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CG: नारायणपुर में नक्सली मुठभेड़ पर मिली कामयाबी पर छत्तीसगढ़ के सीएम साय ने भी दी जवानों को बधाई…

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अधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय समिति के दोनों सदस्य, राजू दादा और कोसा दादा, “तीन दशकों से अधिक समय से दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति में” सक्रिय थे और कई हिंसक घटनाओं के पीछे मास्टरमाइंड थे, जिसके कारण क्षेत्र में सुरक्षाकर्मियों की हत्या हुई और निर्दोष नागरिकों की जान गई।

केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को महाराष्ट्र – छत्तीसगढ़ सीमा पर नारायणपुर में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी जीत हासिल करने के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की।

अमित शाह ने लिखा, “लाल आतंक की रीढ़ तोड़ रहे हैं”

एक्स प्लेटफॉर्म पर अमित शाह ने कहा, “आज, हमारे सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक और बड़ी जीत हासिल की है। महाराष्ट्र – छत्तीसगढ़ सीमा पर नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में , हमारे बलों ने दो केंद्रीय समिति के सदस्य नक्सल नेताओं – कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ ​​कोसा, कट्टा रामचंद्र रेड्डी को मार गिराया। दोनों निष्प्रभावी नक्सली नेताओं के सिर पर 40-40 लाख रुपये का इनाम था। हमारे सुरक्षा बल व्यवस्थित रूप से नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर रहे हैं और लाल आतंक की रीढ़ तोड़ रहे हैं।”

सीएम साय ने भी दी जवानों को बधाई

नारायणपुर में नक्सली मुठभेड़ पर मिली कामयाबी पर छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने भी हर्ष व्यक्त किया है। मीडिया से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, “नक्सलियों के खिलाफ हमारे अभियानों में जवानों को लगातार सफलता मिल रही है। आज दो नक्सली मारे गए। मैं जवानों को सलाम करता हूँ।”

एक एके-47 और एक इंसास राइफल बरामद

गौरतलब है कि, सोमवार को महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में हुए एक मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के केंद्रीय समिति के दो सदस्य नक्सली नेता कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कादरी सत्यनारायण रेड्डी को मार गिराने में कामयाबी हासिल की है। बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने बताया कि इलाके में माओवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों की टीम संभावित ठिकाने के लिए रवाना किया गया था। आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि इलाके की तलाशी के दौरान दो माओवादियों के शव, एक एके-47 और एक इंसास राइफल तथा अन्य हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। बताया कि, प्रतिबंधित माओवादी संगठन के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई से संगठन को बड़ा झटका लगा है।

कौन थे मारे गए नक्सली लीडर?

मारे गए माओवादियों की पहचान केंद्रीय समिति के सदस्य राजू दादा उर्फ ​​कट्टा रामचंद्र रेड्डी (उम्र 63 वर्ष) और कोसा दादा उर्फ ​​कादरी सत्यनारायण रेड्डी (उम्र 67 वर्ष) के रूप में हुई है, जिन पर छत्तीसगढ़ राज्य में 40-40 लाख रुपये का इनाम था। दोनों तेलंगाना के करीमनगर के निवासी थे। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से एक बीजीएल लांचर, भारी मात्रा में विस्फोटक, माओवादी साहित्य और अन्य सामान भी बरामद किया गया है।

डीकेएसजेडसी में थे सक्रिय

अधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय समिति के दोनों सदस्य, राजू दादा और कोसा दादा, “तीन दशकों से अधिक समय से दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति में” सक्रिय थे और कई हिंसक घटनाओं के पीछे मास्टरमाइंड थे, जिसके कारण क्षेत्र में सुरक्षाकर्मियों की हत्या हुई और निर्दोष नागरिकों की जान गई।

 

CG: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद राजधानी रायपुर के बाजारों का दौरा करेंगे और GST 2.0 से जुड़े बदलावों और लाभों की जानकारी साझा करेंगे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद राजधानी रायपुर के बाजारों का दौरा करेंगे। वह न सिर्फ खुद सामान खरीदेंगे, बल्कि ग्राहकों और व्यापारियों से सीधे संवाद भी करेंगे और GST 2.0 से जुड़े बदलावों और लाभों की जानकारी साझा करेंगे।

नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर 2025 से देश में नए GST सुधार लागू हो चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में तैयार किया गया यह बदलाव भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अब तक के चार टैक्स स्लैब की जगह सिर्फ दो मुख्य दरें होंगी- 5% और 18%, जबकि शराब, तंबाकू, सट्टेबाजी और ऑनलाइन गेमिंग जैसे सिन गुड्स पर 40% का स्पेशल टैक्स स्लैब लागू किया गया है। वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से लागू नए GST 2.0 में दरों को लेकर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार अभियान शुरू कर रही है। बीजेपी ने इसे ‘GST उत्सव’ के रूप में मनाने का ऐलान किया है।

इसी कड़ी में, एक खास पहल के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद राजधानी रायपुर के बाजारों का दौरा करेंगे। वह न सिर्फ खुद सामान खरीदेंगे, बल्कि ग्राहकों और व्यापारियों से सीधे संवाद भी करेंगे और GST 2.0 से जुड़े बदलावों और लाभों की जानकारी साझा करेंगे।

भाजपा द्वारा इस बचत उत्सव का मकसद स्पष्ट है कि, जनता को यह दिखाना कि नई कर दरों से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और बाजार में खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय संभवतः राजधानी के प्रमुख मार्केट जैसे मालवीय रोड, पंडरी या गोलबाजार में से किसी एक का दौरा करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, वह खुद दुकानों पर पहुंचकर पूछेंगे कि उन्हें अब कीमतों में क्या अंतर महसूस हो रहा है।

बता दें कि, 22 सितंबर 2025 से भारत सरकार द्वारा लागू की गई नई जीएसटी दरें (GST 2.0) आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई हैं। सरकार ने जीएसटी स्लैब की संख्या घटाकर अब केवल दो प्रमुख स्लैब – 5% और 18% कर दी है, जबकि 12% और 28% स्लैब को हटा दिया गया है। इस बदलाव का सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा क्योंकि खाने-पीने की वस्तुएं, घरेलू सामान, दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स तक की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है।

अब दूध, पनीर, ब्रेड, पिज़्ज़ा, कॉपी, पेंसिल, और जीवन रक्षक दवाएं जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरत की वस्तुओं पर 0% जीएसटी लगेगा, वहीं साबुन, डायपर, बिस्कुट, कॉफी, शैम्पू, और घी जैसे उत्पादों पर दरें घटकर 5% रह गई हैं। एचयूएल, इमामी और प्रॉक्टर एंड गैंबल (P&G) जैसी एफएमसीजी कंपनियों ने उपभोक्ताओं को लाभ देने के लिए अपने प्रोडक्ट्स के दाम घटा दिए हैं।

मेडिकल खर्चों में राहत देते हुए अब ग्लूकोमीटर, डायग्नोस्टिक किट्स और ज़्यादातर दवाओं पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है। वहीं सीमेंट, टीवी, एसी, वॉशिंग मशीन, और फ्रिज पर भी टैक्स स्लैब 28% से घटकर 18% हो गया है, जिससे घर बनाने और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने की लागत कम हो गई है।

बड़ी राहत की बात यह है कि छोटी कारों पर अब 18% और बड़ी गाड़ियों पर 28% जीएसटी लगेगा, जबकि पहले इस पर अतिरिक्त सेस जुड़ता था। इससे SUV और MPV गाड़ियों की कीमतों में भी कटौती संभव है।

सैलून, योगा क्लास, स्पा और फिटनेस क्लब जैसी सेवाएं अब महंगी नहीं रहेंगी, क्योंकि इन पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% कर दी गई है। हालांकि, इन सेवाओं पर अब इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं मिलेगा।

GST 2.0:  वहीं दूसरी ओर कुछ उत्पादों जैसे कि सिगरेट, गुटखा, पान मसाला, कोल्ड ड्रिंक्स और 350cc से ऊपर की बाइक्स पर सरकार ने 40% का विशेष टैक्स स्लैब लागू किया है, जिससे इनकी कीमतें बढ़ेंगी।सरकार को उम्मीद है कि इस GST 2.0 रिफॉर्म से त्योहारी सीज़न के दौरान खपत में इजाफा, व्यापार में वृद्धि और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में सुधार आएगा। यह फैसला नवरात्रि के शुभारंभ के साथ लागू होकर आम जनता के लिए दोगुनी खुशी का कारण बना है।

”शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक विशेष मोबाइल एप्प से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल”

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छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, अनुशासित एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।

विभाग ने “विद्या समीक्षा केन्द्र” के अंतर्गत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक विशेष मोबाइल एप्प विकसित किया है। यह एप्प अब गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इसे प्रत्येक शिक्षक द्वारा डाउनलोड कर पंजीयन करना तथा प्रतिदिन अपनी उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।

