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“GST में बड़ा बदलाव: अब घर खरीदना होगा सस्ता, जानिए किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा”

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“GST में बड़ा बदलाव: अब घर खरीदना होगा सस्ता, जानिए किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा”

अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार जल्द ही एक नई जीएसटी प्रणाली लाने पर विचार कर रही है, जिससे घर बनाना और खरीदना दोनों ही सस्ते हो सकते हैं।

सरकार का लक्ष्य घर बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामानों पर लगने वाले टैक्स को आसान और एक समान बनाना है। अभी घर बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों, जैसे सीमेंट, स्टील, पेंट और टाइल्स पर अलग-अलग जीएसटी दरें लागू होती हैं, जो 18% से 28% तक हैं. इससे निर्माण की लागत काफी बढ़ जाती है, जिसका सीधा बोझ आखिर में घर खरीदने वालों पर पड़ता है।

मध्यम वर्ग को मिलेगा सबसे ज़्यादा फायदा अगर सरकार इन टैक्स दरों को कम और एक समान करती है, तो बिल्डरों की लागत घटेगी और वे इस बचत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा मध्यम वर्ग को होगा, जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है. घर की कुल कीमत कम होने से EMI का बोझ भी हल्का हो सकता है।

किफायती घरों पर भी होगी राहत किफायती घरों पर अभी भी सिर्फ 1% जीएसटी लगता है, इसलिए उनमें सीधे तौर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. हालांकि, अगर ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) का नया नियम लागू होता है, तो बिल्डरों को थोड़ी और राहत मिल सकती है, जिससे इन घरों की कीमतों में भी थोड़ी कमी आ सकती है।

महंगे घरों पर पड़ सकता है उल्टा असर जहां एक तरफ मध्यम वर्ग को फायदा होने की उम्मीद है, वहीं लग्जरी घरों पर इसका उल्टा असर पड़ सकता है. अगर महंगे मैटेरियल जैसे इंपोर्टेड फिटिंग्स और फिनिशिंग आइटम्स को ज़्यादा टैक्स स्लैब में डाल दिया गया, तो इन घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. पिछले कुछ सालों में निर्माण लागत में 40% की बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में जीएसटी में यह बदलाव बिल्डरों और ग्राहकों दोनों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।

“Health Insurance से जुड़ी सामने आई बड़ी खबर… IRDAI के इस फैसले के बाद पॉलिसीधारकों को मिलेगा बड़ा फायदा”

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“Health Insurance से जुड़ी सामने आई बड़ी खबर… IRDAI के इस फैसले के बाद पॉलिसीधारकों को मिलेगा बड़ा फायदा”

स्वास्थ्य बीमा अब सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हर घर की ज़रूरत बन चुकी है। मगर पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ते प्रीमियम रेट्स ने लाखों बीमाधारकों को परेशानी में डाल दिया है।

खासकर कोविड-19 महामारी के बाद, जब अस्पतालों के खर्च और क्लेम की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा हुआ, तब से बीमा कंपनियों ने अपने रेट्स में काफी बढ़ोतरी की है। इस बढ़ते बोझ को देखते हुए, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) अब एक बड़ा सुधार लाने की तैयारी में है।

क्या है नया प्रस्ताव? सूत्रों के मुताबिक, IRDAI जल्द ही एक कंसल्टेशन पेपर जारी करने जा रहा है, जिसमें स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में होने वाली बढ़ोतरी को नियमित और नियंत्रित करने के लिए नए नियमों का सुझाव दिया जाएगा। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यह है कि बीमा कंपनियाँ मनमाने ढंग से प्रीमियम न बढ़ा सकें और बीमा को हर वर्ग के लिए किफायती बनाया जा सके।

IRDAI की प्राथमिकताएं क्या हैं? मेडिकल इन्फ्लेशन के आधार पर प्रीमियम सीमित करना: IRDAI की योजना है कि प्रीमियम दरों की बढ़ोतरी केवल मेडिकल महंगाई (medical inflation) के हिसाब से ही तय की जाए, ताकि बीमा के दाम संगठित और तर्कसंगत बन सकें।

पूरे पोर्टफोलियो के लिए नियम लागू होंगे: यह बदलाव केवल वरिष्ठ नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर आयु वर्ग और सभी पॉलिसीधारकों पर समान रूप से लागू होगा।

कंपनियों को खर्च नियंत्रण पर देना होगा ध्यान: IRDAI ने बीमा कंपनियों को यह भी सलाह दी है कि वे अपने संचालन खर्च और अस्पतालों के साथ टाई-अप की दरों को नियंत्रित करें, जिससे प्रीमियम बढ़ाने की ज़रूरत ही न पड़े।

senior citizens को पहले ही मिल चुकी है राहत IRDAI ने जनवरी 2025 में एक आदेश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया था कि 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बीमाधारकों के प्रीमियम में एक साल में 10% से अधिक की वृद्धि नहीं की जा सकती। यदि किसी कारणवश ज्यादा वृद्धि की ज़रूरत हो, तो बीमा कंपनियों को पहले से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, पूर्व-निर्धारित बीमारियों की वेटिंग पीरियड भी 4 साल से घटाकर 3 साल कर दी गई थी।

हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट की मौजूदा स्थिति ICICI Lombard: कुल प्रीमियम का 30% हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस से New India Insurance: 50% तक निर्भरता Go Digit General Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस का योगदान केवल 14% इससे साफ है कि हर बीमा कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भरता अलग है, लेकिन यह सेगमेंट सभी के लिए अहम है।

2025 तक, सामान्य बीमा क्षेत्र की कुल प्रीमियम आय का 40% हिस्सा स्वास्थ्य बीमा से आने की संभावना है, जिससे यह क्षेत्र लगातार विस्तार की ओर है। आपके लिए क्या बदलेगा? अगर आप स्वास्थ्य बीमा खरीदने या उसे रिन्यू कराने की योजना बना रहे हैं, तो IRDAI के ये कदम आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं: -प्रीमियम में अनियंत्रित बढ़ोतरी से राहत -लंबी अवधि में पॉलिसी जारी रखना होगा आसान -पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को मिलेगा प्राथमिकता -हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी

चुनाव से पहले 50,000 लोगों को देंगे नौकरी और रोजगार… बोधगया में मुख्यमंत्री नीतीश का बड़ा ऐलान”

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चुनाव से पहले 50,000 लोगों को देंगे नौकरी और रोजगार… बोधगया में मुख्यमंत्री नीतीश का बड़ा ऐलान”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने शुक्रवार को बोधगया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ मंच साझा करते हुए युवाओं और जन कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

गया जी में जनसभा को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की कि बिहार में एनडीए सरकार बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को मिलेगी नौकरी नीतीश कुमार ने कहा, “चुनाव से पहले, हम 50,000 और लोगों को नौकरी और रोजगार प्रदान करेंगे। अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोज़गार दिया जाएगा। हमने हमेशा रोज़गार के लिए काम किया है जबकि अन्य (राजद) ने कुछ नहीं किया।” हाल के फैसलों पर प्रकाश डालते हुए, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये प्रति माह कर दी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों- महिलाओं, अल्पसंख्यकों और गरीबों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “पहले बिहार की स्थिति बहुत खराब थी। किसी ने महिलाओं या मुसलमानों के लिए काम नहीं किया था। लेकिन हमने सबके लिए काम किया है।”

“प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के लिए बहुत काम किया” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने याद दिलाया कि 2018 तक हर घर में बिजली पहुंच गई थी। उन्होंने आगे कहा कि बिहारवासियों को प्रति माह 125 यूनिट बिजली पहले ही मुफ्त दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गया का नाम बदलकर गया जी करने, फल्गु नदी पर रबर डैम और पुल का निर्माण, और बोधगया में एक गेस्ट हाउस और अन्य सुविधाओं के विकास सहित अन्य उपलब्धियों का जिक्र किया मुख्यमंत्री ने केंद्र की एनडीए सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस साल के केंद्रीय बजट में बिहार को एक विशेष पैकेज मिला है और राज्य ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेजबानी की है। उन्होंने कहा, “बिहार को केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के लिए बहुत काम किया है।”

“मोदी सरकार का गेमिंग सुधार: युवाओं की सुरक्षा के साथ सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल भविष्य का निर्माण”

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“मोदी सरकार का गेमिंग सुधार: युवाओं की सुरक्षा के साथ सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल भविष्य का निर्माण”

एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत, लोकसभा और राज्यसभा ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 को पारित कर दिया है। यह विधेयक मोदी सरकार द्वारा अनियमित ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए प्रस्तुत किया गया एक परिवर्तनकारी कदम है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मार्गदर्शन में, यह कानून ई-स्पोर्ट्स और सामाजिक रूप से लाभकारी खेलों को प्रोत्साहित करते हुए रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियंत्रण लगाता है, जो युवाओं के लिए बड़ी चिंता का विषय बने हुए थे।

रियल-मनी गेमिंग संकट से निपटने की पहल भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग पिछले दशक में तेजी से विकसित हुआ है, जिसका कारण किफायती इंटरनेट, स्मार्टफोन की व्यापक पहुंच और फिनटेक सेक्टर का उभार है। 2024 तक भारत में 50 करोड़ से अधिक गेमर्स होने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग बाजार बन जाएगा। हालांकि, वहीं रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स—जैसे फ़ैंटेसी क्रिकेट, पोकर, रम्मी और लॉटरी—ने भी खतरनाक वृद्धि देखी है, जिसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम विनाशकारी रहे हैं।

ये प्लेटफ़ॉर्म, जहाँ उपयोगकर्ता त्वरित मुनाफे की उम्मीद में पैसा दांव पर लगाते हैं, युवा वर्ग के बीच एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गए हैं। विदेशी क्षेत्रों से संचालित ये प्लेटफ़ॉर्म धोखाधड़ी वाले एल्गोरिदम और व्यसनकारी डिज़ाइन का उपयोग कर खिलाड़ियों को फंसाते हैं। खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा इनकी जाल में फंस कर कर्ज़ और मानसिक दबाव का शिकार हो रहे हैं, जिससे हर साल 2,000 से अधिक आत्महत्याएं होने की रिपोर्टें सामने आई हैं।

सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान ही नहीं, बल्कि 2023-24 में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के सट्टेबाजी घोटाले भी इन प्लेटफ़ॉर्म्स से जुड़े पाए गए हैं। कई ऐसे प्लेटफ़ॉर्म नियामक नियंत्रण से बाहर हैं, कर चोरी करते हैं और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा है। आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े लिंक भी चिंता का विषय हैं। असंगत राज्य-स्तरीय कानूनों के कारण समस्याएं और बढ़ गई हैं, जिससे एक केंद्रीय, व्यापक विनियमन की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो गई है।

मजबूत विनियमन और संरक्षण का ढाँचा ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह कानून पैसे से जुड़े सभी ऑनलाइन खेलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, चाहे वे कौशल आधारित हों या संयोग पर। विशेष रूप से फ़ैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर और रम्मी जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स को निशाना बनाया गया है। विधेयक में ऐसे प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन पर भी रोक लगाई गई है, जिनमें मशहूर हस्तियों, एथलीटों और प्रभावशाली लोगों द्वारा प्रचार शामिल है, जो युवा खिलाड़ियों को आकर्षित करते थे।

वित्तीय प्रतिबंध और कड़े दंड विधेयक के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों और भुगतान माध्यमों को रियल-मनी गेमिंग से जुड़े लेनदेन को रोकना अनिवार्य होगा, जिससे इन प्लेटफ़ॉर्म्स की आर्थिक गतिविधियां ठप्प हो जाएंगी। उल्लंघन करने पर 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार अपराध करने वालों को 5 साल तक की कैद और 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ेगा। कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारियों को भी दंड का सामना करना होगा।

राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना विधेयक के तहत एक राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना होगी, जिसका प्रारंभिक व्यय 50 करोड़ रुपये और वार्षिक खर्च 20 करोड़ रुपये होगा। यह प्राधिकरण राज्य सरकारों के साथ समन्वय करेगा, दिशानिर्देश जारी करेगा, शिकायतों का निवारण करेगा और खेलों का आयु-आधारित वर्गीकरण सुनिश्चित करेगा। प्राधिकृत अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत बिना वारंट के तलाशी लेने, संपत्ति जब्त करने और गैर-अनुपालन प्लेटफॉर्म ब्लॉक करने का अधिकार होगा, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुरूप होगा।

ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को बढ़ावा विधेयक ई-स्पोर्ट्स और सामाजिक रूप से लाभकारी खेलों को बढ़ावा देता है, साथ ही हानिकारक गेमिंग प्रथाओं पर कड़ा नियंत्रण भी करता है। ई-स्पोर्ट्स को वैध प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता मिली है, और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय को प्रशिक्षण अकादमी, दिशानिर्देश तथा प्रोत्साहन योजनाएं संचालित करने का दायित्व दिया गया है।

साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) सामाजिक एवं शैक्षिक खेलों के विकास की देखरेख करेंगे। विधेयक में खिलाड़ियों को अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित माना गया है और उपभोक्ता संरक्षण हेतु आयु सत्यापन, व्यय सीमा और शिकायत निवारण व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है।

राजस्व से ऊपर युवाओं का कल्याण मोदी सरकार ने आर्थिक लाभ से ऊपर युवाओं के कल्याण को प्राथमिकता दी है। जहां ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र 31,000 करोड़ रुपये का राजस्व, 20,000 करोड़ रुपये का कर और 25,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश उत्पन्न करता है, वहीं इसके सामाजिक दुष्परिणाम अत्यंत गंभीर हैं।

भारत के 55 करोड़ गेमर्स में से 60 प्रतिशत 25 वर्ष से कम आयु के हैं, जो रियल-मनी गेमिंग के व्यसनकारी डिज़ाइनों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। सरकार इस युवा वर्ग को वित्तीय नुकसान, मानसिक स्वास्थ्य संकट और सामाजिक विघटन से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह विधेयक विदेशी प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े वित्तीय अपराधों और राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिमों को भी कम करता है, और भारत के डिजिटल नियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता है। चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों ने भी ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण लगाया है, और भारत इस दिशा में ज़िम्मेदार डिजिटल शासन का नेतृत्व कर रहा है।

नवाचार और रोजगार के अवसर ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को प्रोत्साहित करके सरकार नवाचार को बढ़ावा दे रही है, जिससे 2027 तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने और भारत को वैश्विक ई-स्पोर्ट्स केंद्र बनाने की संभावना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत को उपयोग में लाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गेमिंग उत्पाद विकसित किए जाएं।

विपक्ष की आपत्तियां और सरकार का पक्ष विपक्षी नेता कार्ति चिदंबरम और प्रियांक खड़गे सहित कई आलोचक इस प्रतिबंध को व्यापक मानते हुए चिंतित हैं कि इससे उपयोगकर्ता अनियमित विदेशी प्लेटफ़ॉर्म्स की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जिससे डेटा चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी और कर राजस्व व रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके लाभ आर्थिक नुकसानों से कहीं अधिक हैं। विधेयक के सख्त प्रवर्तन तंत्र का उद्देश्य कालाबाज़ारी और धोखाधड़ी पर कड़ा अंकुश लगाना है।

सुरक्षित डिजिटल भारत की ओर एक बड़ा कदम ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025, भारत के डिजिटल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। वास्तविक धन वाले गेमिंग पर कठोर प्रतिबंध, सख्त दंड और ई-स्पोर्ट्स व सोशल गेमिंग के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करके मोदी सरकार ने युवाओं को वित्तीय और मानसिक शोषण से बचाने का एक साहसिक कदम उठाया है।

यह विधेयक सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालेगा और एक ज़िम्मेदार, नवाचार-प्रधान गेमिंग उद्योग के लिए रास्ता खोलेगा, जिससे भारत का डिजिटल भविष्य सुरक्षित और उज्जवल बनेगा।

रेल यात्रियों की बल्ले-बल्ले! दिवाली-छठ पर चलेंगी 12,000 विशेष ट्रेनें, वापसी टिकट पर 20% छूट”

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रेल यात्रियों की बल्ले-बल्ले! दिवाली-छठ पर चलेंगी 12,000 विशेष ट्रेनें, वापसी टिकट पर 20% छूट”

दीपावली और छठ पूजा के दौरान घर जाने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा ऐलान किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि इस साल त्योहारों के मौसम में 12,000 से भी ज़्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी।

इसके साथ ही, यात्रियों को उनकी वापसी यात्रा पर 20% की छूट भी मिलेगी, ताकि उन्हें लौटने में कोई परेशानी न हो।

रेल मंत्री ने बिहार के उपमुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर यह फैसला लिया है। उनका कहना है कि इस कदम से लाखों यात्रियों को आसानी से अपने घर आने-जाने में मदद मिलेगी।

क्या हैं खास इंतजाम?

