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छत्तीसगढ़ एक्टर मनोज राजपूत पर FIR, गलत तरीक से पासपोर्ट बनाने का आरोप; बोले- ये साजिश है

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छत्तीसगढ़ी एक्टर मनोज राजपूत एक बार फिर कानूनी कार्रवाई में फंसे हैं. मनोज जो दुर्ग जिले के चर्चित बिल्डर भी हैं उनके खिलाफ सुपेला थाने में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है. आरोप है कि उन्होंने अपने आपराधिक मामलों को छिपाकर पासपोर्ट बनाया है. हालांकि एक्टर मनोज राजपूत ने कहा कि, मेरी छवि को धूमिल करने की कोशिश है.

क्या है पूरा मामला: मनोज राजपूत के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि, गलत जानकारी के आधार पर पहले शपथ पत्र तैयार कराया गया और फिर पासपोर्ट बनवाया गया. सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के बताया कि मनोज राजपूत ने केवल सुपेला थाना से चरित्र सत्यापन कराकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया. जबकि उन पर अन्य थानों में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज थे.

नियम क्या है?: नियमों के अनुसार, पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस वेरिफिकेशन के जरिए जांचा जाता है, लेकिन मनोज राजपूत के खिलाफ पहले से दर्ज प्रकरणों के बावजूद पासपोर्ट जारी होना भी सवाल खड़े करता है. यह भी जांच का विषय है कि आखिर पुलिस सत्यापन के दौरान इन प्रकरणों को कैसे ध्यान नहीं दिया गया.

पासपोर्ट सरेंडर करने का दावा: खुद मनोज राजपूत ने खुद इस पर सफाई दी है. उनका कहना है कि, इस मामले में जानबूझकर फंसाया जा रहा है. दावा किया कि उन्होंने पासपोर्ट वापस रायपुर कार्यालय में सरेंडर कर दिया है और 22 जुलाई को जमानत भी ले चुके हैं. कहा कि, मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है.

मेरे खिलाफ बिना जांच के ही पुलिस ने FIR कर ली. जिस पुलिस अधिकारी ने पासपोर्ट बनाने में मदद की थी वो ही अब मेरे खिलाफ शिकायत कर रहे हैं. ये साजिश है और मेरी छवि को धूमिल किया जा रहा है- अभिनेता मनोज राजपूत

पहले भी फंस चुके हैं मनोज राजपूत: पासपोर्ट मामले से पहले भी मनोज राजपूत पर दुष्कर्म का आरोप लग चुका है. शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप एक युवती ने लगाया था जिस पर उन्हें जेल भी हुई थी. इसके अलावा मारपीट का भी केस हो चुका है.

सुप्रीम कोर्ट ने IIT खड़गपुर में छात्रों की आत्महत्या पर चिंता जताई, पूछा- वहां क्या गड़बड़ है

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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), खड़गपुर में छात्रों की आत्महत्या पर चिंता व्यक्त की और पूछा, “आईआईटी खड़गपुर में क्या गड़बड़ है? छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?”

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला आया. पीठ ने आईआईटी खड़गपुर और शारदा विश्वविद्यालय में छात्रों की आत्महत्या के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है. शीर्ष अदालत ने इस महीने की शुरुआत में इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट को न्यायमित्र नियुक्त किया था और उनसे मामले में विस्तृत जानकारी देने को कहा था.

25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की एक अलग पीठ ने कहा था कि जीवन के अधिकार का मतलब केवल प्राणी का अस्तित्व नहीं है, बल्कि सम्मान, स्वायत्तता और कल्याण का जीवन है और इस दृष्टिकोण में मानसिक स्वास्थ्य को प्रमुख स्थान दिया गया है. साथ ही अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के बीच आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों में वृद्धि से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए थे.

सोमवार को सुनवाई के दौरान दोनों संस्थानों के वकीलों ने पीठ को बताया कि दोनों घटनाओं के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

पीठ ने कहा, “आईआईटी खड़गपुर में क्या गड़बड़ है? छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?” पीठ ने संस्थानों से पूछा कि क्या उन्होंने इस मुद्दे पर विचार किया है.

