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”SCO Summit : प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं”

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”SCO Summit : प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं”

नई दिल्ली: SCO Summit चीन के तियानजिन शहर रविवार से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट चल रहा है। इस मौके पर पीएम मोदी सात साल बाद चीन के दौरे पर हैं। रविवार को तियानजिन में उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।

SCO Summit जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को SCO समिट से पहले फोटो सेशन में हिस्सा लिया। इसके बाद पुतिन और जिनपिंग से मुलाकात की। तीनों नेता एक दूसरे के हाथ पकड़े नजर आए। इस दौरान मोदी ने पुतिन को गले भी लगाया। जिसके बाद पीएम मोदी ने पुतिन और जिनपिंग के साथ बातचीत की। पीएम ने SCO शिखर सम्मेलन स्थल पर पहुंचने पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन को गले भी लगाया।

समिट में पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की केमिस्ट्री लोगों का ध्यान खींच रही है। सामने आई तस्वीरों में तीनों को एक-दूसरे के साथ हंस-हंसकर बातें करते हुए देखा जा सकता है। दस सदस्यीय एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन सोमवार को चीन के तियानजिन में शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संगठन के अन्य नेताओं के साथ मिलकर इस समूह की भावी दिशा तय करने के लिए एक दिवसीय शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श शुरू किया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेताओं का स्वागत किया।

“प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं

शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें शेयर की। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “तियानजिन में बातचीत जारी है! एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ विचारों का आदान-प्रदान।”

सीमा विवाद को रिश्तों पर हावी नहीं होने देना चाहिए… जिनपिंग ने PM मोदी से क्या कहा…..चीनी विदेश मंत्रालय का बयान

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चीन के तियानजिन में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए यहां पहुंचे पीएम मोदी ने जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसने भारत और चीन के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया. दोनों नेताओं की इस बैठक को लेकर अब चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया है.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से कहा कि दोनों देशों के लिए “मित्र” बने रहना “सही विकल्प” है और उन्हें सीमा विवाद को अपने संबंधों को परिभाषित नहीं करने देना चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘हाथी (भारत) एवं ड्रैगन (चीन)’ को एक-दूसरे की सफलता का मिलकर जश्न मनाना चाहिए.
शी ने कहा, “हम दोनों (देशों) के कंधों पर अपने लोगों के भले के लिए काम करने, विकासशील देशों का कायाकल्प करने एवं उनकी एकजुटता को बढ़ावा देने और मानव समाज की प्रगति को गति देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है.” उन्होंने कहा, “दोनों के लिए यह सही विकल्प है कि वे ऐसे दोस्त बनें जिनके बीच अच्छे पड़ोसियों वाले और सौहार्दपूर्ण संबंध हों, वे ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों और ड्रैगन और हाथी एक साथ नृत्य करें.”
जिनपिंग ने मोदी से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को ‘रणनीतिक’ और ‘दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य’ से देखना चाहिए. शी ने कहा, “दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाइयों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना एवं संभालना होगा ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों का निरंतर, मजबूत और स्थिर विकास हो सके.” चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, शी ने पीएम मोदी से कहा कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी हैं तथा दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि विकास के अवसर हैं।

उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर स्पष्ट रूप से निशाना साधते हुए कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को बनाए रखना चाहिए. शी ने कहा कि भारत और चीन को एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए भी काम करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए मिलकर काम करने और एशिया एवं दुनिया भर में शांति और समृद्धि में उचित योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी को भी आगे बढ़ाना होगा.”
शी ने मोदी से कहा कि दुनिया इस समय ऐसे बदलावों से गुजर रही है जो सदी में एक बार होते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक है. चीन और भारत पूर्व में स्थित दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और हम ‘ग्लोबल साउथ’ के सबसे पुराने सदस्य भी हैं.”
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है, जो प्रौद्योगिकी और सामाजिक-आर्थिक विकास के मामले में कम विकसित माने जाते हैं’ ये देश मुख्यतः दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित हैं. इसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देश शामिल हैं.
सबसे खास बात यब है कि है कि एससीओ समिट से इतर पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच यह बातचीत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की शुल्क संबंधी नीति से पैदा हुई उथल पुथल की पृष्ठभूमि में हुई.

