16 मार्च को राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव होना है. इसमें कांग्रेस के 5 सांसदों का चुना जाना तय माना जा रहा है. चार सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, फूलो देवी नेताम, केटीएस तुलसी और रजनी पाटिल का कार्यकाल खत्म हो रहा है.
ऐसे में 5 मार्च को नामांकन की अंतिम तारीख से पहले टिकट पाने की होड़ मची है. इस बीच आइए जानते हैं कि छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, बिहार, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और असम से ओडिशा तक का सियासी गणित कैसा है.
सबसे पहले बात करते हैं छत्तीसगढ़ की, सत्ता से बाहर होने के बाद इस बार कांग्रेस यहां दो के बजाय एक सीट ही जीत सकती है. ऐसे में उसके सामने आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को रिपीट करने का ऑप्शन है. वहीं ओबीसी नेता भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव की भी इसी सीट पर नजर है. ऐसे में केटीएस तुलसी का रिपीट होना मुश्किल माना जा रहा है.
हिमाचल प्रदेश:
यहां पार्टी एक सीट जीतने की स्थिति में है. ऐसे में लोकसभा चुनाव हारे दो दिग्गज आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह प्रमुख दावेदार हैं. पिछली बार यहां से क्रॉस वोटिंग के चलते अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए थे. इसलिए इस बार बाहरी के बजाय स्थानीय नेता को तरजीह दी जा सकती है.
हरियाणा:
यहां से भी पार्टी एक सीट जीत सकती है. हुड्डा की पसंद की में राजबब्बर, पूर्व अध्यक्ष उदयभान(दलित) हैं, तो वहीं आलाकमान ओबीसी के राष्ट्रीय चैयरमैन अनिल जयहिंद या फिर मीडिया विभाग से पवन खेड़ा या सुप्रिया श्रीनेत को भेजना चाहता है.
महाराष्ट्र:
यहां से महाविकास अघाड़ी के शरद पवार, फौजिया खान और प्रियंका चतुर्वेदी, रजनी पाटिल का कार्यकाल खत्म हो रहा है. एकजुट होकर विपक्ष एक सीट ही जीत सकता है. ऐसे में शरद पवार एनसीपी के विलय की बात साफ कर दें और वो जाना चाहें तो कांग्रेस उनको समर्थन दे देगी. अन्यथा वो अपना उम्मीदवार उतारने पर जोर देगी. ऐसे में वो रजनी पाटिल को रिपीट करना चाहेगी.
तेलंगाना:
यहां से कांग्रेस दो सीटें जीत सकती है. माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी से किया वादा पूरा कर सकती है. वहीं अभिषेक मनु सिंघवी का रिपीट होना तय है. हालांकि, आंध्र और तेलंगाना की स्थानीय सियासत के चलते आंध्र से आने वाले रेड्डी को तेलंगाना से भेजने पर विरोध के स्वर भी हैं. ऐसे में वहां से किसी अल्पसंख्यक को टिकट मिल सकता है.
तमिलनाडु:
यहां पार्टी डीएमके की मदद से एक सीट जीत सकती है लेकिन डीएमके और कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर तनाव चल रहा है. ऐसे में पार्टी चाहती है कि यहां से राहुल के करीबी प्रवीन चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया जाए लेकिन विजय के साथ तालमेल की वकालत और स्टालिन सरकार को घेरने वाले चक्रवर्ती को स्टॉलिन कतई पसंद नहीं करते. ऐसे में पवन खेड़ा या सुदर्शन रेड्डी की यहां से लाटरी लग सकती है.
बिहार:
यहां से अगर पूरा विपक्ष एकजुट हो और उसे ओवैसी की पार्टी का भी साथ मिले तो वो एक सीट जीत सकता है. मगर, विपक्ष को डर है कि अपनी ताकत और सत्ता के दम पर एक सीट भी उसका जीतना मुश्किल हो जाएगा. उल्टे महज एक सीट के लिए जिस एआईएमआईएम को वो बीजेपी की बी टीम कहता रहा है उससे हाथ मिलाने की तोहमत भी लगेगी. साथ ही विपक्ष को अपने लोगों से ही भितरघात का भी खतरा है.
असम:
यहां भी कमोबेश बिहार जैसी ही हालात है. कांग्रेस यहां एआईयूडीएफ के साथ मिलकर एक सीट जीत सकती है. मगर, चुनाव सिर पर हैं और वो अरसे से एआईयूडीएफ को बीजेपी की बी टीम और हिमंता की साथी बताती आई है. ऐसे में उसका साथ लेना उसे असहज करता है. वहीं हाल में पूर्व अध्यक्ष भूपेन वोरा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उसे खुद क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है.
ओडिशा:
यहां कांग्रेस और नवीन पटनायक मिलकर एक सीट जीत सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, दून स्कूल के पटनायक के साथी कमलनाथ इस बावत पटनायक को मना भी सकते हैं. मगर, कांग्रेस और पटनायक के साथ आने पर बीजेपी को दोनों को घेरने का मौका मिलेगा. वहीं, कांग्रेस और बीजेडी में मुख्य विपक्षी दल कौन की लड़ाई कमजोर होगी.
कुल मिलाकर कांग्रेस के पास राज्यसभा के फल कम हैं और उसको खाने की चाहत रखने वाले ज्यादा. वहीं कई जगहों पर सियासी समीकरणों के चलते उसके लिए अंगूर खट्टे साबित हो सकते हैं.



