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Monsoon 2026: कब आएगा मानसून? नौतपा में झमाझम बारिश के बीच आया बड़ा अपडेट….

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छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में लोगों को बेसब्री से मानसून का इंतजार है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 12 जून तक तक छत्तीसगढ़ में मानसून दस्तक दे सकती है।

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी पड़ी रही है। कुछ जिलों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लोगों को बेसब्री से मानसून का इंतजार है। छत्तीसगढ़ में दो जून तक नौतपा है। इस बीच कुछ जगहों पर मौसम का मिजाज बदला है। मौसम विभाग ने प्रदेश में बारिश के साथ-साथ मानसून को लेकर अपडेट दिया है।

आंधी और बारिश का अलर्ट

नौतपा में छत्तीसगढ़ तप रहा है। इस बीच आमलोगों के लिए राहत देने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश के कई जिलों में अगले दो दिनों तक आंधी और बारिश का अलर्ट है। साथ ही 60 किमी की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। सूरजपुर और अंबिकापुर में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई है। इसके साथ ही रायगढ़ और सुकमा में भी तेज आंधी चली है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। रायपुर में भी धूल भरी आंधी का अलर्ट है।

कब आएगा छत्तीसगढ़ में मानसून

गर्मी से बेहाल लोगों को छत्तीसगढ़ में मानसून से राहत मिलने की उम्मीद है। देश में सबसे पहले मानसून केरल में आता है। केरल में सामान्य मानसून की तारीख एक जून को तय है। माना जाता है कि केरल में पहुंचने के 10 दिन बाद छत्तीसगढ़ में मानसून पहुंच जाता है।

12 जून तक मानसून के पहुंचने की उम्मीद

छत्तीसगढ़ मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 12 जून है। फेवरेबल कंडीशन होने पर मानसून प्रदेश में समय से पहुंच सकता है। हालांकि यह तय समय है। पांच-सात दिन की देरी भी हो सकती है। मगर अभी तक की संभावित तारीख यही है

अभी प्रदेश में है लू

अभी छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिले लू की चपेट में हैं। सभी जिलों में सामान्य से अधिक तापमान हैं। 40-47 डिग्री के बीच जिलों के तापमान रह रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक एक जून तक कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। मगर भीषण गर्मी से राहत मानूस आने के बाद ही लोगों को मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का प्रथम चरण सफलतापूर्वक संपन्न…

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दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा शुरू

भारत और छत्तीसगढ़ राज्य के विकास की ठोस नींव तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय अभियान भारत की जनगणना 2027 का प्रथम चरण छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। राज्य के सभी जिलों, तहसीलों, गांवों और नगरीय क्षेत्रों में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 मई 2026 को कुशलता एवं शांतिपूर्वक पूरा कर लिया गया। निदेशक, जनगणना कार्य छत्तीसगढ़ ने इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में राज्य के नागरिकों द्वारा दिए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है।

मोबाइल ऐप से जुटाए गए 33 प्रश्नों के जवाब

प्रथम चरण के दौरान प्रगणकों ने घर-घर जाकर प्रत्येक मकान और उसमें रहने वाले परिवारों से भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्न पूछे। ये प्रश्न मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं और उनकी परिसंपत्तियों से संबंधित थे। सभी जानकारियां मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से संकलित की गई हैं, जो अब भारत सरकार के सर्वर में पूरी तरह सुरक्षित हैं।

डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा का भरोसा

प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि आम नागरिकों द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियमावली 1990 के प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण और जनकल्याणकारी योजनाओं को तैयार करने के लिए किया जाएगा। संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत सरकार द्वारा तय समय पर ये आंकड़े जारी किए जाएंगे।

आंकड़ों में छत्तीसगढ़ जनगणना (प्रथम चरण)’

राज्य में इस विशाल अभियान को अंजाम देने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया था। 33 जिले, 195 नगरीय निकाय, 252 तहसीलें और 19 हजार 978 गांव पूर्ण रूप से कवर किए गए। कुल 251 ग्रामीण चार्ज और 221 नगरीय चार्ज बनाए गए थे, जिनके तहत 48 हजार 754 मकान सूचीकरण गणना ब्लॉक तैयार किए गए। इस कार्य में कुल 62 हजार 500 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें 47 प्रमुख जनगणना अधिकारी (33 जिला कलेक्टर एवं 14 नगर निगम आयुक्त), 250 जिला स्तरीय अधिकारी और 472 चार्ज अधिकारी, 60 मास्टर ट्रेनर्स और 1,100 फील्ड ट्रेनर्स, 52 हजार 705 प्रगणक और 9 हजार 319 पर्यवेक्षक शामिल रहे।

फरवरी 2027 में होगा दूसरा चरण

प्रथम चरण (मकानसूचीकरण) का मुख्य उद्देश्य द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना) के लिए एक सटीक ढांचा (फ्रेम) प्रदान करना है, ताकि अगले चरण में कोई भी मकान या परिवार गणना से न छूटे। जनगणना 2027 का द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना) फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। जनगणना निदेशालय ने उम्मीद जताई है कि दूसरे चरण में भी राज्य की जनता का ऐसा ही सक्रिय सहयोग मिलता रहेगा।

सुशासन तिहार 2026: टेम्पू शिविर में 534 आवेदन प्राप्त, हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ…

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प्रधानमंत्री आवास की चाबी, किसान क्रेडिट कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और फलदार पौधों का किया गया वितरण

मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई एवं बच्चों का अन्नप्राशन भी संपन्न

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में संचालित सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत टेम्पू में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में आसपास के 13 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त किया।

 ’सुशासन तिहार 2026: टेम्पू शिविर में 534 आवेदन प्राप्त, हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ’

शिविर में जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने मुख्य रूप से उपस्थित होकर विभिन्न विभागों द्वारा चयनित हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ प्रदान किया। इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी तथा अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

 ’सुशासन तिहार 2026: टेम्पू शिविर में 534 आवेदन प्राप्त, हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ’

शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 534 आवेदन प्राप्त हुए। प्राप्त आवेदनों के त्वरित निराकरण के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए तथा कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया गया।

 ’सुशासन तिहार 2026: टेम्पू शिविर में 534 आवेदन प्राप्त, हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ’

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 5 हितग्राहियों को आवास की चाबी प्रदान की गई। कृषि विभाग द्वारा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए, जिससे उन्हें खेती-किसानी के लिए आसान ऋण सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों एवं ग्रामीणों को फलदार पौधों का वितरण किया गया, वहीं वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पौधों का वितरण किया।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं की गोदभराई रस्म संपन्न कराई गई तथा छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। इस अवसर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शांति भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री परमेश्वर भगत, जनप्रतिनिधि गण सहित सभी 13 ग्राम पंचायतों के सरपंच अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास का सेतु बन रहा है तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई 2026) विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर रामकृष्णा केयर अस्पताल, रायपुर के विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन पर चिंता जताई….

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युवा उम्र में बढ़ रहा कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा, रामकृष्णा केयर अस्पताल के डॉक्टरों ने दी चेतावनी”

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 की थीम: “तंबाकू और निकोटीन के आकर्षण का पर्दाफाश”

30-40 वर्ष की उम्र में बढ़ रहे हैं तंबाकू से जुड़े कैंसर और फेफड़ों के रोग”

देश में होने वाले लगभग एक-तिहाई कैंसर तंबाकू सेवन से जुड़े, समय रहते छोड़ने पर जोखिम कम”

विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर रामकृष्णा केयर अस्पताल, रायपुर के विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन पर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि अब 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी फेफड़ों की गंभीर बीमारियां और कैंसर तेजी से सामने आ रहे हैं।

इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने “तंबाकू और निकोटीन के आकर्षण का पर्दाफाश” थीम रखी है। इसका उद्देश्य युवाओं को आकर्षित करने के लिए फ्लेवर्ड उत्पादों, ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच, आकर्षक पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसी रणनीतियों के प्रति जागरूक करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार मध्य भारत में धूम्रपान और बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का उपयोग अभी भी व्यापक है। भारत में करीब 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं और हर साल 13 लाख से अधिक मौतें तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं।

डॉ. रवि जायसवाल, सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, ने कहा, “अधिकांश लोग मानते हैं कि धूम्रपान केवल फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है, जबकि सच्चाई इससे कहीं अधिक गंभीर है। सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें कम से कम 69 कैंसर पैदा करने वाले तत्व हैं। तंबाकू का सीधा संबंध मुंह, गले, स्वरयंत्र, फेफड़े, भोजन नली, पेट, लिवर, अग्न्याशय, बड़ी आंत, किडनी, मूत्राशय, गर्भाशय ग्रीवा और कुछ रक्त कैंसर से भी है।”

उन्होंने कहा कि देश में होने वाले लगभग एक-तिहाई कैंसर तंबाकू सेवन से जुड़े हैं। मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें कई मरीज युवा आयु वर्ग के हैं। लगातार खांसी, बलगम में खून, वजन घटना, मुंह के घाव, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉ. सुशील जैन, सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, ने कहा, “आज बड़ी संख्या में युवा लगातार खांसी, सांस फूलना, फेफड़ों की क्षमता कम होना, अस्थमा और शुरुआती क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। लोगों को लगता है कि तंबाकू से नुकसान कई वर्षों बाद होता है, जबकि इसका असर बहुत पहले शुरू हो जाता है।”

भारत में 5.5 करोड़ से अधिक लोग क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से प्रभावित हैं, जिसमें धूम्रपान प्रमुख कारणों में शामिल है।

डॉ. गिरीश अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, ने कहा, “ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और फ्लेवर्ड वेपिंग डिवाइस को सुरक्षित विकल्प बताकर प्रचारित किया जाता है, लेकिन इनमें निकोटीन की लत, फेफड़ों में सूजन और लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बना रहता है।”

डॉक्टरों ने निष्क्रिय धूम्रपान के खतरों पर भी जोर दिया। उनके अनुसार घर के बच्चों और बुजुर्गों में सेकेंड हैंड स्मोक के कारण श्वसन संक्रमण, अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण भारत को हर वर्ष 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर डॉक्टरों ने लोगों से तंबाकू छोड़ने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग, व्यवहारिक थेरेपी, निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और चिकित्सकीय सहायता से तंबाकू की लत पर काबू पाया जा सकता है।

डॉ. गिरीश अग्रवाल ने कहा, “सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि तंबाकू केवल सेवन करने वाले व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता है। वास्तव में इसका असर परिवार, कार्यस्थल, स्वास्थ्य व्यवस्था और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सही मार्गदर्शन और उपचार के साथ तंबाकू छोड़ना पूरी तरह संभव है।”

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में ICMR का 3490 कैलोरी फॉर्मूला….

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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में ICMR का 3490 कैलोरी फॉर्मूला चर्चा का नया केंद्र बन गया है. आने वाले महीनों में सरकार इस पर क्या फैसला लेती है, इस पर लाखों कर्मचारियों की नजर टिकी हुई है.

8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच लगातार चर्चा चल रही है. कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी को लेकर है. इसी बीच एक ऐसा फॉर्मूला चर्चा में आ गया है, जिसका सीधा संबंध कर्मचारियों की खाने की थाली से है. दरअसल, राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र ने सरकार को दिए अपने ज्ञापन में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के 3490 कैलोरी फॉर्मूले को वेतन निर्धारण का आधार बनाने की मांग की है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना चाहती है तो न्यूनतम वेतन तय करते समय उनकी जरूरतों को ध्यान में रखना होगा और इनमें सबसे पहली जरूरत भोजन और पोषण की है.

क्या है ICMR का 3490 कैलोरी फॉर्मूला?

ICMR देश की प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था है, जो समय-समय पर लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान देती है. इसके अनुसार एक औसत कामकाजी व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 3490 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है. यह कैलोरी सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने, काम करने की क्षमता बनाए रखने और पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी मानी जाती है. कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जब सरकार न्यूनतम वेतन तय करती है तो उसे यह देखना चाहिए कि कर्मचारी अपने परिवार के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन खरीद पाने में सक्षम है या नहीं. अगर वेतन इतना कम हो कि परिवार की बुनियादी जरूरतें भी पूरी न हों, तो वेतन वृद्धि का मकसद अधूरा रह जाता है.

खाने की थाली से सैलरी का क्या संबंध?

पहली नजर में यह सवाल अजीब लग सकता है कि खाने की थाली का सैलरी से क्या लेना-देना है. लेकिन वेतन आयोगों के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि न्यूनतम वेतन तय करने में कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों को हमेशा आधार बनाया गया है. इन जरूरतों में भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और अन्य जरूरी खर्च शामिल होते हैं. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में महंगाई पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है. ऐसे में पुराने मानकों से कर्मचारियों के खर्च का सही आकलन नहीं हो सकता. यही वजह है कि अब ICMR के आधुनिक पोषण मानकों को शामिल करने की मांग की जा रही है. इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि एक परिवार को स्वस्थ जीवन जीने के लिए हर महीने खाने-पीने पर कितना खर्च करना पड़ता है और उसी आधार पर न्यूनतम वेतन तय किया जाए.

69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग क्यों?

JCM ने सरकार को दिए ज्ञापन में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन करीब 69,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान वेतन संरचना बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी पीछे रह गई है. उनका तर्क है कि आज के समय में सिर्फ राशन और भोजन ही महंगा नहीं हुआ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज, किराया, बिजली-पानी, इंटरनेट, मोबाइल और यात्रा जैसे खर्च भी तेजी से बढ़े हैं. ऐसे में कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए अधिक वेतन की जरूरत है.

फिटमेंट फैक्टर पर भी टिकी हैं उम्मीदें

8वें वेतन आयोग की चर्चा में फिटमेंट फैक्टर भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है. फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को बढ़ाया जाता है. हालांकि अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि फिटमेंट फैक्टर ऐसा हो जिससे न्यूनतम वेतन में बड़ा इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि अगर सरकार कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विचार करती है तो बेसिक सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह बहस?

सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के साथ जीवनयापन का खर्च भी तेजी से बढ़ा है. ऐसे में सिर्फ मामूली वेतन वृद्धि से काम नहीं चलेगा. वे चाहते हैं कि वेतन निर्धारण का तरीका भी समय के साथ बदले. ICMR के 3490 कैलोरी फॉर्मूले को शामिल करने की मांग इसी सोच का हिस्सा है.

सरकार का क्या है रुख?

फिलहाल सरकार की तरफ से ICMR के 3490 कैलोरी फॉर्मूले या 69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. 8वें वेतन आयोग से जुड़ी कई सिफारिशों और मांगों पर अभी चर्चा चल रही है. अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कर्मचारियों की सभी मांगें स्वीकार होंगी या नहीं.

लाखों कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग पर

देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं. उन्हें उम्मीद है कि इस बार सिर्फ वेतन बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा. अगर वेतन निर्धारण में ICMR के पोषण मानकों जैसे आधुनिक पैमानों को शामिल किया जाता है तो यह कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है. इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत होगी.

Emergency Alert System: सरकार ने लोगों के मोबाइल पर भेजा मौसम का अलर्ट…

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भारत में अचानक ही लोगों के फोन में एक इमरजेंसी सायरन बजने लगा. यह इमरजेंसी सायरन मौसम से जुड़ी चेतावनी के लिए था. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

भारत के कई हिस्सों में अचानक ही लोगों के फोन में एक इमरजेंसी अलर्ट बज उठा. फोन से अचानक जोरदार सायरन बजने लगा और साथ ही मौसम से जुड़ी आपातकालीन चेतावनी भी आई. चेतावनी में तूफान, बिजली गिरने, भारी बारिश और तेज हवाओं के बारे में आगाह किया गया था.  इसी बीच आइए जानते हैं कि दुनिया का सबसे एडवांस्ड वार्निंग सिस्टम किस देश के पास है.

जापान का J-Alert सिस्टम 

जापान का चेतावनी तंत्र अपनी रफ्तार, ऑटोमेशन और पूरे देश में एकीकरण की वजह से विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है. यह सिस्टम सीधे उपग्रहों, भूकंपीय सेंसरों, मौसम रडार और पूरे देश में फैले समुद्री निगरानी तंत्र से जुड़ा होता है. जैसे ही किसी भूकंप या फिर सुनामी का पता चलता है जापान भर में टेलीविजन, रेडियो स्टेशन, मोबाइल फोन, सार्वजनिक लाउडस्पीकर और सरकारी तंत्रों तक तुरंत चेतावनी भेज दी जाती है. जापान के सिस्टम की सबसे खास विशेषता यह है कि यह ऑटोमेशन पर काम करता है. बुलेट ट्रेन तुरंत अपना परिचालन रोक देती हैं, फैक्ट्री की गैस पाइपलाइन अपने आप बंद हो जाती हैं और लिफ्ट सबसे नजदीकी मंजिल पर जाकर रुक जाती है.

अमेरिका का वायरलेस आपातकालीन चेतावनी तंत्र 

संयुक्त राज्य अमेरिका भी अपने वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम के जरिए से दुनिया के सबसे मजबूत सार्वजनिक चेतावनी तंत्रों में से एक का संचालन करता है. इस सिस्टम का प्रबंधन FEMA यानी फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी द्वारा किया जाता है. यह सिस्टम तूफान, बाढ़, जंगल की आग, आतंकवादी खतरों या राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान सीधे मोबाइल फोन पर आपातकालीन सूचनाएं भेज सकता है.

इसका सबसे शक्तिशाली फीचर प्रेसिडेंशियल अलर्ट तंत्र है. इन अलर्ट्स को यूजर्स ब्लॉक या फिर डिसएबल नहीं कर सकते और इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह प्रभावित इलाकों में हर कंपैटिबल मोबाइल फोन तक पहुंच सकें.

भारत का SACHET अलर्ट सिस्टम 

भारत ने बीते कुछ सालों में अपना आपदा चेतावनी इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से अपग्रेड किया है. देश का नया SACHET सिस्टम जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स ने डेवलप किया है, इमरजेंसी अलर्ट्स को सीधे मोबाइल डिवाइस पर भेजने के लिए सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है. आम मैसेज के उलट सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी किसी खास इलाके में लाखों फोन पर एक साथ फ्लैश अलर्ट भेज सकती है. वह भी बिना किसी नेटवर्क जाम या फिर देरी के. भारत का सिस्टम 21 से ज्यादा क्षेत्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है. इसमें हिंदी और अंग्रेजी भी शामिल हैं.

इजरायल का सिस्टम 

इजरायल ने हवाई हमलों, रॉकेट और मिसाइल हमले से निपटने के लिए नेशनल इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल सिस्टम को डिजाइन किया है. इनका सिस्टम इतना सटीक है कि यह पूरे देश के बजाय सिर्फ उस खास मोहल्ले या फिर गली के लोगों के फोन पर अलर्ट भेजता है जहां रॉकेट गिरने का खतरा होता है. इस रेड अलर्ट के नाम से भी जाना जाता है.

Karnataka Politics: कर्नाटक में सिद्धारमैया के बेटे को कैबिनेट में शामिल करेंगे डीके शिवकुमार? पूर्व CM के करीबी का बड़ा बयान…

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Karnataka Politics: कर्नाटक में नई सरकार के गठन के बीच कांग्रेस नेता बिलकिस बानो ने कहा कि यतींद्र सिद्धारमैया को मंत्री बनाने का फैसला पार्टी हाईकमान करेगा.

कर्नाटक में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसी बीच कांग्रेस नेता बिलकिस बानो ने शनिवार (30 मई 2026) को कहा कि सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला पार्टी हाईकमान करेगा. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व ही लेगा.

यतींद्र सिद्धारमैया को मंत्री बनाए जाने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए बिलकिस बानो ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और यह पूरी तरह हाईकमान के विचाराधीन है. उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर युवाओं की ओर से भी मांग उठ रही है और यदि कांग्रेस नेतृत्व उचित समझेगा तो यतींद्र को मंत्री बनाया जा सकता है.

बिलकिस बानो ने क्या कहा?

बिलकिस बानो ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता हमेशा पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करते हैं. उन्होंने बताया कि शनिवार शाम 4 बजे कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में पार्टी के महासचिव और पर्यवेक्षक शामिल होंगे, जो हाईकमान का संदेश विधायकों तक पहुंचाएंगे. इसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा. यतींद्र सिद्धारमैया को शनिवार को उनके बेंगलुरु स्थित आवास से बाहर निकलते हुए देखा गया था. इसके बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि उन्हें नई सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

डिप्टी CM पद को लेकर चर्चा

डिप्टी मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी बिलकिस बानो ने कहा कि इस बारे में भी अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान ही करेगा. उन्होंने कहा कि पूरे कर्नाटक से अलग-अलग वर्गों की मांगें सामने आ रही हैं. पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय भी अपनी भागीदारी की मांग कर रहे हैं. ऐसे में पार्टी नेतृत्व सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला करेगा. इससे पहले शुक्रवार को डीके शिवकुमार ने कहा था कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक पार्टी पर्यवेक्षक की मौजूदगी में होगी. बैठक में लिए गए सुझावों और विचार-विमर्श के बाद अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान से सलाह लेकर किया जाएगा.

सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया

मुख्यमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर शिवकुमार ने कहा कि पहले कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना जाएगा, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें भी यह जानकारी नहीं है कि विधायक दल का नेता कब चुना जाएगा. गौरतलब है कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है. सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि यह फैसला उन्होंने अपनी इच्छा से और पार्टी नेतृत्व के सुझाव पर लिया है.

राहुल गांधी से डीके शिवकुमार की मुलाकात

नई सरकार के गठन को लेकर डीके शिवकुमार ने हाल ही में नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी. इस दौरान राज्य में नेतृत्व, राज्यसभा चुनाव और संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई थी. अब सभी की नजरें कांग्रेस विधायक दल की बैठक और हाईकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं.

Punjab Cabinet: पंजाब कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला…

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 मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को पहले सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर लिया जाएगा और उसके बाद इन्हें पक्का कर दिया जाएगा.

पंजाब कैबिनेट की शनिवार (30 मई) को अहम बैठक हुई. इसमें आउटसोर्स कर्मचारियों को पक्का करने का निर्णय लिया गया है. प्रदेश के 51 विभागों में 65048 कर्मचारियों को पक्का किया जाएगा. पहले एक ऑर्डिनेंस के जरिए कर्मचारियों को सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर लाया जाएगा. ऑर्डिनेंस को कानून की शक्ल देने के लिए सरकार विधानसभा में इसके लिए दो बिल आने वाले सत्र में लाएगी.

कैबिनेट की बैठक में 65,000 से अधिक आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और ठेकेदारी सिस्टम को हमेशा के लिए समाप्त करने की मंजूरी दी गई है. अब कोई बिचौलिए या ठेकेदार नहीं होंगे, बल्कि हर कर्मचारी सीधे सरकार द्वारा नियोजित होगा और उनकी सैलरी सीधे उनके बैंक खातों में आएगी.

विधानसभा में लाया जाएगा बिल

पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनल बिल 2026 और पंजाब कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सनल बिल 2026 विधानसभा में लाया जाएगा. 2016 में SAD-BJP सरकार और 2021 में कांग्रेस सरकार के वक्त भी विधानसभा में इन कर्मचारियों को पक्का करने के लिए बिल पास किए गए थे लेकिन ये लागू नहीं किए जा सके थे.

आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर क्या बोले CM भगवंत मान?

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, ”इस बार फर्क यह है कि इन कर्मचारियों को पहले सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर लिया जाएगा और उसके बाद 10 साल का कार्यकाल पूरा होने पर इन्हें पक्का कर दिया जाएगा. आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण रोकने के लिए ये फैसला लिया गया है.”

जोखिम भरे कामों में लगे मजदूरों को 3 साल बाद ही नियमित

इसके साथ ही, अग्निशामक, सीवर कर्मचारी और लाइनमैन जैसे जोखिम भरे कामों में लगे मजदूरों को 5 साल की सेवा के बजाय केवल 3 साल की सेवा के बाद नियमित करने का एक अहम फैसला लिया गया है. कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया और महंगाई भत्ते के मुद्दों को हल करने के लिए एक विशेष कैबिनेट उप-समिति का भी गठन किया गया है. इसके अलावा, भ्रष्टाचार के मामलों के जल्द निपटान के लिए पंजाब में 7 नए स्पेशल कोर्ट की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है.

Rahul Gandhi Slams PM Modi: PM मोदी ने NEET पेपर लीक की भी निगरानी की, राहुल गांधी के तंज पर भड़की BJP…

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सुप्रीम कोर्ट में दिए गए इस बयान के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा, ‘PM मोदी ने NEET पेपर लीक की भी व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी.’

NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर वह NEET मामले की जांच की निगरानी कर रहे हैं, तो उन्होंने पेपर लीक की भी ‘व्यक्तिगत निगरानी’ की होगी. राहुल गांधी के इस बयान पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे गैर-जिम्मेदाराना तथा सनसनीखेज राजनीति बताया.

सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा गया?
शुक्रवार को NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं. यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जांच की प्रक्रिया और निष्कर्ष तक पहुंचने के तरीके को लेकर हलफनामा दाखिल करने को कहा. जवाब में तुषार मेहता ने कहा, ‘माननीय प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी कर रहे हैं.’

राहुल गांधी ने कैसे साधा निशाना?
सुप्रीम कोर्ट में दिए गए इस बयान के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा, ‘PM मोदी ने NEET पेपर लीक की भी व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी.’ राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से NEET पेपर लीक विवाद को लेकर लगातार केंद्र सरकार को घेर रहे हैं. इसके अलावा वह CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद पर भी सवाल उठा चुके हैं. कांग्रेस नेता लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.

NEET पेपर लीक मामला क्या है?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 3 मई को मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए NEET-UG परीक्षा आयोजित कराई थी. बाद में पेपर लीक के आरोप सामने आने पर 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई. इस मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है.

बीजेपी ने दिया तीखा जवाब
राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी ने उन पर जमकर हमला बोला. पार्टी का कहना है कि विपक्ष के नेता ने जिम्मेदारी दिखाने के बजाय सनसनी फैलाने का रास्ता चुना है.बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और छात्रों के गंभीर मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं.

गजेंद्र सिंह शेखावत बोलेऐसे बयान गैरजिम्मेदाराना
केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राहुल गांधी के बयान को ‘बेतुका’ करार दिया. उन्होंने X पर लिखा, ‘राहुल गांधी के ऐसे बयान दिखाते हैं कि वह देश के युवाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को कितनी अपरिपक्वता और गैर-जिम्मेदारी से देखते हैं.’ शेखावत ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद की जाती है कि वह तथ्यों पर आधारित बात करें, न कि सिर्फ राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए सनसनीखेज आरोप लगाएं. उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे बयान लोकतंत्र को मजबूत नहीं करते, बल्कि जनता का भरोसा कमजोर करते हैं और लाखों छात्रों व उनके परिवारों की वास्तविक चिंताओं को हल्का बनाकर पेश करते हैं.’

अमित मालवीय ने कहाइसलिए गंभीरता से नहीं लिया जाता
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘यह कहना कि प्रधानमंत्री मोदी ने NEET पेपर लीक की व्यक्तिगत निगरानी की, पूरी तरह बेतुका, चौंकाने वाला और तर्क से परे है.’ मालवीय ने आगे कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर राहुल गांधी को गंभीरता से न लिए जाने की यही वजह है. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार यह दिखाते हैं कि गंभीर मामलों को संभालने के लिए जरूरी परिपक्वता और गंभीरता उनमें नहीं है. उन्होंने कहा, ‘छात्रों के साथ खड़े होने और रचनात्मक सुझाव देने के बजाय राहुल गांधी ने एक बार फिर जिम्मेदारी की जगह सनसनी फैलाने का रास्ता चुना है.’

सुधांशु त्रिवेदी ने भी कसा तंज
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी की समस्या यह है कि पहले वह ‘इश्यू’ को समझ नहीं पाते थे और अब ‘इश्यू’ शब्द पढ़ भी नहीं पा रहे हैं.’ त्रिवेदी ने X पर लिखा, ‘राहुल गांधी सिर्फ ‘पेपर लीक’ पढ़ते हैं, ‘इश्यू’ शब्द नहीं पढ़ते. इससे साफ है कि वे बिना पूरी बात समझे बयान दे रहे हैं.’

विवाद क्यों बढ़ा?
दरअसल, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी NEET से जुड़े मुद्दे और जांच की प्रगति पर नजर रख रहे हैं. राहुल गांधी ने इसी टिप्पणी को आधार बनाकर तंज किया कि अगर प्रधानमंत्री जांच की निगरानी कर रहे हैं, तो क्या उन्होंने पेपर लीक की भी निगरानी की थी? राहुल के इस बयान के बाद बीजेपी ने इसे राजनीतिक आरोप बताते हुए कड़ा विरोध किया और कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बेवजह सनसनी फैलाना उचित नहीं है.

फिलहाल क्या स्थिति है?
NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच CBI कर रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई के दायरे में है. वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है. कांग्रेस सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि विपक्ष छात्रों की चिंता से ज्यादा राजनीति करने में लगा है.

CBSE का बड़ा अपडेट, अब बोर्ड परीक्षा की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं DigiLocker पर उपलब्ध होंगी…

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CBSE ने छात्रों के लिए किया बड़ा बदलाव, अब अगले साल से बोर्ड परीक्षा की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं DigiLocker पर उपलब्ध होंगी. जाने कैसे काम करेगी नई व्यवस्था.

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने परीक्षा सिस्टम में एक बड़ा बदलाव किया है.बोर्ड ने फैसला लिया है कि अगले साल से छात्रों को उनकी मूल्यांकित यानी चेक की गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी.इसका मकसद है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके.

अब तक छात्रों को सिर्फ मार्क्स और रिजल्ट ही मिलते थे, लेकिन कई बार बच्चों को यह समझ नहीं आता था कि उनकी कॉपी में नंबर कैसे दिए गए.इसी परेशानी को देखते हुए CBSE ने यह नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है.

DigiLocker से मिलेगा सीधा एक्सेस

इस पूरी सुविधा को DigiLocker से जोड़ा जाएगा. इसका मतलब यह है कि छात्र अपने अकाउंट में लॉगिन करके सीधे अपनी चेक की गई आंसर शीट देख सकेंगे. इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि छात्रों को अपने प्रदर्शन को समझने में भी आसानी होगी.

OSM सिस्टम को भी किया जा रहा मजबूत

CBSE पहले से ही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें कॉपियों की जांच डिजिटल तरीके से होती है. अब इस सिस्टम को और बेहतर और मजबूत बनाने पर काम चल रहा है ताकि किसी भी तरह की गलती या तकनीकी समस्या कम से कम हो.बोर्ड का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर काम करते समय कभी-कभी छोटी तकनीकी गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उन्हें सुधारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है.

तकनीकी गड़बड़ियों पर CBSE की नजर

CBSE ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं. लगभग 20 उत्तर पुस्तिकाओं में मिलान से जुड़ी समस्याएं पाई गई थीं.हालांकि बोर्ड का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर लगभग 9.8 मिलियन कॉपियों की जांच के दौरान ऐसी छोटी समस्याएं संभव हैं.

जून से शुरू होगा कॉपी का पुनः मूल्यांकन

CBSE ने यह भी संकेत दिया है कि कॉपियों के पुनः मूल्यांकन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 1 जून से शुरू की जाएगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों के नंबर सही तरीके से दिए गए हों और अगर किसी भी तरह की गलती हो तो उसे समय पर ठीक किया जा सके.यह कदम छात्रों को एक और मौका देगा ताकि वे अपने परिणाम को लेकर पूरी तरह संतुष्ट हो सकें.

CBSE का आगे का प्लान क्या है

CBSE का कहना है कि उसका लक्ष्य पूरा सिस्टम को और ज्यादा स्मूद, तेज और “ग्लिच-फ्री” बनाना है.आने वाले समय में डिजिटल मूल्यांकन को और मजबूत किया जाएगा ताकि छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी न हो.