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“दिल्ली के लाल किले से गायब हुआ सोने-हीरे से जड़ा कलश… करोड़ों में थी कीमत, जानिए कैसे हुई घटना”

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“दिल्ली के लाल किले से गायब हुआ सोने-हीरे से जड़ा कलश… करोड़ों में थी कीमत, जानिए कैसे हुई घटना”

दिल्ली के लाल किला परिसर में बुधवार को एक धार्मिक कार्यक्रम में सोने और हीरे से जड़ा कलश चोरी हो गया। इस कलश की कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। कारोबारी सुधीर जैन ने इस घटना की FIR दर्ज कराई है।

पुलिस ने संदिग्ध की पहचान कर ली है और उसे जल्द ही पकड़ने की उम्मीद है। यह घटना लाल किला परिसर के 15 अगस्त पार्क में हुई।

जैन धर्म से जुड़ा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह घटना तब हुई जब लाल किला परिसर में जैन धर्म से जुड़ा एक धार्मिक कार्यक्रम चल रहा था। यह कार्यक्रम 28 अगस्त से शुरू हुआ था और 9 सितंबर तक चलने वाला था। कार्यक्रम के लिए एक विशेष मंच बनाया गया है। मंच पर केवल धोती-कुर्ता पहने हुए और अनुमति प्राप्त लोगों को ही बैठने की अनुमति है। सुधीर जैन नाम के एक व्यापारी हर दिन अपने घर से पूजा के लिए कीमती कलश ला रहे थे। पुलिस के अनुसार, यह कलश 760 ग्राम सोने से बना था. इस पर 150 ग्राम हीरे, माणिक और पन्ना भी जड़े हुए थे।

सुधीर जैन लेकर आए थे इतना महंगा कलश पुलिस ने बताया कि सुधीर जैन मंगलवार को भी कलश लेकर आए थे। उन्होंने कलश को पूजा स्थल पर रख दिया। आसपास श्रद्धालु बैठ गए। तभी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। कार्यक्रम के आयोजक और अन्य लोग उनके स्वागत में व्यस्त हो गए। इसी दौरान मंच पर मौजूद लोगों का ध्यान कलश से हट गया।

ऐसे गायब हुआ कलश कुछ समय बाद जब दोबारा कलश की ओर देखा गया, तो वह गायब था। पहले लोगों को लगा कि शायद कलश कहीं दब गया होगा। लेकिन जब ओम बिड़ला के जाने के बाद तलाश शुरू हुई तो पता चला कि कलश चोरी हो गया है। कोतवाली के ACP शंकर बनर्जी के नेतृत्व में एक टीम ने जांच शुरू कर दी है। जांच में पता चला कि एक संदिग्ध शख्स कई दिनों से धोती-कुर्ता पहनकर आयोजन स्थल के आसपास घूम रहा था।

संदिग्ध व्यक्ति आयोजकों और श्रद्धालुओं से घुल-मिल गया। उसने मौके का फायदा उठाया और मंच तक पहुंच गया। जैसे ही ओम बिड़ला के आने की खबर से अफरा-तफरी मची, उसने कलश छिपा दिया। फिर भीड़ के कम होने से पहले ही वह वहां से गायब हो गया। पुलिस को घटनास्थल के कुछ CCTV फुटेज मिले हैं। इन फुटेज में संदिग्ध की हरकतें कैद हैं।

Today’s Top News Headlines: पढ़िए शुक्रवार की 10 बड़ी खबरें…

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Today’s Top News Headlines: पढ़िए शुक्रवार की 10 बड़ी खबरें…

अफगानिस्तान में 24 घंटे में तीसरी बार भूकंप आया. , देश के 47% मंत्रियों पर क्रिमिनल केस;

MUDA घोटाले में कर्नाटक के CM सिद्धारमैया को क्लीन चिट दी गई है. भारत ने UN में यूक्रेन जंग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात दोहराई. अमेरिका ने जापान पर 15% का बेसलाइन टैरिफ लगाया.

महिला अधिकारी पर भड़के अजित पवार, कहा- इतनी हिम्मत बढ़ गई, तुझ पर एक्शन लूंगा

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार और सोलापुर जिले के माढ़ा तालुका की डिप्टी एसपी अंजली कृष्णा के बीच हुई फोन पर बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें पवार डिप्टी एसपी को अवैध मुरुम उत्खनन रोकने के आदेश देते दिख रहे हैं. मामला 1 सितंबर का है. दरअसल, एक स्थानीय ने अपने फोन से अजित पवार को कॉल किया और अंजली कृष्णा से बात करवाई. इस पर अंजली कहती हैं कि मुझे कैसे पता कि आप अजित हैं, मेरे नंबर पर कॉल कीजिए. इस पर अजित ने कहा, ‘इतनी डेयरिंग, मैं तुझ पर एक्शन लूंगा.’ फिर अंजली ने कहा कि मैं आपकी बात समझ रही हूं. लेकिन आप मेरे नंबर पर कॉल कीजिए.

देश के लगभग आधे मंत्रियों पर आपराधिक मामले, तेलुगू देशम पार्टी के सबसे ज्यादा

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 643 मंत्रियों में से 302 यानी लगभग 47% मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें हत्या, किडनैपिंग और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे कई गंभीर आरोप शामिल हैं. वहीं 302 मंत्रियों में से 174 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं. तेलुगू देशम पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. पार्टी के 23 में से 22 मंत्रियों पर क्रिमिनल केस हैं.

हिमाचल-उत्तराखंड में 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ से सैकड़ों मौतें

मौसम विभाग ने हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. पंजाब के गुरदासपुर, फाजिलका, फिरोजपुर, पटियाला, अमृतसर में बाढ़ की वजह से हालात बेहद खराब है. इन जिलों में 9 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. उत्तराखंड के अल्मोड़ा, धौली गंगा, हरिद्वार, लैंसडाउन, मुक्तेश्वर, मसूरी, नैनीताल में बारिश का येलो अलर्ट है. हिमाचल में बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 355 लोगों की मौत हो चुकी है.

Muda Scam: कर्नाटक CM सिद्धारमैया और उनके परिवार को क्लीन चिट मिली

मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) भूमि आवंटन मामले में रिटायर्ड जज पीएन देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को क्लीन चिट दे दी है. आयोग ने पाया कि भूमि आवंटन मुआवजे के रूप में किया गया था और यह अवैध नहीं है. आयोग ने इस मामले में कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है.

प. बंगाल में पुरानी औद्योगिक जमीनें बनेंगी हाउसिंग और रियल एस्टेट, नई पॉलिसी मंजूर

पश्चिम बंगाल की कैबिनेट ने एक नई पॉलिसी को मंजूरी दी है. इसके तहत गैर-आवासीय प्लॉट को रियल एस्टेट और हाउसिंग में बदलने की अनुमति दी गई है. नई पॉलिसी शहरी विकास और नगरपालिका विभाग के अधीन आने वाले गैर-आवासीय प्लॉट पर लागू होगी. इससे जुड़ी गाइडलाइन कुछ ही हफ्तों में जारी होगी.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की UN में दो टूक, दोहराई PM मोदी की बात- ये युग युद्ध का नहीं

भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात दोहराई है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है. भारत इसके लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है. भारत यूक्रेन की स्थिति को लेकर चिंतित है. हमारा मानना है कि निर्दोष लोगों की जान नहीं जानी चाहिए. युद्ध के मैदान में इसका कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता.

अमेरिका-जापान में ट्रेड डील, ट्रंप ने 15% का बेसलाइन टैरिफ लगाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान के साथ व्यापार समझौते को मंजूरी दी है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिका में आने वाले लगभग सभी जापानी सामानों पर 15% का बेसलाइन टैरिफ लागू होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे जुड़े कार्यकारी आदेश पर साइन किया, जिसमें कहा गया है कि जापान ने अमेरिका में 550 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश पर सहमति जताई है.

अफगानिस्तान में 24 घंटे में तीसरी बार भूकंप का झटका, अब तक 2200 लोगों की मौत

अफगानिस्तान में शुक्रवार तड़के 3:16 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप आया. इससे पहले गुरुवार देर रात 5.8 और 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था. यानी अफगानिस्तान में 24 घंटे में भूकंप के 3 झटके आए हैं. उधर, 31 अगस्त की रात अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2200 से अधिक हो गई है.

यूक्रेन ने भारत पर जताया भरोसा, कहा- वॉर खत्म कराने में भारत अपना योगदान देगा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्रेई सिबिहा से बात की. इसके बाद जयशंकर ने कहा कि भारत, यूक्रेन संघर्ष को जल्द खत्म करने का समर्थन करता है. वहीं यूक्रेनी विदेश मंत्री सिबिहा ने कहा कि उन्होंने जयशंकर को वर्तमान स्थिति की जानकारी दी. हम युद्ध खत्म करने को लेकर भारत की सक्रिय भूमिका पर भरोसा करते हैं.

