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CG: बहुचर्चित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया…

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. कोर्ट उनको फिर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है…

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सोमवार को विशेष अदालत में पेश किया गया. ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) की 13 दिवसीय रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. चैतन्य को 13 अक्टूबर तक रायपुर सेंट्रल जेल में रखा जाएगा. बता दें कि शराब घोटाले में चैतन्य बघेल बीती जुलाई से जेल में हैं.

चैतन्य के वकील फैजल रिजवी ने बताया, ईओडब्ल्यू ने केवल एक दिन की पूछताछ के लिए रिमांड ली थी, लेकिन कोर्ट ने पूर्ण अवधि स्वीकृत की. उन्होंने ईओडब्ल्यू कोर्ट में चैतन्य की जमानत याचिका दायर की है, जिस पर 8 अक्टूबर को सुनवाई होगी. रिजवी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, जबकि ईओडब्ल्यू का दावा है कि पूछताछ से मनी ट्रेल और अन्य आरोपीयों से लिंक उजागर हुए.

इस बीच, पूर्व सीएम भूपेश बघेल कोर्ट पहुंचे और चैतन्य से मिले. भूपेश ने इसे केंद्र सरकार की साजिश करार दिया, लेकिन न्याय पर भरोसा जताया. ईडी की जांच में चैतन्य पर 16.70 करोड़ रुपये के अवैध धन को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश करने का आरोप है. यह घोटाला 2019-2022 के दौरान भूपेश सरकार में आबकारी विभाग में अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें 2,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ.

बता दें कि चैतन्य बघेल जुलाई से जेल में हैं. ईओडब्ल्यू ने कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपी दीपेन चावड़ा को भी पेश किया. मामले में 45 से अधिक आरोपी नामित हैं. अगली सुनवाई में जमानत पर फैसला महत्वपूर्ण होगा.

चैतन्‍य बघेल को अपने जन्‍मदिन 18 जुलाई को भिलाई स्थित आवास से ED ने हिरासत में लिया था. शुरुआती जांच में सामने आया था कि शराब घोटाले से राज्‍य के खजाने को भारी नुकसान हुआ है और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई लाभार्थियों तक पहुंचाई गई है.

“10 साल बाद लिया गया बड़ा फैसला, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बदल गया जरूरी नियम, होगा फायदा- समझें”

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केंद्र सरकार ने 10 साल बाद केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों में बड़ा संशोधन किया है, जो 13 अक्टूबर से लागू होगा। इससे करीब 46 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स को राहत मिलेगी।

नई दरें अब अस्पताल कैटेगरी, शहर कैटेगरी और वार्ड टाइप के आधार पर तय होंगी। इससे निजी अस्पतालों को भी लाभ होगा, क्योंकि दरें औसतन 25-30% तक बढ़ाई गई हैं। सरकार ने सभी अस्पतालों को नई दरें स्वीकार करने का निर्देश दिया है, वरना उन्हें सूची से हटाया जाएगा। इस कदम से कैशलेस इलाज की सुविधा में सुधार और अस्पतालों की आय दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

क्यों जरूरी था बदलाव’

पिछले कई सालों से सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स शिकायत कर रहे थे कि CGHS से जुड़े अस्पताल कैशलेस इलाज देने से इनकार करते हैं। मरीजों को पहले इलाज के पैसे खुद देने पड़ते थे और फिर महीनों बाद रिफंड मिलता था। दूसरी ओर, निजी अस्पतालों का कहना था कि पुरानी दरें बहुत कम थीं और मौजूदा मेडिकल खर्चों के अनुसार नहीं थीं। बता दें कि आखिरी बार CGHS की दरों में बड़ा बदलाव 2014 में किया गया था। तब से अब तक सिर्फ छोटे सुधार हुए थे, कोई व्यापक संशोधन नहीं हुआ था।

कर्मचारी यूनियनों की मांग का असर’

इस साल अगस्त में नेशनल फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज यूनियन्स ने सरकार को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कहा था कि कैशलेस सुविधा न मिलने से कर्मचारियों और पेंशनर्स को आर्थिक कठिनाई हो रही है। इसके बाद सरकार ने यह अहम फैसला लिया।

नई CGHS दरें कैसे तय होंगी’

नई दरें अब चार मुख्य बातों पर आधारित होंगी:

