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दो साल बाद जेल से बाहर आएंगी रानू साहू और सौम्या चौरसिया

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छत्तीसगढ़ में हुए करोड़ों के डीएमएफ घोटाले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू, सौम्या चौरसिया को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दोनों को अंतरिम जमानत दी है. अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने बताया, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रही सौम्या और रानू दोनों करीब दो साल बाद जेल से बाहर आएंगी. जांच को प्रभावित करने की आशंका के चलते कोर्ट ने दोनों के छत्तीसगढ़ में रहने पर पाबंदी लगाई है. वहीं सूर्यकांत तिवारी अभी जेल में रहेंगे. उनकी याचिका पर सुनवाई जुलाई में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ईओडब्ल्यू/एसीबी में दर्ज डीएमएफ घोटाला मामले की जांच की स्थिति और उसके पूरा होने में लगने वाले समय के बारे में जानकारी ली. अभियोजन के अधिवक्ता ने बताया कि गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए जारी नोटिस का उनके द्वारा अनुपालन नहीं किया जा रहा है, जिस कारण जांच में विलंब हो रही है. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि गवाहों को जांच में सहयोग करने के लिए उनमें विश्वास पैदा करना जांच एजेंसी का काम है। सुप्रीम कोर्ट ने सौम्या चौरसिया को अंतरिम जमानत का लाभ देते हुए इस बात पर भी गौर फरमाया कि कैसे जांच एजेंसियां एक प्रकरण में अभियुक्त को जमानत का लाभ मिलने पर किसी अन्य प्रकरण में उसकी संलिप्तता बताकर फिर हिरासत में ले लिया जाता है. अंतरिम जमानत पर रिहाई के लिए कठोर शर्ते लगाते हुए न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि सौम्या चौरसिया और रानू साहू आगामी आदेश तक छत्तीसगढ़ में निवास नहीं करेंगी. प्रकरण में चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्य दवे, सह अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा और एओआर पल्लवी शमी ने पैरवी की।

NSA अजीत डोभाल की तबीयत बिगड़ी: किस बीमारी से जूझ रहे हैं जानिए लक्षण और खतरा

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नेशनल डेस्क: देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की सेहत को लेकर बीते कुछ दिनों से कयासों का बाज़ार गर्म है। 80 साल के डोभाल ने हाल ही में रूस के मॉस्को में होने वाली एक अहम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बैठक में भाग लेने का कार्यक्रम रद्द कर दिया है। इसके पीछे वजह बताई गई है — मौसमी फ्लू। एक तरफ ये बीमारी आम तौर पर हल्की मानी जाती है, वहीं दूसरी तरफ डोभाल की उम्र को देखते हुए इसे हल्के में लेना मुश्किल है। तो सवाल ये उठता है कि आखिर मौसमी फ्लू क्या होता है? और ये उम्रदराज़ लोगों के लिए इतना जोखिम भरा क्यों हो जाता है?

क्या होता है मौसमी फ्लू और कैसे फैलता है?

मौसमी फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा, एक वायरल बीमारी है जो तेज़ी से फैलती है। यह वायरस खांसने, छींकने या संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, मुंह या नाक के संपर्क में आने से शरीर में प्रवेश करता है। आमतौर पर यह बीमारी हर साल सर्दियों या मौसम बदलने के दौरान फैलती है।

यूं तो मौसमी फ्लू अधिकतर लोगों में खुद ही ठीक हो जाता है, लेकिन 80 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए ये बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। एक मेडिकल स्टडी के मुताबिक, इस उम्र में फ्लू के कारण निमोनिया, सांस की तकलीफ, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि हार्ट की समस्याएं भी उभर सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है। ऐसे में वायरस के खिलाफ शरीर की लड़ाई कमजोर पड़ जाती है, और फ्लू खतरनाक रूप ले लेता है।

डोभाल की उम्र में कितना बड़ा खतरा है फ्लू?

80 की उम्र में शरीर पहले की तरह ताकतवर नहीं रह जाता। साथ ही अगर कोई पहले से हृदय रोग, डायबिटीज या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहा हो, तो फ्लू का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा फ्लू से डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर में गिरावट और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याएं भी उभर सकती हैं, जो अस्पताल में भर्ती तक की नौबत ला सकती हैं।

सावधानी ही है बचाव का तरीका

बुज़ुर्गों को मौसमी फ्लू से बचाने के लिए डॉक्टर नियमित रूप से वैक्सीनेशन और समय पर इलाज की सलाह देते हैं। फ्लू के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और घर पर आराम के साथ दवाओं का कोर्स पूरा करना जरूरी होता है।

अमिताभ बच्चन ने इस शहर में खरीदी चौथी प्रॉपर्टी… हुई है बड़ी डील, जानिए कीमत

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महानायक अमिताभ बच्चन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही उत्तर प्रदेश के अयोध्या में लगातार निवेश कर रहे हैं और अब उन्होंने यहां चौथी प्रॉपर्टी खरीदी है.

बॉलीवुड (Bollywood) के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दनादन निवेश कर रहे हैं और रियल एस्टेट प्रॉपर्टी खरीद रहे.बीते साल राम मंदिर (Ram Mandir) की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही उनके द्वारा करोड़ों के निवेश की खबरे आ रही हैं. अब एक रिपोर्ट के मुताबिक, Big B के नामसे पहचाने जाने वाले अमिताभ बच्चन ने Ayodhya में एक और जमीन खरीदी है और इसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

ने अयोध्या नगरी में एक और प्लॉट खरीदा है. बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट की मानें, तो ये Ayodhya में उनकी चौथी प्रॉपर्टी है, जो 25000 वर्ग फीट का प्लॉट हैऐसा बताया जा रहा है कि बॉलीवुड अभिनेता ने इसे 40 करोड़ रुपये की भारी कीमत में खरीदा है. इससे पहले राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद उन्होंने अयोध्या कई अन्य रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज खरीदी हैं.

अमिताभ बच्चन की अयोध्या में तीन अन्य खरीदी गई पॉपर्टीज पर नजर डालें, तो ‘द सरयू’ प्रोजेक्ट में 10000 वर्ग फुट का प्लॉट (कीमत 14.5 करोड़ रुपये), हवेली अवध में 5,372 वर्ग फुट का प्लॉट (कीमत 4.54 करोड़ रुपये) और हरिवंश राय बच्चन ट्रस्ट के तहत 54,000 फुट का प्लॉट रजिस्टर्ड है, जो कि Ayodhya Ram Madir से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है और उनके पिता दिवंगत कवि हरिवंश राय बच्चन को समर्पित एक स्मारक के लिए है.

बिना छात्रों के चल रहे 211 स्कूल, अब होगा तबादला, शिक्षक कर रहे हड़ताल की तैयारी

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छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से एक रिपोर्ट जारी कर बताया गया है कि प्रदेश में 211 ऐसे विद्यालय हैं, जहां एक भी छात्र नहीं है। वहीं दूरश्त क्षेत्रों में ऐसे विद्यालय है जहां शिक्षकों का अभाव है। ऐसे में विभाग की ओर से प्रदेश में शिक्षकों के तबादले का निर्णय लिया गया है। जिसके विरोध में शिक्षक मंच की ओर से हड़ताल की तैयारी की जा रही है।

देश में शिक्षा व्यवस्था में कमियों की खबरें आए दिन आती रहती हैं, जिससे प्रदेश के शिक्षा तंत्र की स्थिति उजागर हो जाती है। प्रदेश के शिक्षा विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट से फिर एक बार ऐसा ही कुछ हुआ है। विभाग की ओर से जारी युक्तियुक्तकरण रिपोर्ट ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

बता दें कि रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 211 शासकीय विद्यालयों एक भी विद्यार्थी नहीं हैं, जबकि शिक्षक पदस्थ हैं। वहीं दूसरी ओर दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की काफी कमी है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ रहा है।

शिक्षकों की कमी से खराब रिजल्ट

साथ ही विभाग की ओर से बताया गया कि इस निर्णय के पीछे शिक्षा विभाग की समीक्षा रिपोर्ट है, जिसमें सरकारी स्कूलों में संसाधनों के असमान वितरण की गंभीर स्थिति सामने आई है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुंवारपुर में विषयवार शिक्षक न होने के कारण वर्ष 2024-25 में 12वीं का परीक्षा परिणाम महज 40.68 प्रतिशत रहा, जो राज्य औसत से बहुत कम है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि, राज्य सरकार का निर्णय समय की मांग है। यदि इसे निष्पक्षता और डेटा-आधारित पद्धति से लागू किया जाए तो प्रदेश की शिक्षा प्रणाली देश में एक आदर्श मॉडल बन सकती है। रायपुर जिले में कुल 389 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। यह कार्य शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के सामने ग्रामीणों ने उठाई आवाज

कुंवारपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष ग्रामीणों ने शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की थी। ग्रामीणों का कहना है कि सालों से विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा नहीं मिल पा रही है। मुख्यमंत्री इस मांग को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि जहां शिक्षक अनुपयोगी रूप से पदस्थ हैं, वहां से जरूरतमंद स्कूलों में भेजा जाए। शिक्षक वहीं तैनात हों, जहां छात्र हैं। यही सुशासन की प्राथमिक शर्त है।

 

हड़ताल की योजना तैयार

बता दें कि विभाग के इस निर्णय के विरुद्ध शिक्षकों की ओर से हड़ताल की तैयारी भी कर ली गई है। इस विषय को लेकर शिक्षक साझा मंच के पदाधिकारियों की स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के साथ युक्तियुक्तकरण के विषय पर व्यापक चर्चा हुई, जो बेनतीजा रही।

धरसीवां में दर्ज संख्या से अधिक शिक्षक, छत्तीसगढ़ सरकार का युक्तियुक्तकरण अभियान बना संतुलन की कुंजी

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छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा को प्रभावशाली और समावेशी बनाने के लिए छत्तीसगढ़़ सरकार ने कई सार्थक पहलें की हैं। इन्हीं पहलों में एक है शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण, जिसका मूल उद्देश्य है शासकीय शालाओं में दर्ज छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों की पदस्थापना। इस पहल से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि ऐसे स्कूलों में भी पढ़ाई की रफ्तार बढ़ेगी, जहां वर्षों से शिक्षक संकट की स्थिति बनी हुई है।

रायपुर जिले के धरसीवां विकासखण्ड में की गई हालिया समीक्षा में कई ऐसी शालाएं सामने आईं हैं, जहां छात्रों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन वहां शिक्षक आवश्यकता से कहीं अधिक संख्या में पदस्थ हैं। जैसे शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कन्या सरस्वती नयापारा में केवल 33 छात्राएं हैं, जबकि 7 शिक्षक तैनात हैं। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कन्या रविग्राम में 82 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और 8 शिक्षक कार्यरत हैं। शासकीय प्राथमिक शाला मानाकैम्प में 104 विद्यार्थी हैं और वहां 11 शिक्षक पदस्थ हैं। शासकीय प्राथमिक शाला तेलीबांधा रायपुर में 109 विद्यार्थी हैं, जबकि 9 शिक्षक हैं। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पी.एल.वाई., बैरनबाजार में 98 विद्यार्थी हैं और 10 शिक्षक कार्यरत हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कुछ विद्यालयों में शिक्षक जरूरत से ज्यादा हैं, जबकि राज्य के अनेक अन्य क्षेत्रों विशेषकर सुदूर और वनांचल में, जहां छात्रों की संख्या अधिक है, वहाँ शिक्षकों की बहुत कमी है। यह असमानता बच्चों के शिक्षा के अधिकार और गुणवत्ता आधारित शिक्षा के रास्ते में बड़ी बाधा बन रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस असंतुलन को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण का निर्णय लिया है। इस नीति के तहत विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात का गहन अध्ययन कर यह निर्धारित किया जा रहा है कि कहां कितने शिक्षक की वास्तव में जरूरत है और कहां उनकी अधिकता है। अधिशेष शिक्षकों को आवश्यकता वाले विद्यालयों में पदस्थ किया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। यह प्रक्रिया वास्तव में छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता बच्चों को गुणवत्ता आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है, चाहे वे राजधानी में पढ़ते हों या बस्तर के किसी सुदूर गांव में। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देशित किया है कि किसी भी विद्यालय में शिक्षक की कमी न रहे और हर बच्चा समान अवसर पाए। श्री साय का कहना है, शिक्षक हमारे शिक्षा तंत्र की रीढ़ हैं, लेकिन जब वे आवश्यकता से अधिक संख्या में एक ही स्थान पर केंद्रित हो जाते हैं, तो इससे अन्य क्षेत्रों में शैक्षणिक असंतुलन पैदा होता है। युक्तियुक्तकरण से हम इस असंतुलन को दूर करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में यह सुधार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह समानता, न्याय और गुणवत्ता की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

14 दिनों तक सुबह खाली पेट सहजन की पत्तियां खाने से क्या होता है?

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सहजन…मोरिंगा या ड्रमस्टिक्स, ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। इनका खाने में कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है। सांभर, सब्जी, सूप या चटनी के तौर पर हम इन्हें खाने में शामिल करते हैं। खून बढ़ाने से लेकर शरीर को ताकत देने तक, ड्रमस्टिक्स कई तरह से शरीर को फायदा पहुंचाती हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि इसकी पत्तियां भी गुणों की खान होती हैं। सहजन की पत्तियों (Drumstick Leaves) में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। क्या आप जानती हैं कि 14 दिनों तक अगर आप रोज सुबह खाली पेट सहजन की पत्तियों की चबाएंगी, तो इससे सेहत को क्या फायदा मिल सकता है। चलिए, इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं। यह जानकारी डाइटिशियन नंदिनी दे रही हैं। वह सर्टिफाइड डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट हैं।

  • अगर आप रोजाना खाली पेट सहजन की पत्तियां खाती हैं, तो इससे डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मि सकती है। इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स, ब्लड शुगर लेवर को मैनेज कर सकते हैं। आप इसे सुबह खाली पेट पानी में उबालकर भी पी सकती हैं।
  • 14 दिनों तक खाली पेट सहजन की पत्तियां खाने से मोटापा कम होता है। इसमें एंटी-ओबेसिटी गुण मौजूद होते हैं। खाली पेट इन पत्तियों को चबाने से वजन में अंतर महसूस हो सकता है।
  • सहजन की पत्तियों को सुबह खाली पेट पानी के साथ लेने से हार्ट हेल्थ में भी सुधार होता है। इसमें पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स के कारण यह दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं।
  • एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप रोजाना 2 हफ्तों तक खाली पेट सहजन की पत्तियां खाएंगी, तो इससे हड्डियां मजबूत होती हैं, जोड़ों का दर्द कम होता है। इन पत्तियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होता है।
    • अगर आप खाली पेट रोजाना सहजन की पत्तियां खाती हैं, तो इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और बीमारियों से बचाव होगा।
    • 14 दिनों तक खाली पेट सहजन की पत्तियां खाने से बीपी कंट्रोल होता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल मैनेज करने में मदद मिलती है।
    • अगर आप रोजाना 2 हफ्तों तक सहजन की पत्तियां खाएंगी, तो इससे डाइजेशन और स्किन हेल्थ में भी सुधार होता है।

    नोट- आप रोजाना 5-7 सहजन की पत्तियां खा सकती हैं या इन्हें पानी में उबालकर खाली पेट पी सकती हैं। हालांकि, अगर आपको कोई हेल्थ कंडीशन है या किसी चीज से एलर्जी है, तो इसका सेवन करने से पहले एक बार एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

    14 दिनों तक खाली पेट सहजन की पत्ते खाने से आपको कई फायदे मिल सकते हैं। अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, तो हमें आर्टिकल के ऊपर दिए गए कमेंट बॉक्स में बताएं। हम अपने आर्टिकल्स के जरिए आपकी समस्या को हल करने की कोशिश करेंगे।
    अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला दुनिया का सबसे हेल्दी फल, नाम सुनकर उड़ जाएंगे आपके होश!

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फलों को सेहत का खजाना कहा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इनमें से कौन सा फल सबसे ज्यादा फायदेमंद हो सकता है? अमेरिका की विलियम पैटरसन यूनिवर्सिटी के एक ताजा अध्ययन ने इस सवाल का जवाब ढूंढ लिया है और नाम सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. शोधकर्ताओं ने 41 अलग-अलग फलों की पोषण सामग्री और कैलोरी की तुलना की और पाया कि नींबू इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. जी हां, छोटा सा नींबू आपकी सेहत के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है.

अध्ययन के अनुसार, नींबू में विटामिन्स, फाइबर और शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट्स जैसे फ्लेवोनॉइड्स की उच्च मात्रा होती है. सिर्फ 100 कैलोरी में नींबू 100% पोषण जरूरतों को पूरा कर सकता है, जो इसे अन्य फलों से अलग बनाता है. नींबू इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, आयरन के अवशोषण में मदद करता है, पाचन को बेहतर बनाता है और अपने एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण दिल की बीमारी को रोकने में भी मदद करता है.

 

छत्तीसगढ़ में बनेगा देश का पहला एआई सेज, रेकबैंक करेगा 1000 करोड़ का निवेश

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छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में भारत का पहला एआई-केंद्रित स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनेगा। रैकबैंक डेटासेंटर द्वारा विकसित यह परियोजना लगभग 6 एकड़ में फैली होगी और इसमें 1000 करोड़ का निवेश होगा। SEZ से राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और यह डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाएगा। यह भारत को एआई में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

भारत का पहला एआई-केन्द्रित स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) अब छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में बनने जा रहा है। यह एक ऐसा खास इलाका होगा, जिसे केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर डेटा से जुड़ी तकनीकों के विकास और संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां अत्याधुनिक कंप्यूटर सिस्टम और सर्वर होंगे, जो सोचने जैसी क्षमता वाले AI सिस्टम को चलाएंगे और दुनिया की बड़ी कंपनियां यहीं से अपने डिजिटल काम करेंगी।सरकार ने इस SEZ को टैक्स और अन्य कानूनी छूट दी है ताकि नई तकनीकों को तेजी से विकसित किया जा सके। यह पहली बार है जब भारत में ऐसा कोई क्षेत्र पूरी तरह एआई पर केंद्रित बनाया जा रहा है, जिससे नवा रायपुर देश का अगला डिजिटल और तकनीकी हब बनकर उभरेगा। इस परियोजना के ज़रिए भारत को वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी लीडर बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में भारत का पहला एआई-आधारित “RackBank Data Center SEZ” बनाया जाएगा। यह स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन पूरी तरह से कंप्यूटर, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा होगा। इस परियोजना का विकास RackBank Datacenters Pvt. Ltd. कर रहा है, जिसमें करीब ₹1000 करोड़ का निवेश होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे नवा छत्तीसगढ़ की नई शुरुआत बताया है और कहा कि यह निवेश युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और राज्य के लिए तकनीकी पहचान लाएगा। साथ ही, यह योजना डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया के विजन को आगे बढ़ाएगी।

*रायपुर पश्चिम में विकास की रफ्तार हुई तेज:1 महीने में मूणत ने की 16.47 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों की शुरुआत, कहा – हर वार्ड में पहुंचेगा विकास*

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रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में विकास की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। बीते एक माह में क्षेत्र के 8 वार्डों में ₹16 करोड़ 47 लाख 97 हजार से अधिक की लागत के विकास कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। इन कार्यों में सड़क निर्माण, स्कूलों का उन्नयन, सामुदायिक भवन, पार्कों का सौंदर्यीकरण, जल निकासी, अतिरिक्त कक्ष निर्माण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल हैं।

यह कार्य रायपुर पश्चिम के विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेश मूणत के मार्गदर्शन में प्रारंभ किए गए हैं। भाजपा सरकार द्वारा जनता से किए गए विकास वादों को धरातल पर उतारने की दिशा में इसे एक ठोस पहल माना जा रहा है।

वार्डवार स्वीकृत राशि एवं तिथि निम्नानुसार है:

* वीर सावरकर वार्ड– ₹80 लाख (23 अप्रैल)
* माधवराव सप्रे वार्ड – ₹168.65 लाख (23 अप्रैल)
* ठाकुर प्यारेलाल वार्ड – ₹160 लाख (25 अप्रैल)
* रामकृष्ण परमहंस वार्ड– ₹665 लाख (3 मई)
* आत्मानंद वार्ड– ₹289 लाख (6 मई)
* रामदास वार्ड – ₹55 लाख (11 मई)
* सरदार वल्लभ भाई पटेल वार्ड – ₹63 लाख (11 मई)
* संत रविदास वार्ड – ₹163.20 लाख (18 मई)
* वीर सावरकर वार्ड– ₹119.89 लाख (अप्रैल अंत)
* माधवराव सप्रे वार्ड – ₹292.13 लाख (मई मध्य)

कुल राशि – ₹16,47,97,000

विधायक राजेश मूणत का कहना है कि
“हमारे लिए विकास कोई चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है। रायपुर पश्चिम के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा जनता से किए गए हर वादे को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। मैं व्यक्तिगत रूप से इन कार्यों की निगरानी कर रहा हूं ताकि हर कार्य गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।”

मूणत ने आगे कहा कि रायपुर पश्चिम विधानसभा मेरा परिवार है और इस परिवार के हर सदस्य को बेहतर जीवन सुविधाएं देना मेरी जिम्मेदारी है। हम सिर्फ घोषणा नहीं करते, धरातल पर कार्य कर उसे सिद्ध करते हैं। हर वार्ड में विकास कार्यों की योजना जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम नागरिकों की सहभागिता से बनाई जा रही है। हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी इलाका बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे।

मूणत ने कहा कि विकास की गति केवल जारी नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में और तेज होगी। जनता का विश्वास हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और उसी के आधार पर हम पारदर्शी, टिकाऊ और जनकल्याणकारी कार्य कर रहे हैं। मैं स्वयं प्रत्येक कार्य स्थल पर जाकर निरीक्षण करता हूं, ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। मेरा वादा है कि रायपुर पश्चिम एक आदर्श विधानसभा के रूप में उभरेगा।”

मटर के आयात पर लग सकती है रोक, दालों पर आयात शुल्क बढ़ाने की सिफारिश, जानिए क्या होगा आप पर असर?

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इस साल किसानों को दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छा इजाफा करने के बाद सरकार दलहन उत्पादक किसानों को एक और तोहफा दे सकती है। यदि सरकार ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिश मान ली तो दालों पर आयात शुल्क बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर दाल की कीमतों पर पड़ेगा। आइए इस खबर को विस्तार से जानते हैं।

देश में सूखी मटर के आयात पर जल्द ही प्रतिबंध लग सकता है। कृषि उत्पादों पर सरकार को सलाह देने वाली संस्था कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने केंद्र सरकार को मटर के आयात पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। इसके अलावा सीएसीपी ने अन्य दालों जैसे कि अरहर, मसूर और उड़द दाल पर भी आयात शुल्क लगाने की सिफारिश की है। 

सीएसीपी ने अपनी सिफारिश में कहा है कि बिना रोक-टोक के आयात होने वाली सस्ती दालों से घरेलू कीमतों पर असर पड़ता है और इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है। सीएसीपी ने सुझाव दिया कि अरहर, मसूर और उड़द जैसी दालों पर आयात शुल्क बढ़ाया जाए, ताकि खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के दौरान किसानों को बेहतर कीमत मिल सके। 

सीएसीपी ने कहा कि हमने पाया है कि दालों और खाद्य तेलों का बिना रोक-टोक आयात होने से सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मूंग और तूर की घरेलू कीमतें पिछले साल एमएसपी से नीचे चली गई थीं। आयोग के मुताबिक, कृषि उपजों पर आयात शुल्क की संरचना को एमएसपी के साथ जोड़ने से ही किसानों को अच्छी कीमत सुनिश्चित होगी। और किसान तिलहन और दालों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।बता दें, केंद्र सरकार ने देश में दालों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए दिसंबर 2023 में पीले मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। तब से अप्रैल 2025 तक भारत ने 33 लाख टन से अधिक पीले मटर का आयात किया है। पीले मटर का शुल्क-मुक्त आयात 31 मई, 2025 तक खुला है। सरकार ने अरहर और उड़द जैसी अन्य दालों का भी मार्च 2026 तक शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति दी है।

क्या होगा आप पर असर?

यदि सूखी मटर के शुल्क मुक्त आयात पर प्रतिबंध लगा और अन्य दालों पर आयात शुल्क बढ़ा तो इसका असर सीधे तौर पर दालों की कीमतों पर पड़ेगा। हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य भी सुनिश्चित होगा।