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स्पेशल कोर्ट के गठन से जुड़े मामले का सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, 17 हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस…

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के गठन से जुड़े मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है. इस मामले को लेकर कोर्ट ने 17 हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस भेजा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के विचार भी जरूरी हैं.

हमें यह जानकारी मिली है कि 17 राज्य ऐसे हैं, जहां NIA के तहत 10 से अधिक मुकदमे विशेष रूप से UAPA के अंतर्गत लंबित हैं.

गृह मंत्रालय ने NIA मामलों के अलावा अन्य मामलों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है. कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के महाधिवक्ता पेश हुए. मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी. ये सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ में होगी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने UAPA और एमसीओसीए जैसे विशेष कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का सुझाव दिया था.

क्या अब हम इस आधार पर आगे बढ़ें?

इस मामले मेंCJI सूर्यकांत ने कहा, क्या अब हम इस आधार पर आगे बढ़ें कि सरकार विशेष NIA अदालतों की स्थापना के लिए फंड का एक निश्चित हिस्सा आवंटित करने के लिए प्रतिबद्ध है? इस पर एएसजीऐश्वर्या भाटी ने कहा, जी हां. सीजेआई ने कहा तो फिर UAPA और नारकोटिक्स से जुड़े मामले भी हैं.

ये मामले अधिकार क्षेत्र में नहीं आते

इस पर एएसजी ने जवाब दिया कि एनआईए अदालतें UAPA से जुड़े मामलों को भी देखेंगी. सीजेआई ने कहा किन्यायिक पक्ष से ये मामले हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आते. केंद्र को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इस शर्त के साथ फंड जारी करना चाहिए कि इसका इस्तेमाल सिर्फ़ निर्माण कार्यों के लिए ही किया जाएगा.

हरियाणा ने 18 विशेष अदालतें स्थापित कीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जब 60 फीसदी फंड दिया गया था, तब भी कुछ नौकरशाहों की वजह से वह पैसा कभी भी न्यायपालिका तक नहीं पहुंच पाया. हरियाणा ने अभी-अभी 18 विशेष अदालतें स्थापित की हैं लेकिन इन कई अदालतों की अध्यक्षता वही एक ही जज कर रहे हैं. अब हमें राज्यों के सहयोग की भी जरूरत है. उन अदालतों को स्थापित करने के लिए नीति पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है.

वहीं,गुजरात के AG कमल त्रिवेदी ने बताया, राज्य में सिर्फ एनआईए मामलों से निपटने के लिए एक विशेष अदालत बनाई गई है. इस पर सीजेआई ने कहा- हां, तो केंद्र सिर्फ एनआईए मामलों के लिए एक अदालत को फ़ंड दे रहा है लेकिन दूसरी, तीसरी वगैरह अदालतें राज्य बना सकते हैं.

ईरान युद्ध का टिकाऊ सामानों पर पड़ा बुरा असर, 21 प्रतिशत तक गिर गए हैं इन कंपनियों के स्टॉक्स…

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ईरान-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का प्रभाव सीधे तौर पर भारत के कई सेक्टर्स पर देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय तनाव और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों, माल ढुलाई खर्च और सप्लाई चेन में आई रुकावटों से इससे जुड़े सेक्टरों में लागत काफी बढ गई है.

इससे कंपनियों के मुनाफे, स्टॉक रखने की लागत और आने वाले समय की मांग को लेकर चिंता बढ़ गई है.

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें प्लास्टिक, रेजिन, इन्सुलेशन और पैकेजिंग जैसे कच्चे माल को महंगा बना रही हैं. साथ ही, ईंधन और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बढ़ गया है. इसके अलावा, परिवहन रास्तों और हवाई क्षेत्र में रुकावट के कारण माल ढुलाई महंगी हो गई है और डिलीवरी में देरी हो रही है, जिससे कंपनियों को ज्यादा स्टॉक रखना पड़ रहा है और खर्च बढ़ रहा है. देश में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स यानी टिकाऊ सामान बेचने वाली कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी जा रही है. पाइप कंपनियों के शेयरों में 21 फीसदी तक की गिरावट आई है.

