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‘LPG, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक…’ मुख्यमंत्री साय बोले- प्रदेशवासियों को घबराने की जरूरत नहीं…

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”छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र जारी है.  छत्तीसगढ़ राज्य से जुड़ी आज की खबरें पढ़ना चाहते हैं तो आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं.”

”मुख्यमंत्री साय बोले- LPG, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक”

”छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि रसोई गैस को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है.”

”मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के अधिकारियों को रसोई गैस की सुचारु सप्लाई बनाए रखने, नियमित रूप से स्टॉक की निगरानी करने और किसी भी तरह की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.”

”उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही गैस की बुकिंग करें, ताकि सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिल सके. रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर आमजन को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।”

”प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सभी जिलों के अधिकारियों को रसोई गैस की सुचारु आपूर्ति, नियमित स्टॉक मॉनिटरिंग और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें…”

ये कैसे जवाब दे रहा है Elon Musk का Grok चैटबॉट! रेसिज्म वाले रिस्पॉन्स से यूजर हैरान…

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 Elon Musk का Grok चैटबॉट!

Elon Musk की कंपनी xAI का एआई चैटबॉट Grok एक बार फिर मुश्किलों मे घिर गया है. कुछ दिन पहले बिकिनी ट्रेंड  के कारण आलोचना झेलने वाला यह चैटबॉट अब अपने रेसिस्ट और अपमानजनक रिस्पॉन्स के कारण फिर खबरों में आ गया है. बिकिनी ट्रेंड के बाद अब लोग इससे चैटबॉट से अनसेंसर्ड और अश्लील कंटेट जनरेट करने को कह रहे हैं. इस ट्रेंड ने एआई की लिमिट और इसके यूज पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं.

ग्रोक दे रहा आपत्तिजनक जवाब

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्काई न्यूज ने सबसे पहले इस ट्रेंड के बारे में रिपोर्ट किया है. इस मीडिया कंपनी ने ग्रोक के पब्लिक रिप्लाई को स्टडी किया और पाया कि कई रिस्पॉन्स में गाली और धर्म के बारे में अपमानजनक बातें कही गई थीं. इसे लेकर कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की लैंग्वेज को सहन नहीं किया जा सकता. ये भेदभाव को बढ़ाने वाली बातें हैं. यूके की सरकार ने भी इन पोस्ट को ऑफेंसिव और गैर-जिम्मेदाराना माना है. सरकार का कहना है कि सभी एआई चैटबॉट को देश के नियमों का पालन करना पड़ेगा.

बिकिनी ट्रेंड के कारण भी बढ़ी थी मुश्किलें

ग्रोक के सुर्खियों में रहने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले यह बिकिनी ट्रेंड के कारण चर्चा में आया था. तब यूजर्स के इंस्ट्रक्शन पर यह महिलाओं की अश्लील तस्वीरें क्रिएट कर रहा था. कई यूजर्स ने इससे महिलाओं और बच्चों को आपत्तिजनक पोस्ट बनाकर एक्स समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डार्क वेब पर शेयर की थी. इसे देखते हुए भारत समेत कई देशों की सरकार ने कंपनी से जवाब मांगा था. इस ट्रेंड के कारण इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में ग्रोक पर बैन भी लग गया था. विरोध बढ़ने पर एक्स ने ग्रोक की इमेज एडिटिंग कैपेबिलिटी को केवल पेड सब्सक्राइबर तक लिमिट कर दिया था. यानी केवल पेड सब्सक्राइबर के पास ही ग्रोक से इमेज एडिट कराने का ऑप्शन बचा था.

‘ऐसे कैसे चलेगा गठबंधन?’, INDIA ब्लॉक की मीटिंग में लेफ्ट नेताओं ने राहुल गांधी को ही सुना दिया…

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‘ऐसे कैसे चलेगा गठबंधन?’, INDIA ब्लॉक की मीटिंग में लेफ्ट नेताओं ने राहुल गांधी को ही सुना दिया…”

केरल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. एक तरफ लेफ्ट के नेतृत्व में एलडीएफ गठबंधन है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का यूडीएफ है. नेताओं की बयानबाजी के चलते INDIA ब्लॉक में तनाव पैदा हो रहा है.