रॉस टेलर ने रिटायरमेंट वापस लिया, न्यूजीलैंड की बजाय अब समोआ से डेब्यू करेंगे

न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर रॉस टेलर ने अपना रिटायरमेंट वापस ले लिया है. वह अब न्यूजीलैंड की बजाय समोआ से खेलेंगे. टेलर ने सोशल मीडिया पर लिखा, मुझे ये ऐलान करते हुए गर्व हो रहा है कि मैं नीली जर्सी पहनकर क्रिकेट में समोआ का प्रतिनिधित्व करूंगा. टेलर अक्टूबर में ओमान में होने वाली वर्ल्ड कप एशिया-पैसिफिक क्वालिफाइंग सीरीज में समोआ से खेलेंगे.

शराब पर क्यों नहीं लगता GST, आखिर इसके पीछे क्या है वजह?

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शराब पर क्यों नहीं लगता GST, आखिर इसके पीछे क्या है वजह?

सरकार ने हाल ही में GST 2.0 सुधारों के तहत जीएसटी दरों में बदलाव किया है जो 22 सितंबर से लागू हो जाएंगे. GST रिफॉर्म के तहत सरकार ने सिगरेट जैसे तंबाकू उत्पादों पर भारी टैक्स लगाया है,

बता दें कि अब सिगरेट, गुटखा, पान मसाला और दूसरे तंबाकू से जुड़े उत्पादों पर GST का स्लैब बढ़ाकर 40% कर दिया है.

इससे पहले सिगरेट पर 28% GST लगता था. जबकि शराब पर GST बिल्कुल नहीं लगता. ऐसे में सवाल उठता है कि ये अंतर क्यों है और इसके पीछे क्या नियम काम करते हैं?

शराब पर GST क्यों नहीं लगता? शराब की बात करें तो यह GST के दायरे से पूरी तरह बाहर है. इसका मतलब ये है कि शराब पर GST नहीं लगता. इसे GST कानून से अलग रखा गया है. हर राज्य की अपनी अलग एक्साइज ड्यूटी और टैक्स व्यवस्था होती है जो शराब पर लागू होती है. इसका एक कारण ये भी है कि शराब पर टैक्स लगाने और उसके कलेक्शन का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है. अगर GST लागू होता तो राज्य सरकारों की टैक्स आय पर असर पड़ता, इसलिए इसे बाहर रखा गया है.

पेट्रोलियम उत्पाद भी GST से बाहर शराब के अलावा कुछ पेट्रोलियम उत्पाद जैसे पेट्रोल, डीजल, क्रूड ऑयल, प्राकृतिक गैस और विमानन ईंधन भी फिलहाल GST के बाहर हैं. इन उत्पादों पर भी अभी वैट और अन्य कर लागू होते हैं. पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारें वैट लगाती हैं, जिससे इन दोनों को बड़ा राजस्व प्राप्त होता है. यदि इन ईंधनों को GST के दायरे में लाया गया, तो कर दरें कम होने से सरकारों की आमदनी में भारी कमी हो सकती है. राज्य सरकारें अपने टैक्स स्ट्रक्चर पर नियंत्रण रखती हैं और पेट्रोल-डीजल पर वैट लगाकर न सिर्फ कीमतों को प्रभावित करती हैं, बल्कि बड़ा राजस्व भी कमाती हैं.

क्या इसका मतलब ये है कि शराब पर टैक्स कम है? नहीं, इसका मतलब ये नहीं है कि शराब पर टैक्स कम है. वास्तव में, कई राज्यों में शराब पर भारी एक्साइज ड्यूटी लगती है जो सरकार की आमदनी का बड़ा हिस्सा है. बस फर्क इतना है कि ये टैक्स GST के बजाय राज्य सरकार के पुराने नियमों के तहत लगाया जाता है.

GST काउंसिल: बीड़ी पर लगने वाले टैक्स को घटा दिया है, नए दर लागू होने के बाद सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पाद अब और महंगे हो जाएंगे…

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GST काउंसिल: बीड़ी पर लगने वाले टैक्स को घटा दिया है, नए दर लागू होने के बाद सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पाद अब और महंगे हो जाएंगे…

सरकार ने 3-4 सितंबर को हुई GST काउंसिल की बैठक में बीड़ी पर लगने वाले टैक्स को घटा दिया है. वहीं 22 सितंबर को नए दर लागू होने के बाद सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पाद अब और महंगे हो जाएंगे. माना जा रहा है कि ये फैसला अचानक नहीं लिया गया है, इसके पीछे एक बड़ा आर्थिक, सामाजिक और शायद राजनीतिक गणित भी है. सरकार ने बीड़ी पर GST 28% से घटाकर 18% कर दिया है. वहीं, बीड़ी में इस्तेमाल होने वाले तेंदू पत्तों पर GST 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है. सरकार का तर्क है कि बीड़ी उद्योग से 70 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हैं, ज्यादा टैक्स की वजह से इनका रोजगार खतरे में पड़ गया था. आइए जानते हैं देश में सबसे ज्यादा बीड़ी पत्ता उत्पादन करने वाले राज्य कौन से हैं…

ये हैं देश के सबसे बड़े बीड़ी उत्पादन वाले राज्य

मध्य प्रदेश:  मध्य प्रदेश तेंदू पत्ते का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. यहां से पूरे देश के करीब 25% तेंदू पत्ते आते हैं जो बीड़ी बनाने में सबसे जरूरी होते हैं.

छत्तीसगढ़: यह राज्य दूसरे नंबर पर है, और भारत के कुल तेंदू पत्ता उत्पादन में लगभग 20% योगदान देता है.

ओडिशा: ओडिशा का भी इस उद्योग में बड़ा हाथ है, जहां से 15-20% तेंदू पत्ते का उत्पादन होता है. यहां के पत्ते सबसे उत्तम माने जाते हैं.

महाराष्ट्र: यह राज्य भी बीड़ी उद्योग में अहम भूमिका निभाता है. खासकर पश्चिमी क्षेत्र में बीड़ी निर्माण से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है.

झारखंड: झारखंड भी उन राज्यों में शामिल है जहां तेंदू पत्ते की खेती और बीड़ी निर्माण बड़े पैमाने पर होता है.

आंध्र प्रदेश: यहां भी बीड़ी निर्माण एक पारंपरिक उद्योग है, जिसमें खासकर महिलाएं शामिल होती हैं.

राजस्थान: राजस्थान के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में तेंदू पत्ता प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिससे बीड़ी उद्योग यहां भी फल-फूल रहा है.

गुजरात: गुजरात राज्य भी बीड़ी पत्ता उत्पादन के लिए जाना जाता है.

तंबाकू उत्पादन के मामले में गुजरात सबसे आगे वहीं तंबाकू उत्पादन की बात करें तो इसमें गुजरात नंबर वन है. गुजरात के सौराष्ट्र में तंबाकू का सबसे अधिक उतपादन होता है. तंबाकू उत्पादन के मामले में गुजरात राज्य की हिस्सेदारी 41% है. वहीं दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश है जहां देश का 22% तंबाकू उत्पादन होता है. इसके अलावा कर्नाटक 16% हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर है.

बीड़ी: 7.2 करोड़ लोगों की आदत बीड़ी दिखने में भले ही सस्ती और साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे अरबों का कारोबार छिपा है. ये उद्योग देशभर में करीब 7.2 करोड़ लोगों की आदत बन चुका है और लगभग 70 लाख लोगों को रोजगार देता है. इस उद्योग की खासियत है कि यह ज्यादातर कुटीर या घरेलू स्तर पर चलता है. लाखों महिलाएं घर बैठे बीड़ी बनाती हैं लेकिन उन्हें बहुत कम मेहनताना मिलता है.

सिगरेट और गुटखा पर बढ़ा टैक्स जहां बीड़ी सस्ती हुई है, वहीं सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पादों पर GST को 28% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है. हालांकि यह नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी. बीड़ी भले ही सस्ती हो गई हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से यह सिगरेट से भी ज्यादा खतरनाक है. बीड़ी में न तो फिल्टर होता है, न ही इसकी पैकेजिंग पर कोई सख्त चेतावनी होती है.

CM विष्णु देव साय आज शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर मिशन अंतरिक्ष और प्रोजेक्ट जय विज्ञान अभियान का शुभारंभ किया…

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CM विष्णु देव साय आज शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर मिशन अंतरिक्ष और प्रोजेक्ट जय विज्ञान अभियान का शुभारंभ किया…

”मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री निवास परिसर से स्कूली बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरुकता के लिए मिशन अंतरिक्ष और प्रोजेक्ट जय विज्ञान अभियान का शुभारंभ किया.”

”इस दौरान जिला प्रशासन रायपुर और इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड फाउंडेशन तथा जिला प्रशासन रायपुर और विज्ञान भारती के मध्य दो महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिनसे बच्चों को अंतरिक्ष से जुड़े विषयों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी.”

”मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों की ओर से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनकी सफल अंतरिक्ष यात्रा के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और उनका अभिनंदन किया. उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को नमन करते हुए सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं.”

”मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन की इस विशेष पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन समझौतों का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा एवं उत्साह को बढ़ाना है.”

विज्ञान महज प्रयोगशाला नहीं, जीवन की सोच मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक सोच है.

”विज्ञान प्रश्न पूछने और तर्क करने की शक्ति और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता प्रदान करता है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोजेक्ट जय विज्ञान के अंतर्गत आयोजित कार्यशालाएं, विज्ञान प्रदर्शनियां, प्रतियोगिताएं और नवाचारी परियोजनाएं विद्यार्थियों को नई चीजें सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर देंगी.”

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, कलेक्टर रायपुर गौरव कुमार सिंह, प्रदेश भर से जुड़े स्कूली छात्र-छात्राएं और शिक्षकगण उपस्थित थे.

बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, भारत का फर्टिलिटी रेट में गिरावट, इन्फर्टिलिटी और आबादी की समस्या UNFPA की रिपोर्ट में स्पष्ट है…

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बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, भारत का फर्टिलिटी रेट में गिरावट, इन्फर्टिलिटी और आबादी की समस्या UNFPA की रिपोर्ट में स्पष्ट है…

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले चार दशकों में यह संख्या 1.7 अरब तक जाएगी और फिर धीरे-धीरे गिरावट शुरू होगी.

रिपोर्ट बताती है कि भारत का Total Fertility Rate (TFR) अब 1.9 पर आ गया है, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है. इसका अर्थ है कि हर पीढ़ी खुद को पूरी तरह से रिप्लेस नहीं कर पा रही. यह स्थिति भले जनसंख्या वृद्धि को कंट्रोल करती दिखे, लेकिन इसके पीछे छिपा बड़ा मुद्दा यह है कि लोग अपनी इच्छानुसार परिवार नहीं बना पा रहे. खासकर शहरी क्षेत्रों में आर्थिक दबाव, बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों ने बच्चों के जन्म को टालने या छोड़ने का चलन बढ़ा दिया है. यही वजह है कि बढ़ती आबादी के बावजूद इन्फर्टिलिटी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है.

भारत का फर्टिलिटी रेट में गिरावट के कई कारण हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी परिवार बड़े हैं, लेकिन शहरी इलाकों में स्थिति बिल्कुल अलग है. यहां एडुकेटेड मिडल-क्लास कपल्स आर्थिक असुरक्षा, नौकरी की अस्थिरता और महंगे मकानों के कारण बच्चा पैदा करने से हिचक रहे हैं. इसके अलावा देर से शादी करना, लगातार काम का दबाव और बढ़ती उम्र में मां पिता बनने की जिम्मेदारी लेना भी एक बड़ा कारण है.

लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें जैसे तनाव, अनहेल्दी खानपान, धूम्रपान और शराब का सेवन फर्टिलिटी रेट पर बुरा असर डाल रही हैं. वहीं, महिलाओं में पीसीओएस, थायरॉइड और हॉर्मोनल इम्बैलेंस जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे गर्भधारण की समस्या और कठिन होती जा रही है. इस तरह, आबादी बढ़ने के बावजूद समाज के कई लोग अपने इच्छित बच्चे प्राप्त करने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

इन्फर्टिलिटी और आबादी की समस्या UNFPA की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि समस्या केवल जनसंख्या कंट्रोल की नहीं है, बल्कि बच्चे पैदा करने से जुड़े फैसले की स्वतंत्रता की है. सर्वे के अनुसार, कई लोग अनचाही गर्भधारण का सामना करते हैं, जबकि उतने ही लोग अपनी इच्छित संतान नहीं पा पाते हैं. शहरी भारत में फर्टिलिटी रेट 1.6 से 1.7 तक गिर चुका है, जो गंभीर चिंता का विषय है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो साल 2100 तक भारत की आबादी करीब 93 करोड़ तक गिर सकती है. इससे सिर्फ आबादी से मिलने वाला आर्थिक फायदा ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और समाज पर भी असर पड़ेगा.

इन्फर्टिलिटी का एक कारण यह भी है कि आज के लाइफस्टाइल ने प्राकृतिक गर्भधारण प्रक्रिया पर दबाव बढ़ा दिया है. देर से गर्भधारण करने पर महिलाओं में समस्याएं बढ़ जाती हैं और पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी घटती है. इसके अलावा, आईवीएफ (IVF), आईयूआई (IUI) जैसे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट महंगे होने के कारण सभी के लिए उपलब्ध नहीं हैं. इसीलिए, यह चुनौती केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा मुद्दा बन चुकी है. अगर अभी से सही कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में आबादी का संतुलन गड़बड़ हो सकता है और गंभीर मुश्किलें आ सकती हैं.

समाधान और सुझाव फर्टिलिटी से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए आसान और सस्ती बनाना जरूरी है. युवाओं को स्वस्थ लाइफस्टाइल और अच्छी डाइट के प्रति जानकारी देना आवश्यक है. देर से विवाह या माता-पिता बनने पर विचार करते समय चिकित्सकीय सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है. महिलाओं में पीसीओएस, थायरॉइड और हॉर्मोनल समस्याओं की समय पर जांच और उपचार करना जरूरी है. समाज और सरकारी संस्थाओं को मिलकर फर्टिलिटी जागरूकता बढ़ाने के उपाय करने चाहिए.

“दिल्ली-NCR में 3 दिन बारिश का अलर्ट, 27 राज्यों में बरसेंगे बादल, पढ़ें अगले 6 दिन का IMD अपडेट”

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“दिल्ली-NCR में 3 दिन बारिश का अलर्ट, 27 राज्यों में बरसेंगे बादल, पढ़ें अगले 6 दिन का IMD अपडेट”

देशभर में मानसून के बादल जमकर बरस रहे हैं। पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में जहां मानसून की बारिश ने काफी तबाही मचाई और जान-माल का नुकसान कराया।

वहीं कई राज्यों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई। हालांकि मानसून की वापसी का समय नजदीक आ रहा है। आमतौर पर मानसून 15 सितंबरत तक वापस चला जाता है, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए इस बार मानसून की वापसी में देरी हो सकती है।

11 सितंबर तक ऐसा रहेगा मौसम भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 6 दिन यानी 11 सितंबर तक के लिए मौसम का अपडेट जारी कर दिया है।

IMD की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के 27 राज्यों में अगले 6 दिन मानसून की बारिश होने का पूर्वानुमान है। वहीं रीजनल वेदर फॉरकास्ट सेंटर (RWFC) की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 3 दिन गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम? रीजनल वेदर फॉरकास्ट सेंटर (RWFC) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पिछले कई दिन से आए दिन हवाएं चलने के साथ बारिश हो रही है, जिससे मौसम में ठंडक बनी हुई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली हुई है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 11 सितंबर तक मौसम ऐसा रही रहेगा। 6-7 और 9 सितंबर को गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। वहीं 8-10 और 11 सितंबर को हल्के बादल छाए रहेंगे।

कैसी हैं ताजा मौसमी परिस्थतियां? IMD की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे पूर्वी राजस्थान पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जो 7 सितंबर की सुबह तक दक्षिण राजस्थान और उससे सटे उत्तरी गुजरात पर चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र में बदल जाएगा। उत्तर-पूर्व दिशा में अरब सागर और उससे सटे गुजरात तट पर ऊपरी हवाओं का साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हवाओं में एक गर्त के रूप में समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर ऊपर एक्टिव है।

हरियाणा-पंजाब और राजस्थान में ऐसा रहेगा मौसम IMD की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर पश्चिम भारत में अगले 6 दिन अलग-अलग जगहों पर बारिश हो सकती है।

6-7 और 8 सितंबर को गुजरात के सौराष्ट्र एवं कच्छ में अलग-अलग जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश होने का अनुमान है। 6 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में, 7 सितंबर को दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में बहुत ज्यादा भारी बारिश हो सकती है। 6 और 8 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान में, 6 और 7 सितंबर को उत्तराखंड में, 8 और ​​9 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में, 8 से 10 सितंबर के बीच हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में, 10 सितंबर को पंजाब में, 10 और 11 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में, 7 और 8 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में, 7 सितंबर को कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र में बारिश हो सकती है।

बिहार और मध्य प्रदेश में ऐसा रहेगा मौसम पूर्वी और मध्य भारत में भी अगले 6 दिन अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

6 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में, अगले 6 दिन उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 8 से 10 सितंबर के बीच बिहार में, 9 और 10 सितंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में, 10 और 11 सितंबर को छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वोत्तर भारत में अगले 6 दिन अलग-अलग जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान है।

7-10 और 11 सितंबर को असम और मेघालय में, 7 सितंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में, 7 से 9 सितंबर के बीच अरुणाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है।

दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में अगले 5 दिन कुछ जगहों पर गरज और चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

6 सितंबर को तमिलनाडु में, 8-9 और 10 सितंबर को केरल और माहे में बारिश हो सकती है। वहीं अगले 5 दिन तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सतही हवाएं चलने की संभावना है।

शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत…

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शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत…

दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट से दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की सुनवाई टल गई है.

वहीं, कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में करेगा.

कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गुरुवार को अदालत में पेश होने से राहत दे दी. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वे इस समय पंजाब में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं और वहां राहत और बचाव कार्यों में पीड़ितों की मदद में जुटे हुए हैं.

ED और CBI ने शराब नीति में गड़बड़ी बताई राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस आधार पर उनकी उपस्थिति से दोनों नेताओं को पेशी से छूट दे दी. दिल्ली की शराब नीति के मामले में जांच एजेंसी ED ने यह केस मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दर्ज किया है. इस मामले में कई नेताओं और अधिकारियों पर जांच एजेंसी शिकंजा कस चुकी है.

जांच एजेंसियों CBI और ED ने आरोप लगाया कि इस नीति में जानबूझकर कमियां डाली गईं, जिससे निजी लोगों को फायदा पहुंचा और AAP नेताओं को 100 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत मिली.

ED ने PMLA के तहत दर्ज किया केस जांच एजेंसी ED के मुताबिक, यह रकम गोवा और पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए इस्तेमाल की गई. केजरीवाल को ED ने मार्च 2024 में गिरफ्तार किया था, जबकि सिसोदिया फरवरी 2023 से जेल में थे. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त-सितंबर 2024 में दोनों को जमानत दी थी, लेकिन कोर्ट में ट्रायल जारी है.

इस मामले की शुरुआत 2022 में हुई, जब दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल ने CBI जांच की सिफारिश की. CBI ने FIR दर्ज की, जिसमें सिसोदिया को मुख्य आरोपी बनाया गया. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल जोड़ते हुए PMLA के तहत केस दर्ज किया. हालांकि, अब देखना होगा कि अक्टूबर में होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले पर अदालत क्या कुछ अहम आदेश देती है.

बिहार चुनाव से पहले बड़ा केंद्र सरकार का बड़ा राजनीतिक दांव! क्या GST रिफॉर्म करेगा काम, जानें NDA का प्लान…

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बिहार चुनाव से पहले बड़ा केंद्र सरकार का बड़ा राजनीतिक दांव! क्या GST रिफॉर्म करेगा काम, जानें NDA का प्लान…

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (3 सितंबर 2025) को जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद जीएसटी की दरों में बदलाव की घोषणा की. अब सिर्फ 5 और 18 प्रतिशत की दर से ही ज्यादातर समानों पर जीएसटी लगेगा.

ये बदली हुई दरें 22 सितंबर से देशभर में लागू होंगी. यानी बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक कुछ दिन पहले ही ये फैसला लागू हो जाएगा.

अब पार्टी जीएसटी रिफॉर्म को भी बिहार चुनाव में भुनाने की तैयारी में लग गई है. इस बदलाव के बाद पार्टी का फोकस खास तौर पर बिहार चुनाव में मध्यम वर्ग, महिलाओं और किसान को साधने में है. जीएसटी रिफॉर्म के बाद सस्ते होने वाले सामानों की लिस्ट को देखा जाए तो इसका सीधा कनेक्शन आम आदमी और गरीब तबके से जुड़ता है. हेल्थ इंश्योरेंस और खाने के कई समाना को टैक्स फ्री किया जाना एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. इसके अलावा खाने पीने की तमाम चीजों पर टैक्स कम किया गया है. वहीं घर बनाने वाले कुछ मैटेरियल की कीमत में भी इस रिफॉर्म के बाद गिरावट आने की संभावना है.

बिहार चुनावों में GST रिफॉर्म्स को भुनाने की कोशिश ऐसे में बीजेपी अब बिहार विधानसभा चुनावों में जीएसटी रिफॉर्म्स को भुनाने में जुट गई है.

”पार्टी ने इसके लिए एक ओर सोशल मीडिया पर अभियान की शुरुआत कर दी है तो वहीं दूसरी ओर तमाम बड़े नेताओं को मीडिया से लेकर अपनी सभाओं में रिफॉर्म्स को लेकर प्रचार करने को कहा गया है.”

”सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया पर अभियान की बात करें तो देश और बिहार के तमाम बड़े नेताओं ने अपने सोशल मीडिया के जरिए पोस्ट कर उन चीजों की जानकारी देना शुरू कर दिया है”

”जिसका सीधा कनेक्शन मध्यम वर्ग और गरीब तबके से जुड़ा हुआ है. इसके साथ-साथ किस तरह से मध्यम वर्ग, गरीब और किसानों को इस से कितना फायदा होगा उसकी जानकारी से संबंधित पोस्ट करना शुरू कर दिया है. वहीं आने वाले दिनों में इस अभियान को और तेज किया जाएगा. इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक पार्टी के सभी नेताओं को रिफॉर्म्स को लेकर लगातार प्रचार करने को कहा गया है.”

NDA सम्मेलनों में GST का जिक्र बिहार में बीजेपी सहित NDA के सभी बड़े नेता लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं.

सभी नेताओं को ये निर्देश दिया गया है कि अपनी रैलियों और सभी कार्यक्रमों में जीएसटी रिफॉर्म्स का ज्यादा से ज्यादा जिक्र करें. किस तरह से इससे मध्यम वर्ग, महिलाओं और किसानों की फायदा मिलेगा, इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जनता को बताएं. जिस से ये सभी वर्ग पार्टी के साथ फिर से जुड़ सकें. बिहार में चल रहे एनडीए सम्मेलनों में भी इसका जिक्र करते हुए नेता दिखाई देंगे. इसके साथ-साथ बीजेपी जीएसटी रिफॉर्म्स को लेकर राज्य में सेमिनार, गोष्ठियां और कई अन्य तरह के कार्यक्रम करने की योजना भी बना रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा जनता तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाए और चुनावों में इसका लाभ भी पार्टी को मिल सके.

प्रधानमंत्री मोदी की आगामी रैली देशभर के पार्टी के सभी बड़े नेता और मुख्यमंत्री लगातार मीडिया बाइट्स और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने में लगे हुए हैं.

इस फैसले के अगले दिन ही पार्टी के तमाम बड़े नेताओं के बयानों में भी इसकी झलक देखने को मिली है. दरअसल, केंद्रीय नेतृत्व के ओर से स्पष्ट तौर पर इसके निर्देश दिए गए हैं कि इन रिफॉर्म्स का जिक्र कर लोगों तक हर जानकारी को पहुंचाया जाए, जिसका लाभ पार्टी को मिल सके. इसका असर आगामी दिनों में देखने को मिलेगा. पीएम मोदी समेत कई नेताओं के रैलियों में इसका जिक्र खुलकर किया जाएगा. खुद प्रधानमंत्री भी आगामी 17 सितंबर को होने वाली रैली में इसका जिक्र कर सकते हैं.

केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात, खेती होगी सस्ती, किसानों की आमदनी बढ़ेगी, GST में कटौती किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा ।

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केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात, खेती होगी सस्ती, किसानों की आमदनी बढ़ेगी, GST में कटौती किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा ।

केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात दी है। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में टैक्स स्लैब में ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। सरकार ने 12% और 28% वाले टैक्स स्लैब को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

अब सिर्फ तीन स्लैब रह गए हैं, 5%, 18% और 40%। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा।

खेती से जुड़े सामान पर टैक्स में बड़ी राहत नई टैक्स दरों के तहत कृषि क्षेत्र की अधिकांश वस्तुओं को 5% के दायरे में ला दिया गया है। पहले जिन उपकरणों और मशीनों पर 12% टैक्स लगता था, अब उन पर सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा। इसमें शामिल हैं: ट्रैक्टर और उनके पार्ट्स, कृषि टायर, सिंचाई मशीनें (ड्रिप, स्प्रिंकलर आदि), खाद बनाने की मशीनें, जैविक कीटनाशक (बायोपेस्टीसाइड्स), यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू होगा, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय गिरावट आएगी।

ट्रैक्टर, सिंचाई उपकरण और खाद बनाने वाली मशीनों जैसी जरूरी चीजों पर टैक्स कम होने से ये उत्पाद पहले से सस्ते हो जाएंगे। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसान भी इन आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। इससे कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी और किसानों की आमदनी में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

सरकार की नीयत साफ: कृषि क्षेत्र को मिल रहा प्राथमिकता आपको बता दें की जीएसटी काउंसिल का यह फैसला दर्शाता है कि सरकार कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है। टैक्स स्लैब में सुधार कर सरकार ने न सिर्फ टैक्स प्रणाली को सरल बनाया है, बल्कि किसानों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा है।

भविष्य की दिशा: निवेश और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा कम टैक्स दरों से सिर्फ किसान ही नहीं, कृषि उपकरण और खाद बनाने वाली कंपनियों को भी लाभ होगा। इससे इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा, नई तकनीकों का विकास होगा और देश में कृषि के आधुनिकरण को बढ़ावा मिलेगा।