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“‘लद्दाख की संस्कृति पर हमला कर रहे BJP-RSS’, सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर बोले राहुल गांधी”

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार (28 सितंबर, 2025) को आरोप लगाया कि लद्दाख के लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आरएसएस की ओर से हमला किया जा रहा है.

उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की भी वकालत की. गांधी की यह टिप्पणी लेह में हुई हिंसा के मद्देनजर आई है.

लेह में बुधवार को हुई हिंसा में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोग मारे गये थे और कई अन्य घायल हो गये. तब से, दंगों में संलिप्तता के आरोप में 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है. लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया है और राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया है.

लद्दाख में पांचवें दिन भी कर्फ्यू गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘लद्दाख के अद्भुत लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हमला कर रहे हैं.’ लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘लद्दाख के लोगों ने आवाज उठाई. भाजपा ने चार युवकों की जान लेकर और सोनम वांगचुक को जेल में डालकर जवाब दिया. हत्या बंद करो, हिंसा बंद करो, धमकी देना बंद करो.’ उन्होंने कहा, ‘लद्दाख को आवाज दीजिए, उन्हें छठी अनुसूची दीजिए.’

अधिकारियों ने बताया कि हिंसा प्रभावित लेह में रविवार को लगातार पांचवें दिन कर्फ्यू लगा रहा और उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता प्रतिबंधों में ढील देने के बारे में फैसला करने के लिए सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे. राज्य का दर्जा देने और लद्दाख में छठी अनुसूची के विस्तार के मुद्दे पर केंद्र के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) द्वारा आहूत बंद के दौरान बुधवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. शनिवार को लेह में कर्फ्यू में चार घंटे की ढील दी गई थी.

NSA के तहत सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शुक्रवार (26 सितंबर, 2025) को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है. यह कार्रवाई लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक संरक्षण देने की मांग पर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 90 घायल हुए थे.

पुलिस ने वांगचुक को लद्दाख से बाहर भेज दिया है, जबकि लद्दाख प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर लेह जिले के अधिकार क्षेत्र में सभी मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन काट दिए. तेजी से बदलते घटनाक्रम में वांगचुक की गिरफ्तारी अचानक हुई. उन्हें दोपहर ढाई बजे लेह में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करना था, लेकिन इससे पहले ही उन्हें गिरफ्त में ले लिया गया.

“UNESCO की लिस्ट में शामिल होगा छठ पर्व.  ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बोले PM मोदी”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार (28 सितंबर) मन की बात के 126वें वें एपिसोड के जरिए देश को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और त्योहारों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले, भारत सरकार के प्रयासों के कारण, कोलकाता की दुर्गा पूजा भी यूनेस्को की इस सूची का हिस्सा बनी. उन्होंने कहा कि अगर हम अपने सांस्कृतिक आयोजनों को ऐसी वैश्विक मान्यता देंगे, तो दुनिया भी इनके बारे में जानेगी.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं की बातें साझा कीं. इस मौके पर उन्होंने छठ पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक जीवंत प्रतीक बताया. पीएम ने कहा कि भारत सरकार छठ पर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल कराने के लिए काम कर रही है.

UNESCO की लिस्ट में शामिल होगा छठ पर्व उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने छठ महापर्व को UNESCO की Intangible Cultural Heritage List में शामिल कराने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. पीएम मोदी ने कहा कि छठ महापर्व केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य उपासना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण है. इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने से भारत की प्राचीन लोक परंपराओं को विश्व मंच पर सम्मान मिलेगा. उन्होंने कहा कि जब छठ पूजा यूनेस्को की सूची में शामिल हो जाएगी, तो दुनिया के हर कोने में लोग इसकी भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर पाएंगे.

हमारे त्योहार भारत की संस्कृति को जीवंत रखते हैं’ पीएम मोदी ने कहा कि हमारे त्योहार भारत की संस्कृति को जीवंत रखते हैं. छठ पूजा दिवाली के बाद आने वाला एक पवित्र त्योहार है. सूर्य देव को समर्पित यह महापर्व बेहद खास है. उन्होंने कहा कि इसमें हम डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और उनकी पूजा करते हैं. पीएम ने कहा कि छठ न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है, बल्कि इसकी भव्यता दुनिया भर में भी देखी जाती है. उन्होंने कहा कि आज यह एक वैश्विक त्योहार बन रहा है.

छठी मैया फाउंडेशन के चेयरमैन ने किया स्वागत इधर छठी मैया फाउंडेशन के चेयरमैन एवं सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट संदीप कुमार दुबे ने भारत सरकार की इस पहल का स्वागत किया. उन्होंने कहा ‘प्रधानमंत्री जी ने मन की बात में जिस गर्व के साथ छठ महापर्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का संकल्प साझा किया है, वह हम सभी के लिए गौरव का क्षण है. यह निर्णय न केवल बिहार एवं पूर्वांचल की आस्था का सम्मान है, बल्कि सूर्य उपासना और पर्यावरण संतुलन के संदेश को विश्व भर में पहुंचाने का अवसर है’.

देश की सांस्कृतिक धरोहर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि’ उन्होंने आगे कहा कि फाउंडेशन इस ऐतिहासिक कदम का व्यापक प्रचार-प्रसार करेगा और विश्व भर में भारतीय प्रवासी समुदाय को जोड़कर छठ महापर्व की महिमा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाएगा. वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि UNESCO की इस सूची में छठ महापर्व का नाम दर्ज होना भारत की सांस्कृतिक धरोहर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी.

“‘बिहार में NDA 160 से ज़्यादा सीटों के साथ बनाएगी सरकार’: अमित शाह के दावे पर सियासी हलचल, क्या घटा 65 सीटों का लक्ष्य?”

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने बिहार दौरे के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के लिए एक नया और चौंकाने वाला लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। शनिवार को अररिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने न सिर्फ बिहार में एनडीए की सरकार बनने का जोरदार दावा किया, बल्कि यह भी कहा कि गठबंधन ‘160 से अधिक सीटों’ के साथ सत्ता में वापसी करेगा।

उनके इस बयान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि एनडीए गठबंधन के स्थानीय नेता लगातार 225 से अधिक सीटें जीतने का दावा करते रहे हैं।

225 से 160: 65 सीटों की कटौती क्यों?

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का 160 प्लस सीटों का लक्ष्य निर्धारित करना कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। अब तक, बिहार एनडीए का शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय कार्यकर्ता 243 सदस्यीय विधानसभा में 225 सीटों का एक महत्वाकांक्षी ‘टारगेट’ लेकर चल रहे थे। शाह ने अचानक इस लक्ष्य में लगभग 65 सीटों की कटौती कर दी है।

सियासी गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमित शाह को ज़मीनी स्तर से ऐसा फीडबैक मिला है कि राज्य में 225 सीटों जैसा ‘लक्ष्य’ हासिल करना मुश्किल हो सकता है? या फिर एक कद्दावर रणनीतिकार के तौर पर शाह ने यह ‘यथार्थवादी’ (Realistic) लक्ष्य कार्यकर्ताओं में अनावश्यक दबाव डाले बिना ऊर्जा भरने के लिए तय किया है? हालांकि, 160 का आंकड़ा बिहार विधानसभा में स्पष्ट बहुमत (122) से काफी ज़्यादा है, जो एनडीए के लिए आरामदायक जीत सुनिश्चित कर सकता है।

कोसी क्षेत्र को बाढ़ मुक्ति का संकल्प अररिया में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने चुनावी दावे के साथ-साथ कोसी क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकल्प भी लिया। उन्होंने कहा, ‘यह चुनाव कोसी क्षेत्र को हमेशा के लिए बाढ़ से मुक्त करने का चुनाव है।’ उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने पर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

घुसपैठियों पर विपक्ष को घेरा अररिया के फारबिसगंज हवाई अड्डे पर आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में गृहमंत्री ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर विपक्ष और महागठबंधन पर करारा तंज कसा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद इस क्षेत्र से घुसपैठियों को ‘भगाना’ है।

उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बहाने दोनों ‘युवराज’ असल में घुसपैठियों को बचाने के लिए निकले थे। शाह ने सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठ को सुरक्षा और जनसांख्यिकी के लिए बड़ा खतरा बताते हुए मतदाताओं से एनडीए को भारी समर्थन देने की अपील की। 160 प्लस सीटों का दावा एनडीए के आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिन लक्ष्य में कमी ने राजनीतिक पंडितों को नए सिरे से चुनावी गणित लगाने पर मजबूर कर दिया है।

“Tamilnadu: करूर रैली भगदड़ में 39 की मौत, घायलों से मिलने पहुंचे सीएम स्टालिन”

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तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) (Tamilaga Vetri Kazhagam -TVK) के नेता और अभिनेता-राजनेता विजय (Actor-politician Vijay) द्वारा आज रात करूर में आयोजित एक राजनीतिक आउटरीच रैली (Political outreach rally) में हुई भगदड़ में कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई।

तमिलनाडु के डीजीपी ने यह आंकड़ा साझा किया। उन्होंने कहा कि विजय की पार्टी की रैली में उम्मीद से कहीं ज्यादा लोगों के आ जाने की वजह से यह हादसा हुआ है। इसमें अभी तक महिलाओं और बच्चों समेत 39 लोगों की मौत हो चुकी है। सूबे के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन घायलों से मिलने के लिए करूर के सरकारी अस्पताल पहुंच चुके हैं। यहां पर उन्होंने घायलों से बात की और मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम स्टालिन ने कहा कि इस दुर्घटना को लेकर जांच समिति गठित कर दी गई है। इसकी जो भी सच्चाई है, वह जल्दी ही सामने आ जाएगी। सीएम ने कहा कि एक बार सच्चाई सामने आए के बाद उसी के अनुसार ऐक्शन लिया जाएगा।

घटना की जानकारी मिलते ही गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन (Chief Minister Stalin) और राज्यपाल से बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री ने दोनों से घटना के बारे में पूछा और पूरी मदद का आश्वासन दिया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और मृतकों के परिवारों को दस लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। इसी दौरान विजय का भी घटना को लेकर पहला रिएक्शन सामने आया है। विजय ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनका दिल टूट गया है। घायलों का हाल जानने के लिए सरकार अस्पताल पहुंचे तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री अंबिल बच्चों के शव देखकर फूट-फूटकर रो पड़े।

रिपोर्टों के अनुसार, 50 से अधिक लोगों को करूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। रैली स्थल से कई एम्बुलेंस में और लोगों को सरकारी अस्पताल ले जाया जा रहा है, जिनमें से कई बेहोशी की हालत में हैं।

एक बयान में, स्टालिन ने कहा कि मृतकों में आठ बच्चे और 16 महिलाएं शामिल हैं। इस त्रासदी पर गहरा दुःख और पीड़ा व्यक्त करते हुए, स्टालिन ने कहा कि इस घटना में हुई बहुमूल्य जानें सभी लोगों की अंतरात्मा को झकझोर कर रख देंगी। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और अस्पताल प्रशासन को सभी घायलों को सर्वोत्तम उपचार प्रदान करने का निर्देश दिया।

यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त शुरू हुआ, जब तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने विजय एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उसी वक्त वहां पर कुछ बच्चे बेहोश होकर गिरने लगे। कार्यकर्ताओं ने स्थिति को भांपा और शोर मचाना शुरू कर दिया। इसके बाद विजय का ध्यान भी इस तरफ गया और उन्होंने भाषण रोकर लोगों तक पानी को बोतलें पहुंचाने की कोशिश की। एंम्बुलेंस के जरिए भी लोगों को अस्पताल पहुंचने की कोशिश की गई। स्थिति को और बिगड़ता देखते हुए विजय ने तुरंत ही अपना भाषण खत्म कर दिया।

अस्पताल के सामने भारी भीड़ तमिलनाडु के करूर में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सामने भारी भीड़ है, जहां टीवीके प्रमुख और अभिनेता विजय की रैली के दौरान हुए भगदड़ हादसे में मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के बाद उनके परिजनों को सौंपा जा रहा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के अनुसार, इस हादसे में अब तक 39 लोगों की जान जा चुकी है।

