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“भारत-फिजी के रिश्तों ने पूरे पैसिफिक क्षेत्र के साथ हमारे जुड़ाव को नई ताकत दी है: पीएम मोदी”

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“भारत-फिजी के रिश्तों ने पूरे पैसिफिक क्षेत्र के साथ हमारे जुड़ाव को नई ताकत दी है: पीएम मोदी”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को हैदराबाद हाउस में फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका से (Fiji PM And PM Modi) मुलाकात की. दोनों नेताओं ने भारत और फिजी के बीच लंबे पुराने रिश्तों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की.

Fiji PM And PM Modi के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता इस मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘2014 में 33 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने फिजी की धरती पर कदम रखा था. मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि ये सौभाग्य मुझे मिला था. उस समय हमने ‘फोरम फॉर इंडिया-पेसिफिक आइसलैंड कॉरपोरेशन’ यानी एफआईपीआईसी की शुरुआत की थी. उस पहल ने न केवल भारत-फिजी रिश्तों को, बल्कि पूरे पैसिफिक क्षेत्र के साथ हमारे जुड़ाव को नई ताकत दी है.’

उन्होंने कहा, ‘भारत और फिजी के बीच आत्मीयता का गहरा नाता है. 19वीं सदी में, भारत से गए 60,000 से अधिक गिरमिटिया भाई-बहनों ने अपने परिश्रम और पसीने से फिजी की समृद्धि में योगदान दिया है. उन्होंने फिजी की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता में नए रंग भरे हैं. उन्होंने फिजी की एकता और अखंडता को लगातार मजबूती प्रदान की है और इसी के बीच वे अपनी जड़ों से भी जुड़े रहे हैं और अपनी संस्कृति को संजोए रखा है. फिजी की रामायण मंडली की परंपरा इसी का जीवंत प्रमाण है. प्रधानमंत्री राबुका द्वारा गिरमिट-डे की घोषणा का मैं अभिनंदन करता हूं; यह हमारे साझा इतिहास को सम्मान है.’

प्रधानमंत्री मोदी (Fiji PM And PM Modi) ने कहा कि हमने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है. इसके लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया गया है. फिजी की सिक्योरिटी को सशक्त करने के लिए भारत से ट्रेनिंग और इक्विपमेंट में सहयोग दिया जाएगा. साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन के क्षेत्रों में हम अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं. हम एकमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में सहयोग और समर्थन के लिए हम प्रधानमंत्री राबुका और फिजी सरकार का आभार व्यक्त करते हैं. हमने तय किया है कि फिजी यूनिवर्सिटी में हिंदी और संस्कृत पढ़ाने के लिए भारतीय शिक्षक भेजे जाएंगे और फिजी के पंडित भारत आकर प्रशिक्षण लेंगे और गीता महोत्सव में भी भाग लेंगे.

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने पोस्ट किया, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका का स्वागत किया, जो हमारे महत्वपूर्ण दक्षिणी वैश्विक और एफआईपीआईसी साझेदार हैं.

पीएम मोदी ने लंच का किया आयोजन बता दें कि फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका रविवार 24 अगस्त को नई दिल्ली पहुंचे. यह उनकी इस पद पर भारत की पहली यात्रा थी. प्रधानमंत्री मोदी (Fiji PM And PM Modi) ने राबुका के सम्मान में दोपहर के भोजन का भी आयोजन किया था. फिजी के प्रधानमंत्री ने राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी.

अपने आधिकारिक कार्यक्रमों के अलावा, प्रधानमंत्री राबुका राजधानी में भारतीय विश्व मामलों की परिषद में ‘शांति का सागर’ विषय पर एक व्याख्यान भी देंगे. यह यात्रा भारत और फिजी के बीच जुलाई में सुवा, फिजी में हुए विदेश कार्यालय परामर्श के छठे दौर के कुछ ही सप्ताह बाद हो रही है. इस परामर्श ने दोनों देशों को स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता विकास, व्यापार और निवेश, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का मौका दिया.

“भारत में लॉन्च को तैयार Starlink: जानिए कीमत, स्पीड और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर असर”

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“भारत में लॉन्च को तैयार Starlink: जानिए कीमत, स्पीड और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर असर”

नई दिल्ली: एलन मस्क की सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सेवा को आखिरकार भारत में संचालन की मंजूरी मिल गई है। उम्मीद की जा रही है कि कंपनी अगले तिमाही में आधिकारिक लॉन्च करेगी। हालांकि, इसके लिए अभी कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, जिनमें पॉइंट ऑफ प्रेज़ेन्स स्थापित करना, सैटकॉम गेटवे की स्वीकृति, नेटवर्क उपकरण का लाइसेंस और स्पेक्ट्रम हासिल करना शामिल है।

Starlink सेटअप और कीमत शुरुआती सेटअप चार्ज 30,000 से 35,000 के बीच हो सकता है। मासिक सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत 3,000 से 4,200 तक रहने की उम्मीद है।

इंटरनेट स्पीड 25 Mbps से 220 Mbps तक मिलेगी। शहरी उपभोक्ताओं के लिए यह स्पीड भले बहुत खास न लगे, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में यह सेवा किसी क्रांति से कम नहीं होगी ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव विशेषज्ञों का कहना है कि जहां शहरी इलाकों में पहले से फाइबर ब्रॉडबैंड उपलब्ध है, वहीं ग्रामीण बाज़ारों में Starlink अपनी मजबूत पकड़ बना सकता है। यह सेवा बिजली कटौती या प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित इलाकों में भी कनेक्टिविटी बनाए रखने में मददगार होगी।

SpaceX की ग्लोबल योजना अब तक SpaceX ने करीब 7,000 लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। कंपनी का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 40,000 सैटेलाइट करना है। Starlink वर्तमान में 70 से अधिक देशों में उपलब्ध है और अब भारत इसका अगला प्रमुख बाज़ार बनने जा रहा है।

आसान शब्दों में कहें तो, Starlink का भारत में आगमन उन लाखों ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आएगा, जिन्हें अभी तक भरोसेमंद इंटरनेट सेवा नहीं मिल पा रही थी।

“India-US Tariff War: भारत ने अमेरिका में टैरिफ के खिलाफ हायर की दूसरी लॉबिंग फर्म”

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“India-US Tariff War: भारत ने अमेरिका में टैरिफ के खिलाफ हायर की दूसरी लॉबिंग फर्म”

भारत के वॉशिंगटन डीसी स्थित दूतावास ने अमेरिका में एक दूसरी लॉबिंग फर्म को हायर किया है. इसका मकसद है अमेरिका में भारत की छवि को बेहतर बनाना और अमेरिका की सरकार व मीडिया से अच्छे रिश्ते बनाना है.

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब अमेरिका भारतीय सामानों पर 50% का भारी टैक्स लगाने जा रहा है, जिससे भारत के एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ सकता है.

भारत ने मर्करी पब्लिक अफेयर्स नाम की कंपनी के साथ 75,000 डॉलर प्रति महीने का तीन महीने का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है, जो 15 अगस्त से शुरू हो गया है. यह कंपनी भारत की तरफ से अमेरिकी सरकार में पैरवी मीडिया से बातचीत, सोशल मीडिया रणनीति और डिजिटल प्रचार जैसे काम संभालेगी.

ये लोग देखेंगे भारत का काम: इस फर्म में दो खास लोग भारत का काम देखेंगे, जिसमें डेविड विटर (अमेरिका के लुइसियाना राज्य से पूर्व सीनेटर) और ब्रायन लांजा (ट्रंप की 2020 टीम में कम्युनिकेशन डायरेक्टर रह चुके हैं) शामिल हैं. इनके साथ चार लोगों की टीम काम करेगी, जिसमें केविन थॉमस भी हैं जो न्यूयॉर्क राज्य सीनेट के लिए चुने गए पहले भारतीय-अमेरिकी हैं.

मर्करी फर्म की ट्रंप की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स से भी अच्छी जान-पहचान है. वह नवंबर 2024 तक इसी कंपनी की लॉबिस्ट रह चुकी हैं. भारत ने यह नई फर्म तब हायर की है जब कुछ लोग यह कह रहे थे कि पाकिस्तान ने अमेरिका में भारत से बेहतर लॉबिंग की है. पाकिस्तान ने ट्रंप के पूर्व बॉडीगार्ड कीथ शिलर की कंपनी को हायर किया है.

भारत ने कंपनी को किया हायर: इससे पहले, अप्रैल 2025 में भारत ने SHW Partners LLC नाम की कंपनी को भी हायर किया था, जिसके प्रमुख हैं जेसन मिलर जो ट्रंप के सलाहकार रह चुके हैं. उस कंपनी का साल भर का कॉन्ट्रैक्ट 1.8 मिलियन डॉलर है. दुनिया के कई देश अमेरिका में एक से ज्यादा लॉबिंग फर्म रखते हैं, क्योंकि हर फर्म की अलग-अलग भूमिका होती है जिसमें कोई सरकार से संपर्क करता है, कोई मीडिया से, तो कोई सोशल मीडिया संभालता है. कुछ देश तो 5-6 फर्म भी रखते हैं.

‘तीन चुनाव हारने के बाद…’, अमित शाह ने राहुल गांधी पर बोला जोरदार हमला”

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‘तीन चुनाव हारने के बाद…’, अमित शाह ने राहुल गांधी पर बोला जोरदार हमला”

Amit Shah Interview: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सोशल मीडिया के जरिए जनता में केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा सीधे जनता से जुड़कर संवाद करती है.

उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम को मैनेज करने और जनता से संवाद करने में बहुत फर्क होता है. उन्होंने राहुल गांधी की सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रील्स को महज प्रोग्राम मैनेजमेंट बताया. मीडिया से इंटरव्यू में शाह ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रील्स से जनता के बीच भ्रम पैदा नहीं किया जा सकता. शाह ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल लोगों में एक तरह का भ्रम पैदा करना है, लेकिन वे सफल नहीं होंगे क्योंकि हमारा सीधा संवाद उनसे कई गुना ज्यादा है.

अमित शाह ने कहा कि लगातार तीन चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी की निराशा इतनी बढ़ गई है कि वे सामान्य विवेक भी खो चुके हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के बीच हमेशा जाती रहती है, वहीं कांग्रेस केवल दिखावे पर आधारित कार्यक्रमों तक सीमित रहती है.

पोस्टों में सरकार की आलोचना राहुल गांधी हाल ही में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय हुए हैं. उनकी कई रील्स और पोस्ट में सरकार की आलोचना, बेरोजगारी और कथित वोट चोरी जैसे मुद्दों को उठाया गया है. कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी का यह कैंपेन युवाओं और आम जनता से जुड़ने का प्रयास है.

सीआईएसएफ की तैनाती पर सफाई इसी दौरान, संसद में सीआईएसएफ की तैनाती पर उठे विवाद पर भी अमित शाह ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि संसद में मौजूद कोई भी बल स्पीकर के अधिकार में आता है. शाह ने कहा कि पहले संसद में दिल्ली पुलिस के लोग रहते थे, अब सीआईएसएफ है लेकिन जब वे संसद के सुरक्षा घेरे में आते हैं तो उन्हें मार्शल माना जाता है और वे केवल स्पीकर के आदेश पर ही कार्य करते हैं.

विपक्ष के आरोप को किया खारिज शाह ने विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि सीआईएसएफ की तैनाती विरोध को दबाने के लिए की गई है. उन्होंने कहा कि यह केवल सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है और इसे राजनीति से जोड़ना गलत है.

“PMO High Level Meeting: ट्रंप के डबल टैरिफ बम को लेकर कल होगी PMO की अहम बैठक, क्या भारत करेगा पलटवार!”

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“PMO High Level Meeting: ट्रंप के डबल टैरिफ बम को लेकर कल होगी PMO की अहम बैठक, क्या भारत करेगा पलटवार!”

भारतीय निर्यातकों के सामने अमेरिकी बाजार में बढ़ते टैरिफ की चुनौती से निपटने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा रही है. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) मंगलवार यानी 26 अगस्त को एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित करने जा रहा है, जिसमें इस मुद्दे पर गहन चर्चा होगी.

इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव द्वारा किए जाने की संभावना है. अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लागू टैरिफ को दोगुना कर 50% कर दिया है, जो बुधवार से प्रभावी होगा. इस कदम से भारतीय निर्यातकों पर लागत का दबाव बढ़ गया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने निर्यातकों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ सलाह लेना शुरू किया है ताकि मौजूदा 25% टैरिफ के प्रभाव को समझा जा सके. कंपनियों का कहना है कि पहले ही उनके लाभ मार्जिन में कमी आई है और वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई है.”

लक्षित समर्थन पर जोर बैठक में व्यापक नीतिगत उपायों के बजाय विशिष्ट उद्योगों के लिए लक्षित समर्थन पर चर्चा होगी. निर्यातकों ने आपातकालीन ऋण लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की मांग की थी, जिसमें सरकार समर्थित जोखिम कवर के साथ संपार्श्विक-मुक्त कार्यशील पूंजी प्रदान करती है. हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्र-विशिष्ट हस्तक्षेप अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं. इसके अलावा, तरलता के दबाव को कम करने के लिए क्लस्टर-आधारित कार्यशील पूंजी निधि पर भी विचार किया जा रहा है.

एसएमई पर विशेष ध्यान सरकार की रणनीति का केंद्रबिंदु लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) और निर्यात की जाने वाली इकाइयों की सुरक्षा है, जो वैश्विक झटकों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं. 50% टैरिफ का असर कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान और विशेष रसायन जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है.

मंगलवार को होगी रणनीति को अंतिम रूप मंगलवार की बैठक में भारत की प्रतिक्रिया की रूपरेखा को अंतिम रूप देने की उम्मीद है. सरकार का यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए बढ़ती चुनौतियों के बीच राहत प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. इस बैठक में लिए गए निर्णय न केवल निर्यातकों को राहत देंगे, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने में भी मदद करेंगे.

“जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर हो रही राजनीति पर भड़के शाह, विपक्ष के ‘हाउस अरेस्ट’ के दावे पर दिया मुंहतोड़ जवाब”

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“जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर हो रही राजनीति पर भड़के शाह, विपक्ष के ‘हाउस अरेस्ट’ के दावे पर दिया मुंहतोड़ जवाब”

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (25 अगस्त) को स्पष्ट किया कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा है.

उन्होंने विपक्ष के उन दावों को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि धनखड़ को “नजरबंद” किया गया है. न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “धनखड़ साहब का त्यागपत्र अपने आप में स्पष्ट है. उन्होंने अपने इस्तीफे के लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों तथा सरकार के सदस्यों के अच्छे कार्यकाल के लिए उनका हार्दिक आभार भी व्यक्त किया है.”शाह ने इस बात पर जोर दिया कि धनखड़ ने संवैधानिक पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया और उनका इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से हुआ.

विपक्ष के “नजरबंद” दावों पर शाह का पलटवार कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा धनखड़ के “नज़रबंद” होने के दावे के बारे में पूछे जाने पर, अमित शाह ने कहा कि सच और झूठ की व्याख्या केवल विपक्ष के बयानों पर आधारित नहीं होनी चाहिए. उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर हंगामा करने के खिलाफ चेतावनी दी. शाह ने कहा, “ऐसा लगता है कि सच और झूठ की आपकी व्याख्या विपक्ष के बयानों पर आधारित है. हमें इस सबका बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए. धनखड़ एक संवैधानिक पद पर थे और उन्होंने संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया. उन्होंने व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया. इस मुद्दे पर ज्यादा विचार-विमर्श नहीं करना चाहिए.”

शाह की यह टिप्पणी कई विपक्षी नेताओं द्वारा अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए जाने के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि सरकार ने धनखड़ को “खामोश” कर दिया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के साथ-साथ उन्हें चुप कराने की भी बात हुई है.

सलवा जुडूम मामले में शाह का विपक्ष पर हमला उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कथित “वामपंथी” समर्थक सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को नामित करने के लिए इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम पर रेड्डी का फैसला ही एकमात्र कारण था कि वामपंथी उग्रवाद, जो अपनी मृत्युशय्या पर था, दो दशकों से अधिक समय तक जीवित रहा.

शाह ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और मांग की कि कांग्रेस नेता को विपक्षी गठबंधन द्वारा ऐसे उम्मीदवार को चुनने के फैसले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए जो “वामपंथी विचारधारा से सहानुभूति रखता है” और जिसके फैसले ने “सशस्त्र नागरिक निगरानी समूह” को “भंग” कर दिया, जिससे 2020 से पहले नक्सलियों का सफाया नहीं हो सका.

जुलाई 2011 का फैसला, जिसे जस्टिस रेड्डी ने जस्टिस एसएस निज्जर के साथ मिलकर लिखा था, उसने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सलवा जुडूम को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए उसे भंग कर दिया था. यह फैसला तब सुनाया गया था जब छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में थी.

“दिल्ली में MP कांग्रेस की रणनीति: जिला अध्यक्षों को वोटर लिस्ट जांच का बड़ा टास्क, रतलाम में आंदोलन की तैयारी”

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“दिल्ली में MP कांग्रेस की रणनीति: जिला अध्यक्षों को वोटर लिस्ट जांच का बड़ा टास्क, रतलाम में आंदोलन की तैयारी”

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आगामी चुनावों की तैयारी को और मजबूत करने के लिए दिल्ली में 24 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में प्रदेश के सभी नव-नियुक्त जिला अध्यक्षों को वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का बड़ा टास्क सौंपा गया।

साथ ही, 31 अगस्त को रतलाम में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ आंदोलन की घोषणा की गई, जिसमें कांग्रेस के बड़े नेता शामिल होंगे। इस बैठक में शामिल होने के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बिहार यात्रा को बीच में रोककर दिल्ली पहुंचे। बैठक में जिला अध्यक्षों के लिए एक महीने में पंचायत कमेटी गठन, हर तीन महीने में कामकाज का आकलन, और हर महीने एक बड़ा प्रदर्शन व प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। इस रणनीति के तहत ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) जिला अध्यक्षों के कामकाज पर कड़ी नजर रखेगी।

दिल्ली में हुई हाई-लेवल बैठक 24 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में मध्य प्रदेश के नव-नियुक्त जिला अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, AICC संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राहुल गांधी ने अपनी बिहार ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को बीच में रोककर इस बैठक में हिस्सा लिया, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करना और आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करना था।

वोटर लिस्ट जांच का बड़ा टास्क बैठक में जिला अध्यक्षों को सबसे महत्वपूर्ण टास्क वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का दिया गया। मध्य प्रदेश में हाल ही में मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों के बाद कांग्रेस ने इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाया है। जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची का गहन निरीक्षण करें और किसी भी तरह की गड़बड़ी, जैसे डुप्लिकेट वोटर, मृत व्यक्तियों के नाम, या फर्जी पते, को चिह्नित करें।

रतलाम में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ आंदोलन बैठक में 31 अगस्त को रतलाम में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई। यह आंदोलन मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और सत्तारूढ़ दल पर वोटर मैनिपुलेशन के आरोपों के खिलाफ होगा। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

जिला अध्यक्षों के लिए ब्लूप्रिंट और टारगेट बैठक में जिला अध्यक्षों के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया गया, जिसमें निम्नलिखित निर्देश शामिल हैं: पंचायत कमेटी का गठन: सभी जिला अध्यक्षों को एक महीने के भीतर अपने जिले में पंचायत स्तर पर कमेटियां गठित करने का टारगेट दिया गया। यह कमेटियां स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करेंगी और जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगी।

कामकाज का आकलन: हर तीन महीने में जिला अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा होगी। AICC इस पर कड़ी नजर रखेगी और प्रदर्शन के आधार पर नेताओं को जवाबदेह बनाएगी। प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस : प्रत्येक जिले में हर महीने एक बड़ा प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्देश दिया गया। यह जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए होगा।

10 दिन की ट्रेनिंग : जिला अध्यक्षों को संगठनात्मक और वैचारिक प्रशिक्षण के लिए 10 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण उनकी नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने और पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने में मदद करेगा।

एकजुटता का निर्देश: नेताओं को एकजुट होकर काम करने और गुटबाजी से बचने का सख्त निर्देश दिया गया। राहुल गांधी ने कहा, “पार्टी का हर कार्यकर्ता एक परिवार है। हमें एकजुट होकर जनता के लिए लड़ना है।”

AICC की नजर, संगठन में सुधार इस बैठक ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अप्रैल 2025 में अहमदाबाद में हुए AICC सत्र के बाद शुरू हुए संगठनात्मक सुधारों का यह हिस्सा है, जिसमें जिला अध्यक्षों को संगठन का आधार बनाने का निर्णय लिया गया था। AICC जिला अध्यक्षों के कामकाज पर नजर रखेगी और उनकी प्रगति को नियमित रूप से आंकेगी। मध्य प्रदेश में 862 जिला इकाइयों में से 450 से अधिक में नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें युवा और वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध लोग शामिल हैं।

बीजेपी का हमला बीजेपी ने इस आंदोलन को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी हार को छिपाने के लिए अनावश्यक मुद्दे उठा रही है। बीजेपी प्रवक्ता रमेश ठाकुर ने कहा, “वोटर लिस्ट में कोई अनियमितता नहीं है। यह कांग्रेस की हताशा है।” जवाब में जीतू पटवारी ने कहा, “हम जनता के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बीजेपी की सच्चाई रतलाम में सामने आएगी।”

‘लालू को बचाने के लिए मनमोहन सिंह का अध्यादेश फाड़ा था राहुल गांधी ने’, अमित शाह ने कर दिया एक्सपोज”

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‘लालू को बचाने के लिए मनमोहन सिंह का अध्यादेश फाड़ा था राहुल गांधी ने’, अमित शाह ने कर दिया एक्सपोज”

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार (25 अगस्त) को कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की नैतिकता पर सवाल उठाए। अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी का रुख तीन लगातार चुनावी हार के बाद बदल गया है।

अमित शाह ने 2013 का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि उस वक्त राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट द्वारा लाए गए उस अध्यादेश को सार्वजनिक मंच पर फाड़ दिया था, जिसका उद्देश्य दोषी ठहराए गए नेताओं को बचाना था। यह अध्यादेश चारा घोटाले में दोषी ठहराए गए लालू प्रसाद यादव के हित में माना जा रहा था। क्या चंद्रबाबू नायडू उपराष्ट्रपति चुनाव में कर सकते खेला? सुदर्शन रेड्डी के बयान से मची हलचल, क्या है माजरा क्या राहुल गांधी ने RJD के लिए समझौता किया है?

यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गांधी ने राजद (RJD) के लिए समझौता किया है? अमित शाह ने कहा, “मुझे क्या कहने की जरूरत है? वह अपनी दो बातों को कैसे सही ठहराएंगे? मैं पहले ही पूछ चुका हूं। आप उनका इंटरव्यू ले सकते हैं और उनसे पूछ सकते हैं।” अमित शाह ने आगे कहा, ”लालू यादव को बचाने के लिए मनमोहन सिंह द्वारा लाए गए अध्यादेश को फाड़ने का राहुल गांधी का क्या औचित्य था? अगर उस दिन नैतिकता थी, तो क्या आज नहीं है क्योंकि आप लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं? नैतिकता के मानदंड चुनाव की जीत या हार से जुड़े नहीं होते। क्या सिर्फ तीन चुनाव हार जाने से नैतिकता बदल जाती है? नैतिकता के मानदंड हमेशा अपनी जगह स्थिर रहते हैं, जैसे सूर्य और चंद्रमा।”

यह बयान संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 के संदर्भ में आया है। इस विधेयक में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में 30 दिन तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें स्वत पद से हटा दिया जाएगा।

‘राधाकृष्णन से कुछ पर्सनल नहीं’, उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर ये क्या बोल गए सुदर्शन रेड्डी, RSS पर कही बड़ी बात अमित शाह ने कहा, “आडवाणी जी, मदनलाल खुराना और कई अन्य लोगों ने इस्तीफा दे दिया था। अभी हेमंत सोरेन जी ने इस्तीफा दे दिया है… जो भी किसी मामले में आरोपी होता था, वह इस्तीफा दे देता था। बरी होने के बाद, वे फिर से राजनीति में आ जाते थे। तमिलनाडु के कुछ मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया। दिल्ली के मंत्री और मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल) ने इस्तीफा नहीं दिया। अगर राजनीति और सामाजिक जीवन की नैतिकता का स्तर इस तरह से गिराया जा रहा है, तो हम इससे सहमत नहीं हैं।”

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने कहा कि यह कानून सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होगा, यहां तक कि प्रधानमंत्री के पद पर भी। उन्होंने इसकी तुलना इंदिरा गांधी के 39वें संशोधन से की, जिसमें शीर्ष संवैधानिक पदों को न्यायिक समीक्षा से छूट दी गई थी।

अमित शाह ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी ने खुद प्रधानमंत्री के पद को भी इस कानून के दायरे में लाया है। अगर पीएम जेल जाते हैं तो उन्हें इस्तीफा देना होगा। संविधान निर्माताओं ने कभी यह कल्पना नहीं की होगी कि कोई सीएम या पीएम जेल से सरकार चलाएगा।”

विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक गैर-भाजपा शासित राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम “संवैधानिक नैतिकता” को पुनर्स्थापित करने के लिए है। अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी नेता को जमानत मिल जाती है, तो उन्हें दोबारा पद पर बहाल किया जा सकता है।

‘अगर ऐसा न किया गया होता तो’, विपक्षी उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को लेकर अमित शाह का बड़ा खुलासा संविधान (130वां संशोधन) विधेयक के समर्थन में कौन-कौन है? यह पूछे जाने पर कि क्या चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार समेत एनडीए के सहयोगी इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं? अमित शाह ने कहा, “हां, सभी सहमत हैं। उन्हें आगे आकर समर्थन करने का मौका ही नहीं मिला। संसद में बहस नहीं होने दी गई। जब जेपीसी बुलाई जाएगी और संसद में बहस होगी, तो सभी दल अपने विचार रखेंगे।”

130वें संविधान संशोधन विधेयक पर अमित शाह ने कहा, “संसद कैसे चले, यह अकेले सत्ता पक्ष तय नहीं कर सकता। अगर विपक्ष किसी भी विधेयक या संविधान संशोधन पर स्वस्थ बहस का माहौल बनाने में विफल रहता है, तो देश की जनता तय करेगी कि यह व्यवस्था सही है या नहीं। जब यह तय हो गया कि यह विधेयक पारित नहीं होगा, तो यह जेपीसी के पास जाएगा। मैंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि सरकार ने फैसला कर लिया है कि यह विधेयक जेपीसी के पास जाएगा। दोनों सदनों की एक जेपीसी बनाई जाएगी जिसमें 31 सदस्य होंगे, जिनमें 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे।”

विपक्ष के आरोपों पर अमित शाह का पलटवार विपक्ष द्वारा उन पर लगाए जा रहे विभिन्न आरोपों पर अमित शाह ने कहा, “आज भी वे कोशिश कर रहे हैं कि अगर उन्हें कभी जेल जाना पड़ा, तो वे जेल से आसानी से सरकार बना लेंगे। जेल को ही सीएम हाउस, पीएम हाउस बना देंगे और डीजीपी, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव या गृह सचिव जेल से आदेश लेंगे। मेरी पार्टी और मैं इस विचार को पूरी तरह से खारिज करते हैं कि इस देश को उस व्यक्ति के बिना नहीं चलाया जा सकता जो वहां बैठा है। इससे संसद या विधानसभा में किसी के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक सदस्य जाएगा, पार्टी के अन्य सदस्य सरकार चलाएंगे, और जब उन्हें जमानत मिल जाएगी, तो वे आकर फिर से शपथ ले सकते हैं। इसमें क्या आपत्ति है?”

“देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का कहर जारी, राजस्थान-UP सहित कई राज्यों में स्कूल बंद, देखें लिस्ट”

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“देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का कहर जारी, राजस्थान-UP सहित कई राज्यों में स्कूल बंद, देखें लिस्ट”

देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई राज्यों में नदियों का जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन की घटनाओं के बीच प्रशासन ने एहतियातन स्कूल-कॉलेज बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

जयपुर से लेकर बांदा, चमोली, देहरादून, कुल्लू और कांगड़ा तक बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवकाश की घोषणा की गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है, ऐसे में प्रशासन हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।

देश के कई हिस्सों में जारी भारी बारिश और बाढ़ ने हालात को गंभीर बना दिया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों के जिला प्रशासन ने स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है।

जयपुर में दो दिन की छुट्टी राजस्थान के जयपुर जिले में 25 और 26 अगस्त को सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे। यह आदेश प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक के छात्रों के लिए लागू है। हालांकि, शिक्षक और स्टाफ को स्कूल आना होगा। जिला कलेक्टर ने आदेश के उल्लंघन पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

अगस्त के आखिरी सप्ताह में किस-किस दिन बंद रहेंगे बैंक? पहले ही निपटा लें जरूरी काम उत्तर प्रदेश के बांदा में स्कूल बंद बांदा जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण 25 अगस्त को कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है। यह आदेश परिषदीय, मान्यता प्राप्त और बोर्ड से जुड़े सभी स्कूलों पर लागू है।

उत्तराखंड के कई जिलों में अवकाश उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, देहरादून और नैनीताल जिलों में 25 अगस्त को सभी सरकारी-निजी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

हिमाचल प्रदेश के स्कूल-कॉलेज भी बंद हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, बंजार और मनाली में भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए हैं। इसमें सरकारी और निजी स्कूलों के साथ कॉलेज, आईटीआई, आंगनवाड़ी, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज भी शामिल हैं। कांगड़ा जिले में भी आज सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज बंद रहेंगे। वहीं, चंबा जिले में पांगी उपमंडल को छोड़कर बाकी सभी जगह स्कूल बंद हैं। हमीरपुर जिले में भी स्कूल और कॉलेज छात्रों के लिए बंद रहेंगे, लेकिन मेडिकल और रिहायशी संस्थानों को इससे छूट दी गई है।

हालात पर नजर अधिकांश जिलों में हालात की समीक्षा के बाद आगे की छुट्टियों पर फैसला लिया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और बिना जरूरत बाहर निकलने से बचने की अपील की है।

“PM मोदी ने RSS से ही क्यों चुना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को? अमित शाह ने आरोपों पर दिया ये जवाब”

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“PM मोदी ने RSS से ही क्यों चुना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को? अमित शाह ने आरोपों पर दिया ये जवाब”

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार (22 अगस्त) को महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को एनडीए (NDA) की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने का समर्थन किया।

अमित शाह ने कहा कि यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से शीर्ष पदों पर लोग आएं। अमित शाह ने कहा, ”राष्ट्रपति (द्रौपदी मुर्मू) पूर्व से हैं, प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) पश्चिम और उत्तर से आते हैं, इसलिए उप-राष्ट्रपति का उम्मीदवार दक्षिण भारत से होना स्वाभाविक है।”

NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार को चुनने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को दी गई थी। ऐसे में विपक्ष का आरोप था कि आखिर पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े शख्स को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए क्यों चुना?

राधाकृष्णन के आरएसएस से जुड़े होने पर विपक्ष द्वारा उठाए सवालों के जवाब में अमित शाह ने कहा कि यह कोई नकारात्मक पहलू नहीं है।

जगदीप धनखड़ से कितने अलग हैं ‘होने वाले उपराष्ट्रपति’ सीपी राधाकृष्णन, BJP ने कैसे अपने फैसले से किया सरप्राइज अमित शाह बोले- क्या देश ने हमें इसलिए चुना है क्योंकि हम RSS से हैं?

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के चयन को आरएसएस से जोड़ने पर अमित शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) का आरएसएस से संबंध है, मेरा भी आरएसएस से संबंध है। क्या देश ने हमें इसलिए चुना है क्योंकि हम आरएसएस से हैं? क्या आरएसएस से संबंध होना कोई माइनस पॉइंट है? अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी जी, मोदी जी भी आरएसएस से जुड़े हैं। ठीक ऐसे ही राधाकृष्णन का भी आरएसएस से यही संबंध है।”

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राधाकृष्णन पर खेला दांव अमित शाह ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से जोड़कर राधाकृष्णन की उम्मीदवारी पर उठ रहे सवालों को खारिज किया। उन्होंने कहा- “राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन बेहद लंबा रहा है। वे दो बार सांसद रहे हैं, तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं, झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और अब महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे हैं। उनका सार्वजनिक जीवन बेहद स्वच्छ रहा है और वे परिपक्व राजनेता हैं।”

उपराष्ट्रपति नामांकन और चुनाव प्रक्रिया 20 अगस्त 225 को सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा सहित कई केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उप-राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन में 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक शामिल थे। उप-राष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होंगे और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी।

सीपी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्तूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ था। वे दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं। बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक राधाकृष्णन ने 1974 में भारतीय जनसंघ (भाजपा का पूर्ववर्ती संगठन) से राजनीति की शुरुआत की और इससे पहले वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे।