DNA: यूएई भारत का कितना महत्वपूर्ण मित्र है इसे आप इस तरह समझ सकते हैं. आज भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूएई के राष्ट्रपति का स्वागत करने सारे प्रोटोकाल तोड़कर एयरपोर्ट पर पहुंचे दोनों नेताओं ने जिस तरह एक दूसरे को गले लगाया वो बताने के लिए काफी है भारत और यूएई के नेताओं की केमिस्ट्री कितनी मजबूत है.
यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को एयरपोर्ट पर गार्ड आफ आनर दिया गया. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कार डिप्लोमेसी भी दिखी. यानी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति नाहयान एक कार में बैठकर एयरपोर्ट से बाहर गए.
आजकल दुनिया भर में कार डिप्लोमेसी बहुत ज्यादा मशहूर हो रही है. भारत में भी प्रधानमंत्री मोदी पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जर्मन चांलसर फ्रेडरिक मर्ज के साथ एक ही कार में नजर आए. ये कार डिप्लोमेसी वैश्विक नेताओं की आपसी समझ और मजबूत रिश्तों का प्रतीक बन रही है. एयरपोर्ट पर यूएई के राष्ट्रपति को रिसीव करने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने आवास में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और उनके परिवार का स्वागत किया। यानी दुनिया को संदेश दिया गया. भारत और यूएई के नेताओं के रिश्ते औपचारिक नहीं पारिवारिक संबंधों जैसे मजबूत हैं.
पीएम मोदी ने UAE के राष्ट्रपति को झूला गिफ्ट किया
प्रधानमंत्री ने UAE के राष्ट्रपति को एक रॉयल नक्काशीदार लकड़ी का झूला गिफ्ट किया. यह गुजरात का एक खूबसूरत नक्काशीदार लकड़ी का झूला है, जो गुजरात के कई परिवारों के घरों का खास हिस्सा होता है. इसमें हाथ से फूलों और पारंपरिक डिज़ाइनों को तराशा गया है, जो कुशल कारीगरी को दिखाता है. गुजराती संस्कृति में, झूला पीढ़ियों के बीच एकजुटता, बातचीत और जुड़ाव का प्रतीक है. यह तोहफ़ा UAE द्वारा 2026 को ‘परिवार का वर्ष’ घोषित करने के फैसले से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. ये झूला भी दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक है. इसके बाद भारत और यूएई के बीच वो समझौते हुए जिनके बारे में सुनकर पाकिस्तान जैसे कट्टर और आतंक के एक्सपोर्टर देश को बहुत दर्द होगा. हो सकता है पाकिस्तान के हुक्मरानों की आंखों में आंसू भी आ जाएं. क्योंकि मुस्लिम मुल्क उसको भाव नहीं दे रहे और भारत में आकर बड़े बड़े समझौते कर रहे हैं. आज आपको भारत और यूएई के बीच हुए बड़े समझौतों के बारे में भी जानना चाहिए.
दोनों देश बने कई क्षेत्रों में साझेदार
भारत और UAE ने एक Letter of Intent पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मतलब है कि दोनों देश अब रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक और गहरी साझेदारी बनाना चाहते हैं. इसके तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग..संयुक्त युद्धाभ्यास…रक्षा उपकरणों और तकनीक में साझेदारी बढ़ाई जाएगी. इसके अलावा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी तालमेल को औपचारिक रूप दिया जाएगा. मतलब अब भारत और यूएई के रक्षा संबंध नए स्तर पर पहुंच गए हैं.
दोनों देश एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में सहयोग करेंगे ये भारत की स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा रणनीति के लिए बेहद अहम है
LNG पर भारत और यूएई के बीच 10 साल का दीर्घकालिक समझौता हुआ है. अब UAE भारत को 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG प्रति वर्ष देगा. UAE अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर बन गया है.