भगदड़ को लेकर केस दर्ज तमिलनाडु के करूर में भगदड़ पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एस. डेविडसन देवसिरवथम ने कहा, ‘हमें प्रारंभिक जांच करानी होगी। 39 लोगों की मौत हो चुकी है। एक मामला दर्ज किया गया है।’

घायलों से मिलने पहुंचे सीएम स्टालिन सूबे के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन घायलों से मिलने के लिए करूर के सरकारी अस्पताल पहुंच चुके हैं। यहां पर उन्होंने घायलों से बात की और मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सच्चाई सामने आएगी, उसी के अनुसार ऐक्शन लेंगे: सीएम स्टालिनघायलों से मिलने करूर हॉस्पिलट पहुंचे सीएम स्टालिन ने कहा कि मैं यहां पर बहुत दुख से साथ खड़ा हुआ हूं। घटना हुई है उसके बारे में बताना भी मुश्किल है। इसकी सच्चाई जांच में सामने आएगी। मैं कुछ भी राजनैतिक रूप से नहीं कहना चाहता। एक बार सच्चाई सामने आएगी, तो फिर उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

“सोनम वांगचुक की हिरासत पर राजनीतिक तकरार, AAP-कांग्रेस ने किया एक दूसरे पर जमकर पलटवार”

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सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (National Security Act) यानी एनएसए के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार को भी सियासत गर्म रही। आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस (Congress) के बीच तीखी तकरार देखने को मिली।

AAP ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया तो दूसरी ओर कांग्रेस ने भी तगड़ा पलटवार किया। गौर करने वाली बात यह कि दोनों ही पार्टियों ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर भाजपा का साथ देने का आरोप लगाया।

AAP ने एक्स पर लोकसभा में राहुल गांधी के प्रधानमंत्री मोदी के गले लगाने वाली एक तस्वीर साझा की। आप ने कहा कि देश के प्रख्यात समाजसेवी सोनम वांगचुक पर देशद्रोह का झूठा मुकदमा डाल कर नरेन्द्र मोदी की तानाशाही सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया है। इस पर देश के तथाकथित नेता विपक्ष राहुल गांधी ने चुप्पी साध ली है। इससे पहले राहुल गांधी ने भारत-पाकिस्तान मैच कराने के फैसले पर भी चुप्पी साध ली थी।

आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी पूछते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में हमने कितने विमान गंवाए। वह सोनम वांगचुक पर चुप क्यों हैं? क्या राहुल गांधी भाजपा के एजेंट हैं? इससे जगजाहिर हो चुका है कि राहुल गांधी केवल कैमरे की फुटेज हासिल करने के लिए चंद मुद्दों पर भाजपा का विरोध करते हैं। जिन मुद्दों पर पूरे देश में भाजपा के विरोध में लहर चल रही होती है उन पर राहुल गांधी गायब हो जाते हैं।

वहीं कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने पलटवार करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल जी, आपकी पार्टी खत्म होने की कगार पर है। आप जानते हैं क्यों? क्योंकि आपकी पार्टी की नींव परदे के पीछे से आरएसएस ने रखी थी। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर सत्ता तो हथिया ली थी लेकिन जिस ताकत ने उसको बनाया अब वही उसे निगल रही है।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने याद दिलाया कि जब अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल गए तो इसी कांग्रेस परिवार ने आपके लिए आवाज उठाई और आपको ‘INDIA’ गठबंधन का हिस्सा बनाया। इस बात को हमेशा याद रखा जाएगा कि आम आदमी पार्टी जिस भाजपा से पैदा हुई खुद उसी के हाथों में चली गई है।

“रूस ने UN के मंच से की भारत की तारीफ. बताया स्वाभिमानी, कहा- निर्णय लेने में भी सक्षम”

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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister Sergei Lavrov) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ((American President Donald Trump)) द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ (Tariff) के बावजूद रूस के साथ तेल व्यापार पर भारत के रुख का पुरजोर समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि भारत ऐसे मामलों पर स्वयं निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है। लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सराहना करते हुए भारत के “आत्म-सम्मान” की तारीफ की। लावरोव ने कहा कि जयशंकर के साथ अपनी नियमित बातचीत में वह कभी भी तेल और व्यापार का मुद्दा नहीं उठाते हैं, क्योंकि भारत इन फैसलों को खुद लेने में पूरी तरह सक्षम है।

जयशंकर के जवाब का समर्थन लावरोव ने जयशंकर के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका तेल बेचना चाहता है तो भारत अपनी शर्तों पर चर्चा करेगा, लेकिन रूस या अन्य देशों से भारत क्या खरीदता है, वह उसका अपना मामला है और इसका भारत-अमेरिका एजेंडे से कोई लेना-देना नहीं है। लावरोव ने इस प्रतिक्रिया को बहुत योग्य बताते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि भारत, तुर्की की तरह, आत्म-सम्मान रखता है।

पुतिन की भारत यात्रा की योजना  लावरोव ने पुष्टि की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल दिसंबर में भारत की यात्रा की योजना बना रहे हैं। उन्होंने भारत-रूस संबंधों की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों का द्विपक्षीय एजेंडा बहुत व्यापक है।

अमेरिकी टैरिफ के बीच रूस का समर्थन लावरोव का यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता चल रही है, और ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% शुल्क लगाया है। इस शुल्क में से 25% अतिरिक्त प्रतिबंध रूस के साथ तेल व्यापार के कारण लगाए गए हैं। हालांकि, भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा नीतियाँ बाज़ार में उपलब्ध सर्वोत्तम पेशकशों और प्रचलित वैश्विक स्थिति से निर्देशित होती हैं।

“रिटायरमेंट के बाद 5000 रुपये तक है पेंशन.. केन्द्र की इस योजना से दूर हुई बुढ़ापे की चिंता”

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आम आदमी (Common man) की सबसे बड़ी चिंता अपने बुढ़ापे को लेकर होती है। कामकाजी जीवन (Working Life) के दौरान तो किसी तरह खर्च पूरे हो जाते हैं लेकिन रिटायरमेंट (Retirement) बाद जब आय का कोई स्थायी साधन नहीं होता, तब आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।

ऐसे समय में सरकार की अटल पेंशन योजना (Atal Pension Scheme.-APY) काम आ सकती है।

अटल पेंशन योजना के तहत 18 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक जुड़ सकता है। योजना में निवेशक को हर महीने एक तय राशि जमा करनी होती है, जो उनकी उम्र और चुनी गई पेंशन राशि के हिसाब से निर्धारित होती है। निवेशक 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद इस योजना से ₹1000, ₹2000, ₹3000, ₹4000 या ₹5000 प्रति माह पेंशन प्राप्त कर सकता है। योजना की सबसे खास बात यह है कि यदि किसी निवेशक की मृत्यु हो जाती है तो उसके पति या पत्नी को उतनी ही पेंशन मिलती रहेगी। वहीं, पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद उनके नॉमिनी को वापस कर दी जाती है। अटल पेंशन योजना का एक और फायदा यह है कि इसमें सरकार की गारंटी होती है। यानी निवेशक को भविष्य में तय पेंशन निश्चित रूप से मिलेगी।

किस उम्र में निवेश करना सही? अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र में अटल पेंशन योजना से जुड़ता है और उसे भविष्य में ₹5000 की पेंशन चाहिए तो उसे हर महीने लगभग ₹210 का योगदान करना होगा। इसी तरह अगर 30 साल की उम्र में जुड़ता है तो योगदान राशि लगभग ₹577 होगी। 40 साल की उम्र में जुड़ने वाले को यह योगदान ₹1454 तक करना पड़ सकता है। मतलब जितनी जल्दी योजना से जुड़ेंगे, उतना ही कम निवेश करना होगा।

अटल पेंशन योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे- किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार, ठेला-रेहड़ी चलाने वाले लोग आदि। इस योजना से उन्हें बुढ़ापे में भी स्थायी आय का स्रोत मिल सकता है।

“टेक पेशेवरों के लिए कनाडा खोलेगा दरवाजे?, भारत के एच1बी वीजा टैलेंट पर कनाडाई पीएम की नजर.”

