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‘CG: राजधानी से बिलासपुर के बीच सफर को अब और सुरक्षित व सुगम बनाने की तैयारी: (एनएचएआई)’ नया इडस्ट्रियल कॉरीडोर बनेगा’

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राजधानी से बिलासपुर के बीच सफर को अब और सुरक्षित व सुगम बनाने की तैयारी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आरंग से दर्री तक लगभग 95 किलोमीटर लंबी 6 लेन नई सड़क का डीपीआर और पूरा खाका तैयार कर लिया है, जिस पर करीब 3800 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। परियोजना के लिए जल्द टेंडर जारी होने की संभावना है। खास बात यह है कि यह सड़क न केवल रायपुर-बिलासपुर के बीच ट्रैफिक दबाव कम करेगी, बल्कि विशाखापट्टनम और धनबाद कॉरिडोर को भी सीधे जोड़ेगी, जिससे छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

वर्तमान में रायपुर-बिलासपुर के बीच करीब 127 किलोमीटर लंबा सिक्स और फोर लेन मार्ग है, लेकिन बढ़ते ट्रैफिक के कारण सफर में दो घंटे या उससे अधिक समय लग जाता है। एनएचएआई का दावा है कि नई 6 लेन सड़क बनने के बाद यह दूरी दो घंटे से भी कम समय में तय की जा सकेगी। यदि आरंग से सीधे बिलासपुर के लिए 6 लेन सड़क बन जाती है तो शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, ट्रैफिक स्मूथ होगा और हादसों की आशंका कम होगी। आरंग के पास पारागांव में रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का जंक्शन प्रस्तावित है, जिससे यह परियोजना प्रदेश के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

जशपुर को सीधे विशाखापट्टनम से जोड़ेगा

आरंग से दर्री तक प्रस्तावित 95 किलोमीटर लंबी 6 लेन सड़क सिर्फ रायपुर-बिलासपुर के सफर को आसान नहीं बनाएगी, बल्कि इसका असर प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक दिखाई देगा। नई सड़क तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर को भी सीधे विशाखापट्टनम कॉरिडोर से जोड़ा जा सकेगा।

नया इडस्ट्रियल कॉरीडोर बनेगा

राज्य की औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए मुंबई-नागपुर समृद्धि मार्ग को रायपुर तक जोड़ने की मांग पहले रखी गई थी। इससे धनबाद से आने वाले वाहनों की कनेक्टिविटी मुंबई-हावड़ा मार्ग से हो जाएगी। भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत रायपुर-धनबाद-धनबाद-रायपुर से आने-जाने वाली गाडि़यों की लिंक मुंबई हावड़ा से होने की वजह से इकोनॉमिक कॉरीडोर को बड़ा फायदा होगा और एक्सेस कंट्रोल रोड होगा। कनेक्टिविटी मिलने से लौह अयस्क, कोयला, स्टील और सीमेंट के परिवहन में सुविधा होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कनेक्टिविटी केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे जशपुर, रायगढ़, कोरबा और बिलासपुर अंचल में औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादों की सप्लाई और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। समुद्र तटीय शहर विशाखापट्टनम तक सीधा रोड कनेक्शन बनने से निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे।

रायपुर-बिलासपुर नई 6 लेन सड़क का डीपीआर तैयार हो चुका है। जल्दी ही टेंडर जारी किया जाएगा। यह विशाखापट्टनम-धनबाद कॉरिडोर को कनेक्ट करेगा। इससे प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

 

CG: प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की बारिश होने की संभावना, मौसम का ताजा अपडेट…

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छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच मौसम में जल्द बदलाव देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है. हालांकि अगले कुछ दिनों में तापमान में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है. 15 और 16 मार्च को प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है. आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के मौसम का ताजा अपडेट और किन जिलों में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई.

