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कृषकों की समृद्धि हमारा संकल्प: नवाचार और तकनीक से सशक्त होंगे छत्तीसगढ़ के अन्नदाता – मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय ने आज जशपुर जिले में बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से कृषि क्रांति अभियान के अंतर्गत एग्री-हॉर्टी एक्सपो एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का वर्चुअल शुभारंभ किया। जिला पंचायत परिसर में दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश की कई प्रमुख कृषि कंपनियां जैसे-जियो मार्ट रिटेल, देहात, हॉनेस्ट फॉर्म, आत्माकुर, धरागरी, अवनी आयुर्वेदा इत्यादि उपस्थित रहेंगी। इन कंपनियों के माध्यम से जिले के किसान एफपीओ के जरिए अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने हेतु फसल विक्रय अनुबंध कर सकेंगे। बिचौलिया प्रथा समाप्त होने से किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषकों की समृद्धि के लिए छत्तीसगढ़ सरकार दृढ़ संकल्पित है । नवीनतम तकनीक को अपनाकर छत्तीसगढ़ के अन्नदाता आर्थिक रूप से अधिक सशक्त होंगे। उन्होंने कहा कि जशपुर के कृषि विकास के इतिहास में आज का दिन मील का पत्थर सिद्ध होने वाला है। जिला प्रशासन के अभिनव प्रयास से ‘कृषि क्रांति’ अभियान की शुरुआत हो रही है। हमारा देश कृषि प्रधान है और छत्तीसगढ़ में लगभग 80 प्रतिशत लोग कृषि तथा इससे संबंधित कार्यों से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने हेतु फसल बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। चाहे वह समर्थन मूल्य पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल के मान से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी हो, समर्थन मूल्य पर वनोपज का संग्रहण हो या प्रोसेसिंग और निर्यात से जुड़ी योजनाएं हों, हमारी सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर में कटहल, आम, लीची, नाशपाती की बहुतायत में पैदावार होती है। यहां सेब की भी खेती शुरू हो गई है। इस सम्मेलन के माध्यम से किसानों और खरीदार कंपनियों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। यह एक ऐसा मंच है जहां एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के माध्यम से किसानों की उपज को सीधा बाजार उपलब्ध होगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री साय ने सॉइल हेल्थ कार्ड के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि इससे यह जानकारी मिलती है कि किस जमीन पर कौन-सी फसल का उत्पादन अधिक होगा और कितनी मात्रा में खाद की आवश्यकता होगी। इसके लिए केंद्र से आए कृषि वैज्ञानिक पूरे राज्य में जाकर सॉइल हेल्थ के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। राज्य में कृषि के साथ पशुपालन, मछली पालन और डेयरी विकास को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। डेयरी विकास योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित छह जिलों में जशपुर भी शामिल है।

रायगढ़ से वर्चुअली जुड़े सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने कहा कि जशपुर जिले का प्राकृतिक वातावरण अत्यंत आकर्षक है। जल संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि जल का संरक्षण अनिवार्य है, जिससे किसानों को लाभ होगा और उनकी आमदनी में वृद्धि होगी। जिला पंचायत से वर्चुअली जुड़ी विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने कहा कि जशपुर जिला नवाचार को तेजी से अपना रहा है। इस सम्मेलन के माध्यम से किसानों और कंपनियों के बीच सीधा अनुबंध होगा, जिससे उन्हें निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने अपने संबोधन में कहा कि यदि जिले में व्यवस्थित ढंग से खेती और प्रबंधन किया जाए तो किसानों को निश्चय ही लाभ प्राप्त होगा। जशपुर आम, मिर्च और नाशपाती के उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने धान के साथ दलहन और तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

कलेक्टर रोहित व्यास ने एग्री-हॉर्टी एक्सपो एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के महत्व तथा इससे किसानों को होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला पंचायत से वर्चुअली जुड़े जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार ने एक वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से सम्मेलन के तहत होने वाले नवाचार एवं विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस अवसर पर आईजी श्री दीपक कुमार झा, पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगा राम भगत सहित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

एग्री-हॉर्टी एक्सपो एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में मिलेगी उन्नत तकनीकों की जानकारी

सम्मेलन के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से नाबार्ड एवं एपेडा जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित होकर एग्रीकल्चर मार्केटिंग, जैव उत्पादों के प्रमाणीकरण आदि विषयों पर किसानों को जानकारी देंगे। राज्य के वरिष्ठ वैज्ञानिक फसल किस्मों का जीआई टैग, कृषि एवं उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक पद्धति से खेती तथा रेशम विशेषज्ञ रेशम पालन की जानकारी देंगे। साथ ही कंपनी एवं किसानों के मध्य अनुबंध खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) पर चर्चा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कंपनी और कृषकों के मध्य अनुबंध हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।

कार्यक्रम में फसल प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है, जिसमें जिले के एफपीओ से जुड़े किसान एवं प्रगतिशील किसान अपनी फसल जैसे-जैविक धान, कुटकी, रागी, नाशपाती, लीची, रामतिल, टाऊ, मिर्च, सुगंधित धान आदि का किस्मवार गुणवत्ता के आधार पर प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत आम एवं नाशपाती तथा नवाचार प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया है। विजेता किसानों को पुरस्कार राशि भेंट कर आगामी समय में नवाचार एवं उन्नतशील खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने सम्पर्क स्मार्ट स्कूल और स्मार्ट ब्लॉक कार्यक्रम का किया शुभारंभ

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मुख्यमंत्री साय ने आज जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के बगिया हाई स्कूल में सम्पर्क स्मार्ट स्कूल और स्मार्ट ब्लॉक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जशपुर के 50 प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के लिए सम्पर्क स्मार्ट किट और टीवी का भी वितरण किया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कांसाबेल जनपद पंचायत अध्यक्ष सुशीला साय, भरत सिंह, उपेंद्र यादव, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी q शशि मोहन सिंह, सम्पर्क फाउंडेशन के नेशनल मैनेजर प्रदीप राणा, डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा, जनप्रतिनिधिगण, स्कूली बच्चे और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम बगिया में नवाचार के तहत सम्पर्क स्मार्ट स्कूल की शुरुआत की गई है।
मुख्यमंत्र साय ने अपने उद्बोधन में बचपन के दिनों को याद करते हुए इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की कि उनके गृह ग्राम बगिया में नवाचार के तहत सम्पर्क स्मार्ट स्कूल प्रारंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा पहली से पांचवीं कक्षा तक बगिया प्राथमिक स्कूल में प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 वर्ष पूर्व बगिया स्कूल खपरैल का होता था, जिसमें बरसात के दिनों में पानी टपकता था और पानी टपकने के कारण जगह बदलनी पड़ती थी। लेकिन आज 50 वर्षों बाद बगिया स्कूल का संपूर्ण कायाकल्प हो गया है और वर्तमान में यहाँ हाई स्कूल संचालित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले जमाने में प्राथमिक स्कूल के बाद हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी लेकिन वर्तमान में छत्तीसगढ़ में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा की सुविधाएं सुलभ हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र मूलमंत्र है जिससे व्यक्ति का समग्र विकास संभव है। शिक्षक हमारे राष्ट्र के निर्माता होते हैं, जो हमें अच्छा डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, वैज्ञानिक और प्रोफेसर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सम्पर्क फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष श्री विनीत नायर एचसीएल टेक्नोलॉजिस के सीईओ रहे हैं। उन्होंने अपनी माता, जो सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं, से प्रेरणा लेकर सम्पर्क कार्यक्रम की शुरुआत की। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बच्चों के सीखने-सिखाने में बहुमूल्य योगदान दे रहा है। सम्पर्क फाउंडेशन खेल-खेल में शिक्षा को सरल बनाने के लिए सम्पर्क टीवी डिवाइस एवं गणित व अंग्रेज़ी किट प्रदान कर रहा है, जिनका वितरण आज हमारे जिले के 50 विद्यालयों में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने मुझे पूरी उम्मीद है कि विद्यालयों में इन किटों का भरपूर उपयोग किया जाएगा। इससे न केवल बच्चों की झिझक दूर होगी बल्कि सीखने-सिखाने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। अतः सभी प्रधान पाठक इन संसाधनों के उपयोग की पद्धति को भली-भांति समझें और बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर दें।

उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी जशपुर जिले के 15 विद्यार्थियों ने 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप 10 मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर संपूर्ण राज्य में जिले का गौरव बढ़ाया है। कक्षा 10वीं के 94 प्रतिशत एवं कक्षा 12वीं के 94 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, जिससे जशपुर राज्य का सर्वाधिक उत्तीर्णता प्रतिशत वाला जिला बना है। उच्च शिक्षा के साथ-साथ प्राथमिक स्तर पर भी जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कक्षा 5वीं में 99.5 प्रतिशत एवं कक्षा 8वीं में 97.3 प्रतिशत परिणाम दर्ज कर जिले ने राज्य स्तर पर विशेष छाप छोड़ी है।जिले में शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू संचालन हेतु मुख्यमंत्री साय के निर्देशन में विभाग द्वारा जिला स्तर पर सभी प्रधान पाठकों एवं प्राचार्यों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए इसरो, आईआईटी एवं अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से टाईअप कर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति ऐप के माध्यम से दर्ज की जा रही है। दैनंदिनी की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है एवं जिले के समस्त विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था सुधार हेतु युक्तियुक्तकरण की कार्यवाही पूर्ण की गई है। इसी क्रम में जिले के 50 प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफ.एल.एन.) हेतु सम्पर्क फाउंडेशन के माध्यम से एफ.एल.एन. किट का वितरण किया जा रहा है, जो जिले की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

कोलकाता में रेप पर फिर बवाल मेडिकल रिपोर्ट में क्या निकला और टीएमसी निशाने पर क्यों

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25 जून को कोलकाता के एक लॉ कॉलेज में कथित तौर पर बलात्कार की शिकार हुई 24 वर्षीय लॉ छात्रा की मेडिकल जांच में शारीरिक हमले के कई निशानों की पुष्टि हुई है. NDTV ने मेडिकल रिपोर्ट देखी है, जिसमें पीड़िता की गर्दन और छाती पर खरोंच के निशान बताए गए हैं. हालांकि, कोई बाहरी जननांग या ओरल चोट नहीं देखी गई, लेकिन डॉक्टरों ने फोरेंसिक पुष्टि होने तक यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया है. यह जांच 26 जून को रात 10 बजे कोलकाता के नेशनल मेडिकल कॉलेज में की गई. इस प्रक्रिया के दौरान तीन स्वाब एकत्र किए गए और फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए. चिकित्सा प्रक्रिया के हिस्से के रूप में किए गए यूरीन प्रेग्नेंसी टेस्ट में निगेटिव रिजल्ट मिले.

अब तक कितनी गिरफ्तारियां
कोलकाता पुलिस ने शनिवार को पुष्टि की है कि मामले के सिलसिले में एक चौथे व्यक्ति, साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में तैनात एक सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान गार्ड बार-बार जवाब बदल रहा था. सीसीटीवी फुटेज में घटना के समय उसे परिसर में देखा गया है. इस गिरफ्तारी के साथ ही हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या चार हो गई है. गार्ड, कॉलेज का एक पूर्व छात्र और तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा मनोजीत मिश्रा और दो मौजूदा छात्र. अपराध में सीधे तौर पर शामिल होने के आरोपी तीनों लोग अब पुलिस की हिरासत में हैं.

पीड़िता लॉ स्टूडेंट की शिकायत
पुलिस को दिए गए अपने बयान में पीड़िता ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी की छात्र शाखा तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) की बैठक के तुरंत बाद उसे निशाना बनाया गया. उसके अनुसार, लगभग 7:30 बजे शाम को तीन व्यक्तियों ने उसे घेर लिया.उसने बताया कि दो लोगों ने उसे तीसरे के साथ एक कमरे में बंद कर दिया. उसने उसके साथ बलात्कार करने का प्रयास किया. उसने आरोप लगाया कि विनती करने और विरोध करने के बावजूद, उसने जबरन उसके कपड़े उतारे और उसके साथ बलात्कार किया, जबकि अन्य लोग पहरा दे रहे थे. उसने धमकी दी कि अगर उसने इस बारे में बताया तो उसके प्रेमी और परिवार को नुकसान पहुंचाएगा.पीड़िता ने पुलिस को बताया, “मैं कहती रही, ‘मैं यह नहीं कर सकती. मेरा एक बॉयफ्रेंड है, मैं उससे प्यार करती हूं, लेकिन वह मेरी बात नहीं सुन रहा था. मैंने उसके पैर छुए और उससे विनती की कि वह मुझे जाने दे.”पीड़िता ने यह भी बताया कि इस घटना के दौरान उसे घबराहट का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद आरोपियों ने उसके लिए इनहेलर लाकर दिया. उसने इनहेलर का इस्तेमाल किया और भागने की कोशिश की, लेकिन फिर से पकड़ी गई और उसे गार्ड के कमरे में ले जाया गया, जहां कथित तौर पर बलात्कार जारी रहा.उसकी शिकायत के अनुसार, मारपीट के दौरान उसके सिर पर हॉकी स्टिक से वार किया गया. उसने बताया कि आरोपी ने उसे रात करीब 10:50 बजे छोड़ दिया और फिर से चुप रहने की चेतावनी दी.
राजनीतिक विवाद
यह घटना एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गई है. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सत्तारूढ़ टीएमसी पर मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा को बचाने का आरोप लगाया है.सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों में मिश्रा को लोकसभा सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित वरिष्ठ टीएमसी नेताओं के साथ देखा जा सकता है, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं.टीएमसी ने स्वीकार किया है कि मिश्रा का पहले भी उसके छात्र विंग से जुड़ाव रहा है, लेकिन आरोपों के मद्देनजर उसने खुद को पार्टी से अलग कर लिया है.

सागर के लाल का कमालआर्ट्स के छात्र उत्कर्ष सेन ने साइंस में रचा इतिहास

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सागर शहर के होनहार युवा उत्कर्ष सेन ने वह कर दिखाया जो अक्सर असंभव माना जाता है. आर्ट्स स्ट्रीम से ताल्लुक रखने वाले उत्कर्ष ने भारत की प्रमुख विज्ञान और अनुसंधान प्रवेश परीक्षा IISER Aptitude Test (IAT) 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 28 हासिल की है. इस परीक्षा में लगभग 4.5 से 5 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था. उत्कर्ष सेन पहले ही देश के सबसे युवा AI उद्यमी, रोबोटिक्स इनोवेशन के प्रतीक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय और प्रेरणादायक रहा है.

आर्ट्स से साइंस तक की अविश्वसनीय छलांग
उत्कर्ष की यह उपलब्धि इसलिए और भी खास है क्योंकि वह पारंपरिक साइंस स्ट्रीम के छात्र नहीं, बल्कि आर्ट्स बैकग्राउंड से हैं. इसके बावजूद देश की एक अग्रणी AI कंपनी में उनके असाधारण कार्य और योगदान को देखते हुए उन्हें इस साइंस एंट्रेंस टेस्ट में विशेष अनुमति प्रदान की गई. उन्होंने 240 में से 225 अंक हासिल कर सबको चौंका दिया.

बिना कोचिंग, सेल्फ स्टडी से रचा इतिहास
उत्कर्ष सेन वर्तमान में बेंगलुरु स्थित एक शीर्ष AI कंपनी में चीफ प्रोग्रामिंग ऑफिसर और लैंग्वेज साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने अपनी व्यस्त नौकरी के बीच बेंगलुरु ऑफिस और सागर स्थित घर से पूरी तरह स्व-अध्ययन के जरिए इस परीक्षा की तैयारी की, और उसमें सफलता पाई.

अब IIT मद्रास में मास्टर्स, फिर CIO की जिम्मेदारी
IAT में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उत्कर्ष को IIT मद्रास में 3.5 साल की मास्टर्स ट्रेनिंग इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए चुना गया है. ट्रेनिंग पूर्ण होते ही उन्हें देश की एक प्रमुख IT कंपनी में CIO की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी.

कौन है PDS का घोटालेबाज? कंट्रोल से अनाज क्यों हो रहा गायब; ग्रामीणों ने किया हंगामा

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कालाबाजारी भ्रष्टाचार और घोटालेबाजी का सिलसिला नहीं थम रहा है. अभी हाल ही में सामने आए भैंस घोटाले के बाद पीडीएस घोटाला भी सामने आया है. इस पीडीएस घोटाले में शिवपुरी के कंट्रोल से अनाज गायब होने के आरोप ग्रामीणों ने लगाते हुए कंट्रोल (राशन की दुकान) के बाहर जमकर हंगामा बाजी की. मौके पर प्रशासन को पहुंच कर ग्रामीणों को समझाइश देना पड़ी और भरोसा दिया कि उन्हें 3 महीने का राशन जल्द ही वितरित कर दिया जाएगा.

बताना जरूरी है कि हाल ही में पुलिस ने दतिया जिले से पीडीएस का राशन भरकर एक ट्रक को शिवपुरी की करेरा पुलिस ने जब्त कर कानूनी कार्रवाई की थी. यह लाखो रुपये की कीमत का पीडीएस चावल शिवपुरी जिले से होकर गुजरात की किसी फैक्ट्री में जा रहा था बताया गया.

दतिया में किसी कारोबारी के यहां से इसे लोड किया गया था
दोनों घटनाओं से आप साफ तौर पर समझ सकते हैं कि किस तरह से इन पीडीएस अनाज के घोटालेबाजों ने अपना रॉकेट बनाया हुआ है, और यह है मजबूर गरीब ग्रामीणों के हक के राशन को डकारने में लगे हुए हैं. फिलहाल प्रशासन इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. लेकिन मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा कि वह जल्द ही उन्हें 3 महीने का राशन वितरण करवा देंगे.

अब सवाल यह उठता है क्या प्रशासनिक तौर पर राशन की दुकान से गायब हुए पीडीएस के राशन को गायब करने वालों में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं या फिर यह सब प्रशासनिक मिलीभगत से हो रहा है.

छत्तीसगढ़ में GST विभाग का बड़ा कारनामा ! मर चुके अधिकारी का कर दिया तबादला

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छतीसगढ़ के अफसरों के कारनामें गजब हैं. आलम यह है कि एक मृतक अधिकारी का तबादला कर दिया गया है. यह अजब-गजब कारनामें छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग में किया गया है. आदेश जारी होने के बाद यह जन चर्चा का विषय बन चुका है और लोग सरकारी कर्मचारियों के काम करने के तरीके पर सवाल उठाने लगे हैं.

छत्तीसगढ़ में तबादलों में गजब गड़बड़ियां
छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग में अफसर की बड़ी लापरवाही सामने आई है. दरअसल, शुक्रवार, 27 जून को जीएसटी विभाग ने अधिकारियों का तबादला आदेश जारी किया है. इनमें से 68 अधिकारी ऐसे हैं, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित थे. वहीं इस तबादला सूची में एक ऐसे अधिकारी का नाम शामिल है, जिनका निधन 2024 में हो गया है.

मौत के 7 महीने बाद हुआ GST विभाग के अधिकारी का ट्रांसफर
विभाग की जारी तबादला सूची में कार्यालय संयुक्त आयुक्त राज्य कर रायपुर संभाग 2 में पदस्थ रहे अधिकारी दयाशंकर नेताम का तबादला नवा रायपुर के संयुक्त आयुक्त राज्य क बी आई यू (मुख्यालय) कार्यालय में कर दिया गया, जबकि दयाशंकर नेताम की मृत्यु नवंबर 2024 को हो गई.

अफसरों के कार्य प्रणाली पर उठे सवाल
अब जीएसटी विभाग ने अपनी गलती मानते हुए इसमें सुधार के लिए भेजा और संशोधन आदेश जारी करने का निर्देश दिया गया है. हालांकि अब ये चर्चा का विषय बना हुआ है.

दो पहिया वाहनों के लिए नए नियम! क्या है सरकार का प्लान

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भारत में बिकने वाले हर नए दोपहिया वाहन में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) होना ज़रूरी होगा, चाहे इंजन का आकार कुछ भी हो. इसके अलावा, डीलरशिप को प्रत्येक वाहन के साथ दो BIS-प्रमाणित हेलमेट भी देने होंगे. एक बाइक चलाने वाले के लिए और दूसरा पीछे बैठने वाले के लिए. केंद्र सरकार ने दोपहिया वाहन निर्माताओं के लिए वाहन खरीदते समय दो हेलमेट उपलब्ध कराने के संबंध में प्रस्ताव दिया है. इसके अनुसार अब टू व्हीलर खरीदते समय 2 हेलमेट देना अनिवार्य कर दिया जाएगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस नए नियम को लागू करने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए हैं. सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, नियमों को लेकर जो नए संशोधन किए गए हैं. उसके गजट नोटिफिकेशन यानी आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के तीन महीने के भीतर यह नियम अनिवार्य हो जाएगा.

क्या कहते हैं नए नियम?
सरकार द्वारा 23 जून, 2025 को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, नए नियम का उद्देश्य सवार और पीछे बैठे यात्रियों दोनों के लिए सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है. अधिसूचना में कहा गया है, “केंद्रीय मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2025 के लागू होने की तारीख से तीन महीने के भीतर, दोपहिया वाहन के निर्माता को दो पहिया वाहन की खरीद के समय भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप दो सुरक्षात्मक हेडगियर (हेलमेट) की आपूर्ति करनी होगी.” उपलब्ध कराए जाने वाले हेलमेट भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने चाहिए. हालांकि, यह आवश्यकता उन व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी जिन्हें मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 के तहत छूट प्राप्त है. हेलमेट प्रावधान के अलावा, सरकार ने एक और सुरक्षा उपाय भी प्रस्तावित किया है.

ABS क्यों जरूरी है?
अभी, केवल 125 सीसी से ज़्यादा क्षमता वाली बाइकों में ही ABS होना कानूनी तौर पर ज़रूरी है. इसके बजाय छोटे दोपहिया वाहनों में कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम (CBS) लगाया जाता है. नए नियम के साथ, बजट स्कूटर और मोटरसाइकिल में भी डिफ़ॉल्ट रूप से ABS होगा, जिससे सभी सवारों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी. एबीएस क्यों महत्वपूर्ण है? लेकिन ABS क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम एक ऐसी सुविधा है जो अचानक ब्रेक लगाने पर आपके पहियों को लॉक होने से बचाती है. यह पकड़ और नियंत्रण बनाए रखने में मदद करता है, खासकर गीली या उबड़-खाबड़ सड़कों पर. ABS के बिना, एक सख्त ब्रेक बाइक को फिसलने या पलटने पर मजबूर कर सकता है. इसके साथ, सिस्टम ब्रेक प्रेशर को अपने आप एडजस्ट कर लेता है, जिससे गिरने का जोखिम कम हो जाता है.