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कनाडा (Canada) के प्रधानमंत्री (PM) मार्क कार्नी (Mark Carney) ने अमेरिका में H-1B वीज़ा (H1B visa) शुल्क में बढ़ोतरी के बाद हाइली स्किल्ड वर्कर को आकर्षित करने के लिए एक नई योजना पेश करने की घोषणा की है.

उन्होंने कहा कि कनाडा इस उथल-पुथल को टैलेंट, इनोवेशन और देश के भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक अवसर के तौर पर देख रहा है. उनकी ये योजना आगामी हफ्तों में वाशिंगटन के वीजा प्रतिबंध के मुकाबले एक प्रतिस्पर्धी जवाब के रूप में सामने आएगी.

प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट रूप से कहा कि कनाडा इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में अब लोगों को आसानी से H-1B वीजा नहीं मिलेगा. ये स्किल्ड लोग हैं और कनाडा के लिए एक अवसर हैं और हम जल्द ही एक प्रस्ताव लाएंगे’ ‘कनाडा के लिए है मौका’

उन्होंने जोर देकर कहा कि ये केवल संख्याओं का मुद्दा नहीं, बल्कि टैलेंट, इनोवेशन और कनाडा की भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है. उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि उनकी ये योजना टेक पेशेवरों पर केंद्रित होगी, जिसमें अस्थायी वर्क परमिट और स्थायी निवास के विकल्प शामिल हो सकते हैं.

ट्रंप का वीजा टैरिफ दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने 19 सितंबर 2025 को एक कार्यकारी आदेश जारी कर एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने की घोषणा की जो 21 सितंबर से प्रभावी हो गया है. एच-1बी वीजा विज्ञान, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़ी विशेषज्ञ भूमिकाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इसका अधिकांश लाभ भारत (71%) और चीन (11.7%) के पेशेवरों को मिलता है.

सिलिकॉन वैली में हलचल वाशिंगटन के इस फैसले से सिलिकॉन वैली में चिंता बढ़ गई है, जहां कंपनियां चेतावनी दे रही हैं कि आसमान छूते शुल्क से विदेशी इंजीनियरों और डेवलपर्स की आपूर्ति श्रृंखला कमजोर हो जाएगी. अमेरिका लंबे वक्त से अपने तकनीकी कार्यबल में महत्वपूर्ण कमियों को भरने के लिए H-1B वीजा धारकों पर निर्भर रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सहयोगी लंबे समय से H-1B कार्यक्रम की आलोचना करते रहे हैं. उनका तर्क है कि ये अमेरिकी मजदूरी को कम करता है. हालांकि, ये कार्यक्रम अमेरिकी तकनीकी फर्मों द्वारा विज्ञान, इंजीनियरिंग और गणित की भूमिकाओं को भरने के लिए अत्यधिक इस्तेमाल किया जाता है. ये वीज़ा आम तौर पर तीन से छह साल की अवधि के लिए जारी किए जाते हैं.

भारतीयों ने ली कनाडा की नागरिकता  सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के बीच 32,000 टेक वर्कर कनाडा आए, जिनमें से लगभग आधे भारतीय थे. 2024 में 87,000 भारतीयों को कनाडाई नागरिकता मिली जो सबसे बड़ा समूह था. विशेषज्ञों का मानना है कि एच-1बी बदलाव से हजारों भारतीय पेशेवर कनाडा की ओर रुख कर सकते हैं जो उच्च वेतन और जीवन स्तर प्रदान करता है.

“जयशंकर के बयान का जवाब देकर फंस गया पाकिस्तान, UNGA में ऐसे खुली पोल”

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न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सेशन में विदेश मंत्री एस जयशंकर (Jaishankar) ने भारत (India) का प्रतिनिधित्व करते हुए पाकिस्तान की जमकर क्लास लगा दी.

