Nitish Kumar Resignation CM: बिहार की राजनीति इस समय एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो पिछले दो दशकों से राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे हैं अब देश की राजधानी दिल्ली की राजनीति में लौटने की तैयारी कर चुके हैं।
वे राज्यसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अभी तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार अपनी कुर्सी कब छोड़ेंगे?
क्या वे किसी संवैधानिक मजबूरी में हैं या फिर 13 अप्रैल तक चलने वाले ‘खरमास’ के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं? आइए विस्तार से समझते हैं कि सीएम पद से इस्तिफा देने के क्या हैं नियम?
What do The Constitutional Rules Say: सीएम पद से इस्तिफा देने के लिए क्या हैं संवैधानिक नियम?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101 (2) के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद (लोकसभा/राज्यसभा) और राज्य विधानमंडल (विधानसभा/विधान परिषद) का सदस्य नहीं रह सकता। यदि कोई सदस्य दोनों सदनों के लिए चुन लिया जाता है, तो उसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर एक पद से इस्तीफा देना होता है।
प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950′ के अनुसार, दो सदनों का सदस्य होने पर व्यक्ति को 14 दिनों के भीतर एक पद छोड़ना पड़ता है। यह 14 दिनों की समय सीमा ‘निर्वाचन की तिथि’ से नहीं, बल्कि चुनाव परिणामों के गजट नोटिफिकेशन(राजपत्र प्रकाशन) की तिथि से शुरू होती है।
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चूंकि नीतीश कुमार के राज्यसभा निर्वाचन का गजट नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं हुआ है इसलिए तकनीकी रूप से वे अभी विधान परिषद सदस्य (MLC) और राज्यसभा सांसद दोनों बने रह सकते हैं। यही कारण है कि वे अभी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हैं।
क्यों अब तक CM पद पर बने हैं नीतीश कुमार? क्या ‘खरमास’ है इस्तीफे में बाधा?
बिहार की राजनीति में शुभ-अशुभ और मुहूर्त का बड़ा महत्व रहा है। फिलहाल ‘खरमास’ का महीना चल रहा है जो 13 अप्रैल को समाप्त होगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, खरमास में कोई भी नया या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। बीजेपी नेतृत्व वाली नई सरकार का गठन एक बड़ा अवसर है और माना जा रहा है कि बीजेपी जो हिंदुत्व पार्टी के रुप में पहचान रखती है वो खरमास के दौरान शपथ ग्रहण जैसा शुभ कार्य नहीं करना चाहती।
यही वजह है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन को 14 अप्रैल या उसके बाद के लिए टाला जा रहा है। दूसरी ओर JDU पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक नहीं चाहते हैं कि नीतिश कुमार बिहार छोड़ कर दिल्ली जाएं ऐसे में एक दांव यहां भी फंसा हुआ है। 9 अप्रैल को राज्यसभा के पांच सदस्यों का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है, जो नीतीश के दिल्ली प्रस्थान के लिए सही समय माना जा रहा है।
बिहार में ‘बीजेपी सीएम’ का क्या है नया फॉर्मूला?
नीतीश कुमार के जाने के बाद बिहार में पहली बार बीजेपी का अपना मुख्यमंत्री होगा। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सरकार गठन का नया फॉर्मूला मिल गया है। सीएम की रेस में सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय जैसे दिग्गजों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत को राजनीति में लॉन्च करते हुए उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। उनके साथ जेडीयू के किसी अन्य वरिष्ठ नेता को भी दूसरा डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। वही बीजेपी और जेडीयू के बीच 15-15 मंत्रियों का फॉर्मूला तय होने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश अपनी विदाई को ‘यादगार’ बनाना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके जाने के बाद भी बिहार में जेडीयू का सांगठनिक ढांचा और जनाधार मजबूत बना रहे। 21 साल पहले नीतीश सांसद रहते हुए बिहार के सीएम बने थे, और अब 21 साल बाद वे सीएम की कुर्सी छोड़कर वापस संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) जा रहे हैं।



