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‘रेडियो पर बात लेकिन संसद में डरते हैं मोदी…’, मल्लिकार्जुन खरगे का PM पर निशाना…

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भोपाल में आयोजित एक जनसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने  अमेरिका-भारत ट्रेड डील, किसानों की हालत, युवाओं की बेरोजगारी और लोकतंत्र की स्थिति को लेकर सरकार को घेरा और कहा कि देश का स्वाभिमान कमजोर किया जा रहा है.

‘सरेंडर मोदी’ के नारे और ट्रेड डील पर हमला

खरगे ने मंच से ‘सरेंडर मोदी’ के नारे लगवाए. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील में देश की मान-प्रतिष्ठा से समझौता किया गया. उनका आरोप था कि सरकार ने देश के स्वाभिमान को कमजोर किया है.

लोकतंत्र और संविधान पर खतरे की बात

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान दोनों खतरे में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री रेडियो पर बात करते हैं, लेकिन संसद में चर्चा से बचते हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार संसद में आकर खुलकर जवाब दे.

किसानों और खेती का मुद्दा

खरगे ने कहा कि भारत में लगभग 65 प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका में केवल 2-3 प्रतिशत लोग खेती करते हैं. उनका आरोप था कि सरकार की नीतियों से छोटे किसानों को नुकसान हो रहा है और उन्हें उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा.

युवाओं और यूथ कांग्रेस का जिक्र

उन्होंने यूथ कांग्रेस की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं ने बेरोजगारी का मुद्दा मजबूती से उठाया है. खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कांग्रेस डरने वाली नहीं है.

RSS और आजादी की विरासत पर बयान

खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने देश को आजादी दिलाई, जबकि आरएसएस से जुड़े लोग आजादी आंदोलन का हिस्सा नहीं थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांधी की विचारधारा पर चलती है और आज युवाओं की लड़ाई लड़ने के लिए राहुल गांधी जैसे नेता मौजूद हैं. सभा के अंत में खरगे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे डरें नहीं और मजबूती से संघर्ष करें. उन्होंने कहा कि देश और आजादी को मजबूत बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है.

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ने भरी ऊंची उड़ान, GSDP वृद्धि दर 11.57%, राष्ट्रीय औसत से भी आगे निकला प्रदेश…

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रदेश की मजबूत, संतुलित और विकासोन्मुख अर्थव्यवस्था का स्पष्ट प्रमाण है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, किसानों के हित में लिए गए निर्णयों, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने तथा सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारण छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित भावों पर बढ़कर लगभग 6 लाख 31 हजार 291 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसकी वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ में विकास के सभी प्रमुख क्षेत्र समान रूप से प्रगति कर रहे हैं.

किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का परिणाम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में 12.53 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है, जो किसानों की मेहनत, तकनीकी नवाचार, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं का परिणाम है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और समृद्ध किसान ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हैं. राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है.

औद्योगिक क्षेत्र में तेजी: निवेश और रोजगार के नए अवसर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज देश की औद्योगिक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार उद्योग क्षेत्र में 10.26 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है और राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग का योगदान लगभग 49 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है. उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश, अधोसंरचना विकास और रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे प्रदेश की आर्थिक संरचना और अधिक मजबूत हो रही है.

सेवा क्षेत्र बना नई अर्थव्यवस्था का आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा क्षेत्र में 13.15 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है. शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, आईटी एवं डिजिटल सेवाओं में विस्तार के कारण युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है.

प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि — प्रदेशवासियों की समृद्धि का संकेत

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर लगभग 1.79 लाख रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.07 प्रतिशत वृद्धि दर्शाती है. उन्होंने कहा कि यह प्रदेशवासियों की बढ़ती आय, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और सरकार की विकासोन्मुख नीतियों का सकारात्मक परिणाम है.

हर परिवार की समृद्धि हमारा लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक परिवार की आय बढ़े, जीवन स्तर बेहतर हो और समृद्धि हर घर तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर परिवार आर्थिक रूप से सशक्त एवं खुशहाल बने.

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान और मजबूत करेगा तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा.

