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हाई कोर्ट के फैसलों में देरी के समाधान के लिए आगे आया सुप्रीम कोर्ट, सुनवाई के बाद 3 महीनों में निर्णय समेत दिए कई निर्देश…

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सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जिस याचिका पर दिया है उसमें कहा गया था कि झारखंड हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में एक फैसला सुनाया था. वह फैसला अभी तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है.

हाई कोर्ट के फैसलों में होने वाली देरी के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए किए हैं. कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुनाने के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की है. आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर हाई कोर्ट की कोई बेंच इन निर्देशों का पालन नहीं करेगी तो मामला दूसरी बेंच को सौंप दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जिस याचिका पर दिया है उसमें कहा गया था कि झारखंड हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में एक फैसला सुनाया था. वह फैसला अभी तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता के वकील को भी फैसले की कॉपी नहीं दी गई है.

सुनवाई का दायरा व्यापक करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट से उनके यहां फैसला सुरक्षित रखने, उन्हें सुनाए जाने और अपलोड करने की व्यवस्था पर जानकारी मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी, 2025 के बाद सुरक्षित रखे गए सभी फैसलों का ब्यौरा भी मांगा था. साथ ही, उन्हें सुनाए जाने और अपलोड किए जाने की तारीखों पर भी जानकारी मांगी थी.

मामले को सुनते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था, ‘मैं 15 साल हाई कोर्ट का जज रह चुका हूं. ऐसा कभी नहीं हुआ कि हमने कोई फैसला सुरक्षित रखा हो और तीन महीने के भीतर उसे न सुनाया हो.’ अब उनकी अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने सभी हाई कोर्ट के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनमें कहा गया है :-

  • सुनवाई पूरी होने के बाद सुरक्षित रखा गया फैसला 3 महीने के भीतर सुनाया जाए.
  • जमानत के मामलों में आदेश अगले दिन देने का प्रयास किया जाए. आदेश की जानकारी उसी दिन जेल अधिकारियों को दी जाए
  • जमानत मिलने के बाद विचाराधीन कैदियों को उसी दिन या अधिक से अधिक अगले दिन रिहा किया जाए
  • फैसले का मुख्य हिस्सा कोर्ट में सुनाया जाए. कारण बताते हुए विस्तृत आदेश 7 दिनों के भीतर अपलोड किया जाए
  • फैसला सुरक्षित रखे जाने की तारीख हाई कोर्ट की वेबसाइट पर दिखनी चाहिए.
  • अगर कोई बेंच इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती, तो मामला दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा.
  • अगर 30 दिनों के भीतर फैसले के कारण अपलोड नहीं किए जाते, तो भी मामले नई बेंच को सौंपा जा सकता है.

Telangana App: गंजे होने पर ऐप नहीं पहचान पाया! मजदूर ने फिर ऐसा निकाला जुगाड़, हो गया वायरल, जानें क्या किया…

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Telangana App: तेलंगाना में मुंडन कराने के बाद मजदूर का चेहरा पहचानने में ऐप को दिक्कत हो रही थी. इसके बाद शख्स ने महिला के बाल रखने पर हाजिरी लगाने में कामयाबी हासिल की.

तेलंगाना के महबूबाबाद ज़िले के इनुगुर्थी मंडल के कोमाटिपाली गांव से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां एक ग्रामीण रोज़गार मजदूर को सरकारी मोबाइल ऐप के ज़रिए अपनी हाज़िरी लगाने में समस्या का सामना करना पड़ा. इस घटना का वीडियो बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया. इस वीडियो ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में इस्तेमाल होने वाली फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली) टेक्नोलॉजी की विश्वसनीयता और ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले मज़दूरों के सामने आने वाली चुनौतियों पर फिर से बहस छेड़ दी है.

मज़दूर की पहचान श्रीनिवास के तौर पर हुई है. वह हाल ही में सिर मुंडवाकर काम पर आया था. जब उसने डिजिटल सिस्टम के ज़रिए अपनी हाज़िरी दर्ज करने की कोशिश की तो ऐप बार-बार उसका चेहरा पहचानने में नाकाम रहा. कई बार कोशिश करने के बाद भी, सॉफ्टवेयर ने ऑथेंटिकेशन (पहचान की पुष्टि) प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया, जिससे हाज़िरी दर्ज नहीं हो पाई. इस स्थिति ने साथी मज़दूरों और स्थानीय सुपरवाइज़रों को हैरान कर दिया, क्योंकि वह व्यक्ति पहले से ही सिस्टम में रजिस्टर्ड था और पहले भी बिना किसी दिक्कत के इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता रहा था.

चेहरा पहचानने में सिस्टम हुआ नाकाम
यह घटना तब एक अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गई, जब पास में काम कर रही एक महिला ने एक आसान सा उपाय सुझाया. ऐप के ज़रिए दोबारा कोशिश करने से पहले, उस महिला ने अपने बाल मज़दूर के मुंडे हुए सिर पर रख दिए. बताया जा रहा है कि इस बार फेशियल रिकग्निशन सिस्टम ने उसकी तस्वीर को स्वीकार कर लिया और हाज़िरी सफलतापूर्वक दर्ज हो गई. हाज़िरी दर्ज न होने और सफलतापूर्वक दर्ज हो जाने के बीच का यह अंतर वहां मौजूद मज़दूरों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन गया.

घटना का वीडियो ऑनलाइन वायरल
इस पूरी घटना का वीडियो ऑनलाइन वायरल होने लगा, जिसे हज़ारों लोगों ने देखा और उस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं. कई यूज़र्स ने इस अनोखे जुगाड़ पर मज़ाक बनाया तो वहीं कुछ लोगों ने डिजिटल वेरिफिकेशन टूल्स की सटीकता पर चिंता जताई. ये टूल्स मज़दूरी से जुड़ी हाज़िरी व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं. कई मज़दूरों ने बार-बार आने वाली तकनीकी दिक्कतों की ओर भी इशारा किया है, जिनमें नेटवर्क संबंधी समस्याएं और ऑथेंटिकेशन में विफलता शामिल हैं. उनका कहना है कि इन दिक्कतों की वजह से हाज़िरी के रिकॉर्ड पर असर पड़ सकता है और मज़दूरी के भुगतान में भी देरी हो सकती है.

टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता को लेकर खड़े किए सवाल
इस घटना ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चल रही बहस को फिर से हवा दे दी है. डिजिटल हाज़िरी सिस्टम का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और दुरुपयोग को रोकना है, लेकिन इस तरह की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ये प्लेटफॉर्म किसी व्यक्ति के बाहरी स्वरूप में होने वाले सामान्य बदलावों को कितनी प्रभावी ढंग से पहचान पाते हैं. जैसे-जैसे यह वीडियो अधिक लोगों तक पहुंच रहा है, इस घटना को सिर्फ़ सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के तौर पर ही नहीं, बल्कि उन व्यावहारिक चुनौतियों के उदाहरण के रूप में भी देखा जा रहा है, जो तब सामने आती हैं जब ऑटोमेटेड सिस्टम वास्तविक परिस्थितियों को समझने में नाकाम रहते हैं.

Monsoon Tracker: मॉनसून पर बड़ा खतरा! IMD की डराने वाली भविष्यवाणी- इस साल बारिश कम, गर्मी करेगी बेहाल…

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IMD का अनुमान है कि 2026 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम (LPA का 90%) रहेगा. जून में भीषण गर्मी और कई राज्यों में सामान्य से अधिक दिनों तक हीटवेव चलने की आशंका है.

देशभर में भीषण गर्मी के बीच अब मॉनसून को लेकर भी चिंताजनक संकेत सामने आए हैं. India Meteorological Department यानी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान जताया है कि जून से सितंबर 2026 के बीच होने वाला दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है. मौसम विभाग के महानिदेशक Mrutyunjay Mohapatra ने कहा कि इस बार देश में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का सिर्फ 90 प्रतिशत रहने की संभावना है.

IMD के मुताबिक, यह साफ संकेत है कि देश के कई हिस्सों में “Below Normal Monsoon” यानी सामान्य से कम बारिश दर्ज हो सकती है. खासतौर पर उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में बारिश औसत से कम रहने की आशंका जताई गई है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत में सामान्य बारिश होने का अनुमान है.

