Home छत्तीसगढ़ वर्तमान परिवेश में स्वदेशी स्वावलंबन पर गोष्ठी का आयोजन

वर्तमान परिवेश में स्वदेशी स्वावलंबन पर गोष्ठी का आयोजन

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राजनांदगांव। स्वदेशी मेले के पांचवें दिन आज मंच के माध्यम से स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी मेला परिसर में वर्तमान परिवेश में स्वदेशी स्वलंबन विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई।
जिसमें जिला संयोजक श्री राजकुमार शर्मा ने उधमिता विषय पर ‌जानकारी दी.और नये उद्योग लगाने में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा लाभकारी योजनाएं की जानकारी दी .प्रोफेसर श्री कृष्णकांत द्विवेद्वी ने आम जनता में स्वदेशी वस्तुओं की प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला एवं तुलनात्मक व्याख्या की
.सामाजिक वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री अशोक लोहिया ने आदिकाल से स्वदेशी प्रचार प्रसार पर अपने वक्तव्य में जानकारी दी और लोहिया जी ने बताया कि स्वदेशी से स्वावलंबन तक’ का अर्थ है देश में बनी वस्तुओं और संसाधनों का उपयोग करके, अपने देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, जिससे राष्ट्र में समृद्धि,आत्मसम्मान और सशक्तिकरण आए, जैसा कि महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आत्मनिर्भर भारत अभियान तक देखा गया है, जहाँ स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को बढ़ावा मिलता है और भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत बनता है। विकसित राष्ट्र की कल्पना भी स्वदेशी अभियान से साकार होगी । भारत आज तेजी से प्रगति करते हुए चौथी अर्थ व्यवस्था के साथ तीसरी अर्थ व्यवस्था की ओर अग्रसर है ।
स्वदेशी और स्वावलंबन के बीच संबंध को विस्तार से बताते हुए श्री लोहिया ने कहा कि स्वदेशी अपने देश (भारत) में निर्मित उत्पादों, सेवाओं और संसाधनों को प्राथमिकता देना, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना।

विचार गोष्ठी के माध्यम से प्रो० कृष्ण कुमार द्विवेदी ने गोष्ठी मे ऐतिहासिक और समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम 1905 के बंग-भंग आंदोलन के दौरान स्वदेशी आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता के लिए एक हथियार बना, जिसने खादी और चरखे के माध्यम से आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। वर्तमान समय में प्रधानमंत्री द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘Vocal For Local’ के आह्वान ने इस भावना को पुनर्जीवित किया है, जिससे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है। आर्थिक विकास स्थानीय उद्योगों, रोजगार और निर्यात में वृद्धि हुई है । सामाजिक पहचान के रूप में सांस्कृतिक विरासत और गौरव की रक्षा होगी , इससे राष्ट्र निर्माण , सशक्तिकरण, सुरक्षा और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत करना शामिल है। स्वदेशी केवल आर्थिक स्वावलंबन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम की जीवंत भावना है।

गोष्ठी मे वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने स्वतंत्रता के पूर्व से इस दिशा में गांधी जी द्वारा भी स्वयं चरखा से बने कपड़े को पहनकर स्वदेशी का भाव जगाने की बात बताई एवं अन्य वक्ताओं के द्वारा अपने विचार रखे जिनमें में डा साधना तिवारी, सुषमा सिंह , छाया तिवारी ने अपने विचार रखे। उक्त कार्यक्रम का संचालन श्री अनिमेष रॉय ने किया इस कार्यक्रमb में बाबा जी, कांति मोर्य, अशोक जोशी,मनोज शुक्ला, सौरभ खंडेलवाल, नियामत हुड्डा, राकेश दुबे,सुनील बाजपेयी, फातिमा कांति मौर्य, सुहासनी क्षिरसागर, मंजू साहू शोभा चोपडा भी उपस्थिति रहे।