Home Blog Page 534

“चक्रवात शक्ति तेजी से बढ़ रहा आगे, रविवार को किन इलाकों में अलर्ट; मौसम विभाग ने बताया”

0

अरब सागर में चक्रवाती तूफान शक्ति के चलते हलचल तेज हो गई है। इसकी गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिसकी वजह से तेज हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने बताया कि चक्रवात शक्ति अब गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो चुका है।

अरब सागर में यह और आगे बढ़ रहा है। गुजरात में द्वारका से लगभग 420 किलोमीटर दूर केंद्रित है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि इसके पश्चिम-दक्षिण की ओर बढ़ने की संभावना है। यह आज उत्तर-पश्चिम और समीपवर्ती पश्चिम-मध्य अरब सागर तक पहुंच सकता है।

चक्रवात शक्ति सोमवार सुबह से पूर्व-उत्तर की ओर बढ़ेगा और धीरे-धीरे कमजोर हो जाएगा। चक्रवाती तूफान के प्रभाव के कारण आज गुजरात-उत्तर महाराष्ट्र तट और पाकिस्तान तट पर समुद्र की स्थिति बहुत खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को मंगलवार तक उत्तर-पश्चिम अरब सागर, उत्तर-पूर्व अरब सागर के आसपास के क्षेत्रों, मध्य अरब सागर और गुजरात-उत्तर महाराष्ट्र के तटों पर ना जाने की चेतावनी दी है।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई समेत कुछ हिस्सों को चक्रवात शक्ति के दौरान भारी बारिश के लिए अलर्ट पर रखा गया था। हालांकि, मौसम विभाग ने रविवार को अपने पूर्वानुमान को काफी हद तक कम कर दिया। पहले की चेतावनियों के विपरीत विभाग ने कहा कि आने वाले दिनों में शहर में भारी या मध्यम बारिश की उम्मीद नहीं है। IMD ने कहा कि मुंबई में 8 अक्टूबर तक केवल हल्की, छिटपुट बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। 3 से 5 अक्टूबर के बीच उत्तरी महाराष्ट्र तट पर 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक की गति की संभावना है। चक्रवात की तीव्रता के आधार पर हवा की गति बढ़ सकती है। मराठवाड़ा और पूर्वी विदर्भ के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है।

अरब सागर से कम उठते हैं चक्रवात

हाल के वर्षों में अरब सागर में तौकते (2021) और बिपरजॉय (2023) जैसे तूफान आए। लेकिन अरब सागर में बंगाल की खाड़ी की तुलना में कम चक्रवात देखे गए हैं। चक्रवात का नाम शक्ति रखा गया है, जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों पर डब्ल्यूएमओ/ईएससीएपी पैनल की ओर से अपनाई गई परंपरा के अनुसार श्रीलंका की ओर से सुझाया गया है। चक्रवातों के नाम बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के आसपास के 13 देशों की ओर से सुझाए गए हैं।

“शराब के शौकीनों ने दिल्ली सरकार को किया मालामाल, राजस्व में 12 फीसदी की बढ़ोतरी”

0

दिल्ली में शराब के शौकीनों ने रेखा गुप्ता सरकार का गजब फायदा करा दिया। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि शराब की बिक्री में वृद्धि के साथ, दिल्ली सरकार ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में आबकारी राजस्व संग्रह में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, VAT सहित आबकारी राजस्व, अप्रैल-सितंबर 2024-25 के दौरान 3,731.79 करोड़ था। यह चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बढ़कर 4,192.86 करोड़ हो गया है।

आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 2025-26 की पहली छमाही का आबकारी राजस्व बढ़ने की संभावना है, क्योंकि VAT के आँकड़े केवल 16 सितंबर तक ही उपलब्ध थे। अधिकारी ने आगे कहा, “बिक्री में वृद्धि के कारण 2025-26 के लिए निर्धारित ₹6,000 करोड़ के आबकारी राजस्व लक्ष्य का आधा निशान पार कर लिया गया है। त्योहारी सीजन शुरू होने और दिवाली तथा नए साल के आसपास बिक्री में उछाल आने से उम्मीद है कि वार्षिक लक्ष्य को पार करने में मदद मिलेगी।”