दोनों देश AI, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर साझेदारी को बढ़ाएंगे…इस समझौते में AI को प्राथमिक क्षेत्र घोषित किया गया.
UAE की भागीदारी से गुजरात के धोलेरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, MRO सुविधा, पायलट ट्रेनिंग स्कूल शुरू होगा. यानी यूएई भारत में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश कर रहा है.
कट्टरपंथी इस मुलाकात से होंगे परेशान
आज मिडिल ईस्ट के प्रभावशाली मुस्लिम देश के नेता को दिल्ली में देखकर इन समझौतों के बारे में जानकार कई कट्टरपंथी देश बेचैन होंगे. क्योंकि यूएई और भारत की दोस्ती दोनों देशों को फायदा पहुंचाने वाली है. उनकी तिजोरियों को भरने वाली है. आज आपको दोनों देशों की इस साझेदारी के असर के बारे में भी जानना चाहिए. भारत और यूएई India-Middle East-Europe Economic Corridor यानी भारत से मिडिल ईस्ट होते हुए यूरोप तक नए व्यापार रास्ते IMEC पर काम कर रहे हैं. ये कॉरिडोर सीधे भारत के सामान को यूरोप तक पहुंचाएगा. यूएई और भारत 2030 तक व्यापार को $100 अरब पहुंचाना. चाहते थे. लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में ही द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया. यानी लक्ष्य को वक्त से पहले हासिल कर लिया गया. अब नया लक्ष्य 2032 तक 200 अरब डॉलर के व्यापार का रखा गया है.
आज आपको ये भी जानना चाहिए कि ये कमाल कैसे हुआ तो यूएई ने 2022 में भारत के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता किया था. जिसके जरिए दोनों देशों ने टैक्स घटाकर व्यापार, निवेश और सेवाओं को आसान बनाया. जिसकी वजह से 2030 का लक्ष्य 5 साल पहले हासिल कर लिया गया.
आज UAE, भारत में टॉप-5 निवेशकों में है यूएई अब तक 20 अरब डॉलर से ज्यादा का FDI भारत में लगा चुका है.
भारत UAE का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और वहां 35-40 लाख भारतीय काम कर रहे हैं, जो हर साल 15-17 अरब डॉलर रेमिटेंस भारत भेजते हैं. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है और रुपये पर दबाव कम होता है.
यूएई भारत के साथ रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग मज़बूत कर रहा है. यानी यूएई चाहता है. समुद्र में जहाज़ों, तेल-गैस और व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा भारत और यूएई मिलकर करें
यूएई की नीति मिडिल ईस्ट में बदलते power balance पर भारत से तालमेल बढ़ाने की है. यानी मिडिल ईस्ट की राजनीति में भारत और UAE मिलकर स्थिरता बनाए रखना चाहते हैं.
यूएई ने ऑपरेशन सिंदूर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले आकाश एयर डिफेंस सिस्टम में रूचि दिखाई है. अगर ये डील फाइनल हुई तो यूएई की सुरक्षा मजबूत होगी और भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट.
समझे आप जब दो देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी इतनी मजबूत होती है. तो कैसे किसी एक का नहीं बल्कि दोनों देशों का फायदा होता है….आज आपको ये भी समझना चाहिए. यूएई और भारत ने एक दूसरे का भरोसा कैसे जीता. क्यों यूएई को भारत अपना इतना महत्वपूर्ण दोस्त मानता है कि राष्ट्रपति अल नाहयान की अगवानी करने. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सारे प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट तक पहुंच गए.
