिवेटेड हाई-स्पीड रेल लाइन के निर्माण में लगी हुई थी. यह लाइन मौजूदा रेलवे ट्रैक के ऊपर बनाई जा रही थी. थाईलैंड में इस तरह की कई हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, लेकिन इस हादसे ने निर्माण सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

2026 में ‘कमल’ से सजेगा ब्रिक्स का मंच; विदेश मंत्री एस जयशंकर 

0

भारत की अध्यक्षता में 2026 में ब्रिक्स का मंच कमल से सजने से जा रहा है। दरअसल विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को ब्रिक्स 2026 के लिए आधिकारिक लोगो और वेबसाइट लॉन्च की है। इस लोगो में मौजूद कमल सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

लॉन्च के बाद विदेश मंत्री ने कहा है कि भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स समूह के जरिए वैश्विक कल्याण को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, खासकर ऐसे समय में जब समूह अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।

बता दें कि दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स समूह की अगुवाई करती हैं। इसकी स्थापना साल 2006 में हुई थी। बीते कुछ सालों में समूह का तेजी से विस्तार हुआ जहां मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य के रूप में ब्रिक्स में शामिल हो गए।

क्या कहता है नया लोगो?

अधिकारियों के मुताबिक नए लोगो की प्रेरणा कमल से ली गई है। यह भारत की गहरी सांस्कृतिक विरासत और मजबूती का प्रतीक है। लोगो की पंखुड़ियों में ब्रिक्स देशों के रंग दिखाए गए हैं, जो अलग अलग आवाजों को एक साझा मकसद के साथ जोड़ने का संदेश देते हैं। वहीं लोगो के बीच में नमस्कार का चिन्ह है, जो सम्मान और सहयोग की भावना को दर्शाता है। इसके साथ एक टैगलाइन भी रखी गई है, “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण।”

वेबसाइट भी लॉन्च

जयशंकर ने इस दौरान ब्रिक्स की नई वेबसाइट भी लॉन्च की। इसका मकसद ब्रिक्स से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए एक केंद्रीय मंच बनाना है। अधिकारियों ने बताया कि इसमें ब्रिक्स की पहल, प्रोजेक्ट, कार्यक्रम और आधिकारिक दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध होगी।

ब्रिक्स की मजबूती से तिलमिलाया है अमेरिका

शुरूआत के बाद से ही ब्रिक्स एक अहम वैश्विक मंच के तौर पर उभरकर सामने है। फिलहाल इसमें कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं भारत की 2026 की अध्यक्षता में ब्रिक्स से वैश्विक स्तर पर सहयोग और प्रभाव और बढ़ने की उम्मीद है। समूह ने समय समय पर अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को सीधी चुनौती देने की भी कोशिश की है, जिससे अमेरिका तिलमिलाया हुआ है।

अब 10 मिनट में नहीं मिलेगी डिलीवरी, गिग वर्कर्स के लिए सरकार ने हटाई टाइम लिमिट की शर्त!

0

देशभर के गिग वर्कर्स की हड़ताल का एक बड़ा असर हुआ है। अब आमलोगों को 10 मिनट के अंदर डिलीवरी की सुविधा नहीं मिल सकेगी। सरकार ने डिलीवरी ब्यॉज की सुरक्षा को देखते हुए इस टाइम लिमिट की शर्त हटा दी है।

श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के हस्तक्षेप के बाद क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, क्विक कॉमर्स कंपनी Blinkit जल्द ही अपने विज्ञापनों और प्रचार सामग्री से भी ’10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटाने जा रही है।

ब्लिंकिट के बाद बाकी अन्य कंपनियों की ओर से भी जल्द ही इस तरह का ऐलान किया जा सकता है। केंद्रीय श्रम मंत्री ने ब्लिंकिट के अलावा जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी बात की है और उन्हें भी डिलीवरी ब्यॉज की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। यह फैसला सरकार के हस्तक्षेप और डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद लिया गया है।

