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एंटीबायोटिक के दुरुपयोग से बढ़ रहा ‘सुपरबग’ का खतरा, भारत में मल्टी ड्रग रजिस्टेंस चिंताजनक…

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एंटीबायोटिक दवाओं के गलत और अनियंत्रित इस्तेमाल से बैक्टीरिया तेजी से ‘सुपरबग’ में बदल रहे हैं, जिससे जीवनरक्षक दवाएं भी बेअसर होती जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे एक उभरती हुई ‘मौन महामारी’ करार दिया है।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों की हालिया रिपोर्टों में भारत में मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) की बढ़ती समस्या को गंभीर खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है।

World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि एंटीबायोटिक का दुरुपयोग नहीं रोका गया तो सामान्य संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। वहीं Indian Council of Medical Research (आईसीएमआर) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कई प्रमुख संक्रमणों में मल्टी ड्रग रजिस्टेंस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका अर्थ है कि एक से अधिक एंटीबायोटिक दवाएं भी संक्रमण पर असर नहीं कर पा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना, निर्धारित अवधि पूरी न करना, पशुपालन और कृषि में इनका अंधाधुंध उपयोग तथा अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। बैक्टीरिया समय के साथ दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे वे अधिक खतरनाक और इलाज में कठिन हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने भी हाल के संबोधन में एंटीबायोटिक प्रतिरोध को ‘मौन महामारी’ बताते हुए नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी लापरवाहियां भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल संक्रमण में प्रभावी होती हैं, जबकि वायरल बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम या फ्लू में इनका कोई लाभ नहीं होता। इसके बावजूद कई लोग मामूली बीमारी में भी एंटीबायोटिक का सेवन कर लेते हैं, जिससे प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित होती है।

इस खतरे से निपटने के लिए तीन प्रमुख उपाय सुझाए गए हैं-सही उपयोग, उचित निपटान और व्यापक जागरूकता। मरीजों को चाहिए कि वे केवल पंजीकृत चिकित्सक की सलाह पर ही एंटीबायोटिक लें और पूरा कोर्स निर्धारित समय तक पूरा करें। बची हुई दवाओं को इधर-उधर फेंकने या दोबारा बिना सलाह के इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस (एएमआर) पर निगरानी बढ़ाने और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। साथ ही, जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग के प्रति सचेत किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में साधारण संक्रमण भी घातक साबित हो सकते हैं। इसलिए एंटीबायोटिक का समझदारी से उपयोग ही इस बढ़ते खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।