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छत्तीसगढ़ के स्कूल बनते जा रहे हिंसा के अड्डे : विशु अजमानी

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में स्कूली बच्चों से जुड़ी लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सामाजिक माहौल और शिक्षा परिसरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल, जिन्हें बच्चों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की नींव माना जाता है, अब असुरक्षा और भय के केंद्र बनते नजर आ रहे हैं।
राजनांदगांव जिले में एक स्कूली छात्र पर दिनदहाड़े धारदार हथियार से हमला किए जाने की सनसनीखेज घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद अभिभावकों में गहरा आक्रोश और चिंता का माहौल है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब बच्चे स्कूल जाते समय और लौटते वक्त भी सुरक्षित नहीं हैं, तो उनकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है, इसी बीच राजधानी रायपुर के आत्मानंद स्कूल में एक छात्र के पास चाकू मिलने की घटना ने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। स्कूल परिसर के भीतर इस तरह की घटनाएं सामने आना यह दर्शाता है कि सुरक्षा व्यवस्था कहीं न कहीं पूरी तरह विफल हो चुकी है। यह मामला केवल एक स्कूल या एक छात्र तक सीमित नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है। इन घटनाओं को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सचिव विशु अजमानी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि यह केवल स्कूलों में सुरक्षा की कमी का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश में लगातार बढ़ रहे नशे, हिंसा और सरकार की नीतिगत लापरवाही का सीधा परिणाम है। श्री अजमानी ने कहा बच्चों के हाथों में किताबों की जगह हथियार नजर आना बेहद खतरनाक संकेत है। यह साफ दर्शाता है कि प्रदेश में बच्चों को मिलने वाला सामाजिक और मानसिक वातावरण तेजी से बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार आंख मूंदकर बैठी है और इसका खामियाजा मासूम बच्चे भुगत रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को इन घटनाओं को अलग-थलग मामलों के रूप में देखने की भूल नहीं करनी चाहिए। यह आने वाले समय के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
प्रदेश सचिव विशु अजमानी ने सरकार से मांग की कि प्रदेश के सभी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल सुदृढ़ किया जाए, नशे के खिलाफ प्रभावी, निरंतर और जमीनी स्तर पर अभियान चलाया जाए, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की मानसिक स्थिति को समझे बिना केवल प्रशासनिक कदम पर्याप्त नहीं होंगे।
अंत में विशु अजमानी ने दो टूक कहा कि प्रदेश के बच्चों का सुरक्षित, सकारात्मक और भयमुक्त भविष्य सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।