आईआईटी खड़गपुर की ओर से एक वकील ने पीठ के समक्ष दलील दी कि इस मुद्दे की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की गई है और बताया कि वहां एक परामर्श केंद्र भी है. वकील ने बताया कि एक फोन नंबर भी उपलब्ध कराया गया है, जिस पर कभी भी कॉल किया जा सकता है. पीठ को बताया गया कि संबंधित अधिकारी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे छात्रों की पहचान कर रहे हैं.

पीठ ने कहा, “हमें सूचित किया गया है कि जहां तक शारदा विश्वविद्यालय में हुई घटना का सवाल है, मृतक के पिता द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और जांच प्रगति पर है, इसे कानून के अनुसार आगे बढ़ने दें…”

आईआईटी खड़गपुर की घटना के संबंध में, पीठ ने कहा कि उसे बताया गया है कि आत्महत्या की सूचना मिलने के 30 मिनट के भीतर ही प्रबंधन ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा दी. पीठ ने कहा, “इस संबंध में जांच भी जारी है. जांच सही दिशा में जारी रहे.” पीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है.

एक वकील ने पीठ को बताया कि 4 जून को आईआईटी दिल्ली में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली, लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. पीठ ने न्यायमित्र से मामले की जांच कर कार्रवाई करने को कहा.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय के छात्रावास में बीडीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति शर्मा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के आने से पहले ही विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने उसका शव हटा दिया था. न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अपराध स्थल से छेड़छाड़ की गई, क्योंकि कई लोगों के उंगलियों के निशान थे.

आईआईटी खड़गपुर की मैकेनिकल इंजीनियरिंग की चौथे वर्ष की छात्रा रीतम मंडल ने 18 जुलाई को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. वह कोलकाता की रहने वाली थी और पांच साल के दोहरी डिग्री कार्यक्रम में अध्ययन कर रही थी. इस साल जनवरी से आईआईटी खड़गपुर परिसर में आत्महत्या का यह चौथा मामला था. आईआईटी खड़गपुर मामले में, रजिस्ट्रार ने न्याय मित्र को सूचित किया कि हालांकि पोस्टमार्टम हो चुका है, लेकिन अभी तक विस्तृत जानकारी नहीं मिली है.

टेबल गिरने की बात पर छात्र को डंडे से पीटा, घटना के तीन दिन बाद टीचर पर केस दर्ज

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक छात्र को पीटने के आरोप में मिशनरी स्कूल के टीचर के खिलाफ पुलिस ने रविवार को केस दर्ज किया है. घटना तीन दिन पुरानी है और पुलिस ने शिकायत होने पर जांच के बाद यह कार्रवाई की है.

शहर से करीब 55 km दूर बड़नगर के पीर झालर मार्ग पर स्थित सेंट मार्टिन स्कूल है. यहां गुरूवार को 7 साल के छात्र से टेबल गिर गई. इस पर फादर रामू बंडोद उर्फ रफाली ने उसे डंडे से इतना पीटा की उसकी पूरी पीठ पर डंडे के निशान उभर आए. बाद में टीचर ने उसे रोककर बर्फ की सिकाई कर निशान मिटाने का प्रयास किया. देरी से घर पहुंचने पर परिजनों ने कारण पूछा तो बच्चे ने घटना बता दी.

जानकारी पर उसे पिता थाने लेकर पहुंचे और फादर रफाली के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी. बड़नगर अशोक पाटीदार ने बताया कि सैंट मार्टिन विद्यालय के एक टीचर के खिलाफ छात्र को पीटने की शिकायत उसके परिजनों ने की थी. जांच के बाद आज केस दर्ज किया है.

हिंदूवादी संगठनों ने किया थाने का घेराव
सेंट मार्टिन स्कूल में छात्र की पिटाई का रविवार पता चलते ही हिंदूवादी संगठनों के नेता थाने पहुंच गए. उन्होंने जमकर नारेबाजी कर स्कूल संचालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग की. मामले में एसडीओपी महेन्द्रसिंह परमार ने जांच कर स्कूल संचालक के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए.

शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश
स्कूल के प्रिंसिपल एंथनी जॉर्ज सेंट ने कहा कि मैं स्कूल में नहीं था. स्कूल पहुंचा तो पनिशमेंट देने वाले शिक्षक को विद्यालय से निष्कासित कर दिया है. हमारे विद्यालय में बच्चों को पीटा नहीं जाता है. इधर बड़नगर बीआरसी रामप्रसाद राठौर ने कहा कि तुरंत ही एक जांच दल गठित कर विद्यालय की जांच कर पीड़ित छात्र से भी मिलकर उसके बयान ले कर अधिकारियों को सूचित किया जाएगा.

