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कोरबा में कुआं बना कब्र, एक ही परिवार के तीन लोगों की ले ली जान, 26 घंटे बाद मलबे से निकाले गए शव

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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कुएं के ढहने के बाद मलबे में दबे माता-पिता और उनके 30 वर्षीय बेटे के शव को 26 घंटे बाद बाहर निकाल लिया गया. पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि कटघोरा थानाक्षेत्र में बनवार गांव के एक घर में सोमवार रात कुएं के ढहने से छेदूराम श्रीवास (65), पत्नी कंचन बाई श्रीवास (53) और बेटे गोविंद श्रीवास (30) मलबे में दब गए थे, जिनके शव बुधवार को बाहर निकाल लिए गए.
उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह से पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के दल ने बचाव कार्य शुरू किया था, जो दोपहर बाद समाप्त हुआ. बचाव दल ने लगभग 25 फीट की गहराई में तीनों के शव बरामद किए. अधिकारियों ने बताया कि बनवार गांव निवासी छेदूराम ने दो माह पहले अपने घर में लगभग 40 फीट गहरा कुआं खुदवाया था और कुएं की खुदाई के बाद उसे कच्चा ही छोड़ दिया था.
उन्होंने बताया कि माता-पिता और बेटा जब कुएं से मोटर पंप निकालने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक कुआं धंस गया और वे मलबे में दब गए. अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण सोमवार रात कुआं ढह गया. उन्होंने बताया कि जब पड़ोसियों और गांव में ही अलग रहने वाले छेदूराम दो के अन्य बेटों को घटना की जानकारी मिली तब उन्होंने परिवार के सदस्यों की खोज शुरू की.
अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसियों और छेदूराम के अन्य बेटों ने तीनों लोगों की चप्पल धंसी हुई देखने के बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पुलिस ने तीनों लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए कुएं से पानी और मलबा हटाने का कार्य शुरू किया. अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार देर रात तक क्षेत्र में हुई भारी बारिश से मिट्टी के और धंसने के खतरे के कारण अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा. उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह बचाव कार्य फिर से शुरू किया गया और अपराह्न करीब दो बजे तीनों शव बरामद कर लिए गए. अधिकारी ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और मामले की जांच जारी है.

पहले सांसदों के साथ डिनर, अब दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों मिलेंगे सीएम विष्णु देव साय, इन मुद्दों पर होगी चर्चा

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दिल्ली दौरे पर हैं. अपने दौरे के दौरान वे संसद सत्र के बीच छत्तीसगढ़ से जुड़े सांसदों से मुलाकात करेंगे और राज्य की विकास योजनाओं को लेकर चर्चा करेंगे. सीएम साय ‘विकसित भारत 2047’में छत्तीसगढ़ की भूमिका और भविष्य की रणनीतियों को साझा करेंगे. इसके साथ ही वे केंद्र सरकार की प्रदेश में चलाई जा रही योजनाओं की प्रगति और राज्य में उनके प्रभाव की भी समीक्षा करेंगे.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली दौरे के दूसरा दिन केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे. पहले दिन सीएम साय ने दिल्ली में सांसदों से मुलाकात की थी. छत्तीसगढ़ सदन में उन्होंने सांसदों के साथ डिनर किया था. इस दौरान सांसदों ने केंद्र सरकार की योजनाओं की गति पर अपना फीडबैक दिया. कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार पर सीएम ने सांसदों से चर्चा की.

अंबिकापुर में कांपी धरती, महसूस किए गए भूकंप के झटके, जशपुर में था सेंटर

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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में गुरुवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए. बताया जा रहा है कि सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर भूकंप आया. भूकंप की भनक लगते ही लोग घरों से बाहर निकल गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4 .1 मांपी गई है. भूकंप का सेंटर जशपुर जिले के बगीचा इलाके बताया जा रहा है. पिछले 3 सालों में कई बार सरगुजा में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं.
भू गर्भ शास्त्री अनिल सिन्हा ने बताया कि भूकंप का सेंटर अंबिकापुर जिले से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर है. भूंपक को सेस्मोलॉजी सेंटर से ज्यादा लोकेट नहीं किया है. भूकंप 4 के मैग्नीड्यूड का है. इससे बहुत ज्यादा जान-माल की हानि नहीं होती है. इस वजह से अभी ये नेशनल मैप पर नहीं आया है. भूकंप के लिहाज से जशपुर भी एक संवेदनशील इलाका है.

एक्सपर्ट ने बताया क्यों संवेदनशील इलाका है जशपुर
भू गर्भ शास्त्री अनिल सिन्हा बताया कि जशपुर से कई नदियां होकर गुजरती है. ऐसे इलाके कमजोर होते हैं. इन इलाकों में जो धरती के अंदर मौजूद छोटे प्लेट्स होते है, उनका लगातार एडजेस्मेंट होता रहता है. इसी वजह से भूकंप के हल्के झटके लगातार आते रहते हैं. जशपुर में कोई बड़ा माइंस नहीं है. इस वजह से इस भूकंप की तीव्रता कम है.

F‑35 फाइटर जेट फिर क्रैश, अमेरिका का गर्व बना टेक्नोलॉजी का तमाशा, केरल में भी धूल फांकता रहा

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अमेरिका के कैलिफोर्निया में बुधवार शाम एक बड़ा हादसा देखने को मिला है. अमेरिकी नेवी का एकF‑35 लड़ाकू विमान लेमूर नौसैनिक अड्डे (Naval Air Station Lemoore) के पास क्रैश हो गया. यह हादसा स्थानीय समयानुसार शाम 6:30 बजे हुआ. अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, विमान में सवार पायलट ने समय रहते पैराशूट से बाहर निकलकर जान बचा ली. नेवी की ओर से जारी प्रेस स्टेटमेंट में बताया गया कि यह विमान स्ट्राइक फाइटर स्क्वाड्रन VF‑125 रफ रेडर्स का हिस्सा था. यह यूनिट फ्लीट रिप्लेसमेंट स्क्वाड्रन के तौर पर काम करती है, जिसका मुख्य काम पायलटों और एयरक्रू को ट्रेनिंग देना होता है.
लेमूर नौसैनिक अड्डा कहां है?
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लेमूर नौसैनिक अड्डा अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में स्थित है और यह फ्रेज्नो शहर से करीब 64 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में पड़ता है.
F-35 क्रैश कैसे हुआ?
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अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्रैश की असल वजह क्या थी. अमेरिकी नौसेना ने जांच शुरू कर दी है. राहत की बात ये रही कि हादसे में कोई अन्य व्यक्ति घायल नहीं हुआ. यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका की मिलिट्री तकनीक और सुरक्षा उपायों को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं. F‑35 को दुनिया के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स में गिना जाता है, ऐसे में इसका क्रैश होना निश्चित रूप से बड़े सवाल खड़े करता है.
कबाड़ साबित हो रहा F-35 जेट?
अमेरिका जिसे अपने सबसे एडवांस्ड और मारक फाइटर जेट F‑35 के तौर पर पेश करता है, वह अब कबाड़ साबित होता दिख रहा है. पांचवीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट की चमक बार-बार क्रैश, तकनीकी खराबियों और महंगे मेंटेनेंस के कारण फीकी पड़ती जा रही है. अब ताजा मामला सामने आया है. इससे पहले भारत में भी इसी जेट ने पश्चिमी तकनीक पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे. 14 जून को ब्रिटेन की रॉयल नेवी के एक F‑35B विमान ने केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की थी. तकनीकी खराबियों की वजह से वह विमान पूरे एक महीने से ज्यादा वहीं खड़ा रहा. ब्रिटिश इंजीनियरों की एक टीम 6 जुलाई को विशेष स्पेयर पार्ट्स और उपकरणों के साथ पहुंची, तब जाकर विमान को ठीक किया जा सका.
तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर महीनों तक खड़े इस ‘एडवांस्ड’ फाइटर जेट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. मीम बने और अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर सवाल खड़े हुए. कैलिफोर्निया में बुधवार को हुआ यह कोई इकलौता हादसा नहीं है. जनवरी 2025 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक F‑35 सीरीज के अब तक 11 से ज्यादा क्रैश हो चुके हैं.
F-35 जेट कब-कब हुए क्रैश?
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मई 2024: न्यू मैक्सिको में F‑35 क्रैश, पायलट घायल.
सितंबर 2023: साउथ कैरोलिना में खराबी के कारण पायल जेट को ऑटो-पायलट मोड पर करके इजेक्ट कर गया.
अक्टूबर 2022: यूटा एयरबेस पर लैंडिंग के समय डेटा सिस्टम फेल हुआ, जेट तबाह.
जनवरी 2022: USS कार्ल विन्सन एयरक्राफ्ट कैरियर पर लैंडिंग के दौरान हादसा हुआ, जिसमें 7 नौसैनिक घायल हुए.
जनवरी 2022 (कोरिया): साउथ कोरिया का F‑35 लैंडिंग गियर खराब होने से बेस पर क्रैश.
नवंबर 2021: ब्रिटेन का F‑35B समुद्र में गिरा, बाद में रेस्क्यू किया गया.
सितंबर 2020: एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग के दौरान कैलिफोर्निया में क्रैश.
मई 2020: फ्लोरिडा में कंट्रोल लॉस से रनवे पर दुर्घटना, आग लग गई.
अप्रैल 2019: जापान का F‑35A ट्रेनिंग के दौरान गायब हुआ, पायलट की मौत.
सितंबर 2018: इंजन फ्यूल ट्यूब फटने से साउथ कैरोलिना में F‑35B क्रैश.

उत्तराखंड पंचायत चुनाव में BJP को 440 वोल्ट का झटका, कांग्रेस हुई बम-बम

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उत्तराखंड पंचायत चुनाव के नतीजों की तस्वीर साफ होने लगी है. धीरे-धीरे 34000 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होने लगा है. अभी तक के चुनावी नतीजों में महिलाओं का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. अलग-अलग जगहों से कई महिलाओं ने चुनाव में जीत हासिल कर ली है. कोई प्रत्याशी एक वोट से चुनाव में जीत हासिल की है तो किसी ने जीत की हैट्रिक लगाई है. सुबह 8 बजे से 89 ब्लॉक केंद्रों पर मतगणना चल रही है. बता दें कि उत्तराखंड पंचायत चुनाव का दो चरणों में मतदान हुआ था. मतगणना स्थल पर भारी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है.
पिथौरागढ़ में बीजेपी पर भारी पड़े निर्दलीय उम्मीदवार
पिथौरागढ़ के बीसा बजेड़ ज़िला पंचायत सदस्य का नतीजा. राकेश चंद ने बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को हराया. अब तक 1 सीट बीजेपी और 2 सीट निर्दलीय ने जीतीं.
रुद्रप्रयाग जिला पंचायत सीट के जीते हुए प्रत्याशी
रुद्रप्रयाग। जिला पंचायत सीट विजयी प्रतियाशी —
१ – अजयवीर भंडारी, कंडारा सीट.
२- किरन देवी, स्यूर बांगर सीट.
३- अमित मैखण्डी, ट्रियुगीनारायन सीट.