क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2024-25 में संचयी मासिक आबकारी प्राप्तियां (VAT को छोड़कर) 279.81 करोड़ थीं। चालू वर्ष में यह 84.86 प्रतिशत बढ़कर 517.26 करोड़ हो गईं। VAT को छोड़कर राजस्व अप्रैल-सितंबर 2024-25 में 2,598.04 करोड़ था। चालू वर्ष में, यह 17 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 3,043.39 करोड़ हो गया। अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने त्योहारी सीजन के लिए समय पर ऑर्डर सुनिश्चित करने और स्टॉक तैयार रखने के लिए सरकारी निगमों द्वारा संचालित दुकानों को निर्देश जारी किए हैं।

शहर में 700 से अधिक खुदरा शराब की दुकानें हैं, जिनका संचालन दिल्ली सरकार के चार निगमों द्वारा किया जाता है। उन्होंने आगे बताया कि बजट 2025-26 में आबकारी राजस्व का लक्ष्य 7,000 करोड़ निर्धारित किया गया था, लेकिन बिक्री से संबंधित अनुमानों को देखते हुए बाद में इसे 6,000 करोड़ कर दिया गया था।

दिल्ली सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है, जो नई आबकारी नीति (New Excise Policy) तैयार कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार का लक्ष्य इस नई नीति के माध्यम से आबकारी राजस्व को बढ़ाना है, जिसे वह पारदर्शी, उपभोक्ता-हितैषी और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनाना चाहती है। यह समिति आने वाले महीनों में नीति का मसौदा पेश कर सकती है।

समिति में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई समिति की बैठकों में शराब निर्माताओं के साथ-साथ खुदरा विक्रेताओं सहित अन्य हितधारकों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की गई है, जिनमें शामिल हैं:

➤स्थिर कीमतें (Stagnant prices)

➤शराब पीने की कानूनी उम्र (Legal age of drinking)

➤खुदरा व्यापार में निजी खिलाड़ियों की भूमिका (Role of private players in retail trade) निर्धारण (Pricing) संबंधी मुद्दे एक सूत्र ने बताया कि दिल्ली में 2014 से आबकारी कर दर (excise tax rate) में कोई संशोधन नहीं किया गया है, और एमआरपी (MRP) को भी आखिरी बार तीन साल पहले अपडेट किया गया था। सूत्र ने कहा कि प्रति बोतल निश्चित मार्जिन सहित शराब का मूल्य निर्धारण कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर नीति का मसौदा तैयार करने के हिस्से के रूप में विचार किया जा रहा है।

सूत्रों ने आगे बताया कि दिल्ली में प्रति बोतल निश्चित मार्जिन रखने से सभी प्रकार की शराब एक ही श्रेणी में आ जाती है। इससे खुदरा विक्रेता सस्ती, कम लोकप्रिय ब्रांडों को स्टॉक करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। यह स्थिति ब्रांड पुशिंग को भी बढ़ावा देती है, और इसके कारण अधिक लोकप्रिय या महंगी शराब (high end liquor) की कमी हो जाती है।

“बूथ पर मोबाइल ले जा सकेंगे वोटर, 100 मीटर पर कैंडिडेट का सेंटर; बिहार चुनाव पर CEC का ऐलान”

0

बिहार के मतदाता अब मतदान केंद्र पर अपना मोबाइल ले जा सकेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि मतदान कक्ष के ठीक बाहर तक मतदाता मोबाइल ले जा सकते हैं। हर बूथ पर मोबाइल जमा कराने की सुविधा होगी।

मतदान कक्ष में प्रवेश करने से पहले उन्हें मोबाइल छोड़ देना होगा। वोट डालकर निकलने के बाद वे मोबाइल वापस ले लेंगे। पिछले साल ही यह व्यवस्था शुरू की गयी थी। बिहार के सभी 90 हजार बूथों पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रत्याशी अब मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी पर अपने स्तर पर सहायता केंद्र खोल सकते हैं। पहले इसे पोलिंग बूथ से दूर रखा जाता था। उन्होंने बताया कि अब राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी। बिहार चुनाव में 17 नवाचार किए जा रहे हैं।

सीईसी ने कहा कि अब कोई मोबाइल छोड़ना नहीं चाहता। वोटिंग की लाइन में खड़े मतदाता मोबाइल की जरुरत महसूस करते हैं। इसे देखते हुए मतदान केंद्र पर मोबाइल ले जाने की अनुमति दी जा रही है। मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने ईवीएम पर प्रत्याशियों की रंगीन तस्वीर लगाने का प्रावधान किया है।

