Home समाचार Ramadan Special: इस्लाम का अहम फर्ज है ‘जकात’, रमजान में क्यों बढ़...

Ramadan Special: इस्लाम का अहम फर्ज है ‘जकात’, रमजान में क्यों बढ़ जाता है इसका महत्व…

4
0

“Ramadan Special: इस्लाम का अहम फर्ज है ‘जकात’, रमजान में क्यों बढ़ जाता है इसका महत्व”

”माह-ए-रमजान का मुकद्दस महीना चल रहा है. रोजेदार नियमित रूप से रोजा रख रहे हैं और धीरे-धीरे रमजान अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचने वाला है. रमजान का महीना अल्लाह की इबादत, संयम, रोजा, नमाज, कुरान के लिए खास माना जाता है.”

रमज़ान के बारे में 15 रोचक तथ्य | इस्लामिक रिलीफ यूके

”इसी के साथ इस महीने जकात का महत्व भी बढ़ जाता है. जकात का अर्थ होता है ‘दान’, लेकिन जकात देने के कुछ नियम होते हैं.”

इस्लाम का अहम फर्ज है जकात

”इस्लाम धर्म में मुख्य रूप से 5 फर्ज (स्तंभ) हैं, जिसमें जकात भी एक है. जकात का अर्थ होता है अपनी कमाई का एक निश्चित हिस्सा जरूरतमंदों और गरीबों में बांटना. जकात देना सिर्फ दान नहीं है, बल्कि यह बहुत ही सवाब का काम है, जिसे इस्लाम में धार्मिक कर्तव्य माना जाता है. इसलिए हर सक्षम मुसलमान पर जकात अदा करना फर्ज है. खासतौर पर रमजान में जकात का महत्व अन्य दिनों की अपेक्षा कई गुणा बढ़ जाता है. क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि, रमजान में किए कामों का 70 गुणा अधिक सवाब मिलता है.”

Zakat Donation Ideas: 10 Ways To Give Back And Help Others

”इस्लाम में ऐसी मान्यता है कि, अल्लाह ने अपने बंदों को जो भी दौलत और नेमतें प्रदान की हैं, उनमें गरीब और जरूरतमंदों का भी हक है. इसलिए जकात देने से न केवल जरूरतमंदों की मदद होती है, बल्कि देने वाले की संपत्ति भी पाक और पवित्र मानी जाती है.”

Ramadan 2026 Special: रमजान में बीमार पड़ने पर दवा लेना सही या गलत, क्या इससे रोजा टूट जाएगा?

जकात के नियम भी जान लें

”इस्लामिक जानकारों के अनुसार, जकात हर उस मुसलमान पर फर्ज है, जो कि हैसियतमंद या सक्षम हो. व्यक्ति अपने पूरे साल की कुल बचत का ढाई प्रतिशत (2.5%) हिस्सा जकात के रूप में दान करना चाहिए. लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि, जकात केवल उसी को दें जो वाकई जरूरतमंद,गरीब या कमजोर वर्ग से हो. जकात का मुख्य उद्देश्य समाज में आर्थिक संतुलन बनाए रखना और जरूरतमंदों की मदद करना है.”

इस्लामी दान - ज़कात दान | ऑनलाइन भुगतान करें

”इसके अलावा जिन लोगों के पास गहने के रूप में संपत्ति होती है, वे उसकी कीमत के हिसाब से जकात निकालते हैं. वैसे तो आप पूरे साल में कभी भी जकात दे सकते हैं. लेकिन अधिकतर लोग ईद से पहले जकात देते हैं. इसका कारण यह भी है कि, रमजान और ईद के दिनों में खाने-पीने का खर्च बढ़ता जाता है. नए कपड़े, फल, सवईंया आदि के लिए पैसों की जरूरत होती है. जकात देने से गरीब भी ईद की खुशियों में शामिल हो पाते हैं.”

नबी की सुन्नत

“”हदीस के अनुसार, मुहम्मद रमजान में बहुत ज्यादा सखावत यानी दान करते थे. इसलिए मुसलमान उनकी सुन्नत पर अमल करते हुए रमजान के पाक महीने में अधिक से अधिक जकात और फितरा देना चाहिए.”

” Ramadan 2026: रमजान के आखिरी दिनों में खुद को इन नेक कामों में मशगूल करें मुसलमान, मिलेगा सवाब”