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बैटरी स्टोरेज द्वारा समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा भारत में नए कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों तुलना में कम लागत…

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एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि बैटरी स्टोरेज द्वारा समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा भारत में नए कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों की तुलना में कम लागत पर चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करा सकती है।

अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के स्टडी के अनुसार, यह मॉडल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है और स्वच्छ ऊर्जा को प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में स्थापित कर सकता है।

अध्ययन में भारतीय सौर ऊर्जा निगम यानी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) द्वारा आयोजित 1,000 मेगावाट क्षमता की एक महत्वपूर्ण नीलामी का विश्लेषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 25 वर्षों के लिए नाममात्र शर्तों में 5.25 रुपए प्रति किलोवाट-घंटे का टैरिफ तय किया गया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इस परिणाम ने साबित किया है कि बैटरी स्टोरेज के साथ नवीकरणीय ऊर्जा संयोजन कोयला-आधारित बिजलीघरों जैसी निरंतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देने में सक्षम है, जो ईंधन की कीमतों में भविष्य में होने वाली वृद्धि के जोखिम के बिना भारत के मौजूदा कोयला संयंत्रों के प्रदर्शन से काफी हद तक मेल खाती है।

“इंडियाज रिन्यूएबल एनर्जी ब्रेकथ्रू: कोल-लाइक रिलायबिलिटी ऐट अ लोअर, फिक्स्ड प्राइस” शीर्षक से प्रकाशित यह अध्ययन विश्वविद्यालय के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर द्वारा तैयार किया गया है।

नीलामी की संरचना इस प्रकार बनाई गई थी कि शाम, रात और सुबह के समय अधिकतम बिजली उपलब्ध कराई जाए, जबकि दिन में जब सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती है, तब आपूर्ति की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम रखी जाए। उत्पादकों के लिए यह अनिवार्य किया गया कि वे खरीदार द्वारा चुने गए छह पीक घंटों में कम से कम 90 प्रतिशत अनुबंधित क्षमता उपलब्ध कराएं। अन्य गैर-सौर घंटों में यह सीमा 70 प्रतिशत और सौर घंटों के दौरान 50 से 60 प्रतिशत निर्धारित की गई।

अनुबंध की शर्तों के अनुसार, हर 15 मिनट के ब्लॉक में प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि निर्धारित आपूर्ति में कमी रहती है, तो अनुबंध मूल्य के डेढ़ गुना के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा।

शोधकर्ताओं ने 10 भारतीय राज्यों के 10 वर्षों के प्रति घंटा मौसम आंकड़ों का उपयोग करते हुए यह जांचा कि क्या सौर ऊर्जा और बैटरी भंडारण इस व्यवस्था की आवश्यकताओं को आर्थिक रूप से पूरा कर सकते हैं।

अध्ययन में पाया गया कि प्रत्येक 1,000 मेगावाट अनुबंधित क्षमता के लिए राजस्थान जैसे उच्च सौर क्षमता वाले राज्यों में लगभग 3 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 12 गीगावाट-घंटे बैटरी भंडारण की आवश्यकता होगी। जिन राज्यों में मानसून या सौर संसाधनों की स्थिति अलग है, वहां करीब 15 से 20 प्रतिशत अधिक सौर क्षमता की जरूरत हो सकती है, लेकिन बैटरी भंडारण की आवश्यकता लगभग समान रहेगी।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और केंद्र में मॉडलिंग एवं विश्लेषण निदेशक उमेद पालीवाल ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति इस मॉडल के लिए बहुत अनुकूल है।

उन्होंने कहा, “भारत की भूमध्य रेखा के निकट स्थिति के कारण यहां साल भर सौर ऊर्जा उत्पादन में मौसमी उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम रहता है। यूरोप जैसे उच्च अक्षांश वाले देशों में सर्दियों के दौरान उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है, जबकि भारत की मुख्य चुनौती दिन में मिलने वाली प्रचुर सौर ऊर्जा को शाम और रात के समय के लिए संरक्षित करना है, जो आधुनिक और कम लागत वाली बैटरियों के माध्यम से संभव है।”

इस नीलामी में 16 कंपनियों ने भाग लिया था और सात डेवलपर्स को क्षमता आवंटित की गई। उल्लेखनीय बात यह रही कि सभी सफल बोलियां 5.25 से 5.26 रुपए प्रति यूनिट के बेहद संकीर्ण दायरे में रहीं।

अध्ययन के सह-लेखक निकित अभ्यंकर ने कहा कि यह मूल्य भारत में सौर और बैटरी प्रौद्योगिकी की लागत में आई भारी गिरावट को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “यह किसी एक आक्रामक बोलीदाता का मामला नहीं है। सात विजेता केवल एक पैसे के अंतर में रहे, जिससे स्पष्ट होता है कि 5.25 रुपए प्रति यूनिट अब स्थिर और विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा की बाजार-आधारित कीमत बनती जा रही है।”

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मॉडल भारत की बिजली वितरण कंपनियों की भविष्य की योजना निर्माण प्रक्रिया को बदल सकता है। साथ ही डेटा सेंटर, इस्पात, एल्यूमीनियम और अन्य विनिर्माण उद्योगों के लिए भी यह आकर्षक विकल्प बन सकता है, क्योंकि उन्हें लगातार और निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है।

अध्ययन के सह-लेखक अमोल फड़के ने कहा, “यदि भारत इस मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाता है, तो उपभोक्ताओं और उद्योगों को 25 वर्षों तक निश्चित कीमत पर विश्वसनीय और स्वच्छ बिजली मिल सकती है। कम लागत, स्थिर कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति का यह संयोजन भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ साबित हो सकता है।”

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित…

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।**

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारतीयों के बीच सद्भावना, हर दिल में करुणा और हर नागरिक को न्याय और लोकतंत्र में समान अधिकार।**

पापा, आपकी ये सीख मेरी शक्ति है और आपकी यादें मेरी हिम्मत। आपके सपनों का भारत बनाने का संकल्प हमेशा मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।”

वहीं, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “भारत रत्न राजीव गांधी जी को उनकी जयंती पर गहरे स्नेह और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं। वे एक दूरदर्शी और गतिशील नेता थे, जिन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया और हमारे देश को 21वीं सदी के लिए तैयार करने के लिए उसमें बदलाव लाए।”

केसी वेणुगोपाल ने लिखा, “आज, लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता उनके दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। उनका मकसद देश के लिए राजीव जी के विजन को पूरा करना और उसी ऊर्जा व उत्साह के साथ पार्टी को आगे बढ़ाना है, जो वे लेकर आए थे। उनका जीवन-सफर बहुत जल्द समाप्त हो गया और भारत की एकता के लिए दी गई उनकी सर्वोच्च कुर्बानी को कभी नहीं भुलाया जा सकता। राजीव जी, हम आपको बहुत याद करते हैं! इस अवसर पर वीर भूमि पर राजीव गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज जब हम राजीव गांधी की 82वीं जयंती मना रहे हैं और देशभर में युवाओं के बीच बढ़ती बेचैनी और हलचल को देख रहे हैं, तब यह याद करना महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी ही थे जिन्होंने संविधान में संशोधन कर मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की और 18 साल के युवाओं को वोट देने का अधिकार दिया।”

जयराम रमेश ने लिखा,”जिन्होंने स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया। 1988 की नई शिक्षा नीति लेकर आए, जिसने कई अन्य नए प्रयासों के साथ देशभर में नवोदय विद्यालयों का नेटवर्क स्थापित किया। देश के सभी जिलों को कवर करने वाले नेहरू युवा केंद्र संगठन की स्थापना की (जिसका नाम अब बदलकर माई भारत कर दिया गया है) और भारत को निर्णायक रूप से आईटी युग में लेकर गए, जिससे रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए।”

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “राजीव गांधी! सबसे युवा प्रधानमंत्री, डिजिटल इंडिया के वास्तुकार, आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा, भारत की सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति के जनक जिनकी दूरदर्शिता के फलस्वरुप ही देश कंप्यूटर-युग में प्रवेश कर सका। भारत माता के सपूत, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।”

एलआईसी को एचडीएफसी बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की आरबीआई से मिली मंजूरी…

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देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मंजूरी मिल गई है।

इस खबर के बाद गुरुवार के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में एलआईसी और एचडीएफसी बैंक, दोनों के शेयरों में बढ़त देखने को मिली।

एचडीएफसी बैंक के एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, आरबीआई ने एलआईसी के उस आवेदन को मंजूरी दे दी है जिसके तहत वह बैंक की चुकता शेयर पूंजी अथवा मतदान अधिकारों में 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।

वर्तमान में एलआईसी के पास 14 अगस्त तक एचडीएफसी बैंक की कुल शेयर पूंजी का 4.11 प्रतिशत हिस्सा है। आरबीआई की मंजूरी के बाद अब सरकारी बीमा कंपनी के पास अपनी हिस्सेदारी को दोगुने से अधिक स्तर तक बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध हो गया है।

हालांकि, इस मंजूरी का यह अर्थ नहीं है कि एलआईसी तुरंत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत कर देगी। किसी भी अतिरिक्त खरीदारी को आरबीआई द्वारा निर्धारित शर्तों, सेबी के नियमों और अन्य नियामकीय प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।

एचडीएफसी बैंक ने अपने विवरण में कहा कि यह मंजूरी केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित शर्तों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के लागू नियमों के अनुपालन के अधीन है।

एलआईसी देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक है, जबकि एचडीएफसी बैंक भारत के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है। ऐसे में इस मंजूरी को वित्तीय क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

बाजार में इस खबर का सकारात्मक असर भी देखने को मिला। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में एनएसई पर एलआईसी का शेयर 1.7 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ 420.15 रुपए के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। दिन के सत्र में स्टॉक ने 421 रुपए का हाई छुआ। वहीं, कंपनी का पिछले 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 468.48 रुपए और निम्नतम स्तर 360.75 रुपए है।

वहीं एचडीएफसी बैंक का शेयर भी करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 725.8 रुपए के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। दिन के कारोबारी सत्र में बैंकिंग शेयर ने 728.30 रुपए का हाई टच किया। इसके साथ ही स्टॉक ने पिछले 52 सप्ताह के दौरान 1,020.50 रुपए का उच्चतम स्तर और 722 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ।

वित्त वर्ष 2027 में लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा आरबीआई…

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चालू वित्त वर्ष 2026-27 में नीतिगत ब्याज दरों को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और महंगाई भी नियंत्रण के दायरे में है।

ऐसे में केंद्रीय बैंक के पास फिलहाल ब्याज दरों में कोई त्वरित बदलाव करने का दबाव नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई की हालिया मौद्रिक नीति टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क है और नीति समिति के कुछ सदस्यों का रुख अपेक्षाकृत सख्त हुआ है। हालांकि मौजूदा आर्थिक आंकड़े ऐसी स्थिति नहीं दिखाते, जहां तुरंत ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता हो।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि दर आगे भी मजबूत बनी रहने की संभावना है। विभिन्न प्रमुख आर्थिक संकेतक इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। इसी आधार पर संस्थान ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ब्याज दरों में लंबे समय तक विराम रहने का अपना अनुमान बरकरार रखा है।

महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया कि जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 4.45 प्रतिशत रही, जो बाजार के अनुमानों के अनुरूप थी। वहीं आयातित महंगाई में भी नरमी दर्ज की गई और यह जून 2026 के 8.1 प्रतिशत से घटकर जुलाई में 7.3 प्रतिशत पर आ गई।

हालांकि रिपोर्ट का अनुमान है कि अगस्त में महंगाई बढ़कर करीब 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके अलावा अक्टूबर और नवंबर के दौरान यह कुछ समय के लिए 6 प्रतिशत के ऊपर भी जा सकती है। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही में महंगाई फिर घटकर लगभग 5 प्रतिशत के आसपास आने की संभावना है।

रिपोर्ट में मानसून की स्थिति को भी सकारात्मक बताया गया है। जून में लगभग 40 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज होने के बावजूद जुलाई में अच्छी बारिश और अगस्त में सामान्य वर्षा के कारण देशव्यापी वर्षा घाटा घटकर करीब 13 प्रतिशत रह गया है।

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) की स्थिति भी चल रहे अल नीनो प्रभाव के कुछ नकारात्मक असर को कम करने में मदद कर सकती है। इससे कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में वर्षा की कमी के बावजूद खरीफ बुआई पिछले वर्ष के स्तर से केवल लगभग 2 प्रतिशत कम है। इससे संकेत मिलता है कि राज्यों में सिंचाई सुविधाओं में सुधार हुआ है, जिससे खेती पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर सीमित रहा।

विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों में बाजार को आरबीआई की व्यावहारिक और संतुलित नीति रणनीति को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए। केंद्रीय बैंक फिलहाल वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दे सकता है।

वैश्विक स्तर पर भी केंद्रीय बैंकों के सामने नीति संकेतों को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड प्रतिफलों को नियंत्रित करने और सरकारी ऋण प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद बढ़ाने के कदमों से लॉन्ग टर्म यील्ड में कमी आई है।

राजीव गांधी जयंती पर कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने दी श्रद्धांजलि…

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और अपने राजनीतिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों के दौरान दिवंगत नेता द्वारा उन पर रखे गए विश्वास को याद किया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जब भी उन्हें राजीव गांधी और युवा नेताओं को उनके द्वारा दिए गए प्रोत्साहन की याद आती है, तो उन्हें गहरी कृतज्ञता का अनुभव होता है।

शिवकुमार ने कहा, “उन्होंने केवल भविष्य के बारे में बात नहीं की, उनमें एक नए भारत की कल्पना करने और एक पीढ़ी को यह विश्वास दिलाने का साहस था कि यह संभव है।”

मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी के योगदानों को याद करते हुए मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 करने, पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने और शासन को जनता के करीब लाने के प्रयासों और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की पहलों के बारे में बताया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति की नींव रखने, शिक्षा का आधुनिकीकरण करने और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने का श्रेय राजीव गांधी को भी दिया।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने नेताओं की एक नई पीढ़ी को देश के भविष्य की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित किया था और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोकतांत्रिक मूल्यों से संचालित एक आधुनिक और प्रगतिशील भारत का समर्थन किया था।

शिवकुमार ने कहा, “कर्नाटक और यहां के लोगों के लिए काम करते हुए, मैं उनसे प्राप्त मूल्यों और प्रोत्साहन को अपने साथ रखता हूं।”

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी की स्मृति केवल उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक आधुनिक, प्रगतिशील और समावेशी भारत की दिशा में काम जारी रखने की जिम्मेदारी भी है, जिसकी कल्पना पूर्व प्रधानमंत्री ने की थी।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के माध्यम से भारत के आधुनिकीकरण में उनके योगदान को याद किया।

हरिप्रसाद ने कहा, “भारत की एकता, सुरक्षा और तकनीकी प्रगति के लिए राजीव गांधी की दूरदर्शी पहलें हमेशा याद रहेंगी।”

उन्होंने कहा, “मैं राजीव जी के साथ अपने जुड़ाव को बहुत सम्मान के साथ याद करता हूं, जिन्होंने सामाजिक परिवर्तन के संघर्ष के दौरान मुझमें राजनीतिक प्रतिबद्धता पैदा की।”

हरिप्रसाद ने देश के तकनीकी विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा में राजीव गांधी के योगदान को एक अमिट विरासत के रूप में वर्णित किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राजीव गांधी की दूरदृष्टि और योगदान प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

चीनी की कीमतों में उछाल: सरकार ने थोक उपभोक्ताओं पर लागू की 15 दिन की स्टॉक सीमा…

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त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।**

सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है।**

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा, जिसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखना है।

नए नियम के तहत, जो भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल, उत्पादन या उपभोग के लिए करता है, वह अपनी 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा।

सरकार ने मिठाई निर्माता, कन्फेक्शनरी उद्योग, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, हलवाई व्यवसायों और अन्य संस्थागत खरीदारों को इस श्रेणी में शामिल किया है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी।

हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थाओं को इस आदेश से छूट दी गई है।

सरकार ने यह भी कहा है कि प्रत्येक चीनी मिल द्वारा बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न और चीनी से संबंधित एचएसएन कोड का उपयोग किया जाएगा, ताकि वास्तविक खपत और खरीदारी का पता लगाया जा सके।

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब सरकार पहले ही डीलरों के लिए चीनी भंडारण सीमा को 30 दिनों तक सीमित कर चुकी है। इसके बावजूद बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 52.30 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 46.34 रुपए प्रति किलोग्राम था। यानी चीनी की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक: दक्षिणी राज्यों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने अंतर्राज्यीय विवादों, सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मामल्लापुरम के पास कोवलम के होटल में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दक्षिणी राज्यों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने अंतर्राज्यीय विवादों, सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अमित शाह के आगमन पर उनका व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। कार्यवाही शुरू होने से पहले दोनों नेताओं ने संक्षिप्त बातचीत की।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बगल में बैठे थे। इस सम्मेलन में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क उपस्थित थे। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी उपस्थित नहीं थे, जबकि उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल, लक्षद्वीप के अधिकारी और भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे।

परिषद की बैठक में विचार-विमर्श में लंबे समय से लंबित नदी-जल और सीमा विवादों पर प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद थी। इनमें कावेरी और कृष्णा नदियों के जल बंटवारे का विवाद, कर्नाटक का प्रस्तावित मेकेदातु बांध और मुल्लापेरियार बांध से संबंधित चिंताएं शामिल थीं।

तमिलनाडु द्वारा कर्नाटक सीमा के पास हाल ही में तीन तमिल पुरुषों की गोलीबारी की घटना को भी उठाए जाने और दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग करने की संभावना है। परिसीमन और दक्षिणी राज्यों पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा होने की संभावना थी।

व्यापक एजेंडा में अंतर्राज्यीय सहयोग को मजबूत करना, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा शामिल थे।

प्रतिभागियों द्वारा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटान के लिए विशेष त्वरित अदालतों की स्थापना के प्रस्ताव की भी जांच किए जाने की संभावना थी।

अधिकारियों ने बताया कि कोवलम बैठक का उद्देश्य प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करना और सहकारी संघवाद को आगे बढ़ाना था। यह सम्मेलन भाग लेने वाली सरकारों को केंद्र सरकार के समक्ष अपने-अपने राज्यों से संबंधित चिंताओं को रखने और वर्षों से अनसुलझे विवादों के समन्वित समाधान खोजने का अवसर भी प्रदान करता है।

अधिकारियों ने कहा कि चर्चा में अनुवर्ती कार्रवाई के लिए व्यावहारिक तंत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें विभागों के बीच नियमित आदान-प्रदान और भाग लेने वाली सरकारों और प्रशासनों द्वारा संयुक्त रूप से स्वीकृत निर्णयों का तेजी से कार्यान्वयन शामिल है।

राहुल गांधी ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा दावा…

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कांग्रेस MP राहुल गांधी ने बुधवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा दावा किया।**

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का पॉलिटिकल अंत आ गया है और उनका राज अब अपने आखिरी फेज में है।**

राहुल गांधी के मुताबिक, मोदी के वारिस की तलाश भी शुरू हो गई है।

राहुल गांधी ने मीटिंग में कहा, “नरेंद्र मोदी का पॉलिटिकल अंत आ गया है। उनका समय खत्म हो गया है। मोदी का राज अपने आखिरी फेज में है। उनके वारिस की तलाश जारी है।”

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को “पूरी तरह पीछे” कहा।

उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सरकार के खिलाफ और अग्रेसिव रुख अपनाने की अपील की। ​​ये बातें दिल्ली में कांग्रेस हेडक्वार्टर इंदिरा भवन में हुई CWC मीटिंग के दौरान की गईं। पार्टी के सीनियर नेताओं ने देश के पॉलिटिकल हालात और खास मुद्दों पर कांग्रेस की स्ट्रैटेजी पर चर्चा की।

कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मीटिंग को एड्रेस किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 12 सालों में युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। खड़गे ने दावा किया कि हाल के सालों में 94,000 स्कूल बंद हो गए हैं। उन्होंने युवाओं के लिए एक साफ़, पूरा और टाइम-बाउंड “शिक्षा से रोज़गार तक का रोडमैप” बनाने की मांग की।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने राम मंदिर ट्रस्ट को मिले पैसे, सोने और दूसरे डोनेशन का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि इन डोनेशन का हिसाब-किताब कैसे रखा जा रहा है और उनका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।

खड़गे ने किसी भी फाइनेंशियल गड़बड़ी की सही जांच और ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

एलएंडटी ने दुबई एयरपोर्ट पर एपीएम सिस्टम विकसित करने के लिए जीता ऑर्डर…

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देश की दिग्गज इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) को दुबई के अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में ऑटोमोटेड पीपल मूवल (एपीएम) सिस्टम डिजाइन और विकसित करने के लिए 5,000 करोड़ रुपए का ऑर्डर मिला है।

यह जानकारी कंपनी की ओर से गुरुवार को दी गई।

कंपनी ने बताया कि यह ऑर्डर उसके ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर बिजनेस को मिला है। साथ ही, कहा कि उसने यह ऑर्डर जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज (एमएचआई) के साथ मिलकर एक कंसोर्टियम में हासिल किया है। इसमें एलएंडटी पूरी तरह से इंटीग्रेटेड एपीएम सिस्टम की टर्नकी डिलीवरी के लिए जिम्मेदार है, जिसमें कंस्ट्रक्शन, आपूर्ति, टेस्टिंग, कमीशनिंग और ऑपरेशन के लिए तैयार करना शामिल है।

ऑटोमेटेड पीपल मूवर एक ड्राइवर-लेस ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल यात्रियों को एयरपोर्ट टर्मिनल और दूसरी सुविधाओं के बीच लाने-ले जाने के लिए किया जाता है।

डिजाइन-एंड-बिल्ड कॉन्ट्रैक्ट के तहत, एलएंडटी मुख्य एपीएम इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम के डिजाइन, खरीद, डिलीवरी और इंटीग्रेशन का काम करेगा। इसमें गाइडवे, डीसी ट्रैक्शन सबस्टेशन, पावर डिस्ट्रीब्यूशन, सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन, ऑनबोर्ड कम्युनिकेशन सिस्टम, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और डिपो इक्विपमेंट शामिल हैं।

एलएंडटी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को दुबई एविएशन सिटी कॉर्पोरेशन विकसित कर रहा है और इसे दुबई एविएशन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के जरिए लागू किया जा रहा है।

कंपनी ने कहा कि यह एयरपोर्ट के लंबे समय के, कई चरणों वाले विस्तार प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा है।

एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया है कि पूरी तरह से डेवलप होने के बाद, अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की उम्मीद है, जिसकी सालाना क्षमता 26 करोड़ यात्री और 1.2 करोड़ टन माल ढोने की होगी।

एलएंडटी में ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट और हेड, रामकुमार एस ने कहा कि यह प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड एपीएम रेल सिस्टम को लागू करने में कंपनी की काबिलियत को दिखाता है।

उनके अनुसार, एमएचआई के एपीएम सिस्टम और एलएंडटीके इंटीग्रेटेड सिस्टम के अनुभव का मेल – जिसे कंपनी की इंजीनियरिंग डिज़ाइन काबिलियत का भी साथ मिलेगा – सुरक्षा और क्वालिटी पर खास ध्यान देते हुए काम को पूरा करने में मदद करेगा।

भारत-जापान के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर सहमति, रक्षा मंत्रियों ने समझौते पर किए हस्ताक्षर…

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भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली में इसके लिए एक द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आगे के सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। समझौते के तहत जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और भारतीय नौसेना के बीच सहयोग मजबूत होगा, जिसमें समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना शामिल है।

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी हिंद-प्रशांत में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रमुख आधार हैं। दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा, नौसेना सहयोग, रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी, सैन्य अभ्यास तथा रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने जुलाई 2026 में दोनों देशों के नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान को याद किया।

उन्होंने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा सहयोग और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों रक्षा मंत्रियों ने मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर एक-दूसरे के आकलन साझा करने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता और सुरक्षा में बाधा डालने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। दोनों ने बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का भी विरोध किया। इसके अलावा खोज एवं बचाव तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।

दोनों पक्ष समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों और सैन्य इकाइयों की पारस्परिक यात्राएं बढ़ाएंगे। संयुक्त अभ्यास, सैन्यकर्मियों और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान भी होगा। बंदरगाहों तथा रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। नौसैनिक जहाज निर्माण में सहयोग की संभावना को भी बढ़ाया जाएगा। दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। उन्होंने समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने की क्षमता बढ़ाने में एक-दूसरे की विशेषज्ञता का लाभ उठाने की बात कही।

दोनों पक्षों ने नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और डिजाइन की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति जताई है। इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत व जापान ने रक्षा जहाज निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाने पर जोर दिया। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की उत्पादन क्षमता के इस्तेमाल पर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। दोनों पक्ष निकट भविष्य में जहाज मरम्मत सुविधाओं के पारस्परिक इस्तेमाल के लिए व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर भी सहमत हुए हैं।

दोनों मंत्रियों ने भारत-जापान के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य अभ्यासों का स्वागत किया। इसके तहत ‘धर्म गार्जियन’ और ‘जेमेक्स’ जैसे युद्धाभ्यासों का विस्तार किया जाएगा। इस साल होने वाले भारत-जापान वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन 26’ की तैयारियों में हुई प्रगति का भी दोनों ने स्वागत किया है। इस अभ्यास में पहली बार जापान की वायु आत्मरक्षा सेना के लड़ाकू विमान भारत आएंगे और अभ्यास में हिस्सा लेंगे।

दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों को और जटिल बनाने, मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और अवसर मिलने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास करने पर भी सहमति जताई है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए विशेष अभियान बलों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत में एकीकृत थिएटर कमान स्थापित होने के बाद जापान के साथ इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशने पर सहमति बनी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापान की ओर से रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे की हालिया समीक्षा का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जापान हिंद-प्रशांत और पूरी दुनिया में शांति एवं स्थिरता में आगे भी योगदान देगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद भी जताई।