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बारिश पूर्व सड़क मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण कार्यों में तेजी – शहर के उद्यानों और सार्वजनिक स्थलों के उन्नयन की तैयारी…

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राजनांदगांव: नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा मानसून के आगमन से पूर्व शहर की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए व्यापक स्तर पर मरम्मत एवं संधारण कार्य किए जा रहे हैं। नागरिकों को सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शहर की सड़कों पर गढ्डों को भरने तथा पेचवर्क का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। गौरव पथ के किनारे निर्मित चबूतरे लंबे समय से उपयोग में होने के कारण कुछ स्थानों पर प्लास्टर उखडऩे की समस्या सामने आयी है। साथ ही वाहनों की टक्कर से भी कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन चबूतरों के मरम्मत एवं रंग-रोगन का कार्य प्रस्तावित है, जिससे गौरव पथ का सौंदर्य और आकर्षण बढ़ेगा।

इसी प्रकार कलेक्ट्रेट परिसर की बाउंड्रीवाल के आवश्यक मरम्मत कार्य भी संबंधित विभाग द्वारा कराए जाएंगे। वहीं सर्विस लेन के किनारे विकसित उद्यानों के पुराने हो जाने के कारण उनके उन्नयन एवं संधारण तथा शहर के सभी उद्यानों एवं हरित क्षेत्रों के समग्र मरम्मत और संधारण के लिए बजट प्रावधान संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात चरणबद्ध तरीके से आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। इन प्रयासों से शहर की सुंदरता, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा आमजन को बेहतर सार्वजनिक अधोसंरचना का लाभ मिलेगा।

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट प्रतिबंधित…

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राजनांदगांव: संचालनालय मछली पालन विभाग द्वारा वर्षा ऋतु के दौरान मछलियों की वंशवृद्धि एवं संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक जिले के सभी नदी, नालों एवं अन्य प्राकृतिक जल संसाधनों में मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रतिबंध अवधि के दौरान ऐसे तालाब एवं जलस्रोत, जिनका संबंध नदी-नालों से नहीं है तथा जलाशयों में संचालित केज कल्चर इकाइयों को प्रतिबंध से पृथक रखा गया है। इनके अतिरिक्त सभी प्रकार के जल संसाधनों में मत्स्याखेट कार्य पूर्ण निषिद्ध रहेंगी।

तात्कालिक मरम्मत कार्यों के लिए आपदा राहत निधि मद अंतर्गत प्रशासकीय स्वीकृति…

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‘बाढ़ व अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त 32 अधोसंरचनाओं की तात्कालिक मरम्मत कार्यों के लिए आपदा राहत निधि मद अंतर्गत 5 करोड़ 69 लाख 58 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति’

राजनांदगांव: कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने बाढ़ व अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त 32 अधोसंरचनाओं की तात्कालिक मरम्मत कार्यों के लिए आपदा राहत निधि मद अंतर्गत 5 करोड़ 69 लाख 58 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है।

राजनांदगांव विकासखंड अंतर्गत बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में एनीकट तटबंध संरक्षण कार्य निर्माण के लिए 2 करोड़ 98 लाख 58 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है।

इसके तहत भर्रेगांव के लिए 49 लाख 72 हजार रूपए, जंगलेशर-मोखला के लिए 49 लाख 57 हजार रूपए, धामनसरा मोहड़ के लिए 49 लाख 94 हजार रूपए, रातापायली के लिए 49 लाख 83 हजार रूपए, मोखली के लिए 49 लाख 78 हजार रूपए, दाउटोला के लिए 49 लाख 74 हजार रूपए एनीकट तटबंध संरक्षण कार्य निर्माण हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