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर असर

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में फिलहाल सबसे बड़ी चिंता Q1FY27 में निर्यात बिक्री पर असर की है, खासकर अगर मध्य पूर्व का हवाई क्षेत्र बंद रहता है. हालांकि, ज्यादातर सामान समुद्र के रास्ते जाता है, जो अभी ज्यादा प्रभावित नहीं है, लेकिन हवाई माल ढुलाई महंगी होने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है.

इस सेक्टर में मांग कीमत के प्रति संवेदनशील होती है, इसलिए कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर आसानी से नहीं डाल पातीं. इससे कम समय में कंपनियों की कमाई (EBITDA) पर असर पड़ सकता है. साथ ही, सप्लाई चेन में दिक्कतें भी बनी हुई हैं, खासकर अगर सुदूर पूर्व के देशों से जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित होती है. 27 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद से Nifty Consumer Durables में 12.3% की गिरावट आई है.

पीक सीजन में RAC कंपनियों को झटका

रूम एयर कंडीशनर (RAC) सेक्टर को ऐसे समय पर झटका लगा है जब मार्च उत्पादन का सबसे अहम महीना होता है. इसका असर Q1FY27 तक जारी रह सकता है, जिससे गर्मियों की मांग पूरी करने की तैयारी प्रभावित हो सकती है.

LPG की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है, जिससे हीट एक्सचेंजर बनाने में दिक्कत आ रही है. इसके चलते कुछ कंपनियां अब ऑक्सीएसिटिलीन और PNG जैसे दूसरे ईंधनों का इस्तेमाल कर रही हैं. हालांकि, रेजिन और औद्योगिक गैसों की कीमतें बढ़ने से मुनाफे पर दबाव बना हुआ है, जिससे कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं. अनिश्चित माहौल के कारण कंपनियां महंगे स्टॉक जमा करने से बच रही हैं. 27 फरवरी से Amber Enterprises और PG Electroplast के शेयर 21% गिरे हैं, Voltas के 20%, Blue Star के 16% और Havells के 12% टूटे हैं.

US Iran War: कौन रुकवाएगा अमेरिका-ईरान की जंग? भारत, पाकिस्तान या तुर्की? किसे मिलेगा क्रेडिट?

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US Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग को 25 दिन हो गए हैं, लेकिन इसमें ट्विस्ट 24वें दिन आया जब ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की ईरान से 2 दिनों से प्रोडक्टिव बातचीत हो रही है, जिसके बद 5 दिनों तक ईरान की एनर्जी फेसिलिटी पर हमले नहीं होंगे।

लेकिन ईरान ने अमेरिका की इस बात को सिरे से नाकारते हुए कहा कि ऐसी कोई बात हमारी अमेरिका से नहीं हुई है। वहीं, इन सब के बीच पाकिस्तान की तरफ से खबर आई कि उनसे अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता को लेकर बात कराई है। जिसको लेकर कुछ लोग पाकिस्तान का मजाक बना रहे हैं तो कुछ उसे तरजीह भी दे रहे हैं। ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता के इस खेल कौन-सा देश कितना बड़ा किरदार निभा रहा है।

समझौता नहीं सहयोगियों के दबाव में बदला रुख

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपना रुख इसलिए बदला क्योंकि अमेरिका के सहयोगी देशों और खाड़ी देशों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को ज्यादा नुकसान पहुंचा, तो भविष्य में यह क्षेत्र पूरी तरह अस्थिर हो सकता है। इससे युद्ध के बाद भी हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद ही ट्रंप ने समझौते जैसी बात करना शुरू किया था।

मध्यस्थता मे पाकिस्तान समेत कितने देश?

मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और ओमान जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित कराने की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों का मकसद है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू हो सके।

तुर्की ने जताई मध्यस्थता की इच्छा

तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने कई बार कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इस जंग में शामिल इजरायल इसे लंबा खींचना चाहता है।

कूटनीतिक बातचीत तेज तुर्की के Hakan Fidan ने सोमवार को नॉर्वे के Espen Barth Eide और मिस्र के Badr Abdelatty से फोन पर बात की। इन बातचीतों में युद्ध को रोकने की कोशिशों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की और ओमान के बीच ईरान को लेकर कई संदेशों का आदान-प्रदान हुआ, जबकि सऊदी अरब और भारत के जरिए भी बातचीत के संकेत भेजे गए।

व्हाइट हाउस और ईरान के बीच इन डायरेक्ट डायलोग्स रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्हाइट हाउस के दूत Steve Witkoff और ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ अलग-अलग बातचीत की। इसका मकसद दोनों देशों के बीच किसी तरह का समझौता कराना क्रेडिट बटोरने की फिराक में शहबाज-मुनीर रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे मामले में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir ने रविवार को ट्रंप से फोन पर बात की, जबकि प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बातचीत की। लेकिन, एक्सपर्ट्स पाक की कोशिशों को कोशिश कम और क्रेडिट लेने की होड़ ज्यादा बता रही है।

कूटनीति के बीच समय का खास महत्व

इन सभी बातचीतों का समय बेहद अहम है, क्योंकि ये ठीक उसी समय हुईं जब ट्रंप ने अपनी धमकी को वापस लेते हुए हमलों को रोकने का ऐलान किया। इससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीतिक दबाव ने बड़ा रोल निभाया।पाकिस्तान की और कोशिशें जारी

पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar  ने भी ईरान के Abbas Araghchi से बात की और शांति व स्थिरता के लिए बातचीत पर जोर दिया। पाकिस्तान ने यह भी संकेत दिया है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत की इच्छा जताई है। हालांकि, अमेरिका ने मुनीर की इस इच्छा पर पानी फेरते हुए साफ इनकार दिया।

पाकिस्तान का बयान: “हम तैयार हैं”

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने कहा कि अगर दोनों देश चाहें, तो इस्लामाबाद बातचीत की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा शांति और कूटनीति का समर्थन करता है। वो बात अलग है कि पाकिस्तान का अपना इतिहास आतंकवादियों को पालने और विश्व शांति भंग करने का रहा है।

व्हाइट हाउस का सावधान जवाब

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा कि यह स्थिति लगातार बदल रही है और जब तक आधिकारिक घोषणा न हो, तब तक किसी भी बातचीत को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।

पाकिस्तान क्यों घुसना चाहता?

विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान इस मामले में इसलिए अहम है क्योंकि ईरान के बाद यहां शिया मुस्लिमों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। साथ ही, इसके खाड़ी देशों के साथ मजबूत रिश्ते हैं, जिसमें सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता भी शामिल है।

ट्रंप और मुनीर के संबंध

पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir और Donald Trump के बीच हाल की दिनों में संबंध बेहतर हुए हैं। ट्रंप ने पहले मुनीर को “मेरे पसंदीदा फील्ड मार्शल” और “एक असाधारण इंसान” तक कहा है। जिसके बाद मुनीर इस तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। लेकिन मुनीर का जंग रुकवाने के पीछे का मकसद पाकिस्तान के बदतर होते हाल को सुधारना पहले है। क्योंकि अगर ये जंग जारी रही तो पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बेकाबू हो सकते हैं जो पाकिस्तानी रुपए के टूटने का बड़ा कारण बनेगा।

भारत क्या कर रहा?

भारत ने पाकिस्तान से एक कदम आगे जाकर अमेरिका वो सहयोगी जो इस युद्ध में हमले झेल रहे हैं (सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, कतर, ओमान, कुवैत, जोर्डर) से बात की। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी जैसे फ्रांस आदि को भी भरोसे में लेकर ट्रंप से युद्ध रोकने के लिए जोर डालते हुए बात की। इसका अलावा जहां पाकिस्तान नहीं पहुंच सका, यानी कि इजरायल, वहां भी भारत ने सीधी बात कर जंग रोकने पर लंबी बात कर माहौल को हल्का किया।

इसके अलावा भारत ने सीधी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकिया और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी बात कर खाड़ी देशों के एनर्जी फेसिलिटी को निशाना न बनाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर चर्चा की। जबकि पाकिस्तान की बातचीत सिर्फ खाड़ी देशों और अमेरिका तक सीमित थीं। न इसमें ईरान था, न यूरोपीय देश और न इजरायल जो इस युद्ध में एक अहम किरदार है। अब देखना होगा जंग रुकने का तमगा किसे मिलता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

देश की राजनीति में बड़ा बदलाव केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी…

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देश की राजनीति में बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशातेजी से आगे बढ़ रही है।

इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो अहम बिल लाए जा सकते हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो लोकसभा की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

सरकार महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्तों में बदलाव करना चाहती है। अभी कानून के मुताबिक नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होना है, लेकिन अब प्रस्ताव है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इससे 2029 से पहले ही महिलाओं को आरक्षण मिल सकेगा।

इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी संसद में महिलाओं की भागीदारी एक झटके में काफी बढ़ जाएगी, जो अब तक सीमित रही है।

सरकार ये दो बिल लाने की कर रही है तैयारी?

सरकार इस बार दो अलग-अलग बिल लाने की तैयारी में है।पहला बिल ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव करेगा। इन दोनों बिलों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, इसलिए सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है। गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए कई दलों से बातचीत शुरू कर दी है। इसमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम जैसे दल शामिल हैं। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी चर्चा हो चुकी है, जबकि कांग्रेस से बातचीत अभी बाकी है।

आरक्षण का फॉर्मूला क्या होगा? कानून बना, लागू क्यों नहीं हुआ?

प्रस्ताव के मुताबिक 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। हालांकि ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोई प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। यही मॉडल राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना है।

महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हो चुका है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसकी मंजूरी दे चुकी हैं। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इसे लगभग सर्वसम्मति से पारित किया गया था। लेकिन इसकी लागू होने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए इसे लागू करेगी और जरूरत पड़ने पर संशोधन भी कर सकती है।

Ram Navami 2026: रामनवमी पर शोभन योग का दुर्लभ मेल, इन राशि वालों को करेगा मालामाल!”

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Ram Navami 2026 Shobhan Yoga: अयोध्या के भव्य राम मंदिर से लेकर देश के कोने-कोने में प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं. हिंदू धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का विशेष महत्व है, जिसे हम रामनवमी के रूप में मनाते हैं.

ज्योतिष गणना के अनुसार, साल 2026 की रामनवमी बेहद खास होने वाली है, क्योंकि इस दिन शोभन योग का एक बहुत ही दुर्लभ और शुभ मेल बनने जा रहा है. जो कुछ राशि वालों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आ रहा है. आइए जानते हैं.

रामनवमी 2026, शुभ मुहूर्त और तिथि

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से होगी और इसका समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर होगा. शास्त्रों में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए 27 मार्च 2026 को ही रामनवमी का पावन पर्व मनाना जाएगा.

क्या है शोभन योग?

ज्योतिष शास्त्र में शोभन योग को सुख, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना गया है. इस योग में की गई पूजा-अर्चना और शुभ कार्य न केवल सफल होते हैं, बल्कि उनका फल भी कई गुना बढ़कर मिलता है. इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है.

इन राशियों के लिए खुलेगा किस्मत का ताला!

रामनवमी पर बन रहे इस दुर्लभ संयोग और नवपंचम राजयोग के प्रभाव से कुछ विशेष राशियों को आर्थिक लाभ और करियर में बड़ी उन्नति मिलने के प्रबल संकेत हैं:

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए यह समय आत्मविश्वास में वृद्धि लेकर आएगा. आपकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी. यदि आप करियर से जुड़ा कोई साहसी फैसला लेने की सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है.

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों को पुराने लंबे समय से चले आ रहे विवादों और मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलेगी. व्यापार में मुनाफे के योग बन रहे हैं और परिवार के साथ संबंधों में मधुरता आएगी.

सिंह राशि

2026 की सबसे भाग्यशाली राशियों में सिंह राशि प्रमुख है. आर्थिक दृष्टिकोण से यह समय आपके लिए गोल्डन पीरियड साबित हो सकता है. धन आगमन के नए स्रोत खुलेंगे और आपकी आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत होगी.

कन्या राशि

कन्या राशि वालों को कार्यक्षेत्र में बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. पदोन्नति के साथ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि आपका कहीं फंसा हुआ धन वापस मिलने की पूरी संभावना है.

