Home Blog Page 532

सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

0

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सरगुजा जिले के प्रवास के दौरान सोमवार को आकांक्षी विकासखंड लखनपुर के जनपद पंचायत सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक लेकर विकास कार्यों, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली। सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए, इससे स्थानीय स्व-रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

ज्यपाल श्री डेका ने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, कृषि, पीएम आवास, सामाजिक विकास, वित्तीय समावेशन एवं बुनियादी ढांचे के तहत चल रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने सभी विकासात्मक कार्यों को शत प्रतिशत क्रियान्वयन करने पर जोर देते कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाएं एवं मुख्यधारा में जोड़ने शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं।

श्री डेका ने जल संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कहा कि प्रत्येक ग्राम में जल संचयन के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने डबरी निर्माण, शोख पिट (सोखता गड्ढा), इंटकवेल जैसे संरचनात्मक कार्य तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए ताकि वर्षा जल का अधिक से अधिक संग्रहण हो सके और भू-जल स्तर में सुधार हो सके। बैठक में पर्यटन, संस्कृति ,धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, कलेक्टर श्री विलास भोसकर, पुलिस अधीक्षक श्री राजेश अग्रवाल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षण से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

राज्यपाल ने पशुपालन को ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम बताते हुए इसे बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन से न केवल आय में वृद्धि होगी, बल्कि यह पोषण सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। पर्यटन विकास की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए। इससे स्थानीय स्व-रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। सड़क सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी पहल की जाए और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाए। उन्होंने हेलमेट और यातायात नियमों के प्रति सतत् जागरूकता लाने के निर्देश भी दिए।

महिला स्व-सहायता समूहों की सराहना की

राज्यपाल श्री डेका ने महिला स्व-सहायता समूहों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समूहों की आर्थिक गतिविधियों का ओर विस्तार किया जाए। उन्होंने बैंकिंग सुविधाओं को सुदृढ़ और सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को मजबूती मिले। स्वास्थ्य और पोषण को लेकर उन्होंने कुपोषित बच्चों की पहचान एवं सघन मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण, राज्य एवं जिला स्तर पर विषय-विशेष प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों से आपसी समन्वय और सूचकांकों के सतत सुधार की रणनीति पर कार्य करने निर्देशित किया। राज्यपाल ने अधिकारियों को योजनाओं की जमीनी स्तर पर जांच के लिए मैदानी भ्रमण करने और लाभार्थियों से फीडबैक लेने के भी निर्देश दिए।

एक पेड़ मां के नाम लगाने प्ररित करें

एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिशन बताते हुए राज्यपाल ने सभी को पेड़ लगाने और दूसरों को भी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। सभी सरकारी कार्यालयों में हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने जनपद परिषद में ‘एक पेड़ मां के नाम‘ पौधा रोपित किए। राज्यपाल श्री डेका ने आकांक्षी ब्लाक अंतर्गत दसवीं कक्षा में जिले में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने पर कुमारी भूमिका रजवाड़े को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय रजपुरीकला पहुंचे राज्यपाल श्री रमेन डेका

0

राज्यपाल श्री रमेन डेका सरगुजा जिला प्रवास के दौरान सोमवार को विकासखण्ड लखनपुर के रजपुरीकला स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय पहुंचे। उन्होंने यहां बालिकाओं से मिलकर कहा कि कड़ी मेहनत से ही सफलता प्राप्त होती है। राज्यपाल श्री डेका ने इस दौरान विद्यालय को 5 कम्प्यूटर सिस्टम प्रदान करने की घोषणा की।

जब राज्यपाल श्री डेका ने बच्चों से पूछा कि भविष्य में क्या बनना चाहती हैं, तो बच्चों ने अपनी-अपनी इच्छा जाहिर की। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आप जो सपना देख रहें हैं, उसे साकार करने के लिए कडी मेहनत करनी होगी। अपना लक्ष्य निर्धारित कर ईमानदारी के साथ आगे बढ़े, मन लगाकर पढ़ाई करें, सफलता जरूर मिलेगी।

