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रायपुर से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। यहां एक अज्ञात युवक की लाश मिली है, पुलिस और फोरेंसिक टीम ने शुरू की जांच…

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राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में मिली युवक की लाश, मौके पर पहुंची पुलिस ने शुरू की जांच…

राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान मे मिली अज्ञात युवक की लाश।
पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर शुरू की जांच।
30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही मृत युवक की उम्र।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पिछले कुछ समय से अपराध के ग्राफ में बढ़ोतरी दर्ज की है। राजधानी रायपुर में आए दिन, चाकूबाजी, लूट, मारपीट और हत्या जैसी घटनाओं को अपराधी बेखौफ होकर अंजाम दे रहे हैं। पुलिस की कड़ाई के बाद भी राजधानी में आरोपियों के हौंसले बुलंद है।

इसी कड़ी में रायपुर से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। यहां एक अज्ञात युवक की लाश मिली है, पुलिस और फोरेंसिक टीम ने शुरू की जांच…

मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में अज्ञात युवक की लाश मिली है। लाश को देखकर लोगों ने पुलिस की टीम को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने के बाद सरस्वती नगर थाना पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। मृतक युवक की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष है। अब तक लाश की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस की टीम जांच में जुटी हुई है।

सोशल मीडिया पर वायरल रायपुर में न्यूड पार्टी के इनविटेशन ने हड़कंप मचा दिया है. इस मुद्दे पर राजनीति तो शुरू ही हो गई है. पुलिस भी एक्टिव है. जानें माजरा…

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”रायपुर में नहीं होने देंगे ‘न्यूड पार्टी’, वायरल इनविटेशन पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस का विरोध, BJP भी भड़की”

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ड्रग्स सिंडिकेट मामले के बाद अब एक नया विवाद उभरा है. इंस्टाग्राम पर @sinful_writer1 नामक अकाउंट से न्यूड पार्टी का आपत्तिजनक विज्ञापन जारी किया गया है.

इस पोस्ट में युवाओं को आकर्षित करने के लिए शराब, ड्रग्स और नग्नता का लालच दिया जा रहा है. वायरल पोस्ट में आज (शनिवार) रायपुर में आयोजन का दावा किया गया है, जहां बिना कपड़ों के एंट्री का उल्लेख है.

कांग्रेस ने किया विरोध
कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल ने इन आयोजनों का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “इन आयोजनों को किसका संरक्षण है? शराब, ड्रग्स परोसने के बाद अब नग्नता परोसने की बारी… आज का यह आयोजन रायपुर में कदापि नहीं होने देंगे.” अग्रवाल ने आज SSP रायपुर से मुलाकात करने की बात कही और पूरे मामले पर कठोर कार्रवाई की मांग की. उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों के पीछे कौन लोग हैं और उनका संरक्षण कौन कर रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए. कांग्रेसी दोपहर में SP से मिलकर पार्टी रोकने की अपील करेंगे.

युवा ऐसी गतिविधियों से दूर रहें: कैबिनेट मंत्री
इस विवाद पर कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “इस बात की मुझे बहुत चिंता है, दुख है. आज की युवा पीढ़ी इस बात को समझ नहीं पा रही. ऋषि, मुनियों, संतों का ये देश है. इस प्रकार का आयोजन नहीं होना चाहिए, इस विषय में सोचना भी नहीं चाहिए. कांग्रेस हर चीज में राजनीति करती है. दलगत राजनीति से ऊपर उठकर रोकने का प्रयास करना चाहिए.” मंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे ऐसी गतिविधियों से दूर रहें और देश की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करें. वहीं, मामले में गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, मैं एक बार देख लूं, ऐसा कुछ होगा तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस आयोजकों को ढूंए रही
वहीं, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. SSP कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वायरल पोस्ट्स की सत्यता जांच की जा रही है और आयोजकों की पहचान हो रही है. स्थानीय निवासियों में आक्रोश है, वे इसे शहर की छवि को खराब करने वाली साजिश बता रहे हैं. समाजसेवी संगठनों ने भी विरोध जताया है. यह विवाद राजनीतिक रंग ले रहा है, जहां भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. पुलिस का कहना है कि अगर आयोजन हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी.

