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बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, भारत का फर्टिलिटी रेट में गिरावट, इन्फर्टिलिटी और आबादी की समस्या UNFPA की रिपोर्ट में स्पष्ट है…

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बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, भारत का फर्टिलिटी रेट में गिरावट, इन्फर्टिलिटी और आबादी की समस्या UNFPA की रिपोर्ट में स्पष्ट है…

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले चार दशकों में यह संख्या 1.7 अरब तक जाएगी और फिर धीरे-धीरे गिरावट शुरू होगी.

रिपोर्ट बताती है कि भारत का Total Fertility Rate (TFR) अब 1.9 पर आ गया है, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है. इसका अर्थ है कि हर पीढ़ी खुद को पूरी तरह से रिप्लेस नहीं कर पा रही. यह स्थिति भले जनसंख्या वृद्धि को कंट्रोल करती दिखे, लेकिन इसके पीछे छिपा बड़ा मुद्दा यह है कि लोग अपनी इच्छानुसार परिवार नहीं बना पा रहे. खासकर शहरी क्षेत्रों में आर्थिक दबाव, बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों ने बच्चों के जन्म को टालने या छोड़ने का चलन बढ़ा दिया है. यही वजह है कि बढ़ती आबादी के बावजूद इन्फर्टिलिटी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है.

भारत का फर्टिलिटी रेट में गिरावट के कई कारण हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी परिवार बड़े हैं, लेकिन शहरी इलाकों में स्थिति बिल्कुल अलग है. यहां एडुकेटेड मिडल-क्लास कपल्स आर्थिक असुरक्षा, नौकरी की अस्थिरता और महंगे मकानों के कारण बच्चा पैदा करने से हिचक रहे हैं. इसके अलावा देर से शादी करना, लगातार काम का दबाव और बढ़ती उम्र में मां पिता बनने की जिम्मेदारी लेना भी एक बड़ा कारण है.

लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें जैसे तनाव, अनहेल्दी खानपान, धूम्रपान और शराब का सेवन फर्टिलिटी रेट पर बुरा असर डाल रही हैं. वहीं, महिलाओं में पीसीओएस, थायरॉइड और हॉर्मोनल इम्बैलेंस जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे गर्भधारण की समस्या और कठिन होती जा रही है. इस तरह, आबादी बढ़ने के बावजूद समाज के कई लोग अपने इच्छित बच्चे प्राप्त करने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

इन्फर्टिलिटी और आबादी की समस्या UNFPA की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि समस्या केवल जनसंख्या कंट्रोल की नहीं है, बल्कि बच्चे पैदा करने से जुड़े फैसले की स्वतंत्रता की है. सर्वे के अनुसार, कई लोग अनचाही गर्भधारण का सामना करते हैं, जबकि उतने ही लोग अपनी इच्छित संतान नहीं पा पाते हैं. शहरी भारत में फर्टिलिटी रेट 1.6 से 1.7 तक गिर चुका है, जो गंभीर चिंता का विषय है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो साल 2100 तक भारत की आबादी करीब 93 करोड़ तक गिर सकती है. इससे सिर्फ आबादी से मिलने वाला आर्थिक फायदा ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और समाज पर भी असर पड़ेगा.

इन्फर्टिलिटी का एक कारण यह भी है कि आज के लाइफस्टाइल ने प्राकृतिक गर्भधारण प्रक्रिया पर दबाव बढ़ा दिया है. देर से गर्भधारण करने पर महिलाओं में समस्याएं बढ़ जाती हैं और पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी घटती है. इसके अलावा, आईवीएफ (IVF), आईयूआई (IUI) जैसे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट महंगे होने के कारण सभी के लिए उपलब्ध नहीं हैं. इसीलिए, यह चुनौती केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा मुद्दा बन चुकी है. अगर अभी से सही कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में आबादी का संतुलन गड़बड़ हो सकता है और गंभीर मुश्किलें आ सकती हैं.

समाधान और सुझाव फर्टिलिटी से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए आसान और सस्ती बनाना जरूरी है. युवाओं को स्वस्थ लाइफस्टाइल और अच्छी डाइट के प्रति जानकारी देना आवश्यक है. देर से विवाह या माता-पिता बनने पर विचार करते समय चिकित्सकीय सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है. महिलाओं में पीसीओएस, थायरॉइड और हॉर्मोनल समस्याओं की समय पर जांच और उपचार करना जरूरी है. समाज और सरकारी संस्थाओं को मिलकर फर्टिलिटी जागरूकता बढ़ाने के उपाय करने चाहिए.