श्री डेका ने शिक्षकों सेे कहा कि शिक्षक बच्चों को राह दिखाते हैं, इसलिए शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को समझें, बच्चों के प्रति अच्छा व्यवहार रखें। उन्होंने बच्चों को शिक्षक के साथ अच्छा व्यवहार करने, उनका आदर करने कहा। उन्होंने कहा कि हमें गिरने पर खड़े होने की ताकत शिक्षक से ही मिलेगी। इसी प्रकार उन्होंने बच्चों से कहा कि अपने माता-पिता का सम्मान करें, आवश्यकतानुसार ही मोबाईल का उपयोग करें।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव की नियुक्ति

0

राज्य शासन द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव की नियुक्ति के लिए पदस्थापना आदेश जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के अनुसार सरगुजा संभाग में संयुक्त संचालक कृषि श्री यशवंत केराम को महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय पाटन दुर्ग का कुलसचिव बनाया गया है। वही कृषि संचालनालय इंद्रावती भवन अटल नगर, नवा रायपुर में पदस्थ श्री कपिल देव दीपक को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का कुलसचिव बनाया गया है। इसी प्रकार महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय पाटन दुर्ग में पदस्थ कुलसचिव श्री आर.एल. खरे को मूल विभाग में वापस लेते हुए छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद् रायपुर में संयुक्त संचालक के पद पर नवीन पदस्थापना दी गई है।

धान विक्रय के लिए किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन कराना अनिवार्य

0

छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के जीवन में तकनीक के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में अब राज्य में एग्रीस्टैक पोर्टल को तेजी से लागू किया जा रहा है। यह पोर्टल किसानों के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक संरचना है, जो खेती से जुड़ी सभी प्रमुख जानकारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है।

क्या है एग्रीस्टैक पोर्टल

एग्रीस्टैक एक सुरक्षित डिजिटल सिस्टम है, जिसमें किसान की पहचान, जमीन का रिकॉर्ड, फसल की जानकारी और कृषि संबंधी गतिविधियों का पूरा विवरण एकीकृत रूप से दर्ज किया जाता है। इस डेटा का उपयोग किसान की सहमति से ही साझा किया जाता है, जिससे उसकी निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।

धान विक्रय के लिए अनिवार्य पंजीयन

इस वर्ष राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से धान विक्रय करने वाले किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यह कदम पारदर्शिता लाने और किसानों को योजनाओं का लाभ सीधे उनके खाते तक पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

किसानों को मिल रहे सीधे लाभ

एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किसानों को अब योजनाओं, सब्सिडियों और सहायता राशि की जानकारी सीधे मिल रही है। इससे न केवल बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी, बल्कि लाभ वितरण की प्रक्रिया भी तेज और पारदर्शिता आएगी।

पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और निःशुल्क

किसानों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आसान है। किसान अपने आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका के साथ नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अपनी सहकारी सोसायटी में जाकर निःशुल्क पंजीकरण करवा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और किसान को तुरंत डिजिटल पहचान प्रदान की जाती है।

24 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं

राज्यभर में अब तक 24 लाख से अधिक किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल से जुड़कर डिजिटल कृषि सेवाओं का लाभ उठाना शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी रबी सत्र तक राज्य के सभी पात्र किसान इस प्लेटफॉर्म से जुड़कर लाभ उठाना सुनिश्चित करें।

डिजिटल खेती, समृद्ध किसान

एग्रीस्टैक पोर्टल भविष्य में कृषि योजनाओं की रीढ़ साबित होगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि खेती को वैज्ञानिक, योजनाबद्ध बनाने में मदद मिलेगी।

धान की फसलों में रोग व कीट प्रकोप से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों ने दी सलाह

