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पेरिस में भव्य बीएपीएस हिंदू मंदिर तैयार…

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फ्रांस की राजधानी पेरिस के उपनगर ‘बूसी-सेंट-जॉर्जेस’ में भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर अब अपने ऐतिहासिक उद्घाटन के समीप पहुंच गया है। मंदिर के शिखरों और केंद्रीय गुंबद पर कलश एवं ध्वजा दंड पूजन जैसी पारंपरिक वैदिक रस्में पूरी की जा रही हैं।

मंदिर परिसर में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने शांति, सद्भाव और जनकल्याण के लिए वैदिक मंत्रोच्चार और प्रार्थनाएं भी कर रहे हैं। कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो अपने बच्चों और नाती-पोतों के साथ भव्य उत्सव के साक्षी बनेंगे।

बीएपीएस की आधिकारिक साइट के अनुसार, इस मंदिर का उद्घाटन 2 से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 13 दिवसीय ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ यानी ‘पेरिस मंदिर महोत्सव’ के दौरान किया जाएगा। यह आयोजन बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के उद्घाटन को समर्पित होगा और इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और शुभचिंतक शामिल होंगे।

महोत्सव के दौरान जल यात्रा, पेरिस में नगर यात्रा, बूसी-सेंट-जॉर्जेस में पालखी यात्रा, प्रतिदिन वैदिक महायज्ञ, मूर्ति-प्रतिष्ठा समारोह, समर्पण सभा और कीर्तन आराधना जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बीएपीएस के मुताबिक, पेरिस का यह मंदिर फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है। इसका निर्माण बूसी-सेंट-जॉर्जेस स्थित एस्पलेनैड डेस रिलिजन्स एट डेस कल्चर्स में किया गया है, जहां विभिन्न धर्मों के उपासना स्थल मौजूद हैं। इस स्थान को धार्मिक विविधता और अंतरधार्मिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है।

मंदिर की वास्तुकला में सदियों पुरानी भारतीय शिल्प परंपरा का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के पत्थरों को भारत में तराशकर तैयार किया गया और फिर उन्हें फ्रांस ले जाकर भारतीय शिल्पकारों तथा फ्रांसीसी विशेषज्ञों की मदद से मंदिर में स्थापित किया गया।

इस मंदिर की नींव रखने का ऐतिहासिक समारोह सितंबर 2022 में हुआ था। इसके बाद जून 2024 में मंदिर की आधारभूत संरचना के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण शुरू हुआ।

बीएपीएस पेरिस की सोशल मीडिया पोस्ट में महंत स्वामी महाराज से लेकर वरिष्ठ संतों और दुनियाभर के श्रद्धालुओं के एक स्वर में “पेरिस मंदिर महोत्सव नी जय!” के उद्घोष का उल्लेख किया गया है। इसका भाव मंदिर के उद्घाटन को लेकर सामूहिक उत्साह और आध्यात्मिक एकता से जुड़ा है।

इन पोस्ट्स में एक परिवार ऐसा भी है जिसकी तीन पीढ़ियां मिलकर सपना साकार होते एक साथ देखेंगी। पहली पीढ़ी 80 के दशक में पहुंची। गुजराती मूल के परिवार के मुताबिक वो दौर ऐसा था जब एक-दो ही हिंदू परिवार रहते थे। फिर दूसरी पीढ़ी ने वो सहा जो विदेशी जमीन पर अक्सर अनजाने लोगों के साथ होता है। लोगों को हिंदू धर्म के बारे में बताते थे तो वो हंसते थे या मजाक उड़ाते थे लेकिन अपने बड़ों से जो सीखा उसे छोड़ा नहीं।

हिंदू संस्कृति, संस्कारों और अध्यात्म की मशाल तीसरी पीढ़ी तक पहुंची। ऐसी पीढ़ी जो फ्रेंच तो बोलती है लेकिन विशुद्ध हिंदू रंग में रंगी है। बच्चे बोलते हैं कि अपने बड़ों के साथ सत्संग में जाते थे, अपने धर्म को समझते थे। अब विश्वास नहीं हो रहा कि यहां भी हमारा मंदिर होगा, वाकई हम खुद को भाग्यवान मानते हैं। बच्चे खुश हैं, कहते हैं, “हमारे दोस्त, जब अपनी आंखों के सामने भव्य मंदिर बनते देख रहे हैं तो हमसे हमारे धर्म के बारे में जानने की कोशिश करते हैं और ये हमें बहुत अच्छा लगता है।”

मंदिर महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा। बीएपीएस ने इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, कला और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को सामने लाने वाले वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है।

पेरिस जैसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और हिंदू आध्यात्मिक परंपरा का यह नया केंद्र निश्चित तौर पर भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। सितंबर में होने वाला मंदिर महोत्सव इस लंबे निर्माण सफर के समापन और एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बनेगा।

Gautam Gambhir: ‘मेरा काम ट्रॉफी जीतना है, लाइक्स-व्यूज नहीं…

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टीम इंडिया और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट मैच रविवार (23 अगस्त) को कोलंबो के सिंहलीज़ स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में शुरू होने वाला है। मैच से एक दिन पहले, टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने उन आलोचनाओं पर खुलकर बात की जो उन पर और भारत के टेस्ट प्रदर्शन पर की जा रही हैं।

गंभीर ने साफ़ किया कि उनका मकसद सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करना नहीं, बल्कि भारतीय टीम के लिए ट्रॉफ़ी जीतना है।

कुछ समय से भारत के टेस्ट रिकॉर्ड पर सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर टीम के प्रदर्शन और गंभीर की कोचिंग की आलोचना हो रही है। हालांकि, दूसरे टेस्ट मैच से ठीक पहले गंभीर ने इसका साफ़ जवाब दिया।

गौतम गंभीर ने कहा कि वह आलोचना या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पर ध्यान नहीं देते हैं। उनका पूरा ध्यान भारतीय टीम को सफल बनाने और ट्रॉफ़ी जीतने पर है। गंभीर ने कहा, “मेरा काम ट्रॉफ़ी जीतना है। मैं इसी पर ध्यान देता हूं और इसी में यकीन रखता हूं। मेरा काम लाइक्स और व्यूज़ पाना नहीं है।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब गंभीर भारत के टेस्ट प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा में हैं। हेड कोच ने साफ़ किया कि बाहरी लोगों की राय से ज़्यादा उनके लिए टीम की उपलब्धियां मायने रखती हैं।

रैंकिंग पर: हम संघर्ष नहीं कर रहे हैं

गंभीर ने भारत की टेस्ट रैंकिंग और हालिया प्रदर्शन पर भी बात की। उन्होंने माना कि रैंकिंग को बहुत ज़्यादा अहमियत नहीं दी जानी चाहिए और टीम को ‘संघर्ष करने वाली’ कहना गलत है। गंभीर ने कहा, “रैंकिंग मायने नहीं रखती। हम संघर्ष नहीं कर रहे हैं। इंग्लैंड दौरे के बाद से हमने अच्छा टेस्ट क्रिकेट खेला है।”

20 विकेट लेने में सक्षम बॉलिंग अटैक को प्राथमिकता

गौतम गंभीर ने साफ़ किया कि दूसरे टेस्ट के लिए टीम का चयन उस बॉलिंग कॉम्बिनेशन के आधार पर होगा जो भारत के लिए 20 विकेट लेने में सबसे ज़्यादा सक्षम हो। कुलदीप यादव के बारे में उन्होंने कहा कि हालांकि वह एक अच्छे बॉलर हैं, लेकिन अंतिम फ़ैसला हालात और कप्तान की सोच पर निर्भर करेगा।

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गंभीर ने कहा, “हमारा मकसद सबसे अच्छा बॉलिंग अटैक उतारना होगा – जो 20 विकेट लेने में सक्षम हो। कुलदीप एक अच्छे गेंदबाज हैं, हालांकि आखिरी फैसला अक्सर कप्तान का होता है।”

सिर्फ़ एक या दो मैचों में खराब प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को टीम से बाहर नहीं किया जाएगा

गंभीर ने खिलाड़ियों को लगातार मौके देने पर अपना रुख साफ किया। उनका मानना ​​है कि उतार-चढ़ाव क्रिकेट का हिस्सा हैं और किसी खिलाड़ी को सिर्फ़ एक या दो खराब मैचों के आधार पर टीम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। हमें अपने खिलाड़ियों का समर्थन करना चाहिए और उन्हें लगातार मौके देने चाहिए। सिर्फ़ एक या दो मैचों के आधार पर फैसले नहीं लिए जाने चाहिए।”

भारत की टेस्ट टीम अभी बदलाव के दौर से गुजर रही है। रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की जगह लेना आसान काम नहीं है। नतीजतन, नई पीढ़ी को टेस्ट क्रिकेट में जमने के दौरान उतार-चढ़ाव का सामना करना ही पड़ेगा।

गंभीर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज

भारत और श्रीलंका के बीच चल रही सीरीज में सिर्फ़ दो टेस्ट मैच हैं, जिसमें टीम इंडिया पहला मैच जीतकर 1-0 से आगे है। इस तरह, कोलंबो टेस्ट से सीरीज का नतीजा तय होगा। गंभीर का मानना ​​है कि टेस्ट सीरीज में कम से कम तीन मैच होने चाहिए।

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“मेरी राय में, तीन टेस्ट मैचों की सीरीज सबसे अच्छी होती है। कम समय में रिकवरी कोई समस्या नहीं है; हम जानते हैं कि अपने शरीर को कैसे संभालना है। हम खिलाड़ियों के लिए प्रैक्टिस सेशन में बदलाव करते हैं और यह पक्का करते हैं कि गेंदबाजों को पर्याप्त आराम मिले।”

पहला टेस्ट हारने के बाद वापसी का मौका

गंभीर ने तीन टेस्ट मैचों की सीरीज चुनने की मुख्य वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि अगर कोई टीम दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच हार जाती है, तो उनके पास वापसी का बहुत कम मौका होता है। वे सिर्फ़ सीरीज ड्रॉ कराने की कोशिश कर सकते हैं। गंभीर का मानना ​​है कि तीन मैचों की सीरीज में, पहला टेस्ट हारने वाली टीम के पास वापसी करने और सीरीज का पासा पलटने का बेहतर मौका होता है।

गंभीर ने गाले की पिच पर भी अपने विचार साझा किए। टीम इंडिया के हेड कोच गाले टेस्ट में इस्तेमाल हुई पिच से खुश दिखे। गंभीर ने कहा, “गाले की पिच टेस्ट क्रिकेट के लिए अच्छी थी। हमें वहां खेलने में मज़ा आया और मुझे उम्मीद है कि यहां की पिच भी वैसी ही होगी। यह कोई ‘परफेक्ट’ टेस्ट मैच नहीं था, लेकिन टेस्ट मैच ऐसे ही खेले जाते हैं।”

भारतीय टेस्ट टीम अभी बदलाव के दौर से गुज़र रही है और गंभीर के सामने एक नई टीम बनाने की चुनौती है। शुभमन गिल धीरे-धीरे अपनी लीडरशिप की भूमिका में ढल रहे हैं, जबकि देवदत्त पडिक्कल ने नंबर तीन पर अपनी काबिलियत साबित की है। वहीं, स्पिन डिपार्टमेंट में सुथार एक नए ऑप्शन के तौर पर उभरे हैं।

भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट कोलंबो के सिंहलीज़ स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। मैच लोकल समय के अनुसार सुबह 10:00 बजे शुरू होगा। यह मैच भारत के लिए भी अहम है क्योंकि टीम इस सीरीज़ में शानदार प्रदर्शन करके टेस्ट में अपनी लय बनाए रखना चाहती है।

दूसरे टेस्ट से पहले, गंभीर के बयान से यह साफ़ हो गया कि टीम मैनेजमेंट आलोचना, रैंकिंग या सोशल मीडिया के शोर से प्रभावित नहीं होना चाहता। गौरतलब है कि भारत ने गाले में पहला टेस्ट 165 रनों से जीता था; अब वे कोलंबो में जीत हासिल करके सीरीज़ 2-0 से अपने नाम करने की कोशिश करेंगे।

चीनी : मिठाई से लेकर चाय और कोल्ड ड्रिंक तक पर पड़ेगा असर…

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चीनी की बढ़ती कीमतें आजकल आम घरों की रसोई से लेकर चाय और मिठाई की दुकानों तक, हर जगह असर डाल रही हैं। कुछ ही दिनों में चीनी की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल आया है। लगभग डेढ़ महीने पहले, थोक भाव ₹42-₹45 प्रति किलो के आसपास था, लेकिन अब यह ₹62 प्रति किलो के आसपास पहुँच गया है।

कुछ इलाकों में तो खुदरा भाव ₹65 प्रति किलो तक पहुँच गया है। त्योहारों का मौसम नज़दीक होने के कारण, मिठाइयों, कोल्ड ड्रिंक्स, चाय और चीनी से बनने वाले दूसरे उत्पादों की कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। आइए देखते हैं कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से ये चीज़ें कितनी महंगी हो सकती हैं।

20 दिनों में चीनी की कीमतें

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव ₹48.18 प्रति किलो था, जो 21 अगस्त तक बढ़कर ₹58.20 प्रति किलो हो गया। हालाँकि, कुछ बाज़ारों में कीमतें काफ़ी ज़्यादा हैं; हरियाणा में चीनी की कीमतें ₹62-₹65 प्रति किलो के आसपास पहुँच गई हैं। सरकार ने कीमतों में इस बढ़ोतरी के लिए घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ी हुई माँग, फ़सल को नुकसान और जमाखोरी जैसे कारणों को ज़िम्मेदार ठहराया है। सरकार ने यह भी कहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है।

मिठाइयाँ, कोल्ड ड्रिंक्स और चाय

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब चाय, मिठाइयों और दूसरे उत्पादों पर भी पड़ रहा है। सोनीपत में एक चाय बेचने वाले ने बताया कि जो चाय पहले ₹10 की मिलती थी, लागत बढ़ने की वजह से अब वह ₹15 की मिल रही है। वहीं, मिठाई बनाने वाले ₹20-₹30 प्रति किलो तक दाम बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि न सिर्फ़ चीनी, बल्कि मैदा, वनस्पति घी और देसी घी भी महंगे हो गए हैं। चीनी का इस्तेमाल सॉफ्ट ड्रिंक्स, बिस्कुट और दवाओं समेत कई उत्पादों में होता है, इसलिए इसकी कीमत में लगातार बढ़ोतरी से उत्पादन लागत पर दबाव पड़ सकता है।

चीनी का उत्पादन अनुमान

इस सीज़न में देश में चीनी का उत्पादन लगभग 30.6 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 34.3 लाख मीट्रिक टन का था। गन्ने की फसल रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ ज़्यादा बारिश की वजह से जलभराव से भी प्रभावित हुई है। हरियाणा के सोनीपत की एक चीनी मिल के आंकड़ों से भी उत्पादन में यह गिरावट दिखती है; मिल ने 2022-23 में 30.75 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, जो 2025-26 तक घटकर 20.39 लाख क्विंटल रह गई। इसी दौरान चीनी का उत्पादन 3.08 लाख क्विंटल से घटकर 1.90 लाख क्विंटल हो गया।

राखी से पहले महतारी वंदन की 30वीं किस्त बनी खुशियों का उपहार…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनकर उभरी है। रक्षाबंधन से पहले योजना की 30वीं किस्त हितग्राहियों के खातों में पहुंचने से लाखों परिवारों में त्योहार की खुशियां और बढ़ गई हैं।

इस बार महतारी वंदन योजना की राशि राखी का सबसे बड़ा उपहार बनकर आई है।

रक्षाबंधन से पहले 30वीं किस्त मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस राशि से वे राखी, मिठाई और घर की आवश्यक सामग्री खरीद सकेंगी। ‘विष्णु भैया ने राखी से पहले ही हमारी खुशियां बढ़ा दीं। यह राशि त्योहार के साथ-साथ बच्चों और परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में भी बहुत काम आती है।’’

त्योहारों के समय घरेलू खर्च स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।

ऐसे समय में हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता परिवार के लिए बड़ा सहारा बन जाती है। इससे न केवल आर्थिक दबाव कम होता है, बल्कि महिलाएं अपनी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर हुए बिना स्वयं निर्णय भी ले पाती हैं।

पहले छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना की नियमित राशि से वे बच्चों की जरूरतों, घरेलू सामान, शिक्षा, स्वास्थ्य और त्योहारों से जुड़े खर्चों में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं।

इससे उनके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का मजबूत माध्यम है। मुख्यमंत्री रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना भी की।

प्रदेश में महतारी वंदन योजना का प्रभाव अब केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को परिवार की आर्थिक व्यवस्था में सहभागी बनाकर आत्मनिर्भरता की नई दिशा दे रही है।

कहानी इस बात का प्रमाण है कि नियमित आर्थिक सहयोग किस प्रकार परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव ला सकता है। रक्षाबंधन से पहले मिली 30वीं किस्त ने उनके घर में खुशियों की मिठास और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ा दिया है।

छतीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रारूप पर मंथन…

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27 अगस्त को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में की जाएगी बैठक**

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता  (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने और इसका प्रारूप तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की उपस्थिति में आगामी 27 अगस्त 2026 को राजधानी के कन्वेंशन हॉल, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, रायपुर में एक राज्य स्तरीय परिचयात्मक बैठक आयोजित की जा रही है।

​इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर व्यापक विचार-विमर्श करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 200  प्रबुद्ध नागरिक, जनप्रतिनिधि और  विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों के विचार, अनुभव और सुझाव कानून के भावी स्वरूप को गढ़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

​बैठक में समान नागरिक संहिता के विभिन्न प्रावधानों, सामाजिक प्रभावों और व्यावहारिक पहलुओं पर गहराई से चर्चा की जाएगी। राज्य शासन का उद्देश्य एक ऐसा समावेशी और संतुलित प्रारूप तैयार करना है जो राज्य के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रख सके। विस्तृत चर्चा/सुझाव हेतु विभिन्न समूह को पृथक से भी आमंत्रित किया जाएगा, वदसपदम सुझाव इस पर भी दिया जा सकता है

अवैध खनिज परिवहन पर खनिज विभाग की सख्त कार्रवाई, चार ट्रैक्टर जब्त…

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रेत और मिट्टी के अवैध परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई, वाहन मालिकों पर खान एवं खनिज अधिनियम के तहत होगी नियमानुसार कार्रवाई**

छत्तीसगढ़ में खनिज संपदा के संरक्षण और अवैध खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य शासन के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा लगातार सघन जांच एवं कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में विभागीय अमले ने रेत एवं मिट्टी (ईंट) के अवैध परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए चार ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है। विभाग की इस कार्रवाई से अवैध खनिज परिवहन में संलिप्त लोगों में हड़कंप की स्थिति है।

खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभागीय टीम द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की जांच की गई। जांच के दौरान सिलपहरी क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर तीन ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया। इसी तरह ज्योतिपुर तिराहा में मिट्टी (ईंट) का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर एक ट्रैक्टर वाहन को जब्त किया गया। इस प्रकार कुल चार ट्रैक्टर वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

जब्त वाहनों को सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया

कार्रवाई के बाद जब्त किए गए चारों वाहनों को सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें से तीन ट्रैक्टर वाहनों को थाना अमरपुर तथा एक ट्रैक्टर वाहन को नगर सैनिक परिसर में सुरक्षित रखा गया है। विभाग द्वारा संबंधित प्रकरणों में आवश्यक दस्तावेजों एवं तथ्यों की जांच की जा रही है।

वाहन मालिकों के विरुद्ध होगी नियमानुसार कार्रवाई

अवैध खनिज परिवहन के इन प्रकरणों में संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर निगरानी रखते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।

खनिज संपदा राज्य की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपत्ति है। इसके संरक्षण के साथ ही शासन द्वारा खनिजों के वैध एवं पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने नागरिकों एवं खनिज परिवहन से जुड़े लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करते हुए ही खनिजों का परिवहन करें और अवैध गतिविधियों से दूर रहें।

इस कार्रवाई में खनि निरीक्षक श्री सुजीत कंवर, श्री शिवकुमार लहरे, श्री सतीश साहू एवं सैनिक श्री साहिब गनी शामिल रहे। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिजों के अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध जांच एवं कार्रवाई का अभियान निरंतर जारी रहेगा। विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और जांच को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि खनिज संपदा का संरक्षण सुनिश्चित हो और शासन को मिलने वाले राजस्व की भी सुरक्षा की जा सके।

जैव ऊर्जा बनेगी छत्तीसगढ़ की ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार…

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कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन से खुलेंगे निवेश और हरित रोजगार के नए अवसर**

छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से स्वच्छ ऊर्जा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति**

बायोमास को कृषि अवशेष नहीं, ऊर्जा और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर**

क्लस्टर आधारित मॉडल से किसानों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आय**

फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन और निजी निवेश के लिए मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर विशेषज्ञों ने किया मंथन**

छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कृषि अवशेष, वन संसाधन, पशुधन अपशिष्ट और नगरीय जैव अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित कर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोएथेनॉल और अन्य जैव ईंधनों के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं का योजनाबद्ध उपयोग छत्तीसगढ़ को देश की उभरती जैव ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है।

इन्हीं संभावनाओं और भावी कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, इसके टेक्निकल पार्टनर सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर के सभागार में ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक विकास में जैव ऊर्जा की भूमिका पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में शासन के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों, वित्तीय एवं तकनीकी संस्थानों, शिक्षाविदों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों की मजबूत वैल्यू चेन विकसित कर उन्हें स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने पर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को गति मिलेगी।

कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से जैव ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा

कार्यशाला में बताया गया कि राज्य शासन ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी पहल के रूप में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 लागू की है। यह नीति प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इन नीतिगत पहलों के माध्यम से प्रदेश में जैव ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल निवेश वातावरण तैयार करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जैव ऊर्जा का विस्तार केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे कृषि अवशेषों और अपशिष्ट का आर्थिक उपयोग संभव होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे और सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।

बायोमास को अपशिष्ट नहीं, आर्थिक संसाधन के रूप में देखने की जरूरत : श्री सुमित सरकार

छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा तथा सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है। इसके लिए बायोमास को केवल कृषि अवशेष अथवा अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय ऊर्जा आधारित आर्थिक विकास और हरित रोजगार के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करना होगा।

उन्होंने कहा कि कम्प्रेस्ड बायोगैस, बायोएथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके उपयोग से उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ संसाधनों के पुनः उपयोग पर आधारित सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था जैव ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल आधार उपलब्ध कराती है। उपलब्ध संसाधनों को तकनीक, निवेश और प्रभावी बाजार व्यवस्था से जोड़कर प्रदेश में जैव ऊर्जा आधारित नए आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

क्लस्टर आधारित मॉडल से कम होगी लागत, स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आय

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ, एचआरडी-आईटी श्री आलोक तिवारी (आईएफएस) ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख कृषि फसलों, वन एवं पशुधन संसाधनों तथा नगरीय निकायों से निकलने वाले अपशिष्ट की उपलब्धता को देखते हुए जैव ऊर्जा के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल प्रभावी सिद्ध हो सकता है।

उन्होंने कहा कि क्लस्टर आधारित व्यवस्था से बायोमास के परिवहन की लागत कम की जा सकती है और जैव ऊर्जा संयंत्रों के लिए फीडस्टॉक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इस व्यवस्था से किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों को भी सीधे आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है।

विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक : श्री रमापति कुमार

सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रमापति कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बायोएनर्जी क्षमता को वास्तविक धरातल पर उतारने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग, पर्यावरण और वित्त विभाग के साथ छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों, वित्तीय संस्थानों, किसानों और नागरिक संगठनों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ना होगा। प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता और दीर्घकालिक नीतिगत पहलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को बायोएनर्जी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सीड राज्य के प्रयासों में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन तथा अभिनव समाधानों की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में श्री अमिताभ वाजपेयी (आईएफएस), सदस्य-सचिव, छत्तीसगढ़ स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी भाग लिया।

तकनीकी सत्र में बायोएनर्जी की वैल्यू चेन और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में जैव ऊर्जा उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, फीडस्टॉक प्रबंधन, परिवहन, संग्रहण, तकनीक, बाजार, वित्तपोषण और उद्योगों में जैव ईंधन के उपयोग सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

तकनीकी सत्र में श्री संतोष वार्ष्णेय, जनरल मैनेजर-बायोफ्यूल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; डॉ. प्रवीण डी. चेंडगे, सीनियर मैनेजर-कृषि, बरगढ़, ओडिशा, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; श्री योगेश कुमार काडू, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एवं नोडल ऑफिसर, स्वच्छ भारत मिशन, रायपुर नगर निगम; डॉ. अनिल श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र; श्री विशाल प्रसाद गुप्ता, डायरेक्टर, एनर्जी कोर इंडिया एंड पावर लिमिटेड; श्री चंद्रमौली सिंह, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड; श्री विशाल जाधव, जिंदल पावर लिमिटेड, तमनार; श्री पुलकित श्रोत्रय, सेक्टर एक्सपर्ट; श्री अश्वनी अशोक, डायरेक्टर-जस्ट ट्रांजिशन, सीड; डॉ. देवयानी शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर-क्लाइमेट, सीड तथा श्री तुषार शर्मा, सीड सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने किया मंथन

कार्यशाला में कृषि, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी तथा रायपुर नगर निगम के अधिकारियों ने भाग लिया। इसके साथ ही महिन्द्रा पावर, जायसवाल नेको, नाकोडा इस्पात, गोदावरी तथा बायो-एनर्जी और सीएनजी आधारित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि भी चर्चा में शामिल हुए।

आईआईएम रायपुर और कलिंगा यूनिवर्सिटी के शिक्षाविदों तथा विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी जैव ऊर्जा के विकास से जुड़े तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं पर सुझाव दिए।

बायोमास कॉरिडोर और मजबूत फीडस्टॉक नेटवर्क पर जोर

कार्यशाला और तकनीकी सत्रों से जैव ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों ने राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों का मानकीकृत आकलन और विश्वसनीय डेटा बेस तैयार करने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही एकीकृत बायोमास कॉरिडोर विकसित करने, संग्रहण एवं एकत्रीकरण की मजबूत व्यवस्था बनाने और उत्पादों की बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल वित्तीय और नियामकीय व्यवस्था विकसित करने तथा फीडस्टॉक के संग्रहण और प्रबंधन में किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

कार्यशाला में इस बात पर सहमति रही कि नीति, तकनीक, निवेश और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाकर छत्तीसगढ़ में बायो-रिसोर्स आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है। इससे कृषि और वन आधारित संसाधनों का बेहतर मूल्य संवर्धन होने के साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अतिरिक्त आय, स्थानीय स्तर पर हरित रोजगार और उद्योगों के लिए स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।

राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक और जैव संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी बायोएनर्जी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

युवाओं को ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय…

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वर्ल्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ ने रखा युवा-केंद्रित अर्थव्यवस्था का रोडमैप**

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य**

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वैश्विक मंच से निवेशकों को दिया छत्तीसगढ़ में निवेश का आमंत्रण**

नई औद्योगिक नीति के बाद प्रदेश को मिले 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव**

एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और फार्मा बनेंगे नई अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन**

बस्तर में शांति के साथ खुल रहे विकास, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए द्वार**

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में वैश्विक आर्थिक जगत की प्रमुख हस्तियों के समक्ष छत्तीसगढ़ की तेजी से बदलती आर्थिक तस्वीर, निवेश की व्यापक संभावनाओं और भविष्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अपनी पारंपरिक औद्योगिक और खनिज आधारित पहचान से आगे बढ़कर युवा शक्ति, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण पर आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि निवेश को रोजगार, उद्यमिता, बेहतर आय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना है। छत्तीसगढ़ के युवा केवल रोजगार तलाशने वाले न रहें, बल्कि अपने नवाचार और उद्यमिता के बल पर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करें, इसी सोच के साथ राज्य की नीतियों और योजनाओं को नया स्वरूप दिया जा रहा है। फोरम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री श्री एस. जयशंकर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सहित भारत और विश्व की अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल हो रही हैं।

6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, 11.57 प्रतिशत की विकास दर
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रही है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 1 लाख 79 हजार 244 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए विकास और जनकल्याण को समान प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना निर्माण, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

नई औद्योगिक नीति के बाद 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े सुधारों के माध्यम से निवेश प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। इन सुधारों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश के लिए नई संभावनाएं तैयार हुई हैं।

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप, युवा बनेंगे रोजगार सृजक

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था के केंद्र में युवा हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी की प्रतीक्षा करने वाले ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बनें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए उद्यमियों को अपने अभिनव विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ युवाओं को तकनीक, नवाचार, कौशल और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने से न केवल नए व्यवसाय खड़े होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी निर्मित होंगे।

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि प्रदेश में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके साथ ही नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं विकसित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

500 करोड़ का एआई मिशन, नवा रायपुर में एआई डेटा सेंटर पार्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन पर काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे तथा 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग देने का लक्ष्य है। नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ को देश के उभरते डिजिटल और एआई इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा तथा युवाओं के लिए नई पीढ़ी के रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

बस्तर बनेगा छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बदलता हुआ बस्तर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। सुरक्षा की स्थिति में तेजी से हुए सुधार के बाद अब बस्तर में विकास, निवेश, रोजगार और उद्यमिता के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है। बस्तर में 421 बंद स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए 34 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना बस्तर के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे बस्तर की औद्योगिक और व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

बस्तर में पर्यटन और स्थानीय उत्पाद बनेंगे रोजगार का बड़ा माध्यम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से इस क्षेत्र में निजी निवेश के साथ होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के वनांचलों में मिलने वाले लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि छत्तीसगढ़ केवल कच्चे माल का उत्पादक न रहे, बल्कि यहीं तैयार उत्पाद बनें और उनकी अधिकतम आर्थिक मूल्य स्थानीय लोगों को मिले।

ग्रीन एनर्जी से जुड़ेगा छत्तीसगढ़ का विकास

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब पारंपरिक ऊर्जा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आने वाले वर्षों में प्रदेश में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी का विस्तार राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ नए निवेश और ग्रीन जॉब्स के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

कच्चे माल से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर फोकस

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन राज्य की नई आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल इन संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि प्रदेश के भीतर ही उनका अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है। इसी दिशा में नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है। राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क तथा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पार्क भविष्य के औद्योगिक विकास को नई गति देंगे। कोरबा में लिथियम की खोज से प्रदेश में बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और न्यू एनर्जी सेक्टर में भी नई संभावनाएं खुली हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम से निवेश प्रक्रिया होगी और आसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू किया गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों के प्रकरणों में निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत आठ विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुमति और प्रक्रियाओं में अनावश्यक समय न लगे और वे अपना ध्यान उद्योग तथा रोजगार सृजन पर केंद्रित कर सकें।

संसाधन से नवाचार तक – नए छत्तीसगढ़ का निवेश मॉडल

मुख्यमंत्री श्री साय ने वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ को ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत किया, जहां प्राकृतिक संसाधन, पर्याप्त ऊर्जा, भूमि, कुशल और युवा मानव संसाधन, बेहतर होती कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियां एक साथ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का अगला चरण संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का है। निवेश इस परिवर्तन का माध्यम है, जबकि इसका अंतिम उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार, उद्यमिता और आय के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद एवं श्री राहुल भगत, विशेष सचिव एवं जनसम्पर्क आयुक्त श्री रजत बंसल, आवासीय आयुक्त श्रीमती श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से की सौजन्य भेंट…

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छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को लेकर हुई चर्चा**

दूरस्थ और जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर**

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा से उनके स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की जानकारी ली और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विशेष फोकस इस बात पर है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसके निकट ही गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं तक स्वास्थ्य तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ, वनांचल एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता और आधुनिक उपचार सुविधाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने की दिशा में प्राथमिकता से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा को प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, गंभीर बीमारियों के उपचार, स्वास्थ्य बीमा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में व्यापक बदलाव आया है। आयुष्मान भारत सहित केंद्र सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिली है। छत्तीसगढ़ सरकार भी केंद्र की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी तथा विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के नागरिकों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा।

पीएम-आशा योजना: किसानों को मिल रहा बेहतर मूल्य, खरीद व्यवस्था और डिजिटल सुधारों से बढ़ी पारदर्शिता…

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केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, मजबूरी में बिक्री को रोकने और कृषि बाजार को अधिक स्थिर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में उभरी है।”

शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना ने कृषि खरीद, मूल्य स्थिरीकरण और बाजार हस्तक्षेप को अधिक प्रभावी बनाकर किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

फैक्टशीट के मुताबिक, पीएम-आशा के तहत दलहन, तिलहन और खोपरा की समय पर खरीद सुनिश्चित की गई है।

इस कार्य में नाफेड यानी राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया-एनएएफईडी) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-एनसीसीएफ) जैसी एजेंसियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।”

किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा देने के लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, जिससे बाजार तक उनकी पहुंच मजबूत हुई है।

सरकार ने कहा कि पीएम-आशा देश की प्रमुख मूल्य समर्थन योजना है, जिसने डिजिटल सुधारों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ मिलकर खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, कुशल और व्यापक बनाया है, जिससे विभिन्न राज्यों में किसानों को बेहतर लाभ मिलने लगा है।”

बयान में कहा गया है कि योजना के तहत लागू किए गए डिजिटल सुधारों में आधार-आधारित प्रमाणीकरण, ई-एनएएम, ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति जैसे मंच शामिल हैं। इन पहलों ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद की है।|”

इसके अलावा, कृषि अवसंरचना कोष (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड) से मिले समर्थन और खरीद कवरेज के विस्तार ने भी योजना की प्रभावशीलता को बढ़ाया है। सरकार का मानना है कि तकनीक-आधारित सुधारों से किसानों को सीधे लाभ पहुंच रहा है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो रही है।”

पीएम-आशा के लिए बजटीय आवंटन में भी लगातार वृद्धि की गई है।

वर्ष 2024-25 में योजना के तहत वास्तविक व्यय 5,437.99 करोड़ रुपए रहा। इसके बाद 2025-26 में बजट बढ़ाकर 6,941.36 करोड़ रुपए किया गया और 2026-27 में इसे बढ़ाकर 7,200 करोड़ रुपए कर दिया गया। यह किसानों की आय सुरक्षा और न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।”

फैक्टशीट में विभिन्न फसलों के उत्पादन लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बीच अंतर का भी उल्लेख किया गया है।

वर्ष 2026-27 में सामान्य धान की उत्पादन लागत 1,627 रुपए प्रति क्विंटल रही, जबकि इसका एमएसपी 2,441 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जिससे किसानों को 814 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त लाभ मिला।”

इसी प्रकार पीली सोयाबीन की उत्पादन लागत 3,805 रुपए प्रति क्विंटल रही, जबकि इसका एमएसपी 5,708 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया। इससे किसानों को 1,903 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ प्राप्त हुआ।”

फैक्टशीट में आगे कहा गया है कि गेहूं की उत्पादन लागत 1,239 रुपए प्रति क्विंटल रही और इसका एमएसपी 2,585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जिससे किसानों को 1,346 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ मिला।”

वहीं जूट के मामले में सबसे अधिक लाभ का अंतर देखने को मिला। इसकी उत्पादन लागत 3,662 रुपए प्रति क्विंटल थी, जबकि एमएसपी 5,925 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया, जिससे किसानों को 2,293 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ प्राप्त हुआ।”