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इनकम टैक्स के बाद जीएसटी रिफॉर्म… अब मीडिल क्लास बना मोदी सरकार की नीतियों का लाभार्थी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2025 में मीडिल क्लास को केंद्र में रखकर अपनी सुधार नीतियों को और मजबूत किया है. पहले फरवरी में इनकम टैक्स में कटौती और अब जीएसटी दरों में बदलाव के साथ मीडिल क्लास अब सरकार की नीतियों का मुख्य लाभार्थी बन गया है. यह कदम न केवल मीडिल क्लास की जेब में अधिक पैसा डालता है, बल्कि उपभोग को बढ़ावा देकर उनकी आकांक्षाओं को भी नई उड़ान देता है.
जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को कहा- भारत का मेहनती मीडिल क्लास हमारी विकास यात्रा का केंद्र है. यह बयान जीएसटी कटौती की घोषणा के एक दिन बाद आया, जिसने मीडिल क्लास की लंबे समय से चली आ रही शिकायत को दूर कर दिया है. सोशल मीडिया पर मीडिल क्लास का एक बड़ा वर्ग यह शिकायत करता रहा है कि वह नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करता है और बड़े पैमाने पर बीजेपी को वोट देता है, लेकिन सरकार से उसे उसका हक नहीं मिलता.
सरकार का ध्यान गरीबों के लिए मुफ्त आवास, मुफ्त राशन, शौचालय, मुफ्त चिकित्सा बीमा और किसानों के लिए आर्थिक सहायता जैसे कल्याणकारी योजनाओं पर रहा है. यह भावना तब और मजबूत हुई जब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कॉरपोरेट क्षेत्र को बड़े पैमाने पर कर राहत दी गई. हालांकि, 2025 में सरकार ने मीडिल क्लास की इस शिकायत को गंभीरता से लिया और दो बड़े उपहार दिए. पहला, इनकम टैक्स में कटौती ने मीडिल क्लास की जेब में अधिक पैसा छोड़ा और दूसरा जीएसटी सुधारों ने रोजमर्रा की वस्तुओं को और सस्ता कर दिया, जिससे उपभोग को बढ़ावा मिला.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकारों के दौरान उच्च टैक्स रेट के कारण लोगों का मासिक बजट बिगड़ जाता था. इसके विपरीत, एनडीए सरकार ने लोगों को समय पर राहत देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक इनकम टैक्स में छूट और अब जीएसटी सुधारों के माध्यम से हम करोड़ों परिवारों की जिंदगी को आसान बनाने और उनकी आकांक्षाओं को बल देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ताजा जीएसटी सुधारों के कारण मोटरसाइकिल, कार सहित टीवी, एसी और रोजमर्रा की अन्य जरूरी चीजें काफी सस्ती हो जाएंगी.

जीएसटी सुधारों ने जीवन और स्वास्थ्य बीमा को भी और सस्ता कर दिया है, क्योंकि इन पर अब शून्य जीएसटी लागू होगा. यह हर मीडिल क्लास परिवार के लिए एक बड़ी राहत है, जो आमतौर पर चिकित्सा और जीवन बीमा पॉलिसी लेता है. इसके अलावा, छोटी कारों पर जीएसटी में 11-13% की कटौती ने मीडिल क्लास के लिए दोपहिया वाहन से छोटी कार की ओर शिफ्ट होने का सपना साकार कर दिया है. रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों पर भी जीएसटी को 5 फीसदी के स्लैब या शून्य जीएसटी में लाया गया है, जिससे मीडिल क्लास का रसोई बजट कम होगा.
पीएम ने कहा कि आवश्यक खाद्य पदार्थों, खाना पकाने की जरूरी चीजों और प्रोटीन युक्त उत्पादों पर कर दरों को कम करके ये सुधार देश भर के परिवारों के लिए बेहतर सामर्थ्य और पोषण तक पहुंच को बढ़ावा देते हैं. ये कदम न केवल मीडिल क्लास की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं, बल्कि उनकी आकांक्षाओं को भी प्रोत्साहित करते हैं. जीएसटी सुधारों से न केवल आवश्यक वस्तुएं सस्ती हुई हैं, बल्कि उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बढ़ने से अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी. इनकम टैक्स कटौती ने मीडिल क्लास को अधिक बचत करने का अवसर दिया है, जिसे वे अब शिक्षा, स्वास्थ्य, या अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने में निवेश कर सकते हैं.

मीडिल क्लास भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. अब यह वर्ग सरकार की नीतियों का केंद्र बन गया है. ये सुधार न केवल उनकी आर्थिक चिंताओं को दूर करते हैं, बल्कि उनके विश्वास को भी मजबूत करते हैं कि सरकार उनकी जरूरतों को समझती है. यह मीडिल क्लास के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहां उनकी मेहनत और योगदान को न केवल पहचाना जा रहा है, बल्कि उसे नीतिगत समर्थन भी मिल रहा है.

दिल्ली कोर्ट में सोनिया गांधी पर शिकायत, भारतीय नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम होने पर सवाल

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दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू कोर्ट में एक नई कानूनी हलचल शुरू हो गई है. यहां कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को लेकर एक क्रिमिनल कम्प्लेंट (फौजदारी शिकायत) दर्ज कराई गई है. शिकायत में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम साल 1980 में दिल्ली की वोटर लिस्ट में दर्ज कर लिया गया था, जबकि आधिकारिक तौर पर वे 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिक बनी थीं.
यह मामला अब अदालत की दहलीज़ तक पहुँच चुका है. एसीजेएम (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) वैभव चौरेसिया ने इस शिकायत पर संज्ञान लिया है और 10 सितंबर को सुनवाई की तारीख तय की गई है. शिकायत दाखिल करने वाले वकील विकास त्रिपाठी का कहना है कि यह मामला गंभीर है क्योंकि जब सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं थीं, तब वोटर लिस्ट में उनका नाम कैसे जुड़ गया? उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि पुलिस को या तो इस मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया जाए या फिर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए.
कानूनी रूप से गलत
शिकायत में सवाल उठाया गया है कि नागरिकता हासिल करने से पहले किसी विदेशी नागरिक का नाम भारतीय वोटर लिस्ट में शामिल होना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि यह निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है. इसमें पूरी प्रक्रिया की जांच करने की मांग की गई है.

आगे क्‍या होगा
अब निगाहें 10 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि अदालत इस शिकायत पर आगे क्या रुख अपनाती है. यह मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि सोनिया गांधी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक की शीर्ष नेता हैं. बीजेपी पहले भी उनकी नागर‍िकता को लेकर सवाल उठा चुकी है.

पेट को बनाना है फ्लैट, जान लीजिए तरीका, कमर हो जाएगी पतली

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भाग दौड़ भरी जिंदगी और खराब जीवनशैली के कारण बहुत से लोग मोटापे और पेट की चर्बी से परेशान हैं. पेट के आसपास बढ़ी हुई चर्बी इतनी आसानी से नहीं जाती. इसकी वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन बेहतर डाइट प्लान और वर्कआउट से पेट को फ्लैट किया जा सकता है. यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है किअगर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित खान-पान की आदतों को अपनाया जाए तो इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है. आइए जानते हैं वे आसान टिप्स जो पेट को फ्लैट बनाने में मदद करते हैं.

फाइबर ज्यादा खाना : पेट को फ्लैट करने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि अपने आहार में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से शामिल करें. फाइबर पानी को तेजी से अवशोषित करके पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है. इससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार स्नैकिंग या ज्यादा खाने से रोकता है. एक अध्ययन में भी बताया गया है कि यदि रोज़ाना के आहार में 10 ग्राम फाइबर जोड़ा जाए तो पांच साल में बेली फैट में 3.7 प्रतिशत की कमी हो सकती है. इसलिए फाइबर से भरपूर रेशेदार हरी सब्जियां, ताजे फल, एवोकाडो, दालें, अलसी के बीज, ब्लैकबेरी आदि का सेवन करना चाहिए.

प्रोटीन युक्त आहार : प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने से मेटाबॉलिज़्म बेहतर होता है और शरीर में कैलोरी जमा नहीं होती. इससे बेली फैट बनने की संभावना कम हो जाती है. प्रोटीन का अधिक सेवन करने से भूख कम करने वाला हार्मोन रिलीज़ होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. इसलिए लीन मीट, मछली, अंडे, बीन्स और डेयरी उत्पादों को रोज़ाना के आहार में शामिल करना चाहिए.

पानी ज्यादा पीना : शरीर को जितना संभव हो उतना हाइड्रेटेड रखना चाहिए. ज्यादा पानी पीने से पाचन क्रिया में सुधार होता है. साथ ही, शरीर में जमा हुए टॉक्सिन और अपशिष्ट बाहर निकल जाते हैं, जिससे पेट फूलना और गैस की समस्या कम होती है.
इन्हें बिल्कुल नहीं खाना चाहिए : शुगर और शुगरयुक्त ड्रिंक्स का सेवन जितना हो सके कम करना चाहिए. खासतौर पर शुगर की अधिक मात्रा शरीर के लिए बहुत हानिकारक होती है. इससे अंगों के आसपास चर्बी जमा हो जाती है और यह लीवर में फैट उत्पादन को भी बढ़ाती है. प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनमें वजन बढ़ाने और पेट की चर्बी जमा करने वाले शुगर, अनहेल्दी फैट्स और सोडियम अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. इसी तरह अल्कोहल का सेवन भी नियंत्रित करना चाहिए. बीयर जैसी चीज़ों का अधिक सेवन करने से बेली फैट बढ़ता है.

एक्सरसाइज़ टिप्स : रोज़ाना खाने के बाद लगभग 10 से 15 मिनट तक टहलना, सुबह उठते ही एक्टिव वॉकिंग या जॉगिंग करना, साइक्लिंग जैसी एरोबिक एक्सरसाइज़ करनी चाहिए. ये शरीर की चर्बी को कम करती हैं. हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट तक ये एक्सरसाइज़ करने से बेहतरीन परिणाम मिलते हैं. इसके साथ ही मांसपेशियों को मज़बूत बनाने वाली स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करनी चाहिए. इससे आराम के समय भी कैलोरी बर्न होती रहती है.

अगर पेट ज्यादा बढ़ गया हो तो डॉक्टर की सलाह से बेली फैट कम करने के लिए हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग्स करनी चाहिए. भूख बढ़ाने और चर्बी जमा करने वाले तनाव को नियंत्रित करने के लिए मेडिटेशन, योग और डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीकों का अभ्यास करना चाहिए. पूरी नींद लेना भी ज़रूरी है. यह भूख को नियंत्रित करने वाले घ्रेलिन और लेप्टिन हार्मोन के स्राव को संतुलित करता है और कॉर्टिसॉल लेवल को कम करता है.

GST का इतिहास और विश्वभर में इसका विस्तार भारत में GST लागू होने से पहले, दुनिया के कई देशों में यह प्रणाली पहले से ही मौजूद थी। जानें सबकुछ…

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GST का इतिहास और विश्वभर में इसका विस्तार भारत में GST लागू होने से पहले, दुनिया के कई देशों में यह प्रणाली पहले से ही मौजूद थी। जानें सबकुछ…

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुड्स और सर्विसेज टैक्स (GST) के स्लैब में महत्वपूर्ण बदलाव का ऐलान किया है। अब 12 फीसदी और 28 फीसदी के स्लैब को समाप्त करके केवल 5 फीसदी और 18 फीसदी कर दिया गया है।

यह नया बदलाव 22 सितंबर से लागू होगा। भारत में GST की शुरुआत 1 जुलाई 2017 से हुई थी, जिसे महंगाई कम करने, टैक्स कलेक्शन बढ़ाने, टैक्स चोरी रोकने और देश की GDP में वृद्धि लाने के उद्देश्य से लागू किया गया था।

“71 साल पहले ही लागू हो चुका था GST, ऐसा करने वाला बना था पहला देश”

दुनिया का पहला देश जिसने GST लागू किया, वह था फ्रांस। फ्रांस ने 1954 में GST लागू किया था। उस समय फ्रांस में कर प्रणाली बहुत जटिल और बिखरी हुई थी, जिसमें कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अप्रत्यक्ष कर लागू थे। इससे कारोबार पर बोझ बढ़ता था और टैक्स चोरी की संभावनाएं भी अधिक थीं। इसलिए फ्रांस ने एक समेकित टैक्स प्रणाली अपनाने के लिए GST लागू किया, जिससे कर प्रणाली सरल, स्थिर और भरोसेमंद बनी।

दुनिया के अन्य देशों में GST का स्वरूप

न्यूजीलैंड: यहां GST 1986 में शुरू हुआ था। 1989 से 2010 तक इसकी दर 12.5% थी, जिसे बाद में 15% कर दिया गया। GST न्यूजीलैंड के कुल कर संग्रह का लगभग 31.4% हिस्सा बनता है।

कनाडा: जनवरी 1991 में GST लागू हुआ। संघीय GST की दर 5% है, जबकि प्रांत स्तर पर अलग-अलग 6% से 7% के बीच प्रांतीय बिक्री कर (PST) लगाया जाता है। कुछ आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं जैसे किराने का सामान, डॉक्टर की दवाएं, और निर्यात GST मुक्त हैं। वार्षिक 30,000 कनाडाई डॉलर से अधिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।

ऑस्ट्रेलिया: GST 2000 में लागू हुआ और वर्तमान दर 10% है। भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और सरकारी शुल्क कर मुक्त हैं।

मालदीव: GST अक्टूबर 2011 में लागू हुआ। मानक दर 8% है। वार्षिक कर योग्य आपूर्ति 1 मिलियन MVR से अधिक होने पर पंजीकरण जरूरी है।

पापुआ न्यू गिनी: यहां की GST दर 10% है, लेकिन निर्यात और कुछ सेवाएं छूट प्राप्त हैं। वार्षिक 2,50,000 KN से अधिक कारोबार करने वालों को GST पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

CG: मुख्यमंत्री करमा तिहार 2025 कार्यक्रम में हुए शामिल, बाढ़ पीड़ितों को ईलाज के साथ अब मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश …

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CG: मुख्यमंत्री करमा तिहार 2025 कार्यक्रम में हुए शामिल, बाढ़ पीड़ितों को ईलाज के साथ अब मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश …

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत – 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। हमारी सरकार नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में आदिवासी संस्कृति के महानायकों की छवि को आमजन की जागरूकता के लिए प्रदर्शित करने मॉडल के रूप में उकेरा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करकमलों से इस म्यूजियम का शुभारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजादी के लगभग 40 वर्षों बाद आदिवासी विभाग का पृथक मंत्रालय बनाकर आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हीं के बताए मार्ग पर वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आदिवासी समाज के बेहतरी एवं समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना का संचालन कर रहे हैं, जिससे हितग्राहियों को शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह ने बस्तर, सरगुजा एवं मध्य क्षेत्र प्राधिकरण का गठन कर विकास को गति प्रदान करने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि युवा आदिवासियों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हमने नई उद्योग नीति बनाई है, जिसमें बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना राज्य में ही की जा रही है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। श्री कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री राम कुमार टोप्पो, विधायक श्री आशाराम नेताम, विधायक श्री प्रबोध मिंज, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम श्री राम सेवक सिंह पैकरा, केशकला बोर्ड की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, सभापति जिला पंचायत धमतरी श्री टीकाराम कंवर, प्रदेश अध्यक्ष कंवर समाज श्री हरवंश सिंह मिरी, अध्यक्ष कंवर समाज रायपुर महानगर श्री मनोहर सिंह पैकरा सहित कंवर समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