यूएई सरकार ने अबू धाबी में मंदिर बनवाया
आपको यूएई में 14 फ़रवरी 2024 के दिन हुए भव्य हिंदू मंदिर के उदघाटन की तस्वीरें जरूर याद होंगी. ये मंदिर यूएई की राजधानी अबू धाबी में बनाया गया है. ये अरब क्षेत्र का पहला पारंपरिक पत्थर का हिंदू मंदिर है. जिसके लिए जमीन खुद United Arab Emirates सरकार ने दी. जो इसे ऐतिहासिक बनाता है. सोचिए एक मुस्लिम मुल्क की सरकार ने एक हिंदू मंदिर के लिए जमीन दी. इतने भव्य मंदिर का निर्माण करवाया. सनातन की शक्ति को पहचाना. उसके अनुयायियों को सम्मान किया. यही बात यूएई को दूसरे कट्टर मुल्कों से अलग करती है और भारत के साथ साथ दुनिया के दूसरे मुल्कों के भरोसे को मजबूत बनाती है. यानी आप कह सकते हैं उदारता ही यूएई को आर्थिक रूप से इतना मजबूत बनाती है कि परमाणु बम रखने वाले कट्टर इस्लामिक मुल्क भी उसके सामने झोली फैलाकर खड़े होते हैं. आज आपको ये भी जानना चाहिए कट्टरता को छोड़ने से यूएई को क्या क्या फायदा हुआ.
यूएई ने उदार नीति अपनाकर खुद को वैश्विक निवेश और व्यापार का सुरक्षित केंद्र बना लिया. आज यूएई मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा FDI यानी Foreign Direct Investment हब है. जहा हर साल 20-25 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश आता है.
धार्मिक सहिष्णुता से UAE को भारतीय और पश्चिमी वर्कफोर्स का भरोसा मिला, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत हुई. आज सिर्फ दुबई और अबू धाबी मिलकर UAE को दुनिया के टॉप-10 ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स में शामिल करते हैं. यानी UAE दुनिया के उन 10 देशों में शामिल हैं जहां से वैश्विक पैसा, निवेश और वित्तीय फैसले सबसे ज़्यादा नियंत्रित होते हैं.
कट्टर इस्लाम से दूरी बनाकर UAE ने आंतरिक स्थिरता और राजशाही की सुरक्षा सुनिश्चित की. आज UAE में एक स्थिर सरकार है और देश की GDP 500 अरब डॉलर के आसपास है, जिसमें तेल के अलावा व्यापार, रियल एस्टेट, फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स का बड़ा योगदान है.
मंदिर, चर्च और सिनेगॉग की अनुमति देकर UAE ने “Tolerance Capital” यानी सभी धर्मों को सम्मान देने वाले देश की छवि बनाई. इसी वजह से 150 से ज्यादा देशों की 5 लाख से अधिक कंपनियां UAE को अपना रीजनल या ग्लोबल बेस बनाकर काम कर रही हैं.
मिडिल ईस्ट संपन्न लेकिन ऑयल की इकोनॉमी पर निर्भर
इसका मतलब समझ रहे हैं आप उदार नीति ने UAE को मिडिल ईस्ट का स्थायी ‘किंग’ बनाया है. मिडिल ईस्ट में कई संपन्न देश हैं लेकिन ये सभी ऑयल की इकोनॉमी पर निर्भर करते हैं यानी जिस दिन तेल या तेल की जरूरत खत्म हो जाएगी. उस दिन मिडिल ईस्ट के बाकी देशों की संपन्नता भी खत्म हो जाएगी. लेकिन दुनिया का बिजनेस हब बन चुके यूएई को कोई परेशानी नहीं होगी. एक तरफ उदार यूएई है. जहां निवेश करने वालों की लाइन लगी है..दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे कट्टर मुल्क हैं..जहां निवेश का मतलब खैरात है…यानी जो पैसा लगाया..वो कभी वापस नहीं लौटा इसीलिए कोई पाकिस्तान की तरफ देखता नहीं और यूएई के विकास मॉडल को अपनाकर दुनिया भर के मुस्लिम देश अब भारत से संबंध मजबूत कर रहे हैं. इस लिस्ट में सऊदी अरब भी शामिल है. इस लिस्ट में अफगानिस्तान भी शामिल है.