“मोदी सरकार दे रही क्रेडिट कार्ड, 5 लाख रुपये है लिमिट, इन लोगों के लिए खुशखबरी”

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अब तक के कार्यकाल में कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं जिसके तहत लोगों को बिजनेस के लिए लोन मिलता है। वहीं, कुछ ऐसी भी योजनाएं हैं जिसके तहत क्रेडिट कार्ड पेश किया जा रहा है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) के लिए भी एक ऐसी योजना है।

कितनी है लिमिट दरअसल, बीते फरवरी महीने में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा था कि उद्यम पोर्टल पर रजिस्टर्ड सूक्ष्म उद्यमों के लिए 5 लाख रुपये तक की लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड पेश किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने बताया था कि पहले साल में 10 लाख कार्ड जारी किए जाएंगे। यह कदम भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

SME क्रेडिट कार्ड की खासियत यह क्रेडिट कार्ड व्यवसायों को हर दिन के काम के प्रबंधन के लिए पैसे उपलब्ध कराते हैं। उदाहरण के लिए इक्युपमेंट, सामान खरीदने और अन्य संबंधित व्यावसायिक खर्चों को पूरा करने में मददगार है। ये कार्ड व्यावसायिक व्यय पर नजर रखने में भी मदद करते हैं। इस प्रकार, खर्च की निगरानी और विनियमन आसान हो जाता है।

मिलती हैं कई सुविधाएं कई SME क्रेडिट कार्ड पर रिवार्ड, कैशबैक और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। इनमें से कुछ कार्ड पर टर्म लोन, री-पेमेट पर राहत जैसी सुविधाएं मिलती हैं। बिजनेस क्रेडिट कार्ड का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने से एसएमई को एक मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद मिल सकती है। इसके तहत कुछ क्रेडिट कार्ड 45-50 दिनों तक की ब्याज-मुक्त अवधि प्रदान करते हैं, जिससे व्यवसायों को शार्ट टर्म में वर्किंग कैपिटल मिलती है। इनमें से कुछ कार्ड प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ईएमआई सेवाएं भी देते हैं।

बता दें कि भारत में कई बैंक एसएमई के लिए डिजाइन किए गए क्रेडिट कार्ड देते हैं। इनमें एसबीआई, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, कोटक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड और इंडसइंड बैंक शामिल हैं।

“दूर हो गई BJP की सबसे बड़ी बाधा? कभी भी हो सकता है राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान, रेस में 4 मंत्रियों के नाम”

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) कई महीनों से राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को टालती आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ शीर्ष भाजपा नेतृत्व के तल्ख रिश्ते को माना जा रहा है।

हालांकि, बीते कुछ महीनों से दोनों ही तरफ से संबंधों को सामान्य करने और दिखाने की कोशिशें की जा रही हैं। आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ही इसकी जिम्मेदारी संभाली है। इसके बाद अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान पार्टी कभी भी कर सकती है।

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरएसएस की जरूरत को लेकर बयान दिया तो हर कोई अचरज में पड़ गया। सूत्रों का कहना है कि आरएसएस को भी यह बात नागवार गुजरी। इसका खामियाजा भगवा पार्टी को लोकसभा चुनाव में देखने को मिला, जब भाजपा 240 सीटों पर सिमट कर रह गई, जबकि उसने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा दिया था। कहा जाता है कि संघ के कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव में अनमने ढंग से भाजपा का साथ दिया था। आपको बता दें कि नड्डा ने कहा था कि भाजपा को अब संघ की जरूरत नहीं रह गई है।