इस बार तो लेफ्ट पार्टियों ने सीधे राहुल गांधी को ही घेर लिया है.

वामपंथी पार्टियों ने ऐतराज जताया है कि राहुल गांधी केरल में जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों पर हमला बोल रहे हैं, वह ठीक नहीं है. इससे INDIA अलायंस की एकता प्रभावित होगी और संबंधों में कड़वाहट आएगी.

जानें क्या है पूरा मामला

INDIA ब्लॉक की सोमवार (9 मार्च) को दिल्ली में मीटिंग थी, जिसमें संसद सत्र को लेकर चर्चा होनी थी. इस दौरान लेफ्ट सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने मीटिंग में आपत्ति जताई कि राहुल गांधी कम्युनिस्ट पार्टी और बीजेपी के बीच गठजोड़ की बात कैसे कर सकते हैं. बता दें कि राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि केरल में बीजेपी और कम्युनिस्ट दलों के बीच तालमेल है. इससे और आगे बढ़कर राहुल गांधी ने ‘कम्युनिस्ट जनता पार्टी’ नाम के एक टर्म का इस्तेमाल किया था, जिससे वामपंथी नेता भड़के हुए हैं. वामपंथी नेताओं ने कहा कि इस तरह सहयोगी दलों पर टिप्पणियां करने से गठबंधन कैसे चल पाएगा.

राहुल गांधी ने क्या कहा

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीटिंग के दौरान लेफ्ट सांसदों के रुख पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि इस मसले पर बाद में बात की जाएगी और हम बताएंगे कि आखिर राहुल गांधी के कहने का क्या मतलब था. उन्होंने कहा कि मीटिंग में इस तरह राहुल गांधी की स्पीच के एक हिस्से को मुद्दा बनाना ठीक नहीं है. बता दें कि इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद थे और उन्होंने कहा कि इस पर बाद में बात की जाएगी. ज्यादातर नेताओं ने कहा कि हमें फिलहाल बैठक में संसद के एजेंडे पर फोकस करना चाहिए.

दरअसल अगले कुछ ही माह में केरल में इलेक्शन होने हैं. बीते लगातार 2 कार्यकाल से वामपंथी नेतृत्व वाली सरकार सत्ता पर काबिज है और यहां बीजेपी तीसरे नंबर की पार्टी है, जबकि कांग्रेस मुकाबले में रही है. कांग्रेस को लगता है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर लेगी.

मिडिल ईस्ट में जंग के बीच संकट में बांग्लादेश, भारत करेगा दिल खोलकर मदद, भेजेगा 5000 टन तेल…

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मिडिल ईस्ट में जंग के बीच संकट में बांग्लादेश, भारत करेगा दिल खोलकर मदद, भेजेगा 5000 टन तेल…

भारत पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की आपूर्ति करेगा. यह खेप मंगलवार को पारबतिपुर सीमा के रास्ते बांग्लादेश में प्रवेश करने की उम्मीद है. यह आपूर्ति उस समझौते का हिस्सा है जिसके तहत भारत हर साल पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को 1,80,000 टन डीजल देगा.

समझौते के तहत तय आपूर्ति

बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPC) के चेयरमैन मोहम्मद रेजानुर रहमान ने बताया कि मौजूदा खेप इसी समझौते का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि समझौते के अनुसार छह महीने के भीतर कम से कम 90,000 टन डीजल बांग्लादेश को आयात करना चाहिए.

दो महीने में पूरी मात्रा आयात करने की उम्मीद

रहमान ने कहा कि आज आने वाली खेप 5,000 टन की है और उम्मीद है कि अगले दो महीनों के भीतर छह महीने के लिए तय पूरी डीजल मात्रा देश में आयात कर ली जाएगी.यह आपूर्ति ऐसे समय हो रही है जब बांग्लादेश में व्यापारियों द्वारा अवैध भंडारण और बाजार में हेरफेर को लेकर चिंता जताई जा रही है. रिपोर्टों में सामने आया है कि कुछ व्यापारी अवैध रूप से ईंधन जमा कर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं.

सरकार ने ईंधन आपूर्ति पर लगाई सीमा

बांग्लादेश उर्जा मंत्रालय ने इन रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए वाहनों की श्रेणियों के आधार पर ईंधन आपूर्ति की सीमा तय कर दी है, ताकि कृत्रिम कमी की स्थिति से निपटा जा सके. हालांकि, कुछ पेट्रोल पंपों पर इन सीमाओं से अधिक ईंधन बेचे जाने और अतिरिक्त स्टॉक जमा कर मुनाफा कमाने की खबरें भी सामने आई हैं.

अवैध भंडारण रोकने के लिए मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई

इन समस्याओं को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि अवैध भंडारण और निर्धारित सीमा से अधिक बिक्री रोकने के लिए मोबाइल कोर्ट अभियान चलाया गया. इस दौरान एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने ढाका में विभिन्न फ्यूल स्टेशनों पर कार्रवाई की. जांच में पाया गया कि सिटी फिलिंग स्टेशन पर ईंधन उपलब्ध नहीं था, जबकि क्लीन फ्यूल स्टेशन नियमों के अनुसार संचालन कर रहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दिया समान नागरिक संहिता का सुझाव, याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी…

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सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता की जरूरत बताई है. मुस्लिम महिलाओं के उत्तराधिकार से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की है.

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा है कि यूसीसी कई विषमताओं को खत्म करेगा, लेकिन इस पर निर्णय लेना संसद का काम है.

जजों ने जिस मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की उसे वकील पॉलोमी पवनी शुक्ला और न्याय नारी फाउंडेशन नाम की संस्था की निदेशक आयशा जावेद ने दाखिल किया था. याचिका में 1937 के शरीयत एक्ट के उस प्रावधान का विरोध किया गया था जो मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों की तुलना में संपत्ति में आधा हिस्सा देता है. याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकील प्रशांत भूषण ने इस प्रावधान को संविधान से हर नागरिक को मिले समानता के अधिकार का हनन बताया.

प्रशांत भूषण ने कहा कि

सुप्रीम कोर्ट शायरा बानो बनाम भारत सरकार मामले में एक साथ तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर चुका है. इस मामले में भी ऐसा किए जाने की जरूरत है. इस पर कोर्ट ने कहा, ‘आप ने मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लिकेशन एक्ट, 1937 को चुनौती दी है. मान लीजिए कि इसे रद्द कर दिया जाता है, तो उसके बाद कौन-सा कानून लागू होगा? यह बहुत अहम सवाल है. कानून को हटाने से जो शून्य पैदा होगा, उस पर विचार जरूरी है.’

जस्टिस बागची ने कहा कि अगर 1937 का कानून हट जाता है, तब भी संविधान के अनुच्छेद 372 के चलते मुस्लिम उत्तराधिकार पारंपरिक पर्सनल लॉ से चलेगा. इस पर प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि कोर्ट यह आदेश दे कि 1937 का कानून खत्म होने के बाद मुसलमानों के उत्तराधिकार के मामले इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 के तहत चलेंगे क्योंकि यह कानून पुरुष और महिला को बराबर अधिकार देता है.

इसके बाद जजों ने इस विषय को संसद के अधिकार क्षेत्र का बताया. बेंच ने कहा कि कानून बनाने का काम विधायिका का है. संसद ही व्यापक सुधार कर सकती है. चीफ जस्टिस ने कहा, ‘इस तरह के मुद्दों का वास्तविक समाधान यूनिफॉर्म सिविल कोड के जरिए ही संभव है. इससे सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू हो सकेंगे. हम पहले भी इसका सुझाव दे चुके हैं. निर्णय संसद को लेना है.’

सुनवाई के अंत में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वह अपनी याचिका में संशोधन कर दोबारा दाखिल करें. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता व्यवहारिक सुझाव दें. तभी वह इस मामले पर आगे विचार कर सकेगा. प्रशांत भूषण ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वह संशोधित याचिका दाखिल करेंगे.

अब दूसरे राज्य में गाड़ी ट्रांसफर कराना होगा आसान! सरकार खत्म करने जा रही ये बड़ी रिपोर्ट्…

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अगर आप अपनी गाड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. अभी तक दूसरे राज्य में गाड़ी ले जाने पर सबसे बड़ी परेशानी NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होती है.

इसके लिए लोगों को कई बार RTO के चक्कर लगाने पड़ते हैं और काफी समय भी लगता है, लेकिन अब सरकार इस प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी कर रही है.

रिपोर्ट्स के अनुसार नीति आयोग की एक कमेटी ने सुझाव दिया है कि राज्यों के बीच वाहन ट्रांसफर करते समय NOC की जरूरत को खत्म कर दिया जाए. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. अगर यह नियम लागू हो जाता है तो वाहन मालिकों को पुराने RTO से NOC लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी.

अभी काफी मुश्किल है वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया

फिलहाल अगर कोई व्यक्ति अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे राज्य में कराना चाहता है तो उसे कई तरह की कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले पुराने राज्य के RTO से NOC लेना जरूरी होता है. यह प्रमाण होता है कि गाड़ी पर कोई रोड टैक्स या चालान बाकी नहीं है. इसके बाद ही नया राज्य उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन लेता है. इसके अलावा वाहन मालिक को पुरानी RC, फिटनेस सर्टिफिकेट, टैक्स की रसीद और NOC जैसे कई डाक्यूमेंट्स जमा करने पड़ते हैं.

वाहन पोर्टल से आसान हो सकता है ट्रांसफर

कमेटी का सुझाव है कि गाड़ी से जुड़ी सभी जानकारी पहले से ही ‘वाहन’ पोर्टल पर मौजूद है. इस पोर्टल पर देशभर की गाड़ियों का पूरा डेटाबेस ऑनलाइन उपलब्ध है. ऐसे में यह आसानी से जांच की जा सकती है कि गाड़ी पर कोई टैक्स या चालान बाकी है या नहीं. अगर ये सिस्टम लागू होता है तो NOC की जगह ऑनलाइन ऑटोमैटिक क्लियरेंस मिल सकता है.

गाड़ी की फिटनेस होगी जरूरी

कमेटी ने एक और अहम सुझाव दिया है. इसके अनुसार गाड़ियों की उम्र के बजाय उनकी फिटनेस पर ध्यान दिया जाना चाहिए. अभी कई जगहों पर एक तय उम्र के बाद गाड़ियों को सड़कों से हटाना पड़ता है, भले ही वे अच्छी स्थिति में हों. अगर नया नियम लागू होता है तो पुरानी गाड़ियां भी सड़कों पर चल सकेंगी, बशर्ते वे सभी फिटनेस और सुरक्षा मानकों को पूरा करती हों. इससे वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है.

मदरसों में बड़े बदलाव, अब यूनिवर्सिटीज देंगी डिग्री! 53 साल पुराने एक्ट में होगा संशोधन…

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उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने की तैयारी में है. इसके तहत मदरसा शिक्षा परिषद की कामिल और फाजिल कक्षाओं की परीक्षाएं संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा कराई जाएंगी.

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार ‘उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973’ में संशोधन कराने जा रही है. संशोधन लागू होने के बाद महाविद्यालयों की तरह मदरसों को भी उसी जिले में स्थित विश्वविद्यालय से संबद्धता दी जाएगी.

विश्वविद्यालयों से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को देश-विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने, नौकरी पाने और अन्य शैक्षिक कार्यों में काफी सुविधा होती है. उनकी डिग्रियों को हर जगह मान्यता भी मिलती है. इसके विपरीत, मदरसों से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को कुछ विशेष क्षेत्रों को छोड़कर इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता और उनकी डिग्रियों को हर जगह मान्यता भी नहीं मिलती. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है, ताकि मदरसों के विद्यार्थियों को भी अन्य छात्र-छात्राओं के समान मान्यता प्राप्त डिग्री मिल सके और उन्हें शिक्षा के साथ-साथ सम्मानजनक स्थान और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें.

नई व्यवस्था के तहत जिस विश्वविद्यालय से मदरसा संबद्ध होगा, वही विश्वविद्यालय अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मदरसों में शुचिता के साथ परीक्षाएं आयोजित कराएगा और सफल विद्यार्थियों को डिग्री भी प्रदान करेगा.

मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973’ में संशोधन का प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग की ओर से तैयार कर लिया गया है. अंतिम परीक्षण के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा.

