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CG: खेल अधोसंरचना को मिशन मोड में विकसित कर रही सरकार – मुख्यमंत्री श्री साय…

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14वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का भव्य समापन

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित 14वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता 2025-26 का भव्य समापन आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में दुर्ग में संपन्न हुआ।मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न राज्यों एवं केंद्रीय बलों से आए खिलाड़ियों, कोच और अधिकारियों का स्वागत करते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पुलिस जवान कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, जो उनके अनुशासन और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि तीरंदाजी छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्र की विशिष्ट पहचान रही है और राज्य सरकार खेल अधोसंरचना को मिशन मोड में विकसित कर रही है। जशपुर में आर्चरी एकेडमी तथा नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों से अनुशासन, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास बढ़ता है तथा युवाओं के लिए कैरियर के नए अवसर भी बनते हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक पदक विजेताओं को आकर्षक प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है। उन्होंने युवाओं से खेलों से जुड़ने और अभिभावकों से बच्चों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराओं और धनुर्विद्या की समृद्ध विरासत का उल्लेख किया।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छह टीमों सीआईएसएफ, राजस्थान, सीआरपीएफ, उत्तर प्रदेश, बीएसएफ एवं आईटीबीपी को शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया तथा प्रतियोगिता के औपचारिक समापन की घोषणा की।

इस अवसर पर अहिवारा विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाडा,  पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम सहित जनप्रतिनिधि एवं पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी का बजट वेबिनार में संबोधन: विकसित भारत की दिशा में कदम…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त’ विषय पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित किया।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बजट के बाद वेबिनार आयोजित करने की एक मजबूत परंपरा विकसित हुई है, जो बजट को प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

बजट का दीर्घकालिक दृष्टिकोण

मोदी ने कहा कि बजट का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर किया जाता है, जैसे शेयर बाजार की स्थिति या आयकर प्रस्ताव। लेकिन असल में, राष्ट्रीय बजट एक दीर्घकालिक नीति रोडमैप है। उन्होंने बताया कि जो नीतियां इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करती हैं और शासन में पारदर्शिता लाती हैं, वही अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती प्रदान करती हैं।

राष्ट्र निर्माण की निरंतर प्रक्रिया

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी बजट को अलग-थलग नहीं देखा जाना चाहिए। राष्ट्र निर्माण एक निरंतर प्रक्रिया है, और हर बजट उस लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक चरण है, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का संकल्प है।

विचारों का आदान-प्रदान

उन्होंने उम्मीद जताई कि वेबिनार केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित न रहें, बल्कि एक प्रभावी ब्रेनस्टॉर्मिंग अभ्यास बनें। उद्योग, अकादमिक जगत, और नीति निर्माताओं के सामूहिक विचार-विमर्श से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।

21वीं सदी में भारत की विकास यात्रा

मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और भारत की विकास यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। पिछले एक दशक में भारत ने असाधारण लचीलापन दिखाया है, जो सुधारों का परिणाम है।

सरकारी निवेश का महत्व

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए बजट में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान था, जो अब बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

निवेश के लिए अनुकूल वातावरण

मोदी ने कहा कि सरकार विदेशी निवेश ढांचे को सरल बना रही है और दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉंड बाजार को सक्रिय बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।

साझा संकल्प की आवश्यकता

प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत और विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखकर ठोस सुझाव दें। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ तैयार किया जाना चाहिए।

सभी की भागीदारी आवश्यक

अपने संबोधन के अंत में, मोदी ने सभी हितधारकों से अपील की कि वे बजट में दिए गए नए अवसरों का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि अब बजट पर चर्चा का समय नहीं है, बल्कि इसे तेजी से लागू करने का समय है।

दिल्ली शराब नीति मामले में सीबीआई की अपील: क्या होगी अगली कानूनी लड़ाई?

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सीबीआई ने हाईकोर्ट में दायर की अपील

दिल्ली शराब नीति घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को बरी करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई ने तुरंत दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है।

जांच एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया या उन पर उचित ध्यान नहीं दिया। कोर्ट ने पहले यह कहा था कि सबूतों की कमी और कोई व्यापक साजिश न पाए जाने के कारण आरोपियों को क्लीन चिट दी गई थी। सीबीआई का यह कदम मामले को लंबित रखेगा और कानूनी लड़ाई को जारी रखेगा, जबकि आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए राहत जताई है। खबर में और अपडेट आ रहे हैं…

इंडिया-US ट्रेड डील पर आया बड़ा अपडेट, पीयूष गोयल ने कही री-बैलेंस करने की बात…

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परिस्थितियां बदलने पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील को फिर से संतुलित किया जा सकता है, ऐसा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है. उन्होंने साफ किया कि बदलते टैरिफ संकेतों के बीच भारत अपने आर्थिक हितों की पूरी तरह रक्षा करेगा.

शुक्रवार को बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को जरूरत पड़ने पर दोबारा संतुलित (रीबैलेंस) किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार की स्थिति लगातार बदल रही है और अमेरिका की तरफ से अलग-अलग बयान और कदम सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा, स्थिति लगातार बदल रही है. ट्रंप प्रशासन कई तरह के कदम उठा सकता है. अगले हफ्ते टैरिफ 15% तक भी बढ़ाया जा सकता है. बातचीत जारी है और अगर हालात बदलते हैं तो समझौते को फिर से संतुलित किया जाएगा. गोयल ने ये बातें कहीं. उन्होंने बताया कि भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में भी कहा गया है कि परिस्थितियां बदलने पर समझौते में बदलाव किया जा सकता है.

अमेरिकी टैरिफ पर वेट एंड वॉच रुख

मंत्री ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ लगातार बातचीत में बना हुआ है. उन्होंने कहा कि फिलहाल अमेरिका के टैरिफ फैसलों पर इंतजार करो और देखो (wait and watch) की रणनीति अपनाई जाएगी, लेकिन भारत के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास कई नीति विकल्प हैं, जिनमें 10% टैरिफ बढ़ाने जैसे कदम भी शामिल हैं.

भारत के निर्यात बढ़ने की उम्मीद

वैश्विक व्यापार में चुनौतियों के बावजूद गोयल ने भरोसा जताया कि इस साल भारत का निर्यात बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ डील में कई सकारात्मक पहलू हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मकसद प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करना होता है.

किसानों और डेयरी सेक्टर को सुरक्षा

कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर उठ रही चिंताओं पर गोयल ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा गया है. उन्होंने साफ कहा भारत में कोई GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) खाद्य उत्पाद नहीं आएंगे डेयरी, मक्का, सोयाबीन और पोल्ट्री सेक्टर इस डील से बाहर हैं किसानों और डेयरी उद्योग के हित सुरक्षित रखे गए हैं.

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता फिलहाल टली

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत तब दोबारा शुरू होगी जब अमेरिका के नए टैरिफ बदलावों पर स्थिति साफ हो जाएगी. वॉशिंगटन में होने वाली तीन दिन की बैठक टैरिफ नीति में बदलाव के कारण टाल दी गई. भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करने वाले थे. भारत सरकार अमेरिकी कोर्ट के फैसले और नए टैरिफ बदलावों के असर पर कानूनी राय भी लेगी.

टैरिफ में पहले क्या तय हुआ था

इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते का एक ढांचा तय किया था, जिसके तहत अमेरिका भारत पर लगने वाला पारस्परिक टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ था. अतिरिक्त 25% पेनल्टी शुल्क हटाने का संकेत दिया गया था.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का असर

हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू व्यापक पारस्परिक टैरिफ व्यवस्था को रद्द कर दिया, जिसके बाद टैरिफ नीति में बड़े बदलाव देखने को मिले. अमेरिका ने अप्रैल 2025 में भारतीय सामान पर 26% टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में 25% किया गया. अगस्त में रूस से तेल खरीद जारी रखने पर भारत पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ प्रभाव 50% तक पहुंच गया था. हालांकि नए अंतरिम ढांचे के तहत अमेरिका ने टैरिफ घटाकर 18% करने और अतिरिक्त 25% शुल्क हटाने का संकेत दिया है.