0

छत्तीसगढ़ में इन दिनों हो रही असमय बारिश के फलस्वरूप धान की फसल में झुलसा, शीथ ब्लाइट रोग और कीट प्रकोप से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने सामयिक सलाह दी है।
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि मौसम अनुकूल न होने के कारण धान की फसल पर विभिन्न प्रकार के रोग और कीट प्रकोप देखने को मिल रहे हैं, जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है। धान की फसल में झुलसा रोग के लक्षण पत्तियों पर नाव के आकार के धब्बों के रूप में दिखते हैं। इससे बचाव के लिए किसान ट्राईफ्लोक्सीस्ट्रोवीन, टेबुकोनाजोल, ट्राईसाइक्लाजोल एवं हेक्साकोनाजोल का छिड़काव करें।

इसी प्रकार शीथ ब्लाइट रोग होने पर हैक्साकोनाजोल का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं जीवाणु जनित झुलसा रोग के प्रकोप पर खेत से अतिरिक्त पानी निकालकर 3-4 दिन तक खुला रखने एवं प्रति हेक्टेयर 25 किलो पोटाश डालने के साथ कासुगेमाइसीन, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, स्ट्रैप्टोसाइक्लिन या प्लान्टोमाइसिन का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कीट नियंत्रण के लिए तनाछेदक कीट की निगरानी हेतु फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें। भूरा फुदका कीट के प्रकोप की स्थिति में पाईमेट्राजीन एवं डिनोटेफेरोन का छिड़काव प्रभावी रहेगा।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर इन उपायों को अपनाकर धान की फसल को सुरक्षित रखें और बेहतर उत्पादन लें। गौरतलब इस खरीफ सीजन में प्रदेश इस में अच्छी बारिश हुई, जिससे अच्छी फसल की संभावना है। वर्तमान कुछ दिनों में प्रदेश में असमय बारिश से कीट प्रकोप व झुलसा रोग बढ़ गए है। बता दें कि खेतों में धान की फसल लहलहा रही है तथा कुछ जगहों पर धान फूटने की स्थिति में है।

चिकित्सकों ने सर्जरी कर कैंसर पीड़ित मरीज की जान बचाने में सफलता हासिल की

0

डराने के लिए कैंसर का नाम ही काफी है शुरूआती अवस्था में कोई तकलीफ दर्द नहीं होने के कारण मरीज इसे नजरअंदाज या लापरवाही के चलते ध्यान नहीं देता है, परन्तु जब तक कुछ तकलीफ हो तब तक मरीज का कैंसर बहुत आगे की चरण तक पहुंच चुका होता है तब यह जानलेवा और खतरनाक भी हो जाता है। कुछ ऐसी परिस्थिति से संघर्ष करते हुए बिलासपुर निवासी मरीज लक्ष्मण 61 वर्षीय मुंह में कैंसर के ग्रसित सिम्स बिलासपुर के दंत चिकित्सा विभाग में इलाज के लिए पहुंचा। तंबाकू के कई वर्षों का सेवन करने से उसके मुंह में कैंसर हो गया था, लेकिन सिम्स के दंत चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों ने जटिल इलाज व सर्जरी से मरीज की जान बचाने के सफल हुए है। चूंकि उम्र अधिक होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है। इस स्थिति में इलाज करना चुनौती पूर्ण हो जाता है।

मरीज का कैंसर इतना बढ़ गया था, कि गले में उपस्थित लिंफ नोड में सूजन काफी बड़ा हो गया था। जिसका साइज 7×6 सेमी बढ़ गया था। जांच में पाया गया की कैंसर की अंतिम स्टेज से ग्रसित होने की पुष्टि हो गई। दंत चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों ने सर्जरी का निर्णय लिया, इलाज के लिए आवश्यक खून जांच एक्स-रे और सिटी स्केन कराकर सुनियोजित तरीके से 7-8 घंटे की जटिल सर्जरी कर पूरा किया गया। इस सर्जरी को तीन भागों में किया गया। इसमें कैंसर के साथ संक्रमित जबड़े के हिस्से को निकाला गया। कैंसर जो गर्दन में फैल गया था, उसको निकाला गया और अंत में कैंसर को निकालने के बाद खाली जगह पर छाती से मांस जिसे पीएमएमसी फ्लैप कहते हैं, का टुकड़ा निकालकर लगाकर सर्जरी पूरी की गई।