12,000 से ज़्यादा स्पेशल ट्रेनें: ये ट्रेनें 13 से 26 अक्टूबर के बीच आने और 17 नवंबर से 1 दिसंबर के बीच वापसी यात्रा करने वालों के लिए चलाई जाएंगी।

20% छूट: इन ट्रेनों में वापसी की टिकट पर यात्रियों को 20% की छूट मिलेगी, जिससे उनका सफर और भी किफायती हो जाएगा।

नई अमृत भारत एक्सप्रेस: गया से दिल्ली, सहरसा से अमृतसर, छपरा से दिल्ली और मुजफ्फरपुर से हैदराबाद के लिए चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू की जाएंगी।

नई सर्किट ट्रेन: बौद्ध स्थलों को जोड़ने के लिए एक नई सर्किट ट्रेन भी चलाई जाएगी, जो वैशाली, हाजीपुर, सोनपुर, पटना, राजगीर, गया और कोडरमा जैसे महत्वपूर्ण शहरों से होकर गुज़रेगी।

नए रेल प्रोजेक्ट: बक्सर-लखीसराय रेलखंड को चार लाइनों का बनाया जाएगा और पटना के चारों ओर एक रिंग रेलवे सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, सुल्तानगंज और देवघर को भी रेल से जोड़ा जाएगा।

 

“अमित शाह ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रेड्डी पर नक्सलवाद के समर्थन का आरोप लगाया”

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“अमित शाह ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रेड्डी पर नक्सलवाद के समर्थन का आरोप लगाया”

केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने शुक्रवार को कांग्रेस नीत गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी पर नक्सलवाद का ‘समर्थन’ करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला नहीं सुनाया होता, तो देश में माओवाद 2020 से पहले ही समाप्त हो गया होता।

वह शुक्रवार को मलयाला मनोरमा समूह द्वारा आयोजित मनोरमा न्यूज़ कॉन्क्लेव का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। शाह ने कहा कि कांग्रेस द्वारा उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुने जाने से केरल में पार्टी की जीत की संभावना और कम हो गई है।

शर्मनाक घटना! बेटे से जिंदगी की भीख मांगता रहा पिता, संपत्ति के लालच में अंधे बेटे ने बाप के गले में घोंप दी छेनी शाह ने कॉन्क्लेव के तहत प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान सलवा जुडूम पर 2011 के उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा, ”सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने नक्सलवाद की मदद की। उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला सुनाया। अगर सलवा जुडूम पर फैसला नहीं सुनाया गया होता, तो नक्सली आतंकवाद 2020 तक खत्म हो गया होता। वह वही व्यक्ति हैं जो सलवा जुडूम पर फैसला देने वाली विचारधारा से प्रेरित थे।” दिसंबर 2011 में, उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति रेड्डी ने फैसला सुनाया था कि माओवादी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में आदिवासी युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारियों के रूप में इस्तेमाल करना – चाहे उन्हें ‘कोया कमांडो’ कहा जाए, सलवा जुडूम कहा जाए या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए – गैरकानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने यह आदेश भी दिया था इनसे तुरंत हथियार लिए जाएं। शाह ने कहा कि केरल ने नक्सलवाद का दंश झेला है।

गृह मंत्री ने कहा, ”केरल के लोग निश्चित रूप से देखेंगे कि कांग्रेस पार्टी, वामपंथी दलों के दबाव में, एक ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतार रही है जिसने नक्सलवाद का समर्थन किया और उच्चतम न्यायालय जैसे पवित्र मंच का इस्तेमाल किया।” सत्तारूढ़ राजग ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि वाले तमिलनाडु के एक वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी के बाद 30 दिन तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने के प्रस्ताव वाले विधेयक लोकसभा में पेश किए जाने के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा, ”इस मामले पर और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। मैंने संसद में देश की जनता से पूछा है: क्या वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जेल से सरकार चलाएं? यह कैसी बहस है? यह नैतिकता का सवाल है। अब वे पूछ रहे हैं कि इसे पहले संविधान में क्यों नहीं शामिल किया गया। जब संविधान का मसौदा तैयार किया गया था, तब यह अनुमान नहीं लगाया गया था कि जेल जा चुके लोग निर्वाचित पदों पर बने रहेंगे।”