शराब घोटाले से केजरीवाल-सिसोदिया बरी, कोर्ट के फैसले पर BJP बोली- यह तकनीकी विषय…

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कथित शराब नीति घोटाले मामले में कोर्ट की ओर से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को बरी किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) में जश्न है.

फैसले के बाद भावुक हुए केजरीवाल ने इसे आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश दिया. वहीं कोर्ट के फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कहा कि यह तकनीकी मामला है, पार्टी फैसले को पढ़ने के बाद ही अपना जवाब देगी.

केजरीवाल को बरी किए जाने को लेकर BJP के नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया है. यह तकनीकी विषय है. क्योंकि ये बात भी सही है कि सैकड़ों की संख्या में सिम कार्ड और फोन सबूत के रूप में नष्ट किए गए थे. अब वो सब किसी भाव से नष्ट किए गए थे, इस वजह से सबूत का क्या अभाव हुआ, इस मामले में सीबीआई अगला कदम उठाएगी और अपना पक्ष रखेगी, यह तकनीकी मामला है.”

तो कोर्ट ने केस करने की अनुमति कैसे दीः

उन्होंने यह भी कहा कि CBI इस केस में अगला कदम उठाएगी. पार्टी फैसले पर डिटेल में पढ़ने के बाद स्ट्रक्चर्ड जवाब देगी. साथ ही यह भी सोचना चाहिए अगर सबूत बिल्कुल भी नहीं थे तो कोर्ट ने चार्जेस फ्रेम करने की अनुमति कैसे दे दी?”

इस बीच शराब नीति मामले में कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद भावुक हुए पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने खुशी जताते हुए कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश थी. उन्होंने कहा कि आज कोर्ट ने हम पर लगे सभी आरोप खारिज कर दिए और सभी आरोपियों को बरी कर दिया. उन्होंने यह भी कहा, हमें न्यायपालिका पर भरोसा था. सत्य की जीत हुई.

कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी जरूरी नहीं: रूडी

कोर्ट के फैसले और केजरीवाल के बरी होने को लेकर बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने पर कहा, “अभी तो एक कोर्ट से राहत मिली है. जैसे इन लोगों को अधिकार था और ये पहले हाई कोर्ट गए फिर सुप्रीम कोर्ट भी गए वैसे ही CBI को भी अधिकार है. इनके खिलाफ यह कोई एक अकेला भ्रष्टाचार का मामला नहीं था, CAG रिपोर्ट जो आई है उसमें सड़कों में भी घोटाला है, स्कूल बनाने को लेकर घोटाला है, अस्पतालों में भी घोटाला है, उन सबके भी केस चलेंगे. भ्रष्टटाचार के मामले इनके खिलाफ हैं और केस चलेंगे.”

पटना में बीजेपी के सांसद राजीव प्रताप रुडी ने कहा, “यह कोर्ट का फैसला है और अदालत स्वाभाविक तौर से अगर कोई पीड़ित हो और कोर्ट उसे बरी करता है तो उस पर किसी राजनीतिक टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है.”

बीजेपी के एक अन्य बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कोर्ट के फैसले पर कहा, “सभी जानते हैं कि ये दोनों (अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया) इस घोटाले के जनक थे. दिल्ली की जनता अच्छे से जानती है कि शराब घोटाले के जनक केजरीवाल थे. जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनकी भी गवाही होगी. सभी जानते हैं कि ये लोग इस घोटाले के मास्टरमाइंड थे.”

  • मतलब बीजेपी अब भी ओछी हरकत से बाज़ नहीं आएगी
  • तड़ी पार भी टेकनिकल ग़लती से सज़ा से बच गया है
  • भाजपा का काम केवल बड़ी बड़ी बातें करना तथा a अनर्गल आरोप लगाना है।

केजरीवाल सरकार में दारू की एक बोतल पर एक बोतल फ्री क्यों दी गई । आखिर यह कौन सी जन कल्याणकारी योजना थी । क्यों वकीलों को आम आदमी पार्टी ज्वाइन कराई गई । लगता है सच में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार अंदर तक अपनी पेंठ बना चुका है । केजरीवाल जैसे भ्रष्टाचारी आदमी को बरी करना समाज के लिए सही नहीं है । अन्ना हजारे जैसे सीधे-साधे आदमी को सीढ़ी बनाकर ये भ्रष्टाचारी कहां से कहां पहुंच गया । मीडिया के आगे आकर रो कर ड्रामा करना जनता को सब समझ आता है।

देश का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट बनकर तैयार, PM मोदी करेंगे उद्घाटन, बदलेगी भारत की तस्वीर…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी के आधुनिक ATMP यानी असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग प्लांट का उद्घाटन करेंगे. 22,516 करोड़ रुपये के निवेश से बने इस प्रोजेक्ट को भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

इसे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाने की दिशा में अहम पहल बताया जा रहा है. यह प्लांट रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस के लिए मेमोरी और स्टोरेज प्रोडक्ट बनाएगी और देश के साथ-साथ विदेशों की मांग भी पूरी करेगी.

आम लोगों के लिए सबसे बड़ा फायदा रोजगार और कमाई के अवसर के रूप में देखने को मिलेगा. इस समय साणंद प्लांट में करीब 2,000 लोग काम कर रहे हैं. आने वाले समय में यह संख्या बढ़कर लगभग 5,000 सीधे रोजगार तक पहुंच सकती है. इन नौकरियों में इंजीनियर, तकनीशियन और ऑपरेटर शामिल होंगे. खास बात ये है कि इस फ्लांट में ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो फिजिकली चैंलेंज्ड हैं. इस फैक्ट्री ने दिव्यांग लोगों को भी ऑपरेटर और तकनीशियन के रूप में काम करने का मौका दिया है.

लोगों को क्या होगा फायदा?

रोजगार के अलावा, लंबे समय में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम को मजबूती मिलेगी. ATMP फैक्ट्री SSD स्टोरेज डिवाइस, DRAM और NAND मेमोरी प्रोडक्ट बनाएगी. ये सभी स्मार्टफोन, लैपटॉप और डाटा स्टोरेज सिस्टम जैसे उपकरणों के जरूरी हिस्से होते हैं. अगर देश में सेमीकंडक्टर सिस्टम मजबूत होता है, तो आगे चलकर इलेक्ट्रॉनिक्स की सप्लाई चेन बेहतर हो सकती है.

साणंद में माइक्रोन क्या बनाएगी?

यह प्लांट इंटीग्रेटेड सर्किट पैकेज, मॉड्यूल और सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD) बनाएगा. यहां माइक्रोन की विदेशी फैक्ट्रियों से DRAM और NAND वेफर लाए जाएंगे, जिन्हें तैयार मेमोरी प्रोडक्ट में बदला जाएगा. प्रोडक्शन प्रक्रिया में असेंबल करना, उनकी जांच करना और बाजार के लिए पैक करना शामिल होगा. माइक्रोन के चेयरमैन और CEO संजय मेहरोत्रा ने कहा कि मेमोरी और स्टोरेज आधुनिक तकनीक का अहम हिस्सा हैं, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में, जहां तेज प्रोसेसिंग के लिए मजबूत मेमोरी की जरूरत होती है.

क्या होगा असर?

इस प्लांट का सबसे ज्यादा असर साणंद और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में देखने को मिलेगा, जहां सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश और उद्योग बढ़ सकते हैं. इस प्रोजेक्ट को अलग-अलग चरणों में विकसित किया जाएगा और आने वाले वर्षों में इसके विस्तार की योजना है. जैसे-जैसे साणंद सेमीकंडक्टर हब बढ़ेगा, वैसे-वैसे आसपास की सेवाओं जैसे ट्रांसपोर्ट, मकान, छोटे सप्लायर और मेंटेनेंस सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी. साणंद औद्योगिक क्षेत्र के आसपास और उद्योग व इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की संभावना है.

साइबर ठगों पर डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी, रियल-टाइम ट्रैकिंग से कसेगा शिकंजा…

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देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के मामलों के बीच अब ठगों के खिलाफ बड़े स्तर पर डिजिटल कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. साइबर अपराध से निपटने के लिए बनाई गई केंद्रीय व्यवस्था अब पूरी तरह एक्टिव मोड में है और तकनीक, डेटा और एजेंसियों के समन्वय से साइबर ठगों पर शिकंजा कसने की रणनीति लागू की जा रही है.

साइबर ठगी पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की स्थापना की है, जो Ministry of Home Affairs के तहत काम करने वाली नोडल एजेंसी है. इस सिस्टम को मजबूत बनाने की पहल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के स्तर पर की गई, जिसके तहत देशभर में एजेंसियों को एकीकृत प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है.

शिकायत से कार्रवाई तक…कैसे काम करता है सिस्टम?

जब किसी शख्स के साथ साइबर ठगी होती है तो वो हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करता है या पोर्टल cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करता है. शिकायत दर्ज होते ही मामला तुरंत बैकएंड सिस्टम में ट्रांसफर कर दिया जाता है.

यह पूरा केस Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System में दर्ज होता है, जहां से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होती है. शिकायत मिलते ही साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर सक्रिय हो जाता है.

यहां एक ही छत के नीचे कई एजेंसियां मिलकर काम करती हैं:-

  • अलग-अलग राज्यों की पुलिस
  • बैंकिंग संस्थान
  • टेलीकॉम कंपनियां
  • ऑनलाइन पेमेंट गेटवे

API इंटीग्रेशन के जरिए सभी सिस्टम आपस में जुड़े हैं, जिससे संदिग्ध ट्रांजैक्शन को तुरंत ट्रैक, फ्रीज और रिकवर करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इसी के लिए एक मानकीकृत SOP भी लागू की गई है, जिसके आधार पर सभी एजेंसियां समन्वित कार्रवाई करती हैं.

देशभर में साइबर फ्रॉड के हॉटस्पॉट चिन्हित

साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय लेन-देन की निगरानी में देशभर में कई बड़े हॉटस्पॉट सामने आए हैं. 10 जनवरी 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच के डेटा में चेक निकासी, एटीएम निकासी और संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े बड़े पैमाने पर मामले सामने आए हैं.

चेक निकासी हॉटस्पॉट: कुल 3,827 मामले

चेक के जरिए संदिग्ध निकासी में राजस्थान सबसे ऊपर रहा, इसके बाद उत्तर प्रदेश और गुजरात का स्थान है. शीर्ष राज्य: राजस्थान (581), उत्तर प्रदेश (452), गुजरात (358), बिहार (311), केरल (269), मध्य प्रदेश (244), पश्चिम बंगाल (219), दिल्ली (211), तमिलनाडु (204), हरियाणा (179).

एटीएम निकासी हॉटस्पॉट: कुल 43,450 मामले

एटीएम से संदिग्ध निकासी के मामलों में बिहार शीर्ष पर रहा. उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली में भी बड़ी संख्या दर्ज हुई.

शीर्ष राज्य: बिहार (5806), उत्तर प्रदेश (5404), झारखंड (4675), दिल्ली (4503), राजस्थान (4349), तमिलनाडु (2914), मध्य प्रदेश (2711), पश्चिम बंगाल (1926), हरियाणा (1725), कर्नाटक (1668).

अलग-अलग राज्यो में संदिग्ध 54,869 खाते

देशभर में हजारों बैंक खातों को संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा पाया गया. शीर्ष राज्य: राजस्थान (8355), उत्तर प्रदेश (6528), बिहार (5721), असम (4782), मध्य प्रदेश (3801), पश्चिम बंगाल (3595), दिल्ली (2720), झारखंड (2607), हरियाणा (2477), तमिलनाडु (1828).

डेटा से साफ है कि साइबर ठगी अब लोकल नहीं, बल्कि संगठित और इंटर-स्टेट नेटवर्क के रूप में फैल चुकी है. चेक और एटीएम दोनों माध्यमों से बड़े पैमाने पर संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आना बैंकिंग और डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है.

हालांकि एजेंसियों का मानना है कि हॉटस्पॉट मैपिंग, रियल-टाइम निगरानी और मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन से साइबर ठगों के नेटवर्क को तेजी से तोड़ा जा सकेगा. कुल मिलाकर ये बात साफ है कि अब साइबर ठगों पर डिजिटल जवाबी हमला शुरू हो चुका है, और साइबर कमांडो पूरी तैयारी में हैं.

बेंगलुरु में 38 लाख का पैकेज या दुबई में 5 लाख महीने की सैलरी? टेकी ने पूछा- कौन सा ऑफर बेहतर? लोगों ने दी ये सलाह…

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विदेश में नौकरी का ऑफर सुनते ही मन में खुशी और जिज्ञासा दोनों जाग जाते हैं. नई जगह, नया कल्चर और बेहतर लाइफस्टाइल की अपॉर्चुनिटी अट्रैक्ट करती है, लेकिन जब फैसला लेने की बारी आती है तो स्थिति उतनी आसान नहीं रहती.

खासकर तब, जब अपने देश में भी अच्छी सैलरी और मजबूत करियर ग्रोथ का अवसर मौजूद हो. हाल ही में Reddit पर एक 27 वर्षीय टेक प्रोफेशनल ने ऐसी ही दुविधा साझा की, जिसने कई लोगों का ध्यान खींचा.

यह युवा प्रोफेशनल फिलहाल बेंगलुरु में 32 लाख रुपये सालाना कमा रहा है. अब उसके सामने दो नए विकल्प हैं. पहला ऑफर बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित बैंक से है, जहां 38 लाख रुपये सालाना का पैकेज दिया जा रहा है. कंपनी की ब्रांड वैल्यू मजबूत है और लंबे समय में करियर ग्रोथ की संभावनाएं भी बेहतर बताई गई हैं. दूसरा प्रस्ताव दुबई से आया है, जहां उसे 21,000 AED प्रति माह यानी लगभग 5.19 लाख रुपये मासिक वेतन की पेशकश की गई है.

क्या मिला बंदे को ऑफर?

उसने अपने पोस्ट में लिखा कि भारत में मिलने वाली सैलरी का Analysis करना comparatively इजी है, क्योंकि यहां के खर्च, लाइफस्टाइल और करियर ग्रोथ के बारे में उसे क्लियर समझ है. लेकिन दुबई के ऑफर को लेकर उसके मन में कई सवाल हैं. क्या 21,000 AED एकUnmarried व्यक्ति के लिए sufficient सैलरी है? वहां रहन-सहन का वास्तविक खर्च कितना होगा? कितनी बचत संभव है? क्या फ्लैट शेयर करना आम बात है? और सबसे बड़ा सवाल.क्या केवल दुबई का टैग पाने के लिए यह कदम उठाना सही रहेगा?

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव और राय साझा की. कुछ लोगों ने दुबई की टैक्स-फ्री इनकम को बड़ा फायदा बताया. वहां आयकर नहीं देना पड़ता, जिससे सैलरी का पूरा हिस्सा हाथ में आता है. हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वहां का खर्च भी कम नहीं है. एक यूजर ने बताया कि केवल किराया ही 6,000 से 9,000 AED तक पहुंच सकता है, जो इलाके और रहने की सुविधा पर निर्भर करता है. इसके अलावा खाने-पीने, ट्रांसपोर्ट, मोबाइल बिल, इंटरनेट और अन्य दैनिक खर्च मिलाकर 10,000 से 13,000 AED तक आराम से खर्च हो सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति अनुशासित तरीके से जीवनयापन करे, तो 7,000 से 10,000 AED तक की बचत संभव है.

एक अन्य यूजर ने खर्च का सरल गणित समझाया. उसके अनुसार, यदि किराया लगभग 5,000 AED और अन्य खर्च भी करीब 5,000 AED मान लिए जाएं, तो बाकी रकम ही आपकी संभावित बचत होगी. लेकिन उसने यह भी जोड़ा कि मेडिकल सुविधाएं वहां महंगी हो सकती हैं, इसलिए स्वास्थ्य बीमा और अप्रत्याशित खर्चों को ध्यान में रखना जरूरी है.

कुछ लोगों ने आर्थिक पहलू से अधिक करियर ग्रोथ पर ध्यान देने की सलाह दी. एक टेक प्रोफेशनल ने टिप्पणी की कि यदि लंबी अवधि में तकनीकी क्षेत्र में मजबूत पहचान बनानी है, तो बेंगलुरु बेहतर विकल्प हो सकता है. उनका तर्क था कि दुबई में टेक सेक्टर उतना विकसित नहीं है, और कई कंपनियां अपना तकनीकी काम भारत को आउटसोर्स कर रही हैं. ऐसे में वहां अवसर सीमित हो सकते हैं.

भारत की जीरो टॉलरेंस नीति पर पीएम मोदी का बयान, इजराइल में बढ़ी चर्चा…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल में एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी स्थिति में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा।

इस बयान के बाद, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी से कुछ कहा, जिसके बाद दोनों नेताओं ने मुस्कुराते हुए एक-दूसरे का हाथ मिलाया। इस बीच, पाकिस्तान पर कार्रवाई की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही इशारा किया था कि यदि वह नहीं होते, तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की स्थिति गंभीर होती।

महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीएम मोदी और नेतन्याहू की मुलाकात पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह भारत की नीति के खिलाफ है, क्योंकि पूरी दुनिया नेतन्याहू के खिलाफ है। मुफ्ती ने कहा कि पीएम मोदी, जो 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं, का एक ऐसे व्यक्ति को गले लगाना जो अंतरराष्ट्रीय अपराधी है, उचित नहीं है।

भारतीय सेना की तैयारियां

भारतीय सेना के टू कोर के जीओसी और आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर टू शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछली बार पाकिस्तान को केवल एक छोटा सा संकेत दिया गया था, जिसके बाद पाकिस्तान ने चार दिन में ही युद्ध रोकने की गुहार लगाई थी। लेकिन इस बार भारत की तैयारी और भी मजबूत है।

भारत की जीडीपी वृद्धि दर तीसरी तिमाही में 8.3 प्रतिशत रहने का अनुमान…

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भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान

मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। यह वृद्धि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती के चलते बढ़ी मांग के कारण हो रही है, हालांकि पिछले वर्ष के ऊंचे आधार का भी प्रभाव रहेगा।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 8 प्रतिशत तक पहुँच सकती है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 6.5 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, यह दूसरी तिमाही के 8.1 प्रतिशत से थोड़ी कम हो सकती है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 27 फरवरी को जारी होने वाले वित्त वर्ष 2026 के तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े 8.3 प्रतिशत रह सकते हैं, जो पिछले साल की समान अवधि के 6.4 प्रतिशत से काफी अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर घटकर 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो दूसरी तिमाही के 8.7 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान अवधि के 10.3 प्रतिशत से कम है। इसका कारण महंगाई में कमी के चलते जीडीपी डिफ्लेटर में गिरावट बताया गया है। बैंक ने कहा कि उसके अनुमान पुराने बेस ईयर पर आधारित हैं, क्योंकि सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा बेस ईयर में बदलाव के बाद जीडीपी आंकड़ों पर प्रभाव को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि का अनुमान मजबूत बना हुआ है और वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती संकेत भी सकारात्मक हैं, लेकिन नए बेस ईयर के संबंध में स्पष्टता आने के बाद वार्षिक अनुमानों की पुनरावलोकन करना आवश्यक होगा। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) शुक्रवार को 2022-23 के संशोधित बेस ईयर के साथ जीडीपी आंकड़े जारी करेगा।

सरकार ने पहले बताया था कि नई सीरीज के लिए वित्त वर्ष 2022-23 को बेस ईयर के रूप में चुना गया है। नए इनपुट्स के माध्यम से संस्थागत क्षेत्रों, विशेषकर निजी कंपनियों और एमएसएमई से जुड़े क्षेत्रों में जीडीपी के अनुमानों को और मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है, जहाँ लंबे समय से डेटा की कमी रही है।