सर्जरी को डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में किया गया। सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. संदीप प्रकाश (ओरल एवं मैक्जिलोफेसियल सर्जन) विभागाध्यक्ष, डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी किनिकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे, डॉ. सोनल पटेल, के अलावा निश्चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, एवं मेजर ओटी के अन्य चिकित्सक, स्टाफ, वार्ड बॉय तथा रेडियोडायग्नोसिस की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह एवं उनके अन्य स्टाफ सहित, सबके संगठित सहयोग से किया गया है। छ.ग. आयुर्विज्ञान सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन से दंत चिकित्सा विभाग कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। समय समय पर दंत चिकित्सा विभाग श्रेष्ठता साबित कर रहा है।

CJI बीआर गवई ने दिखाया बड़ा दिल, जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील को किया माफ, नहीं होगा कोई ऐक्शन

0
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई ने बड़ा दिल दिखाते हुए उस वकील को माफ कर दिया है, जिसने उनपर जूता फेंकने की कोशिश की थी. सीजेआई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. शीर्ष सूत्रों ने सोमवार को सीएनएन-न्यूज18 को यह जानकारी दी. सीजेआई ने अधिकारियों से इस कृत्य को “अनदेखा” करने को कहा.
यह घटना उस समय हुई जब प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ वकीलों द्वारा मामलों की सुनवाई कर रही थी. कुछ गवाहों ने कहा कि वकील ने मंच के पास पहुंचने के बाद अपना जूता निकालकर प्रधान न्यायाधीश पर फेंकने की कोशिश की, जबकि कुछ ने कहा कि ऐसा लग रहा था कि वह कागज़ का एक रोल फेंक रहा था.
हालांकि, घटना से हैरान गवई ने वकीलों से हंगामे को नजरअंदाज करने और अपनी दलीलें जारी रखने को कहा. उन्होंने कहा, “इन सब से विचलित मत होइए. हम विचलित नहीं हैं. ये चीजें मुझ पर असर नहीं डालती हैं.
“वकील 2011 से बार का अस्थायी सदस्य है. हम उसकी सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू करेंगे. मैंने सीजेआई से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह अभी भी बेंच पर थे. सोशल मीडिया में सीजेआई की टिप्पणियों की गलत व्याख्या के कारण यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. कानून अपना काम करेगा.”
इस बीच, जब वकील को अदालत कक्ष से बाहर ले जाया जा रहा था, तो उन्हें यह कहते हुए सुना गया: “‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे’ (सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे)”. यह घटना संभवतः 16 सितंबर के मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई की टिप्पणियों से जुड़ी हुई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में यूनेस्को की विश्व धरोहर खजुराहो मंदिर परिसर के हिस्से, जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की सात फुट की मूर्ति के पुनर्निर्माण और पुनः स्थापित करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था.

पहले मणिपुर, अब महाराष्ट्र… भारत में कौन सा गेम खेल रहे अमेरिका के एक्स आर्मी मैन, निशाने पर हिन्दू

0

भारत में हाल के दिनों में अमेरिकी नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले मणिपुर में अमेरिका के एक पूर्व सैनिक को ड्रोन और रक्षा उपकरणों की सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. वहीं अब महाराष्ट्र के भिवंडी में एक अमेरिकी नागरिक और यूएस आर्मी के रिटायर्ड मेजर को अवैध धर्मांतरण करवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया.
पहले मणिपुर और अब महाराष्ट्र के भिवंडी में अवैध धर्मांतरण की कोशिश से अमेरिका के पूर्व सैनिकों और मिशनरियों की भूमिका पर शक गहराता जा रहा है. क्या यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिसमें हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है?
महाराष्ट्र में क्या कर रहा था पूर्व अमेरिकी सैनिक?
महाराष्ट्र के ठाणे स्थित भिवंडी तालुका में अवैध धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने एक अमेरिकी नागरिक जेम्स वॉटसन समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. 58 वर्षीय जेम्स वॉटसन अमेरिकी सेना में मेजर रह चुका है. पुलिस के अनुसार, वॉटसन भारत में बिजनेस वीज़ा पर आया था, लेकिन वह यहां अवैध तरीके से धर्मांतरण के काम में जुट गया.

वॉटसन ने कथित रूप से ग्रामीणों से कहा कि हिंदू धर्म अंधविश्वास पर आधारित है और ईसाई धर्म अपनाने से खुशहाली और समृद्धि मिलेगी. उन्होंने दावा किया कि बीमारियां ईसा मसीह की प्रार्थना और प्रसाद के रूप में दी जाने वाली शराब पीने से दूर हो जाएंगी. हालांकि पुलिस ने उसके भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाएं भड़काने के लिए दुर्भावनापूर्ण कृत्य), धारा 302 (जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत करना), विदेशी नागरिक अधिनियम (वीज़ा नियमों के उल्लंघन) और महाराष्ट्र के 2013 के एंटी-ब्लैक मैजिक कानून के तहत मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार कर लिया है.
मणिपुर में क्या हुआ था?

इससे पहले पिछले साल दिसंबर में अमेरिका के 40 वर्षीय मिशनरी और पूर्व सैनिक डैनियल स्टीफन कोर्नी को लेकर चौंकाने वाली खबरें आई थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्नी ने मणिपुर में कूकी उग्रवादियों को ड्रोन और बुलेटप्रूफ जैकेट्स बांटे. यह घटना तब सामने आई जब उनके यूट्यूब चैनल ‘फूल फॉर क्राइस्ट’ पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे नक्सल प्रभावित इलाकों और हिंसा से जूझते मणिपुर में ‘युद्ध क्षेत्र’ का दौरा करते दिखे. रिपोर्ट के अनुसार, कोर्नी ने कूकी नागरिकों को राहत सामग्री के साथ-साथ ड्रोन और बुलेटप्रूफ वेस्ट भी दिए, जिनका इस्तेमाल “मेइती हिंदुओं” के खिलाफ निगरानी और संभावित हमलों के लिए किया जा सकता था.
क्या है असली मकसद?
अमेरिकी सेना में सेवा का अनुभव होने की बात भी सामने आई, जिसने इस घटना को और संदिग्ध बना दिया. मणिपुर में जातीय हिंसा के बीच यह कदम भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना गया था. कहा यह गया कि ये मिशनरी गतिविधियां हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर भारत की सामाजिक सौहार्द को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाओं में एक पैटर्न दिखाई दे रहा है. मणिपुर में उग्रवादियों को सैन्य सहायता और महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण के प्रयास दोनों ही भारत की आंतरिक स्थिरता को चुनौती दे सकते हैं. डैनियल कोर्नी और जेम्स वाटसन जैसे व्यक्तियों का अमेरिकी सेना से जुड़ा होना संयोग नहीं माना जा रहा. कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यह अमेरिका के धार्मिक संगठनों के विस्तार का हिस्सा हो सकता है, जो भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देशों में प्रभाव बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं.

पेंट, स्याही में डलता है जो जहर, उसे क्यों मिलाया जाता है कफ सिरप में? वो भी लिमिट से कई हजार गुना ज्यादा

0

राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में हाल ही के दिनों में कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत से देश सदमे में है. तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस कोल्ड्रिफ सिरप को बच्‍चों को दिया गया था उसमें डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा स्वीकार्य स्तर से अधिक पाई गई है. इस रिपोर्ट के बाद कई राज्‍यों ने कोल्ड्रिफ सिरप पर बैन लगा दिया गया. मध्य प्रदेश के औषधि नियंत्रक की जांच में भी सामने आया है कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा 48% से ज्यादा पाई गई, जबकि स्वीकार्य सीमा केवल 0.1% है. आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस डीईजी को सिरप में मिलाया गया है उसका इस्‍तेमाल ब्रेक फ्लूइड्स, पेंट, स्याही आदि बनाने में होता है. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि दवाओं में इसका इस्‍तेमाल बहुत घातक है. डब्‍ल्‍यूएचओ का यह दावा सच भी साबित हो चुका है, क्‍योंकि डीईजी मिली दवाएं पीने से दुनिया के कई देशों में बच्‍चों की मौत हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दवा कंपनियां इस ‘जहर’ को दवाओं में मिलाती ही क्‍यों हैं?
इस सवाल का जवाब जानने से पहले हम डीईजी के बारे में कुछ अहम जानकारियां आपको देते हैं. डाई एथिलीन ग्लाइकॉल एक रंगहीन और गंधहीन अल्कोहलिक कंपाउंड है. रेजिन, प्लास्टिसाइजर्स,ब्रेक फ्लुइड, कुछ लुब्रिकेंट, लोशन, क्रीम, डियोडोरेंट आदि में नमी बनाए रखने,रंग, स्याही तथा प्रिंटिंग कार्यों में सॉल्वेंट और घुलनशील योजक के रूप में किया जाता है. अगर हम साधारण शब्‍दों में कहें तो यह जहर है और इसे खाद्य पदार्थों से दूर रखने की ही सिफारिश की जाती है. यह इतना घातक है कि एक किलोग्राम में 1 से 2 मिलीलीटर एथिलीन ग्लाइकॉल मिलाने पर ही यह इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. यही वजह है कि भारत में कुछ दवाओं में इसे 0.01 फीसदी मात्रा में ही मिलाने की अनुमति है.

ऐसा नहीं है कि दवा बनाने में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल डालना कोई मजबूरी है. इसके बिना भी दवाएं बनाई जा सकती हैं. दरअसल, कंपनियां पैसा बचाने के लिए इसका इस्‍तेमाल करती हैं. डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल का इस्‍तेमाल पीने वाली दवाओं में सॉल्वेंट्स के रूप में किया जाता है. कफ सिरप में इसका यूज उसे मीठा बनाने के लिए भी किया जाता है. वैसे कायदे से सॉल्‍वेंट के रूप में ग्लिसरीन या प्रोपलीन ग्लाइकॉल का इस्‍तेमाल करना चाहिए. क्‍योंकि ये दोनों ही डीईजी के मुकाबले महंगे होते हैं तो कंपनियां अवैध रूप से ज्‍यादा मात्रा में दवाओं में डीईजी मिला देती हैं. मध्‍य प्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप में 48 फीसदी डीआईजी पाया पाया गया, जबकि स्‍वीकृत मात्रा सिर्फ 0.01 फीसदी है.

डाइएथिलीन ग्लाइकोल एक जहरीला पदार्थ है. इसका सबसे ज्‍यादा असर किडनी पर होता है. यह शरीर में जाकर ऑक्सालिक एसिड और ग्लाइकोलिक एसिड जैसे जहरीले तत्वों में टूट जाता है, जो गुर्दों की कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं. इससे गुर्दे फेल होने तक की नौबत आ जाती है.इसके अलावा डीईजी नर्व सिसटम और दिल पर भी असर करता है.

कौन हैं रतन टाटा के करीबी विजय सिंह, जिन्‍हें हटाए जाने पर ग्रुप में हो गया बवाल, दो गुट में बंट गया टाटा संस

0

वेटरन रतन टाटा के निधन के बाद से ही टाटा समूह में सबकुछ अच्‍छा नहीं चल रहा है. शुरुआत में तो यह बातें अंदरखाने ही चलती रहीं, लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ सतह पर आ गया. अब तो हालात इतने बिगड़ गए हैं कि सरकार को भी इसमें हस्‍तक्षेप करना पड़ा है. टाटा समूह में जारी विवाद पर विराम लगाने के लिए सोमवार को दिल्‍ली में केंद्र सरकार के मंत्रियों और टाटा समूह के शीर्ष अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई. सुनने में आ रहा है कि सबसे ज्‍यादा विवाद रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले विजय सिंह को हटाए जाने को लेकर हो रहा है. आखिर विजय सिंह कौन हैं और सारे विवाद के केंद्र में उनका नाम क्‍यों आ रहा है.
विजय सिंह को रतन टाटा का करीबी माना जाता है. वह 1970 बैच के मध्‍य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. उन्‍होंने साल 2007 से 2009 तक भारत के रक्षा सचिव के रूप में भी काम किया और रिटायर होने के बाद रतन टाटा ने उन्‍हें अपने साथ जोड़ लिया. रतन टाटा उन्‍हें ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्‍ट के नामित निदेशक के रूप में नियुक्‍त कर दिया था. उनकी आयु 70 साल पूरी होने पर साल 2018 में वह बोर्ड से हट गए थे, लेकिन रतन टाटा ने साल 2022 में आयु सीमा में छूट देकर उन्‍हें दोबारा शामिल कर लिया. बाद में उन्‍हें टाटा ट्रस्‍ट का उपाध्‍यक्ष भी बना दिया गया.

क्‍यों शुरू हुआ विवाद
विजय सिंह को हटाए जाने का विवाद पिछले साल अक्‍टूबर में रतन टाटा के निधन के बाद से ही शुरू हो गया था. समूह में पनपे आंतरिक मतभेदों की वजह से विजय सिंह को हटाने की कवायद शुरू हो गई. पिछले महीने सितंबर में टाटा ट्रस्‍ट की बोर्ड मीटिंग में 7 ट्रस्‍टी में से 4 ट्रस्टियों ने रतन टाटा के रहने के दौरान ही उनकी नियुक्ति का विरोध किया था. इसमें प्रमित झावेरी, डेरियस खंबाटा, मेहली मिस्‍त्री और जहांगीर ने विजय सिंह का विरोध किया था. ट्रस्टियों ने सिंह को बोर्ड में होने वाली चर्चाओं की जानकारी व अन्‍य फैसलों का अपडेट नहीं देते थे.

नोएल से अलग जाकर लिया फैसला
रतन टाटा के करीबी होने के नाते नोएल टाटा ने भी विजय सिंह का हमेशा समर्थन किया था. इसके साथ वेणु श्रीनिवासन ने भी उनका समर्थन किया, लेकिन वोटिंग के जरिये उन्‍हें हटा दिया गया. हालांकि, विवाद बढ़ाने पर सिंह ने खुद ही इस्‍तीफा दे दिया, फिर भी वह ट्रस्‍टी बने रहे. विजय सिंह को हटाने के बाद टाटा ट्रस्‍ट में दो गुट बन गए. इस विवाद से टाटा संस के नियंत्रण, नामित निदेशकों की नियुक्ति और टाटा कैपिटल के आईपीओ को लेकर विवाद बढ़ा है. एक ट्रस्‍टी ने ईमेल करके वेणु श्रीनिवासन को हटाने की बात कही थी. इससे टाटा संस पर कब्‍जा किए जाने जैसी स्थिति पैदा हो गई.

सरकार ने किया हस्‍तक्षेप
टाटा संस का विवाद इस कदर बढ़ गया है कि सरकार को भी इस 157 साल पुराने कारोबारी समूह को चिंता शुरू हो गई. टाटा समूह देश का सबसे बड़ा औद्योगिक घराना है और इसीलिए सरकार को लेकर लेकर चिंता हो रही है. यही वजह है कि सरकार के दो मंत्रियों और नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, एन चंद्रशेखरन और डेरियस खंबाटा के साथ बैठक की है. सरकार की मंशा है कि ट्रस्‍टीज के बीच सुलह हो और टाटा संस की लिस्टिंग सुनिश्चित हो सकेगी. सरकार ने यह हस्‍तक्षेप करोड़ों निवेशकों और राष्‍ट्रीय हितों को देखते हुए किया है.