“दिल्ली-NCR में 3 दिन बारिश का अलर्ट, 27 राज्यों में बरसेंगे बादल, पढ़ें अगले 6 दिन का IMD अपडेट”

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“दिल्ली-NCR में 3 दिन बारिश का अलर्ट, 27 राज्यों में बरसेंगे बादल, पढ़ें अगले 6 दिन का IMD अपडेट”

देशभर में मानसून के बादल जमकर बरस रहे हैं। पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में जहां मानसून की बारिश ने काफी तबाही मचाई और जान-माल का नुकसान कराया।

वहीं कई राज्यों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई। हालांकि मानसून की वापसी का समय नजदीक आ रहा है। आमतौर पर मानसून 15 सितंबरत तक वापस चला जाता है, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए इस बार मानसून की वापसी में देरी हो सकती है।

11 सितंबर तक ऐसा रहेगा मौसम भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 6 दिन यानी 11 सितंबर तक के लिए मौसम का अपडेट जारी कर दिया है।

IMD की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के 27 राज्यों में अगले 6 दिन मानसून की बारिश होने का पूर्वानुमान है। वहीं रीजनल वेदर फॉरकास्ट सेंटर (RWFC) की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 3 दिन गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम? रीजनल वेदर फॉरकास्ट सेंटर (RWFC) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पिछले कई दिन से आए दिन हवाएं चलने के साथ बारिश हो रही है, जिससे मौसम में ठंडक बनी हुई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली हुई है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 11 सितंबर तक मौसम ऐसा रही रहेगा। 6-7 और 9 सितंबर को गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। वहीं 8-10 और 11 सितंबर को हल्के बादल छाए रहेंगे।

कैसी हैं ताजा मौसमी परिस्थतियां? IMD की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे पूर्वी राजस्थान पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जो 7 सितंबर की सुबह तक दक्षिण राजस्थान और उससे सटे उत्तरी गुजरात पर चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र में बदल जाएगा। उत्तर-पूर्व दिशा में अरब सागर और उससे सटे गुजरात तट पर ऊपरी हवाओं का साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हवाओं में एक गर्त के रूप में समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर ऊपर एक्टिव है।

हरियाणा-पंजाब और राजस्थान में ऐसा रहेगा मौसम IMD की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर पश्चिम भारत में अगले 6 दिन अलग-अलग जगहों पर बारिश हो सकती है।

6-7 और 8 सितंबर को गुजरात के सौराष्ट्र एवं कच्छ में अलग-अलग जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश होने का अनुमान है। 6 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में, 7 सितंबर को दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में बहुत ज्यादा भारी बारिश हो सकती है। 6 और 8 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान में, 6 और 7 सितंबर को उत्तराखंड में, 8 और ​​9 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में, 8 से 10 सितंबर के बीच हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में, 10 सितंबर को पंजाब में, 10 और 11 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में, 7 और 8 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में, 7 सितंबर को कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र में बारिश हो सकती है।

बिहार और मध्य प्रदेश में ऐसा रहेगा मौसम पूर्वी और मध्य भारत में भी अगले 6 दिन अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

6 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में, अगले 6 दिन उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 8 से 10 सितंबर के बीच बिहार में, 9 और 10 सितंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में, 10 और 11 सितंबर को छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वोत्तर भारत में अगले 6 दिन अलग-अलग जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान है।

7-10 और 11 सितंबर को असम और मेघालय में, 7 सितंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में, 7 से 9 सितंबर के बीच अरुणाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है।

दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में अगले 5 दिन कुछ जगहों पर गरज और चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

6 सितंबर को तमिलनाडु में, 8-9 और 10 सितंबर को केरल और माहे में बारिश हो सकती है। वहीं अगले 5 दिन तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सतही हवाएं चलने की संभावना है।

शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत…

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शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत…

दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट से दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की सुनवाई टल गई है.

वहीं, कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में करेगा.

कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गुरुवार को अदालत में पेश होने से राहत दे दी. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वे इस समय पंजाब में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं और वहां राहत और बचाव कार्यों में पीड़ितों की मदद में जुटे हुए हैं.

ED और CBI ने शराब नीति में गड़बड़ी बताई राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस आधार पर उनकी उपस्थिति से दोनों नेताओं को पेशी से छूट दे दी. दिल्ली की शराब नीति के मामले में जांच एजेंसी ED ने यह केस मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दर्ज किया है. इस मामले में कई नेताओं और अधिकारियों पर जांच एजेंसी शिकंजा कस चुकी है.

जांच एजेंसियों CBI और ED ने आरोप लगाया कि इस नीति में जानबूझकर कमियां डाली गईं, जिससे निजी लोगों को फायदा पहुंचा और AAP नेताओं को 100 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत मिली.

ED ने PMLA के तहत दर्ज किया केस जांच एजेंसी ED के मुताबिक, यह रकम गोवा और पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए इस्तेमाल की गई. केजरीवाल को ED ने मार्च 2024 में गिरफ्तार किया था, जबकि सिसोदिया फरवरी 2023 से जेल में थे. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त-सितंबर 2024 में दोनों को जमानत दी थी, लेकिन कोर्ट में ट्रायल जारी है.

इस मामले की शुरुआत 2022 में हुई, जब दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल ने CBI जांच की सिफारिश की. CBI ने FIR दर्ज की, जिसमें सिसोदिया को मुख्य आरोपी बनाया गया. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल जोड़ते हुए PMLA के तहत केस दर्ज किया. हालांकि, अब देखना होगा कि अक्टूबर में होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले पर अदालत क्या कुछ अहम आदेश देती है.

बिहार चुनाव से पहले बड़ा केंद्र सरकार का बड़ा राजनीतिक दांव! क्या GST रिफॉर्म करेगा काम, जानें NDA का प्लान…

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बिहार चुनाव से पहले बड़ा केंद्र सरकार का बड़ा राजनीतिक दांव! क्या GST रिफॉर्म करेगा काम, जानें NDA का प्लान…

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (3 सितंबर 2025) को जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद जीएसटी की दरों में बदलाव की घोषणा की. अब सिर्फ 5 और 18 प्रतिशत की दर से ही ज्यादातर समानों पर जीएसटी लगेगा.

ये बदली हुई दरें 22 सितंबर से देशभर में लागू होंगी. यानी बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक कुछ दिन पहले ही ये फैसला लागू हो जाएगा.

अब पार्टी जीएसटी रिफॉर्म को भी बिहार चुनाव में भुनाने की तैयारी में लग गई है. इस बदलाव के बाद पार्टी का फोकस खास तौर पर बिहार चुनाव में मध्यम वर्ग, महिलाओं और किसान को साधने में है. जीएसटी रिफॉर्म के बाद सस्ते होने वाले सामानों की लिस्ट को देखा जाए तो इसका सीधा कनेक्शन आम आदमी और गरीब तबके से जुड़ता है. हेल्थ इंश्योरेंस और खाने के कई समाना को टैक्स फ्री किया जाना एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. इसके अलावा खाने पीने की तमाम चीजों पर टैक्स कम किया गया है. वहीं घर बनाने वाले कुछ मैटेरियल की कीमत में भी इस रिफॉर्म के बाद गिरावट आने की संभावना है.

बिहार चुनावों में GST रिफॉर्म्स को भुनाने की कोशिश ऐसे में बीजेपी अब बिहार विधानसभा चुनावों में जीएसटी रिफॉर्म्स को भुनाने में जुट गई है.

”पार्टी ने इसके लिए एक ओर सोशल मीडिया पर अभियान की शुरुआत कर दी है तो वहीं दूसरी ओर तमाम बड़े नेताओं को मीडिया से लेकर अपनी सभाओं में रिफॉर्म्स को लेकर प्रचार करने को कहा गया है.”

”सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया पर अभियान की बात करें तो देश और बिहार के तमाम बड़े नेताओं ने अपने सोशल मीडिया के जरिए पोस्ट कर उन चीजों की जानकारी देना शुरू कर दिया है”

”जिसका सीधा कनेक्शन मध्यम वर्ग और गरीब तबके से जुड़ा हुआ है. इसके साथ-साथ किस तरह से मध्यम वर्ग, गरीब और किसानों को इस से कितना फायदा होगा उसकी जानकारी से संबंधित पोस्ट करना शुरू कर दिया है. वहीं आने वाले दिनों में इस अभियान को और तेज किया जाएगा. इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक पार्टी के सभी नेताओं को रिफॉर्म्स को लेकर लगातार प्रचार करने को कहा गया है.”