  1. अस्पताल का एक्रेडिटेशन (NABH/NABL)
  2. अस्पताल का प्रकार (जनरल या सुपर स्पेशियलिटी)
  3. शहर की श्रेणी (X, Y, Z)
  4. मरीज का वार्ड प्रकार (जनरल, सेमी-प्राइवेट, प्राइवेट)

नए नियमों के अनुसार, जो अस्पताल NABH/NABL प्रमाणित नहीं हैं, उन्हें 15% कम दरें मिलेंगी। सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को 15% अधिक दरें मिलेंगी।

शहरों की श्रेणी के अनुसार दरें-

Y (टियर-II) शहर: X शहरों से 10% कम

Z (टियर-III) शहर: X शहरों से 20% कम

पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – Y श्रेणी के अंतर्गत रखे गए हैं।

वार्ड के हिसाब से दरें-

  • जनरल वार्ड: 5% कम
  • प्राइवेट वार्ड: 5% ज्यादा
  • ओपीडी, रेडियोथैरेपी, डेकेयर और छोटी प्रक्रियाओं की दरें पहले जैसी रहेंगी।
  • कैंसर सर्जरी की दरें भी समान रहेंगी, लेकिन कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी की दरें संशोधित की गई हैं।

अस्पतालों के लिए अनिवार्यता’

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे 13 अक्टूबर तक नई दरों को स्वीकार करें। जो अस्पताल ऐसा नहीं करेंगे, उन्हें डि-एम्पैनल (CGHS सूची से हटाया) जा सकता है।

कैशलेस इलाज में सुधार की उम्मीद’

नई दरों के बाद उम्मीद है कि अस्पताल अब CGHS मरीजों को आसानी से कैशलेस इलाज देंगे। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को जेब से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और रिफंड की झंझट खत्म होगी।

CGHS पैकेज में क्या-क्या शामिल है’

CGHS पैकेज में इलाज से जुड़ी लगभग सारी सुविधाएं शामिल हैंकमरे और बेड का खर्च भर्ती शुल्क एनेस्थीसिया, दवाइयां और मेडिकल सामान डॉक्टर और विशेषज्ञ की फीस ICU/ICCU खर्च ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, ऑपरेशन थिएटर शुल्क फिजियोथेरेपी, टेस्ट, ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि 90 दिन में नई MoA पर साइन जरूरी अस्पतालों को अब 90 दिनों के भीतर नया समझौता (MoA) साइन करना होगा। पुरानी MoA की वैधता 13 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी।

कुल मिलाकर क्या फायदा होगा’

यह संशोधन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहतर और कैशलेस इलाज सुनिश्चित करेगा, जबकि अस्पतालों को उचित दरों पर भुगतान मिलेगा। लगभग एक दशक बाद हुआ यह सुधार CGHS सिस्टम को अधिक व्यवहारिक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

“बिहार चुनाव में 17 नई पहल, देश भर में होंगी लागू; CEC ने बताया क्या हो रहे हैं बदलाव”

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बिहार चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले चुनाव आयोग ने 17 नई पहल की ऐलान किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह 17 नई पहल, बिहार चुनाव में लागू होंगी।

बिहार चुनाव के बाद इन्हें देश भर में भी लागू किया जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इन बदलावों के तहत, एक पोलिंग बूथ पर 1200 से ज्यादा वोटर नहीं होंगे। इसके अलावा एक अहम बदलाव यह भी है कि अब मोबाइल फोन बूथ तक ले जा सकेंगे। फोन बाहर जमाकर वोट डालेंगे और वापस लौटते समय वहां से ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में नए जुड़े हैं या फिर जिनके पते आदि बदल गए हैं, उन्हें नए वोटर आईडी कार्ड दिए गए हैं। इस तरह 14 लाख मतदाता नए हैं और इन सभी को वोटर आईडी दिए गए हैं।

इसके अलावा अब पोलिंग बूथ से 100 मीटर दूर तक उम्मीदवार कैंप लगा सकेंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के पास कुल 40 ऐप हैं, ये सभी ECINET पर उपलब्ध हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि अब ECINET के माध्यम से BLO से संपर्क किया जा सकेगा। इसके अलावा इलेक्शन कमिशन से बात करने के लिए 1950 डायल कर सकते हैं। इस नंबर को डायल करने से पहले +91 लिखना है और संबंधित एरिया का एसटीडी कोड लिखना है। फिर 1950 डायल करना है। मतदाता 243 ईआरओ और पटना में सीईओ से भी संपर्क कर सकते हैं।

