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नई ताक़त, नया भारत, तीसरी ओर अंतरिक्ष विज्ञान में विश्वस्तरीय छलांग, दुनिया की महाशक्तियों को सीधी चुनौती…

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नई ताक़त, नया भारत, तीसरी ओर अंतरिक्ष विज्ञान में विश्वस्तरीय छलांग, दुनिया की महाशक्तियों को सीधी चुनौती…

21वीं सदी का भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक निर्णायक वैश्विक शक्ति बन चुका है। एक तरफ रिकॉर्ड आर्थिक वृद्धि, दूसरी तरफ आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन, और तीसरी ओर अंतरिक्ष विज्ञान में विश्वस्तरीय छलांग।

इन तीनों मोर्चों पर भारत ने न केवल उपलब्धियाँ दर्ज की हैं, बल्कि अब वह दुनिया की महाशक्तियों को सीधी चुनौती भी दे रहा है।

आर्थिक मोर्चे पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ताकत भारत की अर्थव्यवस्था 2025 की दूसरी तिमाही में $4.2 ट्रिलियन को पार कर चुकी है, जिससे वह जापान को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। हालिया रिपोर्टों में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% आंकी गई है, जो दुनिया के बड़े देशों में सबसे तेज़ है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत अब अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। जबकि डिजिटल भुगतान, AI, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान खींचा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों ने घरेलू उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

डिफेंस: आत्मनिर्भर भारत की सैन्य शक्ति एक समय में रक्षा उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाला भारत, आज खुद लड़ाकू विमान, ड्रोन, पनडुब्बियाँ और मिसाइल सिस्टम बना रहा है। तेजस फाइटर जेट, अग्नि-5 मिसाइल और INS विक्रांत जैसे प्रोजेक्ट भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। रक्षा निर्यात 2024-25 में ₹21,000 करोड़ को पार कर गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल और निजी क्षेत्र की भागीदारी से रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व नवाचार हो रहे हैं। भारत अब एक आयातक नहीं, निर्यातक रक्षा शक्ति बन रहा है।

अंतरिक्ष: चंद्रयान से लेकर गगनयान तक का सफर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने दुनिया को फिर चौंकाया है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब गगनयान की तैयारी जोरों पर है। 2025 के अंत तक भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन प्रस्तावित है। Aditya L1 मिशन ने सूर्य के रहस्यों को जानने की नई शुरुआत की है। जबकि भारत अब कॉमर्शियल सैटेलाइट लॉन्चिंग का हब बनता जा रहा है। छोटे देशों के लिए ISRO सबसे भरोसेमंद साझेदार बन चुका है।

“त्योहारी तोहफा! बड़ी खुशखबरी” त्योहारों से पहले मिलेगा डबल तोहफा?

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“त्योहारी तोहफा! बड़ी खुशखबरी” त्योहारों से पहले मिलेगा डबल तोहफा?

जैसे-जैसे त्यौहारों का मौसम नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें भी परवान चढ़ रही हैं। इस बार सरकार की अगली बड़ी घोषणा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।

माना जा रहा है कि महंगाई भत्ता-DA और महंगाई राहत-DR में एक और बढ़ोतरी की घोषणा जल्द ही हो सकती है, जिससे एक करोड़ से ज्यादा सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारक सीधे लाभान्वित होंगे।

महंगाई दर और वेतन आयोग बना आधार केंद्रीय कर्मचारियों का DA और पेंशनभोगियों का DR हर साल दो बार बढ़ाया जाता है। जनवरी और जुलाई में। इस बार जुलाई 2025 की संभावित बढ़ोतरी पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हाल ही में जारी महंगाई दर के आंकड़े और 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि सरकार त्योहारों से पहले इसका ऐलान कर सकती है।

पिछली बढ़ोतरी और मौजूदा स्थिति मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में DA और DR में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से प्रभावी हुई और साथ ही कर्मचारियों को एरियर का भुगतान भी मिला। उस बढ़ोतरी के बाद DA/DR की दर बढ़कर 55% हो गई है।

मासिक आय में कितना फर्क पड़ा? वर्तमान में जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹18,000 है, उन्हें 55% DA के तहत कुल ₹27,900 की मासिक आय मिल रही है। इसी तरह, जिन पेंशनर्स को ₹9,000 की मूल पेंशन मिलती है, उन्हें DR जोड़कर ₹13,950 मिल रहे हैं। अगर DA में फिर 3-4% की बढ़ोतरी होती है, तो इनकम में और इजाफा होना तय है।

त्योहारों से पहले मिलेगा डबल तोहफा? कई मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार त्योहारी सीजन से पहले DA-DR में 3% से 4% तक की बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। साथ ही कुछ वर्गों में बोनस की घोषणा की उम्मीद भी जताई जा रही है, जो दशहरा और दीपावली से पहले दिया जा सकता है।

“Ganesh Visarjan : गणेश विसर्जन कल, अगले साल कब आएंगे बप्पा, अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के 5 मुहूर्त, बप्पा को ऐसे दें विदाई…

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“Ganesh Visarjan : गणेश विसर्जन कल, अगले साल कब आएंगे बप्पा, अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के 5 मुहूर्त, बप्पा को ऐसे दें विदाई…

Ganesh Chaturthi : 6 सितंबर को ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ की गूंज के साथ गणेश विसर्जन किया जाएगा. गणेश जी के भक्तों के लिए गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक 10 दिन बहुत खास होते हैं.

गणेश चतुर्थी तिथि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर 2025 को सुबह 7.06 पर शुरू होगी और 7 सितंबर 2025 को सुबह 7.44 मिनट पर इसका समापन होगा.

गणेश चतुर्थी: स्थापना मुहूर्त मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त –

सुबह 11:02 – दोपहर 01:31 अवधि – 02 घण्टे 28 मिनट्स वर्जित चन्द्रदर्शन का समय -सुबह 09:01 – रात 08:09 अवधि – 11 घण्टे 08 मिनट्स गणेश स्थापना विधि गणेश चतुर्थी के दिन स्नान आदि के बाद स्वच्छ पीले या लाल रंग के कपड़े पहनें.

व्रत का संकल्प लें. उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा की चौकी रखें, लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं. गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. गणपति के दहीने ओर कलश की स्थापना करें. ऊपर से नारियल रखकर उस पर मौली बांध दें.

दूर्वा जोड़े में बनाकर अर्पित करें. लड्‌डू या मोदक भोग लगाएं.कथ सुनने के बाद आरती करें. गणेश जी की पूजा का महत्व शिवजी, विष्णुजी, दुर्गाजी, सूर्यदेव के साथ-साथ गणेश जी का नाम हिन्दू धर्म के पाँच प्रमुख देवों (पंच-देव) में शामिल है.

भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक, मंगलकारी, रक्षाकारक, सिद्धिदायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान प्रदायक माना गया है. इनकी आराधना से हर कार्य संभव हो जाता है.

किसी भी देव की आराधना के आरम्भ में किसी भी सत्कर्म व अनुष्ठान में, उत्तम से उत्तम और साधारण से साधारण कार्य में भी भगवान गणपति का स्मरण, उनका विधिवत पूजन किया जाता है. इनकी पूजा के बिना कोई भी मांगलिक कार्य को शुरु नहीं किया जाता है.

 

Dollar vs Rupee: “जीएसटी 2.0 के बाद पूरे जोश में रुपया, करेंसी की रिंग में मजबूत डॉलर को दी करारी शिकस्त”

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Dollar vs Rupee: “जीएसटी 2.0 के बाद पूरे जोश में रुपया, करेंसी की रिंग में मजबूत डॉलर को दी करारी शिकस्त”

Dollar vs Rupee: भारतीय रुपये में पिछले दिनों में बड़ी गिरावट देखी गई और यह सबसे निचले स्तर पर चला गया था. हालांकि, उसके बाद इसने अब थोड़ी रिकवरी की है. हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को वैश्विक कच्चे तेल के दाम में आई नरमी से भारतीय करेंसी को बल मिला.

इसके बाद अमेरिकी डॉलर की तुलना में यह एक पैसे की बढ़त के साथ 88.11 के स्तर पर पहुंच गया.

रुपये में क्यों तेजी? विदेशी मुद्रा कारोबारियों (Forex Traders) ने बताया कि विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने स्थानीय मुद्रा की बढ़त को सीमित कर दिया. हालांकि घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक धारणा ने भारतीय करेंसी को जबरदस्त समर्थन दिया.

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Currency Market) में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 88.11 पर खुला. इसके बाद 88.15 प्रति डॉलर पर लुढ़क गया. हालांकि जल्द वापसी करता हुआ 88.11 प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव से एक पैसे की बढ़त दर्शाता है. एक दिन पहले यानी गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.12 पर बंद हुआ था.

घरेलू बाजार में गिरावट छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.10 पर आ गया. घरेलू शेयर बाजारों में बीएसई पर 30 अंकों वाले सेंसेक्स शुरुआती कारोबार 318.55 अंक की बढ़त के साथ 81,036.56 अंक पर जबकि निफ्टी 98.05 अंक चढ़कर 24,832.35 अंक पर पहुंच गया. हालांकि, शुक्रवार को शेयर बाजार में यह मजबूती नहीं रह पाई. कुछ देर बाद ही सेंसेक्स करीब 135 अंक तक गिर गया जबकि निफ्टी भी 24,700 के नीचे चला गया.

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66.89 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बृहस्पतिवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 106.34 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

“‘दुनिया पर मंडरा रहा एक और बड़ा संकट, निर्दोष लोगों की जान…’, रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए UN में क्या बोला भारत”

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“‘दुनिया पर मंडरा रहा एक और बड़ा संकट, निर्दोष लोगों की जान…’, रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए UN में क्या बोला भारत”

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने यूक्रेन के हालातों और युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता जताई है. भारत ने कहा कि इस संघर्ष की वजह से ग्लोबल साउथ देशों पर काफी असर पड़ रहा है.

भारत ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाप्त किया जा सकता है और स्थाई शांति लाई जा सकती है.

ग्लोबल साउथ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में हैं. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने गुरुवार (4 सितंबर, 2025) को यूक्रेन की स्थिति को लेकर यूएन में चिंता जताई है और कहा, ‘हमारा मानना ​​है कि निर्दोष लोगों की जान जाना अस्वीकार्य है और युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता.’

संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति’ विषय पर चर्चा आयोजित की गई. इस चर्चा में हरीश ने कहा, ‘भारत को इस बात की चिंता है कि संघर्ष के परिणामस्वरूप ईंधन की कीमतें और अन्य चीजें पूरे विश्व को प्रभावित कर रहे हैं, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों को, जिन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. हमारा मानना है कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनकी वैध चिंताओं का समुचित समाधान किया जाए.’

भारत ने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी शांति के लिए सभी हितधारकों की पूर्ण भागीदारी और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है. हरीश ने कहा कि भारत ने पिछले महीने अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई शिखर बैठक का समर्थन किया और उसमें हुई प्रगति की सराहना की. हरीश ने कहा, ‘हम यूक्रेन के राष्ट्रपति और यूरोपीय नेताओं के साथ बातचीत करने के अमेरिकी राष्ट्रपति के कूटनीतिक प्रयासों पर भी ध्यान देते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना ​​है कि ये सभी कूटनीतिक प्रयास यूक्रेन में जारी संघर्ष को समाप्त कराने और स्थायी शांति की संभावनाओं के लिए अहम हैं.’

हरीश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूदा स्थिति पर पुतिन, जेलेंस्की और यूरोपीय नेतृत्व के संपर्क में हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन संघर्ष का शीघ्र अंत सभी के हित में है, साथ ही उन्होंने मोदी के इस संदेश का जिक्र किया कि यह युद्ध का युग नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के बयान से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन से बातचीत की. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘आपसी हितों के मुद्दों और यूक्रेन में संघर्ष को जल्द समाप्त कराने के प्रयासों पर विचार विमर्श किया.’

इससे पहले गुरुवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से बात की और द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की. जयशंकर ने कहा, ‘भारत इस संघर्ष के शीघ्र अंत और स्थाई शांति का समर्थन करता है.’ वहीं , सिबिहा ने कहा कि उन्होंने जयशंकर को युद्ध के वर्तमान हालात और न्यायसंगत शांति के लिए यूक्रेन के प्रयासों के बारे में जानकारी दी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान पर पलटी मारते हुए अब टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी कर दिया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी कर दिया, टैरिफ घटाने की दूसरी बड़ी वजह क्या? 

