1 मार्च 2026 से रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसे बदलाव लागू होने जा रहे हैं. जिनका असर सीधे आपकी जेब पर दिखेगा. सफर, रसोई, मोबाइल, बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट.
लगभग हर जरूरी हिस्से में नए नियम लागू होंगे. इन बदलावों के बाद आपको अपनी कुछ आदतें बदलनी पड़ेंगी. अगर पहले से तैयारी नहीं की तो छोटी सी लापरवाही भी आपकी जेब खाली कर सकती है, चलिए आपको एक-एक करके बताते हैं कि क्या-क्या बदलने वाला है.
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में उतार-चढ़ाव
हर महीने की तरह इस बार भी 1 मार्च को एलपीजी सिलेंडर के नए रेट जारी होंगे. घरेलू और कमर्शियल दोनों कैटेगरी में बदलाव होने के आसार है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर गैस के दाम बढ़ या घट सकते हैं. अगर दरें बढ़ती हैं तो सीधे रसोई का बजट जरूर बदलेगा होगा. मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह बड़ा फैक्टर है क्योंकि गैस खर्च महीने के तय खर्च का हिस्सा होता है. होटल और छोटे कारोबार भी कमर्शियल सिलेंडर के दाम से प्रभावित जरूर होंगे.
ट्रेन टिकट बुकिंग का नया सिस्टम
सबसे बड़ा अपडेट रेलवे यात्रियों के लिए है. 1 मार्च से भारतीय रेलवे अनारक्षित और जनरल टिकट बुकिंग के लिए पुराने सिस्टम को बंद कर देगा. अब यूटीएस ऐप की जगह नया रेलवन ऐप पूरी तरह एक्टिव रहेगा. प्लेटफॉर्म टिकट भी इसी से लेना होगा. यानी स्टेशन पर लंबी लाइन में लगने या पुराने ऐप पर निर्भर रहने का ऑप्शन लगभग खत्म हो जाएगा. जिन यात्रियों को रोजाना लोकल या शॉर्ट डिस्टेंस सफर करना होता है. उनके लिए यह बदलाव बेहद अहम है. वक्त रहते नया ऐप डाउनलोड करके उसपर रजिस्ट्रेशन कर लें. नहीं तो सफर के दिन परेशानी हो सकती है.
सिम कार्ड और मैसेजिंग ऐप्स पर सख्ती
डिजिटल फ्रॉड को रोकने लगाने के लिए दूरसंचार विभाग सिम बाइंडिंग को जरूरी करने जा रहा है. 1 मार्च से मैसेजिंग ऐप्स को एक्टिव सिम से लिंक करना जरूरी होगा. उदाहरण के तौर पर WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर अकाउंट तभी पूरी तरह काम करेंगे जब वह वैलिड मोबाइल नंबर से जुड़े हों. मल्टी डिवाइस यूज और वेब लॉगिन पर भी एक्सट्रा वेरिफिकेशन लागू हो सकता है. इसका मकसद फेक अकाउंट और साइबर धोखाधड़ी को रोकना है.
बैंकिंग और यूपीआई नियमों में बदलाव
बैंकिंग सेक्टर में भी कुछ अहम अपडेट सामने आ सकते हैं. कई बैंक मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियमों को संशोधित कर सकते हैं. जिससे सेविंग अकाउंट होल्डर्स पर सीधा असर पड़ेगा. अगर बैलेंस तय लिमिट से कम हुआ तो पेनल्टी बढ़ सकती है. इसके अलावा यूपीआई ट्रांजैक्शन में अतिरिक्त सुरक्षा लेयर जोड़ी जा सकती है. जैसे ओटीपी वेरिफिकेशन या ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव. कुछ बैंक क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड स्ट्रक्चर और चार्जेस भी अपडेट कर सकते हैं.
सीएनजी और पीएनजी रेट्स बढ़ सकते हैं
हर महीने की शुरुआत में सीएनजी और पीएनजी की कीमतें रिव्यू होती हैं और 1 मार्च को नए रेट लागू हो सकते हैं. अगर नेचुरल गैस की लागत बढ़ी तो सीएनजी से चलने वाली कार और ऑटो चलाना महंगा पड़ सकता है. वहीं पीएनजी कनेक्शन वाले घरों में खाना पकाने का खर्च भी बढ़ सकता है. जिन परिवारों ने ईंधन बचत के लिए सीएनजी या पीएनजी ऑप्शन चुना है, उनके लिए यह बदलाव अहम रहेगा. ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने पर रोजमर्रा की चीजों के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं.