इसी तरह ग्राम डीलापहरी में कोढहरी नाला प्रेम लाल वर्मा के खेत के पास, ग्राम कुम्हालोरी में ढीही खलहे, ग्राम टेड़ेसरा में नलजल बोर सील बगीचा के पास, ग्राम डीलापहरी में मउहा नाला शमशान घाट के आगे, ग्राम डीलापहरी में इंदावानी बांध पहुंच मार्ग, ग्राम बरगाही में बड़े तालाब, ग्राम सिंघोला में चांदो नहर, ग्राम कोपेडीह में शमशान घाट के पास, ग्राम भोथीपार खुर्द में वार्ड क्रमांक 10 मुख्य मार्ग, ग्राम रवेली में रेवील मुक्तिधाम, ग्राम सांकरा में मुक्तिधाम रोड़ में, ग्राम खैरा में छापामार नाला के पास, ग्राम जंगलेसर में गौठान, ग्राम खुटेरी, ग्राम परमालकसा में माखन लाल साहू के खेत के पास, ग्राम धामनसरा में वार्ड नंबर 10, ग्राम ठाकुरटोला में जैन बाड़ी के पास, ग्राम कोटराभाठा में करियाभरी सुजीत खेत के पास, ग्राम कोटराभाठा में नालीपारा बांध उलट के पास, ग्राम तोरनकट्टा में वार्ड नंबर 10 तालाब के पास, ग्राम आरला में गौठान में, ग्राम कुम्हालोरी में लखोली बाड़ी नाला में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पुलिया निर्माण हेतु 10-10 लाख रूपए कुल 2 करोड़ 20 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

इसी प्रकार छुरिया विकासखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अरजकुंड में ग्वालिनडीह मार्ग में 19 लाख रूपए, ग्राम जोंधरा में मुख्य मार्ग से गौवहारी के मध्य में 4 लाख रूपए, ग्राम जोंधरा में पांगरीखुर्द मार्ग के मध्य में 10 लाख रूपए, ग्राम बोईरडीह में मुक्तिधाम नाला के पास 18 लाख रूपए की लागत से पुलिया निर्माण कार्य हेतु कुल 51 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

भारत में खुदरा महंगाई में वृद्धि, मई में 3.93 प्रतिशत…

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भारत में खुदरा महंगाई दर में मई 2023 में वृद्धि हुई है, जो 3.93 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह वृद्धि अप्रैल में 3.48 प्रतिशत से अधिक है, जिसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी है। इस लेख में हम इस स्थिति के पीछे के कारणों और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा करेंगे।

महंगाई दर में वृद्धि

भारत में खुदरा महंगाई दर मई में 3.93 प्रतिशत तक पहुँच गई, जबकि अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी है।

छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए बिछा रेड कारपेट, 9,580 करोड़ रुपये के मिले प्रस्ताव…

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इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री साय का न्योता’
आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राह’

छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए ‘रेड कारपेट’ बिछा हुआ है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गाे सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं।

सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए 4,200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।

फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे।

सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है। श्री सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 528 करोड़ रूपए के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमशः लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे। हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स, एक्सिस एनर्जी, सेल्कॉन ग्रुप, मैग्नमविंग्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर  रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चौरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की।

इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई।

कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुश्री रितु सैन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक श्री प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।

समन्वय एवं सहयोग से टीम वर्क में शहर के विकास एवं स्वच्छता के लिए करें कार्य…

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”सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सुश्री आर शंगीता ने नगरीय निकायों अंतर्गत शहरी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की”

– नगरीय प्रशासन को बेहतर बनाना एवं शासन की योजनाओं का बेहतरीन क्रियान्वयन कराना अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण कार्य
– शासन की राशि का सदुपयोग करते हुए गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय पर कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित करें
– बारिश के पहले सभी नालियों के साफ-सफाई करवाने के दिए निर्देश
– प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण करने तथा जियो टैंगिंग करने के दिए निर्देश
– विभिन्न कार्यों के लिए नगर पालिक निगम का अपने आय का स्रोत होना चाहिए
– सभी अधिकारी जनहित के लिए करें कार्य

राजनांदगांव” सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सुश्री आर शंगीता ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में नगरीय निकायों अंतर्गत शहरी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। इस अवसर पर कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव उपस्थित रहे। सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सुश्री आर शंगीता कहा कि नगरीय निकाय किसी भी प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। शहरों में विभिन्न तरह की सुविधाएं नागरिकों के लिए उपलब्ध होती है। जिसके दृष्टिगत नगरीय प्रशासन को बेहतर बनाना और शासन की योजनाओं का बेहतरीन क्रियान्वयन कराना अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण कार्य भी है।

उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय अंतर्गत विभिन्न वार्डों के लिए नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि सभी नोडल अधिकारी समग्र दृष्टिकोण से अपने संबंधित वार्ड एवं क्षेत्रों के संबंध में पूरी जानकारी रखेंगे एवं नियमित मानिटरिंग करेंगे। वे अपने क्षेत्र अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का चिन्हांकन, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, स्वच्छता एवं अन्य जानकारी से लैस रहेंगे। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यों के लिए स्वीकृत की गई।

शासन की राशि का सदुपयोग करते हुए गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय पर कार्य पूर्ण होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम आयुक्त एवं सीएमओ सहित सभी अधिकारियों को सक्रियता, ऊर्जा एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी वार्डों में जाएं व जमीन स्तर पर निरीक्षण एवं सर्वे करें तथा योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। आपसी समन्वय एवं सहयोग से सभी टीम वर्क में शहर के विकास एवं स्वच्छता के लिए कार्य करें।

सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सुश्री आर शंगीता ने कहा कि बारिश के दिनों में ऐसे स्थान जहां जल भराव की स्थिति बन सकती है, उसका चिन्हांकन करते हुए  बारिश के पहले सभी नालियों के साफ-सफाई करवाएं। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दरों की स्वीकृति समय पर होनी चाहिए। उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी एएचपी अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने आवासों के आधिपत्य एवं हितग्राहियों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण करने तथा जियो टैंगिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माणाधीन आवासों के छत, प्लिंथ, फाउंडेशन का कार्य बारिश के पहले पूर्ण करने कहा।

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के हितग्राहियों के मकान स्वीकृति के सत्यापन का कार्य भी शीघ्र करने कहा। सचिव सुश्री आर शंगीता ने स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत सार्वजनिक शौचालय के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने प्राथमिकता से शहरी क्षेत्रों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हुए कार्य करने कहा। अमृत मिशन 2.0 के कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली के बिल का भुगतान एवं अन्य कार्यों के लिए नगर पालिक निगम का अपने आय का स्रोत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी सफाई कर्मियों को संवदेनशीलतापूर्वक समय पर वेतन देना सुनिश्चित करें। सभी सीएमओ समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और जनहित के लिए कार्य करें। उन्होंने नालंदा परिसर के कार्य में गति लाने के निर्देश दिए।

कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने बताया कि जिले में नगर पालिक निगम के आय बढ़ाने के लिए शासकीय भूमि पर कमर्शियल काम्प्लेक्स का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल में कमी लाने के लिए अधोसंरचना अंतर्गत सौर ऊर्जा को बढ़वा दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में उद्यानों के मरम्मत के लिए सीएसआर के तहत औद्योगिक प्रतिष्ठानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने नगर निगम अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के संबंध में जानकारी दी।

नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा ने नगर निगम अंतर्गत किए जा रहे विभिन्न कार्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में साफ-सफाई का कार्य जारी है। वही बारिश  के मौसम को ध्यान में रखते हुए नाले की सफाई भी की जा रही है। उन्होंने जल प्रबंधन, एसआरएलएम, अमृत मिशन, निर्माणाधीन कार्य, सड़क निर्माण, नाली निर्माण, सीसी रोड निर्माण सहित विभिन्न निर्माण कार्य, नालंदा परिषद, बारिश के पहले सफाई कार्य, स्वीकृत कार्य, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, पीएम स्वनिधि योजना के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर संचालक नगरीय प्रशासन श्री आर एक्का, सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, सीईओ राज्य शहरी विकास प्राधिकरण श्री शशांक पाण्डे, उप कार्यपालन अधिकारी श्री सचित साहू व श्री सुनील अग्रहरि, संयुक्त संचालक क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग श्री जय प्रकाश साहू सहित नगर पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, तकनीकी अधिकारी, नोडल अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

नगर निगम ने विद्युत व्यवस्था, साफ-सफाई, सड़क सुधार एवं जनस्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को किया सुदृढ़….