पहले भी विवादों में रहा स्कूल
मार्च 2021 में विद्यालय के एक फादर द्वारा फिजिक्स के प्रैक्टिकल में नंबर बढ़ाने को लेकर विद्यालय की एक छात्रा को प्रताड़ित किया था. मामले में परिजनों पालक द्वारा शिक्षक और स्कूल संचालक के खिलाफ थाने में शिकायती की गई थी. वहीं मई 2021 में इस स्कूल पर हिंदू प्रतीक चिन्ह के अपमान का आरोप लगने पर कई हिंदू संगठनों में प्रशासन को विद्यालय की मान्यता खतम करने का आवेदन दिया था. विगत वर्षों में सावन सोमवार का बच्चों द्वारा व्रत करने पर भी प्रबंधन द्वारा तुड़वा दिया था. EDC

ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा के बीच, सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले के आरोपी सुलेमान शाह को मार गिराया

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संसद में आज ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर बहस चल रही है. इस बीच जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के तहत कार्रवाई करते हुए सुरक्षाबलों ने पहलगाम हमले के आरोपी सुलेमान शाह को मार गिराया है. जानकारी के अनुसार इस कार्रवाई में आतंकी अबू हमजा और यासिर भी मारा गया. इन आतंकियों की लंबे समय से सुरक्षाबलों को तलाश थी. सरकार ने सुलेमान शाह पर 20 लाख रुपये का इनाम रखा था.

ऑपरेशन के संबंध में सेना की चिनार कॉर्प्स ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा की. सेना के अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर लिडवास इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था. इस दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, जो कई घंटों तक चली. मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता मिली. इलाके में फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है.

‘ऑपरेशन महादेव’ को हाल के समय में घाटी में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है. यह ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि सेना और अन्य सुरक्षाबल आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी मुस्तैदी और सटीक रणनीति के साथ जुटे हुए हैं.

22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, के बाद से आतंकवाद-रोधी अभियान आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को विफल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और मानव खुफिया जानकारी का उपयोग कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के जमीन पर कब्जे की होड़, 9 लाख दावों में से 4 लाख खारिज

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छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गैर-आदिवासी व्यापारियों द्वारा जंगल की जमीन पर कब्जा जमाने की होड़ मची हुई है। ये कब्जे आमतौर पर लीज़ के बहाने किए जा रहे हैं, जहां आदिवासियों से उनकी जमीन खरीदने के एवज में मामूली रकम देकर स्थायी ढांचे खड़े किए जा रहे हैं।

इसके बाद फॉरेस्ट राइट एक्ट (Forest Rights Act) के तहत भूमि अधिकार के दावे किए जाते हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे अधिक वन भूमि अधिकार दावे दर्ज कराने वाला राज्य बन गया है।

गैर-आदिवासी भी कर रहे आदिवासी नाम से दावे
हालांकि कानूनन आदिवासी भूमि केवल किसी अन्य आदिवासी द्वारा ही खरीदी जा सकती है, फिर भी कई गैर-आदिवासी व्यापारी और लोग फर्जीवाड़े के जरिए आदिवासी नाम पर जमीन खरीदने और कब्जा करने में लगे हैं। जब ये दावे जिला प्रशासन के पास पहुंचते हैं, तो जांच के बाद बड़ी संख्या में इन्हें खारिज भी किया जा रहा है।

आधे से ज्यादा दावे खारिज
वन भूमि अधिकार के तहत अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 9 लाख 47 हजार 479 दावे किए जा चुके हैं। इनमें से अब तक 4 लाख 4 हजार 129 लोगों के दावे खारिज कर दिए गए हैं। इसके साथ ही 3 हजार 658 संगठनों के दावे भी अमान्य करार दिए गए हैं।

देश भर में 31 मई 2025 तक कुल 36.3% दावों को खारिज किया गया है, जबकि अकेले छत्तीसगढ़ में खारिजी दर इससे कहीं अधिक रही है।