करीब आ रहा डॉलर का अंत….दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों का कम हो रहा भरोसा, 35 साल में पहली बार सामने आया ऐसा आंकड़ा

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अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप कितनी भी दादागिरी और धौंस दिखाने की बात करें, लेकिन डॉलर का अंत अब करीब आ रहा है. 35 साल में पहली बार ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिसे देखकर ट्रंप ही नहीं पूरे अमेरिका की आंखें खुली रह जाएंगी. इन आंकड़ों में साफ दिख रहा है कि अब दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों का डॉलर पर भरोसा कम होता जा रहा है. केंद्रीय बैंक अपने खजाने में डॉलर जमा करने के बजाय सोने पर दांव लगा रहे हैं.
दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों से जुटाए आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि साल 1990 के बाद पहली बार अमेरिकी सरकार के बॉन्‍ड (ट्रेजरीज) का भंडार सोने के मुकाबले कम हो गया है. दरअसल, दुनियाभर सभी देशों के सेंट्रल बैंक अपनी सुरक्षा और आपात स्थिति के लिए रिजर्व रखते हैं. इसमें ज्‍यादातर अमेरिकी डॉलर का भंडार होता है, जबकि कुछ मात्रा में यूरो, सरकारी बॉन्‍ड और गोल्‍ड भी होते हैं. हाल के आंकड़े बताते हैं कि अब केंद्रीय बैंकों ने ज्‍यादातर भंडार डॉलर के बजाय गोल्‍ड से भरना शुरू कर दिया है.

क्‍या कहती है रिपोर्ट
‘यूरोपियन सेंट्रल बैंक इंटरनेशनल रोल ऑफ द यूरो 2025’ नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी केंद्रीय बैंकों के पास कुल मिलाकर 36,000 टन सोना रखा हुआ है. अगर मौजूदा बाजार भाव से इसकी कीमत निकालें तो करीब 3.6 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 310 लाख करोड़ रुपये होगी. जून, 2024 के सर्वे के अनुसार, इस दौरान डॉलर की वैल्‍यू करीब 3.8 ट्रिलियन बताई गई है. यह आंकड़ा एक साल पहले का है और अभी सोने की कीमत 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जिसकी वजह से सोने की वैल्‍यू निश्चित रूप से डॉलर से ज्‍यादा पहुंच गई है.

क्‍यों गोल्‍ड की तरफ भाग रहे बैंक
वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के अनुसार, यूक्रेन से युद्ध के बाद रूसी सेंट्रल बैंक के पास जमा डॉलर और यूरो को लॉक कर दिया गया था. इसके बाद से सेंट्रल बैंकों ने ऐसे विकल्‍प की तलाश शुरू कर दी जिससे ‘सैंक्‍शन प्रूफ’ बनाया जा सके. गोल्‍ड इस मामले में सबसे ऊपर है, जो कभी फ्रीज नहीं किया जा सकता.
अमेरिका पर लगातार कर्जा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में किसी तरह की परेशानी आने पर डॉलर पर भी संकट बढ़ सकता है. लिहाजा सेंट्रल बैंक अपनी पूंजी अमेरिका के कर्ज में नहीं फंसाना चाहते.
सेंट्रल बैंक अपने एसेट का डाईवर्सिफिकेशन भी कर रहे हैं, क्‍योकि वह सारी पूंजी एक ही जगह फंसाना नहीं चाहते हैं. यही वजह है कि सेंट्रल बैंक डॉलर, यूरो, गोल्‍ड का मिक्‍स एसेट बनाना चाहते हैं.
कितना गोल्‍ड खरीद रहे बैंक
वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल की मानें तो बैंकों ने साल 2022 में 1,082 टन सोना खरीदा, जबकि 2023 में 1,037 टन तो 2024 में 1,045 टन सोने की खरीद की है. यह खरीद एक दशक पहले की औसत सालाना खरीद से करीब दोगुना है. साल 2025 में अभी तक सोने की खरीद कम रही, लेकिन कीमतें नीचे आते ही इसके फिर बढ़ने की संभावना है. इस साल पहली तिमाही में 244 टन सोना खरीदा गया, जबकि दूसरी तिमाही में 166 टन सोने की खरीदारी हुई. लंदन कंसल्‍टेंसी ने भी अनुमान लगाया है कि इस साल 1,000 टन सोने की खरीद हो जाएगी.