इस व्यवस्था से शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड वास्तविक समय पर उपलब्ध रहेगा, जिससे विद्यालयीन अनुशासन और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों मंय उल्लेखनीय सुधार होगा।

माननीय मंत्री जी स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन गजेंद्र यादव ने दिनांक 04 सितम्बर 2025 को आयोजित समग्र शिक्षा की समीक्षा बैठक में इस एप्प को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए थे। 

हाल ही में मंत्रीजी गुजरात अध्ययन दौरे पर भी गए, जहाँ उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु अपनाई जा रही तकनीकी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। गुजरात मॉडल से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ में भी आधुनिक तकनीक आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने पर बल दिया।

छत्तीसगढ़ का यह एप्प गुजरात की व्यवस्था से भी अधिक उन्नत है, क्योंकि इसमें जियो-फेंसिंग फीचर शामिल किया गया है। इस तकनीक के माध्यम से शिक्षक तभी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं जब वे विद्यालय के निश्चित दायरे में उपस्थित हों।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि उपस्थिति केवल स्कूल परिसर के भीतर से ही दर्ज हो।

गुजरात में प्रयुक्त एप्प में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण वहाँ कई बार शिक्षकों द्वारा घर से ही उपस्थिति दर्ज करने जैसी गड़बड़ियाँ सामने आती थीं।

छत्तीसगढ़ शासन ने इस अनुभव से सीख लेते हुए इस एप्प को और अधिक सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनाया है।

इस संदर्भ में जिला शिक्षा अधिकारियों महासमुंद, बेमेतरा, दंतेवाड़ा, सूरजपुर एवं रायगढ़ को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और सभी विद्यालयों के शिक्षकगण को एप्प के प्रयोग हेतु आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करें।

यह नई व्यवस्था न केवल उपस्थिति प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति और विद्यालयीन गतिविधियों की निगरानी भी सरल और प्रभावी होगी। शासन का विश्वास है कि इस तकनीकी पहल से छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार होगा तथा अनुशासन और कार्यकुशलता और अधिक सुदृढ़ होगी।

CG: एग्री स्टेक पोर्टल में किसानों को पंजीयन में आ रही समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल…

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प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने एग्री स्टेक पोर्टल में किसानों को पंजीयन में आ रही समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

छत्तीसगढ़ के रायपुर से बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने एग्री स्टेक पोर्टल में किसानों को पंजीयन में आ रही समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पोर्टल में आधे-अधूरे रिकॉर्ड और तकनीकी खामियों के चलते किसानों को पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करने में मुश्किल हो रही है।

सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि पंजीयन की अनिवार्यता के कारण महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य में धान बेचने की सुविधा से किसान वंचित हो रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक सरकार पोर्टल की खामियों को पूरी तरह दूर नहीं करती, तब तक पुराने मैन्युअल पंजीयन की व्यवस्था को जारी रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि भुइया-ऐप में त्रुटिपूर्ण एंट्री, बटांकन, सीमांकन और नामांतरण के लंबित मामलों के कारण लगभग आधे किसान पोर्टल में पंजीयन नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही, सरकार के कृषि, सहकारिता और राजस्व विभागों के बीच समन्वय की कमी भी इस समस्या को और बढ़ा रही है।

कांग्रेस का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश के किसान सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

CG: ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश, नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाना चाहिए…

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छत्तीसगढ़ के रायुपर/बिलासपुर जिले में डीजे और साउंड बॉक्स से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें और सभी आवश्यक कार्रवाई करें। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

सोमवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य शासन के अधिवक्ता के उस सुझाव का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि त्योहारों और मूर्तियों के विसर्जन से संबंधित जुलूसों के दौरान विशिष्ट तिथियों पर सीसीटीवी फुटेज का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वे पूर्व में शासन द्वारा प्रस्तुत शपथ-पत्र का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें और आवश्यक कार्रवाई करें। शासन ने बताया है कि कोलाहल एक्ट के प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किया जा रहा है।

29 मई को आयोजित बैठक के दौरान विधि विभाग ने समिति के समक्ष अपनी राय प्रस्तुत की। बैठक के दौरान समिति ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड (सीसीबी) को कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में आवश्यक संशोधनों का मसौदा प्रस्तावित करने का निर्देश दिया।

इसके अनुसरण में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में प्रस्तावित संशोधनों का एक मसौदा तैयार किया और इसे सचिव, आवास एवं पर्यावरण को 13 अगस्त 2025 को भेजा। 14 अगस्त को आयोजित बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने सीईसीबी द्वारा प्रस्तुत कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में प्रस्तावित संशोधनों के मसौदे की समीक्षा की।

विभिन्न सदस्य प्रतिनिधियों ने बैठक में उपस्थित विभागों से अनुरोध किया गया कि वे अपने-अपने सचिवों से अंतिम अनुमोदन व टिप्पणियां प्राप्त करें और उसे अगली बैठक 15 सितंबर में प्रस्तुत करें, ताकि प्रस्तावित संशोधनों के दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा सके। 15 सितंबर को आयोजित बैठक के निष्कर्ष के अनुसार गृह विभाग के प्रतिनिधि ने बताया कि प्रस्तावित संशोधनों को अंतिम रूप देने अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

कार्रवाई करेगा। इस अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा यह जानकारी भी आई कि रायपुर जिले में त्योहारों के दौरान कुल 783 कैमरे लगाए गए हैं। यह तर्क दिया गया कि कोलाहल अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण विनियमन एवं नियंत्रण नियम, 2000 के तहत ध्वनि प्रदूषण उल्लंघनों की प्रभावी निगरानी की जा सकती है। कोर्ट ने इससे सहमति जताते हुए फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर की सुनवाई के दौरान बिलासपुर एसपी द्वारा एक शपथपत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के तहत ध्वनि प्रदूषण के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का उल्लेख था। 19 दिसंबर की सुनवाई के दौरान कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं ने कोर्ट से ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 में संशोधन के लिए निर्देश मांगे।

कोर्ट के आदेशानुसार, राज्य सरकार ने 27 जनवरी को गृह विभाग, विधि विभाग और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रतिनिधियों की 5 सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के सदस्य सचिव थे। समिति का कार्य कोलाहल अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 का तुलनात्मक विश्लेषण करना और कोलाहल अधिनियम, 1985 को बनाने उसमें उपयुक्त संशोधन सुझाना था।

 

CG: मुख्यमंत्री धमतरी जिले को 245 करोड़ 80 लाख की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण….

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छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय 23 सितम्बर को धमतरी जिले के ग्राम करेलीबड़ी में आयोजित राज्य स्तरीय महतारी सदन लोकार्पण कार्यक्रम में 51 महतारी सदनों को मातृशक्ति को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धमतरी जिले को 245 करोड़ 80 लाख की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे।

करेलीबड़ी धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र का गांव है। धमतरी जिले में महतारी सदन निर्माण योजना के अंतर्गत 4 महतारी सदनों का निर्माण क्रमशः ग्राम पंचायत भेंड्री, मेधा, खरेंगा और करेलीबड़ी में कराया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने और आपसी समरसता स्थापित करने, सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों में महतारी सदन का निर्माण कराया जा रहा है।

महतारी सदन निर्माण की इस योजना के तहत प्रथम चरण में वर्ष 2024-25 अंतर्गत कुल 202 महतारी सदन के लिए कुल 50 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। लगभग 2500 वर्गफीट में निर्मित होने वाले प्रत्येक महतारी सदन की लागत 24.70 लाख रूपए है, जिससे प्रत्येक महतारी सदन में एक हॉल, कमरा, किचन, स्टोर, दुकान, बाउड्रीवाल, प्रसाधन एवं बोरवेल का निर्माण कराया गया है।

दो लाख सदस्य महिलाएं वर्चुअली होंगी शामिल
महतारी सदन के लोकार्पण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य की महिला स्व-सहायता समूह की 2 लाख सदस्य महिलाएं वर्चुअल रूप से शामिल होंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत अभियान महिलाओं की क्षमता को देश के विकास के साथ जोड़ने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य में ग्राम पंचायतों महतारी सदन का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। इस योजना के तहत राज्य में द्वितीय चरण में वर्ष 2025-26 अंतर्गत कुल 166 महतारी सदन के लिए छत्तीसगढ़ शासन की ओर से 50 करोड़ रूपए की मंजूरी दी गई है। द्वितीय चरण में निर्मित होने वाले प्रत्येक महतारी सदन की लागत 30 लाख रुपए है।

“‘मुझे Before और After का बोर्ड देखकर अच्छा लगा’, GST 2.0 लागू होने पर PM मोदी का देश के नाम पत्र”

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केंद्र सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) के ढांचे में किया गया व्यापक बदलाव, जिसे ‘जीएसटी 2.0’ कहा जा रहा है, सोमवार को नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही लागू हो गया.

