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Shashi Tharoor News: शशि थरूर हुए नाराज तो बढ़ेगी कांग्रेस की टेंशन…

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केरल में सब कुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बावजूद वरिष्ठ नेता शशि थरूर पार्टी के लिए नई मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। पार्टी जहां सरकार पर संविधान के ऊपर हमला करने का आरोप लगा रही है, वहीं थरूर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान को पवित्र मानते हैं।

इसके साथ उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र करते हुए केंद्र सरकार के रुख की वकालत की है।

शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी कोई नई बात नहीं है। केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता वाली बैठक से भी थरूर दूर रहे थे। उस वक्त पार्टी ने दलील दी थी कि केरल लिटरेचर फेस्टिवल में शशि थरूर की दो किताबों का विमोचन है, इसलिए वह शामिल नहीं हुए। पर, केरल के कोझिकोड में हुए इस फेस्टिवल में उनके बयान से विवाद बढ़ गया है।

प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शशि थरूर के बयानों से पार्टी की मुश्किलें बढ़ रही हैं। वह लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो पार्टी लाइन से अलग हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित तमाम नेता सरकार पर संविधान के ऊपर हमले करने के आरोप लगा रहे हैं, पर थरूर सार्वजनिक तौर पर संविधान को लेकर सरकार का बचाव कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर रहे हैं।

केरल में कुछ माह बाद विधानसभा चुनाव हैं। पार्टी पिछले 10 वर्षों से सत्ता से बाहर है। पार्टी की स्थानीय निकाय चुनाव में अच्छे प्रदर्शन से भी उम्मीद जगी है। पर, थरूर के बयानों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। तिरुवनंतपुरम से थरूर लगातार चार बार लोकसभा चुनाव जीते हैं, पर निगम चुनाव में इस सीट से भाजपा ने जीत हासिल की है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी एलडीएफ का प्रदर्शन बेहतर था।

ऐसे में तिरुवनंतपुरम क्षेत्र की 14 विधानसभा सीट को लेकर पार्टी रणनीतिकारों की धड़कनें बढ़ रही हैं। कांग्रेस नेता मानते हैं कि इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शन के लिए शशि थरूर को जिम्मेदारी संभालनी होगी। इसलिए, संसद के बजट सत्र में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी थरूर से सीधा मुलाकात कर सकते हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद भी काफी दिनों से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बात करने की मांग करते रहे हैं।

अचानक भारत आए नाहयान और पाकिस्तान को दे दिया बड़ा झटका…

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बीते दिनों संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अचानक भारत का दौरा कर सबको चौंका दिया था। इस यात्रा के दौरान भारत और यूएई के बीच कई समझौते भी हुए, जिनमें सबसे अहम रहा- दोनों देशों के बीच हुआ ऐतिहासिक रक्षा समझौता।

इस समझौते को पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बीते साल हुई डिफेंस डील का करारा जवाब माना जा रहा है। इन सब के बाद अब नाहयान की इस यात्रा का असर भी दिखने लगा है। इस दौरे के कुछ ही दिनों बाद यूएई ने पाकिस्तान को झटका देते हुए इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की योजना से खुद को अलग कर लिया है। यह समझौता अगस्त 2025 में हुआ था।

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने इस प्रोजेक्ट से कदम पीछे खींच लिए हैं और एयरपोर्ट संचालन के लिए किसी लोकल पार्टनर का चयन भी नहीं किया। ऐसे में इस डील को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूएई और सऊदी अरब के रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है और पाकिस्तान सऊदी से नजदीकियां बढ़ा रहा है।

पाक से क्यों उखड़ा यूएई का मन?

करीब चार दशक पहले तक यूएई पाकिस्तान के सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक था। यूएई में काम करने वाले लाखों पाकिस्तानी नागरिकों से भेजी जाने वाली रेमिटेंस भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा रही है। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम किया था। हालांकि समय के साथ सुरक्षा चिंताओं, लाइसेंस विवादों और पाकिस्तान की हरकतों की वजह से यूएई का मन पाक से उखड़ गया।

हाल की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि खराब गवर्नेंस और राजनीतिक दखल के कारण पाकिस्तान के सरकारी उपक्रमों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके बाद इन्हें सस्ते दामों पर बेचने की नौबत भी आई है। इसी क्रम में पिछले साल शहबाज शरीफ सरकार ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को भी निजी हाथों में बेच दिया था। ऐसे हालात में पाकिस्तान पर भरोसा करना मुश्किल है। यही वजह है कि यूएई समझौते से पीछे हट गया है।

भारत-यूएई के बीच अहम समझौता

इसके उलट भारत यात्रा के बाद यूएई और भारत के रिश्तों में और मजबूती देखने को मिली है। इस दौरे के बाद यूएई ने 900 भारतीय कैदियों को रिहा करने को मंजूरी दी, जिसे भारत के प्रति एक बड़ा सद्भावना कदम माना जा रहा है। वहीं भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच कई अहम साझेदारियां हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान ने दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की योजना भी पेश की है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है।

‘हम दुनिया को…’, रिपब्लिक डे पर EU चीफ ने भारत को लेकर क्या कहा…

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठता दिख रहा है. इसी क्रम में भारत दौरे पर पहुंचीं यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रविवार को अहम बयान देते हुए कहा कि भारत और यूरोप ने रणनीतिक साझेदारी, संवाद और खुलेपन का स्पष्ट विकल्प चुना है.

उन्होंने इस प्रस्तावित समझौते को दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बताया.

रणनीतिक साझेदारी का स्पष्ट संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली शिखर वार्ता से पहले वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोप की यह साझेदारी पूरी दुनिया को एक मजबूत संदेश दे रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘भारत और यूरोप ने एक स्पष्ट विकल्प चुना है,रणनीतिक साझेदारी, संवाद और खुलेपन का विकल्प. अपनी ताकतों का लाभ उठाना और आपसी समझ बनाना. हम एक विभाजित दुनिया को दिखा रहे हैं कि यह रास्ता भी संभव है.’

गणतंत्र दिवस समारोह में EU के शीर्ष नेता होंगे मुख्य अतिथि

गौरतलब है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा सोमवार को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. वहीं एंटोनियो कोस्टा ने भारत को यूरोपीय संघ का एक अहम साझेदार बताया. यूरोपीय संघ के एक संक्षिप्त बयान में कोस्टा के हवाले से कहा गया, ‘साथ मिलकर हम नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने की क्षमता और जिम्मेदारी साझा करते हैं.

जयशंकर ने जताई नई शुरुआत की उम्मीद

इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को यूरोपीय संघ के दोनों शीर्ष नेताओं से मुलाकात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगा. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है. 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में पाकर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आगामी चर्चा भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगी.

सभी समझौतों की जननी

इससे पहले 20 जनवरी को दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान भी वॉन डेर लेयेन ने इस प्रस्तावित समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐसे ऐतिहासिक व्यापार समझौते की दहलीज पर हैं, जिससे दो अरब लोगों का विशाल बाजार बनेगा और जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा. उन्होंने इस समझौते को ‘सभी समझौतों की जननी’ करार दिया था.

136 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. यूरोपीय संघ, एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें करीब 76 अरब डॉलर का निर्यात और लगभग 60 अरब डॉलर का आयात शामिल है.

‘संविधान से ही देश की ताकत…’, गणतंत्र दिवस पर मौलाना खालिद रशीद…

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देश में आज गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और उमंग के साथ राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जा रहा है. इस मौके पर लखनऊ में प्रमुख इस्लामिक विद्वान मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी देशवासियों को बधाई देते हुए देश की खुशहाली और तरक्की के लिए जुटने की अपील की.

मौलाना ने कहा कि आज का दिन हमे यह याद दिलाता है कि हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं और हमारी शक्तियां हमारे संविधान में निहित हैं. आज की पीढ़ी को यह जानना बहुत जरूरी है.

अपने संदेश में मौलाना खालिद रशीदी ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी नई पीढ़ी को अपने देश के संविधान के बारे में जागरूक और शिक्षित करें. सभी को यह पता होना चाहिए की हमारे संविधान की मूल प्रस्तावना क्या है और उसका उद्देश्य क्या है. उन्होंने बताया कि संविधान सबको एक नजरिये से देखता है.

गणतन्त्र दिवस पर दिया सन्देश

मौलाना खालिद रशीदी फरंगी महली उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख इस्लामिक विद्वानों में शुमार हैं. वे हमेशा आपसी सद्भाव और भाईचारे की बात करते हैं. गणतंत्र दिवस पर बधाई देकर उन्होंने सभी को संविधान के मुताबिक साथ रहकर कार्य करने की अपील की है. वे अक्सर महत्वपूर्ण पर्वों और राष्ट्रीय पर्वों पर ऐसे सन्देश देते हैं.

प्रदेश वासियों को सीएम योगी ने दी शुभकामनाएं

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में गणतंत्र दिवस के मौके पर ध्वजारोहण के बाद प्रदेश वासियों को बधाई देते हुए देश सेवा का संकल्प लिया. सीएम ने कहा, “हर भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह संविधान के प्रति पूरे विश्वास, सम्मान और समर्पण के साथ काम करे, क्योंकि यह अनुकूल और चुनौतीपूर्ण दोनों परिस्थितियों में देश के लिए मार्गदर्शक शक्ति रहा है. यह बदले में संविधान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और भक्ति को दर्शाता है. हम सभी जानते हैं कि जब भी हम संविधान के मूल मूल्यों और भावना को बनाए रखते हैं, तो हम वास्तव में भारत माता के उन महान सपूतों का सम्मान करते हैं जिनके बलिदान ने एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र की नींव रखी.”

‘अच्छे पड़ोसी और दोस्त…’, गणतंत्र दिवस पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग…

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देश के 77वें गणतंत्र दिवस के खास मौके पर पूरी दुनिया की नजरें राजधानी दिल्ली पर हैं। इसी बीच चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी दोनों देशों के रिश्तों पर बात करते हुए खास संदेश भेजा है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि भारत-चीन एक अच्छे पड़ोसी, दोस्त और पार्टनर्स हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को संदेश भेजते हुए कहा कि भारत-चीन की दोस्ती “ड्रैगन और हाथी का टैंगो” है। ये एक चीनी लोकोक्ति है, जो दो परमाणु संपन्न देशों के बीच अच्छे रिश्तों को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होता है।

चीनी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत-चीन के रिश्तों में काफी सुधार आया है। इससे दुनिया में शांति और समृद्धि स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा-

हमारा मानना है कि भारत और चीन के लिए अच्छे पड़ोसी, दोस्त और पार्टनर्स बने रहना ही एक बेहतर विकल्प है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि दोनों देश अच्छे और स्थिर संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।

भारत-चीन के रिश्ते

बता दें कि ट्रंप के टैरिफ के बीच पिछले कुछ समय में भारत और चीन के संबंधों में सुधार आया है। अक्टूबर 2024 में कजान में आयोजितब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाकात देखने को मिली थी। 2025 में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू हो गई हैं।

CG” मुख्यमंत्री ने जशपुर में किया होमस्टे का शुभारंभ, मॉडल सामुदायिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा गांव ‘केरे’, होमस्टेज़ ऑफ इंडिया के साथ हुआ MOU

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cm sai inaugurated homestay Jashpur: इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।

  1. जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य
  2. जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी परियोजना
  3. स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित

जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।

जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य

एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।

जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी परियोजना

मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।

CG: रायपुर साहित्य उत्सव का समापन, राज्यपाल रामेन डेका ने कहा डिजिटल युग में भी बना रहेगा प्रिंट और साहित्य का महत्व, विजय शर्मा ने हर वर्ष आयोजन की कही बात…

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समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल रामेन डेका शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा।

  1. तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का समापन
  2. साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए : राज्यपाल
  3. छत्तीसगढ़ में बहती रही है साहित्य की अविरल धारा : ओ. पी. चौधरी

रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का आज समापन हुआ। साहित्य के इस महाकुंभ में साहित्यकारों, कहानीकारों, लेखकों, कलाकारों, चित्रकारों ने हिस्सा लिया। विचारों के आदान-प्रदान के साथ सवाल जवाब भी हुए । समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल रामेन डेका शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि राज्यपाल रामेन डेका के अलावा कैबिनेट मंत्री ओपी चौधरी, प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी, फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए : राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते हैं, उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की।

यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।रामेन डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में बहती रही है साहित्य की अविरल धारा : ओ. पी. चौधरी

वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।

समापन के दिन विशेष रूप से शामिल हुए डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता और इसको लेकर लोगों के रुझान को देखते हुए हमने निर्णय लिया है कि हर साल इस तरह के आयोजन किए जाएंगे । छत्तीसगढ़ में साहित्यकारों और कलाकारों का यह महाकुंभ यहां के साहित्यकारों कलाकारों को एक नई दिशा प्रदान करेगा ।

CG: छत्तीसगढ़ की इन तीन विभूतियों को पद्म सम्मान, सीएम साय ने दी बधाई, कहा- यह हमारे लिए गौरव का क्षण…

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केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। छत्तीसगढ़ के लिए यह अत्यंत गौरवपूर्ण का क्षण है कि राज्य की तीन विशिष्ट हस्तियों का चयन पद्म सम्मान हेतु किया गया है। समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा की समाजसेविका बुधरी ताती तथा चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में दशकों से निस्वार्थ कार्य कर रहे डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को पद्म पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा। डॉ. गोडबोले दंपत्ति को यह सम्मान संयुक्त रूप से प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उक्त तीनों विभिूतियों को पद्म पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। तीनों विभूतियों ने अपने सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता से छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में छत्तीसगढ़ की इन तीनों विभूतियों का नाम शामिल होना राज्य के लिए सम्मान और गौरव का विषय है। विशेष रूप से यह उल्लेखनीय है कि सम्मानित सभी हस्तियां बस्तर अंचल के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से सेवा कार्य कर रही हैं।

बस्तर कीबड़ी दीदीबुधरी ताती को पद्म

दंतेवाड़ा जिले के हीरानार ग्राम की निवासी बुधरी ताती को महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान एवं समाजसेवा के लिए पद्म सम्मान प्रदान किया जाएगा। वर्ष 1984 से वे निरंतर वनांचल क्षेत्रों में नशामुक्ति, साक्षरता अभियान, सामाजिक जागरूकता तथा महिलाओं एवं बालिका शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। बुधरी ताती अभी तक 500 से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। बुधरी ताती को छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा वृद्धजनों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। उनके समर्पण और स्नेहभाव के कारण स्थानीय लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘बड़ी दीदी’ कहकर संबोधित करते हैं।

दुर्गम अंचलों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा देने वाले गोडबोले दंपत्ति सम्मानित

चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले एवं उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्म सम्मान से नवाजा जाएगा। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. गोडबोले और उनकी पत्नी पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर एवं अबूझमाड़ जैसे अत्यंत दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य जागरूकता, कुपोषण उन्मूलन और प्राथमिक उपचार को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से दोनों ने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के माध्यम से ऐसे गांवों तक इलाज पहुंचाया है, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। वे स्वयं पैदल अथवा सीमित साधनों के सहारे इन क्षेत्रों में पहुंचकर नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते हैं और मरीजों का उपचार करते हैं। पद्म सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ की इन विभूतियों का चयन राज्य की सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। यह सम्मान न केवल संबंधित व्यक्तियों के लिए, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गर्व का विषय है और समाजसेवा के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी है।

CG: समय की ज़रूरत और सामाजिक संवाद का सशक्त मंच बना रायपुर साहित्य उत्सव, साय सरकार के प्रयासों से शुरू हुआ नया अध्याय…

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रायपुरः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने साहित्य और संस्कृति के संरक्षण को केवल औपचारिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार किया है। राज्य की बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और आदिवासी पहचान को केंद्र में रखते हुए सरकार ने साहित्य को जनजीवन से जोड़ने के लिए कई ठोस पहलें की हैं। साय सरकार ने साहित्यिक गतिविधियों को संस्थागत आधार देने पर विशेष ध्यान दिया। इसकी बानगी के राजधानी रायपुर में आयोजित साहित्य उत्सव के रूप में दिखी।

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी आदिवासी और लोक साहित्य परंपरा में निहित है। साय सरकार ने इसी को ध्यान में रखकर राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में 23 से 25 जनवरी तक रायपुर साहित्य महोत्सव का आयोजित की। इन 3 दिनों के उत्सव में 42 सत्रों के जरिए साहित्य, संस्कृति और अलग-अलग मुद्दों विचार-विमर्श हुई। देश-प्रदेश के 120 ख्यातिप्राप्त लेखक, कवि, विचारक, बुद्धिजीवी और साहित्य प्रेमी इसमें शामिल हुए। तीन दिनों तक साहित्य प्रेमियों का जोश हाई रहा। उत्सव के तीसरे दिन भी परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। विभिन्न आयु-वर्ग के नागरिकों, छात्रों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने उत्सव में पहुँचकर सक्रिय रूप से सहभागिता की। आखिरी दिन पत्रकारिता और साहित्य, ट्रैवल ब्लॉग: पर्यटन के प्रेरक, नाट्यशास्त्र और कला परंपरा, समाज और सिनेमा, संविधान और भारतीय मूल्य , शासन और साहित्यके अंतर्संबंधों पर बुद्धिजीवी वक्ताओं ने अपने विचार रखें।

साय सरकार ने बनाया जनभागीदारी वाला आयोजन

आज का समाज तेजी से सूचना आधारित और डिजिटल होता जा रहा है। सोशल मीडिया और त्वरित कंटेंट के युग में गहन विचार, संवाद और विमर्श के लिए जगह सीमित होती जा रही है। ऐसे में रायपुर साहित्य उत्सव ने लेखकों, कवियों, पत्रकारों, विचारकों और पाठकों को आमने-सामने संवाद का अवसर दिया। ह मंच साहित्य को केवल किताबों तक सीमित न रखकर समाज, राजनीति, पर्यावरण, आदिवासी संस्कृति, स्त्री विमर्श और समकालीन चुनौतियों से जोड़ने में सफल रहा। यही इसकी सबसे बड़ी प्रासंगिकता रही। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा इस साहित्य उत्सव को जिस स्तर पर समर्थन और संरचना दी गई, वह सराहनीय रही। सरकार ने इसे केवल औपचारिक कार्यक्रम न बनाकर जनभागीदारी वाला आयोजन बनाने का प्रयास किया। स्थानीय साहित्यकारों, युवा रचनाकारों और क्षेत्रीय भाषाओं को मंच देकर यह संदेश दिया गया कि साहित्य केवल बड़े नामों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी आवाज़ों का भी प्रतिनिधित्व करता है। साय सरकार की यह पहल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।

दीर्घकालिक होगा रायपुर साहित्य उत्सव का प्रभाव

रायपुर साहित्य उत्सव का प्रभाव तात्कालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक होगा। ऐसे आयोजनों से युवाओं में पढ़ने-लिखने की रुचि बढ़ती है और वैचारिक परिपक्वता का विकास होता है। साहित्य जब समाज के मुद्दों से जुड़ता है, तो वह संवेदनशीलता, सहिष्णुता और संवाद की संस्कृति को मजबूत करता है। यह उत्सव न केवल पाठकों और लेखकों के बीच सेतु बना, बल्कि समाज को सोचने-समझने की नई दृष्टि भी देता है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक प्रभाव शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक गतिविधियों में स्पष्ट दिखाई दे सकते हैं। रायपुर साहित्य उत्सव का समापन भले ही हो गया हो, लेकिन इसके विचार और संवाद समाज में लंबे समय तक गूंजते रहेंगे। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक मानचित्र पर मजबूत पहचान देने के साथ-साथ समाज में विचारशीलता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ है।

LIVE” आज 77वां गणतंत्र दिवस.. मुख्य समारोह रायपुर और भोपाल में.. मुख्यमंत्री साय और डॉ मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, ली परेड की सलामी…

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गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार केंद्रीय सशस्त्र बलों की भी मजबूत मौजूदगी रहेगी। राज्य स्तरीय परेड में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की टुकड़ियां शामिल होंगी।

  1. रायपुर और भोपाल में राज्य स्तरीय समारोह
  2. रायपुर में 117, भोपाल में 23 प्लाटून परेड
  3. केंद्रीय बलों और सांस्कृतिक दलों की भागीदारी

रायपुर: आज देशभर में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।छत्तीसगढ़ में भी विभिन्न जिलों में मुख्य समारोह आयोजित किए गए हैं, जहां प्रमुख जनप्रतिनिधि ध्वजारोहण करेंगे। बिलासपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ध्वजारोहण कर जनता को संबोधित करेंगे, जबकि राजनांदगांव में विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। (Today Live Breaking News and Updates 26th January 2026) जगदलपुर में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, अंबिकापुर में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और दुर्ग में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ध्वजारोहण करेंगे। इस अवसर पर परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन किए जा रहे हैं, वहीं प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

मुख्य समारोह रायपुर में, राज्यपाल लेंगे सालामी

इसी कड़ी में प्रदेश की राजधानी रायपुर के स्थानीय पुलिस परेड ग्राउंड में गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया जाएगा। सुबह 9 बजे राज्यपाल रमेन डेका ध्वजारोहण करेंगे। इस अवसर पर देश की सुरक्षा, अनुशासन और एकता का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

कुल 117 टुकड़ियां होंगी शामिल

समारोह की परेड में कुल 117 टुकड़ियां शामिल होंगी। इनमें सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा बल (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और विशेष आमंत्रित उत्तरप्रदेश पुलिस की टुकड़ी शामिल है।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (पुरुष एवं महिला), छत्तीसगढ़ पुलिस (पुरुष), जेल पुलिस (पुरुष), नगर सेना (पुरुष एवं महिला) तथा एनसीसी के बॉयज और गर्ल्स कैडेट्स भी परेड का हिस्सा रहेंगे। (Today Live Breaking News and Updates 26th January 2026) परेड के दौरान पुलिस डॉग स्क्वायड विशेष आकर्षण का केंद्र होगा।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज कुछ ही देर बाद गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा। ऐतिहासिक लाल परेड मैदान में होने वाले इस भव्य आयोजन को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस अवसर पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ध्वजारोहण करेंगे और परेड की सलामी लेंगे। इस वर्ष का गणतंत्र दिवस समारोह कई मायनों में खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार अब तक की सबसे लंबी परेड आयोजित की जा रही है, जिसमें सुरक्षा बलों से लेकर सांस्कृतिक दलों तक की व्यापक भागीदारी देखने को मिलेगी।

Madhya Pradesh Republic Day: परेड में इस वर्ष कुल 23 प्लाटून शामिल

बात करें मध्यप्रदेश की तो भोपाल में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष कुल 23 प्लाटून शामिल होंगी, जिनमें करीब 1300 जवान कदमताल करते नजर आएंगे। परेड की विशेष बात यह है कि इसमें डॉग स्क्वॉड भी शामिल किया गया है, जो सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती का संदेश देगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश पुलिस, विशेष सशस्त्र बल (SAF), पुलिस बैंड, एनसीसी की गर्ल्स और बॉयज विंग, स्काउट-गाइड की टीम और महिला शौर्य दल परेड का हिस्सा होंगे। इस बार परेड में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के दल की भागीदारी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।

MP Republic Day 2026: राज्यपाल करेंगे ध्वजारोहण समारोह

परेड की कमान इस बार युवा आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ के हाथों में होगी, जो वर्तमान में ग्वालियर जिले में एसडीओपी के पद पर पदस्थ हैं। (Today Live Breaking News and Updates 26th January 2026) वहीं परेड की सेकेंड कमांडर की जिम्मेदारी रतलाम की डीएसपी नीलम निभाएंगी, जो राज्य पुलिस सेवा की अधिकारी हैं। दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में परेड का अनुशासन और समन्वय देखने लायक होगा।

26 January MP: केंद्रीय बलों की ऐतिहासिक भागीदारी

गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार केंद्रीय सशस्त्र बलों की भी मजबूत मौजूदगी रहेगी। राज्य स्तरीय परेड में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की टुकड़ियां शामिल होंगी। इन तीनों केंद्रीय बलों की भागीदारी परेड को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करेगी और सुरक्षा बलों की एकता व शक्ति का प्रदर्शन करेगी।

परेड के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी समारोह का प्रमुख आकर्षण रहेंगे। स्कूली बच्चों और आदिवासी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाएंगी। (Today Live Breaking News and Updates 26th January 2026) इसके अलावा परेड में प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों की झांकियां भी निकाली जाएंगी, जो शासन की योजनाओं और उपलब्धियों को दर्शाएंगी।