सियासी हलचल के बीच किसानों से मुलाकात
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद कार्यालय में किसानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया।
इस बैठक पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी ने इसे ‘सुनियोजित’ करार देते हुए राहुल गांधी पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि किसानों की चिंताओं को सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
किसान संगठनों की चिंताएं
17 किसान संगठनों ने जताई आशंका
सूत्रों के अनुसार, देशभर के 17 प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि प्रस्तावित व्यापार ढांचा मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे की खेती करने वाले किसानों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
किसान नेताओं ने इस समझौते के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों की आय पर दबाव पड़ सकता है और कृषि क्षेत्र के सुरक्षा प्रावधान कमजोर हो सकते हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा ने बैठक को बताया ‘राजनीतिक’
भाजपा ने X पर साझा किए गए एक पोस्ट में बैठक की तस्वीरें जारी करते हुए दावा किया कि उपस्थित कई लोग हरियाणा और पंजाब में कांग्रेस के सहयोगी दलों से जुड़े हैं।
पार्टी ने लिखा, “राहुल गांधी का एक और झूठ देश के सामने बेनकाब हो गया। जिसे किसानों के साथ बैठक बताया जा रहा था, वह वास्तव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सभा थी। राहुल गांधी ने इस देश की लगभग हर संस्था और समुदाय का राजनीतिकरण और अपमान किया है, और अब वे किसानों को भी नहीं छोड़ रहे हैं।”
पोस्ट में आगे कहा गया, “प्रस्तुत राजनीति वास्तविक नेतृत्व का स्थान नहीं ले सकती। देश ईमानदारी का हकदार है, न कि कांग्रेस के मनगढ़ंत बयानों और राजनीतिक हथकंडों का।”
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
पीयूष गोयल ने आरोपों को बताया ‘फर्जी’
बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के आरोपों को “फर्जी” और “मनगढ़ंत” करार दिया।
वीडियो बयान में उन्होंने कहा कि यह बैठक पार्टी कार्यकर्ताओं को किसान नेताओं के रूप में पेश कर एक कृत्रिम कथा गढ़ने की कोशिश थी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने व्यापार समझौते में किसानों के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का उद्देश्य
क्या है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते का मुख्य उद्देश्य टैरिफ बाधाओं को कम करना है, साथ ही भारत की कृषि संबंधी संवेदनाओं और अमेरिका की अधिक बाजार पहुंच की मांग के बीच संतुलन बनाना है।
समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक शुल्क को 50 प्रतिशत तक के उच्च स्तर से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। इससे कपड़ा, चमड़ा, जूते और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का दावा है कि भारतीय कृषि उत्पादों का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा इस समझौते से बाहर रखा गया है, जिससे किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।



