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नवरात्रि ही क्‍यों, जीएसटी गिफ्ट के लिए दिवाली का क्‍यों नहीं किया इंतजारUYJHMN

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केंद्र सरकार ने 22 सितंबर से लागू होने वाले GST दरों में बड़े कटौती के फैसले को अर्थशास्त्री और राजनीतिक पर्यवेक्षक दोनों ही अहम मान रहे हैं. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक ऐसी पहल बताया जा रहा है जो न सिर्फ उपभोग और सार्वजनिक खर्च को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी के लिए बड़ा तोहफा भी साबित होगी.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बार त्योहारों के मौसम में उपभोक्ता खर्च रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है. जीएसटी कटौती नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर से लागू होगी, जो दिवाली (20 अक्टूबर) से लगभग एक महीने पहले है. इससे उपभोक्ता खरीदारी को टालने की बजाय बढ़ाएंगे. बजट में नए टैक्स सिस्टम के तहत दी गई इनकम टैक्स राहत के बाद यह सरकार की तरफ से आम जनता के लिए इस साल का दूसरा बड़ा तोहफा है.

चार राज्‍यों में विधानसभा चुनाव
बीजेपी आगामी बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु चुनावों में इस कदम को अपने प्रचार अभियान का अहम हिस्सा बनाने जा रही है. पार्टी इस बात पर जोर देगी कि मोदी सरकार ने आम जनता की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ा है और उनकी क्रय शक्ति को बढ़ाया है. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में जीएसटी दरों के सरलीकरण को दिवाली गिफ्ट बताया था, लेकिन सरकार जानती थी कि अगर ये कटौती दिवाली के ठीक पहले की जाती तो उपभोक्ता खरीदारी को टाल सकते थे. इसलिए इसे समय से पहले लागू करने का फैसला किया गया.

आमलोगों को सीधा राहत
नई दरों के तहत रोजमर्रा की जरूरत की ज्यादातर वस्तुओं पर जीएसटी को घटाकर या तो 5% कर दिया गया है या शून्य. मेडिकल और जीवन बीमा पॉलिसी पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा. साथ ही जीवन रक्षक दवाओं और अधिकांश दवाओं पर कर दरें कम कर दी गई हैं. इससे आम आदमी को सीधी राहत मिलेगी.

UPA पर हमला
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार जीएसटी लागू नहीं कर पाई थी क्योंकि राज्यों को केंद्र पर भरोसा नहीं था. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को तय करना होगा कि उसे इस कटौती का समर्थन करना है या विरोध. अगर वे विरोध करते हैं, तो जनता के सामने उनकी असलियत सामने आ जाएगी.’ बीजेपी को उम्मीद है कि कांग्रेस की आलोचना उसे जनता की नजर में ‘एंटी-पब्लिक’ साबित करेगी, जबकि मोदी सरकार का यह कदम चुनावी मैदान में पार्टी के लिए सकारात्मक माहौल बनाएगा.

दुर्ग में बढ़ा क्राइम का ग्राफ, जुलाई 2025 तक 11 हत्या, नशा सबसे बड़ी वजह

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में संगीन अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है. इसमें हत्या, हत्या की कोशिश जैसी अपराधिक घटनाएं शामिल है. इसकी मूल वजह नशाखोरी मानी जा रहा है. दुर्ग जिला पुलिस नशे के खिलाफ कई अभियान चला रही है, लेकिन आंकडे बता रहे है कि प्रयासों के बावजूद भी घटनाएं रुक नहीं पा रही है. दुर्ग जिले में पिछले साल यानी 2024 में 61 हत्याएं हुई हैं, जो 3 साल की तुलना में करीब-करीब दोगुनी है. जिले में औसतन हर हफ्ते एक हत्या की वारदात सामने आई है. हालांकि 2025 में इसका ग्राफ कुछ कम हुआ है.
जुलाई 2025 तक 11 हत्याएं हुई है. इन हत्याओं की मुख्य वजह नशाखोरी सामने आई है. 75 प्रतिशत में हत्या की वजह नशा या उसी से जुड़ा कारण सामने आई है.
पुलिस ने चलाया नशे के खिलाफ अभियान
दुर्ग-भिलाई में पिछले 3 साल में 960 किलो गांजा, 406 ग्राम ब्राउन शुगर और 497 ग्राम हेरोइन जब्त हो चुकी है. बड़ी संख्या में युवा इसकी चपेट में आ रहे है. गांजा की सप्लाई ओडिशा और हेरोईन की सप्लाई मूल रूप से पंजाब जैसे प्रदेशों से हो रही है. जिला पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी पिछले साल हत्या के प्रयास के प्रकरणों में इजाफा हुआ. साल 2024 में 119 प्रकरण दर्ज किए गए.

इसके चलते चाकू और कटबाजी के प्रकरणों में ढाई गुना ज्यादा इजाफा हुआ. इससे पहले साल 2023 में 47 और साल 2022 में 57 हत्या के इरादे से हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुए. दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल का कहना है कि पुलिस लगातार यह प्रयास कर रही है कि अपराधिक घटनाओं को रोका जा सके. वहीं नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है ताकि युवाओं को नशे से दूर रखा जा सके.

रायपुर में कांग्रेस का महाभारत! BJP का कार्टून पोस्टर कर गया बवाल…किस खेमे में कौन है

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रायपुर में राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ गया है. इस बार मामला कांग्रेस की गुटबाजी को लेकर सामने आया, और मौका भुनाने में भाजपा ने कोई देरी नहीं की. भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक कार्टून पोस्टर जारी किया है, जिसमें कांग्रेस की अंदरूनी कलह को मज़ाकिया अंदाज़ में दिखाया गया है.
इस पोस्टर में राजीव भवन और भूपेश कार्यालय को बैकड्रॉप में रखा गया है. मज़ेदार बात ये है कि इसमें साफ-साफ दो खेमे बनाए गए हैं. एक तरफ दीपक बैज का कैंप दिखाया गया है, जिसमें चरणदास महंत और टी एस सिंहदेव जैसे दिग्गज नज़र आ रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ भूपेश बघेल का खेमा़ दिखाया गया है, जिसमें रवींद्र चौबे समेत कई नेता खड़े नज़र आ रहे हैं.

भाजपा ने इस कार्टून के जरिए सीधा तंज कसा है कि कांग्रेस के भीतर असली लड़ाई सत्ता की कुर्सी को लेकर है, न कि जनता के मुद्दों पर. कार्टून में नेताओं को जिस तरह से अलग-अलग खेमों में खड़ा दिखाया गया है, उससे साफ झलकता है कि भाजपा कांग्रेस की एकता पर उंगली उठाना चाहती है.

इससे पहले भी भाजपा कई बार कांग्रेस के अंदरूनी विवादों को लेकर निशाना साध चुकी है, लेकिन इस बार कार्टून पोस्टर ने सोशल मीडिया पर खासा हलचल मचा दी है. लोग इसे शेयर कर मज़ेदार कमेंट्स कर रहे हैं किसी ने लिखा “कांग्रेस का अपना ही महाभारत”, तो किसी ने कहा “भाजपा ने असली सियासी कॉमिक्स लॉन्च कर दिया है.”
दरअसल, छत्तीसगढ़ कांग्रेस में लंबे समय से दो बड़े खेमे चर्चा में रहे हैं एक सीएम भूपेश बघेल का और दूसरा टी एस सिंहदेव का. समय-समय पर इन खेमों की खींचतान सुर्खियों में रहती है. ऐसे में भाजपा ने इसी गुटबाजी को हथियार बना लिया और उसे मज़ाकिया अंदाज़ में जनता के सामने रख दिया.

संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री श्री साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत – 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। हमारी सरकार नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में आदिवासी संस्कृति के महानायकों की छवि को आमजन की जागरूकता के लिए प्रदर्शित करने मॉडल के रूप में उकेरा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करकमलों से इस म्यूजियम का शुभारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजादी के लगभग 40 वर्षों बाद आदिवासी विभाग का पृथक मंत्रालय बनाकर आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हीं के बताए मार्ग पर वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आदिवासी समाज के बेहतरी एवं समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना का संचालन कर रहे हैं, जिससे हितग्राहियों को शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह ने बस्तर, सरगुजा एवं मध्य क्षेत्र प्राधिकरण का गठन कर विकास को गति प्रदान करने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि युवा आदिवासियों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हमने नई उद्योग नीति बनाई है, जिसमें बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना राज्य में ही की जा रही है।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। श्री कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री राम कुमार टोप्पो, विधायक श्री आशाराम नेताम, विधायक श्री प्रबोध मिंज, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम श्री राम सेवक सिंह पैकरा, केशकला बोर्ड की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, सभापति जिला पंचायत धमतरी श्री टीकाराम कंवर, प्रदेश अध्यक्ष कंवर समाज श्री हरवंश सिंह मिरी, अध्यक्ष कंवर समाज रायपुर महानगर श्री मनोहर सिंह पैकरा सहित कंवर समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

600 रुपये हुई गैस सिलेंडर की कीमत, जानिये अपने शहर का लेटेस्ट LPG सिलेंडर का रेट!

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600 रुपये हुई गैस सिलेंडर की कीमत, जानिये अपने शहर का लेटेस्ट LPG सिलेंडर का रेट!

आज के समय मे हर घर में LPG सिलेंडर मौजूद है। भारत सरकार के द्वारा भी भारतीय नागिरकों को मुफ्त में LPG सिलेंडर दिए गए। अकसर इनकी कीमतों में ऊतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। जिससे लोगों को कभी कभी परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।

आज के इस आर्टिकल में हम आपको 14.2 KG से लेकर 19 KG सिलेंडर के बारे में पूरी जानकारी देने वाली है।

क्या सस्सा हुआ है LPG सिलेंडर : LPG गैस सिलेडंर में बीते कुछ समय में लगातर कीमते बढ़ती जा रही है। जिससे लोगों को काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक बार फिर से हाल ही में LPG सिलेंडर पर 5 रुपये कि बढ़ोत्ती देखने को मिली है। यह बढ़ोत्ती कमर्शियल गैस सिलेंडर कि कीमते है। वही घरेलू गैस सिलेंडर कि कीमतों को बात करे तो उसमें 12 रुपये कि बढ़ोत्ती देखने को मिली है।

600 रुपये हुई गैस सिलेंडर की कीमत जैसा कि हमने आपको बताया कि आज के समय में लगभग देश के 80 प्रतिशत लोगों के घरो में गैस सिलेंडर मौजूद है। लेकिन लोगों को तब परेशानी होती है जब इसकी कीमतों में बढ़ोत्तरी होती है। ऐसे में लोगों कि जेब पर काफी ज्यादा असर पड़ता है। लेकिन भारत सरकार ने उज्जवला योजना के तहत महिलाओं को सब्सिडी देना का वादा किया। यानी कि इस हिसाब से महिलाओं को जो सिलेंडर 800 रुपये का मिलता है। वह उन महिलाओं को केवल 600 रुपये में मिल जाएगा। इसी के साथ ही 900 रुपये वाला 600 रुपये का मिल जाएगा। जिसमें लोगों को काफी राहत होने वाली है।

घरेलू LPG सिलेंडर कि कीमते : घरेल सिलेंडर कि कीमतों कि बात करें तो इसकी कीमतें अलग-अलग शहरों में अलग अलग है। पटना में 14.2 KG के सिलेंडर कि कीमत 939 रुपये है वही दिल्ली में 853 रुपये, मेरठ में 855 रुपये में, बैगलुरु में 855 रुपये 55 पैसे में, हैदराबाद में 905.25 रुपये में, आगरा में 865.50 रुपये, गाजियाबाद में 855 रुपये 75 पैसे में, गुरुग्राम में 861 रुपये 25 पैसे में, वाराणसी में 926 रुपये 50 पैसे मं मुंबई में 852 रुपये 47 पैसे में, हैदराबाद में 905 रुपये 23 पैसे में गैस सिलेंडर मिल रहा हैं।

“RBI Fixed Deposit Rules :FD में निवेश करने वालों को बड़ा झटका, RBI ने कर दिया यह बड़ा ऐलान”

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“RBI Fixed Deposit Rules :FD में निवेश करने वालों को बड़ा झटका, RBI ने कर दिया यह बड़ा ऐलान”

RBI Fixed Deposit Rules: आज के समय में ज्यादातर लोग निवेश के मामले में सुरक्षित विकल्प तलाशते हैं। ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी सबसे पहली पसंद बन जाती है, क्योंकि इसमें जोखिम न के बराबर होता है और निवेशक को निश्चित ब्याज दर पर गारंटीड रिटर्न मिलता है।

लेकिन हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बड़े फैसले के बाद एफडी धारकों को झटका लग सकता है। रेपो रेट में कटौती और इसका असरफिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलावमौजूदा एफडी निवेशकों पर असरहोम लोन ग्राहकों को राहतबचत और निवेश की रणनीतिलंबी अवधि बनाम छोटी अवधि की एफडी दरअसल, RBI ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में महत्वपूर्ण कटौती की है। इसका सीधा असर होम लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन जैसे क्षेत्रों में जरूर राहत लेकर आया है, लेकिन दूसरी तरफ इसकी वजह से फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस निर्णय से निवेशकों पर किस तरह का असर होगा।

रेपो रेट में कटौती और इसका असर रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। RBI द्वारा इसमें कटौती करने का मतलब है कि अब बैंक को कम ब्याज पर लोन मिल सकेगा। जब बैंकों की उधारी दर घटती है तो वे ग्राहकों को भी सस्ते दरों पर लोन मुहैया कराते हैं। इससे नए और पुराने होम लोन धारकों को सीधा लाभ मिलता है।

हालांकि दूसरी ओर, जब रेपो रेट घटाया जाता है तो इसका असर उन निवेशकों पर पड़ता है जो फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी योजनाओं में पैसा जमा करते हैं। बैंक अपने फंड की आवश्यकता के आधार पर एफडी दरों में कटौती करने लगते हैं। इससे निश्चित रूप से निवेशकों की आमदनी पर असर पड़ सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले के बाद यह लगभग तय माना जाता है कि बैंक एफडी और सेविंग डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दरों में बदलाव करेंगे। हालांकि यह कटौती कितना होगा, यह प्रत्येक बैंक की अपनी आवश्यकता और तरलता स्थिति पर निर्भर करता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि एफडी पर लगभग 0.50 प्रतिशत तक की कमी की जा सकती है।

इसका मतलब यह हुआ कि यदि पहले किसी बैंक में एफडी पर 7% ब्याज मिल रहा था तो अब उसमें घटकर 6.5% तक की दर देखने को मिल सकती है। भले ही यह बदलाव कम लगे लेकिन लंबे समय तक निवेश करने वाले लोगों के लिए यह उनके रिटर्न में काफी फर्क डाल सकता है।

मौजूदा एफडी निवेशकों पर असर अगर आपके पास पहले से फिक्स्ड डिपॉजिट है और उसका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। जिस ब्याज दर पर आपने एफडी कराया है, उस पर आपको पूरी अवधि तक ब्याज मिलता रहेगा। बैंक पहले से तय की गई आपकी शर्तों को नहीं बदल सकते।

लेकिन जिन लोगों की एफडी जल्द ही मैच्योर होने वाली है, उन्हें सावधान रहने की आवश्यकता है। अगर वे इसे दोबारा रिन्यू कराते हैं तो नए रेट पर उन्हें कम ब्याज मिलेगा। ऐसे में निवेशकों को यह सोचने की जरूरत है कि क्या वे एफडी को रिन्यू करें या किसी अन्य निवेश विकल्प की तलाश करें।

होम लोन ग्राहकों को राहत जहां एफडी निवेशकों को ब्याज दरों में कमी का नुकसान झेलना पड़ सकता है, वहीं होम लोन धारकों और नए लोन लेने वालों के लिए यह बड़ी राहत है। रेपो रेट घटने पर बैंक तुरंत अपनी लोन ब्याज दरों को भी घटा देते हैं। इससे ग्राहकों की ईएमआई कम हो जाती है जिससे उनकी वित्तीय बोझ में कमी आती है।

कई बैंकों ने पहले ही संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में लोन की ब्याज दरें और कम होंगी। इसका फायदा उन लोगों को भी मिलेगा जो अपने घर या कार के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं। ऐसे में यह समय लोन की तलाश कर रहे ग्राहकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

बचत और निवेश की रणनीति यदि आप निवेश के लिए केवल एफडी पर निर्भर हैं तो आपको अब अपनी निवेश रणनीति पर दोबारा विचार करना चाहिए। ब्याज दरें घटने से आपके लंबे समय के लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में म्यूचुअल फंड, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) या नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे विकल्पों पर नजर डालना समझदारी हो सकती है।

हालांकि, जिन लोगों को कम जोखिम पसंद है वे एफडी को अभी भी प्राथमिकता दे सकते हैं। लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि लगातार घटती ब्याज दरों के चलते उनकी बचत पर मिलने वाला कुल रिटर्न सीमित हो सकता है। इसीलिए निवेश करने से पहले विभिन्न विकल्पों की तुलना करना जरूरी हो जाता है।

लंबी अवधि बनाम छोटी अवधि की एफडी अगर आप अभी एफडी कराने की सोच रहे हैं तो आपको यह तय करना होगा कि कितनी अवधि के लिए निवेश करना है। लंबे समय की एफडी कराने पर दरें भविष्य में और घट सकती हैं, लेकिन यदि आप अभी लॉक कर देते हैं तो यह दर आपको पूरी अवधि तक मिलती रहेगी।

वहीं छोटी अवधि की एफडी कराने पर रिन्यूअल करते समय कम रेट मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए अपनी जरूरत और बाजार की स्थिति को देखते हुए निवेश निर्णय लें। ज्यादा सुरक्षित रहने के लिए आप अलग-अलग अवधि की एफडी में निवेश को बांट सकते हैं।

“Train Cancelled Update:  रेलवे विभाग ने इस रूट पर 31 अगस्त से 15 सितंबर तक 30 ट्रेन की निरस्त”

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“Train Cancelled Update:  रेलवे विभाग ने इस रूट पर 31 अगस्त से 15 सितंबर तक 30 ट्रेन की निरस्त”

Train Cancelled: भारतीय रेलवे नें 31 अगस्त से 15 सितंबर तक 30 ट्रेनों को कैंसिल करने की सूचना जारी की है। रेलवे विभाग द्वारा जारी की सूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 30 ट्रेनें कैंसिल की गई हैं।

इसके अलावा 6 ट्रेनों के रूट बदले गए हैं, जबकि 5 ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है। वहीं गोंदिया से पटना के लिए ट्रेन 08897 गोंदिया-पटना स्पेशल 23 और 24 अक्टूबर 2025 को गोंदिया से चलेगी। ट्रेन नंबर 08898 पटना-गोंदिया स्पेशल 24 और 25 अक्टूबर 2025 को पटना से गोंदिया के लिए रवाना होगी।

दुर्ग और हजरत निजामुद्दीन के बीच 5 अक्टूबर से 23 नवंबर तक चलाई जाएगी स्पेशल ट्रेन एक तरफ रेलवे विभाग ने छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 30 ट्रेनों को कैंसिल कर दिया वहीं दूसरी तरफ भारतीय रेलवे ट्रेन नंबर 08760 5 अक्टूबर से 23 नवंबर तक हर रविवार को दुर्ग से हरजरत निजामुद्दीन के बीच चलने की तैयारी कर रहा है। यह ट्रेन दुर्ग से सुबह 10.45 बजे रखाना होगी। अगले दिन सुबह 11.10 बजे हजरत निजामुद्दीन पहुंचेगी। इस ट्रेन का सागर, झांसी, आगरा कैंट, रायपुर, उसलापुर, पेंड्रा रोड, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, कटनी मुरवारा, दमोह, मथुरा जंक्शन और पलवल स्टेशन पर ठहराव होगा। ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल डिब्बे सहित 20 कोच होंगे। वहीं ट्रेन संख्या 08761 हजरत निजामुद्दीन से 6 अक्टूबर से 24 नवंबर तक हर सोमवार को रवाना होगी। ट्रेन 08261 बिलासपुर से 9 सितंबर से 18 नवंबर तक हर मंगलवार को चलेगी। ट्रेन 08262 यलहंका से 10 सितंबर से 19 नवंबर तक हर बुधवार को रवाना होगी। जो बिलासपुर, भाटापारा, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, गोदिया स्टेशनों पर उक्त ट्रेने रुकेगी।

Indian Railway: छत्तीसगढ़ में 6 साल बाद छोटे स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव यात्रियों को बड़ी राहत…

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Indian Railway: छत्तीसगढ़ में 6 साल बाद छोटे स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव यात्रियों को बड़ी राहत…

छत्तीसगढ़ प्रदेश में छह साल बाद मंडल और जोन के छोटे स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव फिर से शुरू हो गया है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।

अब हथबंद, बिल्हा और देवबलोदा, चरौदा स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव मिलने लगा है। पहले ही दिन से इन स्टेशनों पर यात्री एक्सप्रेस ट्रेनों में सफर करने लगे हैं।

”दैनिक यात्रियों ने रेलवे को कहा धन्यवाद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा 52 ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव देने का निर्णय यात्रियों के लिए राहत भरा साबित हो रहा है। यात्रियों ने रेलवे के इस सहयोगात्मक निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया है।”

न्यू छत्तीसगढ़ स्कूल, हथबंद की प्रधान अध्यापिका एवं समाजसेविका अखिलेश्वरी शुक्ला, जो दैनिक यात्रियों की प्रतिनिधि के रूप में सामने आई, उन्होंने मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय पहुंचकर मंडल रेल प्रबंधक को औपचारिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश कुमार त्रिवेदी से भी मुलाकात की और ट्रेनों के ठहराव से यात्रियों को होने वाली सुविधाओं, समय की बचत और सामाजिक प्रभावों पर सकारात्मक चर्चा की।

”स्टेशनों में ट्रेन का हुआ स्वागत 1 सितंबर को पहली बार हथबंद रेलवे स्टेशन पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के रुकने पर दैनिक यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने भव्य स्वागत किया। स्टेशन पर यात्रियों ने उत्साह और जोश के साथ रेलवे का आभार व्यक्त किया।”

”लोगों का कहना है कि इन स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव से नौकरीपेशा वर्ग, रायपुर में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा और व्यापारिक गतिविधियों के लिए आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।”

बिल्हा रेलवे स्टेशन पर बिलासपुर-नागपुर इंटरसिटी, सारनाथ, शालीमार और शिवनाथ एक्सप्रेस का ठहराव शुरू किया गया है। वहीं हथबंद स्टेशन पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और देवबलोदा चरौदा स्टेशन पर एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस का ठहराव दिया गया है। छोटे स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों की यह सुविधा स्थानीय यात्रियों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हो रही है।

”टिकट बुकिंग में आई तेजी बिल्हा स्टेशन पर चार ट्रेनों के ठहराव से रोजाना करीब 70 से 80 यात्री सफर करने लगे हैं, जबकि हथबंद से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में दर्जनों यात्री चढ़-उतर रहे हैं।”

लंबी दूरी से आने वाले यात्रियों को अब रायपुर मुख्य स्टेशन तक पहुंचने के लिए अलग से बस या ऑटो लेने की जरूरत नहीं पड़ रही है, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि छोटे स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों का यह ठहराव स्थानीय व दैनिक यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी और सुविधाजनक साबित हो रहा है।

टैक्स सिस्टम में होगा सबसे बड़ा बदलाव, आएगा GST 2.0

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टैक्स सिस्टम में होगा सबसे बड़ा बदलाव, आएगा GST 2.0

GST काउंसिल की दो दिवसीय बैठक 3 सितंबर यानि आज से शुरू हो चुकी है। GST काउंसिल की 56वीं बैठक को GST व्यवस्था के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस बैठक में टैक्स स्लैब में कमी, छोटे व्यापारियों के लिए राहत, डिजिटल रिफॉर्म और उपभोक्ताओं के लिए कई फायदे जैसे बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

इस बैठक को ‘GST 2.0’ की आधारशिला माना जा रहा है।

बैठक क्यों है खास? पिछली बैठकों की तुलना में यह बैठक व्यवस्थागत सुधारों की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर GST में सुधार की जरूरत को दोहराया था। इसके बाद यह बैठक राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टिकोण से अहम मानी जा रही है।

उत्सव सीजन से पहले टैक्स प्रणाली को सरल और उपभोक्ता अनुकूल बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम हो सकता है।

प्रस्तावित बड़े बदलाव

1. द्वि-स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर:- मौजूदा 5%, 12%, 18% और 28% स्लैब को घटाकर दो स्लैब बनाए जाएंगे:- – 5% – आवश्यक वस्तुएं – 18% – सामान्य दर – 40% – लक्ज़री और “सिन गुड्स”

2. खाद्य और वस्त्र पर राहत:- सभी खाद्य और वस्त्र उत्पादों को 5% स्लैब में लाने का प्रस्ताव, जिससे रोजमर्रा के खर्च कम हो सकते हैं।

3. बीमा प्रीमियम पर टैक्स में छूट:- – जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर GST घटाने या पूरी तरह से माफ करने पर विचार।

4. सीमेंट और सेवाओं पर टैक्स कटौती:- सीमेंट पर टैक्स 28% से घटाकर 18% करने का प्रस्ताव ब्यूटी और सैलून सेवाओं पर टैक्स 18% से घटाकर 5%

5. GST 2.0 के लिए डिजिटल सुधार:- प्री-फिल्ड GST रिटर्न ऑटोमैटिक रिफंड सिस्टम क्लासिफिकेशन के हित मानदंड

6. कंपनसेशन सेस का भविष्य:- राज्यों को नुकसान की भरपाई के लिए शुरू हुआ यह सेस अब महामारी के कर्ज चुकाने में उपयोग हो रहा है। इसके भविष्य पर निर्णय होगा।

किन्हें क्या मिलेगा फायदा? उपभोक्ताओं को:- – खाने-पीने की चीजें, कपड़े और बीमा सस्ती हो सकती हैं –

निजी सेवाएं जैसे सैलून भी कम खर्चीली हो सकती हैं व्यापारियों और MSMEs को:- – टैक्स स्लैब में कमी से क्लासिफिकेशन विवाद घटेंगे -डिजिटल सुधारों से फॉर्म भरने और रिफंड लेने की प्रक्रिया आसान होगी – पूंजी प्रवाह बेहतर होगा चुनौतियां और अड़चनें – राजस्व नुकसान: राज्य सरकारें टैक्स में कटौती का विरोध कर सकती हैं –  फायदे का पास-थ्रू: टैक्स में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना होगा – तकनीकी तैयारी: GSTN को नई सुविधाओं के लिए तकनीकी रूप से तैयार रहना होगा – राजनीतिक सहमति: सभी 31 सदस्य राज्यों की सहमति आवश्यक त्योहार से पहले लागू हो सकते हैं सुधार यदि काउंसिल में सहमति बनती है, तो दिवाली 2025 से पहले नए नियम लागू हो सकते हैं। इससे न केवल बाजार में मांग बढ़ेगी बल्कि देश में व्यापार के लिए माहौल और अनुकूल हो जाएगा।

“School Closed: लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों के प्रशासन ने स्कूल और कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए हैं।

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“School Closed: लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों के प्रशासन ने स्कूल और कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए हैं।

उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों के प्रशासन ने स्कूल और कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए हैं।

हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे।

हिमाचल प्रदेश में 7 सितंबर तक बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन को देखते हुए, राज्य सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज और डाइट को 7 सितंबर तक बंद रखने का फैसला किया है। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। शिक्षकों और कर्मचारियों को इस अवधि में स्कूल या कॉलेज आने की आवश्यकता नहीं है।

हरियाणा में अंबाला और झज्जर के शिक्षण संस्थान बंद हरियाणा के अंबाला और झज्जर जिलों में भी शिक्षण संस्थानों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। मौसम विभाग ने हरियाणा में 5 सितंबर तक और बारिश की संभावना जताई है।

अंबाला: जिले में बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए, सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान 4 सितंबर तक बंद रहेंगे।

झज्जर: भारी बारिश और सुरक्षा को देखते हुए, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी सरकारी और निजी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र 6 सितंबर तक बंद रखने के आदेश दिए हैं। हालांकि, इस दौरान स्कूल स्टाफ को ड्यूटी पर रहना होगा।

पंजाब में भी 7 सितंबर तक अवकाश पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि राज्य में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए, सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त और निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और पॉलिटेक्निक 7 सितंबर तक बंद रहेंगे।

मथुरा में कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूल बंद उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में पानी भर गया है। इसे देखते हुए, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 3 और 4 सितंबर को कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया है।