टिहरी। विकासखंड भिलंगना 8 ग्राम पंचायत के प्रधानों की मतगणना पूरी।

रगस्या से ममता देवी
पिंसवाड़ से दिनेश
आगर से दुर्गा देवी
थाती से बचेंद्र प्रसाद
कोटी से दिनेश भट्ट
तोली से सुनीता देवी
मरवाडी से संतोषी
मेड से किशना देवी प्रधान पद पर विजयी
टिहरी के विकासखंड जौनपुर से कौन जीता चुनाव
टिहरी — विकासखंड थत्यूड (जौनपुर)
टिहरी —

विकासखंड थत्यूड (जौनपुर)

जौनपुर ब्लॉक के प्रधान पद हेतु विजय प्रत्याशी

1- ग्राम पंचायत मजगांव गोपाल सिंह – 336 मत

2- ग्राम पंचायत सेमवाल गांव- लक्ष्मी देवी – 147 मत

3-ग्राम पंचायत उनियाल गांव- विनीता देवी – 286 मत

4- ग्राम पंचायत जाडगांव- ओंकार सिंह-197 मत

5- ग्राम पंचायत नवागांव – सुमति देवी – 224 मत

6 – ग्राम पंचायत मरोड़ा- सरोप सिंह – 195 मत

7- ग्राम पंचायत हटवाल गांव- करिश्मा-325 मत

8- ग्राम पंचायत भुत्सी – दीवान सिंह – 240 मत
बीजेपी के बागी ने मारी बाजी
ब्रेकिंग/रुद्रप्रयाग
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त्रियुगीनारायण सीट से अमित मैखण्डी जीते
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भाजपा के बागी प्रतियाशी है अमित मैखडी
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इस सीट पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश उनियाल को करारी मात
जानें विकासनगर से कौन जीता
विकासनगर विकासखण्ड से जीते क्षेत्र पंचायत सदस्य।।

लांघा से सुनिता जीती

शाहपुर कल्याणपुर से रघुवीर तोमर जीते

ढलानी से आशीष तोमर जीते

केदारावाला से गुलफाम जीते

रुद्रपुर से मोहन सिंह जीते

भलेर से चंद्रपाल सिंह जीते

सोरना से अमित तोमर जीते

होरावाला से आदेश लता जीती

रुद्रप्रयाग में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत
रुद्रप्रयाग के भीरी जिला पंचायत सीट से निर्दलीय चुनाव जीती. निर्दलीय किरन देवी ने की जीत दर्ज. रुद्रप्रयाग जिले की ग्राम पंचायत कांदी में प्रधान पद पर दो प्रतियाशियो को बराबर मत पड़े, जिससे रिजल्ट टाई हो गया. इसके बाद पर्ची सिस्टम के जरिये लक्ष्मी देवी विजयी घोषित हुईं. अल्मोड़ा सल्ला भटकोट से कांग्रेस प्रत्याशी सैलजा चम्याल 342 वोटों से आगे. टिहरी में जिला पंचायत की थाती बुढ़ाकेदार सीट से निर्दलीय मकानी देवी विजयी घोषित. अल्मोड़ा जिले के सभी 11 ब्लाकों में मतगणना जारी है. अधिकांश ग्राम प्रधानों के परिणाम आ चुके हैं. जिला पंचायत के परिणाम के लिए देर रात तक इंतजार करना पड़ेगा. धौलादेवी में एक दंपंति में पति ग्राम प्रधान और पत्नी बीडीसी मेंम्बर बन गयी है. दोनों में खुशी कि लहर है.

बागेश्वर में बीजेपी को बड़ा झटका
बागेश्वर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कपकोट ब्लॉक से बीजेपी को बड़ा झटका. पूर्व ब्लॉक प्रमुख गोविंद दानू बीडीसी चुनाव में सिर्फ 7 वोटों से हारे. बागेश्वर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना प्रक्रिया आज सुबह से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी है. पहले राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी को शुरुआती बढ़त मिली है. जानकारी के अनुसार, पहले राउंड में बीडीसी की दो सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजयी घोषित किए गए हैं. इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है. अन्य सीटों की मतगणना प्रक्रिया अभी जारी है।
चमोली पंचायत चुनाव में महिलाओं ने लहराया परचम
चमोली पंचायत चुनाव में मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है. ग्राम प्रधान पद पर महिला प्रत्याशियों ने अपना परचम लहराया है और जीत दर्ज की है. महिला प्रत्याशियों का कहना है कि अब महिलाएं जीतकर मैदान में उतर चुकी हैं. अपने-अपने गांव का विकास करना उनका लक्ष्य है और आप गांव का विकास होगा.

चुनावी नतीजों के बीच सीएम धामी की अहम बैठक
सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आवास और पंचायती राज विभाग की गेमचेंजर योजनाओं की समीक्षा बैठक ले रहे हैं. पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज भी मीटिंग में शामिल.
नैनीताल में हुआ उलटफेर
नैनीताल ब्रेकिंग –
ओखलकांडा में उलटफेर.
राम सिंह कैड़ा की बहू चुनाव हारी.
कूकना क्षेत्र पंचायत से मुन्नी कैड़ा चुनाव हारी.
कविता नौलिया ने दर्ज की जीत.
ग्राम पंचायत बिधोली से चतर सिंह जीते.
ग्राम पंचायत भीतरली से सीमा देवी जीती.

टॉस जीतकर 23 साल का नितिन बना प्रधान
चमोली जिला मंडल घाटी में सबसे कम उम्र के प्रधान बने नितिन. नितिन टॉस के जरिए प्रधान चुने गए. दशौली के बणद्वारा के 23 साल के नितिन और उनके प्रतिद्वंदी को 139-139 वोट मिले. इसके बाद टॉस से फैसला लिया गया है.
संरोजनी पंवार उत्तरकाशी से जीतीं
चमोली दशोली विकासखंड में 9 ग्राम प्रधान प्रत्याशी जीते. वहीं उत्तरकाशी के नौगाव में पूर्व प्रमुख सरोजनी पंवार क्षेत्र पंचायत सीट पर विजय हुईं.
जोशीमठ से 7 प्रधान जीते
चमोली जोशीमठ विकासखंड से अभी तक 7 ग्राम प्रधान जीते. वहीं उत्तरकाशी के बरसाली जिला पंचायत सीट से भाजपा अधिकृत प्रत्याशी हीरा लाल शाह 600 मत से आगे. चमोली पोखरी विकासखंड में 11 ग्राम प्रधान प्रत्याशी जीते.
कांग्रेस प्रत्याशी मंगरौली जिला पंचायत सीट से आगे
मंगरौली जिला पंचायत सीट से कांग्रेस अधिकृत प्रत्याशी विजेंद्र रावत आगे. वहीं टिहरी जिले कीर्तिनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत नौर से किरण, ग्राम पंचायत गौशाली से बासुदेव भट्ट, धारी से सोहन प्रसाद, थपली चौराहा से नरेंद्र प्रसाद भट्ट, सिंदरी से जसीला देवी प्रधान विजय घोषित हुए.

पिथौरागढ़ के भड़गांव से जिला पंचायत सदस्य सीट से निर्विरोध
पिथौरागढ़ जिले के भड़गांव जिला पंचायत सदस्य सीट से संदीप बोरा को निर्वाचित प्रमाण पत्र मिला. निर्विरोध ज़िला पंचायत सदस्य बने बोरा. शर्तो के साथ जारी हुआ है प्रमाण पत्र. सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ये मामला.
रुद्रप्रयाग से चुनाव जीते उम्मीदवार
रुद्रप्रयाग
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ग्राम पंचायत स्यूर बांगर माहेश्वरी देवी 258 वोटों से विजयी हुईं.
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कूडीअदूली से अनारक्षित शीट जगदीश सिंह 200 वोटों से विजयी हुईं.
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बक्शीर गाँव से गीता देवी 229 वोटों से विजयी हुईं
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भूनाल गांव से सीमा देवी 176 वोटों से विजयी हुईं.

बागेश्वर में बीजेपी समर्थित उम्मीदवार की जीत
उत्तराखंड पंचायत चुनाव रिजल्ट लाइवः बागेश्वर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना प्रक्रिया आज सुबह से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई है. पहले राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी को शुरुआती बढ़त मिली है. जानकारी के अनुसार, पहले राउंड में बीडीसी की दो सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजयी घोषित किए गए हैं. इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है.
अन्य सीटों की मतगणना प्रक्रिया अभी जारी है.

चमोली के पोखरी रानो सीट से रंजनी भंडारी आगे
चमोली पोखरी रानो सीट पर रंजनी भंडारी की लीड. 297 वोट से आगे चल रही हैं रंजनी भंडारी. राजेंद्र भंडारी की पत्नी हैं रंजनी भंडारी. चमोली के पोखरी विकासखंड में 10 ग्राम प्रधान जीते. इसके अलावा चकराता के हयो क्षेत्र पंचायत सीट से सुधांशु तोमर जीते. उत्तरकाशी जिले में क्षेत्र पंचायत सीट मातली प्रथम से ललित विजय हुए.

रुद्रप्रयाग से भाजपा की बड़ी हार
रुद्रप्रयाग जिले के कांडारा जिला पंचायत सीट से भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है. यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई है. कांग्रेंस के अजयवीर ने भाजपा के सुमन नेगी को हराया.
टिहरी जिले में पूरी हुई वोटों की गिनती
भिलंगना में प्रधानों की मतगणना पूरी
टिहरी जिले के विकासखंड भिलंगना 8 ग्राम पंचायत के प्रधानों की मतगणना पूरी.

रगस्या से ममता देवी
पिंसवाड़ से दिनेश
आगर से दुर्गा देवी
थाती से बचेंद्र प्रसाद
कोटी से दिनेश भट्ट
तोली से सुनीता देवी
मरवाडी से संतोषी
मेड से किशना देवी प्रधान पद पर विजयी
………………………..
टिहरी जिले के विकासखंड जाखनीधार
पंचायत मंदार से शीशपाल रावत बने प्रधान
टिहरी में विकासखंड जाखनीधार की ग्राम पंचायत मंदार से शीशपाल रावत बने प्रधान।
विकासखंड प्रताप नगर में घड़ियाल गांव से कनक पाल प्रधान जीते।
महरगांव से ललित ग्राम प्रधान।
दीन गांव से सोनपाल राणा प्रधान।
डांगी से राधिका महेंद्र सिंह प्रधान।
मुखेम पोखरी से बबली लाल प्रधान पद पर जीते।

पोखरी विकासखंड के प्रधान पद के नतीजे
पोखरी विकासखंड
मतगणना के प्रथम चरण में विकासखण्ड पोखरी के प्रधान पद पर विजयी प्रत्याशियों के विवरण
1- मसोली -दिव्या देवी(कांग्रेस)
2- तोणजी – राजेश्वरी देवी (निर्दलीय)
3- रडवा – मनीषा देवी(निर्विरोध निर्दलीय)
4- बंगथल -ज्योति नेगी(भाजपा)
5- भिकोंना -सुचिता देवी(कांग्रेस)
6- उतरों सतेश्वरी देवी(भाजपा)
7- सिवाई दमयन्ती देवी(भाजपा)
8- आली-विनोद कुमार(कांग्रेस)
9- कुजासू -श्रीमती मधु देवी(भाजपा)
10- जौरासी मीनाक्षी देवी(कांग्रेस)

भारत की इकॉनमी डेड… रूस से दुश्मनी में डोनाल्ड ट्रंप ने लांघी दोस्ती की मर्यादा, अब क्या कह डाला

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस को लेकर एक बार फिर तीखा हमला बोला है. भारत के खिलाफ 25 फीसदी का टैरिफ लगाने के बाद उन्होंने यह तंज कसा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं कि भारत रूस के साथ क्या करता है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, ‘ये दोनों अपनी मरी हुई अर्थव्यवस्थाएं साथ लेकर डूबें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.’ ट्रंप ने भारत पर व्यापार के मोर्चे पर भी निशाना साधा. उन्होंने लिखा, ‘हमने भारत के साथ बहुत ही कम व्यापार किया है, क्योंकि उनके टैरिफ दुनिया में सबसे ऊंचे हैं.’ उन्होंने भारत की व्यापार नीतियों को ‘कठिन और परेशान करने वाला’ करार दिया और कहा कि भारत के साथ व्यापार करना अमेरिका के लिए फायदेमंद नहीं रहा है.
इस पोस्ट में ट्रंप ने रूस पर भी हमला बोला और वहां के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव को ‘फेल हो चुका राष्ट्रपति’ बताया. ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘उसे अपनी ज़ुबान पर लगाम लगानी चाहिए, क्योंकि वो बेहद खतरनाक इलाके में कदम रख रहा है.’
क्या है ट्रंप का इशारा?
ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाया है. वहीं रूस के बीच तनाव चरम पर है और भारत, रूस से तेल और रक्षा उपकरण खरीदना जारी रखे हुए है. ट्रंप के बयान को उनके चुनावी एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है, जहां वे ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को दोबारा जोर देकर आगे बढ़ा रहे हैं. हालांकि भारत सरकार की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के पेट्रोकेमिकल व्यापार को निशाना बनाते हुए भारत की छह कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि ये कंपनियां ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल उत्पादों की महत्वपूर्ण खरीद और बिक्री में शामिल रही हैं, जो ईरान की अस्थिर गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए राजस्व जुटाने का जरिया है. भारत, यूएई, तुर्किये और इंडोनेशिया समेत कुल 20 वैश्विक संस्थाओं को इस कार्रवाई में शामिल किया गया है. भारत की जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें कंचन पॉलिमर्स, अलकेमिकल सॉल्यूशन्स, रमनीकलाल एस गोसालिया एंड कंपनी, जूपिटर डाई चेम प्राइवेट लिमिटेड, ग्लोबल इंडस्ट्रीज केमिकल्स लिमिटेड और पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.

भूकंप आने पर नदियों में क्यों नहीं आती सूनामी समुद्र में ही क्यों आती है, बड़े जलाशयों में क्यों तबाही

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रूस के सूदूर पूर्व प्रायद्वीप कमचटका में 8.8 तीव्रता का भूकंप आया, जो अब तक के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में एक है. इसके बाद प्रशांत महासागर के तटों पर कई फीट ऊंची लहरें उठीं. और हजारों किलोमीटर दूर तक सूनामी आ गई. भूकंप आने पर समुद्रों में तो सूनामी आ जाती है लेकिन नदी में ये क्यों नहीं आती, उसकी क्या वजह है. क्या कभी किसी नदी के नीचे भूकंप आया तो फिर क्या हुआ.
सुनामी समुद्र के भीतर आए भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, या भूस्खलन की वजह से समुद्र के तल के अचानक काफी ऊपर-नीचे होने से पैदा होती है. इससे समुद्र का बहुत बड़ा पानी का हिस्सा एक साथ हिल जाता है. विशाल लहरें बनती हैं, जो बहुत तेजी से आगे बढ़ती हैं. इनमें इतनी अपार ऊर्जा होती है कि ये लहरें जब तट से टकराती हैं तो बहुत ऊपर तक उठती हैं और बहुत तबाही लाती हैं.
रूस के कमचटका प्रायद्वीप में आए बड़े भूकंप के बाद सूनामी की लहरें जापान से लेकर अमेरिका तक फैल गईं. देखते ही देखते हर जगह अलर्ट हो गई. हर जगह तटों पर ऊंची लहरें उठी देखी गईं लेकिन अलर्ट होने के कारण काफी हद तक लोगों को वहां से निकाल लिया गया लिहाजा किसी की जान जाने की खबर तो नहीं है लेकिन तटीय इलाकों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बहुत क्षति हुई.

अब सवाल यही है कि अपार पानी तो नदियों में भी होता है तो वहां भूकंप की स्थिति कभी सूनामी क्यों नहीं आती. नदियों की गहराई और आकार बहुत छोटा होता है. नदियां बहुत संकरी और उथली होती हैं, जबकि समुद्र गहरे और बहुत फैले हुए होते हैं. इसलिए भूकंप का प्रभाव अगर नदी के नीचे भी हो, तो वह इतनी बड़ी मात्रा में पानी को नहीं हिला सकता कि सुनामी जैसी विशाल लहर बने.

नदियां ज़्यादातर जमीन पर बहती हैं, समुद्र की तरह विशाल जलसमूह नहीं होतीं. सुनामी बनने के लिए ज़रूरी है कि बहुत बड़े क्षेत्र का पानी अचानक हिल जाए. नदियों में पानी सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इतना विशाल दबाव उत्पन्न नहीं हो सकता.

अगर नदी के नीचे भूकंप आ जाए तो
भूकंप में समुद्रतल प्रभावित करता है लेकिन वो नदी के तल पर असर नहीं डाल पाता. समुद्र के तल में अगर कोई प्लेट खिसकती है तो उससे पानी ऊपर-नीचे होता है, जिससे अपार ऊर्जा पैदा होती है और उसका असर लहरों पर पड़ता है. लहरें तूफानी और तेज हो जाती हैं. इसमें इतनी ऊर्जा होती है कि इनके सामने जो भी आता है वो टिक नहीं पाता. लेकिन नदी के नीचे अगर भूकंप भी हो तो वो ज़मीन को बेशक हिला सकता है, मगर उसमें सुनामी जैसी लहर नहीं बनती.
नदी में भूकंप से ज़्यादा से ज़्यादा पानी अस्थायी रूप से गड़बड़ हो सकता है. जैसे कि कुछ जगह पानी उछल जाए, नदी का बहाव तेज़ हो जाए या किसी बांध में दरार आ जाए लेकिन यह स्थानीय स्तर पर होता है, वैश्विक स्तर की सुनामी नहीं बनती.RTFGVB

25% टैरिफ के बावजूद सेंसेक्स ने की शानदार रिकवरी, वक्त बदल दिया.. जज्बात पलट दिए

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शेयर बाजार ने गुरुवार को वह किया, जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी. शुरुआत तो गिरकर ही हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते सेंसेक्स ने अपना इंट्राडे के निचले स्तर से 900 अंकों की रिकवरी कर ली. बुधवार शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 फीसदी टैरिफ के ऐलान के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में दिन की शुरुआत काफी कमजोर रही थी. लेकिन दोपहर तक आई तेजी की वजह कुछ अच्छे संकेत माने जा रहे हैं, जैसे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों से पॉजिटिव संकेत और भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी रहने की उम्मीदें.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, BSE सेंसेक्स दिन के शुरुआती कारोबार में करीब 786 अंक टूटकर 80,695 तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद इसमें जबरदस्त उछाल आया और यह 650 अंक की तेजी के साथ 81,345 के स्तर पर जा पहुंचा. इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 24,635 के निचले स्तर से पलटा और 24,800 के ऊपर कारोबार करने लगा.
5 कारणों से हुई शानदार रिकवरी
इस रिकवरी के पीछे सबसे बड़ी वजह यह रही कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही भारत के सामानों पर 25% टैरिफ लगाने की बात कही हो, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत के साथ बातचीत जारी रहेगी. निवेशकों को उम्मीद है कि बुधवार वाला बयान केवल ज्यादा दबाव बनाने के लिए दिया गया है, और अंत में टैरिफ इतना ज्यादा नहीं लगाया जाएगा. अगली बातचीत अगस्त में होनी है, जिसे लेकर बाजार में उम्मीदें बनी हुई हैं.
दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.दूसरी 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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.
दूसरी अहम बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.19% गिरकर 73.10 डॉलर प्रति बैरल हो गई. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है.

तीसरा पॉजिटिव फैक्टर रहा दुनिया के अन्य बाजारों का अच्छा प्रदर्शन. जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 1.5% बढ़ा, और अमेरिका के शेयर बाज़ारों से भी अच्छे संकेत मिले. इससे भारतीय निवेशकों में भी भरोसा लौटा.

रुपये में भी थोड़ी मजबूती देखने को मिली. शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 89 पैसे गिर गया था, जो तीन सालों में सबसे तेज गिरावट थी, लेकिन बाद में 14 पैसे की रिकवरी के साथ यह 87.66 पर आ गया. माना जा रहा है कि इसमें रिजर्व बैंक की संभावित दखल का असर हो सकता है.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से संकेत मिले कि अमेरिका में ब्याज दरें घट सकती हैं. हालांकि फेड चेयरमैन ने सीधे कुछ नहीं कहा, लेकिन दो वरिष्ठ अधिकारियों ने ब्याज दर कम करने के पक्ष में राय दी. इससे दुनिया भर के बाजारों को यह उम्मीद मिली कि आने वाले महीनों में लोन सस्ते हो सकते हैं, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

या बच जाएगी 12000 एम्‍पलॉयीज की नौकरी? छंटनी के आड़े आ रहा सरकार का नियम, कर्मचारी संघ ने किया मुकदमा

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देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्‍टेंसी सर्विसेज (TCS) ने पहली बार छंटनी का ऐलान किया तो देशभर में हड़कंप मच गया. कंपनी ने ऐलान किया है कि वह चालू वित्‍तवर्ष में अपने 2 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करेगी, जिसका मतलब है कि करीब 12 हजार लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा. अब कर्नाटक राज्‍य आईटी कर्मचारी संघ (KITU) ने इस प्रस्‍तावित छंटनी का विरोध किया है और कहा है कि कंपनी ने राज्‍य के नियमों का उल्‍लंघन किया है. कर्मचारी संघ ने तो कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी शुरू कर दिया है.
KITU ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की प्रस्तावित छंटनी के खिलाफ औद्योगिक विवाद दर्ज किया है. साथ ही श्रम विभाग से प्रबंधन के खिलाफ औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 और कर्नाटक सरकार द्वारा सेवा विवरण रिपोर्टिंग पर लगाए गए शर्तों के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है. KITU के प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त श्रम आयुक्त जी मंजुनाथ से मुलाकात की और कई कर्मचारी शिकायतों का हवाला देते हुए एक शिकायत सौंपी है. इसमें कहा गया है कि टीसीएस की प्रस्‍तावित छंटनी पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है.

क्‍या है कर्नाटक सरकार का नियम
कर्नाटक राज्‍य के औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत 100 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाली कंपनियों को किसी भी छंटनी या पुनर्गठन से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी होती है. ऐसे कार्य केवल विशिष्ट कारणों और अधिनियम में स्पष्ट रूप से परिभाषित शर्तों के तहत ही किए जा सकते हैं. KITU ने दावा किया कि TCS प्रबंधन ने इन प्रावधानों का उल्लंघन किया है. संघ ने उल्लंघनों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही और प्रभावित कर्मचारियों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए श्रम विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
श्रम विभाग ने शुरू किया मंथन
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि श्रम विभाग ने भी टीसीएस प्रबंधन के साथ प्रस्तावित छंटनी पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की योजना बनाई है. हालांकि, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है. राज्य के श्रम मंत्री ने निर्देश दिया है कि यह बैठक जल्द से जल्द होनी चाहिए. उधर, कर्मचारी संगठन ने स्थिति की गंभीरता पर जोर देते हुए आईटी क्षेत्र में श्रम कानूनों के सख्त पालन की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं की गई तो यह राज्य में कर्मचारियों के अधिकारों के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है.

क्‍या कह रहा टीसीएस का प्रबंधन
टीसीएस ने कहा है कि छंटनी उसकी भविष्य की तैयारियों की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें तकनीक में निवेश, एआई का उपयोग, बाजार विस्तार और कर्मचारियों की संख्‍या का पुनर्गठन शामिल है. इस दिशा में कई स्‍तरों पर बदलाव चल रहा है. जाहिर है कि इस प्रक्रिया में उन कर्मचारियों को निकालना पड़ेगा, जिनकी तैनानी संभव नहीं हो सकती है. यही वजह है कि हमारे कुल कर्मचारी संख्‍या का करीब 2 फीसदी प्रभावित होगा.

25 फीसदी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर, क्या ये अस्थायी है

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अमेरिका ने भारत के लिए टैरिफ बातचीत की समयसीमा 1 अगस्त तय की थी लेकिन उन्होंने उससे एक दिन पहले ही 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया है. हालांकि अब तक तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते मजबूत रहे हैं, जिसका सकारात्मक असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा. अब अमेरिका के इस कदम के बाद भारत पर क्या असर पड़ने वाला है. क्या इससे भारतीय उद्योगों और अर्थव्यवस्था पर कोई असर पड़ने वाला है. हालांकि इस कदम के बाद कई देशों की अमेरिकी बाजार में चांदी होने वाली है.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, “हालांकि भारत हमारा मित्र है, लेकिन हमने पिछले कुछ वर्षों में उनके साथ अपेक्षाकृत कम व्यापार किया है, क्योंकि उनके टैरिफ बहुत अधिक हैं, जो विश्व में सबसे अधिक हैं. उनके यहां किसी भी देश की तुलना में सबसे कठोर और अप्रिय गैर-मौद्रिक व्यापार बाधाएं हैं.”
कितना आयात – निर्यात
2024 में भारत ने अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि अमेरिका से 41.8 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे अमेरिका को 45.7 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ. भारत के प्रमुख निर्यात में दवाइयां, कपड़ा, रत्न-आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टील-एल्यूमीनियम शामिल हैं. भारत से अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात होता है, ये हमारे कुल निर्यात का लगभग 18% हिस्सा है.
आगे बढ़ने से पहले ये जान लेते हैं कि अमेरिका के टैरिफ संबंधी कदमों के बाद किस देश के सामान अमेरिकी बाजारों में सबसे सस्ते होंगे और उन्हें इसका सबसे ज्यादा फायदा होने जा रहा है तो किस देश के सामान महंगे हो जाएंगे.

कनाडा और मेक्सिको जैसे देशों की सबसे ज्यादा चांदी होगी. इन दोनों देशों से यूएस में आयातित USMCA‑compliant सामानों पर फिलहाल 0% टैक्स लागू है. जाहिर सी बात है इस वजह से उनके सामान अमेरिकी बाजार में सबसे सस्ते मिलेंगे तो उनकी मांग में बढोतरी हो जाएगी. यूरोपीय संघ (EU), जापान, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के सामान भी अमेरिका में अपेक्षाकृत भारत से सस्ते मिलेंगे. क्योंकि इन देशों की अधिकांश वस्तुओं पर 15% की टैरिफ दर तय हुई है.
किन देशों के लिए अमेरिकी बाजार हुए मुश्किल
सबसे महंगे सामान जिस देशों के होने वाले हैं, उसमें ब्राजील, चीन और भारत जैसे देश शामिल हैं. ब्राज़ील से आयातित वस्तुओं पर अमेरिका ने 50% की भारी टैरिफ दर लागू की है. यह मौजूदा समय में सबसे अधिक दर है. कनाडा के वो सामान जो USMCA में शामिल नहीं हैं, उन पर 25–35% टैरिफ होगा लेकिन उसमें उसके बहुत कम ही सामान शामिल होंगे. चीन के सामान पर 30% टैरिफ है लेकिन इसे बहुत सी चीजों पर और ज्यादा भी रखा जा सकता है. इससे ये तो जाहिर है कि भारत के लिए अमेरिकी बाजार में मुश्किलें बढऩे वाली हैं.
भारत को कहां कहां असर
भारत से अमेरिका को सबसे ज्यादा कपड़े का निर्यात होता है. 2023-24 में 36 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात हुआ, जिसमें से 28% (करीब 10 अरब डॉलर) अमेरिका को गया. उच्च टैरिफ से भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ेगी, जिससे उनका बाजार वहां कम हो सकता है जाहिर सी बात है कि इससे उनके निर्यात के आर्डर पर असर पड़ेगा.
भारत से हीरा और रत्न उद्योग 9 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करता है. टैरिफ से इसकी मांग घट सकती है, क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ता लागत बढ़ने पर अन्य स्रोतों की ओर रुख कर सकते हैं.
भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों की रफ्तार धीमी पड़ेगी क्योंकि 14 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का सामना अब नए टैरिफ से होगा. भारतीय कंपनियों की वृद्धि धीमी पड़ सकती है. भारतीय स्टील और एल्यूमीनियम की मांग पर भी असर पड़ेगा, इसकी वहां काफी डिमांड भी रही है लेकिन अब तस्वीर बदल जाएगी.
सबसे राहत की बात ये है कि भारत का 12.2 अरब डॉलर के दवा निर्यात को टैरिफ से अलग रखा जाएगा तो ये क्षेत्र राहत ले सकता है. ये भारत के लिए सकारात्मक पहलू है.

क्या आईटी को लगेगा झटका
भारत का आईटी क्षेत्र अमेरिकी बाजार पर निर्भर है, बेशक इस पर टैरिफ का असर सीधे सीधे तो नहीं होगा लेकिन टैरिफ का असर जब अमेरिकी उपभोक्ता की जेब पर पड़ने लगेगा, वहां भी चीजें महंगी हो जाएंगी तो इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव आईटी सेक्टर पर पड़ेगा ही.
जीडीपी पर क्या असर पड़ेगा
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 25% टैरिफ से भारत की जीडीपी में 0.19% की कमी आ सकती है, जो प्रति परिवार औसतन 2396 रुपये की वार्षिक हानि के बराबर है. हालांकि ये प्रभाव सीमित है, क्योंकि भारत की वैश्विक निर्यात में हिस्सेदारी केवल 2.4% है.
क्या भारत के विदेशी मुद्रा पर असर पडे़गा
बिल्कुल पड़ेगा. टैरिफ के बाद रुपये में कमजोरी देखी गई, जो 85.69 के स्तर तक पहुंच गया. निर्यात में कमी से विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ सकता है.
क्या भारत की अर्थव्यवस्था पर असर होगा?
नहीं, भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत असर नहीं पड़ने वाला. भारत की अर्थव्यवस्था 3.73 ट्रिलियन डॉलर की है और यह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. 2023 में इसकी विकास दर 6.3% थी, जो वैश्विक औसत 2.9% से कहीं अधिक है. भारत की घरेलू मांग मजबूत है, जो अर्थव्यवस्था को 6.5-7.5% की विकास दर पर बनाए रखेगी, लिहाजा उस पर टैरिफ का प्रभाव सीमित होगा.
क्या ये टैरिफ अस्थायी होगा, इसमें करेक्शन हो सकता है
भारत और अमेरिका के बीच 25 अगस्त 2025 को व्यापार वार्ता का अगला दौर होने वाला है. भारत 10% से कम टैरिफ की मांग कर रहा है. अमेरिका अपने कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में रियायत चाहता है. एक व्यापक समझौता टैरिफ को कम कर सकता है और दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा. भारतीय अधिकारी आशावादी हैं कि सितंबर या अक्टूबर तक एक समझौता हो सकता है, जो टैरिफ को अस्थायी बनाए रख सकता है।
क्या भारत अब नए बाजारों की तलाश करेगा
बिल्कुल भारत को ये करना ही होगा. भारत को यूरोपीय संघ, जापान, और आसियान देशों जैसे वैकल्पिक बाजारों पर ध्यान देना चाहिए. इन क्षेत्रों में भारत के निर्यात को बढ़ाने से अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव कम हो सकता है.
क्या इसका असर अमेरिका पर भी होगा
अमेरिकी कंपनियां भी कई कच्चे माल और कंपोनेंट्स का आयात करती हैं. उन पर भी टैरिफ लगने से मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ेगी. इससे अमेरिकी उत्पाद भी महंगे होंगे और निर्यात कम हो सकता है. बैंक ऑफ अमेरिका और जेपी मोर्गन जैसे वित्तीय संस्थानों ने चेताया है कि यदि टैरिफ लंबे समय तक रहे तो GDP ग्रोथ घट सकती है. खपत गिर सकती है, जिससे खुदरा और सेवा सेक्टर प्रभावित होंगे. छोटे बिज़नेस पर दबाव बढ़ेगा जो विदेशी सप्लाई चैन पर निर्भर हैं.

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