बाढ़ पीड़ितों को राशन-ईलाज के साथ अब जरूरी दस्तावेज बनाने का काम भी शुरू, मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश …

तत्काल मुआवजा और सहायता से मिली बड़ी राहत

बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।

बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है।

अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं।

बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।

बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।

सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके।

स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण श्री मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।

“शेयर बाजार पर लगातार दूसरे दिन चढ़ा GST का रंग, निवेशकों ने 15 मिनट में कमाए 3.5 लाख करोड़!”

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“शेयर बाजार पर लगातार दूसरे दिन चढ़ा GST का रंग, निवेशकों ने 15 मिनट में कमाए 3.5 लाख करोड़!”

Stock Market Today: GST कटौती के ऐलान से भारतीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है. जीएसटी काउंसिल ने 12% और 28% के टैक्स स्लैब हटा कर सिर्फ 5% और 18% के दो स्लैब रखने का फैसला किया है.

साथ ही कई चीजों पर टैक्स की दरों में कटौती हुई है. इस खबर से निवेशकों का मनोबल बढ़ गया और बाजार में तेजी आ गई. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अच्छा उछाल दिखाया और पूरे मार्केट में खरीदारी का माहौल बन गया.

सेंसेक्स और निफ्टी में जबरदस्त तेजी, हर सेक्टर हरा आज बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स करीब 647 प्वाइंट्स ऊपर 81,214 पर पहुंच गया. वहीं निफ्टी भी 194 अंक ऊपर 24,909 पर रहा. खास बात ये है कि निफ्टी के सभी सेक्टर के इंडेक्स हरे निशान में हैं. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली. साफ है कि टैक्स कटौती ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है और वे जमकर पैसे लगा रहे हैं.

निवेशकों की दौलत में 4 लाख करोड़ से ज्यादा का उछाल बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 3 सितंबर को ₹4,52,76,261.93 करोड़ थी. सिर्फ एक दिन में यानी 4 सितंबर को ये बढ़कर ₹4,56,25,991.71 करोड़ हो गई. मतलब निवेशकों की पूंजी में लगभग ₹3,49,729.78 करोड़ का बड़ा उछाल हुआ. यह उछाल बाजार में बढ़ती तेजी और निवेशकों के भरोसे का बड़ा सबूत है.

23 शेयरों में बढ़त, एमएंडएम और बजाज फाइनेंस ने मचाई धूम सेंसेक्स पर कुल 30 शेयर हैं, जिनमें से 23 आज बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं. सबसे ज्यादा तेजी महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में देखी गई. दूसरी तरफ एटर्नल और एनटीपीसी के शेयर गिरावट में रहे. हालांकि यह गिरावट बाजार की तेजी को कम नहीं कर पाई.

सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव

GST रिफॉर्म के बीच कांग्रेस क्यों कर रही राहुल गांधी के पुराने ट्वीट रिपोस्ट?

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GST रिफॉर्म के बीच कांग्रेस क्यों कर रही राहुल गांधी के पुराने ट्वीट रिपोस्ट?

भारत सरकार की तरफ से GST में किए गए बदलाव को लेकर राहुल गांधी अपने कई पुराने ट्वीट सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.कांग्रेस का कहना है कि आठ साल बाद बीजेपी को अपनी गलती का अहसास हुआ है, जबकि कांग्रेस इसका पहले से ही विरोध कर रही है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने उन पुराने ट्वीट को शेयर किया, जिनमें उन्होंने लिखा था कि कांग्रेस 18% CAP के साथ एक रेट के लिए संघर्ष जारी रखेगी. उन्होंने कहा था कि अगर बीजेपी ये काम नहीं करेगी, तो कांग्रेस करके दिखाएगी.

दरअसल, सरकार की तरफ से GST को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं. ये सभी बदलाव 22 सितंबर से पूरे देश में लागू भी हो जाएंगे. सरकार की तरफ से GST को लेकर लाए गए नियमों से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी. नए नियमों के अनुसार जीएसटी की दरें अब केवल 5% और 18% होंगी. वहीं 12% और 28% के स्लैब को समाप्त कर दिया गया है.

”राहुल गांधी के पुराने ट्वीट रिपोस्ट राहुल गांधी ने सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐसे ट्वीट शेयर किए जिसमें एक ट्वीट 8 साल पुराना है और दुसरा 9 साल पुराना है.”

2017 में शेयर किए गए ट्वीट में लिखा था कि भारत को गब्बर सिंह टैक्स नहीं, सरल GST चाहिए। कांग्रेस और देश की जनता ने लड़कर कई वस्तुओं पर 28% टैक्स खत्म करवाया है. 18% CAP के साथ एक रेट के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा. अगर भाजपा ये काम नहीं करेगी, तो कांग्रेस करके दिखाएगी. वहीं 2016 के ट्वीट में लिखा था कि जीएसटी दर पर 18% की सीमा सभी के हित में है.

यहां देखें पोस्ट:

”इस पर पवन खेड़ा ने कहा कि शुरू से राहुल जी 2 स्लैब्स की बात कर रहे हैं. एक सिंप्लिफिकेशन होना चाहिए. हमारी सलाह मानने में 9 साल लग गए. वाकई इनकी समझ कम है या घमंड है.”

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने बीजेपी पर साधा निशाना; कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि मैं आठ साल बाद सरकार को अपनी गलती का एहसास होने पर उसकी सराहना करता हूं. उन्होंने कहा कि आठ साल तक बीजेपी ने मध्यम वर्ग और गरीबों को निचोड़ा है. कांग्रेस नेता ने कहा कि उस समय हमने सलाह दी थी कि ऐसा कर नहीं लगाया जाना चाहिए, लेकिन उस समय न तो प्रधानमंत्री और न ही मंत्रियों ने हमारी बात सुनी. उन्होंने कहा कि मैंने संसद में भी आवाज उठाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. चिदंबरम ने कहा कि GST की दरें 12% और 18% से घटाकर घटाकर 5% कर दी गई हैं.

GST परिषद मात्र एक औपचारिकता: जयराम रमेश कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है. बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जीएसटी परिषद की बैठक से पहले पीएम मोदी ने 15 अगस्त को जीएसटी की दरों को घटाने की बात कही थी. उन्होंने बीजेपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जीएसटी परिषद अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है?

कांग्रेस नेता ने कहा कि पीएम को कांग्रेस ने 2017 में भी ध्यान दिला दिया कि उनके द्वारा लिया गया निर्णय गलत है. उन्होंने कहा कि इसे इसे गुड एंड सिंपल टैक्स कहा गया था, लेकिन यह ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स साबित हुआ.

“भारत-चीन पर पुतिन का ट्रंप को सीधा मैसेज, जानें किस ओर इशारा कर रहे रूसी राष्ट्रपति”

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“भारत-चीन पर पुतिन का ट्रंप को सीधा मैसेज, जानें किस ओर इशारा कर रहे रूसी राष्ट्रपति”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन से सीधा संदेश दिया है. बुधवार को चीन में हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने एक बार फिर बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था यानी मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर की मांग दोहराई. चीन की चार दिन की यात्रा पूरी करने के बाद पुतिन ने कहा कि भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते वजन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

अब समय आ गया है कि दुनिया की राजनीति या सुरक्षा पर किसी एक देश का दबदबा न रहे. उन्होंने कहा कि भारत और चीन जैसे आर्थिक दिग्गज मौजूद हैं,

हमारी अर्थव्यवस्था भी क्रय शक्ति समानता (PPP) के हिसाब से टॉप-4 में है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई एक देश राजनीति या सुरक्षा में हावी हो. सब बराबर होने चाहिए. उन्होंने एकध्रुवीय दुनिया यानी यूनिपोलर वर्ल्ड के मॉडल को पुराना और नाइंसाफी करार दिया. तो आखिर यह बाइपोलर वर्ल्ड ऑर्डर है क्या? और पुतिन जिन देशों की बात कर रहे हैं, वे कौन-कौन से हैं?

पुतिन का इशारा किस तरफ पुतिन ने साफ किया कि नई बहुध्रुवीय दुनिया पुराने साम्राज्यवादी ढाँचे की नकल नहीं करेगी और न ही कोई नया दबंग ताकत पैदा होगा.

उन्होंने BRICS और SCO जैसे मंचों को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि यहाँ सभी देश बराबरी से भागीदारी करते हैं. दरअसल, शीत युद्ध के बाद से वैश्विक राजनीति में अमेरिका ही सबसे बड़ी ताकत बना रहा. इस दौर को unipolar world ऑर्डर कहा गया, जहाँ एक ही सुपरपावर का दबदबा था.

मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर क्या है लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. चीन, भारत, रूस और ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएँ न सिर्फ तेजी से बढ़ रही हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज भी बुलंद कर रही हैं.

मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर का मतलब है कि वैश्विक फैसले सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि कई मजबूत देशों और समूहों की ओर से मिलकर तय किए जाएँ. BRICS और SCO जैसी ग्रुपिंग्स इसी सोच की झलक हैं, जहाँ सदस्य देश बराबरी से भागीदारी की बात करते हैं. आसान भाषा में समझें तो बहुध्रुविय दुनिया का मतलब है एक ऐसा इंटरनेशनल सिस्टम जहां कोई अकेला बॉस न हो बल्कि कई देशों की ताकत और हित एक साथ मिलकर वैश्विक राजनीति और सुरक्षा का संतुलन तय करें. ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट नीति का मकसद आर्थिक संरक्षणवाद और सैन्य ताकत से फिर से अमेरिका की बादशाहत कायम करना है जिसे पुतिन ने चुनौती दी है.

कौन-कौन है मुख्य खिलाड़ी भारत-  सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत का संबंध पश्चिम और रूस, चीन के साथ भी हैं.

चीन- अमेरिका को टक्कर देने वाली इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी पावर. ट्रंप ने टैरिफ लगाकर चीन को झुकाना चाहा मगर ऐसा हुआ नहीं.

रूस-  सैन्य ताकत और ऊर्जा संसाधनों के जरिए अहम भूमिका निभाता है.

ब्राजील-लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, BRICS का अहम हिस्सा.

दक्षिण अफ्रीका -अफ्रीका में राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व का दावा करता है.

”कुछ बड़े समूह भी है जो मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर को बढ़ावा दे रहे हैं. जैसे BRICS (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका), SCO- शंघाई सहयोग संगठन (चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान + मध्य एशियाई देश).”’

”तीसरा G20, भले ही ये एक ग्लोबल मंच है, लेकिन इसमें उभरती अर्थव्यवस्थाएँ अमेरिकी यूरोपीय दबदबे को संतुलित करती हैं. इसके अलावा इंडोनेशिया, सऊदी अरब, ईरान जैसे देश भी अक्सर मल्टीपोलर वर्ल्ड का समर्थन करते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि सिर्फ अमेरिका या पश्चिम ही नियम तय करें.”’/

अमेरिका बनाम चीन: GDP में कौन कितना आगे?

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अमेरिका बनाम चीन: GDP में कौन कितना आगे?

नई दिल्ली। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक वर्चस्व की दौड़ लगातार तेज़ होती जा रही है। 2025 की ताज़ा वैश्विक रिपोर्ट्स दर्शाती हैं कि जहां नाममात्र GDP (Nominal GDP) के मामले में अमेरिका अब भी सबसे ऊपर है, वहीं क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर चीन ने बाज़ी मार ली है।

अमेरिका अब भी शीर्ष पर Nominal GDP में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अमेरिका की कुल नाममात्र GDP लगभग 30.5 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँच गई है। इसके मुकाबले चीन की GDP 19.2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास आंकी गई है। इसका अर्थ है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था चीन से करीब 1.6 गुना बड़ी बनी हुई है।

PPP में चीन का बढ़ता दबदबा हालांकि, यदि GDP को क्रय शक्ति समानता (Purchasing Power Parity – PPP) के आधार पर मापा जाए, तो परिदृश्य उलट जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, 2025 में चीन की GDP (PPP) लगभग 39.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच चुकी है, जबकि अमेरिका की PPP GDP 30.3 ट्रिलियन डॉलर के करीब है। इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो चीन अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन चुका है।

क्यों फर्क है Nominal और PPP में? नाममात्र GDP आमतौर पर डॉलर के मुकाबले मापी जाती है और वैश्विक वित्तीय ताकत को दर्शाती है, जबकि PPP GDP यह बताती है कि किसी देश की घरेलू अर्थव्यवस्था में कितनी वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं। इसलिए चीन, जो कि कम उत्पादन लागत और विशाल जनसंख्या के कारण घरेलू खपत में सक्षम है, PPP के पैमाने पर अमेरिका से आगे निकल चुका है।

विकास दर में भी चीन आगे GDP वृद्धि दर के मामले में भी चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ा है। 2025 में अमेरिका की अनुमानित विकास दर 1.9% रही, जबकि चीन ने लगभग 4% की दर से वृद्धि दर्ज की है। यह अंतर भविष्य में चीन की संभावनाओं को और मज़बूत बनाता है।

“मानसून अलर्ट – 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी, अगले 48 घंटों का पूर्वानुमान देखें”

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“मानसून अलर्ट – 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी, अगले 48 घंटों का पूर्वानुमान देखें”

देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी तरह से सक्रिय हो गया है. देश के कई राज्य ऐसे हैं जहां भारी बारिश ने तबाही मचा रखी है. खासकर पहाड़ी इलाकों में लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ आ गई है.

दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर बारिश हो रही है. बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. मौसम विभाग (IMD) ने देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, तेज हवाओं और तूफान को लेकर चेतावनी जारी की है. पंजाब में भारी बारिश को देखते हुए स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी कर दी गई है. बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं कई जगहों पर अत्यधिक बारिश ने किसानों को काफी निराश किया है.

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 40 घंटों तक उत्तर-पश्चिम भारत समेत देश के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। आईएमडी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत कई अन्य इलाकों में भारी बारिश देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, कुछ इलाकों में गरज के साथ छींटे और हल्की बारिश भी देखने को मिल सकती है।

अगले 48 घंटों तक इन राज्यों में बारिश की चेतावनी देश के कई राज्यों में अगले 48 घंटों तक बारिश जारी रहने वाली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और यूपी के कुछ इलाकों में भारी से भारी बारिश देखने को मिल सकती है। इसके अलावा कई जगहों पर मध्यम बारिश भी देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा असम, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तटीय आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश जारी रहने वाली है।

दिल्ली-एनसीआर में मौसम की स्थिति आईएमडी के अनुसार, दिल्ली में अगले चार दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, तेज़ हवाएँ चलने और गरज के साथ छींटे पड़ने की भी संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में 7 सितंबर तक बारिश जारी रहने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, पश्चिमी राजस्थान में 5 से 7 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना है। आईएमडी के अनुसार, 4 और 5 सितंबर को गुजरात क्षेत्र में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। अगले 7 दिनों में गुजरात और मध्य महाराष्ट्र में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।

आईएमडी ने छह सितंबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान जताया है। इसके अलावा झारखंड और ओडिशा में पांच सितंबर तक भारी बारिश की संभावना है।