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– नंदई से बसंतपुर महामाया चौक तक प्रभावित विद्युत व्यवस्था को त्वरित कार्रवाई करते हुए पुन: प्रकाश व्यवस्था सुचारू संचालित–  बसंतपुर क्षेत्र में पीलिया एवं डायरिया की शिकायत मिलने पर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने तत्काल पाइपलाइन एवं पेयजल स्रोतों की जांच की
– प्रभावित क्षेत्र में विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने के साथ क्लोरीन टैबलेट का किया गया वितरण, वर्तमान में क्षेत्र की स्थिति पूरी तरह नियंत्रित
– सड़क अधोसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में विभिन्न सड़कों के डामरीकरण एवं सीमेंटीकरण के कार्यों को दी जा रही प्राथमिकता
– घुमंतु मवेशियों की धरपकड़ के लिए नियमित चलाया जा रहा अभियान

राजनांदगांव” नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा शहर में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में आंधी-बारिश के कारण नंदई से बसंतपुर महामाया चौक तक शॉर्ट सर्किट से प्रभावित विद्युत व्यवस्था को त्वरित कार्रवाई करते हुए सुधार लिया गया है, जिससे क्षेत्र में पुन: प्रकाश व्यवस्था सुचारू हो गई है। शहर के चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पंथी चौक के पुराने सौंदर्यीकरण कार्य के क्षतिग्रस्त होने पर समय-समय पर मरम्मत कार्य कराया जा रहा है तथा वर्तमान बजट में प्रमुख चौक-चौराहों के व्यापक सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

निगम द्वारा साफ-सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए नियमित रूप से नालियों एवं बड़े नाला-नालों की चरणबद्ध सफाई कराई जा रही है। चिखली रोड सहित विभिन्न स्थानों पर अस्थायी कचरा संग्रहण स्थल बनाए गए हैं, जहां आसपास का कचरा एकत्र कर जेसीबी के माध्यम से उठाकर ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा जाता है तथा स्थल की नियमित सफाई की जाती है।

कुछ स्थानों पर कचरे में आग असामाजिक तत्वों द्वारा लगाई गई थी। हाल में आए अंधड़ और तूफान के कारण शहर के उद्यानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पेड़ों की टहनियां, पत्तियां एवं अन्य कचरा बिखर गया था। निगम द्वारा कर्मचारियों की अतिरिक्त तैनाती कर उद्यानों एवं सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जानकारी मिलने पर म्युनिस्पल स्कूल मैदान के गेट पर लटक रही पेड़ की डाली को हटाने के लिए भी कर्मचारियों को तत्काल निर्देश दिए गए।

नगर निगम द्वारा सड़क अधोसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में विभिन्न सड़कों के डामरीकरण एवं सीमेंटीकरण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। गुणवत्ताहीन कार्य करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए कार्य निरस्त किए गए तथा पुन: निविदा प्रक्रिया के माध्यम से नए कार्यादेश जारी किए गए हैं। जर्जर सड़कों के सीमेंटीकरण के लिए पार्षदों से प्रस्ताव प्राप्त कर शासन को भेजे गए हैं।

स्वीकृत कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। वहीं भारी वाहनों के आवागमन से क्षतिग्रस्त हुए स्पीड ब्रेकरों के सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। शहर में यातायात एवं नागरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घुमंतु मवेशियों की धरपकड़ के लिए नियमित अभियान चलाया जा रहा है।

निगम की टीम दिन एवं रात्रि दोनों समय कार्रवाई कर रही है तथा मवेशी मालिकों को पशुओं को खुले में नहीं छोडऩे के लिए लगातार समझाइश दी जा रही है। जनस्वास्थ्य की दृष्टि से बसंतपुर क्षेत्र में पीलिया एवं डायरिया की शिकायत मिलने पर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने तत्काल पाइपलाइन एवं पेयजल स्रोतों की जांच की। प्रभावित क्षेत्र में विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने के साथ क्लोरीन टैबलेट का वितरण किया गया तथा पानी के नमूने परीक्षण हेतु भेजे गए।

वर्तमान में क्षेत्र की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। नगर निगम द्वारा सफाई कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। कार्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी किए जाते हैं। साथ ही सफाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई निविदा प्रक्रिया भी संचालित की जा रही है।

विशेष आलेख – सुशासन तिहार की अनगिनत यादें, मिली खुशियों की सौगातें…

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– समर्पित एवं प्रतिबद्ध सरकार आम जनता के हित के लिए कर रही निरंतर कार्य
– गांव से लेकर शहर तक उत्सव मनाने की चली लहर
–  जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए किए गए प्रभावी प्रयास
– जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशीलता एवं तत्परतापूर्वक समस्याओं का किया गया निराकरण

राजनांदगांव। सुशासन तिहार अनगिनत यादें एवं खुशियां देकर गया, जिसका कारगर असर राजनांदगांववासियों पर दिखाई दिया। शहर से लेकर दूरस्थ अंचलों तक समस्याओं के समाधान के लिए तत्परता दिखाई दी। गांव से लेकर शहर तक उत्सव मनाने की लहर चली। ग्रीष्म ऋतु के बावजूद भी सुशासन तिहार के प्रभाव का असर रहा और बड़ी संख्या में जनमानस शिविर में शामिल हुए। सुशासन तिहार से जनमानस की आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति मिली है। सरकार से संवाद और समस्याओं के समाधान की इस पहल को व्यापक जनसमर्थन मिला और आम जनता की सहभागिता रही। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए गए है। समर्पित एवं प्रतिबद्ध सरकार आम जनता के हित के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जनसमस्या निवारण शिविर में जनमानस के बीच पहुंचकर उनके सुख-दुख को जाना। सुशासन तिहार में शामिल होकर समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इस बीच जिले को विभिन्न तरह की सौगात मिली। जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशीलता एवं सक्रियता से समस्याओं का निराकरण किया गया। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने सुशासन तिहार को गति प्रदान की। वहीं शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही।  सुशासन तिहार अंतर्गत जिले में 59 शिविरों का आयोजन किया गया।

सुशासन तिहार में किसी को किसान किताब मिली तो किसी ने लर्निंग लाईसेंस बनवाया। किसानों को बीज एवं अन्य कृषि उपकरणों का वितरण किया गया। साथ ही वैज्ञानिक एवं आधुनिक पद्धति से खेती करने के लिए जागरूक किया गया। बड़ी संख्या में शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई एवं लाभान्वित किया गया। सुशासन तिहार अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों में महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में जनमानस को बच्चों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक आहार देने के लिए प्रेरित किया गया। लोगों में अपनी समस्याओं के समाधान के प्रति जागृति रही। दूरस्थ अंचलों तक शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त हुई। जनशिकायतों के समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण किए गए। नामांतरण, बटवारा, सीमांकन के प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया गया। वही मनरेगा के लंबित मजदूरी भुगतान, आय, जाति, निवास, बिजली, हैण्डपम्प सुधार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जनमानस लाभान्वित हुए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सुशासन तिहार अंतर्गत नगर पालिक निगम राजनांदगांव के मोतीपुर स्कूल में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में शामिल हुए। शिविर के दौरान राजनांदगांव और आसपास के क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं सुविधाओं की घोषणा की गई। इसमें प्रमुख रूप से राजनांदगांव-खैरागढ़ राजमार्ग (गठुला होते हुए) के लिए 200 करोड़ रूपए की लागत से नवीन बाईपास का निर्माण। इसके साथ ही टेड़ेसरा-घुमका-बाकल मार्ग (35 किमी) के चौड़ीकरण हेतु 75 करोड़ रूपए और धनगांव-इंदामरा-बांकल मार्ग हेतु 30 करोड़ रुपए, वार्ड क्रमांक 1, 2, 3, 8 में विकास कार्यों के लिए प्रत्येक वार्ड को 25-25 लाख रूपए, डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी मंदिर के पास 15 कमरों का सर्किट हाऊस और जनपद पंचायत राजनांदगांव के नए भवन हेतु 1 करोड़ रूपए, हॉकी प्रशिक्षण के लिए नए खेल मैदान की घोषणा और जिले की महिला स्व-सहायता समूहों को पुन: रेडी टू ईट निर्माण की जिम्मेदारी की घोषणा की गई।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम मुड़पार में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में 4 करोड़ 50 लाख 59 हजार रूपए के 115 विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने ग्राम मुड़पार से खरखरा नदी तक 2 किलोमीटर सड़क निर्माण की घोषणा की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत खुटेरी जनसमस्या निवारण शिविर में सीसी रोड निर्माण के लिए 15 लाख रूपए तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में मैदान समतलीकरण के लिए 5 लाख रूपए की स्वीकृति की घोषणा की।  सिंचाई विभाग द्वारा चांदो नहर शिवनाथ डायवर्सन लाइनिंग कार्य 114 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत से किया जा रहा है, जिससे 34 ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा, जिनमें 20 पंचायते राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र की हैं। मोखला-जंगलेश्वर एनीकट निर्माण के लिए 4 करोड़ 69 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई है, जिससे कटाव रोकने एवं जल संरक्षण में मदद मिलेगी। सोमनी से खुटेरी तक 68 करोड़ रूपए की लागत से सर्विस लेन निर्माण कार्य भी शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 6 करोड़ 42 लाख 70 हजार रूपए की लागत से जिला चिकित्सालय के प्लिंथ अपग्रेडेशन एवं उन्नयन कार्य का लोकार्पण तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय का शिलान्यास किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम डिलापहरी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में 3 करोड़ 77 लाख 36 हजार रूपए की लागत के 89 विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। ग्राम डिलापहरी में उप स्वास्थ्य केन्द्र निर्माण  तथा डीएमएफ मद से विभिन्न स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए 1 करोड़ 50 लाख रूपए की घोषणा की। ग्राम डिलापहरी क्षेत्र में 63 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर को बढ़ाकर 100 केवी करने की घोषणा की। जिससे वोल्टेज की समस्या दूर होगी और बिजली आपूर्ति में सुधार आएगा।  शिविर में 242.77 करोड़ रूपए की लागत से लमती फीडर लघु जलाशय एवं नहर परियोजना स्वीकृत की गई। इस परियोजना से 36 ग्रामों में 1840 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। जिसमें राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के 10 ग्राम सुकुलदैहान, बम्हनी, धनगांव, गातापार, डिलापहरी, धर्मापुर, ढाबा, बागतराई, लिटिया सहित अन्य गांव लाभान्वित होंगे। परियोजना का कार्य प्रगति पर है तथा अगले वर्ष तक किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 13 पंचायतों के 21 गांवों में मोंगरा मल्टी विलेज योजना के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य प्रगति पर है और अगले ग्रीष्मकाल तक ग्रामीणों को इसका लाभ मिल जाएगा। सुशासन तिहार अंतर्गत शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने तथा आवेदनों का निराकरण होने से जनमानस में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास देखने को मिला।