15 अगस्त को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किला से देश को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने आरएसएस की तारीफ करते हुआ इसे दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ बताया। इसके बाद मोहन भागवत ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आरएसएस के एक कार्यक्रम में साफ शब्दों में कहा था कि राजनीति हो या समाज सेवा इसमें रिटायरमेंट की कोई उम्र नहीं होती है। इससे पहले संघ प्रमुख ने ही कहा था कि 75 साल की उम्र में लोगों को खुद से रिटायर हो जाना चाहिए। आपको बता दें कि इसी साल प्रधानमंत्री 75 साल के होने वाले हैं।

आरएसएस की प्रशंसा करने वालों में प्रधानमंत्री मोदी ही अकेले नहीं हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमिता शाह ने भी हाल ही में कई मौकों पर आरएसएस की सराहना की है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि उन्हें स्वयंसेवक होने पर गर्व है। आरएसएस का कार्यकर्ता होना किसी भी कीमत पर निगेटिव पॉइंट नहीं हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी स्वयंसेवक को तब तक नहीं रुकना है जब तक कि भारत फिर से महान नहीं बन जाता है।

भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं और आरएसएस चीफ के बयान से भाजपा और संघ के बीच रिश्ते सामान्य होने के संकेत मिल रहे हैं। अब इस बात की प्रबल संभावना है कि दोनों ही संगठन मिलकर जल्द ही भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर लगा सकते हैं। हालांकि संघ न कई मौकों पर कहा है कि सरकार या भाजपा के कार्यों में आरएसएस का हस्तक्षेप नहीं होता है।

आरएसएस और भाजपा के बीच सामान्य हुए रिश्तों में कई दावेदारों के नाम की चर्चा होने लगी है। उनमें सबसे पहला नाम शिवराज सिंह चौहान का आता है, जो कि वर्तमान केंद्र सरकार में मंत्री हैं। वहीं, नितिन गडकरी के नाम पर भी अंदरखाने चर्चा होने लगी है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और घर्मेंद्र प्रधान का नाम भी रेस में शामिल होने की चर्चा है। भाजपा अक्सर अपने फैसलों से सियासी पंडितों को चौंकाती रही है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनता है।

भविष्य की राजनीति तय करेंगे बिहार विधानसभा के चुनाव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पांच बार चुनाव जीता, परंतु यह निर्णायक चुनाव होगा…

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बिहार में होने वाला चुनाव सिर्फ एक लोकतांत्रिक कवायद नहीं है, इसमें तीन दिग्गजों- नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की राजनीति दांव पर लगी है. दो दल- जदयू और लोजपा अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि शक्तिशाली भाजपा और इंडिया का भंगुर गठबंधन सबसे कठिन लड़ाई में जूझने जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पांच बार चुनाव जीता है, परंतु यह उनका निर्णायक चुनाव होगा. उनकी पार्टी का वोट प्रतिशत 2010 के 22.6 फीसदी से घटकर 2020 में 15.7 प्रतिशत रह गया. ढांचागत सुधार, विद्युतीकरण में वृद्धि तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर करने जैसी उनकी उपलब्धियां निर्विवाद हैं, लेकिन अब उन पर थकान भारी पड़ रही है. बेरोजगारी बिहार की आत्मा से जुड़ी है, और 75 लाख लोग बिहार से बाहर मेहनत कर जीविका चला रहे हैं.

विस्थापन एक ऐसा घाव है, जो भरना ही नहीं चाहता. नीतीश कुमार को अपने दम पर बहुमत लाना होगा, ताकि एनडीए में अपनी पार्टी की प्रासंगिकता बनाए रखें, जिसने उन्हें मुख्यमंत्री प्रस्तावित किया है. इससे कुछ स्थानीय भाजपा नेता परेशान हैं, जो बड़ी भूमिका चाहते हैं. बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका इन दिनों तेजस्वी यादव निभा रहे हैं.

इस चुनाव में उन्हें लालू के बेटे से अलग पहचान साबित करनी होगी. इंडिया गठबंधन का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी अपने मुस्लिम-यादव जनाधार पर निर्भर हैं, जिसके बूते 2020 के चुनाव में 75 सीटें जीत राजद राज्य का सबसे बड़ा दल बनकर उभरा है. एनडीए के मजबूत जातिगत समीकरण को चुनौती देने के लिए तेजस्वी को अब ओबीसी, दलितों और कमजोर तबकों तक पहुंच बनानी होगी.

तेजस्वी के तेज, युवा केंद्रित और तकनीकी दक्षता से लैस चुनाव अभियान का दायरा बढ़ रहा है. एक ओपीनियन पोल के मुताबिक, मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी 36.9 प्रतिशत रेटिंग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 18.4 फीसदी रेटिंग से बहुत आगे है. इसके बावजूद तेजस्वी पर लालू यादव के दौर के जंगल राज का ठप्पा लगा हुआ है. बिहार के रण में राहुल गांधी भी अपनी योग्यता साबित करना चाहते हैं.

वर्ष 2020 में 19 सीटें जीतने वाली कांग्रेस गठबंधन में जूनियर पार्टनर है, फिर भी चुनाव में कांग्रेस की भूमिका बड़ी है. यह चुनाव न केवल इस प्रांत में कांग्रेस की संभावनाओं की परीक्षा है, बल्कि इसमें कांग्रेस का प्रदर्शन इंडिया गठबंधन के संभावित प्रधानमंत्री के रूप में राहुल की नियति भी तय करेगा.

तेजस्वी और कन्हैया कुमार के साथ राज्य पदयात्रा में उन्होंने उन मुद्दों को उभारा, जो युवाओं के मुद्दे हैं. यानी बेरोजगारी, विस्थापन और आर्थिक महत्वाकांक्षा. कांग्रेस का ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ नारा बिहार की हकीकत से जुड़ गया है, जहां के 51.2 फीसदी मतदाताओं ने रोजगार को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताई है. भाजपा के एजेंडे में आदर्शवाद कहीं नहीं है.

एनडीए की चुनावी गाड़ी बिहार में एक असामान्य बाधा का सामना कर रही है : राज्य में एक भी करिश्माई स्थानीय नेता नहीं है. ऐसे में, भाजपा नरेंद्र मोदी की व्यापक लोकप्रियता व चुंबकीय व्यक्तित्व तथा अमित शाह के रणनीतिक कौशल के सहारे आगे बढ़ेगी. वर्ष 2020 के 74 सीटों से आगे बढ़ने के लिए पार्टी मोदी के विकासवादी विमर्श के साथ राजद के दौर में कानून-व्यवस्था की विफलता को याद दिलाएगी.

चुनाव विश्लेषक एनडीए के पक्ष में 48.9 प्रतिशत तथा इंडिया गठबंधन के पक्ष में 35.8 फीसदी समर्थन का आंकड़ा दे रहे हैं. परंतु एनडीए सहयोगियों में सब कुछ ठीक नहीं दिखता. सीटों के मामले में चिराग पासवान की लोजपा और जदयू के बीच मतभेद हैं. चिराग पासवान 20-25 सीट मांग रहे हैं, पर जदयू इतनी सीटें देना नहीं चाहता.

चिराग पासवान बिहार चुनाव में सबसे अप्रत्याशित चेहरे के रूप में सामने हैं. अगर चुनाव में भाजपा और जदयू में से किसी को निर्णायक बहुमत नहीं मिलता तो मुख्यमंत्री के चयन में चिराग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. बिहार की राजनीति अब भी जातिगत समीकरणों पर निर्भर है. सभी 243 सीटों पर लड़ रही जन सुराज पार्टी जातिगत समीकरणों को महत्व नहीं दे रही.

पर इसके नेता प्रशांत किशोर की मुख्यमंत्री के रूप में रेटिंग मात्र 16.4 फीसदी है. बिहार का चुनाव एनडीए और इंडिया गठबंधन, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. राज्य के मतदाता सिर्फ अगले मुख्यमंत्री का ही चयन नहीं करेंगे, वे भारत के राजनीतिक भविष्य की भी नींव रखेंगे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मणिपुर का दौरा, विभिन्न विकास योजनाओं के शिलान्यास के साथ ही जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

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मई 2023 में नस्लीय हिंसा भड़कने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मणिपुर का दौरा करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मैतेयी बहुल इंफाल के साथ-साथ कुकी बहुल चुड़ा चांदपुर में विभिन्न विकास योजनाओं के शिलान्यास के साथ ही जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

दोनों समुदायों को साधने की करेंगे कोशिश पीएम माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा लंबे समय से नस्लीय हिंसाका शिकार रहे मणिपुर में स्थायी शांति की राह को आसान बनाने का काम करेगा। विपक्ष लंबे समय से प्रधानमंत्री के मणिपुर नहीं जाने को मुद्दा बनाता रहा है। मणिपुर के बाद प्रधानमंत्री का असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

दरअसल मणिपुर हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद तीन मई 2023 को कुकी और मैतेयी समुदायों के बीच हिंसा शुरू हो गई थी। उसके बाद कुकी समुदायों द्वारा असम से जोड़ने वाले एनएच-दो समेत अन्य सड़क मार्गों को बंद कर दिया गया था।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हिंसा पर काबू करने के बाद विश्वास बहाली के लिए इस साल फरवरी में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। इसके बाद दोनों समुदायों के साथ अलग-अलग और फिर एक साथ बैठकर शांति की कोशिश पिछले महीने रंग लाई।

दिल्ली में कुकी उग्रवादी गुटों ने संस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन पर हस्ताक्षर पर अपनी शिविरों को मैतेयी बहुल इलाकों से दूर करने पर सहमति दे दी। कुकी-जो संगठन ने भी एनएच-दो समेत सभी राजमार्गों को आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति दे दी।

प्रधानमंत्री का दौरा का अहम शांति की दिशा में इन प्रयासों के बाद अब प्रधानमंत्री का दौरा इसे स्थायित्व देने के लिहाज से अहम है। प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम कुकी बहुल चुड़ा चांदपुर और मैतेयी बहुल इंफाल दोनों को चुनकर यह संदेश दिया गया है कि सरकार दोनों को समान रूप से अहमियत दे रही है। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

चुड़ा चांदपुर में वे 7300 करोड़ तो. इंफाल में 3600 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की पीएम आधारशिला रखेगे। साथ ही 2500 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग की पांच परियोजनाओं, मणिपुर इंफोटेक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और नौ स्थानों पर वर्किंग वुमेन होस्टल का भी शिलान्यास करेंगे।

पीएम मोदी असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का दौरा भी करेंगे मणिपुर के बाद प्रधानमंत्री मोदी अगले कुछ महीने में होने वाले विधानसभा चुनावों वाले राज्य असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जाएगा। असम में 13 सितंबर को भारत रत्न भूपेन हजारिका के जन्म शताब्दी समारोह में हिस्सा लेने के बाद 14 सितंबर को 18500 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलायांस करेंगे।

15 सितंबर को कोलकाता में 16वीं संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस का उद्घाटन करने के बाद बिहार के पूर्णिया जाएंगे। पूर्णिया में हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन के साथ-साथ नव गठित राष्ट्रीय मखाना बोर्ड को लांच करेंगे।

पूर्णिया में हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन साथ ही लगभग 3600 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे, जिनमें भागलपुर के पीरपैंती में 2400 मेगावाट की थर्मल पावर प्लांट, कोशी-मेची नदी को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट शामिल हैं।

“‘शांति के लिए प्रतिबद्ध है भारत’, नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन पर पीएम मोदी ने दी बधाई”

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नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद अब अंतरिम सरकार का गठन किया जा चुका है। पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने पर पीएम मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने सुशीला कार्की को बधाई दी है।

दरअसल, पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि नेपाल की अंतरिम सरकार की पीएम के रूप में पद ग्रहण पर माननीय सुशीला कार्की जी को शुभकामनाएं। उन्होंने आगे लिखा कि नेपाल के भाई-बहनों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए भारत पूरी तरीके से प्रतिबद्ध है।

विदेश मंत्रालय ने भी जारी किया बयान बता दें कि शुक्रवार रात के करीब 9 बजे सुशील कार्की ने नेपाल के अंतरिम पीएम के रूप में शपथ ली। नेपाल के राष्ट्रपति ने उन्हें ये शपथ दिलाई। भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि एक करीबी पड़ोसी, एक लोकतांत्रिक देश और दीर्घकालिक विकास के साझेदार के रूप में भारत, दोनों देशों के लोगों और उनकी खुशहाली के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।

नेपाल में मार्च 2026 में होंगे आम चुनाव नेपाल में आम चुनाव 5 मार्च, 2026 को होंगे। इस चुनाव के बाद अंतरिम सरकार की जगह नेपाल को एक नई सरकार मिलेगी। बता दें कि नेपाल के अंतरिम पीएम के रूप में शपथ लेने के बाद वह देश की पहली महिला मुखिया के रूप में उभरी हैं। माना जा रहा है कि सुशीला कार्की के आने से भ्रष्टाचार-मुक्त की चाह रखने वाली जनता के लिए आशा की किरण के रूप में उभरी हैं।

“PM Modi ने मिजोरम को दी करोड़ों की सौगात, पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ा आइजोल”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल समेत उत्तर पूर्वी राज्यों के दौरे पर हैं। पीएम मोदी का यह दौरा 13 सितंबर से 15 सितंबर तक चलेगा। इस तीन दिवसीय दौरे में पीएम मोदी 5 राज्यों – मिजोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का रुख करेंगे। पीएम मोदी के दौरे का पहला पड़ाव मिजोरम है। मिजोरम पहुंचे पीएम मोदी ने राज्य को करोड़ों की नई सौगातें दी हैं। इनमें 8070 करोड़ रुपये की बैराबी सैरांग रेल लाइन भी शामिल है। इसी के साथ मिजोरम पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। पीएम मोदी ने 3 ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई है। पीएम मोदी ने मिजोरम की राजधानी आइजोल में 9000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया है। आइजोल बाईपास समेत थेनजोल-सियालसुक और खानकाउन-रोंगूरा में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा? मिजोरम में परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं मिजोरम के लेंगपुई एयरपोर्ट पर हूं। दुर्भाग्य से मौसम खराब होने के कारण मैं आइजोल के लोगों से नहीं मिल सका। मगर, मैं यहां से भी आपके प्यार और स्नेह को महसूस कर सकता हूं।”

पीएम मोदी ने कहा- आज मिजोरम देश के विकास में एक अहम रोल निभा रहा है। यह न सिर्फ देश बल्कि मिजोरम के लोगों के लिए भी ऐतिहासित दिन है। आज आइजोल भारत के रेलवे नक्शे में शामिल हो गया है। कई चुनौतियों का सामना करने के बाद बैराबी-सैरांग रेल लाइन को हकीकत में तब्दील किया गया है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे दिल सीधे एक-दूसरे से जुड़ते हैं। अब पहली बार सोरांग राजधानी एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली से जुड़ चुका है। यह महज रेलवे कनेक्शन नहीं है, यह ट्रांसफोर्मेशन की लाइफलाइन है। यह मिजोरम के लोगों के लिए नई क्रांति साबित होगी। अब यहां के लोग पूरे भारत से जुड़ सकेगें।”

पीएम मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “काफी लंबे समय से हमारे देश की राजनीतिक पार्टियों ने वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए पूरे उत्तर पूर्वी राज्यों को नजरअंदाज किया। मगर, हमारा नजरिया पूरी तरह से अलग है। जिन्हें पहले नजरअंदाज किया गया अब वो हमारी पहली प्राथमिकता हैं।”

उत्तर पूर्वी राज्यों में बेहतर हुई कनेक्टिविटी पीएम मोदी के अनुसार, “पिछले 11 सालों से हम नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए काम कर रहे हैं। यह क्षेत्र देश के लिए ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। पिछले कुछ सालों में उत्तर पूर्व के ज्यादातर राज्य रेल नेटवर्क से जुड़े। ग्रामीण सड़कें, हाईवे, मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट कनेक्शन, पानी और बिजली का कनेक्शन मजबूत हुआ है। मिजोरम को उड़ान स्कीम का भी लाभ मिला है। बहुत जल्द यहां हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू हो जाएगी।”

“यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़… नेपाल में जेन-ज़ी प्रोटेस्ट के बाद फंसे कई भारतीय नागरिक, लगाई मदद की गुहार”

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नेपाल में जारी जेन-जी आंदोलन का असर अब भारत के कई हिस्सों पर भी दिखाई दे रहा है. बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के कई भारतीय नागरिक नेपाल में फंसे हुए हैं और अपने देश लौटने की अपील कर रहे हैं.

इस आंदोलन ने नेपाल में जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे कर्फ्यू, आगजनी और हिंसक प्रदर्शनों का माहौल बना हुआ है. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले संतोष कुमार शर्मा और उनके परिवार के सदस्य काठमांडू में फंसे हुए हैं. उन्होंने बताया कि कर्फ्यू के कारण वे अपने किराए के मकान में कैद हैं और केवल दो घंटे की छूट मिलती है, उसी दौरान वे खाने-पीने का सामान खरीद पाते हैं.

इसी तरह, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से पांच युवक भी नेपाल में फंसे हैं. उनके परिजनों ने छत्तीसगढ़ सरकार से संपर्क किया है, जिसके बाद सरकार ने उन्हें सुरक्षित वापस लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं.

पर्यटकों और ड्राइवरों की परेशानी… उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में सोनौली बॉर्डर पर पहुंचे पर्यटकों ने नेपाल में हुई हिंसा की कहानियां बताईं. अहमदाबाद से आए एक पर्यटक दल ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने गाड़ियों को जलते हुए देखा, जिससे वे डर गए. इसके अलावा, भारत-नेपाल सीमा पर कई ट्रक ड्राइवर भी फंसे हैं, क्योंकि भैरहवा में कस्टम कार्यालय में आगजनी के कारण ट्रकों की आवाजाही बाधित हो गई है. कर्फ्यू के कारण ड्राइवरों को खाने-पीने की भी समस्या हो रही है.

भारतीयों की मौत और सुरक्षा के प्रयास नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई हिंसा में गाजियाबाद के ट्रांसपोर्टर रामवीर सिंह गोला की पत्नी राजेश गोला की दर्दनाक मौत हो गई. आग लगने के बाद जान बचाने के लिए वह रस्सी के सहारे उतर रही थीं, तभी उनका हाथ छूट गया और नीचे गिरने से उनकी मौत हो गई. इस बीच, भारत ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है. श्रावस्ती में पुलिस बल और सशस्त्र सीमा बल के साथ एरिया डोमिनेशन किया जा रहा है और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है.

नेपाल के नेताओं की प्रतिक्रिया… नेपाल में चल रहे आंदोलन पर भारत के कई राजनेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी नेता विनय कटियार ने कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) नेताओं के बयानों को ‘दोगला’ कहा. सांसद साक्षी महाराज ने नेपाल के लोगों के लिए प्रार्थना की है. वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नेपाल में राजतंत्र की वापसी का समर्थन किया है, क्योंकि उनका मानना है कि हिंदू शासन व्यवस्था राजतंत्र ही है.

नेपाल में जेल ब्रेक की घटना नेपाल के रौतहट जिले के गौर कारागार से 227 कैदी जेल तोड़कर भागने में सफल रहे. इस घटना के बाद एसएसबी और पुलिस ने सीमा पर चौकसी बढ़ा दी. भारत में प्रवेश करने के दौरान 13 कैदी पकड़े गए, जिनमें से एक को सीतामढ़ी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

पेट्रोल की किल्लत नेपाल के धनगढ़ी में कर्फ्यू की वजह से नागरिकों को पेट्रोल मिलने में काफी दिक्कत हो रही है. निजी पेट्रोल पंप बंद हैं, और केवल पुलिस कोष से बने सरकारी पेट्रोल पंप पर ही पेट्रोल मिल रहा है, जहां एक किलोमीटर लंबी लाइनें लगी हुई हैं.

गुजरात के जामनगर में रहने वाले करीब 21 हजार नेपाली नागरिकों ने नेपाल के मौजूदा हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भ्रष्ट नेताओं का पर्दाफाश होना एक पॉजिटिव बात है, लेकिन हिंसा की वजह से निर्दोष लोगों की मौत और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचना देश के लिए चिंताजनक है.

सुशीला कार्की और भारत का संबंध नेपाल में जेन-ज़ी आंदोलनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य जज सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव किया है. उनका भारत से गहरा नाता रहा है. उन्होंने 1975 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी. सुप्रीम कोर्ट में उनके कई फैसले महत्वपूर्ण रहे हैं.

“देश में भारी मॉनसूनी बारिश के बावजूद फसलें सुरक्षित, कृषि उत्पादन पर नहीं असर! जानिए क्या कहते हैं आंकड़े”

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मॉनसूनी बारिश से भारत के कई राज्यों में तबाही देखने को मिली है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है.

वहीं, दस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. इस मौसम के चलते खेतों में किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है. हालांकि, ताजा बुवाई के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के कुल कृषि उत्पादन पर इन मॉनसूनी चुनौतियों का नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है.

अगस्त में हुई भारी बारिश अगस्त कई सालों में सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना रहा है और सितंबर में भी भारत के कुछ हिस्सों में अब तक सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है. अगस्त के आखिरी हफ्ते और सितंबर के पहले हफ्ते में हुई भारी बारिश ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के हालात पैदा किए हैं जिससे लोगों को नुकसान हुआ है.

बारिश से फसलों को कितना नुकसान? भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल के मॉनसून सीजन में भारत में अब तक औसत के मुकाबले 7.6 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है. पंजाब और हरियाणा जैसे दो बड़े खरीफ राज्यों में फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं. दूसरी तरफ, बिहार और असम जैसे राज्यों में मॉनसून की कमी 30 प्रतिशत से ज्यादा रही है, जिससे वहां खरीफ की बुवाई पर असर पड़ने की संभावना है.

हालांकि, पिछले पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि गेहूं, मक्का और मोटे अनाज जैसी फसलों के मामले में बुवाई क्षेत्र और उत्पादन के बीच लगभग वन-टू-वन का संबंध रहा है, यानी जब बुवाई का क्षेत्र बढ़ता है, तो उत्पादन भी आमतौर पर बढ़ता है. उदाहरण के तौर पर, चावल की बात करें तो 2020-21 से लेकर अब तक (केवल 2022-23 को छोड़कर) हर साल बुवाई का क्षेत्रफल बढ़ा है, इसी तरह चावल का उत्पादन भी 2022-23 को छोड़कर, हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ा है.

क्या कहते हैं आंकड़े? लेटेस्ट सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल खरीफ धान की बुवाई का कुल क्षेत्र 4.7 प्रतिशत बढ़ा है. सात प्रमुख खरीफ फसलों में से चार की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है, जबकि तिलहन, जूट और कपास में मामूली गिरावट देखी गई है. मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली है, इनमें बुवाई का क्षेत्र 6.7 प्रतिशत बढ़ा है.

लगातार चार साल की गिरावट के बाद इस साल दालों की बुवाई का क्षेत्र भी बढ़ा है, यह बात उत्साहजनक है कि हाल के सालों में बुवाई का क्षेत्र कम होने के बावजूद 2024-25 में दालों का उत्पादन करीब 7.5 प्रतिशत बढ़ा है. मजबूत फसल उत्पादन, महंगाई को काबू करने में मदद करता है.