NDA सम्मेलनों में GST का जिक्र बिहार में बीजेपी सहित NDA के सभी बड़े नेता लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं.

सभी नेताओं को ये निर्देश दिया गया है कि अपनी रैलियों और सभी कार्यक्रमों में जीएसटी रिफॉर्म्स का ज्यादा से ज्यादा जिक्र करें. किस तरह से इससे मध्यम वर्ग, महिलाओं और किसानों की फायदा मिलेगा, इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जनता को बताएं. जिस से ये सभी वर्ग पार्टी के साथ फिर से जुड़ सकें. बिहार में चल रहे एनडीए सम्मेलनों में भी इसका जिक्र करते हुए नेता दिखाई देंगे. इसके साथ-साथ बीजेपी जीएसटी रिफॉर्म्स को लेकर राज्य में सेमिनार, गोष्ठियां और कई अन्य तरह के कार्यक्रम करने की योजना भी बना रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा जनता तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाए और चुनावों में इसका लाभ भी पार्टी को मिल सके.

प्रधानमंत्री मोदी की आगामी रैली देशभर के पार्टी के सभी बड़े नेता और मुख्यमंत्री लगातार मीडिया बाइट्स और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने में लगे हुए हैं.

इस फैसले के अगले दिन ही पार्टी के तमाम बड़े नेताओं के बयानों में भी इसकी झलक देखने को मिली है. दरअसल, केंद्रीय नेतृत्व के ओर से स्पष्ट तौर पर इसके निर्देश दिए गए हैं कि इन रिफॉर्म्स का जिक्र कर लोगों तक हर जानकारी को पहुंचाया जाए, जिसका लाभ पार्टी को मिल सके. इसका असर आगामी दिनों में देखने को मिलेगा. पीएम मोदी समेत कई नेताओं के रैलियों में इसका जिक्र खुलकर किया जाएगा. खुद प्रधानमंत्री भी आगामी 17 सितंबर को होने वाली रैली में इसका जिक्र कर सकते हैं.

केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात, खेती होगी सस्ती, किसानों की आमदनी बढ़ेगी, GST में कटौती किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा ।

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केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात, खेती होगी सस्ती, किसानों की आमदनी बढ़ेगी, GST में कटौती किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा ।

केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात दी है। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में टैक्स स्लैब में ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। सरकार ने 12% और 28% वाले टैक्स स्लैब को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

अब सिर्फ तीन स्लैब रह गए हैं, 5%, 18% और 40%। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा।

खेती से जुड़े सामान पर टैक्स में बड़ी राहत नई टैक्स दरों के तहत कृषि क्षेत्र की अधिकांश वस्तुओं को 5% के दायरे में ला दिया गया है। पहले जिन उपकरणों और मशीनों पर 12% टैक्स लगता था, अब उन पर सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा। इसमें शामिल हैं: ट्रैक्टर और उनके पार्ट्स, कृषि टायर, सिंचाई मशीनें (ड्रिप, स्प्रिंकलर आदि), खाद बनाने की मशीनें, जैविक कीटनाशक (बायोपेस्टीसाइड्स), यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू होगा, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय गिरावट आएगी।

ट्रैक्टर, सिंचाई उपकरण और खाद बनाने वाली मशीनों जैसी जरूरी चीजों पर टैक्स कम होने से ये उत्पाद पहले से सस्ते हो जाएंगे। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसान भी इन आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। इससे कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी और किसानों की आमदनी में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

सरकार की नीयत साफ: कृषि क्षेत्र को मिल रहा प्राथमिकता आपको बता दें की जीएसटी काउंसिल का यह फैसला दर्शाता है कि सरकार कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है। टैक्स स्लैब में सुधार कर सरकार ने न सिर्फ टैक्स प्रणाली को सरल बनाया है, बल्कि किसानों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा है।

भविष्य की दिशा: निवेश और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा कम टैक्स दरों से सिर्फ किसान ही नहीं, कृषि उपकरण और खाद बनाने वाली कंपनियों को भी लाभ होगा। इससे इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा, नई तकनीकों का विकास होगा और देश में कृषि के आधुनिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

नई ताक़त, नया भारत, तीसरी ओर अंतरिक्ष विज्ञान में विश्वस्तरीय छलांग, दुनिया की महाशक्तियों को सीधी चुनौती…

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नई ताक़त, नया भारत, तीसरी ओर अंतरिक्ष विज्ञान में विश्वस्तरीय छलांग, दुनिया की महाशक्तियों को सीधी चुनौती…

21वीं सदी का भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक निर्णायक वैश्विक शक्ति बन चुका है। एक तरफ रिकॉर्ड आर्थिक वृद्धि, दूसरी तरफ आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन, और तीसरी ओर अंतरिक्ष विज्ञान में विश्वस्तरीय छलांग।

इन तीनों मोर्चों पर भारत ने न केवल उपलब्धियाँ दर्ज की हैं, बल्कि अब वह दुनिया की महाशक्तियों को सीधी चुनौती भी दे रहा है।

आर्थिक मोर्चे पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ताकत भारत की अर्थव्यवस्था 2025 की दूसरी तिमाही में $4.2 ट्रिलियन को पार कर चुकी है, जिससे वह जापान को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। हालिया रिपोर्टों में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% आंकी गई है, जो दुनिया के बड़े देशों में सबसे तेज़ है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत अब अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। जबकि डिजिटल भुगतान, AI, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान खींचा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों ने घरेलू उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

डिफेंस: आत्मनिर्भर भारत की सैन्य शक्ति एक समय में रक्षा उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाला भारत, आज खुद लड़ाकू विमान, ड्रोन, पनडुब्बियाँ और मिसाइल सिस्टम बना रहा है। तेजस फाइटर जेट, अग्नि-5 मिसाइल और INS विक्रांत जैसे प्रोजेक्ट भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। रक्षा निर्यात 2024-25 में ₹21,000 करोड़ को पार कर गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल और निजी क्षेत्र की भागीदारी से रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व नवाचार हो रहे हैं। भारत अब एक आयातक नहीं, निर्यातक रक्षा शक्ति बन रहा है।

अंतरिक्ष: चंद्रयान से लेकर गगनयान तक का सफर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने दुनिया को फिर चौंकाया है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब गगनयान की तैयारी जोरों पर है। 2025 के अंत तक भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन प्रस्तावित है। Aditya L1 मिशन ने सूर्य के रहस्यों को जानने की नई शुरुआत की है। जबकि भारत अब कॉमर्शियल सैटेलाइट लॉन्चिंग का हब बनता जा रहा है। छोटे देशों के लिए ISRO सबसे भरोसेमंद साझेदार बन चुका है।

“त्योहारी तोहफा! बड़ी खुशखबरी” त्योहारों से पहले मिलेगा डबल तोहफा?

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“त्योहारी तोहफा! बड़ी खुशखबरी” त्योहारों से पहले मिलेगा डबल तोहफा?

जैसे-जैसे त्यौहारों का मौसम नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें भी परवान चढ़ रही हैं। इस बार सरकार की अगली बड़ी घोषणा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।

माना जा रहा है कि महंगाई भत्ता-DA और महंगाई राहत-DR में एक और बढ़ोतरी की घोषणा जल्द ही हो सकती है, जिससे एक करोड़ से ज्यादा सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारक सीधे लाभान्वित होंगे।

महंगाई दर और वेतन आयोग बना आधार केंद्रीय कर्मचारियों का DA और पेंशनभोगियों का DR हर साल दो बार बढ़ाया जाता है। जनवरी और जुलाई में। इस बार जुलाई 2025 की संभावित बढ़ोतरी पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हाल ही में जारी महंगाई दर के आंकड़े और 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि सरकार त्योहारों से पहले इसका ऐलान कर सकती है।

पिछली बढ़ोतरी और मौजूदा स्थिति मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में DA और DR में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से प्रभावी हुई और साथ ही कर्मचारियों को एरियर का भुगतान भी मिला। उस बढ़ोतरी के बाद DA/DR की दर बढ़कर 55% हो गई है।

मासिक आय में कितना फर्क पड़ा? वर्तमान में जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹18,000 है, उन्हें 55% DA के तहत कुल ₹27,900 की मासिक आय मिल रही है। इसी तरह, जिन पेंशनर्स को ₹9,000 की मूल पेंशन मिलती है, उन्हें DR जोड़कर ₹13,950 मिल रहे हैं। अगर DA में फिर 3-4% की बढ़ोतरी होती है, तो इनकम में और इजाफा होना तय है।

त्योहारों से पहले मिलेगा डबल तोहफा? कई मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार त्योहारी सीजन से पहले DA-DR में 3% से 4% तक की बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। साथ ही कुछ वर्गों में बोनस की घोषणा की उम्मीद भी जताई जा रही है, जो दशहरा और दीपावली से पहले दिया जा सकता है।

“Ganesh Visarjan : गणेश विसर्जन कल, अगले साल कब आएंगे बप्पा, अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के 5 मुहूर्त, बप्पा को ऐसे दें विदाई…

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“Ganesh Visarjan : गणेश विसर्जन कल, अगले साल कब आएंगे बप्पा, अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के 5 मुहूर्त, बप्पा को ऐसे दें विदाई…

Ganesh Chaturthi : 6 सितंबर को ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ की गूंज के साथ गणेश विसर्जन किया जाएगा. गणेश जी के भक्तों के लिए गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक 10 दिन बहुत खास होते हैं.

गणेश चतुर्थी तिथि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर 2025 को सुबह 7.06 पर शुरू होगी और 7 सितंबर 2025 को सुबह 7.44 मिनट पर इसका समापन होगा.

गणेश चतुर्थी: स्थापना मुहूर्त मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त –

सुबह 11:02 – दोपहर 01:31 अवधि – 02 घण्टे 28 मिनट्स वर्जित चन्द्रदर्शन का समय -सुबह 09:01 – रात 08:09 अवधि – 11 घण्टे 08 मिनट्स गणेश स्थापना विधि गणेश चतुर्थी के दिन स्नान आदि के बाद स्वच्छ पीले या लाल रंग के कपड़े पहनें.

व्रत का संकल्प लें. उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा की चौकी रखें, लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं. गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. गणपति के दहीने ओर कलश की स्थापना करें. ऊपर से नारियल रखकर उस पर मौली बांध दें.

दूर्वा जोड़े में बनाकर अर्पित करें. लड्‌डू या मोदक भोग लगाएं.कथ सुनने के बाद आरती करें. गणेश जी की पूजा का महत्व शिवजी, विष्णुजी, दुर्गाजी, सूर्यदेव के साथ-साथ गणेश जी का नाम हिन्दू धर्म के पाँच प्रमुख देवों (पंच-देव) में शामिल है.

भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक, मंगलकारी, रक्षाकारक, सिद्धिदायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान प्रदायक माना गया है. इनकी आराधना से हर कार्य संभव हो जाता है.

किसी भी देव की आराधना के आरम्भ में किसी भी सत्कर्म व अनुष्ठान में, उत्तम से उत्तम और साधारण से साधारण कार्य में भी भगवान गणपति का स्मरण, उनका विधिवत पूजन किया जाता है. इनकी पूजा के बिना कोई भी मांगलिक कार्य को शुरु नहीं किया जाता है.

 

Dollar vs Rupee: “जीएसटी 2.0 के बाद पूरे जोश में रुपया, करेंसी की रिंग में मजबूत डॉलर को दी करारी शिकस्त”

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Dollar vs Rupee: “जीएसटी 2.0 के बाद पूरे जोश में रुपया, करेंसी की रिंग में मजबूत डॉलर को दी करारी शिकस्त”

Dollar vs Rupee: भारतीय रुपये में पिछले दिनों में बड़ी गिरावट देखी गई और यह सबसे निचले स्तर पर चला गया था. हालांकि, उसके बाद इसने अब थोड़ी रिकवरी की है. हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को वैश्विक कच्चे तेल के दाम में आई नरमी से भारतीय करेंसी को बल मिला.

इसके बाद अमेरिकी डॉलर की तुलना में यह एक पैसे की बढ़त के साथ 88.11 के स्तर पर पहुंच गया.