जीएसटी की नई व्यवस्था में एक आसान टैक्स स्ट्रक्चर लागू किया गया है, जिसमें रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं को 5%, लग्जरी (विलासिता की वस्तुएं) और सिन गुड्स (स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने वाली वस्तुएं) को क्रमश: 18% और 40% के टैक्स स्लैब में रखा गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक संदेश में इस रोलआउट को ‘जीएसटी बचत महोत्सव’ की शुरुआत बताया और इसे आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम बताया. पीएम मोदी ने कहा, ‘यह नवरात्रि विशेष है. जीएसटी बचत महोत्सव के साथ, स्वदेशी (मेड इन इंडिया) के मंत्र को और भी बल मिलेगा. आइए, हम सब मिलकर एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रयास करें.’

उन्होंने लिखा, ‘मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार. आपको और आपके परिवार को शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. मेरी प्रार्थना है, ये त्योहार आप सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए. इस वर्ष त्योहारों में हमें एक और उपहार मिल रहा है. आज से नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स लागू होने के साथ ही पूरे देश में GST बचत उत्सव की शुरुआत हो गई है. इन रिफॉर्म्स से किसान, महिला, युवा, गरीब, मध्यम वर्ग, व्यापारी, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, सभी को फायदा होगा.’

हेल्थ इंश्योरेंस पर GST शून्य कर दिया गया पीएम मोदी ने लिखा, ‘नए GST रिफॉर्म्स की विशेषता है कि अब मुख्य रूप से सिर्फ दो ही स्लैब रहेंगे. रोजमर्रा की जरूरी चीजें जैसे खाना, दवाइयां, साबुन, टूथपेस्ट और कई अन्य सामान अब या तो टैक्स-फ्री होंगे या 5% की सबसे कम स्लैब में आएंगे. घर बनाने, गाड़ी खरीदने, बाहर खाने या परिवार के साथ छुट्टियां मनाने जैसे सपनों को पूरा करना अब आसान होगा. हेल्थ इंश्योरेंस पर भी अब GST को शून्य कर दिया गया है. मुझे ये देखकर अच्छा लगा कि कई दुकानदार और व्यापारी पहले और अब (Before and After) के बोर्ड लगाकर, लोगों को बता रहे हैं कि कोई सामान कितना सस्ता हो गया है.’

हमारी सरकार का मंत्र है नागरिक देवो भव: प्रधानमंत्री ने देशवासियों के नाम अपने संदेश में कहा, ‘हमारी GST यात्रा 2017 में शुरू हुई थी. तब देश को अनेक तरह के टैक्स और टोल के जंजाल से मुक्ति मिली थी. इससे ग्राहकों और व्यापारियों, कारोबारियों को बहुत राहत मिली थी. अब ये नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म हमें और आगे ले जा रहे हैं. इसमें सिस्टम को और सरल बनाया गया है. इससे हमारे दुकानदार साथियों, लघु उद्योगों की सहूलियत और बढ़ेगी. नागरिक देवो भव हमारा मंत्र है. पिछले 11 वर्षों में हमारे प्रयासों से 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं.’

हमने ₹12 लाख तक की आय टैक्स फ्री की उन्होंने कहा कि देश में एक नियो मिडिल क्लास तैयार हुआ है. अब इसे और सशक्त बनाया जा रहा है. पीएम मोदी ने कहा, ‘हमने मध्यम वर्ग को भी मजबूत किया है. 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लिया जा रहा है. अगर इनकम टैक्स में छूट और नए GST ​रिफॉर्म्स को मिलाकर देखें, तो देशवासियों के सालाना लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए बचेंगे. देश ने 2047 तक विकसित भारत का संकल्प लिया है और इसे सिद्ध करने के लिए आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलना जरूरी है. नए GST रिफॉर्म्स से आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी तेज गति मिलेगी.’

आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी अपनाएं: PM प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक है कि हम स्वदेशी को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं. चाहे ब्रांड कोई भी हो, कंपनी कोई भी हो, अगर उसमें भारतीय श्रमिक और कारीगर की मेहनत लगी है, तो वो स्वदेशी है. जब भी आप अपने देश के कारीगरों, श्रमिकों और इंडस्ट्री के बनाए सामान को खरीदते हैं, तो आप कई परिवारों की रोजी-रोटी में मदद करते हैं और देश के युवाओं के लिए रोजगार पैदा करते हैं. मैं अपने दुकानदारों और व्यापारियों से भी अपील करता हूं कि वो स्वदेशी सामान ही बेचें. आइए गर्व से कहें, ये स्वदेशी है. आपके घर की बचत बढ़े, आपके सपने पूरे हों, आप अपने पसंद की चीजों के साथ त्योहारों की चमक बढ़ाएं… मेरी यही कामना है.’

“अमेरिका ने महंगा किया H-1B वीजा, भारतीय IT कंपनियों की कमाई पर खतरा, IT प्रोफेशनल पर भी पड़ेगा असर”

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अमेरिका ने दावा किया है कि H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम जानबूझकर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन और कम स्किल वाले विदेशी कर्मचारियों को काम पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया है बजाय इसके कि अमेरिकी कर्मचारियों की सहायता के लिए हो.

इसके चलते अमेरिका ने H-1B वीजा की फीस $1,00,000 तक बढ़ा दी है. भारत की IT कंपनियां जिनके अमेरिका में ऑफिस हैं (जैसे HCL America, Tech Mahindra Americas, TCS आदि), जो अमेरिका में काम करती हैं लेकिन कम लागत पर टैलेंट पाने के लिए बाहर से कर्मचारियों को लाती हैं, अब इस फैसले का सीधा असर महसूस करेंगी.

वीजा फीस बढ़ोतरी के असर का असर भारत के IT शेयरों पर भी दिखा. सोमवार को Nifty IT Index लगभग तीन प्रतिशत गिर गया. अमेरिका में Infosys, TCS, HCL, LTIMindtree, Wipro, Tech Mahindra और L&T Technology Services जैसी कंपनियों की H-1B वीजा में अग्रणी स्थिति है. FY24 में Infosys ने 8,137 जबकि TCS ने 7,566 H-1B वीजा हासिल किए.

एमके ग्लोबल की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा के अनुसार फाइनेंश‍ियल इयर (FY) 25 में भारत के IT/सॉफ्टवेयर नेट एक्सपोर्ट्स $160 बिलियन थे और हमने FY26 में नेट IT सर्विसेज एक्सपोर्ट्स में पांच प्रतिशत की वृद्धि मान ली थी, अगले पांच सालों के लिए सात प्रतिशत कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट अनुमानित थी. अगर H-1B वीजा से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं, GCC का विकास अलग रहता है और IT कंपनियां नए ग्रोथ मॉडल अपनाती हैं तो ये वृद्धि चार प्रतिशत से कम हो सकती है.

सिर्फ नुकसान नहीं है… कंपनियां अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को इसलिए काम पर रखती हैं क्योंकि उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक फायदा होता है. H-1B वीजा की इतनी अधिक कीमत सिर्फ कर्मचारियों को ही नुकसान नहीं पहुंचाएगी, बल्कि नियोक्ताओं को भी और अंततः उनकी प्रॉफिट और उन प्रॉफिट पर अमेरिका को मिलने वाले टैक्स पर भी असर होगा.

एमके ग्लोबल के अनुसार भारत और चीन सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की सबसे बड़ी और सस्ती टैलेंट पूल प्रदान करते हैं. जबकि चीन में लगभग 32.5 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियर उपलब्ध हैं, भारत में 30 लाख हैं. इसके मुकाबले अमेरिका में लगभग आधे, यानी 15 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. ब्राजील, कनाडा, यूके और जापान इस लिस्ट में इसके बाद आते हैं.

भारत सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को देखेगी और किसी समझौते तक पहुंचेगी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्किल्ड टैलेंट की मोबिलिटी और एक्सचेंज ने अमेरिका और भारत में तकनीकी विकास, इनोवेशन, आर्थिक विकास, प्रतिस्पर्धा और धन सृजन में बहुत योगदान दिया है. इसलिए नीति निर्धारक हाल के कदमों का आकलन करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच स्ट्रांग प‍ीपल टू पीपल संबंध भी शामिल हैं.

“जीएसटी से स्वदेशी तक… अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर दिलाया हर भारतवासी को संकल्प”

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मोदी सरकार ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर देश की सभी माताओं-बहनों को NEXT-Gen GST रिफॉर्म का उपहार दिया है.प्रधानमंत्री ने देशवासियों से GST रिफॉर्म का जो वादा किया था, वह आज से पूरे देश में लागू हो गया है.

इसमें 390 से अधिक वस्तुओं पर GST में ऐतिहासिक कमी की गई है. आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में NEXT-Gen GST रिफॉर्म की बड़ी भूमिका होगी. NEXT-Gen GST रिफॉर्म गरीबों, युवाओं, किसानों व महिलाओं की सेवा के दृढ़ संकल्प का प्रमाण है.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट्स में कहा कि मोदी सरकार का नवरात्रि के शुभ अवसर पर देश की सभी माताओं-बहनों को NEXT-Gen GST रिफॉर्म्स का उपहार! मोदी जी ने देशवासियों से GST रिफॉर्म का जो वादा किया था, वह आज से पूरे देश में लागू हो गया है. इस GST में 390 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स में ऐतिहासिक कमी की गई है. खाद्य एवं घरेलू सामान, होम बिल्डिंग व मैटेरियल्स, ऑटोमोबाइल, कृषि, सेवाएं, खिलौने, स्पोर्ट्स व हैंडीक्राफ्ट्स, शिक्षा, चिकित्सा व स्वास्थ्य, बीमा जैसे क्षेत्रों में GST में अभूतपूर्व राहत से देशवासियों के जीवन में खुशियां आएंगी और उनकी बचत भी बढ़ेगी.

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प अमित शाह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में NEXT Gen GST रिफॉर्म की बड़ी भूमिका होने वाली है. पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में स्वदेशी अपनाने का आह्वान करते हुए बताया कि कैसे NEXT Gen GST से आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी. कृषि, स्वास्थ्य, टेक्सटाइल्स, मैन-मेड फाइबर जैसे क्षेत्रों में GST घटाकर मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की पहल की गई है. आप भी अपने दैनिक उपयोग की वस्तुओं में स्वदेशी को अपनाकर हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाएं और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार NEXT-Gen GST रिफॉर्म्स के माध्यम से निरंतर मध्यम वर्ग की बचत में वृद्धि सुनिश्चित करते हुए उसकी आय बढ़ाने के लिए कई अवसर उपलब्ध करा रही है. उन्होंने कहा कि रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं, हेल्थकेयर उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और शैक्षिक वस्तुओं की GST दरों में भारी कमी से उनकी खर्च करने योग्य आय में वृद्धि होगी और वे और अधिक बचत करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

जीएसटी 2.0 के फायदे गिनाए अमित शाह ने कहा कि NEXT-Gen GST रिफॉर्म्स, गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं की सेवा के प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ संकल्प का प्रमाण हैं. उन्होंने कहा कि नए सुधार विभिन्न प्रकार की वस्तुओं पर GST दरों में भारी कटौती के साथ मध्य वर्ग के खर्चों को और कम करेंगे और भारत के विकास के पहिये को दुनिया का सबसे समृद्ध देश बनने की राह पर और भी तेज़ी से आगे बढ़ाएंगे.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अनेक डेयरी प्रोडक्ट्स पर GST शून्य करना हो, या साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट, हेयर ऑयल, शैम्पू जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं पर अभूतपूर्व कमी, NEXT-Gen GST रिफॉर्म हर वर्ग के घर में खुशियों की सौगात लेकर आया है. जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, सीनियर सिटिजन पॉलिसी, 33 लाइफ-सेविंग ड्रग्स और डायग्नोस्टिक किट्स पर जीरो GST से लेकर ऑक्सीजन, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स, मेडिकल, डेंटल व वेटनरी डिवाइसेज पर न्यूनतम GST तक, GST रिफॉर्म देशवासियों की सेविंग्स में ऐतिहासिक वृद्धि करेगा. कृषि उपकरणों और फर्टिलाइजर सेक्टर में GST कमी से किसान उत्साहित हैं और अब वाहन खरीददारी के लिए भी देशवासियों को ज़्यादा सोचना नहीं पड़ेगा. इस GST रिफॉर्म से आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा. आप भी दैनिक उपयोग की वस्तुओं में स्वदेशी को अपनाएं.

“भारत के किस राज्य के लोग` देते हैं सबसे ज्यादा गाली? टॉप-10 राज्यों की लिस्ट देखकर चौंक जाएंगे आप”

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भारत जैसे विविध भाषाओं और संस्कृतियों वाले देश में भाषा का व्यवहार एक गहरे सामाजिक संकेतक के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस राज्य के लोग बातचीत में सबसे ज्यादा गालियां देते हैं?

“गाली बंद घर अभियान” (Gaali Band Ghar Abhiyan) नामक एक सर्वे ने इस सवाल का जवाब खोजा है। यह अभियान 2014 से 2025 तक डॉ. सुनील जागलान द्वारा ‘सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन’ और महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के तहत चलाया गया था। इसमें शहरी और ग्रामीण भारत से 70,000 लोगों से बातचीत कर डेटा इकट्ठा किया गया-जिसमें शिक्षक, छात्र, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, ऑटो चालक और युवाओं को शामिल किया गया।

टॉप पर है दिल्ली सर्वे के मुताबिक दिल्ली पहले स्थान पर है, जहां 80% लोगों ने स्वीकार किया कि वे रोज़मर्रा की बातचीत में गालियों का इस्तेमाल करते हैं। खास बात यह है कि महिलाओं को लेकर की जाने वाली गालियां भी आम हैं। ट्रैफिक, भीड़, प्रतिस्पर्धा और तेज़ रफ्तार ज़िंदगी दिल्लीवासियों को चिड़चिड़ा बनाती है।

भारत के टॉप 10 राज्य जहां दी जाती हैं सबसे ज्यादा गालियां:

स्थान राज्य प्रतिशत (%)

1 दिल्ली 80% 2 पंजाब 78% 3 उत्तरप्रदेश 74% 4 बिहार 74% 5 राजस्थान 68% 6 हरियाणा 62% 7 महाराष्ट्र 58% 8 गुजरात 55% 9 मध्य प्रदेश 48% 10 उत्तराखंड45%  11 कश्मीर सबसे कम – सिर्फ 15%

क्यों देते हैं लोग गालियां? पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में गाली-गलौज कभी-कभी दोस्ती का मजाकिया हिस्सा होती है।

”यूपी और बिहार में राजनीतिक, पारिवारिक और सड़क झगड़ों में गालियां आम हैं।”

”राजस्थान में गांवों में गुस्से और मज़ाक में हल्की-फुल्की गालियां बोलना साधारण माना जाता है।”

”महाराष्ट्र और गुजरात में शहरी तनाव और यंग जनरेशन का स्लैंग कल्चर कारण है।”

”कश्मीर में धार्मिक, पारिवारिक और भावनात्मक शांति संस्कृति के कारण गालियों का इस्तेमाल न्यूनतम है।”

महिलाओं में भी मानी गालियों की आदत सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 30% महिला प्रतिभागियों ने भी गाली देने की बात मानी। यह इस बात को दर्शाता है कि गाली देना अब केवल मर्दाना व्यवहार नहीं रहा, बल्कि यह एक सामाजिक आदत बनती जा रही है।

इस अभियान का उद्देश्य सभ्य भाषा को बढ़ावा देना घर में बातचीत को ट्रैक करना बच्चों और युवाओं को शालीनता सिखाना “गाली देना” अब केवल झगड़े या गुस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में संवाद का हिस्सा बन चुका है। लेकिन ऐसे अभियान, जैसे “गाली बंद घर”, समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या यह भाषा आदत बन चुकी है या इसे बदला जा सकता है?

आप किस राज्य से हैं और क्या आपको भी अपने आसपास गालियों का बढ़ता चलन दिखता है? 11 साल में 70 हजार लोगों पर सर्वे सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के फाउंडर और महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉक्टर सुनील जागलान ने गाली बंद घर अभियान चलाया और उसी के तहत एक सर्वे किया. इस सर्वे में 11 साल में करीब 70 हजार लोगों को शामिल किया. इन लोगों में युवा, माता-पिता, टीचर, डॉक्टर, ऑटो ड्राइवर, स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट, पुलिसकर्मी, वकील, बिजनेसमैन, सफाईकर्मी, प्रोफेसर, पंचायत सदस्य शामिल थे.

2014 में शुरु किया था गाली बंद घर अभियान डॉक्टर सुनील जागलान कहते हैं कि गाली देना कोई संस्कार नहीं, बल्कि एक बीमारी है. जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है और वह फोन पर या आसपास गाली सुनता है तो वह उसके दिमाग में बैठ जाती है. फिर वही उसकी आदत में शुमार हो जाती है. उन्होंने गाली बंद घर अभियान की शुरुआत साल 2014 में की थी. इस अभियान के तहत पूरे देश की 60 हजार से ज्यादा जगहों पर गाली बंद घर के चार्ट भी लगाए जा चुके हैं. आज उनका ये अभियान विश्व स्तर पर चर्चित हो गया है.