ब्लैक एंड व्हाइट फोटो से पहचान में दिक्कत की शिकायत मिलने पर यह व्यवस्था की गयी है। प्रत्याशियों के क्रम संख्या को भी बोल्ड फॉन्ट में अंकित किया जाएगा ताकि बुजुर्ग मतदाताओं को सुविधा हो। मतदाताओं को दी जाने वाली पर्ची पर पोलिंग बूथ का नाम और पता भी बोल्ड फॉन्ट में दर्ज किया जाएगा।

वोटर कार्ड वितरण की हर चरण की समीक्षा की व्यवस्था की गई है। 15 दिनों में फोटो आईडी कार्ड वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। इस कार्य में लगे बीएलओ को भी आई कार्ड दिया जाएगा। सीईसी ने कहा कि किसी भी मतदान केंद्र पर 12 सौ से अधिक वोटर नहीं होंगे। पहले इसे 15 तक रखा जाता था। अब हर पोलिंग स्टेशन पर शत प्रतिशत वेबकास्टिंग की जाएगी।

बिहार में पहली बार बूथ लेवेल एजेंटों की ट्रेनिंग दिल्ली में कराई गई। बीएलओ और सुपरवाइज को प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस पदाधिकारियों को पहले जिला या राज्य स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता था। पहली बार दिल्ली में उनकी भी ट्रेनिंग हुई।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बिहार के मतदाताओं से चुनाव महापर्व को छठ और अन्य त्योहारों की तरह उत्सव के रूप में मनाने की अपील की। कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सभी मतदाता अपने दायित्व का निर्वहन करें और वोटिंग अवश्य करें। उन्होंने एसआईआर में आयोग का सहयोग करने के लिए बिहार वासियों को धन्यवाद दिया।

“दीपावली 2025: लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और तैयारी के टिप्स”

0

दीपावली 2025: लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और तैयारी के टिप्स;

Diwali 2025: इस वर्ष दीपावली का लक्ष्मी पूजन सोमवार, 20 अक्टूबर को आयोजित होगा। यह पूजा कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर की जाएगी। इस दिन संध्या के प्रादोष काल, जो कि 07:08 बजे से 08:18 बजे तक है, को सबसे शुभ माना गया है। लक्ष्मी पूजन केवल देवी लक्ष्मी की आराधना नहीं है, बल्कि यह समृद्धि, सुख और भाग्य की प्राप्ति का प्रतीक भी है। इस दिन भक्त गणेश जी और सरस्वती माता की भी पूजा करते हैं, ताकि उनके घर और जीवन में खुशहाली और सफलता बनी रहे।

लक्ष्मी पूजन की तिथि और शुभ मुहूर्त

पूजन की तिथि: सोमवार, 20 अक्टूबर 2025
प्रादोष काल: 05:46 PM – 08:18 PM
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: 07:08 PM – 08:18 PM (1 घंटे 11 मिनट)
वृषभ काल (सबसे स्थिर लग्न): 07:08 PM – 09:03 PM
अमावस्या तिथि: 20 अक्टूबर 03:44 PM से 21 अक्टूबर 05:54 PM तक

ज्योतिषी बताते हैं कि प्रादोष काल और वृषभ लग्न में लक्ष्मी पूजन करने से अधिक फल प्राप्त होता है।

शहरवार शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली: 07:08 PM – 08:18 PM
मुंबई: 07:41 PM – 08:41 PM
अहमदाबाद: 07:36 PM – 08:40 PM
पुणे: 07:38 PM – 08:37 PM
चेन्नई: 07:20 PM – 08:14 PM
बैंगलुरु: 07:31 PM – 08:25 PM
कोलकाता: 05:06 PM – 05:54 PM
हैदराबाद: 07:21 PM – 08:19 PM
जयपुर: 07:17 PM – 08:25 PM
चंडीगढ़: 07:06 PM – 08:19 PM
नोएडा/गुरुग्राम: 07:07 PM – 08:19 PM

लक्ष्मी पूजन की तैयारी घर और कार्यालय को गेंदे, आम के पत्ते, केले के पत्ते, रंगोली और दीपों से सजाएं।