मदरसों को विश्वविद्यालय से जोड़ने पर क्या बोले योगी के मंत्री?

मदरसों में दी जाने वाली प्रमुख डिग्रियों की समकक्षता इस प्रकार है-हाईस्कूल के समकक्ष ‘मुंशी’, इंटरमीडिएट के समकक्ष ‘मौलवी’, स्नातक के समकक्ष ‘कामिल’ और परास्नातक के समकक्ष ‘फाजिल’ माने जाते हैं.

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्ताव को शासन स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इस संबंध में शासनादेश जारी करेगी.

वहीं मंत्री संजय निषाद ने यूपी मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने की योजना पर कहा, ये देश पहले शरीयत से चलता था, अब संविधान से चलता है और हर शिक्षा संविधान के आधार पर होनी चाहिए और एक समान शिक्षा होनी चाहिए. मैंने यही बात बार-बार कही है. कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए और चाहे वह धार्मिक शिक्षा हो किसी भी प्रकार की शिक्षा हो.

 चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश में कितना महंगा हो गया डीजल-पेट्रोल, भारत से कितनी ज्यादा कीमत चुका रहे लोग…

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भारत के पड़ोसी देशों में पेट्रोलियम की कीमतें और सप्लाई का हाल काफी तनावपूर्ण है. ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होने से ग्लोबल ऑयल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर पड़ोसी देशों पर पड़ रहा है.

भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और मालदीव जैसे देश शामिल हैं.

पाकिस्तान में रॉकेट बनीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं. डॉन न्यूज के मुताबिक, 7 मार्च 2026 से सरकार ने पेट्रोल को Rs 321.17 प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल को Rs 335.86 प्रति लीटर कर दिया. ये Rs 55 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी है, जो करीब 20% ऊपर है. इसकी वजह बताई गई है मिडिल ईस्ट में युद्ध से तेल की कीमतों का बढ़ना. कराची, इस्लामाबाद और लाहौर जैसे सभी छोटे-बड़े शहरों में आम लोग पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें लगा रहे हैं. ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ रहा है. पाकिस्तान ने इसे 14 देशों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बताया है.

पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ ने सोमवार रात राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका-इजरायल के ईरान पर युद्ध से ग्लोबल ऑयल क्राइसिस पैदा हो गई है, जिसके चलते सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. इनमें सभी सरकारी दफ्तरों को चार दिन काम करने का नियम लागू करना शामिल है, यानी सोमवार से गुरुवार तक. शुक्रवार को अतिरिक्त छुट्टी मिलेगी, लेकिन ये बैंक पर लागू नहीं होगा.

चीन में टैंक फुल कराने पर करीब 29 यूआन ज्यादा खर्च

चीन में तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ रहा है. नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने 9 मार्च 2026 को रिटेल फ्यूल प्राइस कैप में सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है, जो मार्च 2022 के बाद सबसे ज्यादा है. NDRC के मुताबिक, गैसोलीन (पेट्रोल) की रिटेल प्राइस कैप 695 युआन ($100.46) प्रति मीट्रिक टन बढ़ाई गई है और डीजल की 670 युआन ($96.84) प्रति मीट्रिक टन. ये बदलाव 10 मार्च 2026 से लागू हो गए हैं. इससे औसतन 92-ऑक्टेन गैसोलीन 0.55 युआन प्रति लीटर, 95-ऑक्टेन 0.58 युआन प्रति लीटर, और डीजल 0.57 युआन प्रति लीटर महंगा हुआ है. एक 50 लीटर टैंक भराने पर 27-29 युआन एक्स्ट्रा लग रहे हैं.

बांग्लादेश में फ्यूल की सप्लाई पर बड़ा संकट

बांग्लादेश की नई तारिक रहमान की सरकार ने 6-8 मार्च से फ्यूल राशनिंग लगा दी है ताकि पैनिक बाइंग रुके. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कारों को रोज 10 लीटर, मोटरसाइकिल को 2 लीटर, ट्रक-बस को ज्यादा लेकिन लिमिटेड पेट्रोल-डीजल मिल रहा है. पेट्रोल की कीमत Tk 116 प्रति लीटर, डीजल Tk 100 प्रति लीटर पर स्थिर है, लेकिन सप्लाई की वजह से स्टेशनों पर लंबी कतारें और रात भर इंतजार की खबरें हैं. बांग्लादेश 95% फ्यूल इंपोर्ट करता है, इसलिए युद्ध से डिले हो रहा है. भारत ने फ्रेंडशिप पाइपलाइन से 5,000 टन डीजल भेजा है और कुल 2.80 लाख टन इंपोर्ट फाइनल किया गया है ताकि मार्च में कमी न हो. लेकिन पैनिक बाइंग से स्थिति टाइट है.

नेपाल में ज्यादा नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

नेपाल की राजधानी कठमांडू में पेट्रोल NPR 157 प्रति लीटर और डीजल NPR 142 प्रति लीटर बिक रहा है. NOC नेपाल के मुताबिक, तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ी हैं (करीब 0.03 डॉलप प्रति लीटर), लेकिन ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई. नेपाल भारत से ज्यादातर फ्यूल इंपोर्ट करता है, इसलिए भारत की स्थिरता से फायदा मिल रहा है. लेकिन ग्लोबल प्राइस बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर असर है. कोई बड़ा राशनिंग या शॉर्टेज रिपोर्ट नहीं है.

श्रीलंका में मामूली बढ़ीं तेल की कीमतें

श्रीलंका में पेट्रोल की कीमत LKR 340 प्रति लीटर (95 ऑक्टेन) और डीजल LKR 279 प्रति लीटर के आसपास है. श्रीलंका में पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी दिखी है, यानी 0.01 डॉलर प्रति लीटर. लेकिन मार्केट प्राइस फॉर्मूला से थोड़ा कम है. कोई बड़ा संकट नहीं, लेकिन ग्लोबल क्राइसिस से ट्रांसपोर्ट और इकोनॉमी पर दबाव है.

भूटान और मालदीव में कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं

भूटान में डीजल INR 61.69 प्रति लीटर (करीब 70 BTN) है, जो भारत से इंपोर्ट पर निर्भर है. मालदीव में भी कीमतें हाई हैं लेकिन स्पेसिफिक मार्च 2026 डेटा में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा. दोनों देशों में भारत की सप्लाई से स्थिरता है.

कुल मिलाकर, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां कीमतें तेज बढ़ीं और सप्लाई पर राशनिंग लगी. नेपाल और श्रीलंका में कीमतें बढ़ीं लेकिन सप्लाई ठीक है. भारत ने घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाकर और रूस-अमेरिका से इंपोर्ट डाइवर्सिफाई करके कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन पड़ोसियों पर युद्ध का असर साफ दिख रहा है. ऑयल प्राइस 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, इसलिए आगे और दबाव बढ़ सकता है.

क्या लोक अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में दी जा सकती है चुनौती, जानें यहां कौन से मामले नहीं सुने जाते?

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देश की कानूनी व्यवस्था में लोक अदालत को समझौते के जरिए न्याय का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है. अदालतों में लंबित करोड़ों मामलों के बोझ को कम करने के लिए यह एक वरदान है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या लोक अदालत द्वारा सुनाया गया फैसला अंतिम होता है?

क्या इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है? कानूनी साक्षरता के इस दौर में यह जानना बेहद जरूरी है कि लोक अदालत की शक्ति क्या है और वे कौन से मामले हैं जिनकी सुनवाई इस मंच पर चाहकर भी नहीं की जा सकती है.

लोक अदालत के फैसले की कानूनी स्थिति

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, लोक अदालत द्वारा दिया गया फैसला एक सिविल कोर्ट की डिक्री के समान होता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आपसी सहमति पर आधारित होता है. चूंकि लोक अदालत का आदेश दोनों पक्षों की रजामंदी से आता है, इसलिए कानूनी रूप से इसके खिलाफ किसी भी उच्च अदालत (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) में कोई अपील दायर नहीं की जा सकती है. यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि विवादों का हमेशा के लिए निपटारा हो सके और अदालतों पर बोझ न बढ़े.

क्या हाई कोर्ट में चुनौती देने का कोई रास्ता बचा है?

हालांकि लोक अदालत के फैसले के खिलाफ सीधे तौर पर अपील नहीं की जा सकती है, लेकिन कानून में एक छोटा सा झरोखा खुला है. अगर किसी पक्ष को लगता है कि लोक अदालत का फैसला धोखाधड़ी, दबाव या नियमों के घोर उल्लंघन के माध्यम से लिया गया है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 के तहत हाई कोर्ट में ‘रिट याचिका’ (Writ Petition) दायर कर सकता है. ध्यान रहे, यह कोई नियमित अपील नहीं है, बल्कि केवल प्रक्रियात्मक खामियों या मौलिक अधिकारों के हनन के आधार पर की जाने वाली एक विशेष चुनौती है.

वे मामले जिनकी सुनवाई लोक अदालत में वर्जित है

लोक अदालत हर तरह के विवाद को नहीं सुलझा सकती है, इसकी अपनी सीमाएं हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘गैर-शमनीय’ (Non-Compoundable) आपराधिक मामले यहां नहीं सुने जा सकते हैं. यानी ऐसे गंभीर अपराध जिनमें कानूनन समझौता करने की अनुमति नहीं है (जैसे हत्या, बलात्कार या डकैती), वे लोक अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं. इसके अलावा, जिन मामलों में किसी एक पक्ष की सहमति नहीं होती है, लोक अदालत उनमें जबरन फैसला नहीं सुना सकती है. पारिवारिक विवादों में भी अगर तलाक जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हों, तो लोक अदालत सीधे तौर पर डिक्री नहीं देती है.

लोक अदालत में केस ले जाने के फायदे और प्रक्रिया

लोक अदालत में मामला ले जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां कोई अदालती शुल्क (Court Fee) नहीं लगता है. यदि आपका मामला पहले से किसी अदालत में लंबित है और लोक अदालत में सुलझ जाता है, तो पहले भरी गई कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है. यहां कोई सख्त प्रक्रियात्मक नियम (जैसे साक्ष्य अधिनियम) लागू नहीं होते, बल्कि वकील और जज के बजाय एक पैनल (जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता भी हो सकते हैं) बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने में मदद करता है.

“UP में PM आवास योजना के लिए योगी सरकार का अहम निर्णय, EWS और LIG श्रेणी वालों की बल्ले-बल्ले”

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प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत भागीदारी में किफायती आवास और किफायती किराया आवास घटकों के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार नई नीति जारी करने जा रही है. भारत सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में इन दोनों घटकों के संचालन के लिए 2026 की नीति प्रस्तावित की गई है.

योगी सरकार में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण की सीमा में बदलाव किया गया है. पहले ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के लिए जो सीमा थी, उसे बढ़ाकर अब 9 लाख रुपये तक कर दिया गया है. इसके साथ ही इन वर्गों के लिए बनने वाले आवासों का क्षेत्रफल 30 वर्गमीटर तक निर्धारित किया गया है.

इस योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से आर्थिक सहायता दी जाएगी. प्रत्येक आवास पर केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी.

योजनांतर्गत वाइटलिस्टेड परियोजनाओं में काम करने वाले विकासकर्ताओं को प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. इसके तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र स्वीकृति और बाह्य विकास शुल्क में छूट का प्रावधान किया गया है. साथ ही लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क में भी राहत दी जाएगी.

किफायती किराया आवास मॉडल-2 के तहत शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, उद्योगों और औद्योगिक संपदाओं में काम करने वाले कर्मचारियों तथा अन्य पात्र ईडब्ल्यूएस और एलआईजी परिवारों के लिए किराये के आवास बनाने का प्रावधान किया गया है. इन आवासों का निर्माण, संचालन और रखरखाव निजी या सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा किया जा सकेगा.

अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण का प्रस्ताव

इसके साथ ही अयोध्या में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके लिए नजूल भूमि को नगर निगम के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है. जिलाधिकारी अयोध्या की ओर से नगर आयुक्त, नगर निगम अयोध्या के पत्र के आधार पर यह प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया है. प्रस्ताव के अनुसार चक संख्या 4, मोहल्ला वशिष्ठ कुंड, परगना हवेली अवध, तहसील सदर स्थित नजूल भूमि को स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए नगर निगम अयोध्या को हस्तांतरित किया जाएगा.