ग्रामसभा के माध्यम से होते हैं दावे
वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आदिवासी समुदाय और मान्यता प्राप्त संगठनों को जंगल की जमीन पर अधिकार देने की व्यवस्था है। इसके लिए ग्रामसभाएं दावे करती हैं, जिनका सत्यापन जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है। जांच के बाद ही पट्टे जारी किए जाते हैं।

संसद में पेश हुई रिपोर्ट से खुलासा
संसद में भूमि अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कुल दावे 9,47,479 थे जिनमें 4,04,129+ खारिज हो गए. ओडिशा में 7,36,172 दावे थे जिनमें 1,40,000 खारिज हो गए और मध्य प्रदेश में 6,27,513 दावे थे जिनमें खारिज होने वाले दावे अभी स्पष्ट नहीं हैं.

साय से केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी ने की सौजन्य मुलाक़ात

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मुख्यमंत्री साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारत सरकार के केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ग्रामीण विकास, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन, आदिवासी अंचलों में संचार सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री के विकासोन्मुखी दृष्टिकोण को धरातल पर साकार करने हेतु राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख पक्के मकानों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिससे प्रदेश के गरीब परिवारों के आवास का सपना पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 1,460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र आरंभ किए गए हैं, जिससे ग्रामीण जनसंख्या को सहज और सुलभ बैंकिंग सुविधा मिल रही है।

मुख्यमंत्री साय ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा कौशल विकास एवं नवाचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी ने मुख्यमंत्री श्री साय को अपने नारायणपुर तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के दौरे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में केंद्र सरकार की योजनाएं प्रभावी ढंग से क्रियान्वित हो रही हैं और स्थानीय जनता को इनका सीधा लाभ मिल रहा है। डॉ. पेम्मासानी ने माओवादी क्षेत्रों में तीव्र गति से हो रहे सकारात्मक बदलाव की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया। उन्होंने ‘बिहान’ योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का उल्लेख करते हुए कहा कि समूह की दीदियों द्वारा तैयार किए गए बेलमेटल, मिलेट्स और घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इन समूहों की महिलाएँ 15 से 20 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं, जो ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

डॉ. पेम्मासानी ने जनजातीय समुदाय के पारंपरिक स्वागत का स्मरण करते हुए कहा कि उनके साथ नृत्य करना और स्थानीय संस्कृति से आत्मिक रूप से जुड़ने का अनुभव अविस्मरणीय रहा। उन्होंने परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय के दौरे का भी विशेष उल्लेख किया और वहाँ बच्चों से हुई आत्मीय बातचीत को अत्यंत भावुक क्षण बताया। उन्होंने शासन द्वारा दिव्यांग बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद उपस्थित थे।

कुतुब मीनार से ऊँचा जैतखाम सतनामी समाज का गौरव है – मुख्यमंत्री

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साय आज राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित सतनामी समाज के नवनिर्वाचित प्रदेश पदाधिकारियों के शपथग्रहण समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि शिक्षा समाज के विकास का मूलमंत्र है। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए हम सबको मिल-जुलकर कार्य करना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में गिरौदपुरी धाम में कुतुब मीनार से भी ऊँचा जैतखाम निर्मित किया गया, साथ ही अनेक विकास कार्य भी संपन्न हुए। इससे न केवल समाज का गौरव बढ़ा है, बल्कि सतनामी समाज को वैश्विक पहचान भी मिली है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया है। इसी अनुरूप हमारी सरकार ने भी छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया है। हमें पूर्ण विश्वास है कि बाबा गुरु घासीदास जी के आशीर्वाद से यह संकल्प अवश्य पूर्ण होगा।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर राजधानी रायपुर में सतनामी समाज के बहुद्देशीय भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ रुपये की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, गिरौदपुरी स्थित मड़वा महल के शेष अधूरे कार्यों की पूर्णता हेतु 50 लाख रुपये की मंजूरी भी प्रदान की गई। उन्होंने समारोह में सम्मानित हो रहे प्रतिभावान विद्यार्थियों को पाँच–पाँच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की। इस अवसर पर कक्षा 10वीं और 12वीं के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सतनामी समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि जब समाज के पदाधिकारी प्रतिबद्धता, निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करते हैं, तो समाज की विश्वसनीयता बढ़ती है और समरसता के साथ समाज प्रगति की दिशा में अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि टीम भावना से कार्य करने पर रचनात्मक प्रयासों को बल मिलता है। उन्होंने गिरौदपुरी धाम में नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री एल.एल. कोसले के नेतृत्व में भव्य धर्मशाला निर्माण की पहल के लिए बधाई भी दी।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि समाज की उन्नति के लिए सामाजिक एकता और शिक्षा दो महत्त्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और प्रत्येक वर्ष प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में सतनामी समाज उन्नति के नए शिखर पर पहुँचेगा।

खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने सतनामी समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि इन पदाधिकारियों के कंधों पर समाज को सशक्त बनाने की बड़ी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में समाज को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उद्योग, व्यापार एवं स्वरोजगार की दिशा में समाज को आगे आने का आह्वान किया। मंत्री श्री बघेल ने जानकारी दी कि देशभर से पधारे सतनामी समाज के आध्यात्मिक गुरुओं की उपस्थिति में गिरौदपुरी धाम में ‘गुरु दर्शन’ के उपरांत एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी समाजजनों की सहभागिता अपेक्षित है।

कार्यक्रम को सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, गुरु खुशवंत साहेब, प्रगतिशील सतनामी समाज के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष श्री एल.एल. कोसले ने भी संबोधित किया।

इस शपथग्रहण समारोह में विधायकगण श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, श्रीमती उत्तरी जांगड़े,+

श्रीमती शेषराज हरवंश, श्रीमती कविता प्राण लहरे, उत्तर प्रदेश से श्री कमलेश दास, असम से श्री मदन सतनामी, बिहार से श्री श्याम दास, ओडिशा से सूरज भारती, राजस्थान से मारवाड़ सतनामी समाज के अध्यक्ष श्री महेंद्र सतनामी, मध्यप्रदेश से श्री किशन बंजारे तथा दिल्ली से डॉ. जगजीवन खरे सहित सतनामी समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं अध्यात्म गुरुगण उपस्थित रहे। साथ ही, प्रदेश साहू समाज, यादव समाज, कुर्मी समाज, सर्व आदिवासी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिगण भी इस समारोह में सम्मिलित हुए।

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध’ – मुख्यमंत्री

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साय ने आज राजधानी रायपुर के कमल विहार सेक्टर-11ए में मेडिश्योर हॉस्पिटल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे जनसामान्य को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ सुलभ हो सकें।

मुख्यमंत्री साय ने हॉस्पिटल प्रबंधन को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त मेडिश्योर हॉस्पिटल आमजन के लिए एक बड़ी सौगात है। विशेष रूप से बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत सुविधा राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को राहत मिलेगी।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कार्यक्रम में विधायक श्री मोतीलाल साहू, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साहू, डॉ. विकास गोयल, डॉ. मीनल गोयल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

‘छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध’ – मुख्यमंत्री

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साय ने आज राजधानी रायपुर के कमल विहार सेक्टर-11ए में मेडिश्योर हॉस्पिटल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे जनसामान्य को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ सुलभ हो सकें।

मुख्यमंत्री साय ने हॉस्पिटल प्रबंधन को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त मेडिश्योर हॉस्पिटल आमजन के लिए एक बड़ी सौगात है। विशेष रूप से बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत सुविधा राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को राहत मिलेगी।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कार्यक्रम में विधायक श्री मोतीलाल साहू, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साहू, डॉ. विकास गोयल, डॉ. मीनल गोयल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।p[;’/

RAMP योजना के अंतर्गत एमएसएमई उद्यमियों के इंडस्ट्री और बैंकर्स मीट शिविर का आयोजन 28 जुलाई को

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जिले में RAMP योजना के अंतर्गत एमएसएमई उद्यमियों के लिए इंडस्ट्री और बैंकर्स मीट शिविर का आयोजन 28 जुलाई 2025 को समय प्रातः 11.00 बजे अग्रसेन भवन पत्थलगांव में किया गया है। जिसमें औद्योगिक नीति 2024-30, नवीन लॉजिस्टिक पॉलिसी, पीएमएफएमई. योजना एवं बैंकों हेतु आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में जानकारी दी जाएगी। शिविर में इच्छुक नव उद्यमी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने हेतु शिविर में सम्मिलित हो सकते है।