आगे और बढ़ेगी डॉलर की मुसीबत
विश्‍व स्‍वर्ण परिषद का मानना है कि 43 फीसदी केंद्रीय बैंक आगे भी सोने की खरीद का प्‍लान बना रहे हैं.
95 फीसदी लोगों का मानना है कि सोने की कीमत अभी आगे और बढ़ेगी.
आरबीआई ने भी मार्च, 2025 तक अपने सोने का भंडार बढ़ाकर 880 टन पहुंचा दिया है.
डॉलर की बादशाहत अब भी बनी हुई है, क्‍योंकि आईएमएफ के अनुसार 2025 तक फॉरेक्‍स रिजर्व में 58 फीसदी हिस्‍सेदारी डॉलर की ही है.

25 जिले, 110 विधानसभा क्षेत्र और 1300 किमी की यात्रा…अब पटना की सड़कों पर वोटर क्रांति, सियासी ताकत और एकता

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इंडिया गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा का समापन पटना में एक विशाल पैदल मार्च के साथ हो रहा है. 1,300 किमी की इस यात्रा ने 25 जिलों और 110 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया. बीते 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित प्रयासों के खिलाफ थी. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने इसे जनता की आवाज बनाने की भरपूर कोशिश की है. आज के इस मार्च में इंडिया गठबंधन के दिग्गज नेता शामिल हैं. आरजेडी के तेजस्वी यादव, कांग्रेस के राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, एनसीपी की सुप्रिया सुले, टीएमसी के युसूफ पठान, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, सीपीआई (एमएल) के दीपंकर भट्टाचार्य और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश साहनी एक मंच पर नजर आएंगे. तेजस्वी यादव ने इसे लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताया है, जबकि राहुल गांधी ने इसे बिहार की जनता की ताकत का प्रतीक कहा है.
कांग्रेस-आरजेडी की तैयारी
कांग्रेस और आरजेडी ने इस समापन के लिए व्यापक तैयारी की है. पटना के गांधी मैदान में विशाल सभा की व्यवस्था की गई है जहां हजारों समर्थक जुटेंगे. आरजेडी ने अपने सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं को पूरे बिहार से बुलाया है, जबकि कांग्रेस ने भी बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया हुआ है. यात्रा ने वोट चोरी का मुद्दा बड़े ही आक्रामक तरीके से उठाया है. दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीबों को ध्यान में रखकर शुरू की गई इस यात्रा को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अहम बताया जा रहा है.
एसआईआर पर सवाल
बता दें कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर इंडिया गठबंधन ने सवाल उठाए हैं. तेजस्वी यादव ने इसे ‘वोट चोरी’ करार दिया, जबकि राहुल गांधी ने कहा कि यह गरीबों और हाशिए पर रहने वालों के अधिकारों पर हमला है. हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है. लेकिन, जानकारों की नजर में इस यात्रा ने चुनाव आयोग पर गड़बड़ियां करने के आरोप के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है.

इस यात्रा का एक और बड़ा उद्देश्य महागठबंधन के दलों की एकजुटता को दर्शना है. इसको प्रदर्शित करने के लिए कांग्रेस की प्रियंका गांधी, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन जैसे नेताओं ने इस यात्रा में शिरकत की. जाहिर है यह यात्रा बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन की एकता और ताकत का प्रदर्शन है. तेजस्वी यादव को गठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने को लेकर कांग्रेस ने अभी खुले तौर पर हामी नहीं भरी है, लेकिन माना जा रहा है और इस मार्च से उनकी स्थिति और मजबूत होगी. सुप्रिया सुले और संजय राउत जैसे नेताओं की मौजूदगी गठबंधन की एकता के लिए अहम कही जा रही है. माना जा रहा है कि यह मार्च बिहार की जनता को एनडीए सरकार के खिलाफ एकजुट होने का संदेश देगा.

सप्‍ताह के पहले दिन ही महंगा हो गया तेल, देशभर में बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम

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ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल के दाम एक बार फिर बढ़कर 68 डॉलर की तरफ जा रहा है. इसका असर सोमवार सुबह खुदरा बाजार पर भी दिखा और आज देश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में उछाल देखा जा रहा है. सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी तेल की खुदरा कीमतों में आज कई जगहों पर तेजी तो कुछ शहरों में नरमी दिख रही है. हालांकि, देश के चारों महानगरों में तेल की खुदरा कीमतों पर कोई असर न‍हीं हुआ है.
सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार, यूपी के गौतमबुद्ध नगर जिले में पेट्रोल 27 पैसे सस्‍ता होकर 94.87 रुपये लीटर बिक रहा है. डीजल भी 25 पैसे गिरा और 87.82 रुपये लीटर पहुंच गया है. गाजियाबाद में पेट्रोल 21 पैसे बढ़त के साथ 94.76 रुपये लीटर पहुंच गया, जबकि डीजल 23 पैसे चढ़कर 87.52 रुपये लीटर बिक रहा है. हरियाण राजधानी गुरुग्राम में पेट्रोल 17 पैसे बढ़त के साथ 94.57 रुपये लीटर हो गया तो डीजल 19 पैसे चढ़कर 87.76 रुपये लीटर बिक रहा है.

कच्‍चे तेल की बात करें तो बीते 24 घंटे में इसकी कीमतें मामूली रूप से बढ़ गई हैं. ब्रेंट क्रूड का भाव 67.40 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. डब्‍ल्‍यूटीआई का रेट भी बढ़त के साथ 63.92 डॉलर प्रति बैरल के भाव पहुंच गया है.
चारों महानगरों में पेट्रोल-डीजल के दाम
– दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर
– मुंबई में पेट्रोल 103.44 रुपये और डीजल 89.97 रुपये प्रति लीटर
– चेन्नई में पेट्रोल 100.76 रुपये और डीजल 92.35 रुपये प्रति लीटर
– कोलकाता में पेट्रोल 104.95 रुपये और डीजल 91.76 रुपये प्रति लीटर

इन शहरों में बदल गए रेट
– गाजियाबाद में पेट्रोल 94.76 रुपये और डीजल 87.52 रुपये प्रति लीटर हो गया है.
– नोएडा में पेट्रोल 94.87 रुपये और डीजल 87.82 रुपये प्रति लीटर हो गया है.
– गुरुग्राम में पेट्रोल 94.57 रुपये और डीजल 87.76 रुपये प्रति लीटर हो गया है.

आधी रात में दिल्ली में डोली धरती, अफगानिस्तान में 20 लोगों की मौत, भारी नुकसान की आशंका

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बीती रात जब आप सो रहे थे तब राजधानी दिल्ली की धरती भूकंप के तेज झटकों से दहल उठी. ये झटके इतने तेज थे कि आधी रात में ही लोगों को घर से बाहर भागना पड़ा. इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में था, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्कैक पर 6.0 थी. इस भूकंप की वजह से अफगानिस्तान में 20 लोगों की मौत हुई है. कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं. मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई है.
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के पाकिस्तान सीमा के पास नंगरहार प्रांत में था. अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार भूकंप जलालाबाद से 27 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में 8 किलोमीटर की गहराई पर आया. यह भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 11:47 बजे आया. USGS के मॉडल अनुमान के अनुसार इस भूकंप से सैकड़ों लोगों की मौत हो सकती है और व्यापक क्षति होने की आशंका है. USGS के अनुसार लगभग पांच लाख लोग इस भूकंप से प्रभावित हुए, जिन्हें मध्यम से बहुत तीव्र झटके महसूस हुए. इस तरह के झटके कमजोर संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.
भारी नुकसान की आशंका
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार नंगरहार प्रांत के स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता अजमल दरवेश ने बताया कि भूकंप में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई और 25 अन्य घायल हुए हैं. हालांकि, मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि बचाव कार्य जारी है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश आज रात के भूकंप से हमारे कुछ पूर्वी प्रांतों में मानवीय और आर्थिक नुकसान हुआ है. उन्होंने आगे बताया कि स्थानीय अधिकारी और निवासी प्रभावित लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

राजधानी काबुल और आसपास के प्रांतों से सहायता टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों की ओर रवाना हो चुकी हैं. मुजाहिद ने कहा कि बचाव और राहत कार्यों के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जाएगा. भूकंप के लगभग 20 मिनट बाद उसी क्षेत्र में 4.5 तीव्रता का एक आफ्टरशॉक आया, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी. इसके बाद 5.2 तीव्रता का एक और आफ्टरशॉक दर्ज किया गया.

USGS के PAGER सिस्टम ने इस भूकंप के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया, जो आर्थिक और मानवीय नुकसान की भविष्यवाणी करता है. अलर्ट में कहा गया कि इस स्तर के भूकंपों में व्यापक तबाही की संभावना होती है और क्षेत्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है.

“1396 करोड़ के लोन फर्जीवाड़े का खुलासा: ओडिशा में ईडी की बड़ी कार्रवाई, महंगी गाड़ियां-ज्वेलरी बरामद”

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“1396 करोड़ के लोन फर्जीवाड़े का खुलासा: ओडिशा में ईडी की बड़ी कार्रवाई, महंगी गाड़ियां-ज्वेलरी बरामद”

ओडिशा में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों की संपत्तियां, लक्ज़री गाड़ियां और ज्वेलरी बरामद की हैं. यह छापेमारी शंक्ति रंजन दास के घर और उनकी कंपनियों अनमोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड (AMPL) और अनमोल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड (ARPL) के दफ्तरों पर की गई.

देश के बड़े बैंक फ्रॉड मामलों में है ये मामला ईडी की यह कार्रवाई देश के सबसे चर्चित बैंक फ्रॉड मामलों में से एक इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड (ITCOL) से जुड़ी है. जांच एजेंसी के मुताबिक, 2009 से 2013 के बीच ITCOL और इसके डायरेक्टर्स ने बैंकों से करीब 1396 करोड़ रुपये का लोन फर्जी तरीके से लिया. बाद में इस पैसे को शेल कंपनियों के ज़रिए इधर-उधर कर दिया गया ताकि इसका वास्तविक इस्तेमाल छिपाया जा सके.

ईडी ने इस मामले में पहले ही 310 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की थी, जिसमें से 289 करोड़ रुपये अप्रैल 2025 में बैंकों को वापस दिलवाए गए. लेकिन जांच अब भी जारी है, और एजेंसी को शक है कि इस घोटाले की परतें और गहरी हो सकती हैं.

काले धन को सफेद बनाने का खेल ईडी की शुरुआती जांच में पता चला है कि ITCOL ने अपनी शेल कंपनियों के माध्यम से 59.80 करोड़ रुपये ओडिशा स्थित अनमोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर किए. आरोप है कि AMPL के एमडी शंक्ति रंजन दास ने ITCOL के प्रमोटर राकेश कुमार शर्मा की मदद की और बैंक लोन से प्राप्त रकम को माइनिंग बिज़नेस में निवेश कर उसे वैध दिखाने की कोशिश की.

इस तरीके से न सिर्फ काले धन को वैध बनाया गया, बल्कि बैंक फ्रॉड के पैसे से माइनिंग और अन्य कारोबार खड़ा करने की साज़िश भी की गई.

छापेमारी में मिली लक्ज़री लाइफ़स्टाइल की झलक ईडी की तलाशी के दौरान जो संपत्तियां और सामान बरामद किए गए, उनमें महंगी गाड़ियां, ज्वेलरी और नकदी शामिल हैं.

10 लक्ज़री गाड़ियां और 3 सुपरबाइक (कुल कीमत 7 करोड़ रुपये से ज्यादा)

बाइक समेत अन्य महंगी गाड़ियां और बाइक्स 1.12 करोड़ रुपये की ज्वेलरी 13 लाख रुपये नकद ज़मीन-जायदाद से जुड़े अहम दस्तावेज़ 2 लॉकर भी फ्रीज़ किए गए ईडी अधिकारियों का कहना है कि बरामद गाड़ियां और ज्वेलरी इस बात का सबूत हैं कि लोन की रकम का इस्तेमाल नाजायज तरीके से विलासिता की जिंदगी जीने में भी किया गया.

जांच में और बड़े खुलासों की उम्मीद ईडी ने साफ किया है कि यह छापेमारी जांच का शुरुआती चरण है. बरामद दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की पड़ताल के बाद आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. एजेंसी अब ITCOL, AMPL और इससे जुड़ी अन्य कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है.

Noida New Liquor Rules:”नोएडा में नया नियम! 21 साल से कम उम्र वालों को बार-पब में नहीं मिलेगी शराब, मालिकों को सख्त हिदायतें”

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Noida New Liquor Rules:“नोएडा में नया नियम! 21 साल से कम उम्र वालों को बार-पब में नहीं मिलेगी शराब, मालिकों को सख्त हिदायतें”

नोएडा में शराब पीने के शौकीन युवाओं के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है. अब अगर आपकी उम्र 21 साल से कम है, तो शहर के किसी भी पब या बार में आपको शराब नहीं मिलेगी.

प्रशासन ने इसको लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं और बार-पब मालिकों को कड़ी चेतावनी दी है. नए नियम का मकसद नाबालिगों को शराब से दूर रखना और सामाजिक माहौल को बेहतर बनाना है.

नोएडा में प्रशासन ने शराब परोसने को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अब जिले के पब और बार में नाबालिगों को शराब परोसने पर न सिर्फ भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि लाइसेंस रद्द होने तक की कार्रवाई हो सकती है. हाल ही में बढ़ती शिकायतों को देखते हुए आबकारी विभाग ने बार और पब पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है/ इसी कड़ी में जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने गार्डन गैलेरिया मॉल के बार मालिकों और प्रबंधकों के साथ बैठक कर उन्हें साफ निर्देश दिए हैं कि नियम तोड़ने पर कोई ढील नहीं बरती जाएगी.

आबकारी विभाग का एक्शन आबकारी विभाग ने साफ कर दिया है कि नाबालिगों को शराब परोसने पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. अगर किसी बार या पब में नियमों की अनदेखी पाई गई, तो सीधे एक्शन लिया जाएगा. बैठक के दौरान कुछ संचालकों ने परिवार के साथ आने वाले नाबालिगों के मामलों का हवाला देते हुए आयु सीमा लागू करने में दिक्कत बताई, लेकिन जिला आबकारी अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यह कानूनन नियम है और इसे सख्ती से लागू करना ही होगा.

इसके साथ ही सभी बार और पब को अपने एंट्री गेट के नोटिस बोर्ड पर लिखना होगा कि 21 साल से कम उम्र वालों को शराब नहीं परोसी जाएगी. वहीं, हाल ही में सस्ती शराब परोसने की शिकायतों पर विभाग ने दोहराया कि नई आबकारी नीति के अनुसार 1,000 रुपये से कम MRP वाली शराब की बिक्री प्रतिबंधित है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, जबकि बार संचालकों ने आश्वासन दिया कि वे निर्धारित नियमों का पालन करेंगे.

‘मन की बात’ की 125वीं कड़ी का मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सहित मंत्रियों और नागरिकों ने किया श्रवण

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 125वीं कड़ी का सीधा प्रसारण आज नवा रायपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद उद्योग एवं व्यापार परिसर के कन्वेंशन सेंटर में हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री श्री लखन देवांगन, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण और नागरिक उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की घड़ी में देशवासियों द्वारा एक-दूसरे की सहायता करना भारत की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि विपत्ति के समय जो सहयोग और एकजुटता दिखाई देती है, वही भारत की संस्कृति और सामूहिक चेतना को परिभाषित करती है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने संबोधन में खेलों को न केवल स्वास्थ्य बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी आधार बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि खेलकूद में सक्रिय भागीदारी कर अपने जीवन और देश दोनों को ऊर्जावान बनाएं.

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि ‘मन की बात’ हर माह प्रदेशवासियों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक सोच और राष्ट्रीय चेतना को प्रबल करता है।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि कौशल विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े क्षेत्रों में हुए सहयोग और निवेश से राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ में कौशल विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू होगा।

राज्य की रजत जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाए। उन्होंने कहा कि सरकार और जनता के साझा प्रयासों से राज्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का संदेश हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। हमें सामूहिक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ को विकास और सुशासन की नई ऊँचाइयों पर ले जाना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर एक समृद्ध और स्वच्छ छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

अवैध रेत उत्खनन पर प्रशासन की सख्ती

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अवैध रेत उत्खनन पर रोकथाम के लिए सतत कार्यवाही की जा रही है। नदी में भारी संख्या में ट्रैक्टर लगाकर रेत उत्खनन की सूचना प्राप्त होने पर टीम के पहुंचने पर मौके नदी तट पर लगभग 14 ट्रैक्टर रेत से भरे जा रहे थे और उत्खनन कार्य में 100 से अधिक श्रमिक सक्रिय थे। अवैध रेत उत्खनन वालों के विरूद्ध पर्यावरण संरक्षण और कानून व्यवस्था के मद्देनज़र कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

जिला बलरामपुर-रामनुजगंज के विकासखंड शंकरगढ़ के डीपाडीह कला क्षेत्र में गलफुल्ला नदी से हो रहे अवैध रेत खनन पर राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुसमी ने जानकारी दी है कि गलफुल्ला नदी में भारी संख्या में ट्रैक्टर लगाकर रेत उत्खनन की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल संयुक्त दल का गठन किया। जिस पर नायब तहसीलदार शंकरगढ़ और थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात कराया गया था। टीम के पहुंचने पर मौके पर पाया गया कि नदी तट पर लगभग 14 ट्रैक्टर रेत से भरे जा रहे थे और उत्खनन कार्य में 100 से अधिक श्रमिक सक्रिय थे। थाना प्रभारी ने संयम और सूझबूझ से कार्य करते हुए पहले श्रमिकों की भीड़ को शांतिपूर्वक हटाया।

इसके बाद नायब तहसीलदार की मौजूदगी में सभी ट्रैक्टरों को जब्त कर पुलिस चौकी डीपाडीह में रखा गया। साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 में विहित प्रावधानों के तहत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही पृथक से की जा रही है। गौरतलब है कि कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के संयुक्त प्रयास से अवैध रेत खनन एवं परिवहन पर कड़ी कार्यवाही की जा रही है। उल्लेखनीय है कि एनजीटी के आदेशानुसार 15 जून से 15 अक्टूबर 2025 तक नदियों से रेत खनन पूर्णतः प्रतिबंधित है, जिसके तहत पर्यावरण संरक्षण और कानून व्यवस्था के मद्देनज़र अवैध रेत उत्खनन करने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।