स्टडी में बड़ा खुलासा: पुरुषों के लिए Silent killer हैं ये बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? गृह मंत्री ने दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोपों में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद उनके इस्तीफा देने से इनकार करने का ज़िक्र किया। शाह ने कहा, ”एक ऐसी घटना हुई थी जहां एक मुख्यमंत्री जेल से सरकार चला रहे थे। तो क्या संविधान में संशोधन होना चाहिए या नहीं? उस समय भी भाजपा की सरकार थी, लेकिन हमें ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा दे दिया होता, तो यह नया विधेयक पेश नहीं किया जाता। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और दावा किया कि कांग्रेस नेता ने 2013 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार द्वारा पेश किए गए एक अध्यादेश को फाड़ दिया था, जिसका उद्देश्य अयोग्य ठहराए गए या किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए सांसदों और विधायकों को राहत प्रदान करना था। शाह ने कहा, ”उस समय, मनमोहन सिंह द्वारा लालू प्रसाद की मदद के लिए यह अध्यादेश लाया गया था। राहुल गांधी ने नैतिकता के नाम पर कैबिनेट द्वारा अनुमोदित अध्यादेश की प्रति सार्वजनिक रूप से फाड़ दी थी। वही राहुल गांधी अब गांधी मैदान में लालू जी को गले लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं।”

‘वोट चोरी’ के आरोप के बारे में, गृह मंत्री ने कहा कि राहुल के कांग्रेस नेतृत्व में शामिल होने के बाद, वे संवैधानिक मामलों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संदर्भ में शाह ने कांग्रेस पर इस प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास निर्वाचन क्षेत्र, ज़िला और राज्य स्तर पर आपत्तियां उठाने का अवसर था, लेकिन उसने अब तक एसआईआर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। अन्य राज्यों में एसआईआर के कार्यान्वयन के बारे में उन्होंने कहा कि यह निर्वाचन आयोग को तय करना है। उन्होंने कहा, ”निर्वाचन आयोग ने पूरे देश में एसआईआर कराने का फैसला किया है। बिहार की मतदाता सूची में ऐसे 22 लाख लोगों के नाम थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है। फर्जी वोट डाले जाने की संभावना है। तो क्या उनके नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं? यह सामान्य ज्ञान की बात है।”

“एक गांव, दो कुएं, पानी भरने गई महिला, अंदर से आ रही थी बद्बू, फिर कपड़े में लिपटी दिखी ऐसी चीज, निकल गई चीख”

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“एक गांव, दो कुएं, पानी भरने गई महिला, अंदर से आ रही थी बद्बू, फिर कपड़े में लिपटी दिखी ऐसी चीज, निकल गई चीख”

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का खम्हरिया गांव, यहां के गांव वालों पानी के लिए गुजर-बसर गावं के ही दो कुएं से होता है. रविवार की सुबह खम्हरिया गांव की एक महिला कुएं से पानी भरने गई. उसे कुएं से तेज दुर्गंध आई, तो उसने तुरंत गांव वालों को बताया.

गांव वालों ने अमलेश्वर थाना पुलिस को सूचना दी. पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और गोताखोरों को कुएं में उतारा गया. कुछ देर बाद गोताखोरों ने एक बोरी निकाली. जब बोरी खोली गई तो सबके होश उड़ गए. उसमें एक 10-12 साल के बच्चे का शव था. बच्चे के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे थे और शरीर कपड़े में लपेटा हुआ था.

फिर मिला एक और महिला का शव पुलिस अभी इस मामले की जांच कर ही रही थी कि तभी एक और खबर ने सबको चौंका दिया. उसी कुएं से महज 30 मीटर दूर एक दूसरे कुएं में भी एक बोरी होने की सूचना मिली. पुलिस ने तुरंत दूसरा कुआं खंगाला. गोताखोरों ने उस कुएं से भी एक बोरी निकाली. इस बोरी में एक 30-35 साल की महिला का शव था. उसका शव भी उसी तरह बंधा हुआ था, जैसे बच्चे का था. महिला का शव भी कपड़े में लपेटकर बोरी में बंद था और बोरी में पत्थर बंधे थे.

कुएं में मिली औरत और बच्चे की लाश फोरेंसिक टीम कर रही जांच एक के बाद एक दो शव मिलने से गांव में दहशत फैल गई. पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया. दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि दोनों शव करीब एक दिन पुराने लग रहे हैं. दोनों को एक ही तरह से बांधकर कुएं में फेंका गया है. यह देखकर लगता है कि दोनों शवों का आपस में कोई न कोई संबंध जरूर है. पुलिस ने तुरंत फोरेंसिक टीम को बुलाया. टीम ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं और दोनों शवों की पहचान करने की कोशिश शुरू की गई.

“उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने चला महाराष्ट्र अस्मिता वाला दांव…पवार लाचार..क्या उद्धव देंगे विपक्ष को झटका”

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“उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने चला महाराष्ट्र अस्मिता वाला दांव…पवार लाचार..क्या उद्धव देंगे विपक्ष को झटका”

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विपक्षी दलों के नेताओं से संपर्क करके एडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के लिए समर्थन मांग रहे हैं।

इसी कड़ी में उन्होंने एनसीपी (एससीपी) के चीफ शरद पवार और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे संपर्क किया है। फडणवीस का कहना है कि एनडीए उम्मीदवार के महाराष्ट्र के वोटर होने के नाते इन दलों से राधाकृष्णन के लिए सहयोग मांगा है। इस दौरान उद्धव ने जो कुछ कहा है, वह विपक्षी इंडिया ब्लॉक के कान खड़े कर सकता है।

बीजेपी ने चला महाराष्ट्र अस्मिता वाला दांव महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे से ये कहकर सीपी राधाकृष्णन के लिए सहयोग मांगा है, क्योंकि वे महाराष्ट्र के वोटर हैं। इस नाते अगर ये पार्टियां महाराष्ट्र अस्मिता की बातें करती हैं तो उन्हें मुंबई के मतदाता होने के कारण एनडीए प्रत्याशी का समर्थन करना चाहिए। इसपर शरद पवार ने अपनी लाचारी जताई है, लेकिन उद्धव ठाकरे ने विचार करके बताने की बात की है।

‘उद्धव ने विचार करके बताने की बात कही’ देवेंद्र फडणवीस ने एएनआई से बातचीत में कहा है, ‘मैंने उद्धव ठाकरे जी और शरद पवार जी से फोन पर बात की है और उनसे अनुरोध किया है कि उपराष्ट्रपति के चुनाव में महाराष्ट्र के गवर्नर (सीपी राधाकृष्णन) की उम्मीदवारी का समर्थन करें…उद्धव जी ने बताया कि वे आपस में चर्चा करके मुझे बताएंगे। शरद पवार जी ने कहा कि उन्हें विपक्ष की ओर से दिए गए उम्मीदवार का समर्थन करना होगा।’

क्या उद्धव ठाकरे देंगे विपक्ष को झटका उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमबीए) और केंद्र में इंडिया ब्लॉक में शामिल है। इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को अपना प्रत्याशी बनाया है। फिर भी उन्होंने फडणवीस को विचार करके बताने की बात कही है। इससे पहले उनकी पार्टी के सांसद संजय राउत भी एनडीए उम्मीदवार के व्यक्तित्व की काफी तारीफ कर चुके हैं।

आंकड़ों के गणित में राधाकृष्णन आगे उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 9 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद वोट डाल सकेंगे। इस चुनाव के लिए पार्टियों की और से अपने सांसदों के लिए व्हीप नहीं जारी किया जाता, इस वजह से क्रॉस वोटिंग में भी सदस्यता जाने का खतरा नहीं रहता। वैसे इस चुनाव में आंकड़ों के हिसाब से सत्ताधारी पक्ष के उम्मीद सीपी राधाकृष्णन की जीत की पूर्ण संभावना है।

“तीन विवादास्पद बिलों पर टीडीपी-जेडीयू चुप; किसी तरह की दुविधा महसूस कर रहे एनडीए सहयोगी?”

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“तीन विवादास्पद बिलों पर टीडीपी-जेडीयू चुप; किसी तरह की दुविधा महसूस कर रहे एनडीए सहयोगी?”