कब से लागू होंगे नए नियम?
1 जनवरी, 2026 से, सभी नए L2 श्रेणी के दोपहिया वाहनों, जिनमें 50cc से अधिक इंजन क्षमता या 50 किमी/घंटा से अधिक की शीर्ष गति वाली मोटरसाइकिल और स्कूटर शामिल हैं, को एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) से लैस करना होगा. ABS को भारतीय मानक IS14664:2010 का अनुपालन करना चाहिए, जिससे बेहतर नियंत्रण सुनिश्चित हो और विशेष रूप से अचानक ब्रेक लगाने के दौरान फिसलने की संभावना कम हो.

छत्तीसगढ़ के इस मेडिकल कॉलेज की दुर्गति क्यों/ जर्जर भवन होने से खतरा

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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पिछले एक सप्ताह से रुक- रुककर लगातार बारिश होने से जहां एक ओर जनजीवन प्रभावित हुआ है. वहीं, बारिश के कारण (मेडिकल कॉलेज) राजमाता देवेन्द्र कुमारी सिंह देव चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. वार्डों के छत से लगातार टपक रहा है.मरीजों को परेशानी हो रही है.

वहीं, अस्पताल के कर्मचारियों और चिकित्सक भी इसे लेकर परेशान नजर आ रहे हैं. चिकित्सकों की मानें तो अस्पताल के वार्डों में बारिश का पानी टपकने से भारी नमी बनी हुई है जिससे मरीजों को इंफेक्शन का भी खतरा बना रहता है. वहीं, अस्पताल प्रबंधन बरसात के पानी से बचने के लिए अधिकांश भवन को तिरपाल से ढंक दिया गया.

पानी के कारण नमी और बदबू का आलम
दरअसल, जिला चिकित्सालय पिछले 10 वर्षों से मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रूप में संचालित हो रहा है. भवन काफी पुराना होने के कारण जर्जर हो चुका है. इसके बावजूद भवन की देखभाल के लिए प्रतिवर्ष विभाग मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च करती है. बरसात शुरू होते ही अधिकांश वार्डों के छत से पानी टपक रहा है. फाल्स सीलिंग भी गिरने लगें हैं. अस्पताल में टपकते पानी के कारण नमी और बदबू का आलम बना हुआ है. हालांकि, टपकते पानी को निकालने के लिए अस्पताल कर्मचारी लगें हुए हैं. क्योंकि टाइल्स में पानी के कारण काफी लोग फिसल रहें हैं.

बरसात के पानी से बचने के लिए तिरपाल लगाया प्रबंधन ने
बरसात की पानी से भवन और दवाइयों को बचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन अब लाखों रुपये खर्च कर अस्पताल के अधिकांश भवनों को रंग बिरंगे तिरपाल से ढका भी गया. कुछ हद तक तिरपाल बरसात के पानी से भवनों को राहत भी दिया है. लेकिन फिर भी पानी का टपकना और नमी अस्पताल में काफी ज्यादा है. इस संबंध में अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र गुप्ता का कहा है अस्पताल भवन काफी पुराना है और इसके रखरखाव का जिम्मा लोक निर्माण विभाग का है.

लेकिन छत का रिपेयरिंग होने से छत की मोटाई ज्यादा हो गई है. ऐसे में अब छत का मेंटेनेंस नहीं किया जा सकता है. इस लिए अब अस्पताल के पुरे भवन में शेड निर्माण कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया. वहीं, वर्तमान में काम भी चल रहा है.

कब से लागू होगा एसी का टेंपरेचर 20-28°C करने का प्लान, पर्यावरण मंत्री ने बताया

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गर्मियों में बिजली की खपत कम करने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर एयर कंडीशनर (AC) के लिए तय तापमान सीमा तय करने की बात उठती रही है. बीते कुछ दिनों से ऐसी चर्चा जोरों पर थी कि केंद्र सरकार जल्द ही एयर कंडीशनर (AC) के तापमान को 20 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच तय करने जा रही है. हालांकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने साफ कर दिया है कि फिलहाल सरकार ऐसी कोई योजना लागू नहीं कर रही है. इस बयान से साफ है कि फिलहाल आम जनता को अपने एसी का टेंपरेचर सेट करने की पूरी आजादी होगी.

भारत जलवायु शिखर सम्मेलन में जब मंत्री से पूछा गया कि क्या सरकार इस नियम को लागू करने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने साफ कर दिया कि ऐसा कोई तत्काल कदम नहीं उठाया जाएगा. उनका जवाब था, “ऐसी कोई स्थिति 2050 के बाद ही आ सकती है.”
फिलहाल लोगों को मिलेगी राहत

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह तुरंत होगा, समय के साथ इसके लिए धीरे-धीरे क्षमताएं बनाई जाएंगी.” यादव ने कहा कि जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करना राष्ट्रीय परिस्थितियों और CBDR-RC प्रिंसिपल के मुताबिक किया जाना चाहिए.

मनोहर लाल ने दिया था बयान
इसी महीने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि भारत में एयर कंडीशनर जल्द ही 20 डिग्री सेल्सियस से 28 डिग्री सेल्सियस की सीमा के भीतर काम करेंगे और इसे जरूरी बनाया जाएगा.

देशभर में गर्मी चरम पर
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में गर्मी चरम पर है और AC की खपत तेजी से बढ़ रही है. बिजली की डिमांड भी रिकॉर्ड लेवल तक पहुंच गई है.

छत्तीसगढ़ में 4th ग्रेड की नौकरी में 1st ग्रेड का घोटाला, मरे हुए 11 कर्मियों का प्रमोशन; सैलरी में करोड़ों का खेल

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छत्तीसगढ़ के आदिम जाति कल्याण विभाग में चतुर्थ श्रेणी (4th Grade Vacancy) की भर्ती में बड़ा घोटाला सामने आया है. जब ऊपर तक शिकायत गई तो विभाग ने जांच कराई. जांच में कई गड़बड़ियां सामने आईं और फिर रायगढ़ के तत्कालीन सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास को निलंबित कर दिया. बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. हद तो तब हो गई, जब 10 साल बाद 11 मृतकों को प्रमोशन भी मिल गया. हालांकि इसी वर्ष 9 अप्रैल को मामला विधानसभा में उठा और दोबारा जांच के आदेश दिए गए.

यह है मामला
वर्ष 2013 में रायगढ़ में आदिम जाति कल्याण विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 559 पदों (इनमें चपरासी, सफराई कर्मी जैसे पद.) पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था. विभाग ने पद तो 559 निकाले, लेकिन 605 पर नियुक्तियां हुईं. इसके बाद इन्हें वेतन कलेक्टर गाइडलाइन पर होना था, जो 4943 रुपये सैलरी बनती है. लेकिन इनको सैलरी रेगुलर कर्मचारियों की तरह यानी 10890 रुपये की जा रही थी. जब मामले का 18 महीने बाद पता चला तो इन्हें कलेक्टर गाइड लाइन के तौर पर पेमेंट किया जाने लगा.

फिर मामला हो गया शांत
जब तक पता चला तब तक सरकार को 5.71 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका था. विभाग में मामले की कई शिकायतें भी पहुंचीं थीं. बताया गया कि पदों की नियुक्तियों के दौरान गड़बड़ियां हुई हैं. उस दौरान जांच की गई. फिर रायगढ़ के तत्कालीन सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास को निलंबित कर दिया. फिर मामला शांत हो गया.

जब कर्मचारियों को 10 वर्ष हो गए तो उन्हें परमानेंट (नियमित) किया. 2013 में ही रिक्त पदों के अलावा भी अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ती कर ली गई थी और बाद 29 को परमानेंट कर दिया था. हद तो तब हो गई, जब विभाग ने 10 ऐसे कर्माचरियों को प्रमोशन दिया, जिनकी मौत हो चुकी थी.