डिलीवरी ब्यॉज पर अनावश्यक दबाव और बोझ

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato जैसी बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और उनसे कहा कि वे अपने **ब्रांड प्रचार में तय समय सीमा वाली डिलीवरी का उल्लेख न करें। सरकार की चिंता यह है कि बहुत कम समय में डिलीवरी का वादा डिलीवरी कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है और उनकी सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। बता दें कि गिग वर्कर्स के संगठन ने इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की स्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी जैसे मुद्दे उठाए थे।

डिलीवरी धीमी नहीं होगी

सूत्रों ने बताया कि ’10 मिनट डिलीवरी’ का टैग हटाने का मतलब यह नहीं है कि अब डिलीवरी देर से होगी। बल्कि कंपनियां अब अपने प्रचार में निश्चित समय का वादा करने से बचेंगी, ताकि कर्मचारियों पर असुरक्षित तरीके से काम करने का दबाव न बने। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दिखाता है, जहां प्रतिस्पर्धा के बावजूद अब कर्मचारी सुरक्षा और नियामक चिंताओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

हड़ताल से बढ़ी बहस

देशभर में 25 और 31 दिसंबर को गिग और डिलीवरी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। यूनियनों का आरोप था कि कंपनियां असुरक्षित डिलीवरी मॉडल अपना रही हैं और कर्मचारियों की कमाई घटा रही हैं। इसके अलावा गिग वर्कर्स को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं दे रही हैं। हालांकि नए साल की पूर्व संध्या पर ज़्यादातर शहरों में डिलीवरी सेवाएं सामान्य रहीं, लेकिन इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई।

वॉट्सऐप पर चल रहा चुनाव आयोग, हटा दिए शादीशुदा महिलाओं के नाम; ममता बनर्जी 

0

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर बड़ा दावा किया है। कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बनर्जी ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में उन महिलाओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए जिन्होंने अपने उपनाम बदले थे।

उन्होंने कहा कि शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं को वोट डालने का अधिकार ही नहीं दिया जा रहा है। चुनाव आयोग पर बरसते हुए सीएम बनर्जी ने कहा कि आयोग वॉट्सऐप पर ही चल रहा है। एसआईआर को लेकर जब देखो तब नियम ही बदल दिए जाते हैं।

बीजेपी का AI इस्तेमाल कर रहा चुनाव आयोग

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा के एआई उपकरण का इस्तेमाल किया, जिससे एसआईआर डेटा में नामों के मेल न खाने की समस्या सामने आई। एसआईआर के दौरान, निर्वाचन आयोग ने उन विवाहित महिलाओं के नाम हटा दिए, जिन्होंने उपनाम बदल लिए थे। बनर्जी ने कहा कि आखिर मुख्य निर्वाचन आयुक्त यह कैसे तय कर सकते हैं कि मतदाता सूची का आधा हिस्सा हटाया जाए और किसकी सरकार बननी चाहिए।

निर्वाचन आयोग बीजेपी की कठपुतली- ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने कहा, निर्वाचन आयोग भाजपा के कठपुतली की तरह काम कर रहा है, बिना कारण बताए मनमाने ढंग से नामों को हटा रहा है। एसआईआर नियमों के अनुसार सूक्ष्म पर्यवेक्षकों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, इन्हें केवल बंगाल में तैनात किया गया है। इसके अलावा अगर बिहार में अधिवास प्रमाण पत्र को अनुमति दी गई, तो बंगाल में क्यों नहीं दी गई?

एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपना पांचवां पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण “नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है, पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।” ममता बनर्जी ने एसआईआर सुनवाई के दौरान मतदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की रसीद या पावती जारी न किए जाने को सबसे गंभीर खामियों में से एक बताया।

उन्होंने लिखा, “यह देखा गया है कि SIR के तहत होने वाली सुनवाइयों के दौरान मतदाता अपनी पात्रता के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज जमा कर रहे हैं। हालांकि, कई मामलों में इन दस्तावेजों की कोई उचित पावती या रसीद जारी नहीं की जा रही है।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यापन के चरण में इन दस्तावेजों को अक्सर “नहीं मिले” या “रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं” बताया जाता है, जिसके आधार पर मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं।