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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान पर पलटी मारते हुए अब टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी कर दिया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी कर दिया, टैरिफ घटाने की दूसरी बड़ी वजह क्या? 

गुरुवार को उन्होंने अमेरिका-जापान के बीच व्यापार समझौता लागू करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए, जिसमें जापान पर पहले लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया है।

इसमें रेसिप्रोकल और ऑटो टैरिफ दोनों शामिल है। अमेरिका ने ने इसे अमेरिका-जापान व्यापार संबंधों के एक नए युग की शुरुआत बताया है।

जापानी कारों पर पहले अमेरिका ने 27.5% का टैरिफ लगाया था लेकिन अब उसे भी घटाकर 15% कर दिया गया है। यह बदलाव इस महीने के अंत तक लागू हो जाएगा। ऑटोमोबाइल पर टैरिफ में कमी का ये आदेश सात दिन बाद ही लागू हो जाएगा। वाइट हाउस के बयान में कहा गया है, “इस समझौते के तहत, अमेरिका आने वाले करीब सभी जापानी आयातों पर अब 15% का बेसलाइन टैरिफ लगेगा।” साथ ही, यह भी कहा गया है कि यह ढांचा पारस्परिकता के सिद्धांतों और हमारे साझा राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।

टैरिफ घटाने की बड़ी वजह क्या? दरअसल, ट्रंप टैरिफ की वजह से पिछले महीने जापानी निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जो चार साल से भी ज़्यादा समय में सबसे बड़ी गिरावट है। AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, निर्यात में जुलाई में साल-दर-साल 2.6 फीसदी की गिरावट आई। इसमें अमेरिका को होने वाले निर्यात में 10.1 प्रतिशत की गिरावट भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका को जापान से मोटर वाहनों का निर्यात 28.4 फीसदी तक गिर गया, जबकि ऑटो पार्ट्स का निर्यात 17.4 फीसदी गिर गया। इससे अमेरिका के ऑटो बाजार में हलचल मच गई।

अमेरिकी बाजार पर असर अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने और अमेरिका के भारी व्यापार घाटे को कम करने के प्रयास में ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर भारी आयात शुल्क लगाए हैं। इसी कड़ी में ट्रंप प्रशासन ने अपने करीबी सहयोगी जापान पर शुरुआत में सभी निर्यात होने वाले सामानों पर 10% का शुल्क और कारों पर 27.5% का शुल्क लगाया था। अगस्त में ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का जापानी कार निर्माताओं पर भारी असर पड़ा और अमेरिकी निर्यात घट गए। इससे अमेरिकी बाजार प्रभावित होने लगा।

पिछले महीने अमेरिका-जापान व्यापार समझौता टोयोटा ने पिछले महीने कहा था कि उसे अमेरिका में भेजे जाने वाले वाहनों पर टैरिफ से लगभग 10 अरब डॉलर का नुकसान होने की आशंका है। बता दें कि जापान का ऑटोमोबाइल उद्योग, जिसमें टोयोटा और होंडा जैसी दिग्गज कंपनियाँ शामिल हैं, देश की लगभग आठ प्रतिशत नौकरियों का स्रोत है। इन उठापटक के बीच जापान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौता किया था, जिसके तहत 25% रिसिप्रोकल टैरिफ़ को घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। जापानी कारों पर भी कर की दर घटाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है।

दूसरी बड़ी वजह क्या? जापान पर ट्रंप की मेहरबानी की दूसरी बड़ी वजह चीन-रूस और भारत हैं, जिनके राष्ट्राध्यक्षों की तिकड़ी ट्रंप समेत पूरी दुनिया ने चीनी शहर तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान देखी थी। अमेरिका को लगता है कि इस तिकड़ी से उनका गणित कमजोर पड़ सकता है। इसके अलावा जब चीन ने द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के 80 वर्ष पूरे होने के मौके पर विशाल विक्ट्री डे परेड आयोजित किया और अमेरिका के दुश्मन देशों को एक मंच पर लाया तो अमेरिका को हिन्द-प्रशांत महासागर क्षेत्र में फिर से अपने करीबी मित्र जापान की याद आई।

अमेरिका को लगता है कि जापान को इस क्षेत्र में मित्र बनाकर रखने में उसका फायदा है क्योंकि चीन-रूस, ईरान और उत्तर कोरिया (CRINK) के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक गठजोड़ का भी जापान ने विरोध किया है। चीन-ताइवान संघर्ष में भी जापान अमेरिका के साथ है। इसके अलावा जापान ने चीन के विक्ट्री परेड का खुलकर विरोध किया था और कई देशों से स्पष्ट अपील की थी कि वे इसमें शामिल न हों। संभवत: इसी वजह से कई देशों के नेताओं ने चीन के इस परेड में शामिल होने से इनकार कर दिया था, उनमें भारत भी है।

“भारत से माल भर-भरकर धड़ाधड़ यूरोप जा रहे कंटेनर, जमकर पैसा बना रहे मुकेश अंबानी!”

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“भारत से माल भर-भरकर धड़ाधड़ यूरोप जा रहे कंटेनर, जमकर पैसा बना रहे मुकेश अंबानी!”

अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर 25% का अतिरक्त टैरिफ लगाया है। लेकिन भारत से यूरोप को होने वाले डीजल के निर्यात में भारी उछाल आया है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में यह 137% बढ़कर रोजाना 242,000 बैरल हो गया।

इसकी वजह यह है कि यूरोप के खरीदार एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। यूरोपीय संघ (EU) जनवरी 2026 से रूस से कर आने वाले कच्चे तेल से बने ईंधन पर प्रतिबंध लगाने वाला है। इस प्रतिबंध से रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों को नुकसान हो सकता है जो रूस से तेल खरीदकर उसे प्रोसेस करती हैं और फिर यूरोप को बेचती हैं।

भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ा प्रोसेसर और ईंधन का निर्यातक है। रियल टाइम डेटा और एनालिटिक्स देने वाली कंपनी Kpler के मुताबिक अगस्त में यूरोप को डीजल का निर्यात पिछले महीने की तुलना में 73% और पिछले 12 महीनों के औसत से 124% अधिक था। तेल का जहाजों पर नजर रखने वाली एक और कंपनी वोर्टेक्सा ने अनुमान लगाया कि अगस्त में भारत से यूरोप को डीजल का निर्यात 228,316 बीपीडी था, जो पिछले साल की तुलना में 166% और जुलाई की तुलना में 36% अधिक है।

क्यों आई तेजी? जानकारों का कहना है कि इस उछाल के कई कारण हैं। यूरोप की एक बड़ी रिफाइनरी ने अचानक मरम्मत का काम पहले शुरू करने का फैसला किया। साथ ही सर्दियों में डीजल की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा ईयू के प्रतिबंध लगने वाले हैं। इससे भारत से होने वाली आपूर्ति बंद हो सकती है। इसे 2025 के बाकी महीनों में भी यूरोप में भारतीय डीजल की मांग मजबूत बनी रहेगी। Kpler के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा कि नीदरलैंड की एक रिफाइनरी ने मेंटनेंस को एडवांस किया है।

इस बीच भारत को अमेरिकी अधिकारियों से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने भारतीय रिफाइनरियों पर आरोप लगाया है कि वे सस्ते रूसी कच्चे तेल को खरीदकर और उसे प्रोसेस करके पश्चिम को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं और इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मदद हो रही है। भारत ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि अगर पश्चिम को आपत्ति है तो वह भारतीय ईंधन खरीदना बंद कर सकता है।

ईयू की शर्त भारतीय निर्यातकों को इस साल यूरोप से मजबूत मांग देखने की उम्मीद है। रितोलिया ने कहा कि यूरोपीय खरीदार भारत से लिफ्टिंग में तेजी ला सकते हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट की रिफाइनरियों में अक्टूबर-नवंबर में हाई मेंटनेंस होगा। यूरोपीय शिपमेंट में उछाल के कारण अगस्त में भारत का कुल डीजल निर्यात बढ़कर 603,000 बीपीडी हो गया, जो जुलाई और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17% अधिक है। EU का कहना है कि आयातकों को तीसरे देशों से प्रोसेस प्रोडक्ट्स में उपयोग किए गए कच्चे तेल के मूल देश का प्रमाण देना होगा।

“मुस्लिमों के लिए बनेगी सोसाइटी, हिंदुओं को नहीं मिलेगी एंट्री! ‘हलाल लाइफस्टाइल’ को लेकर बीजेपी विधायक ने सीएम को लिखी चिट्ठी”

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“मुस्लिमों के लिए बनेगी सोसाइटी, हिंदुओं को नहीं मिलेगी एंट्री! ‘हलाल लाइफस्टाइल’ को लेकर बीजेपी विधायक ने सीएम को लिखी चिट्ठी”

भारत दुनिया का ऐसा देश है, जहां सभी धर्मों के लोग रहते हैं. इस देश में धर्म के नाम पर किसी भी राज्य, शहर, गांव या सोसाइटी को नहीं बांटा गया है, लेकिन अब देश में एक ऐसी सोसाइटी बनाई जा रही है, जो सिर्फ मुस्लिमों के लिए होगी.

यानी किसी भी दूसरे धर्म के लोगों को यहां घर नहीं मिलेगा. बता दें कि इसे हलाल लाइफस्टाइल वाली टाउनशिप बताया जा रहा है, जो मुंबई के आस-पास के इलाकों में बनाई जा रही है. इस मुस्लिम हाउसिंग सोसाइटीज को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में बीजेपी के विधायक अतुल भातखलकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक चिट्ठी लिखी है और तुरंत कार्रवाई की मांग की है. इस सोसाइटियों को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी गुस्सा है. लगातार अब एक ही मांग की जा रही है कि इस तरह के विज्ञापनों पर तत्काल रोक लगे और इससे जुड़ी संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए.

भाजपा विधायक ने लिखी चिट्ठी विधायक अतुल भातखलकर ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि सोशल मीडिया और दूसरे प्लेटफॉर्म पर कुछ संगठन खुलेआम हाउसिंग सोसाइटीज के विज्ञापन चला रहे हैं जो सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए हैं. उन्होंने खास तौर पर मुंबई के पास मीरा रोड ईस्ट में ‘हिल गैलेक्सी, विनय नगर रोड’ नाम की जगह का जिक्र किया है. इस विज्ञापन में साफ-साफ लिखा है कि यह हाउसिंग कॉम्प्लेक्स केवल मुस्लिम समुदाय के लिए है और इसमें एक मस्जिद भी बनाई जाएगी.

विधायक ने क्यों जताया विरोध? अतुल भातखलकर का कहना है कि इस तरह के विज्ञापन भारत के संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हैं. उनका मानना है कि ये विज्ञापन समाज में आपसी दुश्मनी, गुटबाजी और अशांति को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने इसे एक तरह का ‘जमीन जिहाद’ भी कहा. विधायक ने कहा कि जब कोई विज्ञापन सिर्फ एक खास समुदाय के लिए होता है और उसमें धार्मिक स्थल बनाने की बात की जाती है, तो यह हमारे समाज के आपसी भाईचारे के लिए बहुत नुकसानदायक है.

मुख्यमंत्री से की ये मांगें अपनी चिट्ठी में विधायक ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तीन खास मांगें की हैं. ये मांगे इस तहर के विज्ञापनों पर कड़ी कार्रवाई को लेकर हैं और इस पर किस तरह से रोक लगाई जाए, उसको दर्शाती है. बता दें कि इस चिट्ठी के सामने आने के बाद यह मामला और भी गरमा गया है. अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या कदम उठाती है. विज्ञापन पर रोक भाजपा विधायक ने कहा कि सबसे पहले तो ऐसे सभी विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगाई जाए.

सख्त कार्रवाई उन्होंने अपनी चिट्ठी में यह भी कहा कि जो संस्थाएं या लोग ऐसे विज्ञापन चला रही हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए नए नियम बनें चिट्ठी में इस बात का भी जिक्र किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ठोस नियम और गाइडलाइन बनाए, ताकि कोई भी समाज में फूट डालने वाला विज्ञापन न दे सके और राज्य की शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे.

“बाढ़ और उफनती नदियों ने मचाया तांडव; पंजाब, दिल्ली और हिमाचल पानी-पानी, मानसून ने तोड़ा 14 साल का रिकॉर्ड”

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“बाढ़ और उफनती नदियों ने मचाया तांडव; पंजाब, दिल्ली और हिमाचल पानी-पानी, मानसून ने तोड़ा 14 साल का रिकॉर्ड”

नई दिल्ली। उत्तर भारत में इस बार मानसून ने जमकर तबाही मचाई है। पिछले 14 सालों में ऐसा पहला मौका आया है जब लगातार दो हफ्तों तक इतनी बारिश हुई। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 22 अगस्त से 4 सितंबर के बीच उत्तर भारत में सामान्य से करीब तीन गुना ज्यादा बारिश हुई है।

इस दौरान जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मार्ग पर बादल फटने, पंजाब में दशकों बाद सबसे बड़ी बाढ़, दिल्ली में यमुना का जलस्तर तीसरे सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंचना और हिमाचल-उत्तराखंड में भारी भूस्खलन जैसी घटनाएं हुईं।

क्या कहते हैं आंकड़े? आंकड़ों के मुताबिक, इन 14 दिनों में उत्तर भारत में औसतन 205.3 मिमी बारिश दर्ज की गई जबकि सामान्य तौर पर यह सिर्फ 73.1 मिमी होती है। यानी सिर्फ दो हफ्तों की बारिश से ही पूरे मानसून का 35% कोटा पूरा हो गया।

1 जून से लेकर 4 सितंबर तक उत्तर भारत में 691.7 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 37% ज्यादा है। अगर सितंबर के बाकी दिनों में सामान्य बारिश भी हुई तो यह आंकड़ा 750 मिमी से ऊपर जा सकता है। यह 1988 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला मानसून होगा।

1988 में कितनी हुई थी बारिश? 1988 में सबसे ज्यादा 813.5 मिमी बारिश हुई थी और 1994 में 737 मिमी। इस साल का मानसून दोनों को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड बुक में जगह बनाने की तैयारी में है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लगातार बारिश दो मौसम प्रणालियों के टकराने से हुई है। एक तरफ वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से भूमध्यसागर के पास से नमी वाली हवाएं आईं और दूसरी ओर पूर्वी मानसूनी हवाओं से उनका टकराव हुआ।

क्यों हो रही है इतनी बारिश? पहला टकराव 23 से 27 अगस्त तक हुआ और दूसरा 29 अगस्त से शुरू होकर 4 सितंबर तक जारी रहा। आमतौर पर जुलाई-अगस्त के पीक मानसून में ऐसे दोहरे टकराव कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार बैक-टू-बैक हुए।

इसका सबसे ज्यादा असर पहाड़ी राज्यों में दिखा। पंजाब में बारिश सामान्य से 388% और फिर 454% ज्यादा हुई। इसी तरह हरियाणा-चंडिगढ़-दिल्ली में 325%, हिमाचल में 314%, पश्चिमी राजस्थान में 285%, जम्मू-कश्मीर में 240% और उत्तराखंड में 190% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

“मुंबई एयरपोर्ट पर 12 करोड़ का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद, यात्री गिरफ्तार”

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छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई की। अधिकारियों ने 12 करोड़ रुपये मूल्य का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद करते हुए एक यात्री को गिरफ्तार किया।

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी यात्री कोल्हापुर से मुंबई एयरपोर्ट पर पहुँचा था। जैसे ही वह बाहर निकलने की तैयारी कर रहा था, कस्टम अधिकारियों ने उसे रोक लिया। जांच के दौरान यात्री के चेक-इन ट्रॉली बैग से 12 किलो 260 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया।

न्यायिक हिरासत में भेजा एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर किला कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

इसे भी पढ़ें- गेस्ट हाउस में बेचा जा रहा था गांजा, 3 आरोपी अरेस्ट-1 फरार, 2.17 लाख रुपए का माल जब्त लगातार बढ़ रही तस्करी पिछले कुछ महीनों से विदेशों, खासकर बैंकॉक से बड़ी मात्रा में हाइड्रोपोनिक गांजे की तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। केवल पिछले 2-3 महीनों में कस्टम विभाग ने कई यात्रियों को गिरफ्तार कर उनके पास से करोड़ों रुपये का माल जब्त किया है।

विशेष अभियान शुरू अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की लगातार घटनाओं को देखते हुए कस्टम विभाग ने तस्करों के खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू किया है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि संगठित गिरोह विदेशों से गांजे की सप्लाई कर रहे हैं और मुंबई जैसे बड़े शहरों में इसकी खपत बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

हाइड्रोपोनिक गांजा क्या है? हाइड्रोपोनिक गांजा मिट्टी की बजाय खास तकनीक से पानी और पोषक तत्वों के जरिए उगाया जाता है। इसकी क्वालिटी और असर अधिक होने के कारण इसकी कीमत भी सामान्य गांजे से कई गुना ज्यादा होती है। मुंबई एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई तस्करी के बढ़ते नेटवर्क को उजागर करती है और एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

दोगुना मुनाफे का झांसा देकर 16 लोगों से 68 लाख की ठगी, शातिर ने ऐसे दिया वारदात को अंजाम

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बिलासपुर में वेस्टिज कंपनी के नाम पर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पीड़ितों ने थाना सिविल लाइन में शिकायत की है। उन्होंने बताया कि सिंधी कॉलोनी कस्तूरबा नगर निवासी हीरा भागवानी सिंधी ने निवेश पर दोगुना राशि लौटाने का झांसा देकर 68 लाख रुपये की ठगी कर ली है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी ने कंपनी में पैसा लगाने पर मोटा मुनाफा और दोगुनी राशि लौटाने का आश्वासन दिया था। इस झांसे में आकर कई लोगों ने लाखों रुपए का निवेश किया। पीड़ितों की सूची में किरन साहू, मेवा यादव, शहजादा, संतोष साहू, बसंती साहू, पिंकी साहू, उषा साहू, पूनम, डॉली साहू समेत 16 से अधिक लोग शामिल हैं।

लाखों लेकर आरोपी हो गया फरार
पीड़ितों का कहना है कि आरोपी ने रकम लेने के बाद न तो वादे के अनुसार राशि लौटाई और न ही कोई जवाब दिया। अब सभी पीड़ितों ने थाना सिविल लाइन प्रभारी से आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध पंजीबद्ध कर रकम वसूलकर उन्हें लौटाने की मांग की है। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

ईडी की बड़ी कार्रवाई…..कृषि कारोबारियों के 18 ठिकानों पर छापेमारी, लेनदेन से जुड़े कागजात बरामद

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प्रर्वतन निदेशालय( ईडी) की टीम कृषि कारोबारियों के सभी 18 ठिकानों में छापेमारी करने के बाद गुरुवार देर रात लौटी। इस दौरान तलाशी में मिले लेनदेन के दस्तावेज, डीएमएफ घोटाले से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक और टेंडर से संबंधित पेपर और डिवाइस को जांच के लिए जब्त किया गया है। साथ ही सभी को ईडी दफ्तर में पूछताछ के लिए उपस्थिति दर्ज कराने नोटिस जारी किया गया है।

CG News: तलाशी में हुआ ये बड़ा खुलासा
बताया जाता है कि तलाशी में कृषि उपकरण और अन्य सामानों के टेंडर के एवज में 42 फीसदी तक कृषि विभाग के अधिकारियों को कमीशन दिए जाने के इनपुट मिले। इस खेल में जेल भेजे गए मनोज कुमार द्विवेदी के सूत्रधार होने की जानकारी मिली है। उसके द्वारा अपने एनजीओ फर्म उद्गम सेवा सेवा समिति के नाम से डीएमएफ के कई ठेके हासिल किए थे। वहीं कमीशन देने वाले अपने करीबी लोगों को निविदाएं स्वीकृत की गई। इसका कमीशन डायरेक्टर, अफसरों और रसूखदार लोगों तक पहुंचाया गया था। बता दें कि 575 करोड़ रुपए का डीएमएफ घोटाला सिंडीकेट बनाकर किया गया।

इनके ठिकानों पर छापेमारी
ईडी ने रायपुर में शंकर नगर चौपाटी के पास रहने वाले विनय गर्ग, ला विस्टा अमलीडीह निवासी पवन पोद्दार, शांति नगर भिलाई के विवेकानंद कॉलोनी निवासी सीए आदित्य किशन दिनोदिया, भिलाई-3 वसुंधरा नगर निवासी शिवकुमार मोदी, राजिम के उगमराज कोठारी नामक कारोबारी के घर और ऑफिस के साथ ही उक्त सभी के फर्मो में छापेमारी कर तलाशी ली गई।

डीएमएफ के खेल में करोड़ों का कमीशन
CG News: जिला खनिज निधि (डीएमएफ) राशि से उपकरण सप्लाई बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए। यह खेल निलंबित आईएएस रानू साहू (जमानत पर) के डॉयरेक्टर एग्रीकल्चर के एमडी के कार्यकाल के दौरान खरीदी सप्लाई के टेंडर नियमों में बदलाव करने की जानकारी मिली है। इतना ही नहीं फर्जी प्रोजेक्ट बनाने, मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, मेडिकल उपकरण खरीदी में नियमों को दरकिनार कर कमीशन वाले टेंडर पास कराए गए।

738 कैमरों की लोगों को परवाह नहीं… रोजाना 250 से ज्यादा ई-चालान, 8 माह में 6.86 करोड़ की वसूली

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छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर के चौक-चौराहों पर 500 से ज्यादा लोग रोज कैमरों के सामने ही ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं। कभी अधिक रफ्तार से चलते हैं तो कभी दोपहिया में तीन सवारी बैठाकर वाहन चलाते हैं। चौक-चौराहों में 700 से अधिक कैमरे लगे हैं, जिनसे ट्रैफिक नियम तोडऩे वालों पर नजर रखी जा रही है। इसके बावजूद ट्रैफिक नियम तोडऩे वालों को ई-चालान का डर नहीं है। रोज औसतन 250 से अधिक वाहन चालकों का ई-चालान कट रहा है। 8 माह में चालान के एवज में समन शुल्क 6 करोड़ से अधिक हो गया है।

कैमरों की लोगों को परवाह नहीं
आईटीएमएस के तहत प्रमुख चौक-चौराहों और मार्गों पर अलग-अलग तरह के 738 कैमरे लगाए गए हैं। इनके जरिए आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जाती है। जयस्तंभ चौक, फाफाडीह, घड़ी चौक, कलेक्टोरेट चौक, पचपेड़ीनाका चौक, तेलीबांधा चौक, शंकर नगर आदि चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर भी लगाए गए हैं।

आईटीएमएस के तहत पहले बिना हेलमेट वाले चालकों का ई-चालान नहीं होता था, लेकिन वर्ष 2020 से इसे भी शामिल कर लिया गया है। बिना हेलमेट के वाहन चलाने वालों के खिलाफ भी ई-चालान की कार्रवाई हो रही है। 8 माह में 58 हजार 610 ई-चालान जनवरी से अगस्त 2025 तक कुल 58 हजार 610 ई-चालान किया गया। इसके एवज में समन शुल्क के रूप में कुल 6 करोड़ 86 लाख 95 हजार 700 रुपए वसूले गए।

16000 NHM कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, 18 दिन से हड़ताल पर हैं, पूरे प्रदेश में हड़कंप

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छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के करीब 16,000 संविदा कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. यह कदम 25 अधिकारियों और कर्मचारियों की बर्खास्तगी के विरोध में उठाया गया है. पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े हुए हैं.
रायपुर में लगभग 1,600 NHM कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय का घेराव कर इस्तीफा सौंपा. CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी ने ज्ञापन तो लिया, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. उधर, जगदालपुर में हड़ताल पर बैठे 900 में से 887 कर्मचारियों ने प्रभारी CMO को इस्तीफा सौंपा. संगठन के 10 पदाधिकारियों की बर्खास्तगी के विरोध में यह निर्णय लिया गया.
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें, जिनमें नियमितीकरण और बेहतर कार्यस्थितियां शामिल हैं, लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं. हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे हड़ताल को और सख्त करेंगे.

जानकारों का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर इस हड़ताल का गहरा असर पड़ रहा है. सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत की कोई प्रगति नहीं होने से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर! कच्चे मकान ने ली मासूम की जान, गांव में शोक की लहर

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बस्तर जिले के नानगुर तहसील के अलनार गांव में भारी बारिश ने एक परिवार की खुशियां छीन ली. बारिश के कहर के कारण एक कच्चे मकान की दीवार ढह गई, जिसके मलबे में दबकर 14 वर्षीय मासूम छात्र लोकेश नाग की दर्दनाक मौत हो गई. इस हादसे में लोकेश की दादी भी गंभीर रूप से घायल हो गईं. यह दुखद घटना नानगुर ब्लॉक के अलनार गांव में हुई, जिसने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया.
लोकेश नाग आठवीं कक्षा का छात्र था. वह अपने परिवार के साथ गांव में रहता था. उस दिन भारी बारिश के कारण कच्चे मकान की दीवार कमजोर हो गई थी. अचानक दीवार भरभराकर गिर पड़ी. उस समय लोकेश और उनकी दादी दीवार के पास थे. मलबे में दबने से लोकेश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी दादी को गंभीर चोटें आईं. घायल दादी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
यह हादसा इतना दुखद था कि लोकेश के परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया. लोकेश के माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. गांववाले भी इस घटना से सदमे में हैं. लोकेश एक होनहार और मेहनती छात्र था, जो अपने स्कूल में पढ़ाई में अच्छा था. उसकी अचानक मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया.

स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के मौसम में कच्चे मकानों की स्थिति और खराब हो जाती है. कई बार ये मकान कमजोर होकर गिरने की कगार पर पहुंच जाते हैं. इस घटना ने गांव में कच्चे मकानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते मकानों की मरम्मत या पक्के मकान बनाने की व्यवस्था हो, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है.
स्थानीय प्रशासन ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. घायल दादी के इलाज के लिए सहायता प्रदान की जा रही है. साथ ही, परिवार को इस दुख की घड़ी में हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है. इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर पैदा कर दी है और लोग मासूम लोकेश को याद कर रहे हैं.