PM Modi का विजन, Speaker Om Birla का एक्शन: 64 देशों संग बने Parliamentary Friendship Groups…

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 24 फरवरी, 2026 को घोषणा की कि भारत की वैश्विक स्तर पर विधायी भागीदारी को मजबूत करने के लिए लोकसभा ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह गठित किए हैं।

यह कदम ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कूटनीति को बढ़ावा देने के प्रस्ताव के बाद उठाया गया है। रिजिजू ने X पर एक पोस्ट में बताया कि इन समूहों की औपचारिक स्थापना लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने की है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशनसिंदूर की सफलता के बाद, नरेंद्र मोदी ने भारत और अन्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए संसदीय मैत्री समूहों के गठन का प्रस्ताव रखा था। माननीय अध्यक्ष ओम बिरला जी ने अब 60 से अधिक देशों के साथ इन समूहों का गठन कर वैश्विक लोकतांत्रिक संबंधों को मजबूत किया है।

18वीं लोकसभा के तहत, संसदीय मैत्री समूह (पीएफजी) दोनों सदनों के सभी दलों के सांसदों को एक साथ लाते हैं, जिसमें प्रत्येक देश को अन्य सदस्यों के साथ एक नामित समूह नेता सौंपा जाता है। नामित समूह नेताओं में श्रीलंका के लिए डी पुरंदेश्वरी (भाजपा), कजाकिस्तान के लिए पूनमबेन हेमंतभाई मादम (भाजपा), जर्मनी के लिए संजय कुमार झा (जेडीयू) और न्यूजीलैंड के लिए सामिक भट्टाचार्य (भाजपा) शामिल हैं। अन्य नेताओं में स्विट्जरलैंड के लिए राजीव प्रताप रूडी (भाजपा), अर्जेंटीना के लिए अशोकराव चव्हाण (इंका) और दक्षिण अफ्रीका के लिए हेमा मालिनी (भाजपा) शामिल हैं। भूटान समूह का नेतृत्व बिप्लब कुमार देब (भाजपा), भारत-कैरीकॉम समूह का नेतृत्व मनोज तिवारी (भाजपा) और फिजी समूह का नेतृत्व के सुधाकर (भाजपा) कर रहे हैं।

प्रमुख पश्चिम एशियाई और वैश्विक साझेदारों के लिए, सऊदी अरब समूह का नेतृत्व सुधांशु त्रिवेदी (भाजपा), इज़राइल का भर्तृहरि महताब (भाजपा), त्रिनिदाद और टोबैगो का विवेक ठाकुर (भाजपा) और मालदीव का लावु श्री कृष्ण देवरायलू (टीडीपी) कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका समूह का नेतृत्व बैजयंत पांडा (भाजपा), कुवैत का कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी (भाजपा), थाईलैंड का दिलीप सैकिया (भाजपा) और रूस का निशिकांत दुबे (भाजपा) कर रहे हैं। मॉरीशस का प्रतिनिधित्व जगदंबिका पाल (भाजपा) और इथियोपिया का महेश शर्मा (भाजपा) कर रहे हैं।

यूरोप में, अनुराग सिंह ठाकुर (भाजपा) यूरोपीय संघ संसद समूह का नेतृत्व करते हैं, गणेश सिंह (भाजपा) उज्बेकिस्तान के प्रमुख हैं, अरुण सिंह (भाजपा) चेक गणराज्य के प्रमुख हैं, भुवनेश्वर कलिता (भाजपा) नॉर्डिक देशों के प्रमुख हैं और परशोत्तम रूपाला (भाजपा) दक्षिण कोरिया के प्रमुख हैं। नाइजीरिया समूह के नेता एम. थंबीदुरई (एआईएडीएमके), पोलैंड के सुरेंद्र सिंह नागर (भाजपा), बुल्गारिया के काकोली घोष दस्तीदार (एआईटीसी), नेपाल के नीरज शेखर (भाजपा) और यूनाइटेड किंगडम के रवि शंकर प्रसाद (भाजपा) हैं।

अन्य नियुक्तियों में आर्मेनिया से धर्मेंद्र यादव (सपा), फिलीपींस से गौरव गोगोई (इंका), ऑस्ट्रिया से राजीव शुक्ला (इंका), कतर से कोडिकुन्निल सुरेश (इंका), आयरलैंड से मुकुल वासनिक (इंका), फ्रांस से शशि थरूर (इंका), जापान से अखिलेश यादव (सपा) और इटली से पी चिदंबरम (इंका) शामिल हैं। एनके प्रेमचंद्रन (आरएसपी) मेडागास्कर और कुमारी सेल्जा (इंका) मंगोलिया का नेतृत्व करेंगे। अफ्रीका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से, अभिषेक बनर्जी (एआईटीसी), असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम), ऑस्ट्रेलिया से मनीष तिवारी (इंका), पुर्तगाल से केसी वेणुगोपाल (इंका) और जॉर्जिया से सस्मित पात्रा (बीजेडी) नेतृत्व करेंगे। अपराजिता सारंगी (भाजपा), प्रो. राम गोपाल यादव (सपा), मिस्र से टीआर बालू (डीएमके), मलेशिया से कनिमोझी करुणानिधि (डीएमके) और क्यूबा से मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी (टीडीपी) नेतृत्व करेंगे।

सूरीनाम समूह का नेतृत्व संजय सिंह (आप), मोरक्को का नेतृत्व अरविंद गणपत सावंत (शिव सेना-यूबीटी), सिंगापुर का नेतृत्व सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी), इंडोनेशिया का नेतृत्व श्रीकांत एकनाथ शिंदे (शिव सेना) और बाल्टिक राज्यों का नेतृत्व पीवी मिधुन रेड्डी (वाईएसआरसीपी) कर रहे हैं। वहीं, ब्राजील का नेतृत्व प्रफुल पटेल (एनसीपी), केन्या का नेतृत्व प्रेम चंद गुप्ता (आरजेडी), चिली का नेतृत्व डेरेक ओ’ब्रायन (एआईटीसी), बहरीन का नेतृत्व तिरुचि शिवा (डीएमके) और यूक्रेन का नेतृत्व अरविंद धर्मपुरी (भाजपा) कर रहे हैं। अंत में, वियतनाम का नेतृत्व विष्णु दयाल राम (भाजपा), मेक्सिको का प्रमोद तिवारी (इंक) का, ईरान का देवेश चंद्र ठाकुर (जेडीयू) का और संयुक्त अरब अमीरात का नेतृत्व संजय जायसवाल (भाजपा) कर रहे हैं।

केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किया मंजूर…

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केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी के बाद, भारत के राष्ट्रपति केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल राज्य विधानसभा में संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत विचार के लिए भेजेंगे।

विधानसभा से विचार प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और संसद में नाम परिवर्तन के लिए विधेयक प्रस्तुत करने हेतु राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त की जाएगी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले यह नाम परिवर्तन किया जा रहा है, जबकि चुनाव की तारीखों की घोषणा अभी तक भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं की गई है। इस वर्ष जनवरी में, केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन को पत्र लिखकर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार द्वारा नाम परिवर्तन के कदम का समर्थन किया था। चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री को पत्र का उत्तर देने के लिए धन्यवाद दिया और सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि ‘केरलम’ नाम राज्य की संस्कृति, भाषा और इतिहास को दर्शाता है।

संस्कृति और विरासत का सम्मान

उन्होंने कहा कि इस नाम को पुनर्स्थापित करना हमारी विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भाजपा और एनडीए हमेशा केरल की परंपराओं, संस्कृति और आस्था की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं। चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दलों का इन मूल्यों का उल्लंघन करने का एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ‘विकसित केरल, सुरक्षित केरल और आस्था की रक्षा’ केवल नारे नहीं हैं, बल्कि यह उनका मिशन है। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा केरल और उसके लोगों के हित में अच्छे कार्यों का समर्थन करेंगे।

मुख्यमंत्री का उत्तर

मुख्यमंत्री विजयन ने अपने उत्तर पत्र में कहा कि राज्य का मूल नाम ‘केरलम’ था, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान प्रशासनिक सुविधा के लिए ‘केरल’ में परिवर्तित किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा किए गए परिवर्तनों को सुधारने का कार्य किया जा रहा है और मूल नाम को बहाल किया जा रहा है, जो राज्य की संस्कृति के अनुरूप है।

भारत के साथ 6 देशों का गठबंधन बनाएंगे नेतन्याहू, किसको है ये जवाब और क्या है इसका मकसद?

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भारत के लिए यह एक अहम हफ्ता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (25 फरवरी) को दो दिन के दौरे पर इजराइल जा रहे है. वह इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ कई विषयों पर चर्चा करेंगे.

दौरे से पहले इजराइली प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी को अपना प्यारा दोस्त बताया और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्ते पर जोर दिया.

नेतन्याहू ने X पर लिखा, कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में मैंने अपने प्यारे दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक दौरे के बारे में बात की. इस रिश्ते को दो ग्लोबल लीडर्स के बीच एक मजबूत गठबंधन बताते हुए, नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल और भारत इनोवेशन, सिक्योरिटी और एक जैसे स्ट्रेटेजिक विजन में पार्टनर हैं.

नेतन्याहू ने यह भी घोषणा की कि इजराइल पश्चिम एशिया में या उसके आसपास सहयोगी देशों का एक नेटवर्क बनाने की योजना बना रहा है, जिसे हेक्सागन ऑफ अलायंसेस नाम दिया गया है. इसका गठबंधन का मकसद उन दुश्मनों के खिलाफ मिलकर खड़ा होना है जिन्हें उन्होंने कट्टरपंथी दुश्मन कहा है.

क्या है हेक्सागन ऑफ अलायंसेस?

