होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है, जो फाल्गुन शुक्ल की अष्टमी से होलिका दहन तक रहता है. इस समय मांगलिक कार्य नहीं होते हैं. होलाष्टक के आठ दिनों को लेकर ऐसी मान्यता है कि, इस समय ग्रह उग्र रहते हैं और नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है.
खासकर जिन लोगों के घर छोटे बच्चे हों, उन्हें होलाष्टक की अवधि में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. ये बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं. इसलिए होलाष्टक को लेकर बहुत अधिक डरने या घबराने के बजाय आपको बस सतर्क रहने की जरूरत है.
होलाष्टक के दिनों में छोटे बच्चों को शाम या अंधेरा होने के बाद घर के बाहर अकेला न छोड़े. हो सके तो शाम के बाद घर के बाहर न ले जें. बच्चे के बदन को ढककर रखें और मान्यता के अनुसार काला टीका लगा सकते हैं.
सूर्यास्त के बाद छोटे बच्चों के कपड़े बाहर या छत के ऊपर न सुखाएं. अगर बच्चा बाहर से खेलकूद कर आए तो सबसे पहले उसके कपड़े बदलें और हाथ-पैर साफ करें.
होलाष्टक के दिनों में चौराहे (चार रास्ते वाले सड़क) पर छोटे बच्चों के साथ अधिक देर तक न रुके. बच्चा चिड़चिड़ा लगे या उसके स्वभाव में बदलाव लगे तो आप नजर से बचाव के पारंपरिक उपाय जैसे नमक, लाल मिर्च या पीली सरसों से नजर उतार सकते हैं.
होलाष्टक के समय छोटे बच्चों का नामकरण, मुंडन, कर्णवेध संस्कार, अन्नप्राशन आदि जैसे समारोह न करें. इन कार्यों को होली के बाद कर सकते हैं.



