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CG: एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को परेशानी, एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें…

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अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई में कमी का असर अब देश के गैस बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई में कमी का असर अब देश के गैस बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और लोगों को सिलेंडर के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

गैस एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार कंपनियों ने सिलेंडर की आपूर्ति पर फिलहाल कोटा सिस्टम लागू कर दिया है। इसके चलते एजेंसियों को पहले के मुकाबले कम सिलेंडर मिल रहे हैं। यदि किसी एजेंसी की औसत मासिक बिक्री लगभग 10 हजार सिलेंडर होती थी, तो अब उसे करीब 20 से 25 प्रतिशत कम आपूर्ति मिल रही है। यानी पहले जहां 10 हजार सिलेंडर की सप्लाई होती थी, वहीं अब लगभग 7500 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कंपनियों ने एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय कोटे से अधिक सिलेंडर की आपूर्ति फिलहाल संभव नहीं है। यदि किसी क्षेत्र में अतिरिक्त सप्लाई दी भी जाती है, तो उसे अगले महीने की आपूर्ति से समायोजित किया जाएगा। इससे गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के सामने सप्लाई संतुलित रखने की चुनौती बढ़ गई है।

स्थिति यह है कि कई वितरण केंद्रों पर मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। कुछ जगहों पर रोजाना करीब 2500 सिलेंडर की मांग आ रही है, जबकि वहां लगभग 500 सिलेंडर प्रतिदिन ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। इसके कारण उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में औसतन पांच दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है और कई स्थानों पर पांच से छह दिन का बैकलॉग बन गया है।

इस बीच गैस कंपनियों ने आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश भी जारी किए हैं। स्कूल, अस्पताल, धार्मिक संस्थान, सीआरपीएफ कैंटीन और सेना जैसे संस्थानों को पहले सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इंतजार का समय और बढ़ सकता है।

हालांकि सरकार और गैस कंपनियां स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सीमित सप्लाई, कोटा प्रणाली और बढ़ती मांग के कारण फिलहाल बाजार में दबाव की स्थिति बनी हुई है।