नेतन्याहू के अनुसार, हेक्सागन ऑफ अलायंस छह देशों का एक फ्रेमवर्क होगा जिसमें वेस्ट एशिया में या उसके आसपास के देश शामिल होंगे. इजराइली पीएम जिन देशों को गठबंधन का हिस्सा मान रहे हैं, वे हैं भारत, ग्रीस, साइप्रस और अरब, अफ्रीकी और एशियाई देश. टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा, मेरे सामने जो विजन है उसके हिसाब से हम एक पूरा सिस्टम बनाएंगे. यहां मकसद देशों का एक ऐसा एक्सिस बनाना है जो असलियत, चुनौतियों और लक्ष्यों पर रेडिकल एक्सिस के खिलाफ एक जैसा सोचते हों.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह अलायंस IMEC यानी इंडिया- मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर के विजन जैसा होगा, जिसका मकसद कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर इकोनॉमिक डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है. ये गठबंधन आर्थिक सहयोग, कूटनीतिक तालमेल और सुरक्षा सहयोग पर तालमेल बिठाएगा.

प्रस्तावित गठबंधन ईरान को जवाब देते हुए बनाया गया है. जानकारों का कहना है कि नेतन्याहू शिया एक्सिस के खिलाफ अपनी जीत को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं. इसे एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस के रूप में जाना जाता है. ये ईरान केंद्रित नेटवर्क है जो मध्य पूर्व में इजराइल और पश्चिमी प्रभाव का विरोध करता है.

हमास का क्या कहना?

हमास के प्रवक्ता हेजम कासिम ने नेतन्याहू के हेक्सागन ऑफ अलायंस प्लान को रिजेक्ट कर दिया. कासिम ने कहा, जो हो रहा है वह इलाके को इस तरह से बदलने की कोशिश है जिससे सिर्फ कब्जे वाले देशों के इंटरेस्ट पूरे हों.

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ पर रोक लगाई, पीएम मोदी डील रद्द करके दिखाएं: राहुल गांधी…

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मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित किसान महा-चौपाल में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी कैबिनेट से बिना पूछे ट्रंप को फोन किया और ट्रेड डील कर डाली.

उन्होंने देश के किसानों को बेच दिया. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ पर रोक लगाई है, अब अगर मोदी में हिम्मत है तो वो ट्रेड डील रद्द करके दिखाएं. अपने भाषण में उन्होंने चीन के मुद्दे का भी जिक्र किया. आइए जानते हैं उन्होंने किस मुद्दे पर क्या कहा.

किसान महा-चौपाल को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद पहला स्पीकर नेता प्रतिपक्ष होता है. ये हर साल होता है. देश के इतिहास में पहली बार लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया. मैंने बोलना शुरू किया तो मुझे रोका गया. मैंने नरवणे जी की किताब का जिक्र किया तो मुझे रोका गया. उन्होंने अपनी किताब लिखा है कि चीन के टैंक भारत की बाउंड्री में आ रहे थे तो उन्होंने राजनाथ सिंह को फोन किया, जिन्होंने जवाब नहीं दिया.

अजीत डोभाल और जयशंकर ने उन्हें जवाब नहीं दिया

राहुल ने कहा, इसके बाद नरवणे ने अजीत डोभाल को बताया, उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद जयशंकर को फोन किया और बताया कि चीन के टैंक अंदर आ रहे हैं मुझे क्या करना है, उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया. वो सवाल इसलिए पूछ रहे थे क्योंकि चीन की सेना को जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री से पूछना पड़ता है.

कांग्रेस सांसद ने कहा, चीन की आर्मी अंदर आ रही थी और आर्मी चीफ को जवाब नहीं मिल रहा था. इसके बाद राजनाथ सिंह ने पीएम को फोन किया. रक्षा मंत्री से पीएम कहते हैं कि आर्मी चीफ को बताओ कि जो वो उचित समझें वो करें. आर्मी चीफ अपनी किताब में लिखते हैं, उस दिन मुझे देश के प्रधानमंत्री ने अकेला छोड़ दिया. आर्मी चीफ को जब ऑर्डर देने का समय आया तो हमारे पीएम गायब हो गए. ये तो शुरुआत थी. संसद में ये बोलने की मैं कोशिश कर रहा था, मुझे बोलने नहीं दिया गया. जैसे मैंने बोलना शुरू किया, पीएम ने अमित शाह की ओर देखा और वो खड़े हो गए, मुझे बोलने नहीं दिया गया.

4 महीने से समझौता क्यों रुका हुआ था?

राहुल गांधी ने कहा, मैं किताब लेकर पहुंचा तो कहा गया कि किताब को कोट नहीं कर सकते. मजे की बात ये है कि मैंने नरवणे जी की बात कर रहा था. बैकग्राउंड में एक चीज चल रही थी. 4 महीने के लिए भारत और अमेरिका का समझौता रुका हुआ था. क्यों रुका था… कृषि के मामले पर रुका था. सरकार नहीं चाहती थी कि अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियां सोया, कपास और मक्का हिंदुस्तान में बेच पाएं. कोई किसान भी नहीं चाहता. चार महीने चर्चा बंद थी.

राहुल ने कहा, मैंने भाषण दिया, जिसमें मैं सिर्फ नरवणे जी की बात नहीं करना चाहता था. मैं दो-तीन चीजें और कहना चाहता था. मेरा भाषण खत्म होते ही शाम को पीएम मोदी ने बिना कैबिनेट से पूछे उसी दिन ट्रंप को फोन किया. ट्रंप ने ट्वीट किया और कहा कि मोदी ने मुझे फोन किया है और बताया कि डील साइन करने के लिए तैयार हूं. ये डील चार महीने रुकी थी, लोकसभा से मोदी भागकर गए, अगले दिन झूठा बहाना बनाया कि कांग्रेस पार्टी की महिलाएं उन पर हमला करना चाहती थीं. फिर ट्रंप को फोन लगाया. शिवराज चौहान से पूछिए… क्या पीएम ने उनकी राय ली. उन्होंने ऐसा क्यों किया? एकदम से हिंदुस्तान के किसानों को बेच दिया. हमारा सारा का सारा डेटा अमेरिका को दे दिया.

बीजेपी और मोदी का फाइनेंशियल स्ट्रक्चर हैं अडानी

उन्होंने कहा, इसका पहला कारण ये है कि अमेरिका में एपस्टीन की 30 लाख फाइल पड़ी हैं. लाखों फाइलों के ईमेल, मैसेज, वीडियो अभी तक रिलीज नहीं किए गए हैं. अमेरिका ने मोदी सरकार को धमकाने के लिए हरदीप पुरी का नाम रिलीज कर दिया है. मैसेज साफ था कि अगर हमारी बात नहीं सुनी तो फाइलों में से सबूत निकलेगा. दूसरा कारण ये है कि अडानी पर अमेरिका में क्रिमिनल केस है, वो अमेरिका नहीं जा सकते. अडानी, बीजेपी और नरेंद्र मोदी का फाइनेंशियल स्ट्रक्चर हैं. ऐसे में ये केस अडानी पर नहीं, नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर है.

IDFC First Bank मामले में एक्शन, 24 घंटे के अंदर ही सरकार ने पैसा किया रिकवर…

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IDFC First Bank से जुड़े 590 करोड़ रुपए के कथित घोटाले मामले में आज यानी मंगलवार को बड़ा एक्शन हुआ है. बैंक से 556 करोड़ रुपए की रिकवरी के साथ ही करीब 25 करोड़ रुपए की ब्याज राशि रिकवर कर ली गई है.

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा विधानसभा में जानकारी दी है कि सिर्फ 24 घंटे के अंदर ही सरकार ने IDFC First Bank से गबन की गई राशि को रिकवर कर लिया गया है.

590 करोड़ रुपए में से 556 करोड़ रुपए हरियाणा सरकार के अन्य बैंकों के खातों में IDFC बैंक के द्वारा ट्रांसफर कर दिए गए हैं. बैंक से पूरी रिकवरी 24 घंटे के दौरान ही कर ली गई है.

वित्त सचिव की अध्यक्षता में इस पूरे मामले को लेकर एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है जो आगे भी इस मामले की जांच जारी रखेगी ताकि पता लग सके कि बैंक कर्मचारियों के साथ कहीं हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों के अधिकारी या कर्मचारी तो इस गबन की सांठ-गांठ में शामिल नहीं थे. बैंक भी अपनी और से जांच जारी रहेगी.

सीएम ने क्या कहा था?

इससे पहले सीएम ने कहा था कि सरकार के पैसे पुराने समय से अलग-अलग बैंकों में रखे जाते हैं. IDFC First Bank में हमारे कुछ विभागों के पैसे थे. सरकार ने प्रो-एक्टिव होकर बैंक खातों का मिलान किया तो पाया कि कुछ खातों का मिलान नहीं है. जनवरी माह के मध्य में कुछ खातों का मिलान नहीं हो पाया था. लेकिन हमने तुरंत बैंक को खाता बंद करने के लिए निर्देशित किया.

उन्होंने आगे कहा कि बैंक ने 21 तारीख को पत्र लिखा जबकि उससे पहले ही सरकार की तरफ से बैंक से कम्युनिकेशन कर लिया गया था. इसके साथ ही सरकार ने बैंक को संपूर्ण राशि ब्याज सहित अधिकृत बैंक में स्थानांतरित करने को कहा है. इसमें बैंक के कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है. हरियाणा सरकार के विभागों ने इस मामले को ध्यान में लाया है. हरियाणा सरकार ने पूरा मामला एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच करने के लिए दिया है.

क्या है पूरा मामला?

IDFC फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया कि उसके कर्मचारियों और दूसरों ने प्राइवेट सेक्टर के लेंडर के साथ हरियाणा सरकार के ग्रुप ऑफ अकाउंट्स में 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है. रविवार को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि उसने बैंकिंग रेगुलेटर को इस मामले के बारे में बताया है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है.

IDFC फर्स्ट बैंक की फाइलिंग में कहा गया है, पहली नजर में, चंडीगढ़ की एक ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा राज्य सरकार के कुछ अकाउंट्स में बिना इजाज़त और फ्रॉड वाली गतिविधियां की हैं और इसमें शायद दूसरे लोग/एंटिटी/काउंटरपार्टी भी शामिल हो सकते हैं. अभी बैंक ने फ्रॉड का साइज 590 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है और कहा है कि एक रिकंसिलिएशन एक्सरसाइज आगे की जानकारी मिलने, क्लेम के वैलिडेशन और किसी भी तरह की रिकवरी के आधार पर आखिरी रकम तय करेगी.

दरअसल, हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया. इस प्रक्रिया के दौरान खाते की वास्तविक शेष राशि और विभाग द्वारा बताई गई राशि में अंतर पाया गया. 18 फरवरी 2026 से अन्य हरियाणा सरकारी संस्थाओं ने भी अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया. जांच के दौरान उनके बताए गए बैलेंस और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस में अंतर पाया गया.

स्काई स्टिंग से बदलेगा एयर पावर गेम, PM मोदी के इजराइल दौरे से पहले क्यों इसकी चर्चा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे से पहले भारत और इजराइल के बीच रक्षा सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इन चर्चाओं के केंद्र में है इजराइल की 250 किलोमीटर रेंज वाली नई बीवीआर (Beyond Visual Range) एयर-टू-एयर मिसाइल स्काई स्टिंग.

दरअसल, भारतीय वायुसेना लंबी दूरी की हवाई मारक क्षमता को और मजबूत करना चाहती है. पड़ोसी देश चीन की वायु सेना अपनी Beyond Visual Range क्षमता लगातार बढ़ा रही हैं. चीन की मदद से पाकिस्तान भी अपनी क्षमताओं में इजाफा कर रहा है, ऐसे में 250 किमी रेंज वाली मिसाइल वायुसेना की लॉन्ग-रेंज एयर डॉमिनेंस क्षमता को बड़ा बढ़ावा दे सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, इस मिसाइल को सबसे पहले HAL द्वारा बनाए जा रहे Tejas Mk1A फाइटर जेट पर लगाने की संभावना है. IAF ने 180 तेजस Mk1A का ऑर्डर दिया है. ये विमान भविष्य में वायुसेना की मध्यम श्रेणी की लड़ाकू ताकत की रीढ़ माने जा रहे हैं. तेजस Mk1A के पहले बैच में इजराइली ELM-2052 AESA रडार लगाया जाना है, जो लंबी दूरी की पहचान, मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता देता है. ऐसे में उसी इकोसिस्टम की मिसाइल के साथ इंटीग्रेशन अपेक्षाकृत आसान हो सकता है.

चरणबद्ध खरीद की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो पहले ऑफ-द-शेल्फ यानी सीधे खरीद का विकल्प अपनाया जा सकता है ताकि तुरंत क्षमता बढ़ाई जा सके. इसके बाद के साथ मिलकर भारत में उत्पादन की संभावना भी देखी जा सकती है. यह कदम मेक इन इंडिया और तकनीकी आत्मनिर्भरता की नीति के अनुरूप होगा.

चुनौतियां क्या हैं?

250 किमी रेंज की मिसाइल को किसी फाइटर जेट पर लगाना आसान काम नहीं है.

मिसाइल का सीकर डाटा लिंक इंजन और प्रोपल्शन विमान का रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम इन सबके बीच पूरी तकनीकी तालमेल जरूरी होता है.

दरअसल, तेजस Mk1A पर पहले से स्वदेशी मिसाइल के इंटीग्रेशन में भी तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं. ऐसे में रडार और मिसाइल एक ही तकनीकी इकोसिस्टम से हों, तो शुरुआती चरण में सहूलियत मिल सकती है.