आईआईटी मद्रास ‘भारत इनोवेट्स 2026’ नवाचारों, रणनीतिक शोध परियोजनाओं इनोवेशन और स्टार्टअप्स का प्रदर्शन….

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने मंगलवार को कहा कि वह फ्रांस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी शोकेस ‘भारत इनोवेट्स 2026’ में डीप-टेक नवाचारों, रणनीतिक शोध परियोजनाओं और अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स का प्रदर्शन करेगा।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने मंगलवार को कहा कि वह फ्रांस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी शोकेस ‘भारत इनोवेट्स 2026’ में डीप-टेक नवाचारों, रणनीतिक शोध परियोजनाओं और अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स का प्रदर्शन करेगा।

फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 14 से 16 जून के बीच आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्रीय वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों से उभरने वाले सबसे संभावनाशील तकनीकी उद्यमों की पहचान करना, उनका मार्गदर्शन करना और उन्हें वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।

आईआईटी मद्रास के अनुसार, यह कार्यक्रम भारतीय नवाचारकर्ताओं को निवेशकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शोध संस्थानों और तकनीकी साझेदारों जैसे वैश्विक हितधारकों से जोड़ने का अवसर देगा।

आईआईटी मद्रास इस कार्यक्रम में शामिल 13 थीम आधारित क्षेत्रों में से दो का नेतृत्व करेगा और संस्थान से जुड़े 15 स्टार्टअप्स को प्रदर्शित करेगा।

संस्थान के पवेलियन में पांच प्रमुख शोध परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जो डीप-टेक नवाचार और स्वदेशी तकनीक विकास में भारत की क्षमता को दर्शाएंगी।

इनमें हाइपरलूप तकनीक, लैब-ग्रोन डायमंड टेक्नोलॉजी, 5जी और 6जी संचार, पोर्ट ऑटोमेशन तथा कम कंप्यूटिंग क्षमता वाले स्वदेशी एआई (एआई) इकोसिस्टम शामिल हैं।

आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने कहा कि ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ और ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम आईआईटी मद्रास और फ्रांस के विश्वविद्यालयों, शोध प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा करेंगे।

उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम 6जी तकनीक, साझा टेस्टबेड, मानक विकास, स्टार्टअप साझेदारी, तकनीक हस्तांतरण और प्रतिभा आदान-प्रदान कार्यक्रमों जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शोध के अवसर खोलेगा।”

आईआईटी मद्रास इस आयोजन में ब्लू इकोनॉमी और नेक्स्ट-जेनरेशन कम्युनिकेशंस थीम क्षेत्रों का नेतृत्व करेगा।

कम्युनिकेशन सेगमेंट में आरईआईओ सिस्टम्स, एस्ट्रोम टेक्नोलॉजीज और विसिग नेटवर्क्स जैसे स्टार्टअप्स अपनी स्वदेशी सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो प्लेटफॉर्म, वायरलेस बैकहॉल सिस्टम और ओपेन आरएएन-आधारित 5जी समाधानों का प्रदर्शन करेंगे।

ब्लू इकोनॉमी सेगमेंट में आईआईटी मद्रास से जुड़े स्टार्टअप प्लानिस टेक्नोलॉजीज समुद्री और ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (आरओवी), ऑटोनॉमस सिस्टम और एआई-आधारित डायग्नोस्टिक तकनीकों पर आधारित अंडरवॉटर निरीक्षण समाधान पेश करेगा।

वहीं, जीरोसर्कल नामक स्टार्टअप समुद्री शैवाल से बने प्राकृतिक पॉलिमर आधारित उत्पादों का प्रदर्शन करेगा, जिन्हें पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग का टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है।

प्रदर्शित की जाने वाली रणनीतिक तकनीकों में आईआईटी मद्रास का हाइपरलूप शोध कार्यक्रम भी शामिल होगा।

रेल मंत्रालय ने आईआईटी मद्रास को हाइपरलूप तकनीक के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया है। संस्थान टीयूटीआर हाइपरलूप स्टार्टअप के साथ मिलकर प्रोपल्शन, लेविटेशन और वैक्यूम ट्यूब तकनीकों पर काम कर रहा है।

इसके अलावा, इंडियन सेंटर फॉर लैब ग्रोन डायमंड्स द्वारा विकसित ऐसी लेजर तकनीकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा, जो हीरों के अंदर अदृश्य पहचान चिन्ह डाल सकती हैं, जिससे उनकी प्रमाणिकता और ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित की जा सके।

आईआईटी मद्रास अपने स्वदेशी 5जी और 6जी नेटवर्क, स्मार्ट पोर्ट ऑटोमेशन सिस्टम और आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के माध्यम से विकसित कम कंप्यूटिंग क्षमता वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल्स को भी प्रदर्शित करेगा।

संस्थान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच भारतीय नवाचारों को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी साझेदारी और स्टार्टअप विकास के नए अवसर भी प्रदान करेगा।

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने पिछले एक दशक में सरकारी खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव…

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सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने पिछले एक दशक में सरकारी खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हुए छोटे व्यापारियों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को अभूतपूर्व अवसर प्रदान किए हैं। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिहिर कुमार ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल है, जहां विक्रेता पंजीकरण से लेकर ऑर्डर की डिलीवरी और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है।

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने पिछले एक दशक में सरकारी खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हुए छोटे व्यापारियों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को अभूतपूर्व अवसर प्रदान किए हैं। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिहिर कुमार ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल है, जहां विक्रेता पंजीकरण से लेकर ऑर्डर की डिलीवरी और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है।

जीईएम के सीईओ मिहिर कुमार ने कहा कि जब जीईएम की शुरुआत हुई थी, तब पहले वर्ष में इसका कारोबार केवल 400 से 422 करोड़ रुपए के आसपास था, लेकिन आज यह बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और समावेशी बनाया है।

मिहिर कुमार ने आगे कहा कि सरकार की नीति के तहत सरकारी खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) से किया जाना चाहिए, जबकि जीईएम पोर्टल पर यह आंकड़ा करीब 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे छोटे कारोबारियों को सीधे सरकारी बाजार से जुड़ने और अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि जीईएम की सफलता केवल कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने लाखों उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाया है। प्लेटफॉर्म पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण खरीदारों को बेहतर कीमतें और अधिक विकल्प मिल रहे हैं, जिससे सरकारी संस्थानों को भी लाभ हो रहा है।

जीईएम पर महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मिहिर कुमार ने बताया कि शुरुआती दौर में स्टार्टअप्स के माध्यम से होने वाला कारोबार केवल 2 करोड़ रुपए के आसपास था, जो अब बढ़कर 50,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

इसी तरह महिला उद्यमियों का कारोबार भी 70 करोड़ रुपए से बढ़कर 80,000 करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। इससे स्पष्ट है कि जीईएम महिलाओं और नए उद्यमियों के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा मंच बनकर उभरा है।

जीईएम के सीईओ ने बताया कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी और अब यह अपने 10 वर्षों के सफर को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में जीईएम ने वैश्विक स्तर पर एक नई मिसाल कायम की है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के केओएनईपीएस पोर्टल को छोड़ दें तो दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण हैं, जहां सरकारी खरीद को एक डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में विकसित किया गया हो। भारत सरकार की यह पहल पारदर्शिता, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाला एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुकी है।

इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। जीईएम प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) की संख्या 2016-17 में केवल 2,396 थी, जो अब बढ़कर 11.9 लाख से अधिक हो गई है।

एमएसई से सरकारी खरीद का मूल्य भी 69 करोड़ रुपए से बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। इसी अवधि में ऑर्डरों की संख्या 2,994 से बढ़कर 2.17 करोड़ से ज्यादा हो गई है।

इस प्लेटफॉर्म ने उन समूहों को भी सरकारी खरीद प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया है, जो पहले अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व रखते थे। महिला स्वामित्व वाले एमएसई की संख्या जीईएम पर 2016-17 में 268 थी, जो अब बढ़कर 2.16 लाख से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद का मूल्य 8 करोड़ रुपए से बढ़कर 93,327 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है।

इसके अलावा, स्टार्टअप्स की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। 2016-17 में जहां केवल 88 स्टार्टअप्स जीईएम से जुड़े थे, वहीं अब उनकी संख्या 40,000 से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद 2 करोड़ रुपए से बढ़कर 61,400 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच चुकी है।

इसी तरह, अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से जुड़े पंजीकृत एमएसई की संख्या 38 से बढ़कर 66,000 से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद का मूल्य 21,800 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। मंत्रालय के अनुसार, यह दर्शाता है कि जीईएम के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों की भागीदारी लगातार बढ़ी है।

सरकारी खरीद के अलावा, जीईएम ने सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, खासकर स्वास्थ्य क्षेत्र में। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 324 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज और 199 करोड़ सिरिंज की खरीद की गई है। इसके अलावा, वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेडिकल किट, डायग्नोस्टिक उपकरण और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई अन्य उत्पादों और सेवाओं की खरीद भी इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई है।

जीईएम के विकास में तकनीक की भी अहम भूमिका रही है। प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल्स, एडवांस एनालिटिक्स, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं का उपयोग कर रहा है, जिससे खरीद प्रक्रिया अधिक कुशल, जवाबदेह और उपयोगकर्ता-अनुकूल बन रही है।

मंत्रालय ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए जीईएम डिजिटल खरीद प्रणाली को और मजबूत करने पर काम कर रहा है। इसके लिए नवाचार, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म सरकारी संस्थानों, कारोबारियों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में काम कर रहा है।

सरकार के एक बड़े प्रशासनिक सुधार के रूप में शुरू किए गए जीईएम ने सार्वजनिक खरीद प्रणाली को पारंपरिक और बिखरी हुई व्यवस्था से निकालकर डिजिटल और डेटा-आधारित प्रणाली में बदल दिया है। मानव हस्तक्षेप कम होने, पारदर्शिता बढ़ने और सरकारी खरीद के अवसरों तक आसान पहुंच मिलने से देशभर के विभिन्न उद्यमों और क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ी है।

जीईएम ने कारोबार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को भी मजबूत किया है। ऑनलाइन पंजीकरण, पारदर्शी बोली प्रक्रिया, डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट प्रबंधन और पूरी तरह ऑनलाइन खरीद व्यवस्था के माध्यम से इसने छोटे-बड़े सभी व्यवसायों के लिए सरकारी आपूर्ति शृंखला में शामिल होने के अवसर बढ़ाए हैं।