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“Tata के साथ मिलकर पलट दी BSNL ने पूरी बाजी, डर और खौफ के माहौल में Jio, Airtel!”

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BSNL eSIM launch: भारत में मोबाइल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) और Tata Communications ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है. अब देशभर के करोड़ों यूजर्स को eSIM की सुविधा मिलेगी और वो भी बिना किसी फिजिकल सिम कार्ड के झंझट के.

क्या है BSNL की eSIM सर्विस और क्यों है ये खास?

BSNL की eSIM सर्विस अब पूरे भारत में उपलब्ध है. इस सेवा के तहत आपको कोई फिजिकल सिम नहीं लेना पड़ेगा, बल्कि एक QR कोड स्कैन करके मोबाइल नेटवर्क एक्टिवेट किया जा सकता है. इसका मतलब है – ज्यादा सुरक्षा, फ्लेक्सिबिलिटी, और कंवीनिएंस.

Tata Communications का क्या रोल है?

Tata Communications ने अपनी आधुनिक MOVE प्लेटफॉर्म के जरिए BSNL को eSIM सर्विस देने में टेक्नोलॉजी दी है. यह प्लेटफॉर्म GSMA द्वारा प्रमाणित है और पूरी तरह से डिजिटल है. इसके जरिए BSNL अब eSIM को पूरी तरह से डिजिटली मैनेज कर पाएगा, जिससे सेवाएं और भी फास्ट और सुरक्षित हो जाएंगी.

इससे यूजर्स को क्या फायदा होगा?

-बिना सिम कार्ड के सिर्फ QR कोड से मोबाइल सर्विस चालू.

-2G, 3G और 4G नेटवर्क का आसान एक्सेस.

-ड्यूल-सिम फोन में एक eSIM और एक फिजिकल सिम साथ में इस्तेमाल कर सकेंगे.

-विदेश यात्रा पर किसी भी लोकल ऑपरेटर से कनेक्ट होना होगा आसान.

-इस टेक्नोलॉजी से भारत को क्या मिलेगा?

Tata Communications और BSNL की यह पार्टनरशिप भारत को डिजिटल इंडिया की ओर एक और कदम आगे बढ़ाती है. इससे ना सिर्फ यूजर्स को फायदा मिलेगा, बल्कि एंटरप्राइज IoT के लिए भी यह सिस्टम भविष्य में स्केलेबल रहेगा.

अधिकारियों की प्रतिक्रिया Tata Communications के CEO A.S. लक्ष्मीनारायणन ने कहा, ‘BSNL के साथ यह साझेदारी भारत को भविष्य की कनेक्टिविटी देने में मदद करेगी. हम सुरक्षित और स्केलेबल eSIM टेक्नोलॉजी ला रहे हैं जो डिजिटल इंडिया को मजबूत बनाएगी.’

BSNL के चेयरमैन ए रॉबर्ट रवि ने कहा, ‘यह लॉन्च भारत की टेलिकॉम क्षमताओं को और मजबूत करेगा और मोबाइल सेवाओं में सुरक्षा व लचीलापन बढ़ाएगा.’

“Gandhi Jayanti 2025 Speech: गांधी जयंती पर कविताओं से सज्जित भाषण, तालियों से होगा आपका अभिवादन”

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती देश के साथ ही विदेशों में भी प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। इस वर्ष गांधी जी की 156वीं जयंती सेलिब्रेट की जा रही है।

हर साल गांधी जयंत पर स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालयों सहित सामाजिक संस्थानों में भाषण, कविताओं का मंचन किया जाता है और गांधी जी द्वारा देश के दिए गए योगदान को याद किया जाता है और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

अगर आप भी ऐसे ही किसी कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं और एक स्पीच तैयार करने की सोच रहे हैं तो यह पेज आपके लिए महत्वपूर्ण है। आप यहां से कविताओं इस सज्जित एक बेहतरीन भाषण तैयार कर सकते हैं।

Gandhi Jayanti Par Speech: गांधी जयंती पर स्पीच

इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को मेरा प्रेम भरा नमस्कार, जैसा कि सभी जानते हैं कि हम यहां एक ऐसे महापुरुष की जयंती के उपलक्ष्य में एकत्रित हुए हैं जिन्होंने हमारे देश को एक सूत्र में पिरोने के साथ ही देश की आजादी में अपने प्राणों की चिंता न करते हुए अपना सर्वस्व न्योछाबर कर दिया। इस महापुरुष को याद करते हुए मैं सुमित्रानन्द पंत द्वारा लिखित कविता सुनाना चाहता हूं.

तुम मांस-हीन, तुम रक्तहीन,
हे अस्थि-शेष! तुम अस्थिहीन,
तुम शुद्ध-बुद्ध आत्मा केवल,
हे चिर पुराण, हे चिर नवीन!

तुम पूर्ण इकाई जीवन की,
जिसमें असार भव-शून्य लीन,
आधार अमर, होगी जिस पर
भावी की संस्कृति समासीन।

जैसा की हम सभी जानते हैं गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है, यह दिन हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में पोरबंदर के गुजरात में हुआ था। गांधीजी ने हमें सिखाया कि सच्चाई और अहिंसा के रास्ते पर चलकर भी कई परिवर्तन लाये जा सकते हैं। बिना हथियार उठाये उन्होंने सत्याग्रह और शांतिपूर्ण आंदोलनों जैसे चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, दांडी यात्रा, और भारत छोड़ो आंदोलन का प्रतिनिधित्व किया।

गांधीजी का मानना था, “आप वो बदलाव बनिए, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।” उनकी यही सोच आज भी हमें प्ररेणा देती है कि हम अपने जीवन में सच्चाई, स्वच्छता और प्रेम को अपनाएं। उन्होंने छुआछूत, भेदभाव और अशिक्षा के विरुद्ध लम्बे समय तक संघर्ष किया और समाज में समानता का सपना देखा। गांधीजी ने ‘Simple living, high thinking’ को अपने जीवन का मंत्र बनाया और स्वदेशी, स्वावलंबन, और खुद पर विश्वास रखना सिखाया।

वर्तमान समय में दुनिया जब हिंसा और असहिष्णुता से जूझ रही है, तब गांधीजी की सोच और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र ने भी 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में घोषित किया है, ताकि गांधीजी के आदर्शों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिले।

वैसे तो गांधी जी के बारे में हमारे देश में बच्चे-बच्चे को मालूम है लेकिन पिछले कुछ समय से मीडिया में गांधी जी के बारे में दुष्प्रचार भी सामने आया है। सोशल मीडिया के चलते लोग गांधी जी का अपमान ही करने लगे हैं। ऐसे लोगों से मैं रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता से जवाब देना चाहूंगा-एक देश में बांध संकुचित करो न इसको, गांधी का कर्तव्य-क्षेत्र दिक नहीं, काल है।

गांधी हैं कल्पना जगत के अगले युग की, गांधी मानवता का अगला उद्विकास हैं।

वर्तमान परिदृश्य हमारे राष्ट्रपिता गांधी जी के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारें, सच बोलें, हिंसा से दूर रहें और देश व समाज की सेवा करें।आइए, इस गांधी जयंती पर हम संकल्प लें कि हम भी अपने राष्ट्रपिता के रास्ते पर चलकर देश और समाज को बेहतर बनाएंगे।

मैं यहां उपस्थित सभी लोगों से यही कहना चाहूंगा गांधी जी के इस विजन को हम आगे तक लेकर जाने का संकल्प लें। उनके इस विजन के लिए मैं कहना चाहूंगा-सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

अपने इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं। जय हिन्द, जय भारत।

“बिहार मतदाता सूची जारी होने पर बीजेपी का राहुल गांधी पर हमला, फाइनल लिस्ट पर कांग्रेस ने भी उठाए सवाल”

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बिहार में विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम मतदाता सूची जारी किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए एक भी शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं की। उन्होंने राहुल गांधी के ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए इसे ‘वोट चोरी’ का झूठा नैरेटिव बताया है।

मालवीय ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “निर्वाचन आयोग ने बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी कर अंतिम मतदाता सूची जारी की। यह ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस ने नाम जोड़ने या हटाने के लिए एक भी शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं की।”

उन्होंने राहुल गांधी की यात्रा को अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने और लोगों को गुमराह करने का प्रयास बताया।

‘वोट चोरी’ के दावे के बाद बीजेपी का पलटवार

बीजेपी नेता ने राहुल गांधी के उस आरोप को खारिज किया जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर मतदाता सूची में अनियमितताओं का दावा किया था।

मालवीय ने इसे ‘जॉर्ज सोरोस की किताब से निकली रणनीति’ बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की हार को छिपाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों के भरोसे को कमजोर करने की साजिश है। निर्वाचन आयोग ने भी राहुल के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

वहीं, बिहार कांग्रेस प्रमुख राजेश राम ने SIR प्रक्रिया को शुरू से ही धोखा बताया। उन्होंने कहा, “यह प्रक्रिया न तो जनता ने मांगी थी और न ही राजनीतिक दलों ने। फिर भी इसे इतनी लापरवाही और अपारदर्शिता के साथ किया गया। इसकी निष्पक्षता संदिग्ध है। हमारे कार्यकर्ता पूरे राज्य में यह जांच करेंगे कि कितने नाम हटाए या जोड़े गए। यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा।”

47 लाख मतदाताओं के नाम हटने पर सवाल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अंतिम मतदाता सूची जारी होने पर मतदाताओं, राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों का आभार जताया। अंतिम सूची में कुल 7.42 करोड़ मतदाता हैं, जबकि 24 जून तक यह संख्या 7.89 करोड़ थी। यानी, करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने इस पर सवाल उठाते हुए X पर लिखा, “बिहार की अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 47 लाख मतदाता कौन हैं? निर्वाचन आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इनमें से कितने अन्य राज्यों में चले गए, कितने मृत हैं और कितने फर्जी मतदाता थे। इस स्तर की पारदर्शिता जरूरी है ताकि निर्वाचन आयोग अपनी खोई विश्वसनीयता को वापस पा सके।”

“आर्थिक धोखाधड़ी और साइबर अपराध में आगे हैं ये शहर, NCRB की रिपोर्ट जारी”

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क्राइम की बात आते ही देश के टॉप शहरों का नाम सबसे ऊपर आता है। मगर, क्या आप जानते हैं कि चोरी, ठगी और लूट जैसे सबसे ज्यादा अपराध किस शहर में होते हैं? नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट में इसका खुलासा है, जिसे देखकर आपको भी झटका लग सकता है।

आर्थिक धोखाधड़ी की लिस्ट में मायानगर मुंबई सबसे टॉप पर है। जी हां, मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा आर्थिक धोखाधड़ी भी इसी शहर में होती हैं। NCRB के डेटा के अनुसार, मुंबई में 2023 में 6,476 आर्थिक धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

मुंबई में आर्थिक धोखाधड़ी के मामले

हालांकि, 2022 की तुलना में 2023 में मुंबई में आर्थिक धोखाधड़ी कम हुई है। 2023 में 484 अपराध कम दर्ज हुए हैं। वहीं, पुलिस ने 37.9 प्रतिशत मामलों में चार्जशीट दायर की है।

“1साल मुंबई में दर्ज हुए आर्थिक धोखाधड़ी

मुंबई के बाद सबसे ज्यादा आर्थिक धोखाधड़ी की सूची में हैदराबाद दूसरे नंबर पर है, जहां 5,728 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं, वित्तीय धोखाधड़ी के मामले भी महाराष्ट्र में बढ़े हैं।

वित्तीय धोखाधड़ी के मामले

NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 18,729 वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आए थे, जो 2023 में बढ़कर 19,803 हो गए। मगर, वित्तीय धोखाधड़ी में राजस्थान सबसे आगे है, जहां 27,675 मामले दर्ज हुए हैं।

साइबर अपराध

साइबर अपराध की बात करें तो 8,103 मामलों के साथ महाराष्ट्र चौथे स्थान पर है और 21,889 केस के साथ कर्नाटक सबसे ऊपर है। 2023 में सबसे अधिक साइबर अपराध बेंगलुरु (17,631) में हुए हैं। इसके बाद हैदराबाद (4,885) और मुंबई (4,131) का नाम मौजूद है।

“‘विजयादशमी के दिन 100 साल पहले संघ की स्थापना संयोग नहीं था’, RSS के शताब्दी समारोह में बोले पीएम मोदी”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में आरएसएस शताब्दी समारोह में पहुंचे हैं। पीएम मोदी ने इस मौके पर स्मारक टिकट और सिक्का भी जारी किया। इस दौरान उन्होंने कहा है कि आरएसएस से कई लोगों की जीवन बना है।

पीएम मोदी ने कहा, “संघ की 100 वर्ष की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में आज भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के जारी किए हैं। 100 रुपए के सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह है और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि है।”

महानवमी की देश के लोगों को बधाई

पीएम ने कहा, “ये हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने को मिल रहा है। मैं आज इस अवसर पर राष्ट्र सेवा को समर्पित कोटि-कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं, अभिनंदन करता हूं। संघ के संस्थापक, हम सभी के आदर्श परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

आज महानवमी है। आज देवी सिद्धिदात्री का दिन है। मैं सभी देशवासियों को नवरात्र की बधाई देता हूं। कल विजयादशमी का महापर्व है-अन्याय पर न्याय की जीत, असत्य पर सत्य की जीत, अंधकार पर प्रकाश की जीत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा, “विजयादशमी भारतीय संस्कृति के इस विचार और विश्वास का कालजयी उद्घोष है। ऐसे महान पर्व पर 100 वर्ष पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना ये कोई संयोग नहीं था। ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनरुत्थान था। जिसमें राष्ट्र चेतना, समय समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है।”

“‘इतिहास में ऐसा पहली बार’, पीएम मोदी ने बताया RSS पर जारी डाक टिकट और सिक्के में क्या है खास”

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी (RSS 100th Anniversary) समारोह की धूम पूरे देश में देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी RSS के 100 साल पूरे होने पर खास प्रकार का डाक टिकट और सिक्का जारी किया है।

यह सिक्का और टिकट काफी सूर्खियां बटोर रहा है। आजादी के बाद इतिहास में पहली बार संघ के लिए डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया है।

राजधानी दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में RSS के शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें पीएम मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने RSS को खास सौगात दी है।

RSS के 100 साल पर खास डाक टिकट

पीएम मोदी के द्वारा RSS के शताब्दी समारोह पर जारी डाक टिकट कई मायनों में खास है। इसपर RSS कार्यकर्ताओं की परेड करते हुए तस्वीर छपी है। यह तस्वीर 1963 परेड की है।

दरअसल 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान RSS ने अहम रोल निभाया था। ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने RSS से 26 जनवरी की परेड में हिस्सा लेने का अनुरोध किया था और 26 जनवरी 1963 को राजपथ (अब कर्तव्यपथ) पर RSS के कार्यकर्ताओं की ऐतिहासिक परेड देखने को मिली थी।

सिक्के पर भारत माता और RSS की झलक

RSS के 100 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मारक सिक्का भी जारी किया है। इस सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह है और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि है। यह स्मारक सिक्का शुद्ध चांदी का है, जिसकी कीमत 100 रुपये है।

इस खास सिक्के के आगे अशोक स्तंभ का चिह्न बना है। वहीं, सिक्के के पिछले हिस्से में भारत माता की पारंपरिक छवि देखी जा सकती है। इसके साथ RSS के कार्यकर्ताओं की छवि भी मौजूद है। इस सिक्के के ऊपर संघ का बोध वाक्य भी अंकित है- ‘राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम।

आज से 100 साल पहले 27 सितंबर 1925 को डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार ने RSS की नींव रखी थी। महाराष्ट्र के नागपुर में इस संगठन की स्थापना की गई थी, जिसकी शाखाएं अब पूरे देश में मौजूद हैं। वहीं, RSS से जुड़े लोगों को ‘संघ परिवार’ के नाम से जाना जाता है।

“मॉनसून विदा पर इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, क्या है वजह; इस बार कैसा रहा मौसम”

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IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को बताया है कि उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर भारत के अधिकांश भागों में अक्टूबर से दिसंबर के मॉनसून के बाद तैयार होने वाले मौसम के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।

चार महीने का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मौसम मंगलवार को समाप्त हो गया, जिसमें देश में सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। खास बात है कि 2001 के यह बाद यह 5वां साल है, जिस दौरान सबसे ज्यादा वर्षा दर्ज की गई है.

IMD महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अक्टूबर-दिसंबर की अवधि में अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से लेकर सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। उन्होंने कहा कि जून-सितंबर के दौरान हुई भरपूर बारिश के बाद, अक्टूबर में वर्षा सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक होने की उम्मीद है।

महापात्र ने कहा, ‘अक्टूबर में उत्तरी मैदानी इलाकों, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहने की उम्मीद है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और गुजरात के सौराष्ट्र एवं कच्छ क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा।’ खबर है कि मॉनसून की वापसी की लाइन वेरावल, भरूच, उज्जैन, झांसी और शाहजहांपुर से गुजर रही है।

भारत में इस मॉनसून के दौरान 868.6 मिलीमीटर की सामान्य बारिश की तुलना में 937.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो आठ प्रतिशत अधिक है। पूर्वी और उत्तरपूर्व भारत में 1089.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश 1367.3 मिलीमीटर से 20 प्रतिशत कम है। महापात्र ने बताया कि बिहार, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में मॉनसून के चार महीनों में से तीन महीनों में कम बारिश हुई।

उन्होंने कहा, ‘इस मॉनसून में पूर्वी और उत्तरपूर्व भारत में बारिश 1901 के बाद से दूसरी बार सबसे कम रही। इस क्षेत्र में मॉनसून के दौरान सबसे कम बारिश (1065.7 मिलीमीटर) 2013 में दर्ज की गई थी। अध्ययनों से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में वर्षा में कमी आई है।’

महापात्र ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत में 747.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य बारिश से 27.3 प्रतिशत अधिक है। महापात्र ने कहा कि यह 2001 के बाद से सबसे अधिक और 1901 के बाद से छठी सबसे अधिक बारिश है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के सभी जिलों में जून, अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई।

उन्होंने कहा, ‘हाल के वर्षों में उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा में वृद्धि हुई है और इसके कारणों का पता लगाने के लिए इसका अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है।’ पंजाब में दशकों की सबसे भीषण बाढ़ आई, जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की खबरें आईं, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए।

IMD ने अतिरिक्त बारिश का श्रेय सक्रिय मॉनसून को दिया, जिसे लगातार पश्चिमी विक्षोभों का समर्थन मिला, जिससे क्षेत्र में बारिश में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में 1125.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश से 15.1 प्रतिशत अधिक है, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में 9.9 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

भारत में जून में सामान्य से 8.9 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, जुलाई में 4.8 प्रतिशत, अगस्त में 5.2 प्रतिशत तथा सितम्बर में 15.3 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। मॉनसून 24 मई को केरल में पहुंचा, जो 2009 के बाद से इसका सबसे जल्दी आगमन था और 29 जून तक पूरे देश को कवर कर लिया।

IMD प्रमुख ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत से मॉनसून वापसी दो दिन पहले शुरू हो गई, लेकिन बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर नई निम्न-दबाव प्रणालियों के कारण मध्य, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में एक सप्ताह की देरी होने की उम्मीद है।

मॉनसून कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, जो लगभग 42 प्रतिशत आबादी का समर्थन करती है और सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान देती है। यह पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को भी भरता है।

“पहलगाम हमले के समय आप PM होते क्या करते? असदुद्दीन ओवैसी ने बताया”

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को करारा जवाब देने का सुनहरा अवसर था, लेकिन केंद्र सरकार ने कार्रवाई रोककर राष्ट्र की भावनाओं की अनदेखी की।

पुणे में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ओवैसी ने कहा, “एक भारतीय होने के नाते मैं कहना चाहता हूं कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को जवाब देने का मौका था। मैं हैरान हूं कि सरकार ने क्यों रोक दिया। पूरे देश का माहौल तैयार था, लेकिन कार्रवाई रोक दी गई। ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते।”

एक सवाल पर कि अगर वह प्रधानमंत्री होते तो क्या करते ओवैसी ने कहा कि उन्हें ऐसे काल्पनिक सवालों में दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं वास्तविकता पर ध्यान देता हूं और अपनी सीमाएं जानता हूँ। मेरा लक्ष्य सिर्फ प्रधानमंत्री या मंत्री बनना नहीं है।”

पाकिस्तान पर सख्त रुख की मांग

ओवैसी ने दावा किया कि पाकिस्तान की ओर से गुजरात से लेकर कश्मीर तक ड्रोन गतिविधियां देखी गईं, जिससे युद्ध जैसे हालात थे। उन्होंने कहा, “ऐसे समय सरकार को पीछे नहीं हटना चाहिए था। अब संसद में बैठकर पीओके हासिल करने की बात करते हैं।”

गौरतलब है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर को समाप्त नहीं बल्कि विराम दिया गया है। यह अभियान 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने जवाबी कार्रवाई में आतंकियों के ठिकानों और हवाई ठिकानों को निशाना बनाया था।

ओवैसी ने एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान पाकिस्तान को लेकर केंद्र की नीति की भी आलोचना की। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

“UN महासभा में पाकिस्तानी सियासत की एंट्री, शहबाज शरीफ के भाषण के दौरान लगे नारे; जांच शुरू”

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है। विजिटर्स गैलरी से राजनीतिक नारेबाजी को लेकर संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, यह नारा शरीफ के समर्थक ने लगाया था, जिससे यूएन के सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना 26 सितंबर को न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में हुई, जब शहबाज शरीफ अपने 25 मिनट के भाषण में वैश्विक चुनौतियों जैसे संघर्ष, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय मुद्दों पर बोल रहे थे। भाषण के बीच में गैलरी से एक व्यक्ति ने “शहबाज शरीफ जिंदाबाद” का नारा लगाया, जो पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के समर्थक के रूप में पहचाना गया। यह नारा इतना जोरदार था कि हॉल में मौजूद प्रतिनिधियों का ध्यान भटक गया।

यूएन सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी मिशन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और व्यक्ति को शांत करने में मदद की। हालांकि, नारा लगाने वाले व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया, लेकिन यूएन अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। एक वरिष्ठ यूएन अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यूएन महासभा जैसे संवेदनशील मंच पर कोई भी राजनीतिक गतिविधि अस्वीकार्य है। हम गैलरी में प्रवेश प्रक्रिया और सुरक्षा चूक की जांच कर रहे हैं।”

संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार, दर्शक दीर्घा में प्रवेश सख्त नियंत्रण के अधीन है और केवल किसी सदस्य देश के राजनयिक मिशन के माध्यम से प्राप्त पास के जरिए संभव है। अब संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि संबंधित व्यक्ति को प्रवेश पास कैसे प्राप्त हुआ और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति से जुड़े नारे महासभा हॉल में क्यों उठाए गए।

पाकिस्तानी मीडिया में वायरल हो रही इस घटना ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने इसे “पाकिस्तानी चुनावी रैली” बताकर मजाक उड़ाया, जबकि अन्य ने शरीफ सरकार की छवि पर सवाल उठाए। एक्स पर एक पोस्ट में लिखा गया, “शहबाज अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को यूएनजीए में नारे लगाने के लिए ले आए थे।” एक अन्य पोस्ट में कहा गया, “यह घटना यूएन की सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़ी करती है।”

यह पहली बार नहीं है जब यूएन महासभा में ऐसी घटना घटी हो। इतिहास में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक के कार्यकाल के दौरान विपक्षी नेताओं ने गैलरी से लोकतंत्र के समर्थन में नारे लगाए थे।

“क्या है सिंगापुर संधि, जो सुलझाएगी जुबिन गर्ग की मौत की गुत्थी; गुवाहाटी से दिल्ली तक क्यों हलचल”

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केंद्र सरकार ने असम के मशहूर गायक जुबिन गर्ग की मौत की जाँच में मदद के लिए भारत-सिंगापुर संधि को फिर से सक्रिय करने का फैसला किया है, ताकि इस मौत की गुत्थी सुलझाई जा सके। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि केंद्र ने दोनों देशों के बीच साल 2005 में हुए परस्पर कानूनी सहायता संधि (MLAT) के तहत गायक जुबिन गर्ग की मौत की जांच में दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश सिंगापुर से औपचारिक रूप से सहयोग का अनुरोध किया है।

असम सरकार ने सोमवार को गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था और सिंगापुर में गायक की मौत के संबंध में देश के साथ संधि के प्रावधानों की मदद लेने मांग की थी। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”गृह मंत्रालय ने अब हमारे प्रिय जुबिन के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के संबंध में असम पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी को लेकर परस्पर कानूनी सहायता संधि के तहत औपचारिक रूप से सहयोग मांगा है।”

असम के अधिकारी सिंगापुर पहुंचे

सरमा ने सोमवार को कहा था कि एमएलएटी के प्रावधानों का उपयोग होने पर सिंगापुर के अधिकारियों से पूर्ण सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा, मामले के विवरण तक पहुंच प्राप्त होगी और आरोपियों को वापस लाने एवं न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। असम सरकार ने गायक की मौत की जांच के लिए विशेष पुलिस महानिदेशक (DGP) एमपी गुप्ता के नेतृत्व में 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। सरमा ने कहा कि असम पुलिस के दो अधिकारी सिंगापुर में संबंधित अधिकारियों से सहायता लेने के लिए पहले ही सिंगापुर पहुंच गये थे।

52 वर्षीय गायक गर्ग की 19 सितंबर को सिंगापुर में एक नौका यात्रा के दौरान समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी। उन्हें वहां अगले दिन श्यामकानु महंत द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर भारत महोत्सव में प्रस्तुति देनी थी लेकिन उससे एक दिन पहले ही उनकी मौत हो गई थी। बुधवार को उनकी तेरहवीं है।

क्या है भारत-सिंगपुर संधि?

जब कभी किसी भारतीय नागरिक की या भारत से संबंधित कोई आपराधिक गतिविधि विदेशों में घटित होती है तो उस देश के साथ हुई कानूनी सहायता संधि के जरिए भारत वहां से साक्ष्यों को जुटाता है। इस संधि के तहत विदेशों में संदिग्ध मौत, धोखाधड़ी, साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग या मादक पदार्थों की तस्करी समेत किसी भी अपराध के मामले में जांच एजेंसियों के उस देश से सबूत जुटा सकती हैं। इस प्रक्रिया में जांच टीम गवाहों के बयान दर्ज कर सकती हैं, फॉरेंसिक रिपोर्ट इकट्ठी कर सकती हैं, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज जो जांच में सहायक हैं, उसे पाने के लिए इस सहायता संधि का इस्तेमाल करती हैं।

भारत और सिंगापुर के बीच साल 2005 में इन्हीं उद्देश्यों को हासिल करने के मकसद से एक पारस्परिक संधि हुई थी, जो दोनों देशों के बीच म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस इन क्रिमिनल मैटर्स (MLAT) का ढांचा तैयार करता है। जुबिन गर्ग की सिंगापुर में हुई संदिग्ध मौत के मामले में यह संधि प्रासंगिक हो गई है क्योंकि इसी के जरिए दोनों देशों के सक्षम प्राधिकार मामले की जांच कर सकेंगे और न्याया सुनिश्चित हो सकेगा।

संधि कैसे करेगा काम?

इस संधि की मदद से सिंगापुर गए असम के अधिकारी वहां से साक्ष्य जमा कर सकेंगे। वहां संबंधित लोगों का बयान दर्ज कर सकेंगे। इसके अलावा वहां सर्च या सीजर की कार्रवाई कर सकेंगे। किसी व्यक्ति की उपस्थिति का अनुरोध या हिरासत में व्यक्ति के ट्रांजिट की व्यवस्था कर सकेंगे। इतना ही नहीं किसी भी तरह के कानूनी दस्तावेज या रिकॉर्ड प्रोडक्शन का ऑर्डर भी हासिल कर सकेंगे। इस संधि के जरिए विदेशी जब्ती आदि के आदेश पर अमल में भी मदद मिलेगी।