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 छत्तीसगढ़ : रेलवे विभाग ने इन स्टेशनों पर फिर से स्टॉपेज शुरू करने का फैसला लिया है, देखें पूरी रिपोर्ट”

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 छत्तीसगढ़ : रेलवे विभाग ने इन स्टेशनों पर फिर से स्टॉपेज शुरू करने का फैसला लिया है, देखें पूरी रिपोर्ट”

रेलवे विभाग ने यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन का कई स्टेशनों पर ठहराव शुरू करने का फैसला लिया है। दरअसल कोरोना महामारी के बाद यात्रियों की कमी के चलते रेलवे ने छोटे स्टेशनों पर एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों का स्टॉपेज बंद कर दिया था।

करीब 6 साल बाद अब रेलवे ने इन स्टेशनों पर फिर से स्टॉपेज शुरू करने का फैसला लिया है। इस फैसले से अब लंबी दूरी की ट्रेनें हथबंद, बिल्हा, पेंड्रारोड, बेलगहना, ब्रजराजनगर, करगीरोड समेत कई छोटे स्टेशनों पर दो मिनट के लिए रुकेंगी। रेलवे ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन की कुल 52 ट्रेनों का 19 स्टेशनों पर स्टॉपेज पहले बंद किया था। आज से यह सुविधा यात्रियों को मिलने लगेगी।

आज से टिकट बुकिंग हुई शुरू स्टॉपेज शुरू होने के साथ ही इन स्टेशनों से टिकट बुकिंग भी चालू कर दी गई है। लंबे समय से यात्री लगातार इस सुविधा की मांग कर रहे थे। प्रदेश के मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधियों ने भी रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर स्टॉपेज शुरू करने की पहल की थी। इन स्टेशनों पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव शुरू होने के बाद अब सैकड़ो यात्रियों को लाभ मिलेगा।

बिल्हा-बेलगहना रेलवे स्टेशन को मिलेगा सबसे अधिक लाभ रेलवे विभाग ने 26 जोड़ी यानी 52 ट्रेनों को 15 स्टेशनों पर स्टापेज मंजूर किया गया है, जो कि 1 सितंबर से लागू होगा। इन स्टेशनों में सबसे फायदे में बिल्हा और बेलगहना रेलवे स्टेशन रहा है। जहां पर क्रमशः 4 व 3 एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टापेज दिया गया है। राजनैतिक दृष्टिकोण से बिल्हा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और बेलगहना रेलवे स्टेशन केंद्रीय मंत्री का क्षेत्र है। ट्रेनों का ठहराव शुरू होने से इन स्टेशनों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।

“ट्रंप टैरिफ विवाद के बीच पुतिन-मोदी का बड़ा ऐलान, भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता की 5 बड़ी बातें”

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“ट्रंप टैरिफ विवाद के बीच पुतिन-मोदी का बड़ा ऐलान, भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता की 5 बड़ी बातें”

चीन के तियानजिन शहर में प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ और आर्थिक दबाव के बीच भारत-रूस के संबंधों को लेकर बयान जारी किए।

दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने रूस और यूक्रेन युद्ध के लिए शांति प्रयासों का स्वागत किया।

द्विपक्षीय संबंध मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ और आर्थिक दबावों के बीच भी भारत और रूस के रिश्ते सिद्धांतों के आधार पर बढ़ते रहेंगे। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और रूस के बीच आपसी सहयोग, बढ़ते रिश्ते और द्विपक्षीय संवाद राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता और समृद्धि-विकास सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से यह भी कहा कि वे दिसंबर में होने वाली उनकी यात्रा का इंतजार कर रहे हैं।

रूस और यूक्रेन शांति वार्ता पर हुई दोनों की बात द्विपक्षीय वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी बात हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष पर लगातार चर्चा हो रही है। भारत शांति प्रयासों का स्वागत करता है औ उम्मीद है कि संघर्ष को जल्द खत्म करने और स्थायी शांति स्थापित करने का रास्ता जल्दी ही तलाश लिया जाएगा। भारत भी रूस और यूक्रेन में शांति वार्ता के पक्ष में हैं और उम्मीद करता है कि जल्दी ही दोनों एक टेबल पर आकर निर्धारित एजेंडे को लेकर बातचीत करेंगे।

