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शराब कारोबारी भाटिया को कोर्ट ने एक दिन की रिमांड पर भेजा जेल, 2000 करोड़ के स्कैम में अहम दस्तावेज जब्त

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ईओडब्ल्यू ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर रायपुर कोर्ट में पेश कर एक दिन के लिए जेल भेज दिया। उसे रविवार को अवकाशकालीन कोर्ट में पेश किया गया।

ईओडब्ल्यू ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर रायपुर कोर्ट में पेश कर एक दिन के लिए जेल भेज दिया। उसे रविवार को अवकाशकालीन कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान ईओडब्ल्यू ने पूछताछ के लिए 14 दिन की रिमांड पर देने का आवेदन लगाया। लेकिन, संबंधित कोर्ट ने आवेदन को खारिज कर दिया। साथ ही विशेष न्यायालय में पेश करने का फैसला सुनाया।

छापेमारी में अहम दस्तावेज जब्त

वहीं 2161 करोड़ के शराब घोटाले की जांच करने विजय भाटिया के नेहरू नगर एवं आदर्श नगर स्थित निवास, भिलाई-3 में फर्नीचर शोरूम, दुर्ग में फैक्ट्री, उनके मैनेजर संतोष रामटेके एवं दुर्ग स्थित फर्म सहित करीबी लोगों के 8 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान तलाशी में बरामद लेनदेन के दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, प्रॉपर्टी एवं निवेश के पेपर्स को जांच के लिए जब्त किया। बताया जाता है कि छापेमारी के बाद दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर बयान लिया जा रहा है।

पिछले 2 साल से फरार था विजय भाटिया

जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ में हुए Liquor घोटाले में शराब कारोबारी विजय भाटिया का नाम आने के बाद 2 साल पहले दुर्ग स्थित भाटिया के निवास पर ED ने छापा मारा था। तभी से विजय भाटिया फरार चल रहा था. ACB और EOW की टीमें लगातार भाटिया की तलाश में जुटी हुईं थी। तभी अचानक EOW को भाटिया के दिल्ली में होने का सुराग मिला, जिसके बाद ACB-EOW की टीम ने रविवार सुबह दिल्ली से विजय भाटिया को गिरफ्तार कर लिया और उसे रायपुर लाया गया।

विजय भाटिया पूर्व सीएम के करीबी

बता दें कि भिलाई के कारोबारी विजय भाटिया को पाटन से कांग्रेस विधायक और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बेहद करीबी माना जाता है। विजय भाटिया ईडी जांच के दायरे में भी थे। हालांकि, ईओडब्ल्यू ने जब शराब घोटाला मामले में जांच शुरू की थी, तभी से ही विजय भाटिया का नाम चर्चा में बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में पहले भी कई बार कार्रवाई की जा चुकी है।

रायपुर सेंट्रल जेल की अनोखी पहल, ज्योतिष और आयुर्वेद की शिक्षा से बदल रही है कैदियों की सोच

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आमतौर पर जेल का नाम आते ही लोगों के जेहन में एक बंद, कठोर और नकारात्मक वातावरण की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या हो जब आपको ये पता चले की जेल में भी कैदियों के तरास कर उनकी जिंदगी बदलती है। कुछ ऐसा ही हुआ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में जहां बदलाव का एक प्रयास जारी रही है।

रायपुर सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक योगेश सिंह ने एएनआई से बातचीत करते हुए कहा, “कैदियों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक संस्कृत शिक्षा प्रदान की जा रही है। 11वीं और 12वीं के स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत ज्योतिष, आयुर्वेद और विभिन्न संस्कारों की विधियों का अध्ययन कराया जाता है।” जेल प्रशासन के इस कदम से कैदियों का कौशल विकास (Skill Development) किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ उनकी सोच में बदलाव आता है, बल्कि वे समाज में एक नई भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहे हैं।

जेल प्रशासन के इस कदम से कैदियों का कौशल विकास (Skill Development) किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ उनकी सोच में बदलाव आता है, बल्कि वे समाज में एक नई भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहे हैं।
कितने कैदी हो रहे हैं लाभान्वित? फिलहाल इस विशेष वैदिक शिक्षा पाठ्यक्रम में 68 कैदी पंजीकृत हैं, जो नियमित रूप से कक्षाओं में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा जेल में कुल 291 कैदी प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, ओपन स्कूल परीक्षा, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएन तक की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यह शिक्षा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के माध्यम से संचालित हो रही है। शिक्षा के माध्यम से पुनर्वास की कोशिश जेल प्रशासन का मानना है कि सकारात्मक गतिविधियों में लगने से कैदियों के मानसिक और सामाजिक सुधार में अत्यंत प्रभावी होती है। अधीक्षक योगेश सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल सजा देना नहीं है, बल्कि उन्हें समाज के लिए एक सकारात्मक व्यक्ति बनाना है। जब ये कैदी जेल से बाहर निकलेंगे, तो वे ज्योतिषाचार्य, आयुर्वेदिक सलाहकार या संस्कारों को जानकर समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद ले रहा आखिरी सांसे… सीएम साय ने बताया 2026 तक का प्लान, बस्तर जैसे इलाके हो रहे गुलजार

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पिछले 18 महीनों में सरकार ने लगातार कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में माओवादी नेटवर्क कमजोर हो गया है ऐसा कहना है मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का। सीएम साय ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सरकार की कोशिशों से बस्तर में माओवादी नेटवर्क कमजोर हो गया है। उन्होंने बताया कि कल्याणकारी योजनाओं और लगातार सुरक्षा अभियानों से शांति स्थापित करने में मदद मिली है। हमारे सहयोगी टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में साय ने कहा कि पिछले 18 महीनों में सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी सरकार बस्तर और पूरे राज्य को शिक्षा, कौशल विकास, कल्याणकारी योजनाओं और समावेशी नीतियों से बदलने की योजना बना रही है। सुरक्षा बलों ने जंगलों में अंदर तक अपनी पहुंच बनाई है। जहां पहले जाना मुश्किल था, वहां अब सुरक्षा कैंप बनाए गए हैं। ये कैंप अब सरकार की चौकियों की तरह काम कर रहे हैं। इनसे दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाएं और विकास पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये कैंप तब तक रहेंगे जब तक जरूरी होगा।

सरकार बना रही संतुलन

जब उनसे पूछा गया कि कुछ लोग हार्डकोर माओवादियों को पूरी तरह से माफ़ करने का विरोध कर रहे हैं, तो साय ने कहा कि वे उन परिवारों का दर्द समझते हैं जिन्होंने अपनों को खोया है। उन्होंने कहा कि मैं उन परिवारों के दर्द और गुस्से को समझता हूं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। उनका दुख बहुत बड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार न्याय सुनिश्चित करने और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए पूरी तरह से समर्पित है। सरेंडर नीति की लगातार समीक्षा की जा रही है। सरकार सरेंडर को प्रोत्साहित करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के बीच सही संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

गोल्ड मेडल जीतकर छत्तीसगढ़ लौटे नेशनल चैम्पियन, वर्ल्ड चैम्पियन बनने अब जाएंगे अजरबैजान

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पंजा कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतने वाले युवा छात्र लीलेश प्रधान और अभिषेक देवांगन ने बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय आर्म रेसलिंग ( पंजा कुश्ती ) चैम्पियनशिप मे प्रथम स्थान हासिल किया है. छात्र लीलेश प्रधान 12 वीं का छात्र है, जबकि अभिषेक देवांगन 11वीं का छात्र हैं.

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के दो युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता मे गोल्ड मेडल जीतकर अपने जिले सहित छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है. पंजा कुश्ती (National Arm Wrestling) में भारत का प्रतिनिधित्व कर गोल्ड मेडल जीतने वाले दोनों युवा खिलाड़ी अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भाग लेने अजरबैजान जाएंगे.

गोल्ड मेडलिस्ट कक्षा 11 वीं के छात्र अभिषेक देवांगन ने जूनियर वर्ग के 63 किलोग्राम ग्रुप मे राइट हैंड से मैच खेलकर गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल में प्रथम स्थान हासिल किया है. अभिषेक देवांगन चैम्पियन ऑफ चैम्पियन मैच में रनर अप रहे हैं.

महासमुंद जिले के दोनों युवा खिलाड़ियों ने नेशनल चैम्पियनशिप मे कुल 5 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास बना दिया है. वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधुत्व करने अजरबैजान जाने वाले दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि आर्म रेसलिंग खेल में ही वो अपना करियर बनाना चाहते हैं.साथ ही बताया कि, खेल की तैयारी के साथ पढ़ाई के लिए भी समय निकालते हैं.

PhonePe और Paytm से ट्रांजैक्शन का तरीका बदल गया! लिमिट, नाम और टाइमिंग में बदलाव

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अगर आप रोज़ाना UPI से पेमेंट करते हैं या अपने बैंक बैलेंस को बार-बार चेक करते हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। जून और अगस्त 2025 से UPI सिस्टम में कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इनका सीधा असर आम यूजर्स, खासकर व्यापारियों और फ्रीक्वेंट ट्रांजैक्शन करने वालों पर पड़ेगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा लागू किए गए ये नए नियम UPI को और अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए लाए जा रहे हैं।

1 अगस्त से क्या होंगे बदलाव?

  1. बैलेंस चेक की सीमा तय:
    अब आप एक दिन में एक ऐप से सिर्फ 50 बार ही बैलेंस चेक कर सकते हैं। दो ऐप्स इस्तेमाल करने पर सीमा 100 बार तक हो सकती है। इससे बैंक सर्वर पर लोड कम होगा।
  2.  अकाउंट लिस्ट चेक करने की सीमा:
    अब आप किसी UPI ऐप में एक दिन में सिर्फ 25 बार अपने जुड़े हुए बैंक अकाउंट्स की लिस्ट देख सकेंगे।
  3.  ऑटो-पे सिर्फ नॉन-पीक घंटों में:
    ऑटोमेटिक पेमेंट (Auto-Pay) जैसे बिल पेमेंट्स आदि अब नॉन-पीक समय में ही प्रोसेस किए जाएंगे, जिससे सर्वर डाउन या डिले जैसी दिक्कतें कम होंगी।
  4.  बैलेंस दिखेगा ट्रांजैक्शन के बाद:
    जब भी आप कोई लेन-देन करते हैं, उसके बाद ऐप में अपने आप बैलेंस दिखाई देगा, ताकि आपको बार-बार बैलेंस चेक करने की जरूरत न पड़े।
  5.  इसका फायदा किसे?

    • आम यूजर्स को ट्रांजैक्शन में ज्यादा स्पीड और क्लैरिटी मिलेगी।
    • बैंकिंग सर्वर पर लोड कम होगा, जिससे ऐप्स हैंग या क्रैश नहीं होंगी।
    • गलत नाम से पेमेंट भेजने की संभावना कम होगी, क्योंकि अब केवल रजिस्टर्ड नाम ही दिखेगा।

     क्या करना चाहिए यूजर्स को?

    • बैलेंस बार-बार चेक करने की आदत पर थोड़ा नियंत्रण रखें।
    • UPI ट्रांजैक्शन से पहले रिसीवर का नाम ध्यान से पढ़ें।
    • ट्रांजैक्शन स्लो हो तो घबराएं नहीं – नया सिस्टम जल्दी जवाब देगा।

1947 में आजादी के बाद भारत को सबसे पहले किस देश ने दी थी मान्यता? नहीं जानते होंगे नाम

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INDIA FLAG FLYING HIGH BLUE SKY TRICOLOUR FLAG

भारत पर करीब 200 साल तक राज करने के बाद 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों ने भारत को आजाद देश घोषित किया, चलिए जानते हैं कि भारत को सबसे पहले किसने मान्यता दी थी.

भारत को जब आजादी मिली तो कई देशों ने भारत को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी, हालांकि किस देश ने सबसे पहले भारत को मान्यता दी इसकी जानकारी आधिकारिक तौर पर उपलब्ध नहीं है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के बाद भारत को सबसे पहले मान्यता देने वाला देश अमेरिका था. अमेरिका ने आजादी से पहले ही यहां अपना दूतावास भी खोल दिया था. इसके अलावा इंग्लैंड, यूएसएसआर और फ्रांस जैसे देशों ने भी भारत को मान्यता दी थी. वहीं, अगर पाकिस्तान की बात करें तो पाकिस्तान को आजादी के बाद सबसे पहले ईरान ने मान्यता दी थी. उस समय ईरान इम्पीरियल स्टेट ऑफ ईरान हुआ करता था. बाद में दुनिया के बाकी देशों ने भारत के साथ रिश्ते स्थापित किए और एक देश के तौर पर मान्यता देते गए.

भारत किन-किन देशों को नहीं देता मान्यता 

दुनिया में ऐसे कई देश हैं जिनको भारत एक आजाद मुल्क के तौर पर मान्यता नहीं देता है. इनमें अब्काजिया का नाम सबसे पहले आता है, इसे कई देश जार्जिया का हिस्सा मानते हैं. इसमें कोसोवो का नाम भी शामिल है जो संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य देश है फिर भी भारत उसे मान्यता नहीं देता है. भारत ताइवान को मान्यता नहीं देता.  इसके अलावा इस लिस्ट मसोमालीलैंड का नाम भी शामिल है.

भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली. ब्रिटिश राज से आजाद होकर भारत एक संप्रभु राष्ट्र बना, लेकिन किसी भी नए स्वतंत्र देश के लिए सिर्फ स्वतंत्र होना ही काफी नहीं होता, उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान भी जरूरी होती है यानी दूसरे देशों से मान्यता मिलना. अब सवाल यह उठता है कि जब भारत आजाद हुआ तो सबसे पहले किस देश ने भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी? हो सकता है आपने अमेरिका, रूस या ब्रिटेन का नाम सोचा हो, लेकिन सच्चाई कुछ और है. चलिए जानते हैं कि सच्चाई क्या है.

सीएम साय ने सुशासन तिहार के अंतिम दिन किया 213 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा, धमतरी में संपन्न हुआ कार्यक्रम

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Dev Sai) सुशासन तिहार के अंतिम दिन धमतरी जिले के कृषि उपज मंडी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. सीएम के साथ वन मंत्री केदार कश्यप, धमतरी (Dhamtari) जिले के प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा, कुरूद विधायक अजय चंद्राकर, लोकसभा कांकेर सांसद भोजराज नाग, महासमुंद लोकसभा सांसद रूप कुमारी चौधरी, पूर्व विधायक रंजना साहू भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए बताया कि आज वह सुशासन तिहार के कार्यक्रम के समापन में पहुंचे हैं, जिसमें 8 अप्रैल से शुरू हुए इस महा अभियान के प्रथम चरण में राज्य के प्रत्येक जिले में ग्रामीणों से आवेदन लिए गए थे. दूसरे चरण में आवेदनों पर कार्रवाई की गई और तीसरे चरण में 8 से 10 ग्राम पंचायत के बीच समाधान शिविरों का आयोजन कर आवेदनों के निराकरण की जानकारी हितग्राहियों को दी गई.

धमतरी जिले के लिए बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धमतरी जिले में कई बड़ी घोषणाएं की है. बहुप्रतीक्षित मांगों को पूरा करते हुए जिले में 213 करोड़ रुपये के कार्यों की सौगात दी है, जिसमें धमतरी में हाईटेक बस स्टैंड के लिए 18 करोड़ रुपये, एक सर्व सुविधा युक्त ऑडिटोरियम के लिए 10 करोड़ 50  लाख रुपये , सिहावा चौक से कोलियारी तक फोरलेन सड़क निर्माण (5 किमी) के लिए 69 करोड़ रुपये, रत्नाबांधा से मुजगहन तक फोरलेन सड़क के लिए 56 करोड़ रुपये, धमतरी से नगरी मुख्य मार्ग नवीनीकरण और मजबूतीकारण के लिए 60 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है.

गांव-गांव की परेशानी का समाधान

इस सुशासन तिहार के दौरान अचानक गांव में पहुंचकर ग्रामीणों की चौपाल में लोगों से फीडबैक भी लिया गया और उनकी समस्याओं का समाधान भी किया गया. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश भर में 40 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95% आवेदनों का समाधान किया जा चुका है. सीएम साय ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्म समर्पित माओवादियों और पीड़ित परिवारों के लिए विशेष 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं. विशेष जनजातीय, कोरबा पहाड़ी, अंबुजमाड़, आदि के लिए 32 हजार अतिरिक्त आवास स्वीकृत किए गए हैं.

छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है. प्रदेश के शिक्षा विभाग में जल्द ही शिक्षकों की भर्ती होगी. शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और प्रभावशील बनाने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी. सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है. पहले चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती की तैयारी शुरू कर दी गई है.

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छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. इन्हीं पहल में शामिल है शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण. युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया राज्य में शुरू कर दी गई है. इसके पूरा होने के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों का आंकलन कर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण भी

शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की पहल के तहत छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण कर रही है. इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें. अफसरों का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का मतलब है स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना कि सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो और कोई भी स्कूल बिना शिक्षक के न रहे

राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है. हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं. पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 255 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है. 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है. इसी तरह शहरी क्षेत्र में 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है. 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20 के बीच है.837 स्कूलों में यह अनुपात 21 से 30 के बीच है, लेकिन 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 या उससे भी ज्यादा है, यानी छात्रों की दर्ज संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं.  शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शालाओं के युक्तियुक्तकरण के तहत राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा. शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे.

सुशासन तिहार का हुआ समापन, सीएम साय बोले- ‘यह अनुभव मेरे जीवन की मूल्यवान थाती है’

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जमीन पर दिखी हमारी नीतियां:

हमारी सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि जनता को योजनाओं का पूरा लाभ मिले। हमारी नीतियां जमीन पर दिखे, यही करने की अपनी कोशिश रही है। सुशासन तिहार के दौरान मुझे शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को देखने का अवसर मिला। जब मैंने स्वयं जाकर स्कूलों, अस्पतालों, आंगनबाड़ियों, राशन दुकानों, पीएम आवासों और निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया, तो स्पष्ट रूप से समझ आया कि हमारी नीतियां किस प्रकार लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

शिक्षकों की चरणबद्ध भर्ती का निर्णय:

आमजन से प्राप्त अमूल्य सुझावों से हमें शासन को और अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और संवेदनशील बनाने की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। इस अभियान के दौरान हमने स्कूलों के युक्तियुक्तकरण जैसा महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया जिनका असर आने वाले समय में प्रदेश के भविष्य पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा। यहीं नहीं हमने शिक्षकों की चरणबद्ध भर्ती का भी निर्णय लिया है। प्रथम चरण में हम 5000 शिक्षकों की भर्ती करेंगे। यह यात्रा यहीं समाप्त नहीं होती। सुशासन तिहार के माध्यम से हम सरकार को जनता के द्वार तक लेकर गये, जिससे लोगों को यह विश्वास और अधिक दृढ़ हुआ है कि उनकी सरकार हमेशा प्रदेश के विकास और लोक कल्याण के कार्यों में अहर्निश जुटी रहेगी।

छत्तीसगढ़ में 31 मई को सुशासन तिहार का समापन हो गया है। ये कार्यक्रम  8 अप्रैल से शुरू हुआ था। जिसका समापन कल धमतरी में हुआ है। इस सन्दर्भ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने X पर एक पोस्ट किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि  8 अप्रैल से शुरू हुए सुशासन तिहार का धमतरी में समापन हुआ। इस दौरान मैंने प्रदेश के 33 जिलों का भ्रमण किया। गांवों में जन चौपाल लगाकर, लोगों से सीधा संवाद किया, उनकी समस्याओं को समझा और समाधान सुनिश्चित किया। जिला मुख्यालयों पर समीक्षा बैठक की। यह अनुभव मेरे जीवन की मूल्यवान थाती है।

ट्रंप से अलग होते ही एलन मस्क का बड़ा कदम, भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट क्रांति के खोल दिए द्वार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अलग होते ही एलन मस्क ने भारत को लेकर बड़ा कदम उठाया है।   हाल ही में एलन ने भारत के लिए एक बड़ा ऐलान किया है, जो देश के डिजिटल परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। उन्होंने घोषणा की है कि उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा, स्टारलिंक (Starlink), जल्द ही भारत में लॉन्च होगी, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराया जाएगा।

भारत यात्रा की योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाल ही में हुई बातचीत के बाद, एलन मस्क ने इस वर्ष के अंत में भारत की यात्रा की योजना की घोषणा की है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी और नवाचार सहयोग को बढ़ावा देना है।  एलन मस्क ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में “सरकारी दक्षता विभाग” (DOGE) के प्रमुख के पद से इस्तीफा दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा है कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के मित्र और सलाहकार बने रहेंगे। एलन मस्क की यह घोषणा भारत के डिजिटल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है। स्टारलिंक की सेवाएं विशेष रूप से उन क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ा सकती हैं, जहां पारंपरिक इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, नियामकीय मंजूरी और हार्डवेयर लागत जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

भारत में स्टारलिंक 
स्टारलिंक की मासिक सदस्यता योजना लगभग ₹850 ($10) से शुरू होगी, जो अमेरिकी कीमत ($80) की तुलना में काफी कम है। सेवा की शुरुआत में 600–700 Gbps की कुल बैंडविड्थ उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे 2027 तक 3 Tbps तक बढ़ाने की योजना है।  उपयोगकर्ताओं को लगभग ₹29,700 का हार्डवेयर खरीदना होगा, जबकि प्रीमियम डिवाइस की कीमत ₹50,000 तक हो सकती है। स्टारलिंक भारतीय टेलीकॉम कंपनियों जैसे जियो, एयरटेल और वोडाफोन के साथ साझेदारी कर रही है, जिससे सेवा को सीधे उपभोक्ताओं तक और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा