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Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पूरी, करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटे; चुनाव से पहले बड़ा बदलाव…

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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है. विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के पूरा होने के बाद करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं

यह प्रक्रिया न्यायिक अधिनिर्णय के बाद सोमवार मध्यरात्रि को पूरी हुई, जिससे राज्य की चुनावी तस्वीर में बड़ा असर पड़ने की संभावना है.

न्यायिक अधिनिर्णय के बाद बढ़ा आंकड़ा

मुख्य चुनाव अधिकारी पश्चिम बंगाल के अनुसार, कुल 6006675 मामलों को न्यायिक जांच के लिए भेजा गया था. इनमें से 5984512 मामलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और न्यायिक अधिकारियों द्वारा ई-हस्ताक्षर भी कर दिए गए हैं. इन मामलों में से 2716393 मतदाताओं को हटाए जाने योग्य पाया गया, जिसके बाद कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या बढ़कर 9083345 हो गई है. हालांकि, 22163 मामलों में अभी ई-हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है, जिससे यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.

मतदाता सूची में लगातार बदलाव

SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले, नवंबर में राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 76637529 थी. दिसंबर में जारी मसौदा सूची में 5820899 नाम हटाए गए थे. इसके बाद 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या बढ़कर 6366952 हो गई. अब न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 91 लाख तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है.

अपील का मिलेगा अवसर

जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने योग्य पाए गए हैं, उन्हें अपील का अधिकार दिया गया है. इसके लिए राज्य में 19 अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोग अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ चुनौती दे सकते हैं.

इन जिलों में सबसे ज्यादा असर

जिलावार आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा नाम अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले से हटाए गए हैं, जहां कुल 455137 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए. इसके बाद उत्तर 24 परगना में 325666 और मालदा जिले में 239375 नाम हटाए गए हैं. इन जिलों में बड़े पैमाने पर बदलाव ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से आगामी विधानसभा चुनाव पर सीधा असर पड़ सकता है. यह मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच विवाद का कारण भी बन सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं. अब सभी की नजर अंतिम आंकड़ों और संभावित अपीलों पर टिकी है. अगर बड़ी संख्या में अपीलें दायर होती हैं और कुछ नाम बहाल होते हैं, तो मतदाता सूची में एक बार फिर बदलाव संभव है.