मौसम विभाग ने बताया कि मॉनसून कोर ज़ोन—जो कृषि के लिहाज से सबसे अहम माना जाता है—वह भी इस बार कमजोर रह सकता है. इसका सीधा असर खरीफ फसलों, जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है.

जून में ही दिखेगा असर

IMD ने जून 2026 के लिए भी चेतावनी जारी की है. विभाग के अनुसार जून महीने में देशभर में औसत बारिश सामान्य से कम यानी 92 प्रतिशत से नीचे रह सकती है. उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो ज्यादातर इलाकों में बारिश की कमी देखने को मिल सकती है.

इसके साथ ही तापमान को लेकर भी डराने वाला अनुमान सामने आया है. मौसम विभाग ने कहा है कि जून में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा. यानी लोगों को लंबे समय तक झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ सकता है.

इन राज्यों में बढ़ेंगे हीटवेव के दिन

IMD के अनुसार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में हीटवेव के दिनों की संख्या सामान्य से ज्यादा रह सकती है. इसके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है. हालांकि राजस्थान और झारखंड के लिए थोड़ी राहत की खबर है. वहां हीटवेव के दिनों की संख्या सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया है.

खेती और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

कमजोर मॉनसून का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहता. भारत की बड़ी आबादी और खेती अब भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है. यदि बारिश कम होती है तो धान, दाल और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है. इससे खाद्य महंगाई बढ़ने और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों में मॉनसून की प्रगति पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि शुरुआती संकेत इस बार सामान्य से कमजोर बारिश की तरफ इशारा कर रहे हैं.

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के साथ फोटो शेयर करने के बाद एयर होस्टेस सेलिब्रिटी…

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तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से फ्लाइट में एयर होस्टेस उमा मीनाक्षी ने मुलाकात की. सीएम के साथ फोटो शेयर करने के बाद से वो सेलिब्रिटी बन गई हैं.

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय नई दिल्ली के आधिकारिक दौरे के बाद चेन्नई लौट गए हैं. इस दौरान एक डोमेस्टिक फ्लाइट (घरेलू उड़ान) में उनकी मुलाकात एयर होस्टेस उमा मीनाक्षी से हुई. मीनाक्षी ने इसकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है.

इस फोटो में मुख्यमंत्री विजय काले और सफेद कपड़ों में नजर आ रहे हैं. ये फोटो फ्लाइट के अंदर ली गई है. एयर होस्टेस उमा मीनाक्षी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह तस्वीर पोस्ट की. इस फोटो को लेकर उन्होंने कैप्शन में लिखा कि क्रू ड्यूटी स्पेशल बन गई, क्योंकि मुख्यमंत्री विजय उसी फ्लाइट में यात्रा कर रहे थे. उन्होंने पोस्ट में विजय को सम्मानपूर्वक संबोधित करते हुए इस मुलाकात को यादगार बताया है.

सीएम विजय संग फोटो शेयर कर बनी सेलिब्रिटी 
एयर होस्टेस उमा मीनाक्षी ने सीएम विजय के साथ फोटो शेयर करते हुए लिखा कि आज क्रू की ड्यूटी और भी खास हो गई, क्योंकि माननीय मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जिन्हें प्यार से ‘थलापति’ कहा जाता है. वो हमारे साथ विमान में सवार थे. इसके साथ उन्होंने प्लेन और प्यार वाली इमोजी शेयर की है. दिल्ली दौरे के बाद मुख्यमंत्री विजय स्पेशल फ्लाइट से चेन्नई लौटे. इसी यात्रा के दौरान एयर होस्टेस उमा मीनाक्षी के साथ उनकी तस्वीर ली गई, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर शेयर किया गया.

दिल्ली में पीएम मोदी से मिलने गए थे सीएम विजय
सीएम विजय के साथ फोटो शेयर करते ही मीनाक्षी भी सेलिब्रिटी बन गईं. उनकी यह तस्वीर लोगों को खूब पसंद आई है. लोगों ने उनकी इस पोस्ट पर जमकर कमेंट किए. थलपति विजय ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी. इन बैठकों के दौरान विभिन्न प्रशासनिक और राज्य से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई.

तमिलनाडु सीएम की कांग्रेस नेताओं खासकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी. इस संबंध में कांग्रेस सांसद क्रिस्टोफर तिलक ने कहा कि कार्यक्रमों की व्यस्तता और समय की कमी के कारण यह मुलाकात टाल दी गई है.

Aaj Ka Mausam 29 May 2026: मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ कई राज्यों में तेज आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश का अलर्ट जारी….

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Aaj Ka Mausam 29 May 2026: मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ कई राज्यों में तेज आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश का अलर्ट जारी…. तापमान में 6 से 8 डिग्री तक गिरावट संभव है.

देश के कई हिस्सों में मानसून अभी पूरी तरह नहीं पहुंचा है, लेकिन मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 से 48 घंटों के लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है. IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और आने वाले दो से तीन दिनों में इसके अरब सागर, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी के कुछ और इलाकों तक पहुंचने की संभावना है. इसी बीच उत्तर-पश्चिम  भारत के कई राज्यों में तेंज आंधी और ओलावृष्टि और भारी बारिश की आशंका जताई गई है. मौसम विभाग का कहना है कि इस बदलाव से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलेगी और तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है.

मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के लिए विशेष चेतावनी जारी की है. विभाग के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी-तूफान आ सकता है. इसके साथ ओले गिरने और भारी बारिश होने की भी संभावना है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है और ओले गिरनेकी आशंका है. 30 मई को पूरे प्रदेश में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है. इसके अलावा 31 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है.

दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी मौसम बिगड़ने की आशंका
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी आज मौसम खराब रह सकता है. इन क्षेत्रों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, ओले गिरने और भारी बारिश होने की संभावना है. 30 मई को भी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है.

बिहार और झारखंड में कैसा रहेगा मौसम?
बिहार के कुछ हिस्सों में आज भारी बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी भी जारी की गई है. 30 मई को 50 -60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार  से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि 31 मई और 1 जून को कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है. झारखंड की बात करें तो 31 मई तक राज्य के कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. 1 से 3 जून के बीच गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना बनी हुई है.

पहाड़ी राज्यों में भी खराब रहेगा मौसम
उत्तराखंड के कुछ इलाकों में आज भारी बारिश और ओले गिरने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि 30 मई तक पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम खराब बना रह सकता है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी ओलावृष्टि और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है. पहाड़ों में हो रहे इस मौसम परिवर्तन का असर मैदानी इलाकों पर भी पड़ेगा और तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है.

ओलावृष्टि और भारी बारिश को लेकर चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश में आज लू का असर आखिरी बार देखने को मिल सकता है. विभाग ने आज और कल पूरे मध्य प्रदेश में ओले गिरने और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी जारी की है. 31 मई को पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भी 31 मई तक 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान का अनुमान है. इससे गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है. राज्य में 1 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है.

कॉकरोच जनता पार्टी को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्स अकाउंट को तुरंत बहाल करने से किया इनकार..

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कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने शुक्रवार (29 मई) को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सोशल मीडिया एक्स अकाउंट को फौरन बहाल करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया.

कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने शुक्रवार (29 मई) को अभिजीत दीपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सोशल मीडिया एक्स अकाउंट को फौरन बहाल करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया. दीपके की याचिका पर जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने सुनवाई की.

कोर्ट ने सीजेपी के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की गई कुछ चीजों को ‘आपत्तिजनक’ पाया और संस्थापक दीपके की याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है और सरकार और एक्स प्लेटफॉर्म की दलील सुनने के बाद ही कोई आदेश जारी करेगी.

HC ने केंद्र सरकार को दिया नोटिस

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया. याचिका में केंद्र सरकार की ओर से पार्टी के X हैंडल को बैन करने के आदेश को चुनौती दी गई है. सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए ट्विटर अकाउंट को भारत में बैन कर दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्स हैंडल पर तत्काल बैन हटाने को लेकर कोई आदेश जारी नहीं जारी किया है.

21 मई को ब्लॉक हुआ था CJP का एक्स हैंडल

‘एक्स’ पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का हैंडल 21 मई को भारत में ‘ब्लॉक’ कर दिया गया था. इसके बाद ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से नए हैंडल बनाया गया था, जिसके मौजूदा समय में 2.27 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं.  पूर्व में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे दीपके ने 15 मई को एक वकील के सीनियर पद से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ टिप्पणियों पर विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की शुरुआत की थी.

16 मई को हुई सीजेपी की शुरुआत

16 मई को शुरू हुई सीजेपी का दावा है कि उसका मकसद युवाओं की आवाज को मजबूत करने और सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए युवाओं के लिए एक स्वतंत्र आंदोलन खड़ा करना है. हाल में इसने शिक्षा क्षेत्र में कथित सिस्टम की नाकामी और नीट-यूजी 2026 पेपर ‘लीक’ को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एक अभियान शुरू किया है.

16 मई को चीफ जस्टिस ने अपनी टिप्पणी को लेकर कड़े शब्दों में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि वह उन खबरों से ‘आहत’ हैं, जिनमें यह संकेत दिया गया था कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की थी उन्होंने कहा था कि उनकी टिप्पणियां खास रूप से उन लोगों के खिलाफ थीं, जो ‘फर्जी और अवैध डिग्रियों’ के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश कर रहे हैं और मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को ‘गलत तरीके से पेश’ किया.

इंडिगो और एयर इंडिया समेत तीन एयरलाइंस जून से रोजाना 250 घरेलू उड़ानें कम…

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गर्मी की छुट्टियों के बीच हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को आने वाले महीनों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने जून से घरेलू उड़ानों में बड़ी कटौती करने का फैसला किया है. बढ़ती ईंधन लागत और यात्रा मांग में नरमी के कारण तीनों एयरलाइंस मिलकर रोजाना करीब 250 घरेलू उड़ानें कम करेंगी. यह व्यवस्था जून से अगस्त तक लागू रहने की संभावना है. ऐसे समय में यह फैसला लिया गया है जब घरेलू हवाई किराए पहले ही तेजी से बढ़ चुके हैं.

गर्मियों की छुट्टियों में यात्रियों पर पड़ेगा असर
उड़ानों में कटौती ऐसे समय की जा रही है जब बड़ी संख्या में लोग गर्मियों की छुट्टियों, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं के लिए सफर करते हैं. उड़ानों की संख्या कम होने से यात्रियों को टिकट मिलने में दिक्कत हो सकती है और व्यस्त रूट्स पर भीड़ बढ़ने की आशंका है.

एयर इंडिया 22 फीसदी तक घटाएगी घरेलू उड़ानें
एयर इंडिया जून और जुलाई के दौरान अपने घरेलू उड़ान कार्यक्रम में लगभग 22 फीसदी की कटौती कर रही है. एयरलाइन फिलहाल रोजाना करीब 500 घरेलू उड़ानें संचालित करती है. इस कटौती के बाद प्रतिदिन लगभग 110 उड़ानें कम हो जाएंगी.

एयर इंडिया ने बयान जारी कर कहा है कि यह कदम बढ़ती ईंधन लागत को देखते हुए अस्थायी तौर पर उठाया गया है. कंपनी ने कहा कि वह मांग और परिचालन परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगी.

इंडिगो भी कम करेगी 110 उड़ानें
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो, जो प्रतिदिन करीब 2,200 उड़ानें संचालित करती है, अपनी घरेलू क्षमता में 5 से 7 फीसदी तक कटौती करेगी. इसके चलते रोजाना लगभग 110 उड़ानें कम हो जाएंगी. एयरलाइन का कहना है कि गर्मियों के बाद यात्रा मांग में संभावित कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी कटौती
एयर इंडिया समूह की लो-कॉस्ट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस भी अपने घरेलू नेटवर्क में कटौती करेगी. कंपनी रोजाना करीब 340 घरेलू उड़ानें संचालित करती है और इनमें से लगभग 10 फीसदी उड़ानों को अस्थायी रूप से कम किया जाएगा.

किन शहरों और रूट्स पर सबसे ज्यादा असर?
मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु इस कटौती से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में शामिल हैं. ये तीनों देश के प्रमुख एविएशन हब हैं और यहां से आने-जाने वाली कई उड़ानों की आवृत्ति घटाई जाएगी. मुंबई से जयपुर, गोवा, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, नागपुर, पटना और भोपाल के लिए उड़ानों की संख्या कम की जाएगी. दिल्ली से गोवा, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, लखनऊ, कोच्चि और कोलकाता के लिए उड़ानों में कटौती होगी. बेंगलुरु दक्षिण भारत का प्रमुख हवाई केंद्र है. यहां से संचालित कई आने-जाने वाली उड़ानों की संख्या कम होने से यात्रियों को असर महसूस होगा.

आखिर क्यों घटाई जा रही हैं उड़ानें?
उड़ानों में कटौती की सबसे बड़ी वजह एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें हैं. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतों में लगभग 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका असर और ज्यादा पड़ा है. करीब एक महीने पहले भारतीय एयरलाइन उद्योग ने ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग भी की थी. ईंधन खर्च एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होता है. ऐसे में बढ़ती लागत ने कंपनियों को अपने संचालन को संतुलित करने के लिए उड़ानें कम करने पर मजबूर किया है. इसके अलावा, कुछ एयरलाइंस का मानना है कि यात्रा मांग में भी नरमी आई है और लोग गैर-जरूरी यात्राओं पर खर्च कम कर रहे हैं.

हवाई किराए और बढ़ सकते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों में कटौती का सीधा असर किरायों पर पड़ सकता है. पिछले कुछ हफ्तों में कई रूट्स पर हवाई किराए में 30 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है. बढ़ती ईंधन लागत के कारण एयरलाइंस ने प्रति यात्री 400 से 450 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज भी लगाना शुरू कर दिया है. अब जब सीटों की संख्या कम होगी, तो मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे व्यस्त रूट्स पर किराए और बढ़ सकते हैं. इससे अगले तीन महीनों में हवाई यात्रा कई यात्रियों के लिए महंगी हो सकती है.

पश्चिम एशिया के लिए सेवाएं धीरेधीरे बहाल
हालांकि घरेलू उड़ानों में कटौती की जा रही है, लेकिन एयरलाइंस पश्चिम एशिया के कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर सेवाएं फिर से शुरू कर रही हैं. क्षेत्र में हवाई क्षेत्र से जुड़ी पाबंदियां कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है.

यात्रियों को पहले से करनी होगी योजना
एयरलाइंस का कहना है कि जैसे ही ईंधन कीमतों और परिचालन परिस्थितियों में सुधार होगा, उड़ानों की संख्या फिर बढ़ाई जाएगी. फिलहाल मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु से यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना पहले से बनानी चाहिए, क्योंकि आने वाले महीनों में इन शहरों पर उड़ानों में कटौती का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है.

NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की चिंताओं पर बोली सरकार…

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एनटीए और सरकार की तरफ से सॉलसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 21 जून को होने जा रही परीक्षा को बेहतर तरीके से करवाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं.

नीट पेपर लीक मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस मामले पर नजर रख रहे हैं. शुक्रवार (29 मई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने पेपर रद्द होने पर चिंता जताते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि परीक्षा अच्छी तरह से हो. इस पर सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री इस मामले को खुद देख रहे हैं.

नीट यूजी परीक्षा 3 मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक विवाद के कारण इसे रद्द कर दिया गया था. अब 21 जून को पूरे देश में एकसाथ फिर से परीक्ष होनी है. पेपर लीक मामले में कई मेडिकल स्टूडेंट्स और डॉक्टर्स ने याचिका दाखिल करके नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को रिप्लेस किए जाने की मांग की है. पिछली सुनवाई में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इन याचिकाओं पर नोटिस जारी करके एनटीए से जवाब मांगा था.

कोर्ट ने पूछा था कि 2024 के उसके आदेश के बाद बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी की ओर से दिए गए सुझावों पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, जिससे NEET सिस्टम को मजबूत किया जा सके. हाई पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष राधाकृष्णन (इसरो के पूर्व अध्यक्ष) व्यक्तिगत रूप से आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. राधाकृष्णन ने बताया कि 2024 में कमेटी ने 60 सुझाव दिए थे, कई लागू हो चुके हैं और 2025 की परीक्षा सफलतापूर्वक हुई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह बहुत चिंता का विषय है कि छात्रों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा. कोर्ट ने सरकार से कहा कि यह सुनिश्चित करें कि परीक्षा अच्छी तरह हो. केंद्र सरकार जवाब दाखिल करे.

एनटीए और सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कोर्ट को बताया कि 21 जून को होने जा रही परीक्षा को बेहतर तरीके से करवाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट अब जुलाई के दूसरे हफ्ते में इस मामले की सुनवाई करेगा.

NEET : सुप्रीम कोर्ट ने बिना समस्या परीक्षा के आयोजन के लिए कहा, सॉलिसिटर जनरल ने बताया- प्रधानमंत्री खुद कर रहे हैं निगरानी…

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नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि NTA को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी संस्थाओं से सबक लेना चाहिए. उनकी परीक्षाओं पर कभी सवाल नहीं उठे. NTA में लोगों को जिम्मेदारी लेनी होगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि NTA और केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि 21 जून को दोबारा होने जा रही परीक्षा बिना किसी गलती के हो सके.

जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों का इस तरह परेशान होना बहुत चिंताजनक है. जब तक परीक्षा के आयोजन करवा रहे लोगों की जिम्मेदारी निश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसी गलतियों का रुकना असंभव है. जजों ने यह भी कहा कि NTA को अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेना होगा.

इस साल 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा को पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया था. इसे लेकर दाखिल याचिकाओं में 21 जून को दोबारा होने वाली परीक्षा को पेन-पेपर की बजाय कंप्यूटर से करवाने, नई परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड कमेटी की निगरानी में करवाने की मांग की गई है. साथ ही, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को भंग कर नई संस्था के गठन की मांग की गई हैं. हालांकि, इन मांगों पर सुप्रीम कोर्ट ने चर्चा नहीं की.

25 मई को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने NTA से मामले पर जवाब दाखिल करने को कहा था. साथ ही, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए गठित राधाकृष्णन कमेटी को भी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था. शुक्रवार, 29 मई को हुई सुनवाई में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन खुद पेश हुए. उन्होंने बताया कि 2024 में कमेटी ने 60 सुझाव दिए थे. कई लागू हो चुके हैं. 2025 में परीक्षा सफलतापूर्वक हुई. इस बार कुछ नई कमियां सामने आईं. उन्हें दूर किया जाएगा.

केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ’21 जून को होने जा रही परीक्षा को बेहतर तरीके से करवाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं.’ तुषार मेहता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी कर रहे हैं. सुनवाई के अंत में कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से जवाब दाखिल करने को कहा. मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी. कोर्ट ने कहा है कि अभी वह कुछ समय तक नीट परीक्षा से जुड़े मामले की निगरानी करता रहेगा.

घुसपैठ से डेमोग्राफिक बदलाव पर सरकार सख्त, कड़े कानूनों की सिफारिश संभव…

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अवैध प्रवासन से बदलती जनसांख्यिकी पर केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने चिंता जताई है. जरूरत पड़ने पर सरकार को और कड़े कानूनों की सिफारिश की जा सकती है.

केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष और शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर ने घुसपैठियों के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तन को ‘बहुत बड़ी चुनौती’ करार दिया है. सरकार  ने कहा कि समिति विषय विशेषज्ञों की मदद से इस समस्या की थाह लेगी और आवश्यकता महसूस होने पर सरकार से ‘और कड़े कानून’ बनाने की सिफारिश कर सकती है. केंद्र ने अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के व्यापक आकलन के लिए इस समिति का गठन किया है.

समिति के प्रमुख न्यायमूर्ति नावलेकर ने इंदौर में ‘पीटीआई-भाषा’ से साक्षात्कार में कहा, ‘‘जनसांख्यिकीय परिवर्तन बहुत बड़ी चुनौती है. लोग जब घुसपैठ के जरिये अवैध तौर पर देश में आते हैं, तो पूरे राष्ट्र पर इसका प्रभाव पड़ता है.’ नावलेकर ने कहा कि सरकार कई योजनाओं के तहत गरीबों की मदद करती है, लेकिन घुसपैठियों के कारण यह मदद बंट जाती है. न्यायमूर्ति नावलेकर ने कहा, ‘जो व्यक्ति (घुसपैठिया) सरकारी मदद का हकदार नहीं है, हमें उसे भी यह मदद देनी पड़ती है. नतीजतन जो इस मदद का असल हकदार है, उसका हिस्सा कम हो जाता है और यह भी कहा कि घुसपैठियों की समस्या देश में अशांति का कारण भी बन सकती है.

जरूरत पड़ी तो कड़े कानूनों की सिफारिश
शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ‘‘…इसलिए सरकार चाहती है कि घुसपैठियों की पहचान की जाए और पता लगाया जाए कि किन क्षेत्रों में इनकी तादाद ज्यादा है.’’यह पूछे जाने पर कि क्या देश में घुसपैठियों की समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी ढांचा मौजूद है, न्यायमूर्ति नावलेकर ने जवाब दिया कि अगर उनकी अध्यक्षता वाली समिति को महसूस हुआ कि इस विषय में ‘और कड़े  कानून’ बनाए जाने की आवश्यकता है, तो वह सरकार को इसकी सिफारिश भी कर सकती है. उन्होंने विभिन्न अपराधों को रोकने के लिए कड़े कानूनों और सरकारी तंत्र द्वारा इन्हें सख्ती से लागू कराए जाने की जरूरत पर जोर दिया.

कड़ी सजा का डर अपराध रोकने में अहम: नावलेकर
न्यायमूर्ति नावलेकर ने कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति कैसा बर्ताव करेगा, इस पर किसी का नियंत्रण नहीं होता. मगर उस व्यक्ति के मन में दहशत रहे कि गड़बड़ करने पर उसे कड़ी सजा मिलेगी, तो इस बात की संभावना ज्यादा रहती है कि वह गड़बड़ नहीं करेगा.’‘ उच्चस्तरीय समिति के गठन के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय की जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अवैध प्रवासन के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तन केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर अब विस्तृत हो गया है जो शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों, जनजातीय क्षेत्रों और अन्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है.

देशभर में फैली तो बढ़ेगा संसाधनों पर बोझ
समिति के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘यह बहुत गंभीर बात है. पहले हम केवल अंतरराष्ट्रीय सरहदों से सटे इलाकों में अवैध प्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय परिवर्तन से होने वाला नुकसान देखते थे. अगर यह समस्या देश भर में फैल गई, तो हमारे संसाधनों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा.’’ उन्होंने एक सवाल पर कहा कि भारतीय कानून, शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हैं. न्यायमूर्ति नावलेकर ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासन से होने वाला जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक वैश्विक परिघटना प्रतीत हो रहा है. शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम सुन रहे हैं और अखबारों से भी पता चलता है कि फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और अमेरिका जैसे देश भी इस समस्या से जूझ रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि उनकी अध्यक्षता वाली समिति को आवश्यकता पड़ने पर सदस्यों के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों और सरकारी अफसरों से जानकारी लेने की शक्तियां हासिल हैं.

एक साल में रिपोर्ट सौंपेगी समिति
न्यायमूर्ति नावलेकर ने कहा, ‘‘हमें ज्यादा से ज्यादा जानकारी और दस्तावेज इकट्ठे करने होंगे. हमें कुछ जगहों का दौरा भी करना होगा. काम शुरू करने के बाद उपलब्ध सामग्री के आधार पर समिति मिलकर फैसला करेगी कि उसे कहां जाना है.’’ इस समिति में जनगणना आयुक्त के साथ ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि बतौर सदस्य शामिल हैं. यह समिति एक साल में सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी. आवश्यकता होने पर गृह मंत्रालय द्वारा समिति के कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है.