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच मौसम के मिजाज में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं. अगले 24 घंटों में तापमान में खास बदलाव नहीं होगा, हालांकि इसके बाद 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट होने की संभावना जताई गई है. साथ ही 15 और 16 मार्च को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर तेज हवाओं, गरज-चमक, वज्रपात और हल्की बारिश के आसार भी बने हुए हैं.

प्रदेश में तापमान सामान्य से ज्यादा

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है. गर्मी का असर कई जिलों में महसूस किया जा रहा है, जिससे दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखा जा रहा है.

राजनांदगांव सबसे गर्म, अंबिकापुर सबसे ठंडा

प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 40.5°C राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 16.6°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया. इससे साफ है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान में काफी अंतर देखने को मिल रहा है.

15-16 मार्च को तेज हवा और गरज-चमक के आसार

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 15 और 16 मार्च को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. इसके साथ ही गरज-चमक और वज्रपात के साथ बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की भी संभावना है.

अगले दो दिनों में तापमान में गिरावट संभव

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद प्रदेश में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है. इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है.

रायपुर का मौसम रहेगा आंशिक मेघमय

राजधानी रायपुर में 16 मार्च को आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहने की संभावना है. यहां अधिकतम तापमान करीब 38°C और न्यूनतम तापमान लगभग 25°C के आसपास रहने का अनुमान है.

CG: एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को परेशानी, एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें…

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अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई में कमी का असर अब देश के गैस बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई में कमी का असर अब देश के गैस बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और लोगों को सिलेंडर के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

गैस एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार कंपनियों ने सिलेंडर की आपूर्ति पर फिलहाल कोटा सिस्टम लागू कर दिया है। इसके चलते एजेंसियों को पहले के मुकाबले कम सिलेंडर मिल रहे हैं। यदि किसी एजेंसी की औसत मासिक बिक्री लगभग 10 हजार सिलेंडर होती थी, तो अब उसे करीब 20 से 25 प्रतिशत कम आपूर्ति मिल रही है। यानी पहले जहां 10 हजार सिलेंडर की सप्लाई होती थी, वहीं अब लगभग 7500 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कंपनियों ने एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय कोटे से अधिक सिलेंडर की आपूर्ति फिलहाल संभव नहीं है। यदि किसी क्षेत्र में अतिरिक्त सप्लाई दी भी जाती है, तो उसे अगले महीने की आपूर्ति से समायोजित किया जाएगा। इससे गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के सामने सप्लाई संतुलित रखने की चुनौती बढ़ गई है।

स्थिति यह है कि कई वितरण केंद्रों पर मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। कुछ जगहों पर रोजाना करीब 2500 सिलेंडर की मांग आ रही है, जबकि वहां लगभग 500 सिलेंडर प्रतिदिन ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। इसके कारण उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में औसतन पांच दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है और कई स्थानों पर पांच से छह दिन का बैकलॉग बन गया है।

इस बीच गैस कंपनियों ने आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश भी जारी किए हैं। स्कूल, अस्पताल, धार्मिक संस्थान, सीआरपीएफ कैंटीन और सेना जैसे संस्थानों को पहले सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इंतजार का समय और बढ़ सकता है।

हालांकि सरकार और गैस कंपनियां स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सीमित सप्लाई, कोटा प्रणाली और बढ़ती मांग के कारण फिलहाल बाजार में दबाव की स्थिति बनी हुई है।

World Consumer Rights Day पर विशेष लेख जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त समाज की पहचान…

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15 मार्च को विश्वभर में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। यह दिवस उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। आज के दौर में जब बाजार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, वैश्वीकरण और डिजिटल तकनीक के कारण खरीद-बिक्री के तरीके नए रूप ले रहे हैं, ऐसे समय में उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त समाज की पहचान

उपभोक्ता अधिकार दिवस की पृष्ठभूमि

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाने की प्रेरणा 15 मार्च 1962 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति श्रवीद  F& Kennedy द्वारा अमेरिकी संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण से मिली। इस भाषण में उन्होंने पहली बार उपभोक्ताओं के चार मूलभूत अधिकारों सुरक्षा का अधिकार, जानकारी पाने का अधिकार, विकल्प का अधिकार और सुने जाने का अधिकार का उल्लेख किया था। बाद में इन सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया और वर्ष 1983 से 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

भारत में उपभोक्ता संरक्षण की व्यवस्था

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण बाजार वाले देश में उपभोक्ता अधिकारों का महत्व और भी अधिक है। यहां करोड़ों लोग प्रतिदिन विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करते हैं, इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कानून और संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है  उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने  Consumer Protection Act, 2019 लागू किया, जिसने पुराने  World Consumer Rights Day पर विशेष लेख का स्थान लिया। यह कानून उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों, घटिया या दोषपूर्ण उत्पादों, सेवा में लापरवाही, अधिक मूल्य वसूली और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
इस कानून के तहत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आयोगों की स्थापना की गई है, जहां उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज कर न्याय प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा उपभोक्ता मामलों के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) जैसी संस्थाएं भी कार्यरत हैं, जो बाजार में अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर निगरानी रखती हैं।

उपभोक्ताओं के प्रमुख अधिकार

उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित और न्यायपूर्ण बाजार व्यवस्था प्रदान करना है। प्रमुख अधिकारों में शामिल हैं-
सुरक्षा का अधिकार – जीवन और संपत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं से सुरक्षा पाने का अधिकार।
जानकारी पाने का अधिकार – वस्तु या सेवा की गुणवत्ता, मात्रा, मूल्य और उपयोग से जुड़ी सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
विकल्प का अधिकार – प्रतिस्पर्धी मूल्य पर विभिन्न विकल्पों में से वस्तु या सेवा चुनने का अधिकार।
सुने जाने का अधिकार – अपनी शिकायत या सुझाव को उचित मंच पर प्रस्तुत करने का अधिकार।
क्षतिपूर्ति का अधिकार – किसी भी प्रकार के नुकसान या शोषण की स्थिति में मुआवजा पाने का अधिकार।
उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार – अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार – स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार।

डिजिटल युग में नई चुनौतियां

आज के डिजिटल युग में ई-कॉमर्स, ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इससे उपभोक्ताओं को सुविधा तो मिली है, लेकिन साथ ही कुछ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। फर्जी वेबसाइट, नकली उत्पाद, साइबर ठगी और डेटा चोरी जैसे मामले उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।
इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने कई डिजिटल पहल शुरू की हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए  National Consumer Helpline  proतथा  E&Daakhil Portal जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। इनके माध्यम से उपभोक्ता घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उसकी स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति

भारत में उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने के लिए “जागो ग्राहक जागो” जैसे व्यापक अभियान चलाए गए हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि बाजार में सुरक्षित और समझदारी से व्यवहार करना उनकी जिम्मेदारी भी है। किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदते समय बिल अवश्य लेना, एमआरपी देखना, गुणवत्ता की जांच करना और नियम-शर्तों को ध्यान से पढ़ना जैसे छोटे-छोटे कदम उपभोक्ताओं को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस हमें यह संदेश देता है कि जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त समाज और मजबूत अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे और किसी भी प्रकार की अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तभी बाजार व्यवस्था पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बन सकेगी।

उपभोक्ता जागरूकता केवल व्यक्तिगत हितों की रक्षा नहीं करती, बल्कि यह समाज में नैतिक व्यापार, पारदर्शिता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत बनाती है। यही कारण है कि आज के समय में जागरूक उपभोक्ता को सशक्त राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

CG: साइबर ठगों से बचने की पॉवर कंपनी ने की उपभोक्ताओं से अपील…

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विद्युत उपभोक्ता रहे सतर्क, सतर्कता ही समझदारी’ ‘मोर बिजली मोबाइल एप केवल Play Store या App Store से ही डाउनलोड करें’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के भुगतान के लिए किसी अनजान वॉट्सएप, मेल अथवा एसएमएस पर क्लिक करने से बचें। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर किसी भी लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें। छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी अपनी किसी भी योजना अथवा सेवा के लिए कभी भी कोई एपीके पाइल अथवा कोई वेब लिंक नहीं भेजती है।

छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी से के एमडी श्री भीम सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना को आम उपभोक्ता तक पहुँचाने पॉवर कंपनी मैदानी स्तर पर शिविर का करेगी। उपभोक्ता अपना कोई भी भुगतान सिर्फ मोर बिजली एप, कंपनी की वेबसाइट, एटीपी सेंटर अथवा नजदीकी कार्यालय में ही करें, किसी मैदानी कर्मचारी को भी नकद भुगतान न करने की सलाह दी गई है। पंजीयन राशि के भुगतान की सुविधा केवल मोर बिजली एप, एटीपी केंद्र और संबंधित विद्युत कार्यालय के माध्यम से ही उपलब्ध कराई गई है। बिजली बिल भुगतान हो या कोई अन्य सूचना पॉवर कंपनी अपने उपभोक्ताओं को संदेश सिर्फ CSPDCL-S सेंडर ID से ही भेजती है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना अथवा विद्युत सेवा से संबंधित किसी अन्य जानकारी  के लिए पॉवर कंपनी की केंद्रीकृत कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1912 पर उपभोक्ता कॉल कर सकते हैं, अथवा नजदीकी सीएसपीडीसीएल के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

CG: मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल रायपुर के छात्रों ने सौजन्य मुलाकात की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि आपकी इस उपलब्धि से न केवल आपके विद्यालय, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह राज्य के लिए गर्व का विषय और एक बड़ी उपलब्धि है।

इस अवसर पर स्कूल के संचालक श्री सिद्धार्थ सिंह, कमांडेंट (सेवानिवृत्त) कर्नल श्री आर.के. वर्मा सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष शिक्षा मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर के सैनिक स्कूल भाग लेते हैं। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल, रायपुर ने इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त किया है।

यह प्रतियोगिता जिला स्तर से प्रारंभ होकर राज्य स्तरीय, जोन स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित की जाती है।छत्तीसगढ़ दक्षिण जोन का हिस्सा है, जिसमें केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के सैनिक स्कूल शामिल होते हैं।

CG: कान्यकुब्ज समाज छत्तीसगढ़ के विकास में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका…

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छत्तीसगढ़ में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और यह समाज प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के आशीर्वाद भवन में आयोजित कान्यकुब्ज शिक्षा मंडल के होली मिलन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कान्यकुब्ज समाज छत्तीसगढ़ के विकास में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका :  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और यह समाज प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के आशीर्वाद भवन में आयोजित कान्यकुब्ज शिक्षा मंडल के होली मिलन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में गौधाम योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां बेसहारा और घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। इन गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रभु श्रीराम से विशेष संबंध है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। उन्होंने कहा कि श्री रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक रामभक्तों को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कराए जा चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थस्थलों का दर्शन कराया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। इसके लिए राज्यभर में समाधान शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला तथा कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के पदाधिकारियों सहित सभी आयोजकों को आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, कान्यकुब्ज सभा-शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री सुरेश मिश्रा, पत्रकार शिरीष मिश्रा, राजेश मिश्रा अरविन्द अवस्थी, मोहन तिवारी, गौरव शर्मा सहित बड़ी संख्या में कान्यकुब्ज समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में गौधाम योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां बेसहारा और घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे।  इन गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रभु श्रीराम से विशेष संबंध है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। उन्होंने कहा कि श्री रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक रामभक्तों को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कराए जा चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थस्थलों का दर्शन कराया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। इसके लिए राज्यभर में समाधान शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला तथा कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के पदाधिकारियों सहित सभी आयोजकों को आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, कान्यकुब्ज सभा-शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री सुरेश मिश्रा, पत्रकार शिरीष मिश्रा, राजेश मिश्रा अरविन्द अवस्थी, मोहन तिवारी, गौरव शर्मा सहित बड़ी संख्या में कान्यकुब्ज समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

On Election: बंगाल, असम समेत 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का आज ऐलान, कांग्रेस का आया रिएक्शन, जानें क्या कहा?