इसके अलावा हर सीट पर एक पर्यवेक्षक होगा। यह जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। जो अलग-अलग राज्यों से आएंगे। इनके नंबर भी ECINET और वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि ईवीएम में ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर को लेकर भी शिकायत थी।इसलिए निर्वाचन आयोग ने निर्णय लिया है कि ईवीएम में उम्मीदवारों की तस्वीर रंगीन होगी और क्रम संख्या का फॉन्ट बड़ा होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आयोग ने राजनीतिक दलों की मांग के अनुरूप और पारदर्शिता के लिहाज से तय किया है कि मतगणना में ईवीएम के अंतिम दो दौर से पहले डाक मतपत्रों की गिनती करना अनिवार्य होगा।

यह हैं सभी 17 बदलाव

  1. मतदान केंद्रों पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा।
  2. सभी पोलिंग बूथों पर 100% वेबकास्टिंग।
  3. मतदाताओं के मोबाइल फोन जमा करने के काउंटर।
  4. ईवीएम बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो।
  5. बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण।
  6. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का सफल समापन।
  7. डिजिटल इंडेक्स कार्ड का शीघ्र वितरण।
  8. वन स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म।
  9. वोटर आईडी कार्ड का 15 दिनों में वितरण।
  10. बूथ लेवल अधिकारियों के लिए पहचान पत्र।
  11. फॉर्म 17C और ईवीएम में विसंगति पर VVPAT काउंटिंग।
  12. पोस्टल बैलोट की प्रारंभिक गणना।
  13. हाई-राइज सोसाइटियों में अतिरिक्त बूथ।
  14. 100 मीटर से बाहर अनौपचारिक आईडी स्लिप बूथ।
  15. राजनीतिक दलों के BLA का उपयोग।
  16. पुलिस अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण।
  17. पोलिंग और काउंटिंग स्टाफ का पारिश्रमिक दोगुना होगा।

“Public Holiday: 7 अक्टूबर को सरकारी अवकाश घोषित…बंद रहेंगे सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर और निगम कार्यालय”

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हर वर्ष की तरह इस बार भी आश्विन मास की पूर्णिमा को पूरा देश महर्षि वाल्मीकि की स्मृति में एकजुट होगा। यह महज एक पर्व नहीं, बल्कि उन मूल्यों और सिद्धांतों का उत्सव है जिन्हें आदिकवि वाल्मीकि ने अपने जीवन और काव्य के माध्यम से समाज को दिया।

मानवता, धर्म, और नैतिकता के प्रतीक इस महान ऋषि की जयंती इस बार 7 अक्टूबर 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी।

आध्यात्मिक उत्सव और सांस्कृतिक रंग में रंगेगा भारत

इस दिन पूरे देश में भक्ति और आस्था का माहौल रहेगा। मंदिरों, समुदायिक केंद्रों और सांस्कृतिक स्थलों पर विशेष आयोजन होंगे। रामायण के रचयिता को याद करते हुए लोग उनकी शिक्षाओं और जीवन-दर्शन को अपनाने का संकल्प लेंगे। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों ने इस दिन को सरकारी अवकाश घोषित कर दिया है, जिससे यह पर्व और भी व्यापक रूप से मनाया जा सके।

उत्तर प्रदेश: राज्यव्यापी अवकाश और विशाल आयोजन

योगी सरकार ने इस पावन अवसर पर प्रदेशभर में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। सरकारी आदेश के अनुसार, इस दिन सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद रहेंगे। हालांकि यह अवकाश दिसंबर 2024 में जारी कैलेंडर में पहले ही दर्ज था, अब इसकी औपचारिक पुष्टि के साथ शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में भव्य शोभायात्राएं, धार्मिक झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। समाज में वाल्मीकि जी के विचारों को प्रसारित करने के लिए विशेष जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।

दिल्ली सरकार ने भी 7 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर छुट्टी घोषित की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में इसकी सार्वजनिक घोषणा की, जिससे दिल्लीवासी भी इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह से मना सकें। दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर और निगम कार्यालय सभी बंद रहेंगे। राजधानी के प्रमुख वाल्मीकि मंदिरों और सामुदायिक भवनों को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। यहां भजन संध्याएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और धार्मिक शोभायात्राएं आयोजित होंगी, जिनमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेने की तैयारी में हैं।