रुपये में क्यों तेजी? विदेशी मुद्रा कारोबारियों (Forex Traders) ने बताया कि विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने स्थानीय मुद्रा की बढ़त को सीमित कर दिया. हालांकि घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक धारणा ने भारतीय करेंसी को जबरदस्त समर्थन दिया.

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Currency Market) में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 88.11 पर खुला. इसके बाद 88.15 प्रति डॉलर पर लुढ़क गया. हालांकि जल्द वापसी करता हुआ 88.11 प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव से एक पैसे की बढ़त दर्शाता है. एक दिन पहले यानी गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.12 पर बंद हुआ था.

घरेलू बाजार में गिरावट छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.10 पर आ गया. घरेलू शेयर बाजारों में बीएसई पर 30 अंकों वाले सेंसेक्स शुरुआती कारोबार 318.55 अंक की बढ़त के साथ 81,036.56 अंक पर जबकि निफ्टी 98.05 अंक चढ़कर 24,832.35 अंक पर पहुंच गया. हालांकि, शुक्रवार को शेयर बाजार में यह मजबूती नहीं रह पाई. कुछ देर बाद ही सेंसेक्स करीब 135 अंक तक गिर गया जबकि निफ्टी भी 24,700 के नीचे चला गया.

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66.89 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बृहस्पतिवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 106.34 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

“‘दुनिया पर मंडरा रहा एक और बड़ा संकट, निर्दोष लोगों की जान…’, रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए UN में क्या बोला भारत”

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“‘दुनिया पर मंडरा रहा एक और बड़ा संकट, निर्दोष लोगों की जान…’, रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए UN में क्या बोला भारत”

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने यूक्रेन के हालातों और युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता जताई है. भारत ने कहा कि इस संघर्ष की वजह से ग्लोबल साउथ देशों पर काफी असर पड़ रहा है.

भारत ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाप्त किया जा सकता है और स्थाई शांति लाई जा सकती है.

ग्लोबल साउथ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में हैं. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने गुरुवार (4 सितंबर, 2025) को यूक्रेन की स्थिति को लेकर यूएन में चिंता जताई है और कहा, ‘हमारा मानना ​​है कि निर्दोष लोगों की जान जाना अस्वीकार्य है और युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता.’

संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति’ विषय पर चर्चा आयोजित की गई. इस चर्चा में हरीश ने कहा, ‘भारत को इस बात की चिंता है कि संघर्ष के परिणामस्वरूप ईंधन की कीमतें और अन्य चीजें पूरे विश्व को प्रभावित कर रहे हैं, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों को, जिन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. हमारा मानना है कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनकी वैध चिंताओं का समुचित समाधान किया जाए.’

भारत ने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी शांति के लिए सभी हितधारकों की पूर्ण भागीदारी और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है. हरीश ने कहा कि भारत ने पिछले महीने अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई शिखर बैठक का समर्थन किया और उसमें हुई प्रगति की सराहना की. हरीश ने कहा, ‘हम यूक्रेन के राष्ट्रपति और यूरोपीय नेताओं के साथ बातचीत करने के अमेरिकी राष्ट्रपति के कूटनीतिक प्रयासों पर भी ध्यान देते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना ​​है कि ये सभी कूटनीतिक प्रयास यूक्रेन में जारी संघर्ष को समाप्त कराने और स्थायी शांति की संभावनाओं के लिए अहम हैं.’

हरीश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूदा स्थिति पर पुतिन, जेलेंस्की और यूरोपीय नेतृत्व के संपर्क में हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन संघर्ष का शीघ्र अंत सभी के हित में है, साथ ही उन्होंने मोदी के इस संदेश का जिक्र किया कि यह युद्ध का युग नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के बयान से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन से बातचीत की. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘आपसी हितों के मुद्दों और यूक्रेन में संघर्ष को जल्द समाप्त कराने के प्रयासों पर विचार विमर्श किया.’

इससे पहले गुरुवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से बात की और द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की. जयशंकर ने कहा, ‘भारत इस संघर्ष के शीघ्र अंत और स्थाई शांति का समर्थन करता है.’ वहीं , सिबिहा ने कहा कि उन्होंने जयशंकर को युद्ध के वर्तमान हालात और न्यायसंगत शांति के लिए यूक्रेन के प्रयासों के बारे में जानकारी दी.