गुरुवार को उन्होंने अमेरिका-जापान के बीच व्यापार समझौता लागू करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए, जिसमें जापान पर पहले लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया है।

इसमें रेसिप्रोकल और ऑटो टैरिफ दोनों शामिल है। अमेरिका ने ने इसे अमेरिका-जापान व्यापार संबंधों के एक नए युग की शुरुआत बताया है।

जापानी कारों पर पहले अमेरिका ने 27.5% का टैरिफ लगाया था लेकिन अब उसे भी घटाकर 15% कर दिया गया है। यह बदलाव इस महीने के अंत तक लागू हो जाएगा। ऑटोमोबाइल पर टैरिफ में कमी का ये आदेश सात दिन बाद ही लागू हो जाएगा। वाइट हाउस के बयान में कहा गया है, “इस समझौते के तहत, अमेरिका आने वाले करीब सभी जापानी आयातों पर अब 15% का बेसलाइन टैरिफ लगेगा।” साथ ही, यह भी कहा गया है कि यह ढांचा पारस्परिकता के सिद्धांतों और हमारे साझा राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।

टैरिफ घटाने की बड़ी वजह क्या? दरअसल, ट्रंप टैरिफ की वजह से पिछले महीने जापानी निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जो चार साल से भी ज़्यादा समय में सबसे बड़ी गिरावट है। AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, निर्यात में जुलाई में साल-दर-साल 2.6 फीसदी की गिरावट आई। इसमें अमेरिका को होने वाले निर्यात में 10.1 प्रतिशत की गिरावट भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका को जापान से मोटर वाहनों का निर्यात 28.4 फीसदी तक गिर गया, जबकि ऑटो पार्ट्स का निर्यात 17.4 फीसदी गिर गया। इससे अमेरिका के ऑटो बाजार में हलचल मच गई।

अमेरिकी बाजार पर असर अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने और अमेरिका के भारी व्यापार घाटे को कम करने के प्रयास में ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर भारी आयात शुल्क लगाए हैं। इसी कड़ी में ट्रंप प्रशासन ने अपने करीबी सहयोगी जापान पर शुरुआत में सभी निर्यात होने वाले सामानों पर 10% का शुल्क और कारों पर 27.5% का शुल्क लगाया था। अगस्त में ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का जापानी कार निर्माताओं पर भारी असर पड़ा और अमेरिकी निर्यात घट गए। इससे अमेरिकी बाजार प्रभावित होने लगा।

पिछले महीने अमेरिका-जापान व्यापार समझौता टोयोटा ने पिछले महीने कहा था कि उसे अमेरिका में भेजे जाने वाले वाहनों पर टैरिफ से लगभग 10 अरब डॉलर का नुकसान होने की आशंका है। बता दें कि जापान का ऑटोमोबाइल उद्योग, जिसमें टोयोटा और होंडा जैसी दिग्गज कंपनियाँ शामिल हैं, देश की लगभग आठ प्रतिशत नौकरियों का स्रोत है। इन उठापटक के बीच जापान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौता किया था, जिसके तहत 25% रिसिप्रोकल टैरिफ़ को घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। जापानी कारों पर भी कर की दर घटाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है।

दूसरी बड़ी वजह क्या? जापान पर ट्रंप की मेहरबानी की दूसरी बड़ी वजह चीन-रूस और भारत हैं, जिनके राष्ट्राध्यक्षों की तिकड़ी ट्रंप समेत पूरी दुनिया ने चीनी शहर तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान देखी थी। अमेरिका को लगता है कि इस तिकड़ी से उनका गणित कमजोर पड़ सकता है। इसके अलावा जब चीन ने द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के 80 वर्ष पूरे होने के मौके पर विशाल विक्ट्री डे परेड आयोजित किया और अमेरिका के दुश्मन देशों को एक मंच पर लाया तो अमेरिका को हिन्द-प्रशांत महासागर क्षेत्र में फिर से अपने करीबी मित्र जापान की याद आई।

अमेरिका को लगता है कि जापान को इस क्षेत्र में मित्र बनाकर रखने में उसका फायदा है क्योंकि चीन-रूस, ईरान और उत्तर कोरिया (CRINK) के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक गठजोड़ का भी जापान ने विरोध किया है। चीन-ताइवान संघर्ष में भी जापान अमेरिका के साथ है। इसके अलावा जापान ने चीन के विक्ट्री परेड का खुलकर विरोध किया था और कई देशों से स्पष्ट अपील की थी कि वे इसमें शामिल न हों। संभवत: इसी वजह से कई देशों के नेताओं ने चीन के इस परेड में शामिल होने से इनकार कर दिया था, उनमें भारत भी है।

“भारत से माल भर-भरकर धड़ाधड़ यूरोप जा रहे कंटेनर, जमकर पैसा बना रहे मुकेश अंबानी!”

