स्थानीय निवासी दीनानाथ जगत ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में हर वर्ग के लोग शराब पीते हैं, इसलिए दाम नहीं बढ़ाने चाहिए. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अब शराब कांच की बोतल के बदले प्लास्टिक की बोतल में आने वाली है, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है.
छत्तीसगढ़ में नई आबकारी नीति को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. साय सरकार द्वारा शराब पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी और आबकारी शुल्क में किए गए बड़े बदलाव ने आम लोगों के बीच भी बहस छेड़ दी है. 30 जनवरी 2026 को जारी छत्तीसगढ़ राजपत्र के अनुसार, यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी. नई अधिसूचना में देसी शराब की लैंडिंग प्राइस पर 50 प्रतिशत काउंटरवेलिंग ड्यूटी और विदेशी शराब, स्पिरिट, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक श्रेणी पर भी 50 प्रतिशत तक शुल्क निर्धारित किया गया है. सरकार के इस फैसले को लेकर अब शराब उपभोक्ताओं की राय सामने आने लगी है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शराब की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा.
स्थानीय निवासी दीनानाथ जगत ने लोकल 18 से कहा कि छत्तीसगढ़ में हर वर्ग के लोग शराब पीते हैं, इसलिए इसकी कीमत नहीं बढ़ाई जानी चाहिए. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अब शराब कांच की बोतल के बजाय प्लास्टिक बोतल में आने वाली है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है. उनका मानना है कि प्लास्टिक में मौजूद केमिकल और गर्मी के मौसम में उसका असर और भी नुकसानदेह होगा. उन्होंने सुझाव दिया कि कीमत बढ़ाने की बजाय शराब की मात्रा घटाई जाए.
शराब की कीमत कम होनी चाहिए
वहीं भगतराम ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शराब की कीमत कम होनी चाहिए न कि बढ़नी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले खुद शराब पीने की आदत को बढ़ावा दिया और अब दाम बढ़ाकर जनता पर बोझ डाल रही है. उनके अनुसार यह फैसला जनहित के खिलाफ है. महेंद्र कुमार पटेल ने मौजूदा कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि अभी प्लेन शराब 180 रुपये, गोवा ब्रांड 120 रुपये, नंबर वन 200 रुपये और बीयर करीब 200 रुपये में मिल रही है. उनका कहना है कि प्लेन शराब की कीमत कम से कम 50 से 60 रुपये होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि शराब की गुणवत्ता पहले जैसी नहीं रही जबकि कीमत लगातार बढ़ रही है.
दाम बढ़ेंगे तो मुश्किल हो जाएगा पीना
वहीं सुभाष ध्रुव ने कहा कि वह कभी-कभार शराब पीते हैं, इसलिए कीमत बढ़ने से उन्हें बहुत फर्क नहीं पड़ता. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह एक कर्मचारी हैं और सरकार से रेट कम करने की मांग खुलकर नहीं कर सकते. चंद्रशेखर यादव, जो खेती-किसानी से जुड़े हैं, ने कहा कि दिनभर की मेहनत के बाद थकान दूर करने के लिए वह शराब पीते हैं. अब अगर सरकार दाम बढ़ा देगी, तो यह उनके लिए मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि वह नंबर वन ब्रांड की शराब पीते हैं, जिसकी कीमत अभी 250 रुपये है और पिछले 12 वर्षों से शराब का सेवन कर रहे हैं लेकिन गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ है.
सरकार के फैसले को सही बताया
इसके उलट एक युवा ने सरकार के फैसले को सकारात्मक बताया. उसने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में शराब की कीमत लगातार बढ़ी है और अगर अब और बढ़ेगी तो लोग शराब कम पीएंगे. इससे नशे पर नियंत्रण होगा. उसने कहा कि अभी वह गोवा ब्रांड की शराब पीता है, जो 120 रुपये में मिलती है लेकिन यदि रेट बढ़ेगा, तो वह शराब छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा.
जनता की राय अलग–अलग
नई आबकारी नीति को लेकर जनता की राय बंटी हुई नजर आ रही है. जहां एक ओर अधिकांश लोग कीमत बढ़ने को आम आदमी पर बोझ मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे नशे पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं. अब देखना होगा कि 1 अप्रैल से लागू होने वाली इस नीति का समाज और राजनीति पर क्या असर पड़ता है.