प्रवेश द्वार पर मंगलिक कलश रखें, जिसमें जल, आम के पत्ते और लाल कपड़े में लिपटा नारियल हो।

लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियाँ लाल वस्त्र पर तथा नवग्रह की मूर्तियाँ सफेद वस्त्र पर स्थापित करें।

फूल, मिठाइयां, फल, सिक्के और खीले-बताशे भोग में चढ़ाएं।

लक्ष्मी पूजन विधि

पूजन स्थल को साफ करें और रंगोली तथा फूलों से सजाएं।
लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती की मूर्तियाँ उठे हुए मंच पर रखें।
घर के हर कोने में दीपक और घी का दीपक जलाएं।
देवी लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई और सिक्के अर्पित करें।
षोडशोपचार पूजा (16 प्रकार के भेंट) जैसे धूप, दीप, भोजन और प्रार्थना करें।
लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करें।
परिवार के साथ लक्ष्मी आरती करें।
पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद वितरित करें और आतिशबाजी करें।

लक्ष्मी पूजन का महत्व

यह दिन अंधकार पर प्रकाश और गरीबी पर समृद्धि की जीत का प्रतीक है।

भक्त धन, ज्ञान, फसल, पशु और दिव्य ऊर्जा सहित सभी प्रकार की संपत्ति की पूजा करते हैं।

व्यवसायी वर्ग में इसे चौपड़ा पूजन के रूप में भी मनाया जाता है।

स्थिर लग्न में पूजा करने से माता लक्ष्मी का वास घर में स्थायी रूप से होता है।

“डोनाल्ड ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार की उम्मीदें: क्या वह जीत पाएंगे?”

0

नोबेल पुरस्कारों की घोषणा 6 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। इस बार सबसे अधिक ध्यान 10 अक्टूबर को घोषित होने वाले नोबेल शांति पुरस्कार पर है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी दावेदारी को उजागर करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, उनके हाथ से यह पुरस्कार फिसल सकता है। हाल ही में, ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापित करने के लिए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को व्हाइट हाउस बुलाया था, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित है।

नॉमिनेशन की स्थिति’

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन की समय सीमा 31 जनवरी 2025 थी, जो ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के 11 दिन बाद थी। हालांकि, नेतन्याहू और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ जैसे नेताओं ने ट्रंप को बाद में नामित किया था, जिससे उनकी दावेदारी पर सवाल उठता है।

युद्ध रोकने के दावे’

ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध रोकने का दावा किया, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के अनुरोध पर ही कार्रवाई रोकी गई थी।

आर्मेनिया और अजरबैजान का संघर्ष’

आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संघर्ष फिर से भड़क गया है। ट्रंप ने दोनों नेताओं को शांति के लिए वाशिंगटन बुलाया, लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ।

कंबोडिया और थाईलैंड के बीच विवाद’

कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद में गोलीबारी हुई, लेकिन ट्रंप के दावों के विपरीत, सीजफायर आसियान की पहल पर हुआ।

ट्रंप के दावों की सच्चाई’

सर्बिया-कोसोवो, रवांडा और कांगो के बीच विवादों का समाधान नहीं हुआ है। मिस्र और इथियोपिया के बीच भी पानी के विवाद को लेकर तनाव बना हुआ है।

गाजा में स्थिति’

गाजा पट्टी में हमास ने इजरायल पर हमला किया, जिसमें कई इजरायली नागरिक मारे गए। ट्रंप का गाजा शांति योजना भी खतरे में है।

रूस-यूक्रेन युद्ध’

ट्रंप के प्रयासों के बावजूद, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध नहीं रुक सका। उन्होंने यूक्रेन को जमीन देने की सलाह दी, जो विवादास्पद थी।

घरेलू मोर्चे पर विफलता’

ट्रंप की घरेलू नीतियों ने उनकी दावेदारी को कमजोर किया है, जैसे कि अवैध अप्रवासियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना।

ट्रंप के विवादास्पद निर्णय’

ट्रंप ने कनाडा से ग्रीनलैंड मांगने, जलवायु परिवर्तन को नकारने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर हमले करने जैसे विवादास्पद निर्णय लिए हैं।

नोबेल पुरस्कार पर ट्रंप की टिप्पणी’

ट्रंप ने कहा कि अगर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, तो यह अमेरिका का अपमान होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके विभाजनकारी नीतियों के कारण उनकी संभावना कम है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति’

अमेरिका के चार पूर्व राष्ट्रपति नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। ट्रंप भी इसी तरह का सपना देख रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय’

विशेषज्ञों का कहना है कि नोबेल चयन समिति शांति प्रयासों की स्थिरता और वैश्विक संस्थाओं को मजबूत करने पर ध्यान देती है। ट्रंप का रिकॉर्ड इसके विपरीत है।

नोबेल पुरस्कारों की घोषणा का कार्यक्रम’

नोबेल पुरस्कारों की घोषणा 6 अक्टूबर से शुरू होगी, जिसमें मेडिसिन, फिजिक्स, केमिस्ट्री, साहित्य, शांति और आर्थिक विज्ञान शामिल हैं।

“जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री: साने ताकाइची का ऐतिहासिक उदय”

0

जापान ने अपने राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेते हुए सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की कमान एक महिला नेता को सौंप दी है।

पूर्व आंतरिक मामलों की मंत्री साने ताकाइची ने पार्टी चुनाव में जीत हासिल की है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ, 64 वर्षीय ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ चुकी हैं। उन्होंने कृषि मंत्री शिंजीरो कोइजुमी को कड़े मुकाबले में हराया और पूर्व प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के इस्तीफे के बाद पार्टी की बागडोर संभाली।

साने ताकाइची का प्रेरणादायक सफर’

साने ताकाइची का जीवन यात्रा प्रेरणादायक और अनोखी रही है। कॉलेज के दिनों में वे हेवी मेटल ड्रम बजाने और मोटरसाइकिल चलाने की शौकीन थीं, लेकिन अब वे जापान की सबसे सख्त नेताओं में से एक मानी जाती हैं। 1993 में नारा से सांसद के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने के बाद, उन्होंने आंतरिक मामलों, लैंगिक समानता और आर्थिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।

जापान की ‘आयरन लेडी’

ताकाइची को उनके स्पष्ट विचारों और सख्त रवैये के कारण ‘जापान की आयरन लेडी’ के नाम से जाना जाता है। वे ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को अपनी प्रेरणा मानती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे उनके राजनीतिक गुरु रहे हैं, जिनकी अबेनॉमिक्स नीतियों और सशक्त रक्षा नीति का वे समर्थन करती हैं।

सख्त प्रवासन और रक्षा नीति’

ताकाइची की जीत ऐसे समय में हुई है जब जापान में प्रवासन, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अस्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने जापान की रक्षा क्षमता बढ़ाने, परमाणु संलयन और साइबर सुरक्षा पर अनुसंधान को बढ़ावा देने, कड़े आप्रवासन कानून और अपराध नियंत्रण की वकालत की। वे जापान के शांतिवादी संविधान में संशोधन कर सेना को अधिक अधिकार देने की भी पक्षधर हैं।

ताकाइची की आर्थिक नीति और कार्य संस्कृति’

ताकाइची खुद को वर्कहोलिक मानती हैं और उनका मंत्र है ‘वर्क, वर्क, वर्क एंड वर्क।’ उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ की अवधारणा को नहीं मानतीं, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। उनकी आर्थिक योजना सरकारी खर्च बढ़ाकर विकास को गति देने की है, जिससे जापान वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का सामना कर सके।

ताकाइची के सामने चुनौतियां’

ताकाइची की लीडरशिप ऐसे समय में आई है जब एलडीपी घोटालों और महंगाई के चलते जनता के गुस्से का सामना कर रही है। उनकी कट्टर विचारधारा एलडीपी के गठबंधन सहयोगी कोमेटो पार्टी के साथ रिश्तों में खटास ला सकती है। इसके अलावा, चीन और कोरिया के साथ राजनयिक संबंध भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।

फिर भी, एलडीपी के भीतर उन्हें मजबूत समर्थन प्राप्त है और राष्ट्रवादी मतदाताओं में उनकी लोकप्रियता भी काफी है। उनकी जीत जापान में राजनीतिक विचारधारा के दक्षिणपंथी झुकाव की पुष्टि करती है और महिला नेतृत्व के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है।

“जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर लगाया धन के केंद्रीकरण का आरोप”

0

धन के असमान वितरण पर चिंता

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने हाल ही में एक रिपोर्ट साझा करते हुए मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ उद्योगपतियों के साथ सत्ता का गठजोड़ उन्हें और अधिक समृद्ध बना रहा है।

उनका मानना है कि प्रधानमंत्री की नीतियां केवल इन उद्योगपतियों के लाभ के लिए बनाई गई हैं। भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा, MSME क्षेत्र, अत्यधिक दबाव में है, जो न केवल घरेलू नीतियों का परिणाम है, बल्कि विदेश नीति की विफलताओं का भी नतीजा है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक समाचार कटिंग साझा की, जिसमें बताया गया है कि भारत के केवल 1687 लोगों के पास देश की आधी संपत्ति है। उन्होंने लिखा कि लगातार आ रही रिपोर्टें भारत में धन के केंद्रीकरण की गंभीरता को उजागर कर रही हैं। जबकि करोड़ों भारतीय अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, केवल 1687 लोग देश की आधी दौलत के मालिक हैं।

मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण धन का इतना बड़ा केंद्रीकरण देश में गंभीर आर्थिक असमानता को जन्म दे रहा है। यह असमानता सामाजिक असुरक्षा और असंतोष को बढ़ावा दे रही है। अन्य देशों में हाल के उदाहरण दर्शाते हैं कि ऐसी आर्थिक असमानता और कमजोर लोकतांत्रिक संस्थाएं राजनीतिक अराजकता का कारण बन सकती हैं। जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि भारत भी इसी दिशा में बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि सत्ता के गठजोड़ से कुछ उद्योगपति और अधिक समृद्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की नीतियां उनके उद्योगपति मित्रों के लाभ के लिए केंद्रित हैं। MSME क्षेत्र पर अभूतपूर्व दबाव है, जो घरेलू नीतियों और विदेश नीति की असफलताओं का परिणाम है। आम लोगों के लिए रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं, और महंगाई इतनी बढ़ गई है कि नौकरीपेशा लोगों की जेब में बचत की जगह कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश में कमी आ रही है, और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं कमजोर हो रही हैं।

मनरेगा जैसी सफल योजनाएं, जिन्होंने करोड़ों लोगों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की थी, अब वेतन संकट का सामना कर रही हैं। श्रमिकों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा है। धन का इतना केंद्रीकरण केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा पर भी हमला है। जब आर्थिक शक्ति कुछ हाथों में सिमट जाती है, तो राजनीतिक निर्णय भी उन्हीं के हित में होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है, जिससे करोड़ों नागरिक धीरे-धीरे लोकतंत्र और विकास की प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।

“नेपाल में मूसलधार बारिश से आई तबाही: 22 लोगों की मौत, राहत कार्य प्रभावित”

0

नेपाल में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है। रविवार को पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में भूस्खलन, बिजली गिरने और बाढ़ के कारण कम से कम 22 लोगों की जान चली गई है, जबकि 12 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सबसे अधिक नुकसान पूर्वी जिले में हुआ है, जहां कई गांव बारिश और भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं।

इलाम में भूस्खलन से भारी नुकसान इलाम में भूस्खलन से तबाही

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता बिनोद घिमिरे ने जानकारी दी कि इलाम जिले में भूस्खलन के कारण 18 लोगों की जान गई और 7 लोग लापता हैं। इलाम के सहायक प्रशासनिक अधिकारी भोलनाथ गुरागाईं ने बताया कि एक ही परिवार के छह सदस्य उस समय मारे गए जब रात में सोते समय उनका घर भूस्खलन की चपेट में आ गया।

राहत कार्यों में बाधा राहत कार्यों में बाधा बनी बारिश

बारिश के चलते प्रभावित गांवों में राहत और बचाव दलों की पहुंच में कठिनाई आ रही है। कई सड़कों पर भूस्खलन के कारण मार्ग बंद हो गए हैं या पूरी तरह बह गए हैं। गुरागाईं ने बताया कि चिकित्सा आपात स्थितियों के लिए केंद्र सरकार से हेलीकॉप्टरों की मांग की गई है।

बिजली गिरने और बाढ़ से हुई मौतें बिजली गिरने और बाढ़ से भी गई जानें

भूस्खलन के अलावा, विभिन्न घटनाओं में तीन लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई, जबकि दक्षिण नेपाल में एक व्यक्ति की जान बाढ़ के कारण गई। अब तक कुल 114 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

सड़कें बंद, उड़ानें रद्द हाईवे बंद, घरेलू उड़ानें भी ठप

नेपाल सरकार ने शनिवार से सोमवार तक पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की थी, जिसके चलते कई प्रमुख राजमार्गों को बंद कर दिया गया। शनिवार को भारी बारिश के कारण सभी घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गई थीं, हालांकि रविवार को कुछ उड़ानें फिर से शुरू की गईं।

त्योहार के बाद लौटने वाले लोगों की मुश्किलें त्योहार के बाद लौट रहे लोगों की बढ़ी मुश्किलें

यह आपदा तब आई जब लाखों लोग नेपाल के सबसे बड़े पर्व दशैं के बाद काठमांडू लौट रहे थे। त्योहार का मुख्य दिन गुरुवार को मनाया गया था, जब लोग अपने गांवों में परिवार के साथ त्योहार मनाने गए थे। रविवार को काठमांडू लौटते समय हाइवे पर भारी भीड़ और जाम देखा गया।

बाढ़ का असर काठमांडू में राजधानी काठमांडू में नदी किनारे के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आई, लेकिन किसी बड़े नुकसान या जानमाल की हानि की सूचना नहीं है। भारी बारिश के कारण सरकार ने सोमवार तक राष्ट्रीय छुट्टी घोषित कर दी है।

हर साल की तरह फिर से त्रासदी हर साल दोहराती है त्रासदी

पिछले साल भी इसी समय बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में 224 लोगों की मौत हुई थी और 158 लोग घायल हुए थे। इस साल की भारी बारिश ने फिर से वही संकट खड़ा कर दिया है।

“Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा पर क्‍या आसमान से बरसता है ‘अमृत’, चांदनी में रखी ‘खीर’ का इतना महत्‍व क्‍यों?”

0

Sharad Purnima Importance: नवरात्रि के साथ ही शुरू हुआ ‘उत्‍सवी माहौल’ चल रहा है. दशहरे के बाद दीवाली का इंतजार है, लेकिन इससे पहले भी कई महत्‍वपूर्ण तिथियां आ रही हैं.

इन्‍हीं में से एक है- शरद पूर्णिमा. हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है. इस साल 6 अक्टूबर को शारदीय पूर्णिमा है. अमावस्या या अन्य पर्वों से अलग, इसे विशेष रूप से चंद्रमा की पूजा और भक्ति के लिए जाना जाता है.

शरद पूर्णिमा को ‘कोजागरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है. इसका धार्मिक, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्व है. ‘कोजागरी’ का अर्थ है- ‘कौन जाग रहा है?’, क्योंकि इस रात मां लक्ष्मी अपने भक्तों के जागरण की परीक्षा लेती हैं.

क्‍या आसमान से बरसता है ‘अमृत’?

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे निकट होता है. 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा की चांदनी को ‘अमृतमयी’ माना जाता है. कहा जाता है कि जड़ी-बूटियों और औषधियों को इस रात चांदनी में रखने से उनकी औषधीय शक्ति चार गुना बढ़ जाती है. खास तौर पर आयुर्वेदाचार्य वर्ष भर इस रात का इंतजार करते हैं. वे जीवनदायिनी और रोगनाशक जड़ी-बूटियों को चांदनी में रखकर उनकी शक्ति बढ़ाते हैं.

इसके अलावा शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्‍मी के प्राकट्योत्‍सव के रूप में मनाया जाता है. ये भी एक वजह है कि शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्‍मी को प्रिय खीर का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाने से मां लक्ष्‍मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन खीर बनाकर देवी-देवताओं को अर्पित करना और चंद्रमा की कृपा प्राप्त करना एक प्राचीन परंपरा है.

खीर का इतना महत्‍व क्‍यों?

पद्म पुराण और स्कंद पुराण में शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और देवी-देवताओं को अर्पित करने का उल्लेख है. खीर को शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. इसे अर्पित करने से संपूर्ण परिवार में सुख-समृद्धि का संचार होता है. खीर में दूध और चावल के मिश्रण को अन्न और पोषण का प्रतीक माना गया है.