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भारतीय निर्वाचन आयोग आज रविवार (15 मार्च 2026) को शाम 4 बजे 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित करेगा. शेड्यूल घोषित होते ही चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी.

कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही मॉडल ऑफ कंडक्ट यानी आचार संहिता भी लागू हो जाएगी. इस बीच प्रमुख विपक्षी पार्टी

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान में आरोप-प्रत्यारोप और तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलेगी. कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रचार में गलत जानकारी और डर का माहौल बनाने की कोशिश की जाती है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा ‘चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे 2026 के विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित करेगा. जी2 की ओर से इसे मंजूरी मिल चुकी होगी, क्योंकि जी1 ने उद्घाटन, रिबन काटने, ध्वजारोहण और शुभारंभ जैसे समारोहों का यह दौर पूरा कर लिया होगा. चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता (MCC) जल्द ही लागू होने वाली है, लेकिन 2014 से इसे मोदी की चुनावी आचार संहिता का पर्याय माना जाता रहा है – जो मानहानि, गाली-गलौज, धमकियों, भय फैलाने और झूठ का वायरस फैलाने से भरी होगी.’

पूर्व सांसद संदीप दीक्षित का बयान

वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा, ‘हम इसका स्वागत करते हैं. हम इसका लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. दरअसल, इसकी घोषणा बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी. मैं चुनाव आयोग से कहना चाहूंगा कि आपके बारे में पहले से ही बहुत संदेह हैं, लेकिन कम से कम इतनी बेशर्मी से घोषणा न करें. प्रधानमंत्री लगातार घोषणाएं करते रहते हैं और फिर अचानक आपको तारीखों की घोषणा करने का ख्याल आता है.’

आचार संहिता लागू होने के बाद क्या होगा?

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार और राजनीतिक दलों को चुनाव से जुड़े नियमों का पालन करना होगा और नई योजनाओं या बड़े सरकारी फैसलों की घोषणा पर रोक लग जाती है. चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम में मतदान की तारीख, नामांकन की अंतिम तिथि, मतगणना की तारीख और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी. इसके बाद सभी राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपने चुनाव अभियान को तेज कर देंगे. अब सबकी नजर चुनाव आयोग की घोषणा पर टिकी है, जिसके बाद राज्यों में चुनावी माहौल और तेज होने की संभावना है.

चाबहार अब परिदृश्य में दिखाई नहीं दे रहा. कांग्रेस ने उठाए पीएम मोदी की मध्य एशिया कूटनीति पर सवाल…

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ईरान के चाबहार पोर्ट परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत हुई थी और बाद में इसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे आगे बढ़ाया था.

रमेश ने कहा कि मई 2013 में केंद्र सरकार ने चाबहार बंदरगाह में शुरुआती तौर पर 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी थी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उस समय भारत भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लागू करने की दिशा में भी बड़े कदम उठा रहा था.

कांग्रेस ने परियोजना को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने मनमोहन सिंह की इस पहल को रीपैकेज कर इसे प्रधानमंत्री की नई दृष्टि के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि 2026-27 के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है, जिससे इस परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

जयराम रमेश ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में क्या-क्या लिखा?

जयराम रमेश ने लिखा कि शासन में निरंतरता एक बुनियादी सच्चाई है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते हैं. साल 1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी थी. अंततः तेहरान में आयोजित 16वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने इन योजनाओं को नई गति दी और मई 2013 में केंद्रीय कैबिनेट ने चाबहार में प्रारंभिक तौर पर 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी. यह याद रखना चाहिए कि यह फैसला उस समय लिया गया था, जब भारत अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रहा था.

शासन में निरंतरता एक बुनियादी सच्चाई है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते।

1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी थी। अंततः तेहरान में आयोजित 16वें…

भारत परियोजना से हो गया बाहर?- जयराम

आगे लिखा कि इसके बाद अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने, जैसा कि वह अक्सर करती रही है, डॉ. मनमोहन सिंह की चाबहार पहल को रीपैकेज किया और उसे पीएम मोदी की विज़न का हिस्सा बताकर पेश किया. साल 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया. क्या इसका मतलब यह है कि भारत इस परियोजना से बाहर हो गया है, या फिलहाल उसके निवेश संबंधी दायित्व पूरे हो चुके हैं?

आगे लिखा कि किसी भी स्थिति में, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह-जिसे चीन ने बनाया है-से लगभग 170 किलोमीटर पश्चिम स्थित चाबहार अब परिदृश्य में दिखाई नहीं दे रहा है. यह भारत की मध्य एशिया कूटनीति के लिए दूसरा रणनीतिक झटका है, क्योंकि इससे पहले भारत ताजिकिस्तान के दुशांबे के पास अयनी में स्थित अपने वायुसेना अड्डे को बंद कर चुका है.

क्यों खास है भारत के लिए चाबहार पोर्ट?

साउथ-ईस्ट ईरान में मौजूद चाबहार पोर्ट, भारत के लिए स्ट्रैटेजिकली सबसे इम्पोर्टेंट मैरीटाइम प्रोजेक्ट्स में से एक है. ये ईरान के थ्रू अरेबियन सी तक भारत का ओनली डायरेक्ट एक्सेस पॉइंट है, इस प्रोजेक्ट का पर्पज अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया, स्पेशली उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे कंट्रीज के लिए एक शॉर्टर और मोर रिलायबल ट्रेड रूट प्रोवाइड करना है.

Meen Sankranti 2026: मीन संक्रांति पर रखें ये सावधानियां, वरना सूर्य देव हो सकते हैं नाराज..

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Meen Sankranti 2026: संक्रांति सूर्य देव से जुड़ा पर्व माना जाता है. ये पर्व सूर्य देव को समर्पित किया गया है. संक्रांति के पर्व का संबंध ज्योतिष और धर्म शास्त्र में सूर्य देव के गोचर से बताया गया है.

यानी सूर्य जब भी एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं, तो उस राशि के नाम पर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही सभी राशियों के नाम से ये पर्व मनाया जाता है.

आज मीन संक्रांति मनाई जा रही है. आज से खरमास भी लग गया है. जोकि 14 अप्रैल को सूर्य देव के मेष राशि में जाने पर समाप्त होगा. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा और पिता का कारक माना गया है. मीन संक्रांति पर और पूरे खरमास के दौरान पूजा-पाठ विशेषकर सूर्य पूजन का महत्व बहुत अधिक होता है, लेकिन धर्म शास्त्रों में मीन संक्रांति पर कुछ सावधानियां रखने के लिए भी कहा गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मीन संक्रांति पर रखें ये सावधानियां

मीन संक्रांति से खरमास या मलमास की शुरुआत हो जाती है, इसलिए खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. ऐसे में इस दौरान ये सभी काम न करें. इस दौरान किसी बड़े निवेश या नई संपत्ति की खरीदारी से बचें. इस पूरे महीने सात्विक भोजन करें. क्रोध-अहंकार से दूर रहें. खरमास में मंत्र-जप और ध्यान करना न भूलें. इस समय में अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की सेवा अवश्य करें.

मीन संक्रांति का महत्व

धार्मिक दृष्टि से मीन संक्रांति को अत्यंत पुण्य प्रदान करने वाला दिन माना गया है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश हो जाता है और अध्यात्मिक शुद्धि होती है. इसके साथ ही दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है. जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल और धन का दान बहुत ही शुभ माना गया है.