एक कालजयी विरासत को सम्मान

महर्षि वाल्मीकि सिर्फ एक कवि या संत नहीं थे, वे भारतीय सभ्यता के उन शिल्पकारों में से एक हैं जिन्होंने धर्म, कर्तव्य और करुणा को एक महाकाव्य के रूप में गढ़ा। रामायण केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शैली है – जिसे उन्होंने लोक तक पहुंचाया। इस वर्ष उनकी जयंती ऐसे समय पर आ रही है जब समाज को फिर से सद्भाव, नैतिकता और सत्य के मार्गदर्शन की ज़रूरत है। ऐसे में यह दिन केवल श्रद्धा का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और प्रेरणा का भी होगा।

“बिहार चुनाव में सुरक्षा का अभेद्य घेरा, 500 से अधिक CAPF कंपनियां होंगी तैनात”

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सुरक्षा तैयारियों के एक बड़े कदम के तहत, बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले 5,000 से अधिक कर्मियों वाली केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 500 से अधिक कंपनियों को पूरे बिहार में तैनात करने के लिए चिह्नित किया गया है।

इस तैनाती में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 121 कंपनियां और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं, साथ ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) जैसे अन्य सीएपीएफ की टुकड़ियाँ भी शामिल हैं।

400 कंपनियों में से, बीएसएफ की 99 कंपनियां पहले ही बिहार पहुंच चुकी हैं, और अन्य सीएपीएफ टुकड़ियों की आवाजाही जारी है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा आकलन और गृह मंत्रालय (एमएचए) के आगे के निर्देशों के आधार पर कंपनियों की कुल संख्या बढ़ सकती है। चुनावों के दौरान तैनाती अंततः लगभग 1,600 कंपनियों तक बढ़ सकती है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा, जिसका कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है, में वर्तमान में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 131 सीटें हैं – जिसमें भाजपा (80), जेडी(यू) (45), एचएएम(एस) (4), और दो निर्दलीय शामिल हैं – जबकि महागठबंधन के पास 111 सीटें हैं, जिसमें राजद (77), कांग्रेस (19), सीपीआई(एमएल) (11), सीपीआई(एम) (2), और सीपीआई (2) शामिल हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार आज शाम बिहार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि बिहार चुनाव विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले कराए जाएँगे और उन्होंने यह भी बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने दो दशकों से भी अधिक समय में पहली बार राज्य की मतदाता सूची को “शुद्ध” किया है। चुनावों के दौरान सीएपीएफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्षेत्र पर नियंत्रण, गश्त और मतदान केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करते हैं। उनकी तैनाती का उद्देश्य बूथ कैप्चरिंग, धमकी और चुनावी हिंसा की घटनाओं को रोकना है-ऐसे मुद्दे जो बिहार के कई जिलों में ऐतिहासिक रूप से व्याप्त रहे हैं।

“भारत और ब्रिटिश नौसेना के युद्धाभ्यास Konkan में एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के दृश्यों ने दुश्मन का दिल दहलाया”

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भारत और ब्रिटेन के बीच रविवार से आरंभ हुआ द्विपक्षीय नौसैनिक युद्धाभ्यास ‘कोन्कन 2025’ केवल समुद्री शक्ति प्रदर्शन नहीं है, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक सामरिक संदेश भी है।

पश्चिमी हिंद महासागर में दोनों देशों के विमानवाहक पोतों, युद्धपोतों, पनडुब्बियों और लड़ाकू विमानों की भागीदारी यह दर्शाती है कि अब हिंद महासागर केवल व्यापारिक गलियारों का नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन का केंद्र बन चुका है।

हम आपको बता दें कि भारतीय नौसेना का नेतृत्व इस अभ्यास में विमानवाहक पोत INS विक्रांत कर रहा है, जिसमें मिग-29K लड़ाकू विमान तैनात हैं, जबकि ब्रिटिश कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का नेतृत्व HMS Prince of Wales कर रहा है, जिसके साथ F-35B स्टील्थ जेट्स, नॉर्वे और जापान के सहयोगी संसाधन भी शामिल हैं। यह संयो ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने इस अभ्यास को “स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक” सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता बताया है। यह वक्तव्य किसी साधारण राजनयिक औपचारिकता से अधिक है। देखा जाये तो यह भारत-यूके के बीच ‘विजन 2035’ के अंतर्गत उभरते हुए नए रक्षा-संबंधों की झलक देता है। इस दृष्टि दस्तावेज़ में दोनों देशों ने आधुनिक रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी को अपने संबंधों का मूल स्तंभ बताया था।

हम आपको बता दें कि ‘कोन्कन’ अभ्यास के इस संस्करण में समुद्री अभियानों के लगभग सभी पहलुओं को शामिल किया गया है- एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन से लेकर जटिल उड्डयन संचालन और समुद्री संचालन तक। ये सभी अभ्यास केवल तकनीकी समन्वय नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और साझी सुरक्षा सोच का परिणाम हैं। आगामी 14 अक्टूबर को पश्चिमी तट पर भारतीय वायुसेना और ब्रिटिश नौसेना के बीच होने वाला संयुक्त वायु रक्षा अभ्यास इस समन्वय को और गहराई देगा। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI और जगुआर लड़ाकू विमानों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत अब बहु-आयामी (multi-domain) रक्षा अभ्यासों में समान रूप से सक्षम है।

देखा जाये तो यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक सक्रियता और उसकी “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। भारत और ब्रिटेन का यह संयुक्त प्रदर्शन एक रणनीतिक उत्तर की तरह देखा जा सकता है- जो “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” (rules-based international order) की रक्षा के लिए सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है।

हम आपको बता दें कि ब्रिटिश कैरियर ग्रुप इस समय ‘ऑपरेशन हाइमैस्ट’ (Operation Highmast) के अंतर्गत आठ महीने के बहुराष्ट्रीय अभियान पर है, जिसमें वह इंडो-पैसिफिक के कई देशों के साथ संयुक्त अभ्यास कर रहा है। इस अभियान में भारत के साथ सहभागिता स्पष्ट करती है कि लंदन अब एशिया में अपने सामरिक पुनर्संयोजन की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आगामी भारत यात्रा (8-9 अक्टूबर) भी इस रणनीतिक संवाद को और राजनीतिक गति देने का अवसर बनेगी।

इसके अलावा, INS विक्रांत की अग्रणी भूमिका इस तथ्य को रेखांकित करती है कि भारत अब पूर्ण स्वदेशी विमानवाहक पोत संचालन में सक्षम है। यह नौसेना की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत भारत “तीन समुद्री थिएटरों” में संतुलित उपस्थिति बनाए रखना चाहता है। भारतीय नौसेना का यह आत्मविश्वास, ब्रिटिश नौसेना के तकनीकी अनुभव के साथ मिलकर, दोनों देशों को साझा समुद्री रणनीति की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

हम आपको बता दें कि ‘कोन्कन’ श्रृंखला के अभ्यास पिछले दो दशकों में न केवल आकार और जटिलता में बढ़े हैं, बल्कि वे दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता और आपसी समझ को भी गहरा बना चुके हैं। यह क्रमिक विकास बताता है कि यह संबंध किसी आकस्मिक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि एक संगठित और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की नींव पर टिका है।

बहरहाल, ‘कोन्कन 2025’ अभ्यास यह स्पष्ट करता है कि भारत अब केवल अपने समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और स्वतंत्र नेविगेशन का सक्रिय संरक्षक बनने की भूमिका निभा रहा है। ब्रिटेन के साथ यह संयुक्त प्रयास उस व्यापक परिवर्तन का संकेत है जिसमें भारत पारंपरिक “सुरक्षा उपभोक्ता” से “सुरक्षा प्रदाता” बनने की दिशा में अग्रसर है। इस अभ्यास का सबसे बड़ा संदेश यही है- हिंद महासागर में अब सुरक्षा का नया समीकरण भारत के इर्द-गिर्द आकार ले रहा है, और ब्रिटेन जैसे परंपरागत वैश्विक खिलाड़ी भी इसे स्वीकारते हुए भारत के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं।

” India-Australia के बीच होंगे कई रक्षा करार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन का बनेगा नया आधार”

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंध और गहरे होने जा रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सिडनी यात्रा (9-10 अक्टूबर) के दौरान तीन महत्वपूर्ण करारों पर हस्ताक्षर होंगे- जिनका दायरा सूचना-साझेदारी, समुद्री सुरक्षा, और संयुक्त सैन्य गतिविधियों तक फैला है।

यह पहल उस समय हो रही है जब भारत और ऑस्ट्रेलिया अपनी “समग्र रणनीतिक साझेदारी” (Comprehensive Strategic Partnership) की पांचवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। देखा जाये तो भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आगामी रक्षा समझौते केवल द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती शक्ति-संरचना का भी संकेत हैं।

हम आपको बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंध पिछले दशक में तीव्र गति से विकसित हुए हैं। दोनों देशों के बीच न केवल सेनाओं के स्तर पर बढ़ते संवाद और संयुक्त अभ्यासों ने विश्वास की नींव मजबूत की है, बल्कि रक्षा-औद्योगिक सहयोग की दिशा में भी नई संभावनाएँ खुली हैं। दोनों देशों के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रिचर्ड मार्ल्स, इस यात्रा के दौरान रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और समुद्री निगरानी प्रणालियों पर नई पहलें शुरू करने वाले हैं।

इस यात्रा की विशेषता यह है कि यह 2014 के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली आधिकारिक ऑस्ट्रेलिया यात्रा है। ऐसे समय में जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की गतिविधियाँ लगातार आक्रामक होती जा रही हैं, भारत और ऑस्ट्रेलिया का यह रणनीतिक संवाद सुरक्षा के एक बड़े भू-राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ही “मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक (Free and Open Indo-Pacific)” सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह अवधारणा केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की एक साझा रणनीति है। चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर, सोलोमन द्वीपों और हिंद महासागर में की जा रही सैन्य गतिविधियाँ इस क्षेत्र में शक्ति असंतुलन का संकेत देती हैं। ऐसे में, भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी उस असंतुलन को संतुलित करने की दिशा में ठोस प्रयास है।

हम आपको बता दें कि आगामी “ऑस्ट्राहिंद 2025” (AustraHind) युद्धाभ्यास, जो 13 से 26 अक्टूबर तक पर्थ के इरविन बैरक में आयोजित होगा, इस रणनीतिक सहयोग की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र जनादेश के तहत शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में कंपनी-स्तरीय अभियानों पर केंद्रित रहेगा। इसका लक्ष्य दोनों सेनाओं की संयुक्त ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाना और शांति अभियानों में परस्पर सहयोग को सुदृढ़ करना है।

इसके अलावा, भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग केवल थलसेना तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया “मालाबार” नौसैनिक अभ्यास का भी नियमित सदस्य है, जिसमें अमेरिका, जापान और भारत शामिल हैं। यह क्वाड (Quad) देशों के बीच सामूहिक सामरिक एकजुटता का सबसे ठोस उदाहरण है। अगला मालाबार अभ्यास नवंबर में गुआम के तट पर आयोजित होगा, जो हिंद-प्रशांत में संयुक्त नौसैनिक शक्ति के प्रदर्शन का प्रतीक होगा।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहले से ही एक सैन्य लॉजिस्टिक्स समझौता मौजूद है, जिसके तहत दोनों देशों के युद्धपोत और विमान एक-दूसरे के ठिकानों पर रीफ्यूलिंग, मरम्मत और डॉकिंग सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं। यह व्यवस्था भारत के अमेरिका, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे प्रमुख रक्षा साझेदारों के साथ भी है, और यह भारत की “विस्तृत समुद्री उपस्थिति” (Expanded Maritime Footprint) की नीति का हिस्सा है।

देखा जाये तो यह सहयोग न केवल ऑपरेशनल लचीलापन बढ़ाता है, बल्कि भारत को दक्षिणी प्रशांत तक अपनी स्ट्रैटेजिक रीच (Strategic Reach) बढ़ाने का अवसर देता है। ऑस्ट्रेलिया, जिसकी भौगोलिक स्थिति हिंद और प्रशांत महासागरों के संगम पर है, भारत के लिए लॉजिस्टिक हब और सुरक्षा साझेदार दोनों की भूमिका निभा सकता है।

हम आपको याद दिला दें कि जून में हुई पिछली द्विपक्षीय बैठक में दोनों पक्षों ने रक्षा-औद्योगिक सहयोग को गहन करने का संकल्प लिया था। भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम और ऑस्ट्रेलिया की उभरती रक्षा-उद्योग नीति के बीच एक पूरक साझेदारी संभव है। भारत की बढ़ती शिपबिल्डिंग, मिसाइल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक के साथ ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञता का मेल, दोनों देशों के लिए पारस्परिक लाभदायक साबित हो सकता है।

बहरहाल, भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी अब “कूटनीतिक संवाद” से आगे बढ़कर प्रभावशाली सामरिक साझेदारी में बदल रही है। यह केवल दो लोकतांत्रिक देशों का सहयोग नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता का साझा आश्वासन है। राजनाथ सिंह की यात्रा और प्रस्तावित रक्षा करार इस बात के साक्षी हैं कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल एक “क्षेत्रीय शक्ति” नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निर्णायक बन रहा है- जो अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एशिया के सुरक्षा समीकरण को नए रूप में गढ़ रहा है।

“भारत के अरबपतियों पर बड़ा खुलासा: सिर्फ इन 10 राज्यों में हैं देश के सबसे बड़े करोड़पति”

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हाल ही में जारी हुरुन इंडिया रिच लिस्ट ने भारत की बढ़ती दौलत की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब 1,687 लोग ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जिनमें 358 लोग अरबपति (कम से कम 8,500 करोड़ रुपये की संपत्ति) हैं।

हालांकि, इन आंकड़ों को गौर से देखने पर पता चलता है कि यह अमीरी देश के हर कोने में नहीं पहुंच रही है।

10 राज्यों में है देश की 90% अमीरी

रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि भारत की 90% से ज़्यादा अमीरी सिर्फ 10 राज्यों तक सीमित है। इसका मतलब है कि देश के ज्यादातर अरबपति और करोड़पति सिर्फ इन गिने-चुने राज्यों में रहते हैं।

इन 10 राज्यों में शामिल हैं:

महाराष्ट्र दिल्ली कर्नाटक तमिलनाडु गुजरात तेलंगाना उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल हरियाणा राजस्थान

आर्थिक राजधानी बनाम बाकी भारत

आंकड़े बताते हैं कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (महाराष्ट्र) और दिल्ली इस दौड़ में सबसे आगे हैं। महाराष्ट्र में अकेले 548 अरबपति या 1,000 करोड़ रुपये से ऊपर की संपत्ति वाले लोग हैं।

दिल्ली में यह संख्या 223 है।

अगर सिर्फ इन दो राज्यों के अमीरों की संख्या को देखें, तो यह देश के कई पूर्वी राज्यों में रहने वाले कुल अमीरों की संख्या से भी ज्यादा है। साफ है कि मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे महानगरों में, जहां बड़े उद्योग, भारी निवेश और व्यापार का अनुकूल माहौल है, वहीं अमीरी तेजी से पनप रही है।

असमानता का कारण: अवसरों की कमी

इस बड़ी आर्थिक असमानता के पीछे मुख्य कारण अवसरों की असमानता है।

जिन राज्यों और शहरों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल कामगार और पूंजी की उपलब्धता है, वहां अमीरी तेज़ी से बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु या मुंबई जैसे शहरों में एक नए बिज़नेस (स्टार्टअप) को आसानी से निवेशक, ग्राहक और टैलेंट मिल जाता है। जबकि पटना या इंदौर जैसे शहरों में व्यापार शुरू करना और उसे सफल बनाना कहीं ज़्यादा चुनौतीपूर्ण है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत में अमीरी तो बढ़ रही है, लेकिन यह वृद्धि असंतुलित है। आज भी कई राज्य बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और रोजगार के अवसरों के मामले में काफी पीछे हैं।

“केजरीवाल का ‘बिहार दांव’: AAP ने जारी की 11 उम्मीदवारों की पहली सूची, अकेले लड़ेगी चुनाव!”

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अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने सोमवार को 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के आगामी चुनावों के लिए अपने 11 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। बिहार में नई पार्टी आप ने जुलाई में घोषणा की थी कि वह बिहार चुनाव लड़ेगी।

हालाँकि पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भारत ब्लॉक का हिस्सा थी, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी बिहार चुनाव अकेले लड़ेगी।

बिहार में ‘समझदार’ जनता करेगी सत्ता परिवर्तन, रंजीत रंजन को महागठबंधन की जीत का भरोसा

बाद में, आप के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने भी पुष्टि की कि पार्टी बिहार चुनाव अकेले लड़ेगी। आप की दिल्ली इकाई के प्रमुख भारद्वाज ने इस साल की शुरुआत में समाचार एजेंसी एएनआई से कहा था, “हम बिहार चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ रहे हैं।”

AAP के उम्मीदवार – डॉ मीरा सिंह- बेगूसराय (बेगूसराय) – योगी चौपाल – कुशेश्वरस्थान (दरभंगा) – अमित कुमार सिंह- तरैया (सारण) – भानु भारतीय – कसबा (पूर्णिया) – शुभदा यादव – बेनीपट्टी (मधुबनी) – अरुण कुमार रजक- फुलवारीशरीफ (पटना) – डॉ. पंकज कुमार- बांकीपुर (पटना) – अशरफ आलम-किशनगंज (किशनगंज) – अखिलेश नारायण ठाकुर- परिहार (सीतामढ़ी) – अशोक कुमार सिंह-गोविंदगंज (मोतिहारी) – पूर्व कैप्टन धर्मराज सिंह-बक्सर (बक्सर)

पिछले बिहार विधानसभा चुनाव तीन चरणों में हुए थे – पहला चरण 28 अक्टूबर को, दूसरा चरण 3 नवंबर को और तीसरा चरण 7 नवंबर को। वहीं, नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए गए थे। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के अनुसार, 2020 के बिहार चुनाव में कुल मतदान 57.05 प्रतिशत रहा, जिसमें पहले चरण में 55.68 प्रतिशत, दूसरे चरण में 55.70 प्रतिशत और तीसरे चरण में 59.94 प्रतिशत मतदान हुआ। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 2020 के बिहार चुनाव में 125 सीटें जीतकर विजयी हुआ था। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने 110 विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की थी।

“तमिलनाडु की पहचान पर हमला, स्टालिन बोले- हिंदी थोपने और RSS की मनुस्मृति सोच के खिलाफ है ये लड़ाई”

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रविवार को राज्यपाल आरएन रवि पर पलटवार करते हुए उन कई लड़ाइयों का ज़िक्र किया जो राज्य लड़ रहा है, संघीय अधिकारों की रक्षा से लेकर सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा तक।

राज्यपाल रवि ने पहले टिप्पणी की थी कि उन्होंने राज्य भर की दीवारों पर ‘तमिलनाडु पोरादुम’ (तमिलनाडु लड़ेगा) जैसे नारे लिखे देखे थे और सवाल किया था। किससे लड़ें? कोई भी तमिलनाडु के खिलाफ नहीं लड़ रहा है। राज्यपाल की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कि तमिलनाडु किसके खिलाफ लड़ रहा है? स्टालिन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य अहंकार, कट्टरता और षड्यंत्रों” के खिलाफ लड़ता है जो शिक्षा, समानता और लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।

स्टालिन ने एक विस्तृत बयान में कहा कि यह उस अहंकार के खिलाफ है जो कहता है कि शिक्षा के लिए धन तभी दिया जाएगा जब हिंदी को स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने केंद्र पर वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाले संस्थानों में हिंदी थोपने और अंधविश्वास फैलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तमिलनाडु जनता द्वारा चुनी गई सरकारों को दबाने वाली लोकतंत्र-विरोधी ताकतों और संविधान की गरिमा को ठेस पहुँचाने वालों” से लड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने राज्यपाल के अधिकारों के अतिक्रमण के खिलाफ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाया है।

स्टालिन ने आगे आरोप लगाया कि धार्मिक कट्टरता से भरे चालाक समूह भारत की प्रगति में बाधा डाल रहे हैं और उन्होंने तमिलनाडु के उद्योगों और नौकरियों को दूसरे राज्यों में स्थानांतरित करने के प्रयासों की चेतावनी दी। उन्होंने आरएसएस समर्थित दबंग कट्टरपंथियों पर भारतीय लोगों की एकता को तोड़ने और मनुस्मृति को फिर से स्थापित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने एनईईटी, परिसीमन और तिरुवल्लुवर तथा कीलाडी उत्खनन जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों के कथित भगवाकरण जैसे मुद्दों का भी उदाहरण दिया, जिनका तमिलनाडु लगातार विरोध कर रहा है।