खीर दूध, चावल, केसर, काजू-बादाम, पिस्ता जैसी पौष्टिक चीजों से बनाई जाती है. ये सभी सामग्री हमारी सेहत के लिए वैसे भी लाभदायक ही हैं. दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन जैसे तत्व होते हैं. चावल में फोलिक एसिड, विटामिन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और आयरन जैसे तत्व होते हैं. इसी तरह केसर, काजू-बादाम और पिस्ता में भी हमारी सेहत के लिए फायदेमंद तत्व होते हैं. खीर पकने में काफी समय लगता है, तो इन सभी पौष्टिक चीजों के तत्व खीर में आ जाते हैं और इसके सेवन से स्वाद के साथ स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है.

खीर बनाना और अर्पित करना केवल खाना देने की क्रिया नहीं, बल्कि भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है. शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त सादगी और श्रद्धा से खीर बनाकर चंद्रमा या देवी को अर्पित करता है, उसे आध्यात्मिक शांति और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है.

“जंग के मैदान में दिखेगा प्राइवेट कंपनियों का दबदबा, रक्षा मंत्रालय ने किया ये बड़ा फैसला”

0

भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के तहत बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने मिसाइल, आर्टिलरी शेल, गोला-बारूद और अन्य हथियारों के विकास और निर्माण को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है.

यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना को गोला-बारूद की कमी का सामना न करना पड़े.

अब तक यह क्षेत्र पूरी तरह से सरकारी कंपनियों के नियंत्रण में था. लेकिन अब निजी कंपनियां भी इसमें भागीदारी कर सकेंगी. इस कदम को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन की दिशा में एक और बड़ा प्रयास माना जा रहा है.

अब बिना NOC के बनेगा गोला-बारूद यूनिट;

सरकार ने राजस्व खरीद नियमावली में संशोधन किया है. इसके तहत अब निजी कंपनियों को हथियार और गोला-बारूद निर्माण यूनिट लगाने के लिए सरकारी कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने की जरूरत नहीं होगी. इससे अब निजी कंपनियां 105 मिमी, 130 मिमी, 150 मिमी आर्टिलरी शेल, पिनाका मिसाइल, 1000 पाउंड बम, मोर्टार बम, हैंड ग्रेनेड और छोटे-मध्यम आकार की गोलियों का निर्माण कर सकेंगी.

मिसाइल निर्माण में भी निजी कंपनियों को मौका;

रक्षा मंत्रालय ने केवल गोला-बारूद ही नहीं, बल्कि मिसाइलों के विकास और एकीकरण के क्षेत्र को भी निजी कंपनियों के लिए खोल दिया है. मंत्रालय ने इस संबंध में DRDO को पत्र लिखकर अपनी मंशा जताई है. अब तक भारत डायनामिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ही DRDO के तहत मिसाइल और सरफेस टू एयर सिस्टम जैसे आकाश, अस्त्र, मिलन, कोंकुर और टॉरपीडो बनाते थे. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अनुभव किया गया कि भविष्य की लड़ाई लंबी दूरी की मिसाइलों और स्टैंड-ऑफ हथियारों से ही लड़ी जाएगी, इसलिए अब निजी कंपनियों की भागीदारी जरूरी हो गई है.

चीन से मिल रही पाकिस्तान को मिसाइल सप्लाई;

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने चीन से मिले एयर टू एयर और एयर टू सरफेस मिसाइलों का इस्तेमाल किया. भारत को इस बात की चिंता है कि पाकिस्तान को चीन से लगातार हथियार मिलते रहेंगे, जबकि भारत को अब आत्मनिर्भर बनना होगा क्योंकि रूस-यूक्रेन और इजरायल-गाजा युद्ध के चलते वैश्विक हथियारों की मांग पहले से कहीं ज्यादा है.

लड़ाइयों में मिसाइलों से होंगी तबाही;

विशेषज्ञों का मानना है कि अब युद्ध केवल मिसाइलों, स्टैंड-ऑफ हथियारों और एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लड़े जाएंगे. जैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई को भारत की S-400 प्रणाली ने पाकिस्तान के एक ELINT विमान को 314 किलोमीटर अंदर मार गिराया था. इससे साबित होता है कि अब फाइटर प्लेनों का युग खत्म हो रहा है.