परस्पर संवाद और सहयोग की प्रतिबद्धता जताई प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत और रूस इंटरनेशनल लेवल पर आपसी संबंधों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं और आपसी को-ऑर्डिनेशन भी सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। ट्रंप के आर्थिक दबावों के बीच भारत और रूस अपने संबंधों को आगे बढ़ाते रहेंगे, क्योंकि भारत और रूस के संबंध रणनीतिक सिद्धांतों के आधार पर विकसित हो रहे हैं। भविष्य में भी भारत और रूस ऐसे ही परस्पर संवाद करते रहेंगे। एक-दूसरे को व्यापार और रक्षा सहयोग देते रहेंगे।

आपसी संबंधों को दोनों देशों के लिए जरूरी बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात में कहा कि भारत और रूस मुश्किल हालातों में भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं और खड़े रहेंगे। दोनों देशों के घनिष्ठ संबंध और आपसी सहयोग न केवल दोनों देशों की जनता के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। हम दोनों की मुलाकात हमेशा से ही यादगार अनुभव और सकारात्मक रही है। मुलाकातों में दोनों देशों को कई विषयों पर जानकारियों का आदान-प्रदान करने का मौका मिलता है। दोनों पक्षों के बीच कई उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं और अब भारत को दिसंबर 2025 में होने वाले शिखर सम्मेलन का इंतजार है।

”चक्रधर समारोह 2025 कार्यक्रम”

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”चक्रधर समारोह 2025 कार्यक्रम”

चक्रधर समारोह 2025 में रविवार की शाम हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुति से सजी। समारोह में ख्याति प्राप्त शास्त्रीय गायिका डॉ. मेधा तळेगांवकर राव और उनकी छोटी बहन शुभ्रा तळेगांवकर ने अपनी मनमोहक भक्तिमय भजन गायकी से उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया और समारोह में शास्त्रीय संगीत की खुशबू बिखेर दी।

चक्रधर समारोह के पांचवें दिन राजनांदगाँव के प्रख्यात कथक कलाकार डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा और उनकी टीम ने नृत्य की अद्भुत छटा बिखेरी। कथक की विविध झलकियों से सजे मंच पर उन्होंने शिव स्तुति, शिव तांडव, गंगा अवतरण, रायगढ़ एवं जयपुर घराना, लखनऊ घराने की छटा, तोड़ा, तराना, जुगलबंदी, नाव की गत और अष्ट नायिका जैसी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भाव-भंगिमाओं की जीवंतता और लय की गहराई ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु “दीदी के गोठ” नामक विशेष रेडियो कार्यक्रम का प्रदेशभर में प्रसारण हुआ।

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छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु “दीदी के गोठ” नामक विशेष रेडियो कार्यक्रम का प्रदेशभर में प्रसारण हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शुभकामनाएँ दीं। उप मुख्यमंत्री ने कवर्धा में समूह की महिलाओं संग कार्यक्रम सुना। विभागीय अधिकारी विभिन्न जिलों में पहुँचे और सामूहिक श्रवण कराया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को शासन की योजनाओं से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश के 33 जिलों और हजारों समूहों में लाखों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

”जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश”

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”जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश”

करीब 9 हजार गांव डूब गए हैं। ज्यादातर नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। वहीं मौसम विभाग ने एक डराने वाली भविष्यवाणी की है।

IMD का कहना है कि मॉनसून टफ और पश्चिमी विक्षोभ के टकराव से आने वाले समय में बारिश की गतिविधियां तेज हो जाएंगी। इससे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है। साथ ही नदियों में बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं भी तेज हो सकती हैं।

नदियां मचाएंगी तबाही मौसम विभाग ने कहा, 1 सितंबर से उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में दो सितंबर को मूसलाधार बारिश हो सकती है। अगले तीन से चार दिन पहाड़ी इलाकों के लिए बेहद गंभीर हैं। वैसे तो उत्तर भारत में सर्दियों के समय में पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा ऐक्टिव रहते हैं। वहीं मॉनसून सिस्टम में पश्चिमी विक्षोभ के टकराव से गंभीर स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है।

मौसम विभाग के डायरेक्टर मृत्युंजय मोहापात्रा ने कहा कि उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में अगस्त में हुई मूसलाधार बारिश के पीछे भी यही वजह थी। उत्तराखंड के धराली, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और हिमाचल के मंडी में आपदा के पीछे भी यही कारण हो सकते हैं।

देहरादून समेत इन जिलों में रेड अलर्ट देहरादून के सीनयर मौसम वैज्ञनिक रोहित थपलियाल ने कहा, अगले 48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद संवेदनशील हैं। दोनों सिस्टम के टकराने की वजह से भारी बारिश का अनुमान है। ऐसे में देहरादून में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसके अलावा टेहरी, पौड़ी, हरिद्वार, चंपावत, नैनीताल, बागेश्वर और उधम सिंह नगर में भी रेड अलर्ट जारी है।

फिलहाल मॉनसून टफ दक्षिण में अपनी सामान्य गति पर है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में उत्तरी पाकिस्तान और पंजाब पर बना हुआ है। इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश पर सर्कुलेशन की वजह से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से ज्यादा नमी हिमायल की ओर बढ़ रही है। इसी वजह से हिमालय के आसपास के इलाकों में भारिश बारिश हो रही है। मोहापात्रा ने कहा कि अगस्त महीने में उत्तर-पश्चिम में 2001 के बाद सबसे ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सितंबर में भी बारिश जारी रहने का ही अनुमान है।

SCO Summit में दिखी भारत की धाक! चीन ने किया 100 परियोजनाओं का ऐलान-

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SCO Summit में दिखी भारत की धाक! चीन ने किया 100 परियोजनाओं का ऐलान-

चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग मौजूद रहे।

तीनों नेताओं की इस तस्वीर ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस दौरान मोदी-पुतिन शहबाज शरीफ को नजरअंदाज करते दिखे। शहबाज एक कोने में हाथ बांधें खड़े रहे। न कोई उनसे बात कर रहा था, न ही उन्हें कोई तवज्जो दे रहा था। वह बस दोनों नेताओं को एकटक देखते रह गए, मानो बातचीत का हिस्सा बनने की इच्छा रखते हों।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एससीओ शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए “धौंस और दबाव” जैसी वैश्विक प्रवृत्तियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि SCO सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था मिलकर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है और चीन का निवेश अकेले 84 बिलियन डॉलर से अधिक है। जिनपिंग ने जल्द ही SCO डेवलपमेंट बैंक बनाने और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक नया केंद्र स्थापित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी सदस्य देशों को ‘दोस्त और साझेदार’ बताया और आपसी मतभेदों के बावजूद रणनीतिक संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।

चीन ने किया 100 परियोजनाओं का ऐलान- संबोधन के दौरान शी जिनपिंग ने SCO की क्षेत्रीय सुरक्षा में भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि बहुपक्षवाद और सहयोग मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के बीच महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक शासन व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका को भी जोर दिया। चीन ने यह भी ऐलान की कि वह SCO सदस्य देशों के जरूरतमंद क्षेत्रों में 100 छोटे प्रोजेक्ट लागू करेगा, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

”SCO Summit : प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं”

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”SCO Summit : प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं”

नई दिल्ली: SCO Summit चीन के तियानजिन शहर रविवार से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट चल रहा है। इस मौके पर पीएम मोदी सात साल बाद चीन के दौरे पर हैं। रविवार को तियानजिन में उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।

SCO Summit जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को SCO समिट से पहले फोटो सेशन में हिस्सा लिया। इसके बाद पुतिन और जिनपिंग से मुलाकात की। तीनों नेता एक दूसरे के हाथ पकड़े नजर आए। इस दौरान मोदी ने पुतिन को गले भी लगाया। जिसके बाद पीएम मोदी ने पुतिन और जिनपिंग के साथ बातचीत की। पीएम ने SCO शिखर सम्मेलन स्थल पर पहुंचने पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन को गले भी लगाया।

समिट में पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की केमिस्ट्री लोगों का ध्यान खींच रही है। सामने आई तस्वीरों में तीनों को एक-दूसरे के साथ हंस-हंसकर बातें करते हुए देखा जा सकता है। दस सदस्यीय एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन सोमवार को चीन के तियानजिन में शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संगठन के अन्य नेताओं के साथ मिलकर इस समूह की भावी दिशा तय करने के लिए एक दिवसीय शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श शुरू किया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेताओं का स्वागत किया।

“प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं

शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें शेयर की। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “तियानजिन में बातचीत जारी है! एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ विचारों का आदान-प्रदान।”

सीमा विवाद को रिश्तों पर हावी नहीं होने देना चाहिए… जिनपिंग ने PM मोदी से क्या कहा…..चीनी विदेश मंत्रालय का बयान

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चीन के तियानजिन में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए यहां पहुंचे पीएम मोदी ने जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसने भारत और चीन के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया. दोनों नेताओं की इस बैठक को लेकर अब चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया है.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से कहा कि दोनों देशों के लिए “मित्र” बने रहना “सही विकल्प” है और उन्हें सीमा विवाद को अपने संबंधों को परिभाषित नहीं करने देना चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘हाथी (भारत) एवं ड्रैगन (चीन)’ को एक-दूसरे की सफलता का मिलकर जश्न मनाना चाहिए.
शी ने कहा, “हम दोनों (देशों) के कंधों पर अपने लोगों के भले के लिए काम करने, विकासशील देशों का कायाकल्प करने एवं उनकी एकजुटता को बढ़ावा देने और मानव समाज की प्रगति को गति देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है.” उन्होंने कहा, “दोनों के लिए यह सही विकल्प है कि वे ऐसे दोस्त बनें जिनके बीच अच्छे पड़ोसियों वाले और सौहार्दपूर्ण संबंध हों, वे ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों और ड्रैगन और हाथी एक साथ नृत्य करें.”
जिनपिंग ने मोदी से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को ‘रणनीतिक’ और ‘दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य’ से देखना चाहिए. शी ने कहा, “दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाइयों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना एवं संभालना होगा ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों का निरंतर, मजबूत और स्थिर विकास हो सके.” चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, शी ने पीएम मोदी से कहा कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी हैं तथा दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि विकास के अवसर हैं।

उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर स्पष्ट रूप से निशाना साधते हुए कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को बनाए रखना चाहिए. शी ने कहा कि भारत और चीन को एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए भी काम करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए मिलकर काम करने और एशिया एवं दुनिया भर में शांति और समृद्धि में उचित योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी को भी आगे बढ़ाना होगा.”
शी ने मोदी से कहा कि दुनिया इस समय ऐसे बदलावों से गुजर रही है जो सदी में एक बार होते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक है. चीन और भारत पूर्व में स्थित दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और हम ‘ग्लोबल साउथ’ के सबसे पुराने सदस्य भी हैं.”
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है, जो प्रौद्योगिकी और सामाजिक-आर्थिक विकास के मामले में कम विकसित माने जाते हैं’ ये देश मुख्यतः दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित हैं. इसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देश शामिल हैं.
सबसे खास बात यब है कि है कि एससीओ समिट से इतर पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच यह बातचीत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की शुल्क संबंधी नीति से पैदा हुई उथल पुथल की पृष्ठभूमि में हुई.

करीब आ रहा डॉलर का अंत….दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों का कम हो रहा भरोसा, 35 साल में पहली बार सामने आया ऐसा आंकड़ा

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अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप कितनी भी दादागिरी और धौंस दिखाने की बात करें, लेकिन डॉलर का अंत अब करीब आ रहा है. 35 साल में पहली बार ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिसे देखकर ट्रंप ही नहीं पूरे अमेरिका की आंखें खुली रह जाएंगी. इन आंकड़ों में साफ दिख रहा है कि अब दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों का डॉलर पर भरोसा कम होता जा रहा है. केंद्रीय बैंक अपने खजाने में डॉलर जमा करने के बजाय सोने पर दांव लगा रहे हैं.
दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों से जुटाए आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि साल 1990 के बाद पहली बार अमेरिकी सरकार के बॉन्‍ड (ट्रेजरीज) का भंडार सोने के मुकाबले कम हो गया है. दरअसल, दुनियाभर सभी देशों के सेंट्रल बैंक अपनी सुरक्षा और आपात स्थिति के लिए रिजर्व रखते हैं. इसमें ज्‍यादातर अमेरिकी डॉलर का भंडार होता है, जबकि कुछ मात्रा में यूरो, सरकारी बॉन्‍ड और गोल्‍ड भी होते हैं. हाल के आंकड़े बताते हैं कि अब केंद्रीय बैंकों ने ज्‍यादातर भंडार डॉलर के बजाय गोल्‍ड से भरना शुरू कर दिया है.

क्‍या कहती है रिपोर्ट
‘यूरोपियन सेंट्रल बैंक इंटरनेशनल रोल ऑफ द यूरो 2025’ नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी केंद्रीय बैंकों के पास कुल मिलाकर 36,000 टन सोना रखा हुआ है. अगर मौजूदा बाजार भाव से इसकी कीमत निकालें तो करीब 3.6 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 310 लाख करोड़ रुपये होगी. जून, 2024 के सर्वे के अनुसार, इस दौरान डॉलर की वैल्‍यू करीब 3.8 ट्रिलियन बताई गई है. यह आंकड़ा एक साल पहले का है और अभी सोने की कीमत 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जिसकी वजह से सोने की वैल्‍यू निश्चित रूप से डॉलर से ज्‍यादा पहुंच गई है.

क्‍यों गोल्‍ड की तरफ भाग रहे बैंक
वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के अनुसार, यूक्रेन से युद्ध के बाद रूसी सेंट्रल बैंक के पास जमा डॉलर और यूरो को लॉक कर दिया गया था. इसके बाद से सेंट्रल बैंकों ने ऐसे विकल्‍प की तलाश शुरू कर दी जिससे ‘सैंक्‍शन प्रूफ’ बनाया जा सके. गोल्‍ड इस मामले में सबसे ऊपर है, जो कभी फ्रीज नहीं किया जा सकता.
अमेरिका पर लगातार कर्जा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में किसी तरह की परेशानी आने पर डॉलर पर भी संकट बढ़ सकता है. लिहाजा सेंट्रल बैंक अपनी पूंजी अमेरिका के कर्ज में नहीं फंसाना चाहते.
सेंट्रल बैंक अपने एसेट का डाईवर्सिफिकेशन भी कर रहे हैं, क्‍योकि वह सारी पूंजी एक ही जगह फंसाना नहीं चाहते हैं. यही वजह है कि सेंट्रल बैंक डॉलर, यूरो, गोल्‍ड का मिक्‍स एसेट बनाना चाहते हैं.
कितना गोल्‍ड खरीद रहे बैंक
वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल की मानें तो बैंकों ने साल 2022 में 1,082 टन सोना खरीदा, जबकि 2023 में 1,037 टन तो 2024 में 1,045 टन सोने की खरीद की है. यह खरीद एक दशक पहले की औसत सालाना खरीद से करीब दोगुना है. साल 2025 में अभी तक सोने की खरीद कम रही, लेकिन कीमतें नीचे आते ही इसके फिर बढ़ने की संभावना है. इस साल पहली तिमाही में 244 टन सोना खरीदा गया, जबकि दूसरी तिमाही में 166 टन सोने की खरीदारी हुई. लंदन कंसल्‍टेंसी ने भी अनुमान लगाया है कि इस साल 1,000 टन सोने की खरीद हो जाएगी.

आगे और बढ़ेगी डॉलर की मुसीबत
विश्‍व स्‍वर्ण परिषद का मानना है कि 43 फीसदी केंद्रीय बैंक आगे भी सोने की खरीद का प्‍लान बना रहे हैं.
95 फीसदी लोगों का मानना है कि सोने की कीमत अभी आगे और बढ़ेगी.
आरबीआई ने भी मार्च, 2025 तक अपने सोने का भंडार बढ़ाकर 880 टन पहुंचा दिया है.
डॉलर की बादशाहत अब भी बनी हुई है, क्‍योंकि आईएमएफ के अनुसार 2025 तक फॉरेक्‍स रिजर्व में 58 फीसदी हिस्‍सेदारी डॉलर की ही है.

25 जिले, 110 विधानसभा क्षेत्र और 1300 किमी की यात्रा…अब पटना की सड़कों पर वोटर क्रांति, सियासी ताकत और एकता

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इंडिया गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा का समापन पटना में एक विशाल पैदल मार्च के साथ हो रहा है. 1,300 किमी की इस यात्रा ने 25 जिलों और 110 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया. बीते 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित प्रयासों के खिलाफ थी. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने इसे जनता की आवाज बनाने की भरपूर कोशिश की है. आज के इस मार्च में इंडिया गठबंधन के दिग्गज नेता शामिल हैं. आरजेडी के तेजस्वी यादव, कांग्रेस के राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, एनसीपी की सुप्रिया सुले, टीएमसी के युसूफ पठान, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, सीपीआई (एमएल) के दीपंकर भट्टाचार्य और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश साहनी एक मंच पर नजर आएंगे. तेजस्वी यादव ने इसे लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताया है, जबकि राहुल गांधी ने इसे बिहार की जनता की ताकत का प्रतीक कहा है.
कांग्रेस-आरजेडी की तैयारी
कांग्रेस और आरजेडी ने इस समापन के लिए व्यापक तैयारी की है. पटना के गांधी मैदान में विशाल सभा की व्यवस्था की गई है जहां हजारों समर्थक जुटेंगे. आरजेडी ने अपने सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं को पूरे बिहार से बुलाया है, जबकि कांग्रेस ने भी बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया हुआ है. यात्रा ने वोट चोरी का मुद्दा बड़े ही आक्रामक तरीके से उठाया है. दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीबों को ध्यान में रखकर शुरू की गई इस यात्रा को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अहम बताया जा रहा है.
एसआईआर पर सवाल
बता दें कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर इंडिया गठबंधन ने सवाल उठाए हैं. तेजस्वी यादव ने इसे ‘वोट चोरी’ करार दिया, जबकि राहुल गांधी ने कहा कि यह गरीबों और हाशिए पर रहने वालों के अधिकारों पर हमला है. हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है. लेकिन, जानकारों की नजर में इस यात्रा ने चुनाव आयोग पर गड़बड़ियां करने के आरोप के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है.

इस यात्रा का एक और बड़ा उद्देश्य महागठबंधन के दलों की एकजुटता को दर्शना है. इसको प्रदर्शित करने के लिए कांग्रेस की प्रियंका गांधी, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन जैसे नेताओं ने इस यात्रा में शिरकत की. जाहिर है यह यात्रा बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन की एकता और ताकत का प्रदर्शन है. तेजस्वी यादव को गठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने को लेकर कांग्रेस ने अभी खुले तौर पर हामी नहीं भरी है, लेकिन माना जा रहा है और इस मार्च से उनकी स्थिति और मजबूत होगी. सुप्रिया सुले और संजय राउत जैसे नेताओं की मौजूदगी गठबंधन की एकता के लिए अहम कही जा रही है. माना जा रहा है कि यह मार्च बिहार की जनता को एनडीए सरकार के खिलाफ एकजुट होने का संदेश देगा.