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रमुख सहयोगी, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल (यूनाइटेड) उन तीन विधेयकों पर सावधानी बरतते दिख रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आरोपों में 30 दिनों तक गिरफ्तार रहने पर पद से हटाने की बात है।

इन विधेयकों को आगे की जांच के लिए संसद की एक संयुक्त समिति (JPC) को भेजा गया है। इसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह विधेयक नीतीश कुमार और एन चंद्रबाबू नायडू जैसे सहयोगियों को नियंत्रण में रखने के लिए है। वहीं, टीडीपी ने ऐसे दावों को खारिज किया है। JPC में इन विधेयकों पर विचार किया जाएगा और आपत्तियों का समाधान किया जाएगा।

विधेयकों में क्या प्रस्ताव है? विधेयकों में यह प्रस्ताव है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर आरोप में 30 दिन से ज्यादा समय तक गिरफ्तार रहता है, तो उसे पद से हटाया जा सकता है। इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। खासकर, NDA के सहयोगी दलों के रुख पर सबकी नजर है। जेडीयू के सांसद संजय कुमार झा ने इस मुद्दे पर पार्टी का रुख बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी को अभी इस मुद्दे पर चर्चा करनी है। इसलिए वे अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दे सकते। एक अन्य JD(U) नेता ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर जरूर बात करेगी, क्योंकि इसे JPC को भेजा गया है।

संभलकर बोल रही टीडीपी TDP के नेता और केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि JPC में विधेयक का अध्ययन किया जाएगा। अगर कोई चिंताएं हैं, तो उन्हें दूर किया जाएगा। TDP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक किसी को डराने के लिए नहीं है।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना कांग्रेस के सदस्य के सी वेणुगोपाल ने लोकसभा में विधेयकों को पेश करते समय सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार अपने सहयोगियों को डराने के लिए ऐसा कर रही है। उन्होंने X पोस्ट में लिखा, ‘जब वोट चोरी हर किसी के दिमाग में है, जब राहुल गांधी जी की यात्रा को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है, जब विपक्षी सरकारों को निशाना बनाने की जरूरत है, जब चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार जैसे सहयोगियों को धमकाने की जरूरत है…गृह मंत्री इस खतरनाक विधेयक को लाते हैं जो संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों पर प्रहार करता है।’

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार NDA के सहयोगियों को हटाने के लिए यह विधेयक ला रही है। उनका मानना है कि सरकार अपने सहयोगियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

“इन चार वजहों से क्रैश हुआ भारतीय शेयर बाजार, कुछ ही देर में निवेशकों के 2 लाख करोड़ रुपये स्वाहा”

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“इन चार वजहों से क्रैश हुआ भारतीय शेयर बाजार, कुछ ही देर में निवेशकों के 2 लाख करोड़ रुपये स्वाहा”

घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स करीब 650 अंक टूटा, वहीं एनएसई निफ्टी 170.45 अंक यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 24,913.30 पर बंद हुआ.

इस तेज गिरावट के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की कमी हो गई.

आइये जानते हैं कि भारतीय शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट की वो क्या खास वजह रही- 1-गौरतलब है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब दुनियाभर के निवेशकों की नजर जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस पर टिकी हुई है, जहां यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की स्पीच होनी है. उनके बयान से अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अगला रुख साफ हो जाएगा. यही वजह रही कि भाषण से ठीक पहले बाजार में मुनाफावसूली तेज हो गई.

2-दूसरी बड़ी वजह रही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी. शुक्रवार को रुपया 11 पैसे फिसलकर 87.36 के स्तर पर आ गया. यह उस समय हुआ जब कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट थी. हालांकि, आरबीआई के दखल की वजह से रुपये को सीमित दायरे में गिरावट का सामना करना पड़ा.

3-तीसरी अहम वजह अमेरिकी टैरिफ है. भारत पर इस समय 25 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लागू है, लेकिन 27 अगस्त से यह 50 प्रतिशत हो जाएगा. इस भारी-भरकम टैरिफ ने निवेशकों के सेंटिमेंट को बिगाड़ दिया और डर का माहौल बना दिया. यही वजह रही कि जीएसटी रिफॉर्म से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े ऐलान के बावजूद शुक्रवार को बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली.

4-घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को गिरावट उस समय देखने को मिली जब इससे पहले जीएसटी रिफॉर्म के ऐलान के बाद सेंसेक्स और निफ्टी लगातार छह दिनों तक तेजी से चढ़े थे. इस गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर पर रहा. आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली हुई, जिसकी वजह से बाजार का रुख कमजोर हो गया. नतीजा यह रहा कि निफ्टी और सेंसेक्स के अधिकांश इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए.