ईरान-इजराइल के बीच 8 महीने बाद फिर जंग छिड़ गई है. अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया. जवाब में ईरान ने भी इजराइल समेत अमेरिका के 7 सहयोगी देशों पर हमले किए हैं. ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी भी दे चुका है.
वह हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर में जहाजों पर हमले भी तेज करा सकता है. इन दोनों जलडमरूमध्यों की नाकाबंदी से भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ सकता है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. यह ओमान और ईरान के बीच स्थित संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है.
यह स्ट्रेट 161 किमी लंबा और अपने सबसे संकरे बिंदु पर सिर्फ 33 किमी चौड़ा है. वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का 27% होर्मुज स्ट्रेट से होता है. वैश्विक तेल उत्पादन का 20.5 फीसदी यहां से गुजरता है. हर दिन 20 मिलियन बैरल तेल इस रूट से गुजरता है. इसके साथ ही ग्लोबल LNG व्यापार का 22% यहां से गुजरता है. सऊदी अरब, ईरान, UAE, कुवैत और इराक अपना ज्यादातर तेल इसी मार्ग से निर्यात करते हैं. फरवरी 2026 में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किया और अस्थायी रूप से कुछ घंटों के लिए स्ट्रेट के हिस्सों को बंद कर दिया था.
भारत पर सीधा प्रभाव
भारत होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का 88% से अधिक तेल आयात करता है. भारत के कच्चे तेल आयात का 40-50% होर्मुज स्ट्रेट से होता है. भारत की LNG सप्लाई का 40-60% इस मार्ग से आता है. 2024 में कतर ने अकेले लगभग 10 मिलियन टन LNG भारत को दिया. भारत सालाना लगभग 2 बिलियन बैरल तेल आयात करता है. तेल की कीमत में हर 1 डॉलर के इजाफे से भारत के वार्षिक आयात खर्च में लगभग 2 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी होती है.
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं. सबसे खराब स्थिति में 130 डॉलर प्रति बैरल भी पार कर सकती हैं. फरवरी 2026 में ब्रेंट क्रूड पहले ही 71 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है, जो एक महीने में 12% से अधिक की बढ़ोतरी है. बढ़ते आयात खर्च से चालू खाता घाटा बढ़ेगा और रुपया कमजोर होगा.
लाल सागर में हूती हमलों का दोहरा खतरा
यमन में हूती विद्रोही नवंबर 2023 से लाल सागर और बाब अल-मंदब स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाजों पर हमले कर रहे हैं. यह क्षेत्र एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का एक और अहम मार्ग है. ग्लोबल ऑयल शिपमेंट का 12% और ग्लोबल सी रूट का 10% स्वेज नहर के माध्यम से होता है. बाब अल-मंदब स्ट्रेट कंटेनर शिपिंग के लिए होर्मुज स्ट्रेट की तरह महत्वपूर्ण है. वैश्विक कंटेनर शिपिंग का 25-30% स्वेज नहर से गुजरता है. हूतियों ने कहा है कि वे तब तक हमले जारी रखेंगे, जब तक इजराइल गाजा युद्ध बंद नहीं करता. अब ईरान-इजराइल युद्ध के साथ हूती हमले और तेज हो सकते हैं.
किसे मिलेगा फायदा?
अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद करता है और हूती लाल सागर में हमले तेज करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए जोखिम को कई गुना बढ़ा देगी. ईरान-इजराइल युद्ध से भारत को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है. होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में व्यवधान से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, मुद्रास्फीति बढ़ सकती है.
अमेरिका तेल के मामले में आत्मनिर्भर है और तेल निर्यात भी करता है. इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला को अपने नियंत्रण में ले लिया है. यदि होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है तो तेल की कीमतें दोगुनी हो सकती हैं. एशिया (चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया) और यूरोप सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. इसका फायदा अमेरिका की तेल कंपनियां उठाएंगी.