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“भारत से माल भर-भरकर धड़ाधड़ यूरोप जा रहे कंटेनर, जमकर पैसा बना रहे मुकेश अंबानी!”

अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर 25% का अतिरक्त टैरिफ लगाया है। लेकिन भारत से यूरोप को होने वाले डीजल के निर्यात में भारी उछाल आया है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में यह 137% बढ़कर रोजाना 242,000 बैरल हो गया।

इसकी वजह यह है कि यूरोप के खरीदार एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। यूरोपीय संघ (EU) जनवरी 2026 से रूस से कर आने वाले कच्चे तेल से बने ईंधन पर प्रतिबंध लगाने वाला है। इस प्रतिबंध से रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों को नुकसान हो सकता है जो रूस से तेल खरीदकर उसे प्रोसेस करती हैं और फिर यूरोप को बेचती हैं।

भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ा प्रोसेसर और ईंधन का निर्यातक है। रियल टाइम डेटा और एनालिटिक्स देने वाली कंपनी Kpler के मुताबिक अगस्त में यूरोप को डीजल का निर्यात पिछले महीने की तुलना में 73% और पिछले 12 महीनों के औसत से 124% अधिक था। तेल का जहाजों पर नजर रखने वाली एक और कंपनी वोर्टेक्सा ने अनुमान लगाया कि अगस्त में भारत से यूरोप को डीजल का निर्यात 228,316 बीपीडी था, जो पिछले साल की तुलना में 166% और जुलाई की तुलना में 36% अधिक है।

क्यों आई तेजी? जानकारों का कहना है कि इस उछाल के कई कारण हैं। यूरोप की एक बड़ी रिफाइनरी ने अचानक मरम्मत का काम पहले शुरू करने का फैसला किया। साथ ही सर्दियों में डीजल की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा ईयू के प्रतिबंध लगने वाले हैं। इससे भारत से होने वाली आपूर्ति बंद हो सकती है। इसे 2025 के बाकी महीनों में भी यूरोप में भारतीय डीजल की मांग मजबूत बनी रहेगी। Kpler के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा कि नीदरलैंड की एक रिफाइनरी ने मेंटनेंस को एडवांस किया है।

इस बीच भारत को अमेरिकी अधिकारियों से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने भारतीय रिफाइनरियों पर आरोप लगाया है कि वे सस्ते रूसी कच्चे तेल को खरीदकर और उसे प्रोसेस करके पश्चिम को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं और इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मदद हो रही है। भारत ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि अगर पश्चिम को आपत्ति है तो वह भारतीय ईंधन खरीदना बंद कर सकता है।

ईयू की शर्त भारतीय निर्यातकों को इस साल यूरोप से मजबूत मांग देखने की उम्मीद है। रितोलिया ने कहा कि यूरोपीय खरीदार भारत से लिफ्टिंग में तेजी ला सकते हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट की रिफाइनरियों में अक्टूबर-नवंबर में हाई मेंटनेंस होगा। यूरोपीय शिपमेंट में उछाल के कारण अगस्त में भारत का कुल डीजल निर्यात बढ़कर 603,000 बीपीडी हो गया, जो जुलाई और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17% अधिक है। EU का कहना है कि आयातकों को तीसरे देशों से प्रोसेस प्रोडक्ट्स में उपयोग किए गए कच्चे तेल के मूल देश का प्रमाण देना होगा।

“मुस्लिमों के लिए बनेगी सोसाइटी, हिंदुओं को नहीं मिलेगी एंट्री! ‘हलाल लाइफस्टाइल’ को लेकर बीजेपी विधायक ने सीएम को लिखी चिट्ठी”

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“मुस्लिमों के लिए बनेगी सोसाइटी, हिंदुओं को नहीं मिलेगी एंट्री! ‘हलाल लाइफस्टाइल’ को लेकर बीजेपी विधायक ने सीएम को लिखी चिट्ठी”

भारत दुनिया का ऐसा देश है, जहां सभी धर्मों के लोग रहते हैं. इस देश में धर्म के नाम पर किसी भी राज्य, शहर, गांव या सोसाइटी को नहीं बांटा गया है, लेकिन अब देश में एक ऐसी सोसाइटी बनाई जा रही है, जो सिर्फ मुस्लिमों के लिए होगी.

यानी किसी भी दूसरे धर्म के लोगों को यहां घर नहीं मिलेगा. बता दें कि इसे हलाल लाइफस्टाइल वाली टाउनशिप बताया जा रहा है, जो मुंबई के आस-पास के इलाकों में बनाई जा रही है. इस मुस्लिम हाउसिंग सोसाइटीज को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में बीजेपी के विधायक अतुल भातखलकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक चिट्ठी लिखी है और तुरंत कार्रवाई की मांग की है. इस सोसाइटियों को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी गुस्सा है. लगातार अब एक ही मांग की जा रही है कि इस तरह के विज्ञापनों पर तत्काल रोक लगे और इससे जुड़ी संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए.

भाजपा विधायक ने लिखी चिट्ठी विधायक अतुल भातखलकर ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि सोशल मीडिया और दूसरे प्लेटफॉर्म पर कुछ संगठन खुलेआम हाउसिंग सोसाइटीज के विज्ञापन चला रहे हैं जो सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए हैं. उन्होंने खास तौर पर मुंबई के पास मीरा रोड ईस्ट में ‘हिल गैलेक्सी, विनय नगर रोड’ नाम की जगह का जिक्र किया है. इस विज्ञापन में साफ-साफ लिखा है कि यह हाउसिंग कॉम्प्लेक्स केवल मुस्लिम समुदाय के लिए है और इसमें एक मस्जिद भी बनाई जाएगी.

विधायक ने क्यों जताया विरोध? अतुल भातखलकर का कहना है कि इस तरह के विज्ञापन भारत के संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हैं. उनका मानना है कि ये विज्ञापन समाज में आपसी दुश्मनी, गुटबाजी और अशांति को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने इसे एक तरह का ‘जमीन जिहाद’ भी कहा. विधायक ने कहा कि जब कोई विज्ञापन सिर्फ एक खास समुदाय के लिए होता है और उसमें धार्मिक स्थल बनाने की बात की जाती है, तो यह हमारे समाज के आपसी भाईचारे के लिए बहुत नुकसानदायक है.

मुख्यमंत्री से की ये मांगें अपनी चिट्ठी में विधायक ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तीन खास मांगें की हैं. ये मांगे इस तहर के विज्ञापनों पर कड़ी कार्रवाई को लेकर हैं और इस पर किस तरह से रोक लगाई जाए, उसको दर्शाती है. बता दें कि इस चिट्ठी के सामने आने के बाद यह मामला और भी गरमा गया है. अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या कदम उठाती है. विज्ञापन पर रोक भाजपा विधायक ने कहा कि सबसे पहले तो ऐसे सभी विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगाई जाए.

सख्त कार्रवाई उन्होंने अपनी चिट्ठी में यह भी कहा कि जो संस्थाएं या लोग ऐसे विज्ञापन चला रही हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए नए नियम बनें चिट्ठी में इस बात का भी जिक्र किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ठोस नियम और गाइडलाइन बनाए, ताकि कोई भी समाज में फूट डालने वाला विज्ञापन न दे सके और राज्य की शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे.

“बाढ़ और उफनती नदियों ने मचाया तांडव; पंजाब, दिल्ली और हिमाचल पानी-पानी, मानसून ने तोड़ा 14 साल का रिकॉर्ड”

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“बाढ़ और उफनती नदियों ने मचाया तांडव; पंजाब, दिल्ली और हिमाचल पानी-पानी, मानसून ने तोड़ा 14 साल का रिकॉर्ड”

नई दिल्ली। उत्तर भारत में इस बार मानसून ने जमकर तबाही मचाई है। पिछले 14 सालों में ऐसा पहला मौका आया है जब लगातार दो हफ्तों तक इतनी बारिश हुई। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 22 अगस्त से 4 सितंबर के बीच उत्तर भारत में सामान्य से करीब तीन गुना ज्यादा बारिश हुई है।

इस दौरान जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मार्ग पर बादल फटने, पंजाब में दशकों बाद सबसे बड़ी बाढ़, दिल्ली में यमुना का जलस्तर तीसरे सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंचना और हिमाचल-उत्तराखंड में भारी भूस्खलन जैसी घटनाएं हुईं।

क्या कहते हैं आंकड़े? आंकड़ों के मुताबिक, इन 14 दिनों में उत्तर भारत में औसतन 205.3 मिमी बारिश दर्ज की गई जबकि सामान्य तौर पर यह सिर्फ 73.1 मिमी होती है। यानी सिर्फ दो हफ्तों की बारिश से ही पूरे मानसून का 35% कोटा पूरा हो गया।

1 जून से लेकर 4 सितंबर तक उत्तर भारत में 691.7 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 37% ज्यादा है। अगर सितंबर के बाकी दिनों में सामान्य बारिश भी हुई तो यह आंकड़ा 750 मिमी से ऊपर जा सकता है। यह 1988 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला मानसून होगा।

1988 में कितनी हुई थी बारिश? 1988 में सबसे ज्यादा 813.5 मिमी बारिश हुई थी और 1994 में 737 मिमी। इस साल का मानसून दोनों को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड बुक में जगह बनाने की तैयारी में है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लगातार बारिश दो मौसम प्रणालियों के टकराने से हुई है। एक तरफ वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से भूमध्यसागर के पास से नमी वाली हवाएं आईं और दूसरी ओर पूर्वी मानसूनी हवाओं से उनका टकराव हुआ।

क्यों हो रही है इतनी बारिश? पहला टकराव 23 से 27 अगस्त तक हुआ और दूसरा 29 अगस्त से शुरू होकर 4 सितंबर तक जारी रहा। आमतौर पर जुलाई-अगस्त के पीक मानसून में ऐसे दोहरे टकराव कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार बैक-टू-बैक हुए।

इसका सबसे ज्यादा असर पहाड़ी राज्यों में दिखा। पंजाब में बारिश सामान्य से 388% और फिर 454% ज्यादा हुई। इसी तरह हरियाणा-चंडिगढ़-दिल्ली में 325%, हिमाचल में 314%, पश्चिमी राजस्थान में 285%, जम्मू-कश्मीर में 240% और उत्तराखंड में 190% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

“मुंबई एयरपोर्ट पर 12 करोड़ का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद, यात्री गिरफ्तार”

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छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई की। अधिकारियों ने 12 करोड़ रुपये मूल्य का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद करते हुए एक यात्री को गिरफ्तार किया।

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी यात्री कोल्हापुर से मुंबई एयरपोर्ट पर पहुँचा था। जैसे ही वह बाहर निकलने की तैयारी कर रहा था, कस्टम अधिकारियों ने उसे रोक लिया। जांच के दौरान यात्री के चेक-इन ट्रॉली बैग से 12 किलो 260 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया।

न्यायिक हिरासत में भेजा एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर किला कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

इसे भी पढ़ें- गेस्ट हाउस में बेचा जा रहा था गांजा, 3 आरोपी अरेस्ट-1 फरार, 2.17 लाख रुपए का माल जब्त लगातार बढ़ रही तस्करी पिछले कुछ महीनों से विदेशों, खासकर बैंकॉक से बड़ी मात्रा में हाइड्रोपोनिक गांजे की तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। केवल पिछले 2-3 महीनों में कस्टम विभाग ने कई यात्रियों को गिरफ्तार कर उनके पास से करोड़ों रुपये का माल जब्त किया है।

विशेष अभियान शुरू अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की लगातार घटनाओं को देखते हुए कस्टम विभाग ने तस्करों के खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू किया है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि संगठित गिरोह विदेशों से गांजे की सप्लाई कर रहे हैं और मुंबई जैसे बड़े शहरों में इसकी खपत बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

हाइड्रोपोनिक गांजा क्या है? हाइड्रोपोनिक गांजा मिट्टी की बजाय खास तकनीक से पानी और पोषक तत्वों के जरिए उगाया जाता है। इसकी क्वालिटी और असर अधिक होने के कारण इसकी कीमत भी सामान्य गांजे से कई गुना ज्यादा होती है। मुंबई एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई तस्करी के बढ़ते नेटवर्क को उजागर करती है और एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।