छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा प्रयास तेज कर दिये गये हैं।
छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा प्रयास तेज कर दिये गये हैं। इसके लिये 32 हजार 100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं के लिये विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं। इन परियोजनाओं में 12 हजार 100 मेगावाट ताप विद्युत, 4 हजार 200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2 हजार 500 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर और 13 हजार 300 मेगावाट पंप स्टोरेज क्षमता शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता साफ हो गया है। इसमें कई प्रमुख संस्थाएं की भी भागीदारी है। ये बातें छत्तीसगढ़ ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने गुरुवार को नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर जानकारी शेयर करते हुए कहीं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में शानदार प्रगति हुई है। आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी तथा निजी उत्पादकों को मिलाकर प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30 हजार 671.7 मेगावाट है। इसमें 28 हजार 824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत तथा सोलर, बायोमास आदि स्रोतों से 2,047 मेगावाट क्षमता शामिल है। ताप विद्युत क्षेत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की 2,840 मेगावाट, एनटीपीसी व निजी स्वामित्व के बिजलीघरों की 20 हजार 299 मेगावाट तथा कैप्टिव पॉवर प्लांट्स की 5 हजार 266 मेगावाट क्षमता है।
ताप विद्युत पर निर्भरता कम करने पर फोकस
आईएएस डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार का फोकस ताप विद्युत पर निर्भरता कम कर कार्बन उत्सर्जन घटाने पर है। नेट जीरो कार्बन लक्ष्य के तहत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय स्रोतों से पूरी की जा सके। इस दिशा में जल विद्युत एवं पंप स्टोरेज परियोजनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगी।
पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा
राज्य शासन के पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नीति 2023 लागू की गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों का चिन्हांकन किया गया है, जिनमें से पांच के फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और डीपीआर निर्माणाधीन है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
यादव ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के तहत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड एवं राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम की ओर से लगभग 2 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें अटल बिहारी ताप विद्युत गृह के जलाशय में 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर, कोरबा पूर्व के बंद राखड़ बांध पर 32 मेगावाट सौर संयंत्र तथा 500 मेगावाट-ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना प्रस्तावित है।
कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयां
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की तरफ से कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों एवं मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। पारेषण क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच उपकेन्द्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है। ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा 132 केवी लाइनों में पुराने कंडक्टरों को उच्च क्षमता वाले एचटीएलएस कंडक्टर से बदला जा रहा है। साथ ही 5 हजार 200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर का इंस्टॉलेशन पूर्ण कर 131 उपकेन्द्रों को डिजिटल संचार नेटवर्क से जोड़ा गया है।
उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक ज्यादा
ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो गई है। विगत दो वर्षों में हजारों किमी नई लाइनें, उपकेन्द्र एवं ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम, डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना एवं बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विद्युतीकरण हेतु नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत सैकड़ों गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है।
रायपुर में अंडरग्राउंड केबल योजना
ऊर्जा सचिव ने बताया कि राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में ओवरहेड लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। इसे लेकर रायपुर में 7,600 करोड़ और बिलासपुर में 3,100 करोड़ रुपये का बजट अनुमानित है।
पीएम सूर्यघर योजना के लिए सवा लाख लोगों ने कराया पंजीयन
प्रदेश में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के व्यापर पैमाने पर प्रचार-प्रसार का असर देखने को मिल रहा है। योजना के तहत 1.32 लाख पंजीयन हुआ हैं। 8.30 लाख किसानों को कृषि पंपों पर सब्सिडी, 14.99 लाख बीपीएल उपभोक्ताओं को 30 यूनिट मुफ्त बिजली और मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक खपत पर रियायत दी गई है।
नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज पर कार्य
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 2000 MWh बैटरी स्टोरेज सिस्टम 2027-28 तक स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही सोलर सिंचाई, सोलर पेयजल और सोलर हाईमास्ट योजनाओं के तहत हजारों इकाइयां स्थापित की जायेगी।
तीन वर्षों की कार्य योजना पर डाला प्रकाश
वहीं क्रेडा की उपलब्धियों पर ऊर्जा सचिव ने बताया कि विगत दो वर्षों में 26 हजार 794 सोलर सिंचाई पंप, 7 हजार 833 सोलर पेयजल पंप तथा 1 हजार 709 सोलर हाईमास्ट स्थापित किए गए हैं। आगामी वर्षों में ऑफग्रिड सोलर प्लांट्स एवं रूफटॉप सौर संयंत्रों के विस्तार की कार्ययोजना पर भी कार्य जारी है। डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में संतुलित मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण एवं नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान पत्रकारों के सवालों के भी विस्तृत उत्तर दिए और विभाग की आगामी 03 वर्षों की कार्य योजना साझा की।