उन्होंने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत का रुख दुनिया के सामने रखा, साथ ही आतंकवाद को पोषित करने में पाकिस्तान की भूमिका, पहलगाम हमला और टेरर फंडिंग को लेकर पड़ोसी देश की आलोचना की. जयशंकर ने बिना नाम लिए अपने संबोधन में कहा कि कुछ देशों के लिए आतंकवाद स्टेट पॉलिसी बन चुका है.

भारत पर बदनाम करने का लगाया आरोप विदेश मंत्री जयशंकर की तीखी आलोचना से पाकिस्तान तिलमिला गया है. अपने उत्तर देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने भारत पर आतंकवाद के बारे में दुर्भावनापूर्ण आरोपों के साथ पाकिस्तान को बदनाम करने की कोशिश का आरोप लगाया, भले ही जयशंकर ने आतंकवाद के संकट के बारे में बात करते हुए अपने संबोधन में उस देश का नाम नहीं लिया था.

पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने दावा किया कि भारत के आरोप झूठ दोहराने का जानबूझकर किया गया प्रयास है. पाकिस्तान के जवाब देने के अधिकार पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि यह बताता है कि एक पड़ोसी, जिसका नाम तक नहीं लिया गया था, ने फिर भी जवाब देने और सीमा पार आतंकवाद को लेकर अपनी लंबे वक्त से चली आ रही गतिविधि को स्वीकार करने का विकल्प चुना.

‘पाकिस्तान पूरी दुनिया के लिए खतरा’ संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में सेकेंड सेक्रेटरी रेन्ताला श्रीनिवास ने कहा, ‘पाकिस्तान की प्रतिष्ठा अपने आप में सब कुछ बयां करती है. आतंकवाद में उसकी छाप कई भौगोलिक क्षेत्रों में साफ़ दिखाई देती है. यह न सिर्फ अपने पड़ोसियों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ख़तरा है.’ श्रीनिवास ने भारत के जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए कहा, ‘कोई भी तर्क या झूठ कभी भी आतंकवादियों के अपराधों को छुपा नहीं सकता!’

पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने फिर जवाब देने के लिए मंच संभाला, लेकिन जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि बोल रहे थे, तब श्रीनिवास हॉल से बाहर चले गए. अपने संबोधन में जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उन देशों की साफ तौर पर निंदा करने का आग्रह किया था जो खुले तौर पर आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी मानकर चलते हैं, जहां बड़े पैमाने पर टेरर सेंटर चलाए जाते हैं और आतंकवादियों का सार्वजनिक रूप से महिमामंडन किया जाता है.

‘टेररिस्ट लिस्ट में भरे पड़े पाकिस्तानी’ उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग रोकने और प्रमुख आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत पर बल दिया और चेतावनी दी कि पूरे टेरर इकोसिस्टम पर लगातार दबाव डाला जाना चाहिए और जो लोग आतंकवाद के प्रायोजकों का समर्थन करते हैं, उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. पाकिस्तान का नाम लिए बिना जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में उसके नागरिक भरे पड़े हैं.

अप्रैल में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या को सीमा पार बर्बरता का उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया और इसके आयोजकों और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया.’

“‘मन की बात’ का 126वां एपिसोड, PM ने स्वदेशी अपनाने पर दिया जोर; लता मंगेशकर को दी श्रद्धांजलि”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के रेडियो कार्यक्रम (Radio Program) ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) का 126वां एपिसोड रविवार को जारी किया गया। इस दौरान उन्होंने श्रोताओं से कहा, ‘मन की बात में आप सभी से जुड़ना, आप सभी से सीखना, देश के लोगों की उपलब्धियों के बारे में जानना, वाकई मुझे बहुत सुखद अनुभव देता है।

एक दूसरे के साथ अपनी बातें साझा करते हुए, अपने मन की बात करते हुए, हमें पता ही नहीं चला, इस कार्यक्रम ने 125 एपिसोड पूरे कर लिए हैं।’

उन्होंने कहा, आज इस कार्यक्रम का 126वां एपिसोड है और आज के दिन के साथ कुछ विशेषताएं भी जुड़ी हैं। आज भारत की दो महान विभूतियों की जयंती है। मैं बात कर रहा हूं शहीद भगत सिंह और लता दीदी की। साथियों, अमर शहीद भगत सिंह हर भारतवासी, विशेषकर देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा पुंज हैं। निर्भीकता उनके स्वभाव में कूट-कूटकर भरी थी। देश के लिए फांसी के फंदे पर झूलने से पहले भगत सिंह जी ने अंग्रेजों को पत्र भी लिखा था। उन्होंने कहा था कि मैं चाहता हूं कि आप मेरे और मेरे साथियों से युद्धबंदियों से जैसा व्यवहार करें। इसलिए हमारी जान फांसी से नहीं, सीधा गोली मारकर ली जाए। यह उनके अदम्य साहस का प्रमाण है। भगत सिंह लोगों की पीड़ा के प्रति भी बहुत संवेदनशील थे और उनकी मदद में हमेशा आगे रहते थे। मैं शहीद भगत सिंह को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

उन्होंने आगे कहा, साथियों, आज लता मंगेशकर की भी जयंती है। भारतीय संस्कृति और संगीत में रुचि रखने वाला कोई भी उनके गीतों को सुनकर अभिभूत हुए बिना नहीं रह सकता। उनके गीतों में वह सबकुछ है, जो मानवीय संवेदनाओं को झकझोरता है। उन्होंने देशभक्ति के जो गीत गाए, उन गीतों ने लोगों को बहुत प्रेरित किया। भारत की संस्कृति से भी उनका गहरा जुड़ाव था। मैं लता दीदी के लिए हृदय से अपनी श्रद्धांजलि प्रकट करता हूं। साथियों, लता दीदी जिन महान विभूतियों से प्रेरित थीं, उनमें वीर सावरकर भी एक थे। जिन्हें वह तात्या कहती थीं। उन्होंने वीर सावरकर के कई गीतों को अपने सुरों में पिरोया। लता दीदी से मेरा स्नेह का जो बंधन था, वह हमेशा कायम रहा। वह मुझे बिना बोले हर साल राखी भेजा करती थीं। मुझे याद है मराठी सुगम संगीत की महान हस्ती सुधीर फड़के जी ने सबसे पहले मेरा परिचय लता दीदी से कराया था। मैंने लता दीदी को कहा कि मुझे आपके द्वारा गाया और सुधीर जी द्वारा संगीतबद्ध गीत ‘ज्योति कलश छलके’ बहुत पसंद है।

प्रधानमंत्री ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियों, नवरात्रि के इस समय में हम शक्ति की उपासना करते हैं। हम नारी शक्ति का उत्सव मनाते हैं। बिजनेस से लेकर स्पोर्ट्स तक, एजुकेशन से लेकर साइंस तक.. आप किसी भी क्षेत्र को लीजिए देश की बेटियां हर जगह अपना परचम लहरा रही हैं। आज वह ऐसी चुनौतियों को भी पार कर रही हैं, जिनकी कल्पना तक मुश्किल है। अगर मैं आपसे यह सवाल करूं कि क्या आप समंदर में लगातार आठ महीने रह सकते हैं। क्या आप समंदर में पतवार वाली नाव यानी हवा के वेग से आगे बढ़ने वाली नाव से पचास हजार किलोमीटर की यात्रा कर सकते हैं और वो भी तक जब समंदर में मौसम कभी भी बिगड़ जाता है। ऐसा करने से पहले आप हजार बार सोचेंगे। लेकिन भारतीय नौसेना की दो बहादुर अधिकारियों ने नाविका सागर परिक्रमा के दौरान ऐसा कर दिखाया है। उन्होंने दिखाया है कि साहस और दृढ़ संकल्प होता क्या है। आज मैं मन की बात के श्रोताओं को इन दो जांबाज अधिकारियों से मिलवाना चाहता हूं। एक हैं लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और दूसरी हैं लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा। इसके बाद प्रधानमंत्री दोनों अधिकारियों से फोन पर बात करते हुए सुनाई देते हैं।