Permanent Commission Case: सुप्रीम कोर्ट से महिला अधिकारियों को मिली राहत, 20 साल की सेवा पर मिलेगी पेंशन…

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Permanent Commission Case:

सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि पूर्वाग्रहपूर्ण (prejudiced) रवैये के कारण कई महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) नहीं मिल पाया, जो उनके साथ अन्याय है।

ऐसे में अब उन सभी अधिकारियों को राहत देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 20 साल की सेवा पूरी करने वाली महिला अधिकारियों को पेंशन का लाभ दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि महिला अधिकारियों को केवल उनके लिंग के आधार पर अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि लंबे समय तक सेना और अन्य सेवाओं में महिलाओं के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया, जिससे उन्हें स्थायी पद और उससे जुड़े लाभ नहीं मिल सके।

Permanent Commission Case: महिला अधिकारियों के पक्ष में फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले कहा कि जिन महिला अधिकारियों ने 20 साल या उससे अधिक समय तक सेवा दी है, उन्हें पेंशन से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है। यह फैसला उन अधिकारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थीं। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के पक्ष में कई अहम टिप्पणियां की थीं। अब इस नए आदेश के जरिए अदालत ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि उन्हें आर्थिक सुरक्षा भी मिल सके।

Supreme Court के फैसले का होगा बड़ा असर

यह फैसला न केवल महिला अधिकारियों के लिए, बल्कि पूरे सिस्टम में लैंगिक समानता (Gender Equality) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भविष्य में महिलाओं को समान अवसर देने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न्याय और समानता के सिद्धांतों को मजबूती देता है और उन महिला अधिकारियों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने वर्षों तक सेवा देने के बावजूद अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया।

Delhi Free LPG Cylinder: दिल्ली में फ्री गैस सिलेंडर, कब-कब मिलेगा? ₹260 करोड़ बजट का बड़ा ऐलान, जानिए डिटेल…

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Delhi Budget 2026 Free LPG Cylinder: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2026-27 का बजट पेश किया और इसके साथ ही आम जनता के लिए कई बड़े ऐलान किए। सबसे ज्यादा चर्चा जिस फैसले की हो रही है, वह है होली और दिवाली पर हर परिवार को दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की योजना।

इस योजना के लिए सरकार ने ₹260 करोड़ का प्रावधान किया है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की जेब पर असर डालने वाला कदम माना जा रहा है।

इस बार दिल्ली का कुल बजट ₹1,03,700 करोड़ का है। सरकार का अनुमान है कि ₹74,000 करोड़ टैक्स से और बाकी राशि अन्य स्रोतों जैसे नॉन-टैक्स, केंद्र की मदद और कर्ज से आएगी। सीएम रेखा गुप्ता ने यह भी बताया कि दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरे स्थान पर है, जो राजधानी की मजबूत आर्थिक स्थिति को दिखाता है।

‘ग्रीन बजट’ का विजन (Delhi Green Budget Vision)

इस बजट को सरकार ने ‘ग्रीन बजट’ बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रही है और अब विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि पहले ‘फ्रीबी कल्चर’ की वजह से विकास दर पर असर पड़ा था, खासकर 2018 से 2020 के बीच, जब राजस्व में गिरावट आई थी।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर जोर (Infrastructure Push)

शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को ₹5,921 करोड़ दिए गए हैं। वहीं शहरी विकास और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए ₹7,887 करोड़ का बजट तय किया गया है। सरकार का लक्ष्य साफ है कि दिल्ली में सुरक्षित सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी और क्लाइमेट फ्रेंडली कॉरिडोर तैयार किए जाएं।

750 किलोमीटर सड़कों को धूल मुक्त बनाने और रीकार्पेटिंग के लिए ₹1,352 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मोदी मिल फ्लाईओवर को कालकाजी और सवित्री सिनेमा तक बढ़ाने के लिए ₹151 करोड़ का बजट रखा गया है।

बिजली और पानी पर बड़ा खर्च (Power & Water Focus)

बिजली विभाग के लिए ₹3,942 करोड़ का बजट रखा गया है। सरकार ओवरहेड वायरिंग को हटाने की दिशा में काम कर रही है, जिसके लिए अलग से ₹200 करोड़ दिए गए हैं।

पानी और सीवेज की समस्या को हल करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड को ₹9,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ₹475 करोड़ का प्रावधान किया गया है ताकि लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर न रहना पड़े।

अलग-अलग सेक्टर को मिला क्या?

नगर निगम (MCD) को ₹11,666 करोड़ दिए गए हैं, जो शहरी सेवाओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। ट्रांस-यमुना इलाके के विकास के लिए ₹300 करोड़ और दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड को ₹787 करोड़ का बजट मिला है।

औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए ₹160 करोड़ का प्रावधान पहली बार किया गया है, खासकर नॉन-कन्फॉर्मिंग एरिया के लिए। नजफगढ़ ड्रेन के सुधार के लिए ₹454 करोड़ और विधायकों के क्षेत्रीय विकास फंड के लिए ₹350 करोड़ तय किए गए हैं।

पालम में हुई आग की घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की तंग गलियों में आग बुझाना चुनौतीपूर्ण है। इसे देखते हुए दमकल विभाग को ₹674 करोड़ दिए गए हैं, जिससे नए फायर स्टेशन और आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे।

जनता से सुझाव लेकर बना बजट

इस बजट की खास बात यह भी रही कि इसे तैयार करने से पहले सरकार ने समाज के अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए। ट्रांसजेंडर समुदाय, गिग वर्कर्स और मजदूरों के साथ बैठक कर उनकी जरूरतों को समझा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की भागीदारी ही इस बजट की सबसे बड़ी ताकत है।

दिल्ली का यह बजट एक तरफ जहां मुफ्त गैस सिलेंडर जैसी राहत योजनाएं लेकर आया है, वहीं दूसरी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं पर भी बड़ा फोकस दिखाता है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में दिल्ली को एक आधुनिक, साफ और सुविधाजनक शहर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

“Rajasthan में अब 25 नहीं 38 लोकसभा सीटें! जानें क्या है केंद्र सरकार का प्लान?”

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केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून यानी नारी वंदन अधिनियम वर्ष 2029 से पहले लागू कर सकती है. इस परिस्थिति में लोकसभा की सीटें भी बढ़ाईं जाएंगी जिसके लिए परिसीमन होगा. इसी कड़ी में राजस्थान में भी लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्र बढ़ेंगे.

राज्य में फिलहाल 25 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं. अगर परिसीमन होता है तो भविष्य में 13 सीटों की बढ़ोतरी के साथ राजस्थान में 38 सीटें हो सकती हैं.

देश में सन् 1951 में हुए पहले चुनाव के वक्त राजस्थान में 18 लोकसभा सीटें थीं. इसमें 16 सीटों पर 1 और 2 सीटों पर 2-2 सांसद चुने जाते थे.

महाराष्ट्र में लोकसभा सीटें 48 से बढ़कर 72 होने की संभावना, 2029 चुनाव तक हो सकता है बड़ा बदलाव

1951 के वक्त राजस्थान की लोकसभा सीटें

  1. जयपुर-सवाई माधोपुर
  2. भरतपुर-सवाई माधोपुर
  3. अलवर
  4. गंगानगर-झुंझुनू
  5. बीकानेर-चूरू
  6. जोधपुर
  7. बाड़मेर-जालोर
  8. सिरोही-पाली
  9. नागौर-पाली
  10. सीकर
  11. जयपुर
  12. टोंक
  13. भीलवाड़ा
  14. उदयपुर
  15. बांसवाड़ा-डूंगरपुर (एसटी)
  16. चित्तौड़गढ़
  17. कोटा-बूंदी
  18. कोटा-झालावाड़

1973 के परिसीमन में क्या हुआ?

1973 में गठित परिसीमन आयोग के प्रस्तावों के बाद राज्य में कुल 25 सीटें हुईं. इसमें गंगानगर, बीकानेर, चुरु, झूंझनू, सीकर, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, बयाना,सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, कोटा, झालावाड़, बांसवाड़ा, सलुंबर, उदयपुर,चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, पाली, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर और नागौर शामिल थी.

2024 में संपन्न हुए चुनावों में राजस्थान में यह लोकसभा सीटें थीं

  1. गंगानगर (एससी)
  2. बीकानेर (एससी)
  3. चुरू
  4. झुंझुनू
  5. सीकर
  6. जयपुर ग्रामीण
  7. जयपुर
  8. अलवर
  9. भरतपुर (एससी)
  10. करौली-धोलपुर (एससी)
  11. दौसा (एसटी)
  12. टोंक-सवाई माधोपुर
  13. अजमेर
  14. नागौर
  15. पाली
  16. जोधपुर
  17. बाड़मेर
  18. जालौर
  19. उदयपुर (एसटी)
  20. बांसवाड़ा (एसटी)
  21. चित्तौड़गढ़
  22. राजसमंद
  23. भीलवाड़ा
  24. कोटा
  25. झालावाड़-बारन

बता दें वर्ष 2002 में भारत के परिसीमन आयोग प्रक्रिया शुरू की और 2008 में नई सीमाएं लागू कीं, लेकिन सीटों की कुल संख्या में बदलाव नहीं किया गया. वर्तमान में राजस्थान की 25 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से 4 सीटें अनुसूचित जाति और 3 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं.

अगर परिसीमन हो और सीटों की बढ़ें तो राजस्थान में आरक्षित सीटों की संख्या 7 से बढ़कर करीब 10 या 11 तक पहुंच सकती है.इसमें अनुसूचित जाति (SC) : लगभग 6 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) – लगभग 4 से 5 सीटें सामान्य सीटें -लगभग 27 से 28 सीटें हो सकतीं हैं.

“असम विधानसभा चुनाव में 800 से अधिक उम्मीदवार, इन सीटों पर कड़े मुकाबले के आसार”

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असम में विधानसभा चुनाव को लेकर नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया सोमवार को खत्म हो चुकी है. नामांकन प्रक्रिया के चलने तक राज्य में दलबदल का खेल चलता रहा और नई पार्टी में शामिल होते रहे.

इस बीच चुनाव अधिकारियों ने बताया कि असम चुनावों के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों सहित 800 से अधिक उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किए हैं.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के ऑफिस ने बताया कि 126 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए कुल 818 उम्मीदवारों ने नाम जमा किए हैं. चूंकि कई निर्वाचन क्षेत्रों में, उम्मीदवारों ने एक से अधिक नामांकन दाखिल किए, जिसकी वजह से कुल 1,391 पर्चे दाखिल किए गए.”

गुरुवार तक नाम लिए जा सकते हैं वापस

नामांकन पत्रों की जांच आज मंगलवार को की जाएगी जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख गुरुवार को है. यहां पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी. CEO ऑफिस का कहना है कि दाखिल किए गए नामांकनों की अंतिम संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि अंतिम आंकड़े तय किए जा रहे हैं.

असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाला NDA, जिसमें असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) शामिल हैं. NDA लगातार 10 साल से सत्ता में है और गठबंधन में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है. जबकि राज्य के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस, 6 छोटे दलों के गठबंधन की अगुवाई कर रही है, जिसमें रायजोर दल, CPI(M), असम जातीय परिषद (AJP), CPI(ML) लिबरेशन और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (APHLC) शामिल हैं.

अंतिम दिन कई मंत्रियों ने किए नामांकन

इन दोनों गठबंधनों के अलावा तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) समेत अन्य दलों की ओर से अपने उम्मीदवार मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं.

वर्तमान एनडीए सरकार के जिन मंत्रियों ने कल अंतिम दिन अपने नामांकन दाखिल किए, उनमें AGP अध्यक्ष अतुल बोरा शामिल हैं जो बोकाखात निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके साथ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी थे, जिन्होंने पिछले हफ्ते शुक्रवार को ही जालुकबारी सीट के लिए अपना नामांकन जमा कर दिया था.

BJP के कई मंत्रियों चंद्र मोहन पटवारी, रानोज पेगु, बिमल बोरा और जयंत मल्ला बरुआ ने भी अपनी-अपनी सीटों क्रमशः तिहू, धेमाजी, तिनखोंग और नलबाड़ी से नामांकन दाखिल किए. जोरहाट सीट से दोनों मुख्य दावेदारों कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई और मौजूदा 5 बार के विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने एक ही दिन अपना पेपर दाखिल किया.

पहली बार राज्य की राजनीति में उतर रहे गोगोई

वर्तमान एनडीए सरकार के जिन मंत्रियों ने कल अंतिम दिन अपने नामांकन दाखिल किए, उनमें AGP अध्यक्ष अतुल बोरा शामिल हैं जो बोकाखात निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके साथ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी थे, जिन्होंने पिछले हफ्ते शुक्रवार को ही जालुकबारी सीट के लिए अपना नामांकन जमा कर दिया था.

गौरव गोगोई जो वर्तमान में लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं और जोरहाट सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, राज्य की चुनावी राजनीति में पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. राज्य मंत्रिमंडल में AGP के नेता, केशव महंत ने भी कालियाबोर से फिर से चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन दाखिल किया.

इसी तरह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा, जो पिछले दिनों बीजेपी में शामिल हुए थे, ने भी बिहपुरिया सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल किया. वहीं रविवार रात को कांग्रेस में शामिल होने के कुछ ही घंटों के अंदर, मौजूदा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं नंदिता गारलोसा ने भी हाफलोंग सीट से अपना नामांकन दाखिल कर दिया.

वहीं AIUDF प्रमुख और पूर्व सांसद बदरुद्दीन अजमल ने भी बिन्नाकांडी निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा में वापसी की उम्मीद के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया. जारी विधानसभा में, सत्ताधारी BJP की संख्या 64 है, जबकि उसके सहयोगी AGP के 9 विधायक, UPPL के 7 और BPF के 3 सदस्य हैं. वहीं विपक्षी खेमे में, कांग्रेस के 26 विधायक, AIUDF के 15 सदस्य और CPI(M) का एक विधायक है. इसके अलावा एक निर्दलीय विधायक भी है.

CG: ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे: पांडुलिपियों में निहित ज्ञान परंपरा को बचाने का राष्ट्रीय अभियान छत्तीसगढ में भी शुरू…

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”ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे: पांडुलिपियों में निहित ज्ञान परंपरा को बचाने का राष्ट्रीय अभियान छत्तीसगढ में भी शुरू… आमजन से भागीदारी की अपील”

ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में “ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” संचालित किया जा रहा है। इस महत्त्वपूर्ण पहल का उद्देश्य देशभर में बिखरी अमूल्य पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में छत्तीसगढ में भी इस सर्वेक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है, जिसमें जन-जागरूकता पर विशेष बल दिया जा रहा है।

यह सर्वेक्षण उन पांडुलिपियों को खोजने और सूचीबद्ध करने का प्रयास है, जो वर्तमान में परिवारों, मंदिरों, मठों, संस्थानों या निजी संग्रहों में सुरक्षित है, लेकिन अभी तक औपचारिक रूप से सर्वेक्षित नहीं हो पाई हैं। यह पहल इन छिपी हुई ज्ञान-संपदाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सर्वेक्षण के पश्चात सरकार इनका डिजिटाइजेशन और संरक्षण करेगी। पांडुलिपियों का स्वामित्व उनको धारण करने वाले व्यक्ति, परिवार और संस्था का ही रहेगा।

ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसमें पांडुलिपि धारण करने वाले परिवार, संस्था, विद्वान एवं शोधकर्ता मंदिर एवं धार्मिक संस्थान, पुस्तकालय एवं शैक्षणिक संस्थाएं, जागरूक नागरिक के अतिरिक्त, सरकार द्वारा अधिकृत सर्वेक्षक भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। ऐसे नागरिक जिन्हें अपने आसपास पांडुलिपियों की जानकारी है, वे भी इस सर्वेक्षण से जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों को ज्ञानभारतम डॉट कॉम पोर्टल और ‘ज्ञानभारतम’ मोबाइल एप के माध्यम से आवश्यक जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।

भारत की पांडुलिपियां केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और दार्शनिक विरासत, ज्ञान परंपरा की जीवंत धरोहर हैं। इनमें आयुर्वेद, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र और जीवन दर्शन का अमूल्य ज्ञान संचित है। ऐसे में इनका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

राज्य के नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उनके पास ऐसी पांडुलिपियां हैं जो अब तक सर्वेक्षित नहीं हैं, या उन्हें किसी स्थान, परिवार या संस्था में पांडुलिपियों की जानकारी है, तो वे इस सर्वेक्षण से अवश्य जुडें। यह राष्ट्रीय अभियान हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ज्ञान की इस विरासत को संजोना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है, आइए मिलकर इसे सुरक्षित करें।