अभी विकास चरण में है स्काई स्टिंग

करीब तीन साल पहले पेश की गई स्काई स्टिंग अभी पूरी तरह ऑपरेशनल सेवा में शामिल नहीं हुई है. इसलिए भारत सिर्फ कागज़ी रेंज नहीं देखेगा, बल्कि

इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर माहौल में प्रदर्शन नो-एस्केप ज़ोन इंजन की विश्वसनीयता ट्रायल और वैलिडेशन इन सभी पहलुओं का गहन परीक्षण करेगा.

भारत इजराइल रक्षा साझेदारी पहले से मजबूत

भारत पहले ही राफेल की I-Derby ER और Python-5 मिसाइलों का उपयोग कर रहा है. इसके अलावा SPYDER एयर डिफेंस सिस्टम और Barak-8 जैसी संयुक्त परियोजनाएं दोनों देशों के गहरे रक्षा सहयोग को दिखाती हैं. ऐसे में स्काई स्टिंग सौदा इस रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार दे सकता है.

अंतिम फैसला क्या होगा?

वायुसेना का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि मिसाइल कितनी जल्दी उपलब्ध हो सकती है क्या इसका प्रदर्शन निवेश के अनुरूप है और क्या यह स्वदेशी प्रयासों के साथ संतुलन बनाकर चल सकती है अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत इस डील को आगे बढ़ा सकता है.

SBI का दावा: दुनिया देखती रह जाएगी भारत की रफ्तार! Q3 में 8.1% रह सकती है GDP…

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देश के सबसे बड़े लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इकॉनमी में तेजी बने रहने की उम्मीद है, और मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (FY26) की तीसरी तिमाही में GDP में लगभग 8.1 परसेंट की बढ़ोतरी होने का अनुमान है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्लोबल मुश्किलों के बावजूद, भारतीय इकॉनमी मजबूत बनी हुई है, जिसे घरेलू डिमांड और सभी सेक्टर में स्थिर इकॉनमिक एक्टिविटी का सपोर्ट मिला है. इसमें कहा गया है कि हमें Q3FY26 में रियल GDP ग्रोथ 8.1 परसेंट के करीब रहने की उम्मीद है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर एसबीआई ने देश की इकोनॉमी को लेकर किस तरह की रिपोर्ट सामने रखी है.

जीडीपी क्यों रह सकती है मजबूत?

रिपोर्ट के मुताबिक, हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक इंडिकेटर FY26 की तीसरी तिमाही के दौरान मजबूत इकॉनमिक एक्टिविटी का संकेत दे रहे हैं. रूरल कंजम्पशन मजबूत बना हुआ है, जिसे खेती और नॉन-खेती दोनों तरह की एक्टिविटी से पॉजिटिव सिग्नल मिले हैं. साथ ही, शहरी कंजम्पशन में लगातार सुधार हुआ है, जिसे फाइनेंशियल स्टिमुलस और पिछले त्योहारी सीजन से बढ़े हुए खर्च का सपोर्ट मिला है. पहले एडवांस अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत की GDP 7.4 परसेंट की दर से बढ़ने का अनुमान है, जिसमें ग्रोथ ज़्यादातर घरेलू डिमांड पर निर्भर करेगी. रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि ग्लोबल इकोनॉमिक माहौल में अनिश्चितताओं के बावजूद, घरेलू खपत इकोनॉमिक बढ़ोतरी को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभा रही है.

27 फरवरी को आएगा डाटा

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि FY26 के लिए GDP का दूसरा एडवांस अनुमान 27 फरवरी, 2026 को जारी होने वाला है. इन अनुमानों में और डेटा और बदलाव शामिल होंगे, और बेस ईयर में बदलाव की वजह से पहली और दूसरी तिमाही के पिछले तिमाही GDP आंकड़ों में बदलाव होने की उम्मीद है. भारत ने अपने GDP बेस ईयर को 2011-12 से 2022-23 में अपडेट किया है, और नई सीरीज 27 फरवरी, 2026 को जारी होने वाली है. रिपोर्ट में कहा गया है कि, बड़े मेथड में बदलावों को देखते हुए, GDP डेटा में बदलावों की दिशा का अंदाजा लगाना मुश्किल है. बेस ईयर में बदलाव का मकसद भारतीय इकोनॉमी के मौजूदा स्ट्रक्चर को बेहतर ढंग से दिखाना है, जिसमें डिजिटल कॉमर्स और सर्विस सेक्टर की बढ़ती भूमिका जैसे बदलाव शामिल हैं.

महंगाई के गणित में भी हुआ बदलाव

इसके अलावा, भारत ने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के लिए बेस ईयर को भी 2024 तक अपडेट किया है, जिससे मौजूदा कंजम्पशन पैटर्न के आधार पर महंगाई का ज्यादा सही अंदाज़ा लगाने में मदद मिलेगी. हाल ही में, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने भी कहा कि CPI बेस ईयर अपडेट के बाद महंगाई टारगेटिंग रेंज में बदलाव की जांच की जा रही है और अगली पॉलिसी में इस पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अप्रैल मॉनेटरी पॉलिसी के दौरान RBI के अगले प्रोजेक्शन में बदले हुए फ्रेमवर्क को ध्यान में रखा जाएगा. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि मजबूत घरेलू डिमांड, मजबूत कंजम्पशन ट्रेंड और चल रही इकोनॉमिक एक्टिविटी भारत के ग्रोथ आउटलुक को सपोर्ट करती रहेंगी, भले ही ग्लोबल इकोनॉमिक चुनौतियां बनी हुई हैं.

दिल्ली वक्फ बोर्ड और मस्जिदों के खिलाफ PIL को हाई कोर्ट ने किया खारिज, HC बोला- याचिका पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं है…

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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (23 फरवरी) को 1980 की वक्फ अधिसूचना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका खारिज कर दिया. इस याचिका में जहांगीरपुरी स्थित तीन मस्जिदों को सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा बताया गया था.

यह याचिका एक गैर सरकारी संगठन (NGO) ‘सेव इंडिया’ ने दायर की थी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने पाया कि ‘सेव इंडिया’ की यह याचिका पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं है, जिसके बाद हाई कोर्ट ने कहा कि हम इस याचिका पर सुनवाई के लिए इच्छुक नहीं और उस याचिका को पेंडिंग एप्लीकेशन के साथ खारिज कर दिया.कोर्ट ने कहा कि करीब 46 साल पहले जारी किए गए नोटिफिकेशन पर छोटी-मोटी बातों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.

‘याचिका न तो सही है और न ही पब्लिक इंटरेस्ट में है’

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता, सेव इंडिया फाउंडेशन, बेवजह सुलझे हुए मुद्दों को फिर से खोल रहा है और यह याचिका न तो सही है और न ही पब्लिक इंटरेस्ट में है. कोर्ट ने कहा कि संगठन ने 2024 और 2026 के बीच 37 PIL और 11 रिट पिटीशन फाइल की थीं. पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन PIL के गलत इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी देते हुए, कोर्ट ने जोर देकर कहा कि PIL की पवित्रता को किसी भी कीमत पर कम नहीं किया जाना चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की बेंच ने पाया कि गैर-सरकारी संगठन सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर की गई यह जनहित याचिका सद्भावना या जनहित से प्रेरित नहीं थी. कोर्ट ने आदेश दिया कि हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं, इसलिए इसे लंबित अर्जियों के साथ खारिज किया जाता है.

क्या है मामला

दरअसल याचिकाकर्ता ने दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा 24 मार्च, 1980 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी. अधिसूचना में कुछ संपत्तियों को सुन्नी वक्फ संपत्ति घोषित करने का आदेश दिया गया था. इनमें जहांगीरपुरी स्थित मोती मस्जिद, जामा मस्जिद और एक अन्य मस्जिद है. याचिकाकर्ता का दावा था कि जिस जमीन पर ये तीनों संपत्तियां स्थित हैं, उसे दिल्ली सरकार ने 1977 में उसके मालिकों को मुआवजा देकर खरीद लिया था. इसलिए उस जमीन पर कोई भी निर्माण सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण था और उन्हें वक्फ संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता था.

याचिका में दावा किया गया कि यह अधिग्रहण दिल्ली के सुनियोजित विकास के लिए किया गया था और जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण को सौंप दी गई थी, जिसने इन भूखंडों को जहांगीरपुरी नाम की एक सुनियोजित कॉलोनी के औपचारिक लेआउट प्लान में शामिल कर लिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता बार-बार याचिकाएं दायर कर उन्हें जनहित याचिकाएं बताता है और उसने अनावश्यक रूप से अतीत को कुरेदने का प्रयास किया है इसलिए 46 साल पहले जारी किसी भी अधिसूचना को मामूली आधारों पर चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

इसके साथ ही कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि जनहित याचिका की पवित्रता को किसी भी कीमत पर किसी भी याचिकाकर्ता द्वारा भंग नहीं किया जाना चाहिए और यहां तक कि उच्चतम न्यायालय के अनुसार भी, यह अदालतों का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करें कि तुच्छ याचिकाएं या नेक इरादे से दायर न की गई याचिकाएं शुरू में ही रोक दी जाएं.